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सोमवार, 16 सितंबर 2019

क्रोध प्रबंधन



      मैं अपनी एक सहेली के साथ भोजन कर रही थी, तो उसने बताया कि वह अपने परिवार के एक सदस्य से कितनी खिसिया चुकी थी। परन्तु वह उस सदस्य से कुछ भी कहने से हिचकिचाती थी। मेरी सहेली को उस सदस्य द्वारा लगातार उसकी उपेक्षा करते रहना या उसका मजाक उड़ाते रहना कतई पसन्द नहीं था, परन्तु फिर भी वह ऐसा करता ही रहता था, मेरी सहेली को क्रोध दिलाता रहता था। अनतः जब उसने उस सदस्य से इस समस्या के विषय बात-चीत करनी चाही, तो उस सदस्य ने निन्दापूर्ण आलोचना करने के द्वारा प्रत्युत्तर दिया। इससे मेरी सहेली भड़क उठी और उसपर बहुत क्रुद्ध हुई। परिणामस्वरूप दोनों ही व्यक्तियों ने अपने-अपने रुख और कठोर कर लिए तथा परिवार के मध्य की फूट और बढ़ गई।

      मैं उसके साथ सहानुभूति रखती हूँ, उसकी परिस्थिति को समझ सकती हूँ, क्योंकि मैं भी व्यवहार में उसके समान ही हूँ। मुझे भी लोगों का उनकी गलत बातों के लिए सामना करने में बहुत कठिनाई होती है। यदि कोई परिवार का सदस्य या कोई मित्र आकर कुछ बुरा बोलता अथवा करता है, तो अकसर मैं उसे अपना प्रत्युत्तर देने की भावनाओं को दबाए रखती हूँ; और तब तक दबाए रखती हूँ जब तक कि वही व्यक्ति या कोई और आकर कुछ और अनुचित कह या कर नहीं देता है। मेरे सहने की शक्ति के परे बात जाते ही मैं भी फट पड़ती हूँ।

      संभवतः इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा कि “क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे” (इफिसियों 4:26)। अनसुलझी बातों को सुलझाने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने से क्रोध नियंत्रण में रहता है। किसी गलती का पात्र बनने पर उसे लेकर बुड़बुड़ाते और खिसियाते रहने से कडुवाहट ही उत्पन्न होती है। ऐसा करने की बजाए हमें उस बात को लेकर परमेश्वर के पास जाना चाहिए, और परमेश्वर की सहायता से “प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं” (इफिसियों 4:15)।

      क्या आज किसी व्यक्ति को लेकर आप किसी समस्या में पड़े हुए हैं? उसे अपने अन्दर दबाए रखने के स्थान पर, उस समस्या को परमेश्वर के सम्मुख खोल दें। परमेश्वर आपके क्रोध और रोष की अग्नि को अपने प्रेम और क्षमा से बुझा सकता है। - लिंडा वॉशिंगटन

क्रोध की अग्नि को बेकाबू हो जाने से पहले ही बुझा दें।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:15, 26-32
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9



रविवार, 28 अप्रैल 2019

क्रोध



      बात ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर की है, एक प्रातः फिओन मुल्हौलेंड ने पाया कि उसकी कार गायब है। तब उसे एहसास हुआ कि उसने कार को निषिद्ध क्षेत्र में खड़ा किया था, इसलिए उसे उठा कर ले जाया गया है। उसने परिस्थिति पर विचार किया, उसे जो जुर्माने के लिए 600 डॉलर देने पड़ेंगे, उसके बारे में भी सोचा, और निर्णय लिया कि वह कार को वापस लाने के लिए जिस व्यक्ति के साथ संपर्क में आएगा, उसके प्रति क्रोधित नहीं होगा। अपनी भावनाओं को क्रोध में व्यक्त करने के स्थान पर मुल्होलेंड ने उस स्थिति को लेकर एक हास्य कविता भी लिखा डाली, और जब वह कार को छुड़ाने के लिए गया तो वहाँ उपस्थित व्यक्ति को वह कविता पढ़कर सुनाई, और उस व्यक्ति को वह कविता पसन्द भी आई। इस प्रकार एक संभावित झगड़ा होने से बच गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक सिखाती है कि “मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं” (नीतिवचन 20:3)। झगड़ा वह तनाव है जो दो लोगों के बीच होता है जब वे किसी बात पर असहमत होते हैं, और या तो अन्दर ही अन्दर उबलता रहता है, या विस्फोटक होकर दोनों के मध्य बाहर निकल पड़ता है।

      परमेश्वर ने हमें सब के साथ शांतिपूर्वक रहने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए हैं। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि क्रोधित होना किन्तु पाप न करना संभव है (इफिसियों 4:26)। परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें सामर्थ्य देता है कि हम लोगों के प्रति कटु प्रतिक्रया करने, या उन्हें आहात करने करने के लिए हमें उकसाने वाली चिंगारियों से बच कर चल सकें। और प्रभु यीशु मसीह में जब भी हम आवेश में हों या उकसाए जाएँ तो, अनुसरण करने के लिए उपयुक्त उदाहरण पाते हैं (1 पतरस 2:23)। हमारा प्रभु परमेश्वर दयालु, अनुग्रहकारी, क्रोध करने में धीमा, और बहुतायत से प्रेम तथा विश्वासयोग्यता बनाए रखता है (भजन 86:15)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


क्रोध करने में धीमे रहो।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों 4:26

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 3-5
  • लूका 20:1-26



रविवार, 5 नवंबर 2017

क्रोध


   शायद उस दिन मेरे पड़ौसियों को समझ नहीं आ रहा होगा कि शरद ऋतु की उस प्रातः मुझे देखकर वे मेरे बारे में क्या सोचें। मैं हाथ में बेलचा पकड़े हुए घर के अन्दर आने के रास्ते के किनारे, नाले के कोने के नीचे जमी हुई बर्फ को तोड़ने का प्रयास कर रही थी, और बेलचे के हर प्रहार के साथ क्रोधावेश के साथ प्रार्थनाएं करती जा रही थी, जो एक ही बात को लेकर थीं: "बस बहुत हो गया; मुझमें अब और करने की शक्ति नहीं है।" मुझे घर की देखभाल करनी होती है और मेरे पास करने के लिए कार्यों की लंबी सूचि रहती है, और अब यह जमी हुई बर्फ भी मेरे कार्यों की सूचि को बढ़ा रही थी, मेरे सीमित समय में दख़ल दे रही थी। मेरा वह क्रोधावेश झूठ के एक पुल्लिन्दे पर आधारित था - "मेरे साथ इससे बेहतर व्यवहार होना चाहिए; आखिरकर, केवल परमेश्वर पर निर्भर रहना अपर्याप्त है; किसी को मेरी परवाह नहीं है।"

   जब हम अपने क्रोध के साथ चिपके रहने का निर्णय लेते हैं, तब हम कड़ुवाहट के फन्दे में फंस जाते हैं, और फिर आगे नहीं बढ़ पाते हैं। क्रोध का एकमात्र उपाय है सत्य; सत्य को स्मरण करना और उसके आगे समर्पित रहना। सत्य यह है कि परमेश्वर हमें वह नहीं देता है जो वास्तव में हमें मिलना चाहिए; वरन वह हमपर अनुग्रह करता है, हमें अपनी दया का पात्र बनाता है, "क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है" (भजन 86:5)। सत्य यह है कि उसकी सामर्थ्य हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यापत है; हमें चाहे जैसा भी प्रतीत हो, परमेश्वर हमारे लिए पर्याप्त से भी बढ़कर है।

   परन्तु इससे पहले कि हम इस आश्वासन को थामने पाएं, हमें थोड़ा पीछे हटकर, अपने प्रयासों के बेलचे को नीचे रखकर, हमारी ओर दया और अनुग्रह में बढ़े हुए प्रभु यीशु के हाथ को थामना होगा। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे क्रोधावेश को सुनने और सहने, और अपने समय तथा योजनानुसार हमें आगे ले चलने के लिए महान और विश्वासयोग्य है। - शैली बीच


अनुग्रह: परमेश्वर से वह पाना हम जिसके कदापि योग्य नहीं है; 
दया: वह नहीं पाना हम जिसके सर्वथा योग्य हैं।

मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है। - नीतिवचन 29:11

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2


गुरुवार, 20 नवंबर 2014

त्यागा हुआ


   कैरिस्सा स्मिथ अपने 4 महीने की बच्ची के साथ स्थानीय पुस्तकालय में कुछ पुस्तकें देख रही थी, और उसकी बेटी प्रसन्नचित्त होकर मुँह से कुछ आवाज़ें निकाल रही थी। एक वृद्ध व्यक्ति ने बड़े रूखे स्वर में कैरिस्सा से कहा कि या तो कैरिस्सा स्वयं अपनी बच्ची को शान्त कर ले अन्यथा वह कर देगा। कैरिस्सा ने उसे उत्तर दिया, "मैं नहीं जानती कि आपके जीवन में ऐसा क्या है जो एक प्रसन्न बच्ची के कारण आपको दुखी कर रहा है, लेकिन वह जो भी है जो एक प्रसन्न बच्ची को देखकर आपको दुखी कर रहा है, मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ; लेकिन ना तो मैं अपनी बच्ची को शान्त करूँगी और ना ही आपको उसे शान्त करने दूँगी।" उस वृद्ध ने तुरंत अपना सिर झुकाकर क्षमा माँगी, और फिर कैरिस्सा के साथ 50 वर्ष पहले अपने बेटे की अचानक हुई मृत्यु की कहानी बाँटी, जिसके दुख और आवेश को वह अपने अन्दर दबाए बैठा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 13 में दाऊद अपने दुखी मन के विचारों को बड़े खुले रूप में परमेश्वर के सामने रखता है। अपने दुख को व्यक्त करने के लिए वह बड़ी व्यथित परन्तु खरे शब्दों को प्रयोग करता है: "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?" (पद 1) दाऊद के ये प्रश्न उसके अन्दर त्यागा हुआ होने के भय को दिखाते हैं; लेकिन थोड़ी ही देर में दाऊद की यह व्यथित भाषा परमेश्वर से सहायता की पुकार में परिवर्तित हो जाती है और वह परमेश्वर में अपने विश्वास और अपने प्रति उसके प्रेम को दृढ़ता से व्यक्त करता है (पद 3-6)।

   हम सब अपने जीवनों में कठिन समयों से होकर गुज़रते हैं; हमें प्रतीत होता है कि परमेश्वर ने हमें छोड़ दिया है। लेकिन जैसे दाऊद के साथ हुआ, वैसे ही हमारे साथ भी हो सकता है - हमारा शोक आनन्द में परिवर्तित हो सकता है, यदि हम भी दाऊद के समान ही खुले मन से अपनी बात परमेश्वर के सम्मुख रखें, उससे सहायता माँगें और अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम में भरोसा व्यक्त करें क्योंकि परमेश्वर का प्रेम अपने बच्चों के प्रति ना कभी बदलता है और ना ही कभी घटता-बढ़ता है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा।

क्रोध के झकोरे में आकर मैं ने पल भर के लिये तुझ से मुंह छिपाया था, परन्तु अब अनन्त करूणा से मैं तुझ पर दया करूंगा, तेरे छुड़ाने वाले यहोवा का यही वचन है। - यशायाह 54:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 5-8


मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

ज्वालामुखी


   उसमें विस्फोटक शक्ति है, अपने मार्ग में आने वाली हर वस्तु को वह भस्म कर डालता है और उसका प्रभाव आणविक विस्फोट के समान विनाशकारी होता है। जब क्रोध किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बना कर प्रदर्षित किया जाए तब वह किसी फटते हुए ज्वालामुखी के समान ही होता है। क्रोध के आवेश का वह समय चाहे थोड़े सी देर का ही हो लेकिन अपने पीछे ध्वस्त भावनाएं, आहत संबंध और पीड़ादायक कटु अनुभव छोड़ जाता है जो लंबे समय तक कष्ट देते रहते हैं।

   दुख की बात यह भी है कि वे लोग जिनसे हम प्रेम करते हैं और जिनके साथ हम समय व्यतीत करते हैं, वे ही हमारे क्रोध और आहत करने वाले शब्दों का सबसे अधिक शिकार होते हैं। चाहे हम आवेश में आकर क्रोधित हों या किसी बात से उकसाए गए हों, प्रतिक्रीया के लिए एक चुनाव सदा ही हमारे हाथ में होता है - हमारी प्रतिक्रीया क्रोध में होगी या संयम तथा सहनशीलता के साथ।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (इफिसियों ४:३१-३२)।

   यदि आप क्रोध करने की आदत से परेशान हैं और इसके कारण आपके संबंधों पर प्रभाव आ रहा है तो अपनी इस कमज़ोरी को प्रभु यीशु के हाथों में सौंप दें क्योंकि उसी की सामर्थ से आप इस पर जयवंत हो सकते हैं: "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों ४:१३)। परमेश्वर से अपने अनियंत्रित व्यवहार और क्रोध के लिए क्षमा माँगें और उस से प्रार्थना करें कि वह आपको अपनी भावनाओं और आवेश को नियंत्रित करने की सामर्थ दे तथा दूसरों को अपने से अधिक आदर देने वाला बनाए: "भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो" (रोमियों १२:१०)। अन्य परिपक्व मसीही विश्वासियों से सहायता लें, उनकी संगति में रहें और उनसे सीखें कि उत्तेजित होने पर अपने आप को कैसे संयम में रखें।

   यदि परमेश्वर का आदर करने, उसे प्रसन्न करने तथा उसके प्रेम को दूसरों के सामने प्रदर्शित करने की सच्ची मनोभावना मन में होगी तो अपने ज्वालामुखी समान क्रोध पर जयवन्त भी अवश्य होंगे। - सिंडी हैस कैसपर


दूसरों पर अपना क्रोध उँडेल देना क्रोध से छुटकारा पाने का तरीका नहीं है।

क्रोध करने वाला मनुष्य झगड़ा मचाता है और अत्यन्त क्रोध करने वाला अपराधी होता है। - नीतिवचन २९:२२

बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२०-३२
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १३ 
  • मत्ती २६:२६-५०