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बुधवार, 28 जुलाई 2021

परिश्रम

 

          जो लोग विलियम केरी (1761-1834) के इंग्लैंड के उसके गाँव में उसके साथ पले बड़े हुए थे, उन्होंने सोचा होगा कि वह अधिक कुछ नहीं करने पाएगा। किन्तु आज उसे आधुनिक मसीही सेवकाइयों का पिता कहा जाता है। उसका जन्म जुलाहों के परिवार में हुआ था, और वह एक ऐसा शिक्षक और मोची बना, जो कुछ विशेष सफल नहीं था, और साथ ही अपने आप को यूनानी, इब्रानी, और लातीनी भाषाएँ भी सिखाता रहा। बहुत वर्षों के परिश्रम के बाद, उसका भारत में मसीही सेवकाई करने का सपना पूरा हुआ। किन्तु उसे बहुत कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा, जिनमें उसके बच्चे की मृत्यु और उसकी पत्नी के मानसिक रोग भी सम्मिलित थे, तथा बहुत वर्षों तक उसे उन लोगों से इस सेवकाई के लिए जाने के लिए कोई प्रत्युत्तर नहीं मिल रहा था, जिनके मध्य वह सेवा करता था।

          ऐसा क्या था जो उसे इन सभी कठिनाइयों में होकर भी सेवकाई में लगे रहने के लिए प्रेरित करता रहा; उस सेवकाई में जिसमें उसने संपूर्ण बाइबल का छः भाषाओं में अनुवाद किया, और बाइबल के कुछ भागों का उन्तीस भिन्न भाषाओं में अनुवाद किया? उसने कहा, मुझे परिश्रम करते रहना आता है; मैं किसी भी निश्चित लक्ष्य को पूरा करने के लिए दृढ़ता से उसमें लगा रह सकता हूँ। उसने तय कर रखा था की चाहे कुछ भी हो जाए, जो भी परीक्षा आए, किन्तु वह परमेश्वर की सेवा करता रहेगा।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों का लेखक भी इसी निरन्तर बनी रहने वाली भक्ति के बारे में परामर्श देता है। लेखक ने अपने पाठकों से कहा कि वे आलसी न हों, किन्तु अन्त तक प्रयत्न करते ही रहें (इब्रानियों 6:11, 12)। उसने उन्हें आश्वासन दिया कि जब वे परमेश्वर को आदर देने में परिश्रम करते रहेंगे, तो परमेश्वर भी उनके इस परिश्रम को नहीं भूलेगा (पद 10)।

          विलियम केरी के बाद के वर्षों में, उसने इस बात पर मनन करते हुए कि परमेश्वर कैसे उसकी आवश्यकताओं को निरंतर पूरा करता रहा, कहा, “वह अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने में कभी नहीं चूका, इसलिए मैं भी उसके प्रति अपनी सेवा में कभी नहीं चूक सकता हूँ।” परमेश्वर हमें भी सामर्थ्य दे कि हम दिन-प्रतिदिन उसकी सेवा परिश्रम के साथ करते रहें। - एमी बाउचर पाई

 

हे प्रभु जब मैं कठिनाइयों और परीक्षाओं का सामना करूं, 

तो यह कभी न भूलूँ कि आप सदा मेरे साथ हैं।


और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों 1:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 6:9-12

इब्रानियों 6:9 पर हे प्रियो यद्यपि हम ये बातें कहते हैं तौभी तुम्हारे विषय में हम इस से अच्छी और उद्धार वाली बातों का भरोसा करते हैं।

इब्रानियों 6:10 क्योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर भी रहे हो।

इब्रानियों 6:11 पर हम बहुत चाहते हैं, कि तुम में से हर एक जन अन्त तक पूरी आशा के लिये ऐसा ही प्रयत्न करता रहे।

इब्रानियों 6:12 ताकि तुम आलसी न हो जाओ; वरन उन का अनुकरण करो, जो विश्वास और धीरज के द्वारा प्रतिज्ञाओं के वारिस होते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 46-48
  • प्रेरितों 28

बुधवार, 20 जनवरी 2021

लक्ष्य

 

          हम अपने जीवन की दिशा कैसे निर्धारित कर सकते हैं? एक बार मैंने इस प्रश्न का उत्तर एक अप्रत्याशित स्थान पर सुना – एक मोटर साइकिल सीखने के स्थान पर। मैं और मेरे कुछ मित्र मोटर साइकिल चलाना चाहते थे, इसलिए हम उसे चलाना सीखने के लिए गए। हमारे प्रशिक्षण का एक भाग था लक्ष्य निर्धारण करना। हमारे प्रशिक्षक ने हम से कहा, “कभी न कभी आपको कोई अनपेक्षित बाधा का सामना करना पड़ेगा। यदि आप उस बाधा ही को देखते रहोगे, तो वही लक्ष्य बन जाएगा, और आप उस से जा टकराओगे। परन्तु यदि आप उस बाधा के इधर-उधर और उसके पार देखोगे तो लक्ष्य भी उस बाधा से हट कर हो जाएगा और सामान्यतः आप उस बाधा से बचने पाओगे। आप जहाँ देखते हैं, वहीं पहुँचते भी हैं।”

          यही सरल और साधारण सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों पर भी लागू होता है। जब हम अपनी समस्याओं और संघर्षों पर ही अपने ध्यान को केन्द्रित रखते हैं, तो वे ही हमारा लक्ष्य बने रहते हैं, और स्वतः ही हम अपने जीवनों को उन्हीं के चारों ओर चलाते रहते हैं।

          किन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें प्रोत्साहित किया गया है कि हम अपनी समस्याओं के पार, उसकी ओर देखें जो उनके समाधान दे सकता है, हमारी सहायता कर सकता है। हम भजन 121:1 में पढ़ते हैं, “मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?” फिर भजनकार स्वयं ही उत्तर देता है “मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।... यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा” (पद 2, 8)।

          हो सकता है कि हमें अपनी बाधाएँ इतनी बड़ी लगें कि हमें लगने लगे कि हम उन्हें पार नहीं कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें आमंत्रित करता है कि हम अपनी उन बाधाओं के पार उसकी ओर देखें, उसी पर अपनी दृष्टि लगाए रहें। उन बाधाओं को नहीं, परमेश्वर को अपना लक्ष्य बनाएँ, और वह हमें बाधाओं के पार निकाल ले जाएगा। - एडम होल्ज़

 

यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है। (भजन 124:8)


तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। - ज़कर्याह 4:6

बाइबल पाठ: भजन 121

भजन 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?

भजन 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।

भजन 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।

भजन 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।

भजन 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।

भजन 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।

भजन 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।

भजन 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58

गुरुवार, 30 जुलाई 2020

चुनौतियां


    हम कुछ मित्रों ने मिलकर एक गुट बनाया था जो हर महीने एकत्रित होकर एक दूसरे से हमारे व्यक्तिगत लक्ष्यों के प्रति हमारे द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में हिसाब पूछता था। मेरी एक सहेली, मेरी, की इच्छा थी कि वर्ष समाप्त होने से पहले वह अपने भोजन-कक्ष की कुर्सियों पर नई गद्दियाँ और उनके कवर लगा सके। नवम्बर की हमारी सभा में उसने अक्तूबर से आगे की प्रगति का ब्यौरा दिया: “मुझे अपनी कुर्सियों को ठीक करने में दस महीने और दो घंटे लगे।” महीनों तक अपनी पसंद की सामग्री न मिल पाने, या अपनी नौकरी और छोटे बच्चे की देखभाल की अपनी व्यस्त दिनचर्या से पर्याप्त समय न निकाल पाने के कारण उसे दस महीने प्रतीक्षा करनी पड़ी; परन्तु सामग्री और समय मिलने पर उसे अपना कार्य पूरा करने में केवल दो घंटे ही लगे।

    हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि परमेश्वर ने नहेम्याह को एक बहुत बड़े काम को करने के लिए बुलाया था: यरूशलेम को पुनःस्थापित करने के लिए, जबकि उसकी दीवार 150 वर्ष से खण्डहर हुई पड़ी थी (नहेम्याह 2:3-5, 12)। जब लोगों ने नहेम्याह के नेतृत्व में उस कार्य को करना आरंभ किया तो उन्हें उपहास, आक्रमण, ध्यान बंटाने, और पाप करने के प्रलोभनों में फंसने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा (नहेम्याह 4:3, 8; 6:10-12)। परन्तु फिर भी परमेश्वर ने उन्हें दृढ़ बने रहने, और अपने प्रयासों में विचलित न होने की सामर्थ्य दी, और यह चुनौतीपूर्ण कार्य केवल बावन दिनों में ही पूरा कर लिया गया।

    ऐसी चुनौतियों पर जयवन्त होने के लिए व्यक्तिगत लालसा या लक्ष्य से भी कहीं अधिक कुछ और की आवश्यकता होती है। नहेम्याह की प्रेरणा परमेश्वर द्वारा उसे इस कार्य को पूरा करने के लिए दी गई बुलाहट थी। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसके इस दृढ़ निश्चय ने अन्य लोगों को भी, असाधारण विरोध के बावजूद, उसके नेतृत्व में इस काम को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    जब परमेश्वर हमें किसी कार्य को सौंपता है, वह चाहे किसी संबंध को फिर से ठीक करना हो या जो उसने हमारे जीवनों में किया है उसे दूसरों को बताना हो, तो वह उस कार्य के लिए आवश्यक कौशल और सामर्थ्य भी प्रदान करता है, जिससे हम उसके द्वारा दिए गए कार्य को करने के अपने प्रयासों में लगे रह सकें। चाहे जो भी चुनौती हमारे सामने आए, परमेश्वर ने हमें पहले ही से उसके लिए तैयार कर दिया है। - कर्स्टिन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर उसके द्वारा हमें सौंपे गए कार्यों को पूरा करने 

और सभी बाधाओं पर विजयी होने के लिए हमें तैयार भी करता है।


जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। - फिलिप्पियों 4:13  

बाइबल पाठ: नहेम्याह 6:1-9, 15

नहेम्याह 6:1 जब सम्बल्लत, तोबियाह और अरबी गेशेम और हमारे और शत्रुओं को यह समाचार मिला, कि मैं शहरपनाह को बनवा चुका; और यद्यपि उस समय तक भी मैं फाटकों में पल्ले न लगा चुका था, तौभी शहरपनाह में कोई दरार न रह गया था।

नहेम्याह 6:2 तब सम्बल्लत और गेशेम ने मेरे पास यों कहला भेजा, कि आ, हम ओनो के मैदान के किसी गांव में एक दूसरे से भेंट करें। परन्तु वे मेरी हानि करने की इच्छा करते थे।

नहेम्याह 6:3 परन्तु मैं ने उनके पास दूतों से कहला भेजा, कि मैं तो भारी काम में लगा हूँ, वहां नहीं जा सकता; मेरे इसे छोड़ कर तुम्हारे पास जाने से वह काम क्यों बन्द रहे?

नहेम्याह 6:4 फिर उन्होंने चार बार मेरे पास वैसी ही बात कहला भेजी, और मैं ने उन को वैसा ही उत्तर दिया।

नहेम्याह 6:5 तब पांचवी बार सम्बल्लत ने अपने सेवक को खुली हुई चिट्ठी देकर मेरे पास भेजा,

नहेम्याह 6:6 जिस में यों लिखा था, कि जाति जाति के लोगों में यह कहा जाता है, और गेशेम भी यही बात कहता है, कि तुम्हारी और यहूदियों की मनसा बलवा करने की है, और इस कारण तू उस शहरपनाह को बनवाता है; और तू इन बातों के अनुसार उनका राजा बनना चाहता है।

नहेम्याह 6:7 और तू ने यरूशलेम में नबी ठहराए हैं, जो यह कह कर तेरे विषय प्रचार करें, कि यहूदियों में एक राजा है। अब ऐसा ही समाचार राजा को दिया जाएगा। इसलिये अब आ, हम एक साथ सम्मति करें।

नहेम्याह 6:8 तब मैं ने उसके पास कहला भेजा कि जैसा तू कहता है, वैसा तो कुछ भी नहीं हुआ, तू ये बातें अपने मन से गढ़ता है।

नहेम्याह 6:9 वे सब लोग यह सोच कर हमें डराना चाहते थे, कि उनके हाथ ढीले पड़ें, और काम बन्द हो जाए। परन्तु अब हे परमेश्वर तू मुझे हियाव दे।

नहेम्याह 6:15 एलूल महीने के पच्चीसवें दिन को अर्थात बावन दिन के भीतर शहरपनाह बन चुकी।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 51-53
  • रोमियों 2


सोमवार, 22 जून 2020

लक्ष्य


     मैं उस दिन को कभी नहीं भूलूँगा जब मुझे एक भोज के समय बिली ग्राहम के साथ बैठने का सौभाग्य मिला। मैं अपने आप को सम्मानित तो अनुभव कर रहा था, किन्तु घबरा भी रहा था कि मैं उन से क्या कहूँ? मुझे लगा कि बात-चीत आरम्भ करने के लिए उनसे यह पूछना अच्छा रहेगा कि इतने वर्षों की सेवकाई में उन्हें सबसे अच्छी बात क्या लगती थी। और यह पूछने के साथ ही, मैं घबरा कर खुद ही उन्हें संभावित उत्तर भी सुझाने लगा। क्या वह राष्ट्रपतियों, राजाओं, रानियों को जानना था? या सारे संसार में लाखों लोगों को सुसमाचार प्रचार करना था?

     इससे पहले कि मैं कोई और उत्तर सुझाता, बिली ग्राहम ने मुझे रोका और बिना किसी भी हिचकिचाहट के कहा, “मुझे सबसे अच्छा प्रभु यीशु के साथ संगति रखना लगता है। उसकी उपस्थिति का एहसास रखना, उसकी बुद्धिमानी से सीखना, उसके द्वारा मेरा मार्गदर्शन और निर्देशन किया जाना – यही मेरे लिए सबसे अधिक आनन्द का विषय रहा है।” उनकी बात सुनते ही तुरंत ही मुझे अपनी दुर्बलता का बोध भी हुआ और मेरे सामने एक चुनौती भी आई। दुर्बलता का बोध इसलिए क्योंकि इस प्रश्न के लिए संभवतः यह मेरा उत्तर नहीं होता; और चुनौती इसलिए क्योंकि मैं अब चाहता था कि यह मेरा भी उत्तर हो।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस के मन भी यही बात थी जब उसने प्रभु यीशु मसीह को जाननें की बहुमूल्यता के साथ अपनी सांसारिक उपलब्धियों की तुलना की और अपनी उपलब्धियों को व्यर्थ पाया। ज़रा सोचिए, हमारे जीवन कितने उत्तम और उपयोगी होंगे यदि प्रभु यीशु की संगति में रहना और उसके मार्गदर्शन में होकर कार्य करना हमारे जीवनों का सर्वोच्च लक्ष्य बन जाए। - जो स्टोवैल

 

परमेश्वर ने आपको जहाँ पर रखा है वहाँ पर विश्वासयोग्य रहने के लिए, 

प्रभु यीशु को अपने जीवन में प्रथम स्थान दें।


यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। - यिर्मयाह 9:23-24

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14

फिलिप्पियों 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।

फिलिप्पियों 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।

फिलिप्पियों 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।

फिलिप्पियों 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ्य को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।

फिलिप्पियों 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

फिलिप्पियों 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।

फिलिप्पियों 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।

फिलिप्पियों 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 6-8
  • प्रेरितों 6


शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

दौड़



      मेरे सबसे पसंदीदा टेलिविज़न प्रोग्रामों में से एक है The Amazing Race जो वास्तविकता में होने वाली एक प्रतिस्पर्धा दौड़ का प्रसारण है। इस रियालिटी शो में दस जोड़ों को विदेश भेजा जाता है जहाँ उन्हें ट्रेन, बस, टैक्सी, बाईक्स, और पैदल यात्रा करके एक से दूसरे स्थान तक पहुँचाना होता है, जहाँ से उन्हें फिर उससे अगले स्थान के लिए निर्देश मिलते हैं। दौड़ का उद्देश्य है कि एक जोड़ा अन्य सभी से पहले अंतिम स्थान पर पहुँचे, और जीतने वाले को दसलाख अमेरिकी डॉलर ईनाम में मिलते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही जीवन की तुलना भी एक दौड़ से की, और कहा कि वह अब तक समापन रेखा तक नहीं पहुँचा है, वरन दौड़ को पूरा करने में प्रयासरत है – “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह ईनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है” (फिलिप्पियों 3:13-14)।

      पौलुस ने बीते समय की अपनी असफलताओं के दोष-बोध को उसे अपनी इस दौड़ में दौड़ने से बाधित नहीं करने दिया; और न ही उसने अपनी वर्तमान सफलताओं को उसे इस दौड़ में ढीला पड़ने दिया। वह बस मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने की इस दौड़ में निरन्तर प्रयास करता रहा।

      हम सभी मसीही विश्वासी पौलुस के समान इस दौड़ में हैं। अपनी असफलताओं या सफलताओं के बावजूद, हम मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने के उस अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ने में लगे रहें। हम किसी सांसारिक ईनाम के लिए नहीं दौड़ रहे हैं, वरन मसीह यीशु के साथ अनन्त काल के लिए रहने और आनदित होने के ईनाम के लिए दौड़ रहे हैं। - मारविन विलियम्स


मसीह यीशु का अनुसरण करते रहने को कभी छोड़ न दें।

मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:7-8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों  3:12-21
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
Philippians 3:18 क्योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार की है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
Philippians 3:19 उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।
Philippians 3:20 पर हमारा स्‍वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं।
Philippians 3:21 वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:12-41



मंगलवार, 22 मई 2018

लक्ष्य



   सुप्रसिद्ध मसीही लेखक तथा प्रचारक सी. एस. ल्युईस द्वारा लिखित Chronicles of Narnia श्रंखला की पुस्तकों के एक पात्र दृढ़ बातूनी चूहे – रीपिचीप को मैं बहुत पसंद करता हूँ। वह सुदूर पूर्व में महान बब्बर सिंह असलन [जो कहानी में प्रभु यीशु मसीह का प्रतीक है] के साथ जाकर मिलना चाहता है, और ऐसा करने के लिए दृढ़ निश्चय है। रीपिचीप अपने इस दृढ़ निर्णय के विषय कहता है, “जब तक मुझ से हो सकेगा, मैं पूर्व की ओर जलपोत में यात्रा करूँगा। यदि जलपोत अक्षम हो जाएगा तो उसमें से एक छोटी नौका लेकर उसे पूर्व की ओर खेने लगूँगा, यदि वह भी डूब गई, तो अपने चारों हाथों-पांवों से पूर्व की ओर तैरूँगा, और फिर जब मैं और तैरने नहीं पाऊँगा, यदि तब तक मैं असलन के देश में नहीं पहुँचा होऊंगा, तो अपनी नाक सूर्योदय की ओर करके डूब जाऊँगा।”

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इसी दृढ़ निश्चय को दूसरे शब्दों में व्यक्त किया, “निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं...” (फिलिप्पियों 3:14)। उसका लक्ष्य प्रभु यीशु के समान होना था; उसे और किसी बात से कोई सरोकार नहीं था। पौलुस ने स्वीकार किया कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए उसे बहुत दूर जाना होगा, परन्तु वह तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक वह उसे न प्राप्त कर ले जिसके लिए प्रभु यीशु मसीह ने उसे बुलाया था।

   हम में से कोई भी वैसा नहीं है जैसा हमें होना चाहिए। परन्तु पौलुस प्रेरित के समान अपने उस लक्ष्य की ओर प्रार्थना के साथ अग्रसर बने रह सकते हैं। पौलुस के समान हमें भी यह कहना पड़ सकता है कि, “यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ।” लेकिन दुर्बलता, असफलता, थकान के बावजूद हमें आगे बढ़ते ही जाना है (पद 12)। परन्तु सब कुछ परमेश्वर पर निर्भर करता है; उसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

   परमेश्वर आपके साथ है, आपको लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, अग्रसर रहें। - डेविड रोपर


अग्रसर रहने के लिए आवश्यक सामर्थ्य परमेश्वर प्रदान करता है।

जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। - फिलिप्पियों 4:13

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:12-16
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53



शनिवार, 14 जनवरी 2017

योग्य तथा लाभदायक


   हमारे 9 वर्षीय पुत्र रॉबर्ट ने अपनी पेन्सिल फेंकते हुए निराशा के साथ कहा, "मैं यह नहीं कर सकता; यह बहुत कठिन है!" रॉबर्ट को डिस्लेक्सिया है, जिसके कारण अक्षरों का ज्ञान, अर्थात उन्हें पढ़ना, लिखना और समझना बहुत कठिन हो जाता है; और रॉबर्ट प्रयास करते-करते निराश हो चुका था। उसकी इस निराशा एवं परेशानी का एक समाधान निकाला गया, परन्तु वह कठिन था; उसके साथ हमें भी प्रतिदिन संध्या को, बिना किसी भी अपवाद के, 20 मिनिट तक पढ़ना और अक्षरों की वर्तनी का अभ्यास करना होगा। कभी-कभी हमारा मन भी यह करने को कदापि तैयार नहीं होता था, और कभी उसकी धीमी प्रगति के कारण हमें भी निराशा होती थी। परन्तु हम रॉबर्ट को उसकी शारीरिक आयु के अनुसार पढ़ने-लिखने वाला बनाने के लिए दृढ़-संकल्प थे, इसलिए हमारे प्रयास ज़ारी रहे।

   हमारे इन प्रयासों के 2  1/2 वर्ष के पश्चात, सारे संघर्ष और आँसु योग्य और लाभप्रद लगने लगे - रॉबर्ट ने पढ़ना, लिखना और वर्तनी, तथा हमने धैर्य रख कर प्रयास करते रहना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र - प्रेरित पौलुस को परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए नियुक्त किया था, उन लोगों के बीच में जिन्होंने कभी यह नहीं सुना था; और ऐसा करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों में पौलुस को हर प्रकार की कठिनाई एवं परेशानी सहनी पड़ी। ऐसा करते हुए उसे सताया गया, मारा-पीटा गया, बन्दी बनाया गया, गलत समझा गया और उसे मृत्यु के जोखिम भी उठाने पड़े (2 कुरिन्थियों 11:23-27)। लेकिन सुसमाचार सुनने तथा उसपर विश्वास करने और मानने से लोगों के जीवनों में आने वाले परिवर्तन तथा आनन्द को देखना उस के लिए उन सभी विपरीत परिस्थितियों को योग्य बना देता था।

   यदि आज आपको लगता है कि परमेश्वर ने आपको जिस कार्य के लिए बुलाया है वह बहुत कठिन है, तो स्मरण रखिए कि इस कठिन और असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा में अद्भुत आनन्द और बहुमूल्य आत्मिक पाठ छुपे हुए हैं, जो आपको अभी चाहे ना दिखाई पड़ें, परन्तु जैसे जैसे आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, परमेश्वर उन्हें आपको दिखाता और देता जाएगा; और वह आनन्द तथा संबंधित पाठ इस सब को योग्य तथा लाभदायक बना देंगे। - मेरियन स्ट्राउड


केवल लक्ष्य ही नहीं, वरन उसका मार्ग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:6-8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाईं; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


रविवार, 3 जनवरी 2016

सहायक


   नए साल के आरंभ के समय हम में से अनेक लोग अपने आप से कुछ वायदे करते हैं, कुछ कर लेने के निर्णय करते हैं, जैसे कि: मैं अधिक बचत करूँगा; मैं नियमित व्यायाम करूँगा; मैं इंटरनैट पर कम समय व्यतीत करूँगा, आदि। हम वर्ष का आरंभ तो अच्छे इरादों के साथ करते हैं, लेकिन थोड़े समय बाद ही हमारी पुरानी आदतें हमें हमारी पुरानी बातों को दोहराने के लिए लुभाने लगती हैं। फिर हम कहीं-कहीं, कभी-कभी चूकने लगते हैं, कुछ और समय पश्चात यह चूकना बारंबार होने लगता है, निर्णय निभाने में चूक हो जाने की पुनःआवृति बढ़ने लगती है और अन्ततः चूक ही होती रह जाती है और वही स्थिति हो जाती है मानो कोई निर्णय कभी था ही नहीं।

   स्वयं-सुधार के अपने लक्ष्य चुनने और निर्णय लेने की बजाए, बेहतर तरीका यह होगा कि हम अपने आप से पूछें कि प्रभु परमेश्वर हम से क्या चाहता है? परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वकता, मीका के द्वारा अपनी प्रजा इस्त्राएल से कहा: "हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?" (मीका 6:8)। परमेश्वर द्वारा कही गई बात के सभी निर्देश हमारे शरीर के सुधार की बजाए हमारी आत्मा के सुधार से संबंधित हैं।

   धन्यवाद की बात यह है कि ऐसा कर पाने के लिए हमें अपनी किसी सामर्थ पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है; परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ रहता है कि उसकी आत्मिक उन्नत्ति में उसका सहायक रहे। इस संबंध में, इफिसीयों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, पौलुस प्रेरित कहता है: "कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ" (इफिसियों 3:16)।

   इसलिए इस नव वर्ष के आरंभ में हमारे प्रभु यीशु मसीह की समानता में और भी अधिक ढलते जाने का निर्णय लें, और परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सहायता, मार्गदर्शन और आज्ञाकारिता में होकर ऐसा हो पाने के प्रयासरत रहें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


संसाधन के रूप में जिसके पास पवित्र आत्मा है, वह विजेता हो गया है।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13

बाइबल पाठ: मीका 6:3-8
Micah 6:3 हे मेरी प्रजा, मैं ने तेरा क्या किया, और क्या कर के मैं ने तुझे उकता दिया है? 
Micah 6:4 मेरे विरुद्ध साक्षी दे! मैं तो तुझे मिस्र देश से निकाल ले आया, और दासत्व के घर में से तुझे छुड़ा लाया; और तेरी अगुवाई करने को मूसा, हारून और मरियम को भेज दिया। 
Micah 6:5 हे मेरी प्रजा, स्मरण कर, कि मोआब के राजा बालाक ने तेरे विरुद्ध कौन सी युक्ति की? और बोर के पुत्र बिलाम ने उसको क्या सम्मत्ति दी? और शित्तिम से गिल्गाल तक की बातों का स्मरण कर, जिस से तू यहोवा के धर्म के काम समझ सके। 
Micah 6:6 मैं क्या ले कर यहोवा के सम्मुख आऊं, और ऊपर रहने वाले परमेश्वर के साम्हने झुकूं? क्या मैं होमबलि के लिये एक एक वर्ष के बछड़े ले कर उसके सम्मुख आऊं? 
Micah 6:7 क्या यहोवा हजारों मेढ़ों से, वा तेल की लाखों नदियों से प्रसन्न होगा? क्या मैं अपने अपराध के प्रायश्चित्त में अपने पहिलौठे को वा अपने पाप के बदले में अपने जन्माए हुए किसी को दूं? 
Micah 6:8 हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 7-9
  • मत्ती 3


गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

महत्वकांक्षा


   क्या महत्वकांक्षी होना गलत है? क्या सर्वोत्त्म बनने की चाहत रखना और उसके लिए सतत प्रयासरत रहना सही नहीं है? सही या गलत होने का उत्तर निर्भर करता है कि महत्वकांक्षी होने और प्रयास करने के पीछे हमारा लक्ष्य और उद्देश्य क्या है - परमेश्वर की या स्वयं अपनी महिमा करना और करवाना।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में थिस्सुलुनीके की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में प्रेरित पौलुस ने उन्हें लिखा कि वे परमेश्वर को भावते हुए जीवन व्यतीत करने वाले बनें (1 थिस्सलुनीकियों 4:1)। कुछ मसीही विश्वासियों के लिए ऐसा करने का निर्णय मसीही विश्वास में आते ही तात्कालिक होता है, तो कुछ अन्य के लिए यह धीरे धीरे समय के साथ आता है तो कुछ और इसे मसीही विश्वास में आने के बाद भी संसार के प्रति अपने लगाव के कारण संसार से ठोकरें खाने और अपने विश्वास में कमज़ोर गिरते-पड़ते कदम रखकर चलने के द्वारा ही सीखते हैं। यह निर्णय जैसे भी आए, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी का यह कर्तव्य है कि वह परमेश्वर द्वारा उसके लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करे ना कि स्वयं अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्यों का (इफिसीयों 2:10)।

   इसलिए अपने कार्य के संबंध में हम मसीही विश्वासियों को प्रश्न करना चाहिए, "क्या मेरे द्वारा यह कार्य लेने से दूसरों और परमेश्वर की सेवा और भली भांति होने पाएगी?" जो भी महत्वकांक्षा परमेश्वर की ओर केंद्रित होगी वह अपने से बाहर और दूसरों की भलाई के प्रति होगी, तथा सदा यह देखेगी कि परमेश्वर ने जो गुण और वरदान हमें प्रदान किए हैं क्या हम उनका प्रयोग उसकी इच्छानुसार कर रहे हैं अथवा नहीं। पौलुस ने कहा कि हम "...मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से" (कुलुस्सियों 3:22) प्रत्येक कार्य को करें। हम चाहे जो भी कार्य करें, उसे मनुष्यों को दिखाने या प्रसन्न करने के लिए नहीं वरन परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए करें (पद 23-24)।

   हम परमेश्वर में सबसे अधिक आनन्दित और परमेश्वर को सबसे अधिक महिमान्वित तब ही करने पाते हैं जब हम पूरे उत्साह और उत्कर्षता के साथ उसकी इच्छा को पूरी करते हैं ना कि अपनी; उसकी और उसके लोगों की सेवकाई के लिए कार्य करते हैं ना कि अपनी। हमारी महत्वकांक्षाओं और प्रयत्नों की उत्तमता के प्रयासों का सर्वोत्तम और सर्वाधिक योग्य परमेश्वर ही है। - रैन्डी किलगोर


महान बनने के प्रयासों में हम छोटे ही बनते जाते हैं। - ई. स्टैनली जोन्स

निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ। - 1 थिस्सलुनीकियों 4:1 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:22-25
Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 13-14
  • लूका 10:1-24


शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

इच्छाएं और योजनाएं


   सन 1960 में, जिस माध्यमिक स्कूल में मैं विद्यार्थी था, सभी विद्यार्थियों ने प्रतिभा से संबंधित एक प्रोजैक्ट में भाग लिया। कई दिनों तक हम परीक्षाएं देते रहे जो हमारे शैक्षिक विषयों के सम्बंध में हमारे रुझान को जाँचती थीं। इसके अतिरिक्त हम से कहा गया कि भविष्य को लेकर हम अपनी योजनाएं, इच्छाएं और आशाएं भी बताएं। इस प्रोजैक्ट में भाग लेने वाले केवल हम ही नहीं थे वरन इसमें सारे अमेरिका से 1300 स्कूल और 400,000 विद्यार्थी भाग ले रहे थे। यद्यपि हम में से कोई नहीं जानता था कि आगे चलकर हमारा जीवन क्या दिशा या मोड़ ले लेगा, तो भी हम अपनी सोच के अनुसार अपने भविष्य का विचार कर रहे थे, योजना बना रहे थे।

   यही बात परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक तरशीश के निवासी शाऊल के लिए भी सच थी। एक जवान व्यक्ति के रूप में उसके जीवन का लक्ष्य था मसीही विश्वासियों का नाश करना (प्रेरितों 7:58-8:3; गलतियों 1:13)। लेकिन यही घोर मसीह विरोधी शाऊल, प्रभु यीशु से एक ही साक्षात्कार के बाद, मसीह यीशु का अनुयायी और प्रेरित पौलुस बन गया और मसीही विश्वासियों को गिनती तथा विश्वास में बढ़ाने में पूरे जी-जान से सक्रीय हो गया। जब वह यरुशलेम की ओर जा रहा था, जहाँ वह जानता था कि उसे बन्दी बनाया जाएगा और बहुत कष्ट उठाने पड़ेंगे, उसने उसके कठिन भविष्य को लेकर चिंतित हो रहे अपने मित्रों से कहा, "परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रिय जानूं, वरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है" (प्रेरितों 20:24)।

   जब हमारे जीवन का लक्ष्य परमेश्वर को महिमा देना होता है, तब परमेश्वर हमारे हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन करता है और सुरक्षा देता है। हमारी इच्छाएं और योजनाएं जो भी हों, जब हम उन्हें परमेश्वर के हाथों में छोड़ देते हैं, तब हमारी हर बात का नियंत्रण, निर्धारण और परिणाम परमेश्वर की ओर से ही होता है, फिर हमें चाहे सफलता मिले या असफलता, सब हमारी भलाई के लिए ही होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपना मसीही जीवन वैसे ही जीते रहें जैसे उसे आरंभ किया था - मसीह यीशु पर विश्वास के साथ।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 20:16-24
Acts 20:16 क्योंकि पौलुस ने इफिसुस के पास से हो कर जाने की ठानी थी, कि कहीं ऐसा न हो, कि उसे आसिया में देर लगे; क्योंकि वह जल्दी करता था, कि यदि हो सके, तो उसे पिन्‍तेकुस का दिन यरूशलेम में कटे।
Acts 20:17 और उसने मीलेतुस से इफिसुस में कहला भेजा, और कलीसिया के प्राचीनों को बुलवाया। 
Acts 20:18 जब वे उस के पास आए, तो उन से कहा, तुम जानते हो, कि पहिले ही दिन से जब मैं आसिया में पहुंचा, मैं हर समय तुम्हारे साथ किस प्रकार रहा। 
Acts 20:19 अर्थात बड़ी दीनता से, और आंसू बहा बहाकर, और उन परीक्षाओं में जो यहूदियों के षडयन्‍त्र के कारण मुझ पर आ पड़ी; मैं प्रभु की सेवा करता ही रहा। 
Acts 20:20 और जो जो बातें तुम्हारे लाभ की थीं, उन को बताने और लोगों के साम्हने और घर घर सिखाने से कभी न झिझका। 
Acts 20:21 वरन यहूदियों और यूनानियों के साम्हने गवाही देता रहा, कि परमेश्वर की ओर मन फिराना, और हमारे प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करना चाहिए। 
Acts 20:22 और अब देखो, मैं आत्मा में बन्‍धा हुआ यरूशलेम को जाता हूं, और नहीं जानता, कि वहां मुझ पर क्या क्या बीतेगा 
Acts 20:23 केवल यह कि पवित्र आत्मा हर नगर में गवाही दे देकर मुझ से कहता है, कि बन्‍धन और क्‍लेश तेरे लिये तैयार हैं। 
Acts 20:24 परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रिय जानूं, वरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 58-60


गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

उलझनें


   ब्राज़ील के फिलिप मस्सा को सिंगापुर में सितंबर 2008 में आयोजित कार ग्राँ-प्री रेस का विजेता होना चाहिए था, लेकिन एक चूक ने सब बदल दिया। रेस में अग्रणीय स्थान पर चल रहे फिलिप ने ईंधन डलवाने के लिए कार अन्दर करी और ईंधन डलवाने के बाद, इससे पहले कि ईंधन की नली और पाइप अलग किया जाता, अपनी कार चला दी। कार से उलझी हुई नली और पाइप को निकालने में हुई देरी के कारण फिलिप को प्रथम की बजाए १३वाँ स्थान पाने पर ही सन्तोष करना पड़ा।

   इस संसार में बहुत सी लुभावनी बातें हैं जो हमारा ध्यान आकर्षित करके हमें अपने वासत्विक लक्ष्य से भटका देती हैं, जैसे हमारे कुछ शौक, सिनेमा, मौज-मस्ती, कंप्यूटर खेल, टी.वी. कार्यक्रम इत्यादि। ये और ऐसी अन्य बातें आरंभ होती हैं विश्राम और तनाव दूर करने की गतिविधियों के रूप में और धीरे धीरे बढ़कर ऐसी लत बन जाती हैं जो हमारा बहुत सा उपयोगी समय ले लेती हैं और स्वयं तनाव का एक कारण हो जाती हैं। इनमें उलझकर हम मसीही विश्वासी अपने मूल उद्देश्य - प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का प्रचार तथा अपने जीवनों से परमेश्वर को महिमा देना और उसकी सेवकाई में लगे रहना, में शिथिल पड़ जाते हैं या उससे भटक जाते हैं।

   प्रेरित पुलुस ने अपने युवा साथी तिमुथियुस को भी उन सांसारिक उलझनों से बचकर रहने की चेतावनी दी जिनके कारण आत्मिक जीवन में पिछड़ापन आ जाता है। उसने तिमुथियुस को चिताया कि अपने प्रभु यीशु और उसके कार्यों से संसार की कोई बात उसके ध्यान को बंटाने ना पाए। पौलुस ने तिमुथियुस को समझाया कि क्यों उसे संसार कि बातों में उलझने से बचना है - जिससे वह अपने प्रभु को प्रसन्न कर सके। प्रेरित यूहन्ना ने भी अपनी पत्री में मसीही विश्वासीयों को संसार की बातों में उलझने से बचने के लिए लिखा क्योंकि, "क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।" (1 यूहन्ना 2:17-18)।

   आज आपका मसीही विश्वास का जीवन कैसा है? क्या आपके जीवन से प्रभु का उद्देश्य पूरा हो रहा है? कहीं सांसारिक बातों में उलझ कर आप अपनी आशीषें तो गवाँ नहीं दे रहे हैं? - सी. पी. हिया


हम मसीही विश्वासी इस संसार मे रहते अवश्य हैं परन्तु हमारी नागरिकता और उद्देश्य स्वर्गीय हैं।

जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता - 2 तिमुथियुस 2:4

बाइबल पाठ: - 2 तिमुथियुस 2:1-7
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा।
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता।
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।
2 Timothy 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4 
  • लूका 8:1-25


मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

निशाना


   यदि हम सावधान ना रहे तो हम भी उस व्यक्ति के समान हो जाएंगे जो अपने आप को बड़ा तीरंदाज़ मानता था क्योंकि उसका निशाना हमेशा सही लगता था। परन्तु उसकी सफलता का राज़ एक धोखा था; वह पहले तीर चलाता था, फिर जहां तीर जाकर लगता था उसे मध्य रखकर उसके चारों ओर निशाने के गोले बना देता था।

   अपनी कल्पना के अनुसार जीना और अपनी इच्छानुसार कार्य करना और फिर यह सोचना कि हमने जो किया वह सही किया बहुत सरल है। ऐसा करके जीवन के लक्ष्यों से दूर होते हुए भी हम अपने आप को ठीक लक्ष्य पर मानते रहते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन १४:१२ में लिखा है: "ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।"

   हमें बदला लेना, धन बटोरना, सुख-विलास के पीछे भागना, गाली देने और कोसने वालों को पलट कर गाली देना और कोसना उचित लग सकता है, परन्तु परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्गों से भिन्न हैं। परमेश्वर ने जो लक्ष्य हमारे लिए बना रखे हैं वे हैं दुख देने वालों को क्षमा करना, ज़रूरतमन्दों की खुले दिल से सहायता करना, अपने आप को नहीं वरन परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए जीवन जीना और ताड़ना देने वालों की ओर दूसरा गाल फेर देना। हमें भजनकार के समान प्रार्थना करनी चाहिए कि "हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं" (भजन ८६:११) और परमेश्वर द्वारा दिए तथा दिखाए हुए मार्ग पर चलना तथा बने रहना चाहिए।

   इस सही निशाने को साधने के लिए हम सबको सहायता की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से परमेश्वर ने हमें अपना वचन बाइबल दिया है, जिसमें उसके सभी निशाने दिए हुए हैं। जब हम अपने जीवन के निशाने को उसके निशानों के अनुसार साधते हैं तब हम सदा ही सही निशाने पर होते हैं। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के मार्ग हमारे जीवनों के लिए निशाने हैं।

यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। - भजन ८६:११

बाइबल पाठ: भजन ८६
Psa 86:1  हे यहोवा कान लगाकर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psa 86:2  मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psa 86:3  हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psa 86:4  अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psa 86:5  क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psa 86:6  हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psa 86:7  संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psa 86:8  हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ना किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psa 86:9  हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दणडवत् करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psa 86:10  क्योंकि तू महान् और आश्चर्यकर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psa 86:11  हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psa 86:12  हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psa 86:13  क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।
Psa 86:14  हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरूद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psa 86:15  परन्तु प्रभु दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psa 86:16  मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर।
Psa 86:17  मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देखकर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
यशायाह ३२-३३ 
कुलुस्सियों १

बुधवार, 12 सितंबर 2012

भिन्न लक्ष्य


   व्यावसायिक गोल्फ खिलाड़ी बायर्न नेल्सन के लिए १९४५ विलक्षण वर्ष था। जिन ३० प्रतियोगिताओं में उसने भाग लिया, उनमें से १८ उसने जीतीं, जिनमें से ११ में वह लगातार विजयी रहा। यदि वह चाहता तो अपने इस व्यवसायिक खेलने को आगे बढ़ा कर और ऊँचाईयों पर ले कर जा सकता था और अपने समय का सर्वश्रेष्ठ गोल्फ खिलाड़ी बन सकता था। किंतु यह उसका लक्ष्य नहीं था। उसका लक्ष्य था गोल्फ द्वारा इतना पैसा कमा लेना कि वह एक पशु-पालन और कृषि फार्म खरीद सके जहां वह अपनी शेष आयु वह कार्य करने में व्यतीत करे जो उसकी पहली पसन्द है। नेल्सन ने ३४ वर्ष की आयु में ही गोल्फ से अवकाश ले लिया और कृषि तथा पशु-पालन करने वाला बन गया। उसके लक्ष्य भिन्न थे।

   संसार इस प्रकार की विचारधारा को मूर्खता मान सकता है क्योंकि वह उस हृदय को नहीं समझता जो संसार से संसार की धन-दौलत और प्रसिद्धि अर्जित करने की बजाए मन की सच्ची शांति और संतुष्टि की लालसा रखता है। यह विशेषकर तब और भी अधिक लागू होता है जब कोई यह निर्णय उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए जीने के लिए करता है। किंतु संसार की समझ में जो मूर्खता है वह ही हमारे लिए अपने प्रभु से संबंधित और संसार के लक्ष्यों से भिन्न लक्ष्यों को संसार ही के समक्ष रखने के लिए एक उत्तम अवसर बन जाता है। इसी संदर्भ में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (१ कुरिन्थियों १:२७)।

   परमेश्वर के राज्य के मूल्यों के अनुसार जीवन व्यतीत करना हमें संसार की नज़रों में मूर्ख ठहरा सकता है, लेकिन यही निर्णय संसार के सामने परमेश्वर को महिमा देने का माध्यम भी बन जाता है, जिसका प्रतिफल परमेश्वर से मिलने वाली ऐसी मूल्यवान, अद्भुत और चिरस्थायी अशीष है जो संसार ना कभी दे सकता है और ना कभी जिसकी कलपना भी कर सकता है। - बिल क्राउडर


जीवन के आदर्श मूल्य व्यर्थ हैं यदि वे परमेश्वर के मूल्यों के अनुरूप नहीं।

परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - १ कुरिन्थियों १:२७

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-३१
1Co 1:18  क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 
1Co 1:19  क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा। 
1Co 1:20  कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 
1Co 1:21  क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 
1Co 1:22  यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। 
1Co 1:23  परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 
1Co 1:24  परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। 
1Co 1:25  क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।
1Co 1:26   हे भाइयों, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। 
1Co 1:27  परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करें। 
1Co 1:28  और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। 
1Co 1:29  ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। 
1Co 1:30  परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा। 
1Co 1:31  ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १३-१५ 
  • २ कुरिन्थियों ५

शनिवार, 4 अगस्त 2012

भटके हुए


   मुझे अभी भी यह सोचकर अचरज होता है कि मनुष्य सुदूर अंतरिक्ष में सैटलाईट भेज सकता है। भेजने से पहले बड़े गहन अध्ययन द्वारा हर एक सैटलाईट का पथ और कक्षा निर्धारित करी जाती है और उसी के अनुसार उसे पृथ्वी प्रेषित किया जाता है। ज़रा विचार कीजिए कि यह कितनी बड़ी बरबादी होगी यदि मंगल ग्रह की ओर भेजी गई सैटलाईट, मार्ग में किसी अन्य महत्वहीन पिंड के गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होकर अपनी कक्षा से भटक जाए और किसी अन्य मार्ग पर हो ले। ध्यान कीजिए, यह आपके जीवन में भी हो सकता है या हो रहा होगा।

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को बुलाया, तो उसकी इच्छा थी कि वे पूरी लगन और तत्परता के साथ उसके पीछे चलें। प्रभु यीशु के चेलों के लिए एक ऐसा पथ निर्धारित है जो उन्हें लगातार प्रभु यीशु की निकटता की ओर ही ले जाता है। लेकिन इस पथ पर चलते हुए कई दफा संसार और संसार कि बातों का आकर्षण हमें हमारे पथ से भटका देता है और तब हम प्रभु यीशु की नहीं वरन संसार की व्यर्थ और खोखली बातों तथा इच्छाओं की पूर्ति की निकटता में बढ़ने लगते हैं।

   ऐसे भटके हुए जीवनों के लिए परमेश्वर के वचन में भजन ६३ एक उत्तम मार्गदर्शक है। इस भजन के लेखक दाऊद ने परमेश्वर की निकटता को अपना लक्ष्य बनाया, यह जानते हुए कि केवल वह ही उसके अन्दर की प्यास को बुझा सकता है, क्योंकि परमेश्वर की करुणा जीवन की उत्तमता से बढ़कर है (पद ३)। परमेश्वर की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति पर वह हर पल विचार करता रहता था, "जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा" (पद ६)। दाऊद ने समझा और जाना कि जीवन का वास्तविक आनन्द और उद्देश्य दूर ही से परमेश्वर को निहारने के द्वारा नहीं वरन भरसक प्रयास के साथ उसके साथ साथ चलने में है।

   यदि आप आज अपने लक्ष्य से या अपने पथ से भटक गए हैं, तो व्यर्थ के आकर्षणों को छोड़कर पुनः अपने सही पथ और लक्ष्य की ओर लौट आएं, और परमेश्वर की नज़दीकी में चलने का मार्ग पर बढ़ें। - जो स्टोवैल


आप जितना परमेश्वर की निकटता में चलेंगे, अन्य बातों को बीच में आने का उतना कम स्थान मिलेगा।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन ६३:१

बाइबल पाठ: भजन ६३
Psa 63:1  हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। 
Psa 63:2  इस प्रकार से मैं ने पवित्रस्थान में तुझ पर दृष्टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूं। 
Psa 63:3  क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा। 
Psa 63:4  इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा; और तेरा नाम लेकर अपने हाथ उठाऊंगा।
Psa 63:5  मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार करके तेरी स्तुति करूंगा। 
Psa 63:6  जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा; 
Psa 63:7  क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा। 
Psa 63:8  मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है, और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है।
Psa 63:9  परन्तु जो मेरे प्राण के खोजी हैं, वे पृथ्वी के नीचे स्थानों में जा पड़ेंगे; 
Psa 63:10  वे तलवार से मारे जाएंगे, और गीदड़ों का आहार हो जाएंगे। 
Psa 63:11  परन्तु राजा परमेश्वर के कारण आनन्दित होगा; जो कोई ईश्वर की शपथ खाए, वह बड़ाई करने पाएगा; परन्तु झूठ बोलने वालों का मुंह बन्द किया जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ६६-६७
  •  रोमियों ७