ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 29 अगस्त 2015

प्रेम


   कुछ समय पहले मैंने अपनी पत्नि मर्लीन की चक्कर आने की बीमारी के साथ उसके संघर्ष के बारे में एक लेख लिखा था। उस लेख के छपने के पश्चात जो पाठकों द्वारा प्रोत्साहन के प्रत्युत्तरों की बाढ़ आई, मैं उसके लिए कतई तैयार नहीं था। पाठकों ने ना केवल प्रोत्साहन, वरन सलाह, सहायता और उसके स्वास्थ्य को लेकर उनकी चिंता को अपने प्रत्युत्तर में व्यक्त किया। ये सन्देश सारे संसार से आए, जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों से आए। प्रेम भरी चिंता के ये सन्देश संख्या में इतने अधिक थे कि हमारे लिए उन सभी का व्यक्तिगत उत्तर देना संभव नहीं रहा। एक अंग के परेशानी में पड़ने के कारण मसीह की देह द्वारा उसको इस प्रकार प्रेम से संभालना, हमारे लिए भलाई से भरा अपरिहार्य अनुभव था, जिसके लिए हम अति कृतज्ञ थे और सदा रहेंगे।

   यथार्त में मसीह की देह अर्थात मसीही विश्वासियों की मण्डली को इसी प्रकार कार्य करना चाहिए; मसीह यीशु में अपने भाई-बहिनों के प्रति प्रेम भरी चिंता रखना इस बात का प्रमाण है कि हमने मसीह के प्रेम को चखा है। प्रभु यीशु ने पकड़वाए जाकर क्रूस पर चढ़ा दिए जाने से पहले अपने चेलों के साथ किए गए अंतिम भोज के दौरान अपने चेलों से कहा, "मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:34-35)।

   मैंने और मर्लीन ने मसीह के समान किए गए प्रेम और चिंता का स्वाद उन संदेशों द्वारा चखा। हम सब मसीही विश्वासियों का यह कर्तव्य है कि हम अपने तथा सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के प्रेम को दूसरों को दिखाएं और अपनी इस गवाही से अपने प्रभु की आराधना तथा बड़ाई करें। - बिल क्राउडर


एक दूसरे के प्रति रखे गए हमारे प्रेम की गहराई ही परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम की ऊंचाई को दिखाती है। - मोर्ली

क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - रोमियों 13:9 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:31-35 मत्ती 22:37-40
John 13:31 जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा; अब मनुष्य पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्वर की महिमा उस में हुई। 
John 13:32 और परमेश्वर भी अपने में उस की महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा। 
John 13:33 हे बालकों, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं। 
John 13:34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। 
John 13:35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Matthew 22:40 ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 126-128
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33


शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

बचाव का मार्ग


   पश्चिमी वर्जीनिया के अपालाचियन पहाड़ों से होकर गुज़रने वाले राजमार्ग 77 पर अनियंत्रित ट्रकों को मार्ग से किनारे कर के रोक लेने के लिए ढलानों पर अनेक स्थान बने हुए हैं। ये आधे-पक्के किए हुए स्थान राजमार्ग के उस भाग पर स्थित हैं जो 6 मील की दूरी में 1300 फीट नीचे उतर आता है। सड़क के घुमावदार होने के साथ इस तीव्र ढलान के कारण गाड़ियों, विशेषकर ट्रकों के लिए समस्या होने की संभावना सदा बनी रहती है, इसीलिए अधिकारियों ने उनकी सहायता के लिए पहले से ही उपाय बना कर रख दिया है।

   जैसे ढाल पर अनियंत्रित गाड़ी या ट्रक को बचने का मार्ग चाहिए होता है, हमें भी जीवन के मार्ग में कई बातों से बचने में सहायता चाहिए होती है, विशेषकर तब जब अनियंत्रित अभिलाषाएं हमारे आत्मिक जीवन को जोखिम में डालने लगती हैं। हमारा परमेश्वर पिता हमारी इस संभावना और स्थिति को अच्छे से जानता है, इसीलिए उसने हमारी सहायता के लिए पहले ही से साधन बना कर दे दिया है। जब भी हम किसी अनुचित प्रलोभन या लालसा में पड़ें, तो परमेश्वर के वायदे को स्मरण रखें: "...परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा..." (1 कुरिन्थियों 10:13)। परमेश्वर अपने वचन के द्वारा हमें प्रलभोनों को "नहीं" कहने की सामर्थ देता है; जब शैतान ने प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में उनके 40 दिनों के उपवास के पश्चात भोजन, अधिकार तथा परमेश्वर पर विश्वास की बातों को लेकर परीक्षा करी तो प्रभु यीशु ने उसके प्रत्येक वार को परमेश्वर के वचन के सही प्रयोग के द्वारा विफल किया।

   जब हम किसी प्रलोभन या परीक्षा में पड़ें तो हमें प्रतीत हो सकता है कि बस अब हमारा विनाश आने ही वाला है, बीते समयों की असफलताएं तथा दूसरों द्वारा हमारे तिरिस्कार की यादें हमारी निराशा को और भी बढ़ा सकती हैं। लेकिन ऐसे में भी हम परमेश्वर पर भरोसा बनाए रख सकते हैं कि हमारी हर परीक्षा में वह हमारे प्रति वफादार और सहायक है; वह ना केवल हमें परीक्षा का सामना करने की सामर्थ देगा वरन उससे बच कर निकल पाने का मार्ग भी देगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रलोभन और परीक्षा से बचने का सबसे उत्त्म मार्ग है परमेश्वर कि शरण में भाग जाना।

इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है; - व्यवस्थाविवरण 7:9 

बाइबल पाठ: मत्ती4:1-11 1 कुरिन्थियों 10:12-13
Matthew 4:1 तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो। 
Matthew 4:2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी। 
Matthew 4:3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। 
Matthew 4:4 उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। 
Matthew 4:5 तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। 
Matthew 4:6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे। 
Matthew 4:7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। 
Matthew 4:8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर 
Matthew 4:9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। 
Matthew 4:10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर। 
Matthew 4:11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे।

1 Corinthians 10:12 इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। 
1 Corinthians 10:13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18



गुरुवार, 27 अगस्त 2015

करुणा


   उस विशाल विज्ञापन पटल की ओर निगाह का ना जाना लगभग असंभव था; उस लाल पृष्ठभूमि वाले पटल पर बड़े बड़े सफेद अक्षरों से लिखा था, "इस वर्ष हज़ारों लोग अपनी ढिटाई के कारण मर जाएंगे!" बाद में मुझे मालुम पड़ा कि उसके जैसे सैंकड़ों और विज्ञापन पटल स्थान स्थान पर लगाए गए थे, और उनके संदेश का निशाना अधेड़ उम्र के वे हज़ारों लोग थे जो चिकित्सा जाँच करवाने से जान-बूझ कर बचते रहते थे और फिर ऐसी बीमारियों से मर जाते थे जिन से बचा जा सकता था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का 32वें भजन एक ऐसी ही बीमारी के बारे में है जिससे बचने का सरल और मुफ्त उपाय तो है लेकिन फिर भी प्रतिदिन संसार के हज़ारों लोग उस बीमारी और उसके अनन्तकालीन परिणामों की गंभीरता को नज़रंदाज़ करके अनन्तकाल के विनाश में चले जाते हैं। वह बीमारी है मनुष्य का पाप; जिसका बड़ा सरल, सब के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध और सदैव कारगर उपाय विद्यमान है - अपने पापों का अंगीकार करके सच्चे, सीधे मन से प्रभु यीशु से उन पापों की क्षमा माँगना और अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देना।

   भजन 32 के पहले पाँच पद दोष को छुपाने से होने वाली पीड़ा और फिर उन पापों को परमेश्वर के समक्ष मान लेने से मिलने वाली क्षमा के आनन्द का वर्णन करते हैं। फिर आगे हम 6-8 पद में पाते हैं कि परमेश्वर लालसा रखता है कि हम अपने संकट में उससे सहायता लें, और जो उससे सहायता तथा मार्गदर्शन माँगते हैं, उन्हें वह देता भी है: "मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा" (भजन 32:8)। आगे परमेश्वर सचेत भी करता है कि हम ढिटाई में ना पड़ें, जिस में से परमेश्वर को हमें बरबस निकालना पड़े, "तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के" (भजन 32:9)। भजन का अन्त परमेश्वर की करुणा के आश्वासन और उस करुणा के आनन्द के साथ होता है, "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)।

   क्या आप ने परमेश्वर की करुणा का लाभ उठा कर अपने अनन्तकाल को सुनिश्चित कर लिया है, या आप अभी भी अपनी ढिटाई में अनन्तकाल के विनाश को ही थामे हुए है? परमेश्वर की करुणा और क्षमा आप के लिए आज और अभी उपलब्ध है, उसे नज़रन्दाज़ मत कीजिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की क्षमा को प्राप्त करने के लिए पहला कदम है यह अंगीकार करना कि हमें उस क्षमा की आवश्यकता है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यिर्मियाह 17:7-8 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। 
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई। 
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। 
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-122
  • 1 कुरिन्थियों 9



बुधवार, 26 अगस्त 2015

सहारा


   पिछली गर्मियों में जब मेरेलिन ने एक वर्क्ष का पौधा लगाया तो उसके सामने यह प्रश्न था - पौधे को सहारा दिया जाए या ना दिया जाए? जिस से उसने पौधा खरीदा था, उस विक्रेता ने मेरेलिन को कहा था कि, "एक वर्ष तक इस पौधे को सहारा दिए रखिए जिससे वह तेज़ हवाओं को झेल सके, फिर उस सहारे को हटा दीजिए जिस से उसकी जड़ें गहरी और मज़बूत हो जाएं और उसे थामे रहें।" लेकिन मेरेलिन के एक पड़ौसी ने उसे सलाह दी कि "कोई सहारा ना लगाए जिस से वह पौधा आरंभ से ही गहरी और मज़बूत जड़ों वाला हो, वरना बड़ा होने और पूरा पेड़ बनने में उसकी जड़ें कमज़ोर रह जाएंगी। सहारा नहीं देना दीर्घ-कालीन स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।"

   रिश्तों के पनपने में भी हम इसी प्रश्न को लेकर चिंतित होते हैं। यदि हमारा कोई प्रीय अपने आप को किसी परेशानी में डाल लेता है, तब क्या हमें उसे उस परेशानी से निकालने के द्वारा उसे सहारा देना चाहिए, या फिर उसे अपने किए के परिणाम भुगतने के द्वारा स्वयं को मज़बूत बनने देना चाहिए, अपनी "जड़ें गहरी" करने देना चाहिए? उस व्यक्ति के दीर्घ-कालीन स्वास्थ्य के लिए जो बेहतर हो वही हमें करना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक के 19 अध्याय में हमें दोनों ही प्रकार के विचार मिलते हैं - हमें दया के साथ सहायता करनी चाहिए (पद 17), परन्तु ऐसा करने से खतरा भी है क्योंकि इसे बारंबार करने की आवश्यकता भी हो सकती है (पद 19)। ऐसे में सही बात को करने के लिए हमें हमारी अपनी समझ-बूझ से बढ़कर बुद्धिमता की आवश्यकता होती है।

   इसीलिए परमेश्वर ने हमें अपने ऊपर ही नहीं छोड़ दिया है। हम जब भी उससे बुद्धि माँगेंगे, उसका आश्वासन है कि वह हमें बुद्धि देगा (याकूब 1:5)। जब हम परमेश्वर को अपना सहारा बना लेते हैं, वह हमें मज़बूती प्रदान करता है और हमारी जड़ों को गहरा करता है। - ऐनी सेटास


सही बुद्धिमता संसार को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देखने में है।

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। - याकूब 1:5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 19:15-25
Proverbs 19:15 आलस से भारी नींद आ जाती है, और जो प्राणी ढिलाई से काम करता, वह भूखा ही रहता है। 
Proverbs 19:16 जो आज्ञा को मानता, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो अपने चाल चलन के विषय में निश्चिन्त रहता है, वह मर जाता है। 
Proverbs 19:17 जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा। 
Proverbs 19:18 जब तक आशा है तो अपने पुत्र को ताड़ना कर, जान बूझ कर उसको मार न डाल। 
Proverbs 19:19 जो बड़ा क्रोधी है, उसे दण्ड उठाने दे; क्योंकि यदि तू उसे बचाए, तो बारंबार बचाना पड़ेगा। 
Proverbs 19:20 सम्मति को सुन ले, और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अन्तकाल में बुद्धिमान ठहरे। 
Proverbs 19:21 मनुष्य के मन में बहुत सी कल्पनाएं होती हैं, परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है। 
Proverbs 19:22 मनुष्य कृपा करने के अनुसार चाहने योग्य होता है, और निर्धन जन झूठ बोलने वाले से उत्तम है। 
Proverbs 19:23 यहोवा का भय मानने से जीवन बढ़ता है; और उसका भय मानने वाला ठिकाना पा कर सुखी रहता है; उस पर विपत्ती नहीं पड़ने की। 
Proverbs 19:24 आलसी अपना हाथ थाली में डालता है, परन्तु अपने मुंह तक कौर नहीं उठाता। 
Proverbs 19:25 ठट्ठा करने वाले को मार, इस से भोला मनुष्य समझदार हो जाएगा; और समझ वाले को डांट, तब वह अधिक ज्ञान पाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:89-176
  • 1 कुरिन्थियों 8


मंगलवार, 25 अगस्त 2015

अगला अध्याय


   स्टीव सन 1956 में लगभग 5 वर्ष का था जब उसके पिता, जो मसीही सेवकाई में लगे विमान चालक थे, तथा उनके चार साथियों को मध्य अमेरिका के इक्योडोर देश के वॉवडानी कबीले के लोगों ने मार डाला। लेकिन उन मारे गए लोगों के परिवार जनों द्वारा दिखाए गए प्रेम और क्षमा के कारण आज उस वॉवडानी कबीले में मसीही विश्वासियों का एक बढ़ता हुआ समूह है। बड़ा होकर स्टीव इक्योडोर देश के उसी वॉवडानी कबीले के लोगों में गया और उसके पिता की हत्या करने वाले व्यक्तियों में से एक व्यक्ति, मिनकाए से मित्रता करी।

   जीवन के लिए स्टीव का मानना तथा आदर्श वाक्य है, "अपनी कहानी परमेश्वर को लिखने दीजिए"; उसका कहना है कि "ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी कहानी स्वयं लिखते हैं परन्तु जब उसमें कोई गड़बड़ होती है या बाधा आती है तो परमेश्वर को उसे सुधारने वाले संपादक के समान प्रयोग करते हैं। लेकिन मैंने बहुत पहले ही ठान लिया था कि मैं अपनी संपूर्ण कहानी परमेश्वर को ही लिखने दूँगा।" जब 2012 में स्टीव गंभीर दुर्घटना का शिकार हुआ तो उसने अपने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा, "परमेश्वर को यह अध्याय भी लिखने दो।" आज भी उसका मसीही विश्वास ही उसे आगे लेकर चल रहा है।

   प्रभु यीशु के अनुयायियों की कहानी निरन्तर लिखी जाती है, तथा उजागर होती रहती है। हम में से कोई नहीं जानता कि हमारे जीवन के अगले अध्याय में क्या लिखा जाएगा। लेकिन जब हम मसीह यीशु की ओर देखते हुए धीरज से अपनी दौड़ को दौड़ते रहते हैं, तो हम अपने विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले (इब्रानियों 12:1-2) प्रभु यीशु पर विश्वास के साथ आगे भी बढ़ते रह सकते हैं।

   प्रभु यीशु ने ही हमारे जीवन-गाथा के आरंभ को लिखा, और वही हमारे जीवन के अगले अध्याय को और फिर अन्त को भी लिखेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


अपने आस-पास के संसार को आपके जीवन में लिखी गई प्रभु यीशु के प्रेम और अनुग्रह की कहानी को बताते रहिए।

भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:8 

बाइबल पाठ: इब्रानियों12:1-11
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो। 
Hebrews 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाईं दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़। 
Hebrews 12:6 क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। 
Hebrews 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? 
Hebrews 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्तान ठहरे! 
Hebrews 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें। 
Hebrews 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं। 
Hebrews 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:1-88
  • 1 कुरिन्थियों 7:20-40


सोमवार, 24 अगस्त 2015

सहायक


   ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली जिमनास्ट, गैब्बी डगलस ने 2012 के लंडन खेलों में दो स्वर्णपदक जीतने के बाद घोषणा करी: "परमेश्वर आपको कभी नहीं छोड़ेगा। वह सदा आपके साथ रहेगा।"

   कभी कभी किसी खिलाड़ी द्वारा इस प्रकार के कथन कहे जाने का गलत अर्थ निकाल लिया जाता है; लोग समझते हैं कि खिलाड़ी कह रहा है कि क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ है इसलिए मैं कभी हार नहीं सकता! किंतु यदि हम परमेश्वर के वचन बाइबल में से भजन 118:5-6 को देखें तो हमें वास्तविक स्थिति, और गैब्बी के कथन का सही अर्थ पता चलता है। वहाँ भजनकार ने लिखा, "मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?" (भजन 118:5-6) - यहाँ स्पष्ट है कि भजन के लेखक का इस कथन से तात्पर्य है कि जब भी संकट हमारे जीवन में आएगा, प्रेम और दया से भरा हुआ परमेश्वर सदा हमारा ध्यान रखेगा, हमें आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाएगा।

   हम उस साहसी ओलंपिक विजेता से सीख ले सकते हैं। जब भी संकट आएं, अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगे, हमें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति भारी लगने लगे, गैब्बी की बात ध्यान रखें: "परमेश्वर आपको कभी नहीं छोड़ेगा।" यदि हमारा कोई प्रीय रिश्ता टूटने लगे, या अन्य कोई परेशानी आ जाए, स्थिति चाहे कोई भी हो, मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हमें निश्चय है कि हमारी सहायता कहाँ से आएगी - परमेश्वर हमारा सर्वदा उपलब्ध और हमारे पक्ष में कार्यरत सहायक है। - डेव ब्रैनन


हर परीक्षा और संघर्ष में परमेश्वर हमारे साथ है।

संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली। - भजन 120:1

बाइबल पाठ: भजन 118:1-6
Psalms 118:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 118:2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:5 मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। 
Psalms 118:6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 116-118
  • 1 कुरिन्थियों 7:1-19


रविवार, 23 अगस्त 2015

उपहार


   सर क्रिस्टोफर रेन ने 17वीं शताब्दी के अन्त के समय में लंडन शहर में 50 से भी अधिक चर्च भवनों का नक्शा और निर्माण किया। उनके चर्च भवन बनाने में दो प्रमुख विशेषताएं थीं, पहली थी कि उनके द्वारा योजनाबद्ध किए हुए चर्च में ऊँचे और नोकीले, मीनार के समान दिखने वाले ढांचे होते थे। दूसरी विशेषता के साथ कुछ गहरा अर्थ जुड़ा हुआ था। रेन को इस बात का दृढ़ निश्चय था कि उनके द्वारा बनाए गए चर्च भवन की खिड़कियों में काँच पारदर्शी और रंगहीन हों, जबकि उन दिनों चर्च में रंगीन और चित्रों को दिखाने वाले काँच लगाने की परंपरा थी। पारदर्शी और रंगविहीन काँच लगाने के पीछे रेन का कारण, रेन ही के शब्दों में था: "मानव जाति के लिए परमेश्वर का सबसे उत्तम उपहार ज्योति है।" रेन चाहते थे कि जब लोग परमेश्वर की आराधना के लिए चर्च में एकत्रित हों तो वे परमेश्वर के उस उपहार, ज्योति, में बैठें और उसका भरपूर उपयोग करें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उत्पत्ति की पुस्तक में दिए गए सृष्टि की रचना के वर्णन में सृष्टि की रचना के पहले ही दिन परमेश्वर ने ज्योति को बनाया (उत्पत्ति 1:3)। परमेश्वर द्वारा बनाई गई ज्योति केवल देखने का माध्यम ही नहीं थी, वह उस आने वाली बात का भी प्रतिरूप थी जो बाद में प्रभु यीशु अपने साथ इस पाप के अन्धकार से भरे संसार में लेकर आया। प्रभु यीशु ने अपने बारे में कहा, "तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा" (यूहन्ना 8:12)। प्रभु यीशु के अनुयायी के लिए, ज्योति, उसके तथा संसार के मुक्तिदाता के चरित्र को स्मरण करवाने का एक बड़ा और प्रत्यक्ष माध्यम है; पापों के दुषप्रभाव से मिलने वाली उस मुक्ति का जिसके लिए प्रभु यीशु ने अपने प्राण क्रूस पर बलिदान किए थे।

   रेन का मानना बिल्कुल सही था; मानव जाति के लिए परमेश्वर का सबसे बड़ा उपहार ज्योति ही है - प्रभु यीशु, जो जगत की ज्योति है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु पाप के अन्धकार में पड़े संसार को अनन्त जीवन की ज्योति देने आया।

और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे। - यूहन्ना 3:19

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:12-20
John 8:12 तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। 
John 8:13 फरीसियों ने उस से कहा; तू अपनी गवाही आप देता है; तेरी गवाही ठीक नहीं। 
John 8:14 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि यदि मैं अपनी गवाही आप देता हूं, तौभी मेरी गवाही ठीक है, क्योंकि मैं जानता हूं, कि मैं कहां से आया हूं और कहां को जाता हूं परन्तु तुम नहीं जानते कि मैं कहां से आता हूं या कहां को जाता हूं। 
John 8:15 तुम शरीर के अनुसार न्याय करते हो; मैं किसी का न्याय नहीं करता। 
John 8:16 और यदि मैं न्याय करूं भी, तो मेरा न्याय सच्चा है; क्योंकि मैं अकेला नहीं, परन्तु मैं हूं, और पिता है जिसने मुझे भेजा। 
John 8:17 और तुम्हारी व्यवस्था में भी लिखा है; कि दो जनों की गवाही मिलकर ठीक होती है। 
John 8:18 एक तो मैं आप अपनी गवाही देता हूं, और दूसरा पिता मेरी गवाही देता है जिसने मुझे भेजा। 
John 8:19 उन्होंने उस से कहा, तेरा पिता कहां है? यीशु ने उत्तर दिया, कि न तुम मुझे जानते हो, न मेरे पिता को, यदि मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते। 
John 8:20 ये बातें उसने मन्दिर में उपदेश देते हुए भण्‍डार घर में कहीं, और किसी ने उसे न पकड़ा; क्योंकि उसका समय अब तक नहीं आया था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115
  • 1 कुरिन्थियों 6