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शनिवार, 28 जुलाई 2012

मरम्मत और बहाली


   यदि आपने कभी किसी चीज़ की मरम्मत करने की असफल कोशिश की होगी तो आप एक कारखाने के सामने लगे लेख की सराहना कर सकेंगे जहां लिखा था: "आपके पति ने जिसकी मरम्मत करी है, हम उसे भी ठीक और बहाल कर सकते हैं।" चाहे खराबी कार में हो, घर के सामान में हो या पानी के पाइप अथवा नलके में हो, समस्या का निवारण उसके द्वारा ही भला होता है जो इसके लिए प्रशिक्षित हो और उस कार्य के करने में विश्वासयोग्य हो।

   यही सिद्धांत हमारे आंतरिक संघर्षों, आत्मिक जीवन और पाप पर भी लागू होता है। इन्हें अन्त करने के हमारे सभी प्रयास असफल रहते हैं; क्योंकि हम या तो अपने प्रयासों और योजनाओं के सहारे ऐसा करना चाहते हैं, या उन मनुष्यों के सुझाए मार्गों द्वारा करना चाहते हैं जो स्वयं इन बुराइयों को अपने जीवन से दूर नहीं कर सके। जबकि इन बुराइयों का अन्त केवल उसी के द्वारा संभव है जो इनके निवारण का विशेषज्ञ है, इन पर सामर्थी है - अर्थात परमेश्वर।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यर्मियाह नबी ने अपने दिनों के उन झूठे भविष्यद्वाक्ताओं और धार्मिक अगुवों की निन्दा करी जो परमेश्वर के नाम से लोगों को झूठी दिलासा देते थे, झूठे मार्ग सुझाते थे; यर्मियाह में हो कर परमेश्वर ने उनके विषय में कहा: "वे, “शान्ति है, शान्ति,” ऐसा कह कहकर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं" (यर्मियाह ६:१४)। वे भविष्यद्वाक्ता और अगुवे ना तो अपने आप को सही करने पाए और ना परमेश्वर की प्रजा को। इसलिए स्वयं परमेश्वर ने अपने लोगों को पुकारा कि वे उसके मार्गों पर चलें: "यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे..." (यर्मियाह ६:१६)। परमेश्वर ने अपनी प्रजा को चेतावनी भी दी कि यदि वे बहाली की उसकी पुकार को नज़रंदाज़ करते रहे तो उन्हें फिर उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा।

   इस बात के कहे जाने के कई सदियों बाद, परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु ने लोगों को निमंत्रण दिया: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती ११:२८)।

   जब हम अपने जीवन प्रभु यीशु के हाथों में समर्पित कर देते हैं तो वह उनकी मरम्मत कर के हमें अंश अंश करके अपनी समानता में बदालना आरंभ कर देता है "तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं" (२ कुरिन्थियों ३:१८); जीवन के उन भागों को भी जिनकी मरम्मत करने में हम असफल रहे हैं। मसीह यीशु में लाए गए विश्वास, पापों की क्षमा और किए गए समर्पण द्वारा हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश एवं निवास के लिए बहाल किये जाते हैं। जो प्रभु द्वारा इस मरम्मत के लिए दिये गए अवसर का लाभ नहीं उठाते और बहाली के लिए प्रभु की पुकार को नज़रंदाज़ करते हैं, उन्हें फिर अपने पापों का दण्ड भोगना ही पड़ेगा।

  क्या आपने अपने जीवन की मरम्मत और बहाली के लिए प्रभु यीशु द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने का निर्णय ले लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर जब पाप क्षमा करता है तब वह हमारे जीवन से पाप को दूर भी करता है और आत्मा को बहाल भी करता है।

यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे... यर्मियाह ६:१६

बाइबल पाठ: यर्मियाह ६:१४-१९
Jer 6:14  वे, “शान्ति है, शान्ति,” ऐसा कह कह कर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं। 
Jer 6:15  क्या वे कभी अपने घृणित कामों के कारण लज्जित हुए? नहीं, वे कुछ भी लज्जित नहीं हुए?; वे लज्जित होना जानते ही नहीं; इस कारण जब और लोग नीचे गिरें, तब वे भी गिरेंगे, और जब मैं उनको दण्ड देने लगूंगा, तब वे ठोकर खाकर गिरेंगे, यहोवा का यही वचन है। 
Jer 6:16  यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खडे होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्होंने कहा, हम उस पर न चलेंगे। 
Jer 6:17  मैं ने तुम्हारे लिये पहरुए बैठा कर कहा, नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना ! पर उन्होंने कहा, हम न सुनेंगे। 
Jer 6:18  इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है। 
Jer 6:19  हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊंगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्होंने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्होंने निकम्मी जाना है।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४६-४८ 
  • प्रेरितों २८

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

आज्ञाकारिता

   जब बालक कोफी अपने संडे स्कूल (रविवार को चर्च में बच्चों को परमेश्वर के वचन बाइबल से शिक्षा दिए जाने के समय) से वापस लौटा तो उसकी माँ ने उससे पूछा कि उन्हें आज क्या सिखाया गया? तुरंत ही खिसिए हुए स्वर में कोफी का उत्तर था, "आज्ञाकारिता...एक बार फिर से वही बात!"

   यद्यपि मैं कोफी से उम्र में बहुत बड़ी हूँ, तो भी मैं सहमत हूँ कि परमेश्वर की आज्ञाकारिता का पाठ एक ऐसा पाठ है जिसे हमें बार बार सीखना पड़ता है।

   बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लिखा: "परमेश्वर मुझे जीने के नियम नहीं देता, परन्तु उसने जीवन के लिए अपने स्तर बिलकुल स्पष्ट बता रखे हैं। यदि उसके साथ मेरा संबंध प्रेम का संबंध है, तो जो उसको भाता है और जो वह कहता है मैं वही करूंगा; यदि मैं ऐसा करने से हिचकिचाता हूँ तो इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम की प्रतिस्पर्धा में मैंने किसी दूसरे को, अर्थात स्वयं अपने आप को भी रख लिया है, और इस ’दूसरे’ एवं परमेश्वर के प्रति प्रेम में से किस के प्रेम को प्राथमिकता दूँ और निभाऊँ यही दुविधा मेरी हिचकिचाहट का कारण है।"

   जब हम परमेश्वर के आज्ञाकारी होते हैं तो हम यह दिखाते हैं कि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं और अपने आप में नहीं वरन उस में विश्वास रखते हैं। एक अन्य बाइबल शिक्षक आर्थर पिंक ने कहा: "प्रेम कार्यकारी होता है और अपने आप को कार्यों में व्यक्त करता है - ऐसे कार्यों में जो प्रेम के पात्र की पसन्द के अनुसार होते हैं।" परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ है कि हम अपनी इच्छाएं नहीं वरन उसका कहा पूरा करें।

   परमेश्वर अपने अनुयायियों से आज्ञाकारिता चाहता है। प्रभु यीशु ने आज्ञाकारिता की अनिवार्यता पर बहुत ज़ोर दिया; उन्होंने अपने चेलों से कहा: "जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्‍यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो?" (लूका ६:४६); प्रभु यीशु ने अपने चेला होने की पहचान भी आज्ञाकारिता से ही दी: "यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे" (यूहन्ना १४:१५)।

   प्रभु के लोगों के लिए परमेश्वर की आज्ञाकारिता विकल्प नहीं अनिवार्यता है। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर की आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है।

परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं। - १ यूहन्ना ५:३

बाइबल पाठ: १ यूहन्ना २:१-११
1Jn 2:1  हे मेरे बालको, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धामिर्क यीशु मसीह। 
1Jn 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1Jn 2:3  यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो उस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1Jn 2:4  जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है, और उस में सत्य नहीं। 
1Jn 2:5  पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1Jn 2:6  जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1Jn 2:7  हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1Jn 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं, और यह तो उस में और तुम में सच्‍ची ठहरती है; कयोंकि अन्‍धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1Jn 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं, और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्‍धकार ही में है। 
1Jn 2:10  जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1Jn 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्‍धकार में है, और अन्‍धकार में चलता है, और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्‍योंकि अन्‍धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४३-४५ 
  • प्रेरितों २७:२७-४४

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

एरिन


   आम ८ वर्षीय बच्चों से एरिन का जीवन बहुत भिन्न था। जब दूसरे बच्चे दौड़ और खेल रहे होते थे, आईस्क्रीम खा रहे होते थे तब एरिन बिस्तर में लेटी होती थी, एक नली द्वारा उसे भोजन दिया जाता था, वह केवल तेज़ प्रकाश में ही कुछ देख पाती थी और तेज़ आवाज़ ही सुन पाती थी। उसका जीवन, अपनी बीमारी और शारीरिक अपंगता के कारण अस्पताल, नर्सों और सुई लगाए जाने के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता था। लेकिन उसके साथ उसका अद्भुत परिवार था जो बड़े प्रेम और करुणा के साथ उसकी देखभाल करता रहता था, और उसके जीवन को अपने प्रेम से भरता रहता था। इतना सब होने के बाद भी एरिन ९ वर्ष की होने से पहले ही चल बसी।

   एरिन जैसे मूल्यवान बच्चे के जीवन से भला कोई क्या शिक्षा ले सकता है - जिसने कभी कोई शब्द नहीं बोला, कोई गीत नहीं गाया, कोई चित्र नहीं बनाया? एरिन के परिवार के एक मित्र ने इस प्रश्न का बहुत उत्तम उत्तर दिया; उसने कहा: "एरिन का हमारे जीवनों में आना हमारे लिए भला था। उसने हमें करुणा, बिना प्रत्युत्तर में कुछ पाए प्रेम करना और जीवन की छोटी छोटी बातों की कीमत पहचानना और उनके लिए परमेश्वर का धन्यवादी होना सिखाया।"

   एरिन के जैसे बच्चे हमें यह भी स्मरण दिलाते हैं कि यह संसार केवल पूर्णतः स्वस्थ, धनवान और प्रतिभाशाली लोगों ही के लिए नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक दशा कैसी भी क्यों ना हो, परमेश्वर की सृष्टि है, परमेश्वर के स्वरूप में सृजा गया है (उत्पत्ति १:२६-२७), और परमेश्वर कि नज़रों में बहुमूल्य है, परमेश्वर की ओर से उसका एक उद्देश्य है।

   हमारा प्रभु परमेश्वर सब के लिए भला है और उसकी दया सब पर समान रूप से रहती है (भजन १४५: ८-९); उसकी सृष्टि के कमज़ोर और अपूर्ण लोगों पर भी। प्रभु की हमसे यही आशा है कि हम प्रभु के इस प्रेम को, उसी के समान, सब के लिए समान रूप से प्रदर्षित करने वाले बनें (इफिसियों ५:१-२)।

   क्या आप भी किसी ’एरिन’ को जानते हैं जिससे आज आप कुछ सीख सकते हैं? - डेव ब्रैनन


किसी एक भी आत्मा की कीमत को कभी तुच्छ ना जानें।

यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। - भजन १४५:८-९

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १२:२०-२७
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27   इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४०-४२ 
  • प्रेरितों २७:१-२६

बुधवार, 25 जुलाई 2012

स्थिर निगाह

   मुझे गाड़ी चलाना सिखाने वाले प्रशीक्षक का बार कहना होता था "सामने देखते हुए चलाओ"। वह चाहते थे कि मैं स्थिर निगाह से केवल सामने की ओर देखती रहूँ, ना कि अपने पास के दृश्यों और लोगों को देखूं और गाड़ी चलाने से मेरा ध्यान बटे; क्योंकि वे चालक जो अपने आस-पास के दृश्यों की ओर निगाहें घुमाते रहते हैं, उनके द्वारा दुर्घटना हो जाने की संभावना अधिक रहती है।

   हम मसीही विश्वासियों की जीवन यात्रा में भी शैतान कई ऐसे आकर्षण लाता रहता है जिससे कि हमारा ध्यान अपने प्रभु और मार्गदर्शक से हट जाए और शैतान ही की बातों की ओर भटक जाए। यदि वह ऐसा करने में सफल हो जाएगा तो फिर वह हमें सही मार्ग से भटका कर ना केवल हमारी आत्मिक प्रगति को बाधित करने पाएगा, वरन हमारे जीवन में हानि भी लाने पाएगा। ध्यान भटकाने का यह दाँव उसने प्रभु यीशु पर भी आज़माया था!

   प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में शैतान ने प्रभु को परमेश्वर द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए कुछ ’बेहतर’ उपाय सुझाए। शैतान ने प्रभु यीशु से कहा कि वह अपने आप को मन्दिर के कंगूरे अर्थात सबसे ऊँचे स्थान से नीचे फेंक कर भी प्रमाणित कर सकता है कि वह परमेश्वर का पुत्र है (लूका ४:९-११)। लेकिन प्रभु यीशु जानते थे कि किसी भवन से नीचे गिरने के द्वारा वे परमेश्वर के पुत्र प्रमाणित नहीं होंगे, ऐसा केवल उनके क्रूस पर बलिदान होने और मृतकों में से पुनः जी उठने के द्वारा ही संभव है, इसलिए उन्होंने शैतान को उत्तर दिया, "...यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना" (लूका ४:१२)। प्रभु यीशु की निगाहें संसार के लिए उद्धार का मार्ग तैयार करने पर स्थिर थीं; वे जानते थे कि समस्त संसार के उद्धार का यह कार्य, यदि वे क्रूस से बचकर निकले, तो संभव नहीं हो सकता था - जो शैतान करवाना चाहता था; उन्होंने अपनी निगाहें अपने लक्ष्य पर स्थिर बनाए रखीं और अपने कार्य को पूरा किया।

   आत्मिक खतरों से बचने का एक मात्र तरीका है कि अपनी निगाहें प्रभु यीशु पर स्थिर रखें (इब्रानियों १२:२), और शैतान द्वारा लाई जा रही सही मार्ग से भटकाने वाली बातों की ओर दृष्टि ना करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमें शैतान को कभी भी अपनी नज़रों के सामने नहीं, सदैव ही पीछे रखना चाहिए।


इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। - इब्रानियों १२:१-२

बाइबल पाठ: लूका ४:१-१३
Luk 4:1  फिर यीशु पवित्र आत्मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा, और शैतान उस की परीक्षा करता रहा। 
Luk 4:2  उन दिनों में उस ने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी। 
Luk 4:3  और शैतान ने उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो इस पत्थर से कह, कि रोटी बन जाए; 
Luk 4:4  यीशु ने उसे उत्तर दिया कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा। 
Luk 4:5  तब शैतान उसे ले गया और उस को पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए। 
Luk 4:6 और उस से कहा, मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूंगा, क्‍योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूं, उसी को दे देता हूं। 
Luk 4:7  इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा। 
Luk 4:8  यीशु ने उसे उत्तर दिया, लिखा है कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर। 
Luk 4:9 तब उस ने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहां से नीचे गिरा दे। 
Luk 4:10 क्‍योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें। 
Luk 4:11  और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे। 
Luk 4:12  यीशु ने उस को उत्तर दिया, यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना। 
Luk 4:13  जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन ३७-३९ 
  • प्रेरितों २६

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

प्रभाव का क्षेत्र

   सुप्रसिद्ध मसिही प्रचारक बिली ग्राहम की सेवकाई पर लिखी गई पुस्तक The Preacher and the Presidents उनके प्रभाव के क्षेत्र के बारे में बताती है। बिली ग्राहम की मसीही सेवकाई अमेरिका के राष्ट्रपतियों तक भी थी, हैरी ट्रूमैन से लेकर जौर्ज बुश के समय तक राष्ट्रपति निवास ’व्हाईट हाउस’  में उनका आना-जाना रहता था और उनके लिए व्हाईट हाउस के द्वार खुले ही होते थे। अपने इस असाधारण प्रभाव के बावजूद भी उन्होंने बार बार परमेश्वर के अनुग्रह ही को इस का श्रेय दिया, जिसने उन में हो कर कार्य किया, ना कि अपनी किसी व्यक्तिगत प्रतिभा को।

   प्रभु यीशु का अनुयायी प्रेरित पौलुस भी ऐसा ही एक व्यक्ति था जिसे परमेश्वर ने बड़े अधिकारियों के सामने गवाही के लिए बुलाया था। मसीह यीशु ने पौलुस के लिए कहा, "...यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्‍त्राएलियों के साम्हने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है" (प्रेरितों ९:१५)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रेरितों के काम में हम पढ़ते हैं कि पौलुस के प्रभाव के क्षेत्र में कई शासक, जैसे फीलिक्स, फेस्तुस, हेरोड अग्रिप्पा और संभवत: रोमी सम्राट कैसर भी थे (प्रेरितों २४-२६)। लेकिन जैसे बिली ग्राहम ने पौलुस से कई सदियों बाद कहा, पौलुस ने भी अपनी सेवाकाई के विषय में सारा श्रेय उसमें होकर कार्य करने वाले परमेश्वर के अनुग्रह ही को दिया; उसने कहा "...यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्‍तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था" (१ कुरिन्थियों १५:१०)।

   संभव है कि आपको शासकों और बड़े अधिकारियों के समक्ष सुसमाचार प्रचार की सेवकाई के लिए नहीं बुलाया गया हो, लेकिन परमेश्वर ने आपके जीवन में ऐसे लोगों को रखा है जिनके लिए वह चाहता है कि आप उनके साथ उद्धार और आशा का सुसमाचार बांटें। क्यों ना आप इस बात को अपनी प्रार्थना का विषय बना लें कि परमेश्वर का अनुग्रह आप में हो कर उन लोगों तक पहुँचे जिनके बीच में परमेश्वर ने आपको अपना गवाह बना कर रखा है, जो आपके प्रभाव के क्षेत्र में हैं। - डेनिस फिशर


गवाही के लिए सबसे अच्छा स्थान वही है जहां परमेश्वर ने आपको रखा है।

...यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्‍त्राएलियों के साम्हने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है। - प्रेरितों ९:१५

बाइबल पाठ: प्रेरितों २५:१०-२३
Act 25:10  पौलुस ने कहा; मैं कैसर के न्याय आसन के साम्हने खड़ा हूं: मेरे मुकद्दमें का यहीं फैसला होना चाहिए: जैसा तू अच्‍छी तरह जानता है, यहूदियों का मैं ने कुछ अपराध नहीं किया। 
Act 25:11  यदि अपराधी हूं और मार डाले जाने योग्य कोई काम किया है, तो मरने से नहीं मुकरता; परन्‍तु जिन बातों का ये मुझ पर दोष लगाते हैं, यदि उन में से कोई बात सच न ठहरे, तो कोई मुझे उन के हाथ नहीं सौंप सकता: मैं कैसर की दोहाई देता हूं। 
Act 25:12  तब फेस्‍तुस ने मन्‍त्रियों की सभा के साथ बातें कर के उत्तर दिया, तू ने कैसर की दोहाई दी है, तू कैसर के पास जाएगा।
Act 25:13  और कुछ दिन बीतने के बाद अग्रिप्‍पा राजा और बिरनीके ने कैसरिया में आकर फेस्‍तुस से भेंट की। 
Act 25:14  और उन के बहुत दिन वहां रहने के बाद फेस्‍तुस ने पौलुस की कथा राजा को बताई, कि एक मनुष्य है, जिसे फेलिक्‍स बन्‍धुआ छोड़ गया है। 
Act 25:15  जब मैं यरूशलेम में था, तो महायाजक और यहूदियों के पुरिनयों ने उस की नालिश की और चाहा, कि उस पर दण्‍ड की आज्ञा दी जाए। 
Act 25:16  परन्‍तु मैं ने उन को उत्तर दिया, कि रोमियों की यह रीति नहीं, कि किसी मनुष्य को दण्‍ड के लिये सौंप दें, जब तक मुद्दाअलैह को अपने मुद्दइयों के आमने सामने खड़े होकर दोष के उत्तर देने का अवसर न मिले। 
Act 25:17  सो जब वे यहां इकट्ठे हुए, तो मैं ने कुछ देर न की, परन्‍तु दूसरे ही दिन न्याय आसन पर बैठकर, उस मनुष्य को लाने की आज्ञा दी। 
Act 25:18  जब उसके मुद्दई खड़े हुए, तो उन्‍होंने ऐसी बुरी बातों का दोष नहीं लगाया, जैसा मैं समझता था। 
Act 25:19  परन्‍तु अपने मत के, और यीशु नाम किसी मनुष्य के विषय में जो मर गया था, और पौलुस उस को जीवित बताता था, विवाद करते थे। 
Act 25:20  और मैं उलझन में था, कि इन बातों का पता कैसे लगाऊं इसलिये मैं ने उस से पूछा, क्‍या तू यरूशलेम जाएगा, कि वहां इन बातों का फैसला हो? 
Act 25:21  परन्‍तु जब पौलुस ने दोहाई दी, कि मेरे मुकद्दमे का फैसला महाराजाधिराज के यहां हो, तो मैं ने आज्ञा दी, कि जब तक उसे कैसर के पास न भेजूं, उस की रखवाली की जाए। 
Act 25:22  तब अग्रिप्‍पा ने फेस्‍तुस से कहा, मैं भी उस मनुष्य की सुनना चाहता हूं: उस ने कहा, तू कल सुन लेगा।
Act 25:23  सो दूसरे दिन, जब अग्रिप्‍पा और बिरनीके बड़ी धूमधाम से आकर पलटन के सरदारों और नगर के बड़े लोगों के साथ दरबार में पहुंचे, तो फेस्‍तुस ने आज्ञा दी, कि वे पौलुस को ले आएं।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन ३५-३६ 
  • प्रेरितों २५

बुद्धिमानी के उत्तर


   जब धार्मिक अगुवे व्यभिचार में पकड़ी गई उस स्त्री को लेकर प्रभु यीशु के पास आए और उससे पुछने लगे कि उस स्त्री के साथ क्या किया जाना चाहिए, तो प्रभु यीशु ने उन्हें तुरन्त उत्तर नहीं दिया; वरन वे नीचे झुककर भूमि पर कुछ लिखने लगे (यूहन्ना ८:६-११)। उन्होंने क्या लिखा यह तो हम नहीं जानते, परन्तु जब भीड़ उनसे पूछती ही रही तो एक छोटे वाक्य में प्रभु यीशु ने अपना उत्तर दे दिया: "...तुममें जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे" (यूहन्ना ८:७)। इस छोटे से वाक्य के थोड़े से शब्द उन धार्मिक अगुवों को उनके अपने पाप दिखाने के लिए काफी थे, और वे सब एक एक करके वहां से चले गए। प्रभु यीशु के ये शब्द आज भी संसार भर में गूंज रहे हैं और लोगों को दूसरों पर दोष देने की बजाए स्वयं अपने पापों के प्रति सचेत रहने को प्रेरित कर रहे हैं।

   इन थोड़े शब्दों के बड़े प्रभावी होने का कारण था प्रभु यीशु की अपने स्वर्गीय पिता पर सदा बने रहने वाली निर्भरता; उन्होंने अपने विषय में कहा, "...उस की आज्ञा अनन्‍त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं" (यूहन्ना १२:५०)। काश हम सब भी प्रभु यीशु के समान सदा अपने परमेश्वर पिता पर निर्भर रहते और उसकी बुद्धिमता पर निर्भर हो कर ही हर बात का उत्तर देने वाले होते।

   यह बुद्धिमानी आरंभ होती है याकूब की पत्री में लिखे उपदेश के पालन के साथ: "...इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब १:१९)। जिस धीमेपन की बात यहां करी जा रहा है वह अज्ञानता, भीतरी खोखलेपन, कायरता, लज्जा या दोषी होने के कारण होने वाली मूँह और बुद्धि की खामोशी नहीं है। यह वह खामोशी है जो परमेश्वर पर विचारमग्न रहने और उस पर ध्यान लगाए रखने से आई बुद्धिमानी द्वारा उत्पन्न होती है।

   हम से कई बार कहा जाता है कि बोलने से पहले ज़रा सा थम कर, विचार कर के, फिर बोलें। लेकिन मेरा मानना है कि उत्तर देने की प्रवृत्ति को इस स्तर से भी आगे ले जाकर, सदा परमेश्वर की सुनते रहें और उस पर निर्भर होकर उसके निर्देषों के अनुसार उत्तर देने को अपनी आदत बना लें। जब यह निर्भरता हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन जाएगी, तब हमारे सभी उत्तर भी बुद्धिमानी के उत्तर होंगे। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लिए बोलने से पहले परमेश्वर की सुनने वाले बनें।

और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्‍त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं। - यूहन्ना १२:५०

बाइबल पाठ: यूहन्ना ८:१-११
Joh 8:1  परन्‍तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया।
Joh 8:2  और भोर को फिर मन्‍दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्‍हें उपदेश देने लगा।
Joh 8:3   तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उस को बीच में खड़ी करके यीशु से कहा।
Joh 8:4   हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है।
Joh 8:5  व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्‍या कहता है?
Joh 8:6  उन्‍होंने उस को परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्‍तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा।
Joh 8:7  जब वे उस से पूछते रहे, तो उस ने सीधे होकर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे।
Joh 8:8   और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा।
Joh 8:9  परन्‍तु वे यह सुनकर बड़ों से लेकर छोटों तक एक एक करके निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई।
Joh 8:10 यीशु ने सीधे होकर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्‍या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी।
Joh 8:11  उस ने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन १२३-१२५ 
  • १ कुरिन्थियों १०:१-१८

सोमवार, 23 जुलाई 2012

भरोसा

   सामान खरीदने के लिए एक दुकान में घूमते समय मैंने एक आदमी को देखा जिसने सुर्ख लाल रंगी टी-शर्ट पहनी थी जिसपर लिखा था: "भरोसा - वह भावना जो परिस्थिति की सही पहचान होने से पहले तक ही हमारे भीतर रहती है।"

   इस मनोरंजक वाक्य पर मैं मन ही मन हंसा, किंतु मुझे यह एहसास भी हुआ कि उस टी-शर्ट पर एक बुद्धिमता पूर्ण और गंभीर चेतावनी भी लिखी थी, जो हम सब के लिए थी। हमारे लिए, जो अपनी ही सामर्थ और योग्यता पर भरोसा कर के सब कुछ करना चाहते हैं और परमेश्वर को नज़रंदाज़ करते हैं, उसपर अपना भरोसा नहीं रखते। यदि हम यह सोचते हैं कि जीवन के हर कार्य को हम अपनी सामर्थ से करने पाएंगे, तो यह विश्वास झूठा है जो किसी न किसी दिन हमारी ही हानि का कारण ठहरेगा और हम अपनी ही असफलताओं के बोझ तले दबते चले जाएंगे।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात के लिए कुरिन्थुस के विश्वासियों को इस्त्राएलियों के जीवन में आए अपनी ही योग्यता और सामर्थ के उदाहरण द्वारा चिताया। पौलुस ने उन्हें स्मरण दिलाया कि कैसे इस्त्राएलियों ने अपने पक्ष में हो रही हर बात के कारण अपनी नज़रें परमेश्वर से हटा कर अपने आप को दंभ और फिर पाप में फंसा लिया, जो उनके पतन का कारण बन गया। पौलुस ने चिताया कि वे इस बात से शिक्षा लें और अपना निष्कर्ष दिया: "इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े" (१ कुरिन्थियों १०:१२)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन ११८:८, जो संपूर्ण बाइबल के मध्य का पद भी है, में लिखा है "यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है।" आज आपका भरोसा कहां और किसपर है? - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु में भरोसा ही सही भरोसा है।


इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:१-१२
1Co 10:1  हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बापदादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए।
1Co 10:2  और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपतिस्मा लिया।
1Co 10:3  और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया।
1Co 10:4  और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्‍योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।
1Co 10:5  परन्‍तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए।
1Co 10:6  ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरीं, कि जैसे उन्‍होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें।
1Co 10:7  और न तुम मूरत पूजने वाले बनों, जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।
1Co 10:8  और न हम व्यभिचार करें, जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये।
1Co 10:9  और न हम प्रभु को परखें, जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
1Co 10:10  और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए।
1Co 10:11 परन्‍तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
1Co 10:12  इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे, कि कहीं गिर न पड़े।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ३३-३४ 
  • प्रेरितों २४