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मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

पुनःस्थापित



      हमारे चर्च में एक अतिथि मसीही संगीत मण्डली आराधना और स्तुति में अगुवाई कर रही थी, और प्रभु के लिए उनका उत्साह हृदय-स्पर्शी था। हम उनके प्रभु के प्रति प्रेम और उत्साह को देख तथा अनुभव कर सकते थे। फिर उन संगीतज्ञों ने बताया कि वे सभी किसी न किसी जुर्म के लिए कैदी रह चुके थे। उनके यह बताने के बाद उनके द्वारा गाए जाने वाले गीतों का एक नया ही अर्थ हो गया, और मैं समझ सका कि उनके स्तुति के शब्दों का उनके लिए इतना गहरा महत्त्व क्यों है। उनकी वह स्तुति और आराधना उनके पहले टूटे हुए और फिर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने के द्वारा पुनःस्थापित हुए जीवनों की गवाही थी।

      संसार सफलता को गले लगाता है, परन्तु प्रभु यीशु असफल और टूटे हुओं को भी अपने पास बुलाता है और उन्हें वही आदर तथा स्थान देता है जो अन्य किसी का है। ऐसे लोगों के जीवनों की कहानियां हमें यह आश्वासन देती है कि हमारे लिए एक आशा है; हम चाहे कितनी ही बार असफल क्यों न रहे हों, परन्तु हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम फिर भी बना रहता है, वह हमें अपने पास रखने के लिए सदा लालायित रहता है। पास्टर गैरी इनरिग कहते हैं कि परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों 11, जो कि परमेश्वर पर विश्वास करने वाले दिग्गजों की सूची है, को विशवास के दिग्गजों के स्थान पर परमेश्वर द्वारा पुनःस्थापित असफल व्यक्तियों की सूची कहा जा सकता है। इब्रानियों 11 की उस सूची में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसके जीवन में कोई गंभीर कमी या त्रुटि न रही हो, और जिसे परमेश्वर ने पुनःस्थापित न किया हो। परमेश्वर के अनुग्रह का यह महान सिद्धांत है कि वह असफल लोगों को पुनःस्थापित करने के कार्य में लगा हुआ है; उसे ऐसे लोगों की लालसा है, और वह उनके जीवनों में सुधार का कार्य करना चाहता है, यदि वे उसे ऐसा करनें दें तो।

      मुझे भजन 145 की शान्ति और आशवासन बहुत पसंद है; यह भजन परमेश्वर के अद्भुत कार्यों (पद 5-6), और महिमामय राज्य (पद 11) की बात करता है। फिर इसमें परमेश्वर की करुणा (पद 8-9) और विश्वासयोग्यता का वर्णन दिया गया है (पद 13), और फिर इसके तुरंत बाद भजन बताता है कि वह गिरे हुओं को उठाता और संभालता है (पद 14)। हम पतित मनुष्यों को उठाने के लिए उसके सभी गुणों को व्यक्त किया गया है। निःसंदेह परमेश्वर पुनःस्थापित करने के कार्य में लगा हुआ है।

      क्या आप पहले कभी जीवन में असफल रहे हैं? हम सभी रहे हैं। क्या आप पुनःस्थापित हो गए हैं? जितने प्रभु परमेश्वर द्वारा छुड़ाए और बचाए गए हैं, वे सभी पुनःस्थापित किए गए हैं, तथा परमेश्वर के अनुग्रह की गवाही हैं। - लेस्ली को

हमारे असफल जीवन, परमेश्वर द्वारा सफल किए जाने की गवाही बन सकते हैं।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: भजन 145:1-16
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा।
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा।
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है।
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा।
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा।
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा।
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे।
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है।
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है।
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे!
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे;
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें।
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है।
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है।
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 1



बुधवार, 19 नवंबर 2014

असफल


   अमेरिका में 1970 के दशक में एक प्रचलित सनक थी मोटरसाईकिल द्वारा लंबी दूरी की छलाँग लगाना। इस सनक की पराकाष्ठा, और संभवतः गहराई भी 8 सितंबर 1974 को देखने को मिली जब इडाहो प्रांत की स्नेक रिवर घाटी में हज़ारों दर्शक इवेल नीवेल को घाटी के एक छोर से दूसरे छोर तक एक विशेष रीति से बनाई गई ’स्काई साईकिल’ द्वारा छलाँग लगाने को देखने के लिए एकत्रित हुए। अन्ततः इवेल का यह प्रयास असफल रहा और कुछ दूर तक की छलांग के बाद वह पैराशूट द्वारा नीचे धरती पर आ गया। कुछ दर्शकों ने प्रश्न किया, "नीचे आने से पहले इवेल घाटी की चैड़ाई की कितनी दूरी तय कर सका?" लेकिन महत्वपूर्ण बात यह नहीं थी कि उसने कितनी दूरी तय करी, वरन यह कि वह पूरी दूरी तय नहीं कर सका, अपने लक्ष्य से कम रह गया और असफल माना गया।

   यह घटना पाप के साथ हमारे संघर्ष का एक अच्छा उदाहरण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोमियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। कोई मनुष्य ऐसा नहीं है जो पाप के कारण मनुष्य और परमेश्वर के बीच आई दूरी को अपने प्रयास से पार कर सके। इसीलिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु को इस संसार में भेजा जिससे वह अपने बलिदान तथा पुनरुत्थान के द्वारा पापों से पश्चाताप और उस पर विश्वास करने वाले सभी लोगों के लिए परमेश्वर और मनुष्य के बीच की उस घाटी को पार करने का मार्ग बन सके, लोगों को परमेश्वर तक ले जाने वाला बन सके।

   प्रभु यीशु ने पृथ्वी पर एक निषकलंक और निषपाप जीवन व्यतीत किया और समस्त मानव जाति के सभी पापों के दण्ड को अपने ऊपर लेकर सब के लिए उस दण्ड को सह लिया, वह हमारे बदले में मारा गया, गड़ा गया और अफिर तीसरे दिन मृतकों में से जीवित हो उठा और आज जीवित परमेश्वर है जो जगत के न्यायी के रूप में एक बार फिर आएगा: "क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है" (प्रेरितों 17:31)। जिस कार्य में हम मनुष्य केवल असफल रह सकते थे, वह प्रभु यीशु ने अपने बड़े प्रेम में होकर हम सब के लिए कर के दे दिया, उसे सभी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध करवा दिया।

   अब हमें अपने किसी असफल प्रयास को करने की नहीं वरन केवल पापों से पश्चाताप करने और प्रभु यीशु के कार्य को स्वीकार करके उसे अपने जीवनों में लागू कर लेने की आवश्यकता है, और उद्धार तथा परमेश्वर से मेल मिलाप का कार्य हमारे लिए पूरा हो जाएगा। क्या आपने परमेश्वर तथा अपने मध्य की यह दूरी प्रभु यीशु में होकर पाट ली है? - बिल क्राउडर


मसीह यीशु का क्रूस उस दूरी को पाट देता है जिसे हम अपने प्रयासों से कभी पाट नहीं सकते।

नि:सन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो। - सभोपदेशक 7:20 

बाइबल पाठ: रोमियों 3:19-28
Romans 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे। 
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो। 
Romans 3:27 तो घमण्ड करना कहां रहा उस की तो जगह ही नहीं: कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारण। 
Romans 3:28 इसलिये हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं, कि मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 1-4