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मंगलवार, 25 नवंबर 2014

भय


   मेरी बेटी ऊँगली से इशारा करते हुए चिल्लाई, "मम्मी, देखो, कीड़ा!" मैंने उसके इशारा करने की ओर घूम कर देखा तो वहाँ एक बड़ा सा मकड़ा था, इतना बड़ा मकड़ा मैंने खिलौने की दिकान के बाहर पहली बार देखा था। वह मकड़ा हमारी ओर देख रहा था, और हम उसकी ओर, दोनों ही यह समझ रहे थे कि हम एक साथ एक स्थान पर नहीं रह सकते परन्तु दोनों ही अपने भय के कारण अपने स्थान से हिल नहीं पा रहे थे। चाह कर भी मैं इस गतिरोध को तोड़ने के लिए उसकी ओर एक कदम भी नहीं बढ़ा पा रही थी; मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी और भय ने मुझे मानो एक स्थान पर जमा दिया था।

   भय बहुत शक्तिशाली होता है; भय में आकर हम सही व्यवहार भूलकर गलत व्यवहार करने लग सकते हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों  के पास यह आश्वासन है कि हमें किसी भी भय में रहने की आवश्यकता नहीं है - ना तो किसी परिस्थिति के, ना ही किसी व्यक्ति या वस्तु के, मकड़ों के भी नहीं। हम परमेश्वर के वचन पर भरोसा रख सकते हैं और भजनकार के साथ परमेश्वर के लिए कह सकते हैं: "जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा" (भजन 56:3)।

   भय के प्रति ऐसा रवैया रखना परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देश "तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना" (नीतिवचन 3:5) के अनुकूल है। ऐसा करना सही होता है क्योंकि हमारी अपनी समझ हमें भय के कारण का आँकलन बढ़ा-चढ़ा कर और परमेश्वर की सामर्थ का घटा करवा सकती है। इसलिए भय के समय में हमें परमेश्वर की समझ पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि, "क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है" (यशायाह 40:28)। परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रत्येक भय का निवारण कर सकता है क्योंकि, "प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ" (1 यूहन्ना 4:18)।

   इसलिए अगली बार जब भय आपको पकड़े, तो घबाराएं नहीं, परमेश्वर पर भरोसा रखकर उसकी सामर्थ और उससे मिलने वाली सदबुद्धि तथा सलाह का सहारा लें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर किया गया भरोसा हमारे सभी भय को दूर कर सकता है।

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है। - नीतिवचन 29:25

बाइबल पाठ: भजन 56
Psalms 56:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं। वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं। 
Psalms 56:2 मेरे द्रोही दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं, क्योंकि जो लोग अभिमान कर के मुझ से लड़ते हैं वे बहुत हैं। 
Psalms 56:3 जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। 
Psalms 56:4 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:5 वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। 
Psalms 56:6 वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों। 
Psalms 56:7 क्या वे बुराई कर के भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे! 
Psalms 56:8 तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? 
Psalms 56:9 जब जिस समय मैं पुकारूंगा, उसी समय मेरे शत्रु उलटे फिरेंगे। यह मैं जानता हूं, कि परमेश्वर मेरी ओर है। 
Psalms 56:10 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, यहोवा की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा। 
Psalms 56:11 मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों का भार मुझ पर बना है; मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा। 
Psalms 56:13 क्योंकि तू ने मुझ को मृत्यु से बचाया है; तू ने मेरे पैरों को भी फिसलने से बचाया है, ताकि मैं ईश्वर के साम्हने जीवतों के उजियाले में चलूं फिरूं?

एक साल में बाइबल: 
  • 1 कुरिन्थियों 9-12


सोमवार, 24 नवंबर 2014

सर्वोत्तम


   हम एक बहुत आकर्षक स्थान पर किराए के मकान में दस वर्ष से रह रहे थे कि अचानक ही हमारे मकान मालिक को वह घर बेचना पड़ गया। हम ने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि वह परिस्थितियों में परिवर्तन कर दे और हमें उस स्थान पर ही रह लेने दे जिसे हमने अपना घर बनाया था, जहाँ हमारे बच्चे बड़े हुए। परन्तु परमेश्वर ने हमारी प्रार्थना का उत्तर ’नहीं’ में दिया।

   जब मेरी आवश्यकताओं की बात आती है तो मुझे लगता है कि कहीं मैं प्रार्थना में परमेश्वर से कोई अनुचित चीज़ तो नहीं माँग रहा, या कहीं जो मैं माँग रहा हूँ मैं उसके अयोग्य तो नहीं हूँ। लेकिन परमेश्वर के इनकार से परमेश्वर में हमारा विश्वास हिलना नहीं चाहिए क्योंकि हम सर्वदा उसके प्रेम में बने रहते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसुस की मण्डली को लिखे अपने पत्र में प्रेरित पौलुस ने लिखा कि जो प्रभु यीशु को निकटता से जानते हैं वे यह भी जानते हैं कि परमेश्वर के इनकार के पीछे भी कोई प्रेम भरा भला कारण ही है (इफिसियों 3:16-17)।

   परमेश्वर से ’नहीं’ सुनने के कुछ ही दिनों के बाद हमारे चर्च के कुछ मित्रों ने हमें एक अन्य घर किराए पर लेने का प्रस्ताव किया क्योंकि वे उसे खाली कर रहे थे। हमने यह प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार कर लिया; अब हमारे पास रहने का एक नया स्थान था जिसमें सब कुछ नया किया गया था - नए उपकरण, पानी की नई व्यवस्था, बिजली के नए तार और हमारे पुराने घर से एक अधिक शयनकक्ष। इतना ही नहीं, हमारा यह नया घर समुद्र के किनारे है और वहाँ से आते-जाते पानी के जहाज़ों और नौकाएं दिखती रहती हैं तथा समुद्र तट की मनोरम ध्वनियाँ सुनाई देती रहती हैं। यह सब कुछ हमें स्मरण दिलाता है कि हमारा परमेश्वर हमारी हर परिस्थिति से बड़ा है, हर बात में हमारी भलाई ही चाहता है। उसने ही अपने महान प्रेम में होकर हमारे लिए यह निर्धारित किया कि हमारे प्रेमी मित्र हमें कुछ ऐसा उपलब्ध कराएं जो हमारे माँगने और सोचने से भी कहीं बढ़कर था (इफिसियों 3:20)।

   चाहे परमेश्वर हमारी कलपनाओं से भी अधिक हमें प्रदान करे या हमारी इच्छाओं से कहीं कम हमें दे, हम मसीही विश्वासी एक बात का सदा विश्वास रख सकते हैं - हमारे लिए उसकी योजनाएं सर्वोत्तम योजनाएं हैं, वह जो देगा सदा सर्वोत्तम ही देगा। - रैंडी किलगोर


जब परमेश्वर किसी प्रार्थना के लिए इनकार करे तो विश्वास रखें कि वह हमारे भले के लिए ही है।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8 

बाइबल पाठ: इफिसियों 3:14-21
Ephesians 3:14 मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, 
Ephesians 3:15 जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। 
Ephesians 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ। 
Ephesians 3:17 और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। 
Ephesians 3:18 सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। 
Ephesians 3:19 और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Ephesians 3:20 अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है, 
Ephesians 3:21 कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 कुरिन्थियों 5-8


रविवार, 23 नवंबर 2014

धन-संपदा


   घटना उन दिनों की है जब हमारा परिवार अफ्रीका के कीन्या देश में रह रहा था। हमारे साथ कार में नायरोबी से एक महिला आई, उसके माता-पिता विक्टोरिया झील के पास के एक गाँव में रहते थे और उसे उनसे मिलने जाना था। उस गाँव तक जाने से पहले हम एक होटल पर रुके ताकि अपना सामान गाड़ी से उतार कर वहाँ रख दें क्योंकि गाँव से वापस आकर हमें वहीं रहना था। होटल का हमारा कमरा एक सामान्य सा दो पलंग तथा बिस्तर वाला कमरा था; लेकिन उस कमरे और वहाँ के सामान को देखकर वह महिला विसमय से बोली, "इतना सब कुछ और वह भी केवल तुम पाँच लोगों के लिए!" जिसे हम सामान्य समझ रहे थे वह उसकी नज़रों में विलासता जैसा था। धन-संपदा का माप भी ऐसे ही तुलनात्मक है; हम जो विकसित देशों में रहते हैं और अपने जीवन के स्तर के बारे में शिकायत करते रहते हैं यह भूल जाते हैं कि जिसे हम निम्न कोटी का जीवन स्तर समझते हैं वह संसार के अनेक लोगों की नज़रों में उच्च कोटि का हो सकता है।

   इफसुस की मसीही विश्वासियों की मण्डली में कुछ ऐसे थे जो अन्य सदस्यों की अपेक्षा अधिक धनी थे। उस मण्डली की देखभाल करने वाले पास्टर, तिमुथियुस, को प्रेरित पौलुस ने लिखा, "इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है" (1 तिमुथियुस 6:17)। पौलुस चाहता था कि वे सांसारिक धन-संपदा में नहीं वरन भलाई में धनी हों: "और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों" (1 तिमुथियुस 6:18)।

   जो हमारे पास है उसे दूसरों की भलाई में खर्च करने की बजाए उसे थामे रखने की हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। लेकिन हमारे लिए धन-संपदा की चुनौती परमेश्वर के प्रति भरोसा और धन्यवाद से तथा लोगों के प्रति उदारता से भरा हृदय रखने की है, जैसे परमेश्वर ने हमारे प्रति किया है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


हमारा पारिश्रमिक हमारा जीवन चलाने के लिए तथा हमारी उदारता हमारा जीवन बनाने के लिए है।

और उस[प्रभु यीशु] ने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। - लूका 12:15

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-10, 17-19
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। 
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। 
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। 
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। 
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है।
1 Timothy 6:17 इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। 
1 Timothy 6:18 और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों। 
1 Timothy 6:19 और आगे के लिये एक अच्छी नेव डाल रखें, कि सत्य जीवन को वश में कर लें।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 कुरिन्थियों 1-4


शनिवार, 22 नवंबर 2014

उदारता और बहुतायत


   हाल ही की बात है मैं एक होटल में आया; उस होटल के स्वागत कक्ष में फूलों की सजावट हो रखी थी। इतनी बहुतायत के साथ फूलों की सजावट मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। वह स्थान सुन्दरता से सजाए गए विभिन्न रंगों के फूलों और उनकी सुगन्ध से भरा हुआ था, और उस सारे दृश्य का प्रभाव अद्भुत था। मैं चलते चलते रुक गया और उस सुन्दरता को निहारने लगा। मुझे विचार आया कि बहुतायत में कुछ बात है जो हमारे मनों को भाती है। ज़रा भिन्न रस भरे फलों से भरी हुए किसी टोकरी के बारे सोचिए, या फिर कई प्रकार की मिठाईयों से सजी मेज़ के बारे में - बहुतायत को देखने, सोचने का आनन्द ही कुछ और होता है।

   इस बहुतायत के आनन्द से मुझे परमेश्वर की उदारता की याद आती है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें परमेश्वर और उसकी उदारता के बारे में बहुत कुछ बताती है। बाइबल बताती है कि परमेश्वर हमारे कटोरे को उमड़ने देता है (भजन 23:5); वह "ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है" (इफिसियों 3:20); उसका अनुग्रह हमारे जीवन में आने वाली प्रत्येक कठिनाई से पार पाने के लिए सक्षम है (2 कुरिन्थियों 12:9); और जब कोई पश्चाताप के साथ लौट कर उसके पास वापस आता है तो वह उस के आनन्द को मनाने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करता है (लूका 15:20-24)।

   इसीलिए भजनकार आनन्दित होकर कहता है कि, "हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं। वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा" (भजन 36:7-8)। हमारा परमेश्वर बहुतायत का परमेश्वर है, हमारे प्रति उसकी भलाई बहुतायत से है। उसके द्वारा उदारता और बहुतायत से मिलने वाली आशीषों के लिए आईए हम बहुतायत से उसकी आराधना और स्तुति करें। - जो स्टोवैल


परमेश्वर की, जो सब आशीषों का स्त्रोत है, निरंतर प्रशंसा और स्तुति करते रहें।

तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है। - भजन - 16:11

बाइबल पाठ: भजन 36:5-12
Psalms 36:5 हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है। 
Psalms 36:6 तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।
Psalms 36:7 हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं। 
Psalms 36:8 वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा। 
Psalms 36:9 क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे।
Psalms 36:10 अपने जानने वालों पर करूणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मन वालों में करता रह! 
Psalms 36:11 अहंकारी मुझ पर लात उठाने न पाए, और न दुष्ट अपने हाथ के बल से मुझे भगाने पाए। 
Psalms 36:12 वहां अनर्थकारी गिर पड़े हैं; वे ढकेल दिए गए, और फिर उठ न सकेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 12-16


शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

सहज और सरल


   सन 1814 में सेमिनरी से स्नातक होने के पश्चात थोमस ग्लौडेट का इरादा मसीही विश्वास का प्रचारक बनने का था। लेकिन प्रचारक बनने के उसके इरादे ने एक अलग ही मोड़ ही मोड़ ले लिया जब उसकी मुलाकात एलिस नामक एक 9 वर्षीय लड़की से हुई। एलिस उसके पड़ौस में ही रहती थी और सुन नहीं सकती थी क्योंकि वह बधिर थी। ग्लौडेट ने लकड़ी के द्वारा मिट्टी पर लिख कर एलिस के साथ संवाद करने के प्रयास किए। एलिस के साथ इस प्रकार वार्तालाप कर पाने की सफलता ने ग्लौडेट को प्रेरित किया कि वह ऐसे अन्य बधिरों के साथ भी संवाद करने के प्रयास करे। उसने अमेरिका और यूरोप में बधिर लोगों की शिक्षा में लगे विशेषज्ञों से संपर्क तथा विचार-विमर्श करके एक सांकेतिक भाषा बनाई जिसमें हाथों की मुद्राओं के द्वारा सन्देश को बधिर लोगों तक पहुँचाया जाता है। अन्ततः अपने इस प्रयास को उसने एक औपचारिक रूप देकर "अमेरिकन स्कूल फ़ोर द डेफ" की स्थापना करी।

   ग्लौडेट के इस स्कूल में बधिर लोगों के लिए पाठ्यक्रम बनाया गया जो परमेश्वर के वचन बाइबल पर आधारित था, प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को बताता था और बाइबल के निर्देशों को सिखाता था। ग्लौडेट का प्रचारक बनने का आरंभिक इरादा इस प्रकार से पूरा हुआ, और वह प्रभु यीशु के प्रेम और अनुग्रह तथा परमेश्वर के कार्य के बारे में एक ऐसे विशेष लोगों तक परमेश्वर के वचन को पहुँचा सका जो इस आशीष से वंचित रहते थे। ग्लौडेट के इस सफल प्रयास का आधार था परमेश्वर के सुसमाचार को लोगों तक ऐसे रूप में पहुँचाना जिसे वे समझ सकें, ग्रहण कर सकें।

   यही आधार हम सभी मसीही विश्वासियों के लिए आज भी उतना ही आवश्यक है; हमें प्रभु यीशु में सारे संसार के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को ऐसे रूप में सभी लोगों तक पहुँचाना है जिसे वे समझ सकें और फिर ग्रहण कर सकें। अन्यथा "फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें?" (रोमियों 10:14)। परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए और विचार कीजिए कि अपने आस-पास के लोगों तक आप प्रभु यीशु मसीह के इस सुसमाचार को कैसे सहज और सरलता से समझ आने वाला बनाकर प्रस्तुत कर सकते हैं, और फिर उसे व्यावाहरिक रीति से कार्यान्वित कीजिए। - डेनिस फिशर


संसार के सर्वश्रेश्ष्ठ सन्देश को संसार के सभी लोगों तक पहुँचाएं, कोई इससे वंचित ना रहने पाए।

और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। - लूका 24:46-47

बाइबल पाठ: रोमियों 10:1-14
Romans 10:1 हे भाइयो, मेरे मन की अभिलाषा और उन के लिये परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएं। 
Romans 10:2 क्योंकि मैं उन की गवाही देता हूं, कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी के साथ नहीं। 
Romans 10:3 क्योकि वे परमेश्वर की धामिर्कता से अनजान हो कर, और अपनी धामिर्कता स्थापन करने का यत्न कर के, परमेश्वर की धामिर्कता के आधीन न हुए। 
Romans 10:4 क्योंकि हर एक विश्वास करने वाले के लिये धामिर्कता के निमित मसीह व्यवस्था का अन्त है। 
Romans 10:5 क्योंकि मूसा ने यह लिखा है, कि जो मनुष्य उस धामिर्कता पर जो व्यवस्था से है, चलता है, वह इसी कारण जीवित रहेगा। 
Romans 10:6 परन्तु जो धामिर्कता विश्वास से है, वह यों कहती है, कि तू अपने मन में यह न कहना कि स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा? अर्थात मसीह को उतार लाने के लिये! 
Romans 10:7 या गहिराव में कौन उतरेगा? अर्थात मसीह को मरे हुओं में से जिलाकर ऊपर लाने के लिये! 
Romans 10:8 परन्तु वह क्या कहती है? यह, कि वचन तेरे निकट है, तेरे मुंह में और तेरे मन में है; यह वही विश्वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं। 
Romans 10:9 कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। 
Romans 10:10 क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। 
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें?

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 9-11


गुरुवार, 20 नवंबर 2014

त्यागा हुआ


   कैरिस्सा स्मिथ अपने 4 महीने की बच्ची के साथ स्थानीय पुस्तकालय में कुछ पुस्तकें देख रही थी, और उसकी बेटी प्रसन्नचित्त होकर मुँह से कुछ आवाज़ें निकाल रही थी। एक वृद्ध व्यक्ति ने बड़े रूखे स्वर में कैरिस्सा से कहा कि या तो कैरिस्सा स्वयं अपनी बच्ची को शान्त कर ले अन्यथा वह कर देगा। कैरिस्सा ने उसे उत्तर दिया, "मैं नहीं जानती कि आपके जीवन में ऐसा क्या है जो एक प्रसन्न बच्ची के कारण आपको दुखी कर रहा है, लेकिन वह जो भी है जो एक प्रसन्न बच्ची को देखकर आपको दुखी कर रहा है, मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ; लेकिन ना तो मैं अपनी बच्ची को शान्त करूँगी और ना ही आपको उसे शान्त करने दूँगी।" उस वृद्ध ने तुरंत अपना सिर झुकाकर क्षमा माँगी, और फिर कैरिस्सा के साथ 50 वर्ष पहले अपने बेटे की अचानक हुई मृत्यु की कहानी बाँटी, जिसके दुख और आवेश को वह अपने अन्दर दबाए बैठा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 13 में दाऊद अपने दुखी मन के विचारों को बड़े खुले रूप में परमेश्वर के सामने रखता है। अपने दुख को व्यक्त करने के लिए वह बड़ी व्यथित परन्तु खरे शब्दों को प्रयोग करता है: "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?" (पद 1) दाऊद के ये प्रश्न उसके अन्दर त्यागा हुआ होने के भय को दिखाते हैं; लेकिन थोड़ी ही देर में दाऊद की यह व्यथित भाषा परमेश्वर से सहायता की पुकार में परिवर्तित हो जाती है और वह परमेश्वर में अपने विश्वास और अपने प्रति उसके प्रेम को दृढ़ता से व्यक्त करता है (पद 3-6)।

   हम सब अपने जीवनों में कठिन समयों से होकर गुज़रते हैं; हमें प्रतीत होता है कि परमेश्वर ने हमें छोड़ दिया है। लेकिन जैसे दाऊद के साथ हुआ, वैसे ही हमारे साथ भी हो सकता है - हमारा शोक आनन्द में परिवर्तित हो सकता है, यदि हम भी दाऊद के समान ही खुले मन से अपनी बात परमेश्वर के सम्मुख रखें, उससे सहायता माँगें और अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम में भरोसा व्यक्त करें क्योंकि परमेश्वर का प्रेम अपने बच्चों के प्रति ना कभी बदलता है और ना ही कभी घटता-बढ़ता है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा।

क्रोध के झकोरे में आकर मैं ने पल भर के लिये तुझ से मुंह छिपाया था, परन्तु अब अनन्त करूणा से मैं तुझ पर दया करूंगा, तेरे छुड़ाने वाले यहोवा का यही वचन है। - यशायाह 54:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 5-8


बुधवार, 19 नवंबर 2014

असफल


   अमेरिका में 1970 के दशक में एक प्रचलित सनक थी मोटरसाईकिल द्वारा लंबी दूरी की छलाँग लगाना। इस सनक की पराकाष्ठा, और संभवतः गहराई भी 8 सितंबर 1974 को देखने को मिली जब इडाहो प्रांत की स्नेक रिवर घाटी में हज़ारों दर्शक इवेल नीवेल को घाटी के एक छोर से दूसरे छोर तक एक विशेष रीति से बनाई गई ’स्काई साईकिल’ द्वारा छलाँग लगाने को देखने के लिए एकत्रित हुए। अन्ततः इवेल का यह प्रयास असफल रहा और कुछ दूर तक की छलांग के बाद वह पैराशूट द्वारा नीचे धरती पर आ गया। कुछ दर्शकों ने प्रश्न किया, "नीचे आने से पहले इवेल घाटी की चैड़ाई की कितनी दूरी तय कर सका?" लेकिन महत्वपूर्ण बात यह नहीं थी कि उसने कितनी दूरी तय करी, वरन यह कि वह पूरी दूरी तय नहीं कर सका, अपने लक्ष्य से कम रह गया और असफल माना गया।

   यह घटना पाप के साथ हमारे संघर्ष का एक अच्छा उदाहरण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोमियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। कोई मनुष्य ऐसा नहीं है जो पाप के कारण मनुष्य और परमेश्वर के बीच आई दूरी को अपने प्रयास से पार कर सके। इसीलिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु को इस संसार में भेजा जिससे वह अपने बलिदान तथा पुनरुत्थान के द्वारा पापों से पश्चाताप और उस पर विश्वास करने वाले सभी लोगों के लिए परमेश्वर और मनुष्य के बीच की उस घाटी को पार करने का मार्ग बन सके, लोगों को परमेश्वर तक ले जाने वाला बन सके।

   प्रभु यीशु ने पृथ्वी पर एक निषकलंक और निषपाप जीवन व्यतीत किया और समस्त मानव जाति के सभी पापों के दण्ड को अपने ऊपर लेकर सब के लिए उस दण्ड को सह लिया, वह हमारे बदले में मारा गया, गड़ा गया और अफिर तीसरे दिन मृतकों में से जीवित हो उठा और आज जीवित परमेश्वर है जो जगत के न्यायी के रूप में एक बार फिर आएगा: "क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है" (प्रेरितों 17:31)। जिस कार्य में हम मनुष्य केवल असफल रह सकते थे, वह प्रभु यीशु ने अपने बड़े प्रेम में होकर हम सब के लिए कर के दे दिया, उसे सभी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध करवा दिया।

   अब हमें अपने किसी असफल प्रयास को करने की नहीं वरन केवल पापों से पश्चाताप करने और प्रभु यीशु के कार्य को स्वीकार करके उसे अपने जीवनों में लागू कर लेने की आवश्यकता है, और उद्धार तथा परमेश्वर से मेल मिलाप का कार्य हमारे लिए पूरा हो जाएगा। क्या आपने परमेश्वर तथा अपने मध्य की यह दूरी प्रभु यीशु में होकर पाट ली है? - बिल क्राउडर


मसीह यीशु का क्रूस उस दूरी को पाट देता है जिसे हम अपने प्रयासों से कभी पाट नहीं सकते।

नि:सन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो। - सभोपदेशक 7:20 

बाइबल पाठ: रोमियों 3:19-28
Romans 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे। 
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो। 
Romans 3:27 तो घमण्ड करना कहां रहा उस की तो जगह ही नहीं: कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारण। 
Romans 3:28 इसलिये हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं, कि मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 1-4