ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

महान कन्धों पर

हमारी कथा-कहानियों में, ऐतिहासिक एवं कालपनिक दोनो रूपों में, विशलकाय मानवों का विशेष स्थान रहा है। ऐतिहासिक भीमकाय गोलियत से लेकर कालपनिक कहानी "Jack and the Beanstalk" के राक्षस तक, इन विशल देह वाले मानवों से हम रोमांचित होते रहे हैं।

कभी कभी हम किसी सामन्य शरीर वाले मनुष्य को भी महामानव के रूप में देखते हैं क्योंकि उसने कुछ असाधारण काम किये होते हैं, इसलिये हम उन्हें महान मानते हैं। ऐसे ही एक महान व्यक्ति थे १७वीं शताब्दी के मशहूर भौतिकशास्त्री सर आइज़क न्यूटन। वे एक मसीही विश्वासी थे और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने से पहले आए महान लोगों को दिया, उन्होंने कहा "यदि मैं कुछ आगे देख सका हूं तो यह संभव हुआ मेरा महान लोगों के कंधों पर चढ़ पाने के द्वारा।" न्यूटन भी ऐसे ही महान व्यक्तितव बन गए जिनके कंधों पर उनके बाद के वैज्ञानिक चढ़ सके और उनके अविष्कारों के सहारे अन्तरिक्ष की यात्रा संभव हो सकी।

जब परमेश्वर ने यहोशु को इस्त्राएलियों को वाचा की भूमि में ले जाने की आज्ञा दी, तब भी यहोशु के पास सहारे के लिये महान कन्धे थे - वह ४० साल तक परमेश्वर के सेवक मूसा द्वारा इस्त्राएलियों की अगुवाई को देखता रहा था और उससे सीखता रहा था, अब समय था कि जो उसने सीखा उसे कार्यान्वित करे। यहोशु के पास एक लाभ की बात और थी - परमेश्वर के साथ उसकी संगति। अर्थात अब उसके पास मूसा का उदाहरण और परमेश्वर की संगति दोनो थे जो इस्त्राएलियों को वाचा की भूमि में लेजाकर बसाने में उसकी सहायता करते।

भविष्य की अनिश्चितता का सामना करने के लिये क्या आप किसी सहारे की तलाशा में हैं? किसी ऐसे महान व्यक्तित्व का अनुसरण कीजीए जो इस राह चला हो, और इस अनुसरण में परमेश्वर की संगति को भी अपने साथ ले लीजिए। पौलुस ने कहा "तुम मेरी सी चाल चलो जैसे मैं मसीह की सी चाल चलता हूँ" (१ कुरिन्थियों ११:१); प्रभु यीशु मसीह और बाइबल के विश्वासियों के उदाहरण आपको सही राह पर लेकर चलेंगे। - डेनिस फिशर


अच्छा उदाहरण वह है जो मार्ग जानता हो, मार्ग पर चलता हो और मार्ग दिखाता हो।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना १४:६


तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा, जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। - यहोशू १:५


बाइबल पाठ: यहोशु १:१-९

यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा,
मेरा दास मूसा मर गया है, सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं।
उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं।
जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा।
तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा, जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।
इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा, क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ होकर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना, और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा।
व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ५०-५२
  • १ थिसुलिनीकियों ५

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

मृत्यु पर जय

मसीही विश्वास द्वारा हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन को जीने की शैली में परिवर्तन आता है, परन्तु इस विश्वास की अन्तिम परीक्षा होती है मृत्यु के समक्ष हमारी प्रतिक्रीया से।

जब हम अपने किसी सह-विश्वासी की मृत्यु उप्रांत, उसकी याद में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लेने जाते हैं, तो हम एकत्रित होते हैं एक विश्वास के योद्धा को आदर देने जिसके जीवन ने बहुत से जीवनों को आशीशित किया। इन सभाओं मे जो कहा जाता है वह अकसर परमेश्वर के प्रति धन्यवाद और परमेश्वर की प्रशंसा होता है न कि किसी व्यक्ति की बड़ाई। ये सभाएं हमारे प्रभु द्वारा मृत्यु और कब्र पर प्राप्त जय की गवाही और परमेश्वर को महिमा देने का अवसर होतीं हैं (१ कुरिन्थियों १५:५४-५७)।

लेखक आर्थर पोरिट, इंग्लैण्ड के एक कट्टर नास्तिक चार्ल्स ब्रैड्लॉफ के अन्तिम संसकार में शामिल हुए। वहां से लौटकर उन्होंने अपने अनुभव का बयान किया: "वहां, कब्र पर न कोई प्रार्थना करी गई, न किसी ने कुछ कहा। उसके मृत शरीर को एक हलके से कफन में डाल कर, उसे जल्दी से कब्र में उतार दिया गया, मानो सड़े-गले मांस को नज़रों से दूर करने की जल्दी हो। मैं वहां से बहुत आहत और स्तब्ध होकर लौटा। तब मुझे एहसास हुआ कि मृत्यु के साथ इन्सानी व्यक्तित्व के समाप्त हो जाने पर विश्वास करने और मृत्यु के बाद के जीवन का इंकार करने से मृत्यु को कैसी भयानक विजय मिलती है।"

लेकिन मसीही विश्वासीयों के लिये ऐसा नहीं है क्योंकि वे मृत्यु के पश्चात अपने प्रभु से आमने-सामने मिलने और फिर उसकी संगति में रहने, तथा अन्ततः शरीरों के पुनरुत्थान पर विश्वास करते हैं (१ कुरिन्थियों १५:४२-५५, १ थिसुलिनीकियों ४:१५-१८)। मृत्यु उनके लिये अन्त नहीं है वरन एक अनन्त स्वर्गीय आनन्द का आरंभ है।

क्या आपका विश्वास आपको मृत्यु पर जय में आनन्दित होने का कारण देता है? - वेर्नन ग्राउंडस


क्योंकि मसीह जीवित है, इसलिये उसके विश्वासी भी जीवित रहेंगे।

बाइबल पाठ: १ थिसुलिनीकियों ४:१३-१८

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो, ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाई शोक करो जिन्‍हें आशा नहीं।
क्‍योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्‍हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।
क्‍योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
क्‍योंकि प्रभु आप ही स्‍वर्ग से उतरेगा, उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्‍द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।
एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४७-४९
  • १ थिसुलिनीकियों ४

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

हमारे मार्ग का रक्षक

पिछले पतझड़, मैं और मेरी पत्नी अपने घर के निकट एक घुमावदार पहाड़ी रास्ते पर कार से जा रहे थे। रास्ते में, हमारे सामने भेड़ों का एक बड़ा झुंड हमारी ओर आता दिखाई दिया, एक अकेला चरवाहा उनके आगे आगे चल रहा था और उसके साथ भेड़ों की रखवाली करने वाले कुते भी थे। वह उन्हें ग्रीष्म काल की चरागाहों से निकालकर, आने वाली शीत ॠतु के लिये सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा था। हमने कार सड़क के किनारे खड़ी कर ली और जब तक वह झुंड हमारे इर्द-गिर्द होकर निकलता हुआ आंखों से ओझल नहीं हो गया हम उसे देखते रहे। फिर मेरे मन में प्रश्न आया - "क्या भेड़ें भी बदलाव से, नई जगहों पर जाने से डरती हैं?"

जैसा अधिकतर बुज़ुर्ग लोग करते हैं, मुझे अपने ’बाड़े’ में ही रहना पसन्द है जहां मुझे जाने पहचाने लोग और स्थान दिखते रहें। परन्तु आजकल सब कुछ बदल रहा है, मुझे नए और अन्जान स्थानों पर जाना पड़ता है। मन में प्रश्न उठते हैं कि आते दिनों में कौन सी नई सीमाएं मुझे लांघनी पड़ेंगी? कौन से नए और बेनाम डरों का सामना करना पड़ेगा? ऐसे में यूहन्ना १०:४ में प्रभु यीशु द्वारा कहे गए शब्द तसल्ली देते हैं "जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है"

आते वर्ष में या उसके बाद हमारे लिये जो कुछ भी रखा हो, हमारा चरवाहा जानता है कि हमें किस मार्ग से जाना है और वह हमारे आगे आगे चलता है, इसलिये हमें भविष्य के लिये चिंतित होने की आवश्यक्ता नहीं है। वह हमारी सीमाएं और क्षमताएं जानता है, इसलिये हमें कभी ऐसे मार्गों पर नहीं लेकर चलेगा जो हमारे लिये खतरनाक या कठिन हों या जिनमें उसकी सहयाता हमारे साथ न हो।

वह हमारे लिये हरियाली चारगाहों और स्वच्छ जल के मार्ग को जानता है, बस हमें उसके पीछे पीछे चलना है। - डेविड रोपर


जो भविष्य हमारे लिये अन्जान है वह हमारे सर्वज्ञाता परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित है।

जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं। - यूहन्ना १०:४


बाइबल पाठ: यूहन्ना १०:१-६

मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्‍तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।
परन्‍तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है।
उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्‍द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।
और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं।
परन्‍तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्‍तु उस से भागेंगी, क्‍योंकि वे परायों का शब्‍द नहीं पहचानतीं।
यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्‍तु वे न समझे कि ये क्‍या बातें हैं जो वह हम से कहता है।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४५, ४६
  • १ थिसुलिनीकियों २

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010

शांत हो जाओ

मैं अपने दांतों के इलाज के लिये दन्त चिकित्सक के पास गया। मुझे इलाज के लिये उसकी विशेष कुर्सी पर बैठना था, और मैं घबरा रहा था। मेरे चेहरे और मेरे हाव-भाव से मेरी घबराहट साफ झलक रही थी। मुझे देख कर द्न्त चिकित्सक ने मुस्कुराते हुए कहा, "बिल, सब ठीक है; ज़रा शान्त रहने की कोशिश करो।"

ऐसा करना आसान नहीं है, वास्तव में यह बहुत कठिन है - कोशिश करना, जिसमें प्रयास और मेहनत लगती है; शांत रहना, जहां प्रयास और मेहनत अनुपस्थित होते हैं। शांत रहना और कोशिश करना आपस में ताल मेल नहीं खाते - केवल दन्त चिकित्सक की कुर्सी पर ही नहीं, आत्मिक जीवन में भी।

अकसर होता है कि मेरा प्रतिरोध केवल दन्त चिकित्सक के यहां जाने तक ही सीमित नहीं होता, मसीह के साथ अपने संबंध में भी कई दफा अपने उदेश्यों को पूरा करने के लिये मैं परमेश्वर पर नहीं वरन अपने प्रयासों पर अधिक निर्भर रहता हूँ। ऐसे में मेरे लिये यह सबसे कठिन होता है कि मैं "शांत रहने की कोशिश करूँ" और पूर्ण रूप से परमेश्वर पर भरोसा रखूं कि वह मुझे जीवन की कठिन परीक्षाओं में से सही सलामती से निकाल लेगा।

भजन ४६:१० में हम पढ़ते हैं कि "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!" जब मैं चिंतित और बेचैन होता हूँ तब यह पद मुझे स्मरण दिलाता है कि मैं शांत हो जाऊं और विश्वास रखूं।

यह जान लेने के बाद बस अब मुझे केवल इसका पालन करने की आवश्यक्ता है, और फिर मैं परमेश्वर की देखभाल में शान्ति से रहने पाऊँगा। - बिल क्राउडर


परमेश्वर हमारा भविष्य जानता है और हम उसके हाथों मे सुरक्षित हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान् हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन ४६:१०


बाइबल पाठ: भजन ४६

परमेश्वर हमारा शरण स्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं,
चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठे।।
एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं, पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे, वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
सेनाओं का यहोवा हमारे संगे है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उस ने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है, वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों,को आग में झोंक देता है!
चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों,में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
सेनाओं का यहोवा हमारे संग है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४३, ४४
  • १ थिसुलिनीकियों २

बुधवार, 13 अक्टूबर 2010

प्रभावी जीवन

चीन की राजधानी बीजिंग में अगस्त ८, २००८ को ओलम्पिक्स खेलों का उद्‍घाटन समारोह था। उद्‍घाटन स्थल पर ९०,००० दर्शक बैठे थे, और समस्त विश्व में उस समारोह का टी.वी. पर प्रसारण हो रहा था। मैंने भी उसे टेलीविज़न पर देखा। चीन के ५००० साल के इतिहास, उप्लबधियों और चीन द्वारा संसार को दीये गए अविश्कारों जैसे कागज़ बनाना, कुतुबनुमा, आतिशबाज़ी आदि का विवरण सुनना बहुत उत्साहवर्धक और प्रभावशाली था।

राजा सुलेमान के वैभव की चर्चा सुनकर, शीबा की रानी मिलने उससे आई (१ राजा १०:४, ५)। सुलेमान की राजधानी यरुशलेम की चकाचौंध और सुलेमान की बुद्धिमता को देखकर वह कह उठी कि मैंने जो सुना था वह इसका आधा भी नहीं था (पद ७)। शीबा की रानी इस बात के लिये कायल हुई कि सुलेमान राजा की प्रजा इसलिये सुखी थी क्योंकि वे राजा से बुद्धिमानी की बातें सीखते थे (पद ८)। इन सब बातों का प्रभाव यह हुआ कि रानी ने सुलेमान के परमेश्वर को माना और उसे सुलेमान को राजा बनाने और उसके न्याय और धार्मिकता से राज्य करने के लिये परमेश्वर का धन्यवाद किया (पद ९)।

सुलेमान का अपने लोगों पर हुए प्रभाव को पढ़कर मैं संसार पर अपने प्रभाव के बारे में सोचने लगा। बात अपनी सम्पदा और योग्यता से दूसरों को प्रभावित करने की नहीं है, बात है कि दूसरों के जीवन पर हम कैसा प्रभाव डालते हैं? प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा "तुम पृथ्वी के नमक हो" (मती ५:१३) ज़रा सा नमक भोजन का स्वाद बना देता है। क्या प्रभु यीशु के चेले होने के नाते हम अपने आस पास के लोगों के जीवन पर भला प्रभाव डालते हैं?

आईये आज हम में से प्रत्येक कुछ ऐसा करे जो लोगों को प्रभु की प्रशंसा करने के लिये उत्साहित करे। - सी.पी. हिया


मसीही विश्वासी वे खिड़कियां हैं जिनमें हो कर लोग मसीह को देखते हैं।

तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मती ५:१६


बाइबल पाठ: १ राजा १०:४-१०

जब शीबा की रानी ने सुलैमान की सब बुद्धिमानी और उसका बनाया हुआ भवन, और उसकी मेज पर का भोजन देखा,
और उसके कर्मचारी किस रीति बैठते, और उसके टहलुए किस रीति खड़े रहते, और कैसे कैसे कपड़े पहिने रहते हैं, और उसके पिलाने वाले कैसे हैं, और वह कैसी चढ़ाई है, जिस से वह यहोवा के भवन को जाया करता है, यह सब जब उस ने देखा, तब वह चकित हो गई।
तब उस ने राजा से कहा, तेरे कामों और बुद्धिमानी की जो कीर्ति मैं ने अपने देश में सुनी थी वह सच ही है।
परन्तु जब तक मैं ने आप ही आकर अपनी आंखों से यह न देखा, तब तक मैं ने उन बातों की प्रतीत न की, परन्तु इसका आधा भी मुझे न बताया गया था। तेरी बुद्धिमानी और कल्याण उस कीर्ति से भी बढ़कर हैं, जो मैं ने सुनी थी।
धन्य हैं तेरे जन, धन्य हैं तेरे ये सेवक जो नित्य तेरे सम्मुख उपस्थित रहकर तेरी बुद्धि की बातें सुनते हैं।
धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा, जो तुझ से ऐसा प्रसन्न हुआ कि तुझे इस्राएल की राजगद्दी पर विराजमान किया : यहोवा इस्राएल से सदा प्रेम रखता है, इस कारण उस ने तुझे न्याय और धर्म करने को राजा बना दिया है।
और उस ने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, बहुत सा सुगन्ध द्रव्य, और मणि दिया; जितना सुगन्ध द्रव्य शीबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिया, उतना फिर कभी नहीं आया।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४१, ४२
  • १ थिसुलिनिकियों १

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

छोटी बातों के बड़े प्रभाव

किसी बात का विस्तृत विवरण बहुत फर्क ला सकता है। इसका तातपर्य उस जर्मन व्यक्ति से पूछिये जिसने अपनी क्रिसमस की छुट्टियां अपनी मंगेतर के साथ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी (Sydney) शहर में बिताने की योजना बनाई, क्योंकि उन दिनों वहां ग्रीष्म काल होता है, किंतु पहुंच गया अमेरिका के मौन्टना प्रदेश के सिडनी (Sidney) शहर में जो तब बर्फ से ढका रहता है। भाषा की वर्तनी (spelling) में छोटी सी चूक ने उसके लिये इतना बड़ा उलट-फेर कर दिया!

शायद व्याकरण के पूर्वसर्ग (Prepositions) हमें भाषा में महत्वपूर्ण न लगें और हम उन्हें नज़रंदाज़ कर देते हों, परन्तु वे बात के अर्थ में बहुत अन्तर ला सकते हैं। उदाहरण के लिये "में" और "के लिये" को ही लीजिये। पौलुस प्रेरित ने लिखा "हर बात में धन्यवाद करो" (१ थिसुलुनीकियों ५:१८), इसका यह अर्थ नहीं है कि हर बात के लिये धन्यवाद करो। किसी दूसरे के गलत निर्णयों या चुनावों से उत्पन्न परिस्थितियों के लिये हमें धन्यवादी होने की आवश्यक्ता नहीं है, परन्तु उन परिस्थितियों में भी हम परमेश्वर के धन्यवादी रह सकते हैं, क्योंकि वह उनसे होने वाली कठिनाइयों को भी हमारे लिये भलाई में बदल सकता है।

पौलुस द्वारा फिलेमौन को लिखे पत्र में यह दिखता है। पौलुस के साथ बन्दीगृह में एक भगोड़ा दास उनेसिमुस था। पौलुस को इस बुरी परिस्थिति के लिये धन्यवादी होने की आवश्यक्ता नहीं थी: किंतु फिर भी उसका पत्र धन्यवाद से भरा हुआ है, क्योंकि वह देख पा रहा था कि परमेश्वर उसके कष्ट को भलाई के लिये उपयोग कर रहा है। पौलुस के साथ रहकर बन्दीगृह के कष्ट झेलते हुए, उनेसिमुस अब केवल एक भगोड़ा दास नहीं रह गया था, वरन उसके और मण्डली के लिये वह प्रभु में प्रीय भाई बन गया था (पद १६)।

इस बात पर भरोसा रखना कि परमेश्वर हर बात को भले के लिये उपयोग कर सकता है, हर परिस्थिति में उसके प्रति धन्यवादी होने के लिये काफी है।

कठिन और कष्टदायक परिस्थितियों में भी परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होना एक छोटी सी बात है जिसके बड़े परिणाम होते हैं। - जूली ऐकरमैन लिंक


परमेश्वर ने हमें जीवन की आंधियों से परे रखने का वायदा नहीं किया, वरन उन आंधियों में स्वयं हमारे साथ बने रहकर हमारी रक्षा करने का वायदा अवश्य किया है।

हर बात में धन्यवाद करो - १ थिसुलुनीकियों ५:१८


बाइबल पाठ: फिलेमौन १:४-१६

मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुनकर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
क्‍योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्‍द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।
मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं।
वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है।
उसी को अर्थात जो मेरे ह्रृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है।
उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण हैं, मेरी सेवा करे।
पर मैं ने तेरी इच्‍छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्‍द से हो।
क्‍योंकि क्‍या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे।
परन्‍तु अब से दास की नाई नहीं, बरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ३९, ४०
  • कुलुस्सियों ४

सोमवार, 11 अक्टूबर 2010

पठनी और करनी

एक चर्च के पास्टर से उसके चर्च के एक सदस्य ने बड़े गुस्से से पूछा "पास्टर, 'Our Daily Bread' पुस्तिकाएं कहां हैं?" मसीही भक्ति और शिक्षाओं की इन छोटी पुस्तकों का नया संसकरण अभी चर्च के बाहर के हॉल में नहीं रखा गया था, जिसके कारण इस व्यक्ति ने पास्टर से यह दुर्व्यवहार किया, यद्यपि यह पास्टर की ज़िम्मेदारी नहीं थी कि वह इन पुस्तिकाओं को रखे और वितरित करे। उसके इस व्यवहार से पास्टर दुखित हुआ।

जब मुझे इस घटना का पता चला तो परिस्थिति के विरोधाभास से मैं खिन्न हुआ। इन पुस्तिकाओं का उद्देश्य मसीही चरित्र और परमेश्वर के अनुग्रह में लोगों को बढ़ाना है। और जो मसीही विश्वासी इन पुस्तिकाओं को पढ़ते हैं, हम आशा रखते हैं कि वे आत्मिक जीवन की परिपक्वता की ओर अग्रसर हैं, जिससे, जैसे पौलुस कहता है, "इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो" (कुलुस्सियों ३:१२)।

हमारे आत्मिक अनुशासन - परमेश्वर के वचन को और उसके साथ दिये गए सन्देश को पढ़ना, प्रार्थना और आराधना करना, अपने आप में बात का अन्त नहीं होने चाहिये, वरन ये वे माध्यम होने चाहियें जिनके द्वारा हम मसीह की समानता, परमेश्वर की निकटता और आत्मिक जीवन की परिपक्वता में बढ़ते जाते हैं। हम केवल वचन पढ़ने वाले न हों वरन " मसीह के वचन को अपके हृदय में अधिकाई से बसने दो" (कुलुस्सियों ३:१६) और यह वचन हमारे जीवन के हर पहलु और हमारे व्यवहार में संसार को दिखाई दे। - डेव ब्रैनन


बाइबल पढ़ना का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है, उसका वास्तविक उद्देश्य हमारे मन का परमेश्वर की ओर परिवर्तन है।

इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। - कुलुस्सियों ३:१२


बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१२-१७

इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
मसीह के वचन को अपने ह्रृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ३७, ३८
  • कुलुस्सियों ३