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शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

ज्ञान और ध्यान


   एक सन्ध्या, एक छोटी गौरैया उड़कर हमारे घर के अन्दर आ गई। हम उसे बाहर का रास्ता दिखाने में लग गए। जैसे ही उसके निकट पहुँचते, वह डर के मारे उड़कर किसी अन्य स्थान पर जा बैठती। इससे पहले कि हम उसे बाहर निकाल पाते, उस गौरैया ने अपनी घबराहट में घर के कई चक्कर लगा लिए। उसकी घबराहट उसकी छाती में दिखाई दे रही उसके दिल के तेज़ धड़कन से प्रगट थी। हमारी सहायता के प्रयास वह समझ नहीं पा रही थी और अपने ही प्रयासों में थकती जा रही थी।

   कभी कभी हम भी उस घबराई हुई छोटी चिड़िया के समान ही होते हैं - चिंतित, अस्त-व्यस्त और आगे क्या होगा इससे आशंकित। अपनी इस मनःस्थिति में हमें परमेश्वर की सहायता और मार्गदर्शन के हाथ भी भयावह लगते हैं। लेकिन परमेश्वर हमारी प्रत्येक परिस्थिति को जानता है; हमारे संसार की हर बात को वह देखता और जानता है। क्योंकि "यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं" (नीतिवचन १५:३), उसकी निगाहों तथा ध्यान से कुछ भी बचकर नहीं निकल सकता, और वह हमारी छोटी से छोटी बात को भी जानता है "तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं" (मत्ती १०:३०); ऐसे में मुझे प्रभु यीशु की कही बात "क्‍या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती" (मत्ती १०:२९) से बहुत सांत्वना मिलती है।

   यह अद्भुत बात है कि परमेश्वर हमारी छोटी से छोटी बात का भी ध्यान रखता है और संसार में एक छोटा पक्षी भी उसके ज्ञान के बिना नहीं गिर सकता। जिसे हमारी इन छोटी छोटी बातों का ध्यान है, उसे हमारी बड़ी और महत्वपुर्ण बातों तथा आवश्यक्ताओं और चिंताओं का भी ज्ञान है, वह उनका ध्यान रखता है। जब कभी हम सहायता के लिए उससे प्रार्थना करते हैं, उसका उत्तर उसके इसी ज्ञान और ध्यान के अनुसार होता है।

   चिंतित रहकर फड़फड़ाते रहने और थकने की बजाए उसके हाथों में शांत होकर अपने आप को छोड़ दें। वह जो करेगा, भला और सर्वोत्तम ही करेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ड्ट


उसकी दृष्टि गौरैये पर भी रहती है, और मैं जानता हूँ कि वह मेरा भी ध्यान रखता है।

क्‍या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। - मत्ती १०:२९

बाइबल पाठ: मत्ती १०:२७-३३
Mat 10:27  जो मैं तुम से अन्‍धियारे मे कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। 
Mat 10:28  जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। 
Mat 10:29 क्‍या पैसे मे दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। 
Mat 10:30  तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। 
Mat 10:31  इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़ कर हो। 
Mat 10:32 जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी स्‍वर्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा। 
Mat 10:33 पर जो कोई मनुष्यों के साम्हने मेरा इन्‍कार करेगा उस से मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के साम्हने इन्‍कार करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १९-२१ 
  • २ कुरिन्थियों ७

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

संयम


   दुसरे विश्वयुद्ध के निर्णायक समय में संगठित सेना के सर्वोच्च सेनापति ड्वाईट डी. आईज़नहावर संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे। उनके नेतृत्व में, संसार के इतिहास में जल-थल सेना का सबसे बड़ा जमावड़ा, युरोप को नाट्ज़ी प्रभुसत्ता से छुड़ाने के लिए तैयार हुआ। इतनी विशाल सेना का संचालन आईज़नहावर कैसे करने पाए? इस प्रश्न के उत्तर का एक भाग है उनकी अन्य और भिन्न प्रवृत्ति के लोगों के साथ भी मिलकर कार्य कर पाने की विलक्षण प्रतिभा।

   लेकिन जो बात बहुत से लोग नहीं जानते वह यह है कि आईज़नहावर बचपन से ऐसे नहीं थे, वरन इसके विपरीत स्कूल के दिनों में वे अकसर अन्य बच्चों के साथ लड़ते-झगड़ते रहते थे। लेकिन उनकी माता एक बहुत संयमी और ध्यान रखने वाली महिला थीं जो उन्हें परमेश्वर के वचन बाइबल से सिखाती रहती थीं। एक बार जब वे ऐसी ही किसी लड़ाई में लगी आईज़नहावर की चोटों की मरहम-पट्टी कर रहीं थीं तो उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन १६:३२ में लिखे पद को उनके सामने रखा, "विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है"। वर्षों बाद आईज़नहावर ने इसके बारे में लिखा, "माँ से हुए उस वार्तालाप को मैं अपने जीवन के सबसे मुल्यवान समयों में मानता हूँ।" निश्चय ही संयम और क्रोध को वश में करने की उस शिक्षा ही ने आईज़नहावर को दुसरों के साथ मिलकर कार्य करने और प्रभावी होने वाला बनाया और इतनी ऊँचाईयों तक पहुँचाया।

   हम सब के जीवनों में ऐसे समय अवश्य ही आएंगे जब किसी अन्य व्यक्ति पर क्रोध और आवेश में आकर कुछ कहने और करने का मन होगा। लेकिन ये ही संयम दिखाने के सबसे बहुमूल्य अवसर हैं जहां परमेश्वर और उसके वचन की सहायता से, अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के समान, हम ना केवल अपने क्रोध को वश में रखना और धैर्य से काम लेना सीख सकते हैं, वरन ऐसा करके संसार के लोगों में प्रभावी और परमेश्वर की महिमा का कारण भी बन सकते हैं।

   एक नम्र और संयमी आत्मा ही प्रभावी और प्रभु को प्रीय आत्मा है। - डेनिस फिशर


जो क्रोध पर जयवन्त है वह एक बहुत प्रबल शत्रु पर जयवन्त है।

विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। - नीतिवचन १६:३२

बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:२१-३३
Pro 16:21  जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। 
Pro 16:22  जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। 
Pro 16:23  बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। 
Pro 16:24  मनभावने वचन मधुभरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। 
Pro 16:25  ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। 
Pro 16:26  परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है। 
Pro 16:27  अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लग जाती है। 
Pro 16:28  टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है। 
Pro 16:29  उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसलाकर कुमार्ग पर चलाता है। 
Pro 16:30  आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है। 
Pro 16:31  पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं; वे धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होते हैं। 
Pro 16:32  विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। 
Pro 16:33  चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १६-१८ 
  • २ कुरिन्थियों ६

बुधवार, 12 सितंबर 2012

भिन्न लक्ष्य


   व्यावसायिक गोल्फ खिलाड़ी बायर्न नेल्सन के लिए १९४५ विलक्षण वर्ष था। जिन ३० प्रतियोगिताओं में उसने भाग लिया, उनमें से १८ उसने जीतीं, जिनमें से ११ में वह लगातार विजयी रहा। यदि वह चाहता तो अपने इस व्यवसायिक खेलने को आगे बढ़ा कर और ऊँचाईयों पर ले कर जा सकता था और अपने समय का सर्वश्रेष्ठ गोल्फ खिलाड़ी बन सकता था। किंतु यह उसका लक्ष्य नहीं था। उसका लक्ष्य था गोल्फ द्वारा इतना पैसा कमा लेना कि वह एक पशु-पालन और कृषि फार्म खरीद सके जहां वह अपनी शेष आयु वह कार्य करने में व्यतीत करे जो उसकी पहली पसन्द है। नेल्सन ने ३४ वर्ष की आयु में ही गोल्फ से अवकाश ले लिया और कृषि तथा पशु-पालन करने वाला बन गया। उसके लक्ष्य भिन्न थे।

   संसार इस प्रकार की विचारधारा को मूर्खता मान सकता है क्योंकि वह उस हृदय को नहीं समझता जो संसार से संसार की धन-दौलत और प्रसिद्धि अर्जित करने की बजाए मन की सच्ची शांति और संतुष्टि की लालसा रखता है। यह विशेषकर तब और भी अधिक लागू होता है जब कोई यह निर्णय उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए जीने के लिए करता है। किंतु संसार की समझ में जो मूर्खता है वह ही हमारे लिए अपने प्रभु से संबंधित और संसार के लक्ष्यों से भिन्न लक्ष्यों को संसार ही के समक्ष रखने के लिए एक उत्तम अवसर बन जाता है। इसी संदर्भ में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (१ कुरिन्थियों १:२७)।

   परमेश्वर के राज्य के मूल्यों के अनुसार जीवन व्यतीत करना हमें संसार की नज़रों में मूर्ख ठहरा सकता है, लेकिन यही निर्णय संसार के सामने परमेश्वर को महिमा देने का माध्यम भी बन जाता है, जिसका प्रतिफल परमेश्वर से मिलने वाली ऐसी मूल्यवान, अद्भुत और चिरस्थायी अशीष है जो संसार ना कभी दे सकता है और ना कभी जिसकी कलपना भी कर सकता है। - बिल क्राउडर


जीवन के आदर्श मूल्य व्यर्थ हैं यदि वे परमेश्वर के मूल्यों के अनुरूप नहीं।

परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - १ कुरिन्थियों १:२७

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-३१
1Co 1:18  क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 
1Co 1:19  क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा। 
1Co 1:20  कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 
1Co 1:21  क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 
1Co 1:22  यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। 
1Co 1:23  परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 
1Co 1:24  परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। 
1Co 1:25  क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।
1Co 1:26   हे भाइयों, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। 
1Co 1:27  परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करें। 
1Co 1:28  और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। 
1Co 1:29  ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। 
1Co 1:30  परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा। 
1Co 1:31  ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १३-१५ 
  • २ कुरिन्थियों ५

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

बुराई पर जयवंत


   किसी भी अखबार को देख लीजिए, उसमें छपी खबरों के शीर्षक बता देंगे कि संसार में क्या कुछ गलत है। चाहे टी.वी. देखें या रेडियो सुनें या मित्रों से बातचीत करें, सब लोग जानते हैं कि इस संसार में क्या कुछ गलत है और संसार का यह हाल क्यों है। बुराई और इन बातों के बारे में सबकी अपनी अपनी राय है, क्योंकि दोष लगाना और खामियां निकालना तो सरल है, किंतु उन के समाधान के लिए कुछ सार्थक उपाय करना सरल नहीं है, चाहे वह अपने व्यक्तिगत जीवन में कुछ परिवर्तन लाना ही क्यों ना हो।

   जब कुछ आतंकवादियों ने वायुयान अगुवा कर के उन्हें पेंटागन, न्यूयॉर्क की जुड़वां गगनचुंबी इमारतों और पैन्सिलवेनिया के एक खेत में टकरा दिया जिससे सैकड़ों जाने गईं तो सारे संसार ने तुरंत इसे बहुत बुरा कहा। बुराई की इस विनाशकारी सामर्थ के प्रदर्शन के समक्ष लोगों ने अपने आप को असहाय और लाचार अनुभव किया। और यही बुराई का सबसे ताकतवर प्रभाव है; वह अपने शिकार को उसके सामर्थहीन होने का आभास देती है।

   लेकिन हम सामर्थहीन नहीं हैं। हम में से अधिकांशतः बुराई को व्यक्तिगत और छोटे रूप में अनुभव करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में, पौलुस ने रोमियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, बुराई के प्रति की जाने वाली प्रतिक्रीया के विषय में लिखा कि: बुराई से घृणा करें (रोमियों १२:९); उसका प्रत्युत्तर और बुराई करके ना दें (रोमियों १२:१७) और उससे हारें नहीं (रोमियों १२:२१)।

   बुराई का वास्तविक शिकार भलाई है - वह भलाई जिसे परमेश्वर ने सृष्टि का एक भाग करके बनाया था कि सब आनन्द के साथ रह सकें (उत्पत्ति १:४-३१)। किंतु आश्चर्य की बात यह है कि परमेश्वर का वचन हमें यह भी सिखाता है कि बुराई की शिकार बनी भलाई अन्ततः उपरोक्त प्रतिक्रियाओं के पालन द्वारा उस पर जयवंत भी है (रोमियों १२:२१)। आवश्यक्ता है तो इन्हें व्यक्तिगत रीति से अपने अपने जीवनों में लागू करने की।

   चाहे अखबारों और समाचार प्रसारण के माध्यमों में बुराई ही को प्रमुख शीर्षक मिलते हों, और लोगों का ध्यान बुराई पर अधिक और भलाई पर कम जाता हो, लेकिन परमेश्वर की भलाई संसार की किसी भी बुराई से कहीं अधिक सामर्थी है। परमेश्वर चाहता है कि हम उसके द्वारा दी गई विधि से उसके इस शत्रु, अर्थात बुराई पर जयवंत हो जाएं; भलाई ही से बुराई को जीत लें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जैसे ज्योति अंधकार पर जयवंत रहती है, भलाई भी बुराई पर जयवंत होती है।

बुराई से न हारो परन्‍तु भलाई से बुराई का जीत लो। - रोमियों १२:२१

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-२१
Rom 12:9 प्रेम निष्‍कपट हो; बुराई से घृणा करो, भलाई मे लगे रहो। 
Rom 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Rom 12:11 प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Rom 12:12 आशा मे आनन्‍दित रहो; क्‍लेश मे स्थिर रहो, प्रार्थना मे नित्य लगे रहो। 
Rom 12:13  पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Rom 12:14  अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Rom 12:15 आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Rom 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो, परन्‍तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न हो। 
Rom 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्‍ता किया करो। 
Rom 12:18  जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Rom 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्‍तु क्रोध को अवसर दो, क्‍योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Rom 12:20 परन्‍तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्‍योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Rom 12:21 बुराई से न हारो परन्‍तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १०-१२ 
  • २ कुरिन्थियों ४

सोमवार, 10 सितंबर 2012

खोए हुए


   अपने कॉलेज के दिनों में मैं कोलैराडो के रॉकी माउन्टेन राष्ट्रीय उद्यान में मार्गदर्शक का कार्य करता था और युवकों के दलों को पहाड़ी मार्गों पर घूमाने के लिए ले कर जाया करता था। एक बार मेरे दल का एक लड़का, जो छोटा और सुस्त था, शेष दल से पीछे रह गया और किसी जगह एक गलत मोड़ लेकर भटक गया। जब हम वापस अपने शिविर पर पहुँचे तो उसका कोई अता-पता नहीं था। मैं घबराया हुआ उसे ढ़ूंढ़ने के लिए निकल पड़ा। अन्धेरा होने से कुछ देर पहले मैंने उसे एक छोटी सी झील के किनारे बिलकुल अकेला और खोया हुआ बैठा पाया। आनन्द के मारे मैंने ज़ोर से उसका आलिंगन किया और उसे उठा कर अपने कंधे पर बैठा लिया, और ऐसे उठाए हुए ही शिविर में उसके अन्य साथियों के पास लेकर आ गया।

   एक स्कॉटिश कहानीकार जौर्ज मैकडॉनल्ड द्वारा लिखी एक कहानी में एक जवान महिला का उल्लेख है जिसे जंगल में एक खोया हुआ और अकेला छोटा बालक मिलता है। महिला उस बालक को गोदी में उठाकर उसके घर उसके पिता के पास लेकर आती है और पिता को उसे सौंपते हुए उस महिला को एक ऐसी समझ मिलती है जो फिर जीवन भर उसे कभी नहीं छोड़ती: "अब वह मनुष्य के पुत्र (प्रभु यीशु का एक उपनाम) के मन को समझ सकी जो पाप और संसार में खोए हुए लोगों को ढ़ूंढ़ने और उन्हें वापस परमेश्वर पिता के पास ले जाने के लिए आया था।"

   मैं चाहता हूँ कि आप भी मनुष्य के पुत्र, प्रभु यीशु, के हृदय को समझने पाएं जो कि संसार के हर एक पाप में पड़े और संसार में खोए हुए को वापस परमेश्वर के पिता के पास ले जाने के लिए आया। प्रभु यीशु ने कहा: "क्‍योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है" (लूका १९:१०)। आप चाहे कहीं भी क्यों ना खो गए हों, चाहे कितनी भी दूर क्यों ना भटक गए हों, वह आपको ढ़ूंढ़ने और बचा कर लौटा लाने के लिए आया है। उसकी सहायता आपकी बस एक पुकार भर की दूरी पर ही है। सच्चे मन से उसे पुकारिए और अनन्त जीवन के भागी हो जाइए।- डेविड रोपर


उद्धार का मार्ग पाने के लिए आपको बस मान लेना है कि आप पाप में भटक गए हैं।

...मेरे साथ आनन्‍द करो, क्‍योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। - लूका १५:६

बाइबल पाठ: लूका १५:१-१०
Luk 15:1  सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें। 
Luk 15:2  और फरीसी और शास्त्री कुडकुडाकर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luk 15:3 तब उस ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luk 15:4  तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? 
Luk 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्‍द से उसे कांधे पर उठा लेता है। 
Luk 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों इकट्ठे करके कहता है, मेरे साथ आनन्‍द करो, क्‍योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। 
Luk 15:7 मैं तुम से कहता हूं, कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्‍वर्ग में इतना ही आनन्‍द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धमिर्यों के विषय नहीं होता, जिन्‍हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luk 15:8  या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहारकर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे 
Luk 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी करके कहती है, कि मेरे साथ आनन्‍द करो, क्‍योंकि मेरा खोया हुआ सिक्का मिल गया है। 
Luk 15:10 मैं तुम से कहता हूं, कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्‍द होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ८-९ 
  • २ कुरिन्थियों ३

रविवार, 9 सितंबर 2012

प्रेम की आज्ञा


   सिंगापुर में कुछ बूढ़े माँ-बाप पनए जीवन-यापन के लिए परोपकारी संस्थाओं और सरकारी विभागों से सहायता मांगने और उनपर निर्भर रहने को मजबूर हैं क्योंकि उन की व्यस्क सन्तान उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है। यह रवैया बढ़ता ही जा रहा है और इस संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "हम प्रेम करना कानून बाध्य तो कर नहीं सकते!"

   किंतु परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेम करना परमेश्वर की आज्ञा है। यही बात मूसा ने इस्त्राएली समाज से कही: "क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे" (व्यवस्थाविवरण ३०:१६)। प्रभु यीशु ने भी कहा कि "सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन, प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना" (मरकुस १२:२९-३०)।

   भला परमेश्वर प्रेम करने की आज्ञा क्योंकर दे सकता है? प्रेम तो एक भावना है, उसे आज्ञा कैसे बनाया जा सकता है? परमेश्वर ने स्वयं पहले होकर हमसे हमारी पाप की दशा में ही प्रेम किया और प्रदर्शित किया; कलवरी के क्रूस पर अपने महान प्रेम में होकर दिया गया उसका महान बलिदान ही उसे यह अधिकार देता है कि अब वह हमें भी प्रेम प्रदर्शित करने की आज्ञा दे सके। प्रेरित युहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा: "हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें" (१ युहन्ना ३:१६, २३)।

   आज आपके पास परमेश्वर की प्रेम करने की आज्ञा को निभाने के लिए क्या क्या अवसर हैं? अपने माता-पिता का आदर करना और उनकी देखरेख करना? किसी बीमार साथी या मित्र की सेवा करना? किसी ऐसे से जिसे प्रेम करना कठिन है, प्रेम और अनुग्रह के दो शब्द कहना?

   प्रभु यीशु से प्रार्थना करें, "प्रभु क्योंकि आपने अपने महान प्रेम में होकर हमारे लिए अपने प्राण दिये, हमारी सहायता करें कि हम भी दुसरों के प्रति प्रेम दिखा सकें।" - सी. पी. हिया


जो प्रेम हम एक-दुसरे के प्रति प्रदर्शित करते हैं, वह परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम को दिखाता है।

और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें। - १ युहन्ना ३:२३

बाइबल पाठ: १ युहन्ना ३:१६-२४
1Jn 3:16  हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
1Jn 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्‍योंकर बना रह सकता है?
1Jn 3:18  हे बालको, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।
1Jn 3:19  इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उस विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे।
1Jn 3:20 क्‍योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है।
1Jn 3:21  हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के साम्हने हियाव होता है।
1Jn 3:22 और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है, क्‍योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं और जो उसे भाता है वही करते हैं।
1Jn 3:23  और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें।
1Jn 3:24 और जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह इस में, और यह उस में बना रहता है: और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उस ने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है।


एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन ६-७ 
  • २ कुरिन्थियों २

शनिवार, 8 सितंबर 2012

शब्द


   नवंबर २००८ में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में भाषा और शब्दों के अभद्र प्रयोग की वैधानिक सीमाओं पर एक बहस हुई। एक पक्ष ने एक राष्ट्रीय प्रसारण करने वाली कंपनी का उदाहरण दिया जिसने अपने एक राष्ट्रीय प्रसारण में, दो कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ताओं को सामान्य रूप से समाज में प्रयोग करे जाने वाली दो अश्लील शब्दों का प्रयोग करने दिया। इस प्रसारण कंपनी का तर्क था कि ऐसे शब्द जो बात के प्रवाह में प्रयुक्त हों और बिना किसी कामुक या कामोत्तेजक भावना से प्रयोग करे जाएं, उनके प्रयोग के लिए आपत्ति करना उचित नहीं है। दूसरे पक्ष का कहना था कि अपने बच्चों को ऐसी भाषा से बचा कर रखना हमारा कर्तव्य है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, इफसुस की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने इस संबंध में कुछ निर्देष दिए। पौलुस के लिए अभद्र भाषा और अश्लील शब्दों का प्रयोग और उनकी सीमाएं किसी बहस का मुद्दा नहीं थे। पौलुस ने उन विश्वासियों से दो टूक कहा कि प्रभु यीशु मसीह में मिले उद्धार और आशीषों के प्रति अपने कर्तव्य स्वरूप उन्हें अपनी भाषा के प्रयोग पर ध्यान देना और नियंत्रण रखना ही है (इफसियों ४:२९)।

   पौलुस नहीं चाहता था कि कि वे लोग उद्धार से पूर्व के अपने पुरानी जीवन शैली में बने रहें; वह जीवन शैली जिसमें अभद्र भाषा, अश्लील शब्दों का प्रयोग, निन्दा, द्वेषपूर्ण भाषा, दूसरों को बदनाम करना, दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाली भाषा या आपस में फूट पैदा करने वाली बात-चीत इत्यादि सामन्य रूप से पाए जाते थे। ऐसी भाषा के स्थान पर पौलुस चाहता था कि अब मसीह यीशु से उद्धार पाने और परमेश्वर की सन्तान बन जाने के बाद विश्वासियों की भाषा ऐसी हो जो दूसरों तक अनुग्रह पहुँचाए, उन्हें प्रोत्साहित करे और सुनने वालों की उन्नति का कारण बने।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण हमें यह ध्यान रखना है कि जो शब्द हमारे मुँह से प्रवाहित होते हैं वे सुनने वालों के लिए जीवनदायक धारा के समान हों। जो भी हमारे शब्दों को सुने वह किसी प्रकार की कटुता नहीं वरन केवल मधुरता ही अनुभव करे। - मार्विन विलियम्स


हमारे शब्द परमेश्वर के वचन द्वारा प्रेरित होने चाहिएं।

कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। - इफीसियों ४:२९

बाइबल पाठ: इफीसियों ४:२४-३२
Eph 4:24  और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Eph 4:25  इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Eph 4:26  क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Eph 4:27  और न शैतान को अवसर दो। 
Eph 4:28  चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Eph 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Eph 4:30  और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Eph 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Eph 4:32  और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३-५ 
  • २ कुरिन्थियों १