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बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

बीज और भूमि


   यदि आपको कद्दू उगाने का शौक है तो संभवतः आपने विशाल डिल्स एटलांटिक प्रजाति के कद्दुओं के बारे में सुना होगा। कैनाडा के एक फार्म में विकसित किए गए इन कद्दुओं ने सारे विश्व में अपने आकार द्वारा कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सन 2011 में क्यूबेक, कैनाडा में उगाए गए इस प्रजाति के एक कद्दू का वज़न 850 किलो था। जब समाचार पत्रों के संवादाताओं ने पूछा कि इतने बड़े कद्दू उगाना कैसे संभव हुआ तो किसान ने कहा कि यह उस भूमि के कारण है जिसमें बीज बोए गए थे। बीज तो विशाल कद्दू प्रजाति के थे लेकिन यदि भूमि सही प्रकार की ना हो तो कद्दू ठीक से बढ़ेंगे नहीं।

   प्रभु यीशु ने विभिन्न प्रकार की भूमियों के एक दृष्टांत द्वारा परमेश्वर के वचन के प्रति लोगों के प्रत्युत्तर के बारे में समझाया (मत्ती 13)। कुछ बीज मार्ग के किनारे पड़ा और चिडियों ने उसे चुग लिया, कुछ उगा तो लेकिन जड़ नहीं पकड़ पाया, कुछ उगा लेकिन झाड़ियों ने उसे दबाकर निष्फल कर दिया, लेकिन वह बीज जो अच्छी भूमि पर गिरा उग कर तीस, साठ, सौ गुणा फल लाया (मत्ती 13:8)।

   परमेश्वर चाहता है कि वह अपने वचन का बीज हम में बोए जिससे कि हम उसके अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाएं; लेकिन फल वहीं आएगा जहाँ भूमि तैयार होगी, अच्छी होगी। हम में से प्रत्येक को अपने आप से यह पूछने की आवश्यकता है कि परमेश्वर के वचन रूपी बीज के लिए हम किस प्रकार की भूमि हैं? - ब्रेंट हैकेट


आत्मा का फल आज्ञाकारिता की भूमि में उगता और बढ़ता है।

पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन। - 2 पतरस 3:18

बाइबल पाठ: मत्ती 13:1-9
Matthew 13:1 उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे जा बैठा। 
Matthew 13:2 और उसके पास ऐसी बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई कि वह नाव पर चढ़ गया, और सारी भीड़ किनारे पर खड़ी रही। 
Matthew 13:3 और उसने उन से दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें कही, कि देखो, एक बोने वाला बीज बोने निकला। 
Matthew 13:4 बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। 
Matthew 13:5 कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरे, जहां उन्हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्द उग आए। 
Matthew 13:6 पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए। 
Matthew 13:7 कुछ झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा डाला। 
Matthew 13:8 पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। 
Matthew 13:9 जिस के कान हों वह सुन ले।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

अतीत


   प्रिज़न फ़ेलोशिप (कारावास सेवकाई) के संस्थापक, चक कोल्सन ने जीवन के 40 वर्ष लोगों तक प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचाने और सुनाने का कार्य किया। जब अप्रैल 2012 में उनका देहान्त हुआ तो एक समाचार पत्र ने मुखपृष्ठ पर इसे मुख्यसमाचार बनाकर इस शीर्षक के साथ छापा: "राष्ट्रपति निक्सन के लिए कुकृत्य करने वाले चार्ल्स कोल्सन का 80 वर्ष की आयु में देहान्त।" यह अचंभित करने वाली बात थी कि प्रभु यीशु को जीवन समर्पण करने से दशकों पहले और केवल कुछ समय तक अपने राजनैतिक स्वामियों के लिए अनैतिक और अन्यायसंगत कार्य करने के कारण कोल्सन की प्रभु यीशु के लिए करी गई सेवा और समर्पण का जीवन नज़रन्दाज़ कर दिया गया; प्रभु यीशु को जानने और मानने से उनके जीवन में आए आमूलचूल परिवर्तन को कोई महत्व नहीं दिया गया, उन्हें उनके अतीत के कुकर्मों के साथ ही स्मरण किया गया।

   प्रेरित पौलुस के मसीही विश्वास में आने और प्रभु यीशु द्वारा परिवर्तित होने को भी आरंभ में लोगों ने सन्देह और भय के साथ देखा क्योंकि वह पहले मसीही विश्वासियों को सतानेवाला व्यक्ति था। जब पौलुस ने प्रभु यीशु का प्रचार करना और यह बताना आरंभ किया कि वह ही परमेश्वर का पुत्र है तो लोगों ने कहा, "...क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए?" (प्रेरितों 9:21)। जब पौलुस ने यरुशालेम जाकर प्रभु यीशु के चेलों के साथ जुड़ना चाहा, तो उन्होंने उसका विश्वास नहीं किया, वरन वे उससे डरते रहे। बाद के समयों में पौलुस ने कभी अपने अतीत को भुलाया नहीं, लेकिन अपने बीते समयों के कुकृत्यों से मिली बदनामी के वर्णन को परमेश्वर के अनुग्रह के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया (1 तिमुथियुस 1:13-14)।

   पौलुस के समान हमें अपने अतीत की असफलताओं का प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं है, और ना ही यह जताने का प्रयास करना चाहिए कि मानो वे गलत कार्य हमसे हुए ही नहीं। लेकिन हम परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं कि उसके प्रेम, अनुग्रह और सामर्थ से प्रभु यीशु में होकर हमारे पाप क्षमा किए गए, हमारे अतीत के दुषपरिणाम मिटा दिए गए, हमारा वर्तमान बदल दिया गया, हमारे भविष्य को आशा और अनन्त आशीष के साथ ज्योतिर्मय कर दिया गया है और स्वर्ग में हमारे लिए एक अजर, अमर और अनन्त मीरास तैयार रखी गई है। - डेविड मैक्कैसलैंड


केवल प्रभु यीशु ही जीवन परिवर्तित कर सकता है।

क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। - 1 कुरिन्थियों 15:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:20-30
Acts 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। 
Acts 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए? 
Acts 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्‍द करता रहा।
Acts 9:23 जब बहुत दिन बीत गए, तो यहूदियों ने मिलकर उसके मार डालने की युक्ति निकाली। 
Acts 9:24 परन्तु उन की युक्ति शाऊल को मालूम हो गई: वे तो उसके मार डालने के लिये रात दिन फाटकों पर लगे रहे थे। 
Acts 9:25 परन्तु रात को उसके चेलों ने उसे ले कर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर से लटका कर उतार दिया।
Acts 9:26 यरूशलेम में पहुंचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्तु सब उस से डरते थे, क्योंकि उन को प्रतीति न होता था, कि वह भी चेला है। 
Acts 9:27 परन्तु बरनबास उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जा कर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दमिश्क में इस ने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया। 
Acts 9:28 वह उन के साथ यरूशलेम में आता जाता रहा। 
Acts 9:29 और निधड़क हो कर प्रभु के नाम से प्रचार करता था: और यूनानी भाषा बोलने वाले यहूदियों के साथ बातचीत और वाद-विवाद करता था; परन्तु वे उसके मार डालने का यत्‍न करने लगे। 
Acts 9:30 यह जानकर भाई उसे कैसरिया में ले आए, और तरसुस को भेज दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

महत्वहीन


   मेरी सहेली जेन ने एक कार्य बैठक में चल रही चर्चा के दौरान कुछ कहा, परन्तु किसी ने कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया, इसलिए उसने वही बात दोबारा कही, फिर भी उसके सहकर्मियों ने उसे नज़रन्दाज़ कर दिया, जिससे उसे एहसास हुआ कि वहाँ उसके विचार या राय का कोई महत्व नहीं है। जेन ने अपने आप को महत्वहीन और उपेक्षित अनुभव किया, और आप समझ सकते हैं कि यह कैसा अनुभव रहा होगा।

   जेन के समान, परमेश्वर के लोगों ने भी अपने आप को ऐसे ही उपेक्षित और महत्वहीन अनुभव किया था (यशयाह 40), फर्क केवल इतना था कि उन्हें लगा कि उनकी उपेक्षा करने वाला स्वयं परमेश्वर ही है, जो उनके जीवित रहने के दैनिक संघर्ष को नज़रन्दाज़ कर रहा है। इस्त्राएल के दक्षिणी भाग के लोग बन्धुआई में चले गए थे और उनकी शिकायत थी, "...मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता" (यशायाह 40:27)।

   उस समय के परमेश्वर के भविष्यद्वकता, यशायाह ने पृथ्वी के सभी लोगों पर परमेश्वर की सार्वभौमिकता और अधिकार को मानते हुए कहा, "देखो, जातियां तो डोल की एक बून्द वा पलड़ों पर की धूलि के तुल्य ठहरीं; देखो, वह द्वीपों को धूलि के किनकों सरीखे उठाता है" (यशायाह 40:15) और यशायाह ने परमेश्वर के लोगों को समझाया कि परमेश्वर कमज़ोरों और जिन्हें आवश्यकता होती है उन्हें बल देता है (पद 29)। यशायाह ने उन लोगों को आश्वस्त किया कि यदि वे परमेश्वर की बाट जोहेंगे तो वे परमेश्वर से नया बल प्राप्त करेंगे और फिर वे उकाबों के समान उड़ान भरेंगे, दौड़ेंगे परन्तु थकेंगे नहीं (पद 31)।

   मसीही विश्वासी होने पर भी यदि आप कभी अपने आप को महत्वहीन और उपेक्षित अनुभव करें, तो स्मरण करें कि आपका परमेश्वर पिता आपकी चिंता करता है, वह सदैव अपनी नज़र आप पर बनाए हुए है। उसके समय की प्रतीक्षा कीजिए, उसे अपनी योजनाएं अपने तरीके से पूरी करने दीजिए और वह आपको भी नया बल देगा; ऐसा बल जिसके बाद आप थकेंगे नहीं। - ऐनी सेटास

चाहे हमें परमेश्वर की उपस्थिति का एहसास ना भी हो, परन्तु उसकी सप्रेम देखरेख हमारे चारों ओर सदा विद्यमान रहती है।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह 41:10

बाइबल पाठ: यशायाह 40:25-31
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4


रविवार, 11 अक्टूबर 2015

सुन्दर


   एक व्यस्त राज्मार्ग पर स्थित वह एक साधारण सा दिखने वाला मकान था। उसकी बनावट या बाहरी रूप में कोई विशेष बात नहीं थी, और मार्ग से गुज़रते हुए लोगों द्वारा उसका नज़रंदाज़ होना कोई अनोखी बात नहीं थी। लेकिन एक दिन जब मैं उसके सामने से गुज़र रहा था तो मैंने घर के बाहर बड़े अक्षरों में लिखा देखा, "बिकाऊ है", और इसके नीचे उससे कुछ छोटे अक्षरों में लिखा था "अन्दर से सुन्दर"! मैं मकान खरीदने की फिराक में तो नहीं हूँ, लेकिन फिर भी मुझ में जिज्ञासा जागृत हुई कि भला ऐसा क्या होगा जो बाहर से साधारण से दिखने वाले इस मकान को अन्दर से सुन्दर बनाता है?

   इस संदर्भ में फिर यही जिज्ञासा मेरे आत्मिक जीवन के बारे में भी उठी; क्या एक मसीही विश्वासी होने के नाते मैं अपने जीवन के बाहर भी यही लिखकर लगा सकता हूँ? हम बाहार से चाहे जैसे दिखाई दें, क्या हम मसीही विश्वासियों के अन्दर वह भीतरी सुन्दरता नहीं होनी चाहिए जो हमारे जीवनों में हुए परमेश्वर के प्रेम और कार्य को दिखाती हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल से भीतरी सुन्दरता के बारे में कुछ बातों को देखें: रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस कहता है, "क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं" (रोमियों 7:22); फिर कुछ और आगे चलकर वह परमेश्वर के पवित्रात्मा पर केंद्रित मन के विषय में लिखता है, "शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है" (रोमियों 8:6)। गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में पौलुस ने पवित्रात्मा को समर्पित भीतरी मनुष्यत्व के लिए लिखा कि उससे "आत्मा के फल" उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23) जो जीवनों को सुसज्जित कर देते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आनन्दित रहने और परमेश्वर के पवित्रात्मा को अपने जीवन में कार्यरत होने देने से हमारे अन्दर वह सुन्दरता आती है जिसे बनाए रखने के लिए हमें किसी कृत्रिम सांसारिक साधन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जो हमारे जीवनों से परमेश्वर को महिमा देगी और कभी नाश नहीं होगी। - डेव ब्रैनन


मन की धार्मिकता चरित्र की सुन्दरता का निर्माण करती है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है। 
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

गवाह


   अपनी किशोरावस्था में मैंने एक वाहन दुर्घटना देखी। अपने आप में यही एक स्तब्ध कर देने वाला अनुभव था, लेकिन जो कुछ इसके बाद हुआ वह इससे भी अधिक परेशान कर देने वाला था। क्योंकि उस दुर्घटना का मैं ही एक मात्र गवाह था, इसलिए कुछ महीनों तक मुझे बार बार पुलिस, वकीलों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को उस दुर्घटना का विवरण देना पड़ा। उन्हें मुझ से उस दुर्घटना के घटित होने के पीछे के कारण या उस दुर्घटना से उत्पन्न हुई चिकित्सा संबंधित बातों पर मेरी राय अथवा टिप्पणी नहीं चाहिए थी, उन्हें केवल जो मैंने होते देखा उसका ही विवरण चाहिए था।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते हमें संसार के सामने वह रखना है जो हमने अपने जीवनों में प्रभु यीशु के द्वारा होते देखा या अनुभव किया है। लोगों को प्रभु यीशु की ओर प्रेरित करने के लिए आवश्यक नहीं कि हम उनके सभी प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर देने पाएं या धर्मविज्ञान को समझाने पाएं। जो हमें करना है वह इतना ही है कि हम प्रभु यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान के कारण हमारे जीवन में जो कुछ हुआ उसे लोगों को बताएं। इसमें सब से अच्छी बात यह है कि ऐसा करने के लिए हमें अपनी किसी क्षमता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है; हमारे गवाह होने के लिए प्रभु यीशु ने हमारे लिए एक सहायक नियुक्त किया है: "परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे" (प्रेरितों 1:8)।

   हम जितना परमेश्वर के पवित्रात्मा के मार्गदर्शन और सामर्थ पर निर्भर होकर प्रभु यीशु के गवाह होने की अपनी ज़िम्मेदारी को निभाएंगे, उतने ही अधिक प्रभावी रीति से हम पाप से आहत संसार को पाप से राहत देने वाले प्रभु यीशु की ओर प्रेरित कर सकेंगे। प्रभु यीशु द्वारा हमारे बदले गए जीवनों की गवाही दूसरों के भी इस आशीष को पाने में उपयोगी हो जाएगी। - बिल क्राउडर


हमारी गवाही परमेश्वर द्वारा हमारे जीवन में हुए कार्यों का बताना ही है।

इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। मत्ती 28:19-20

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-9
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्भ में किया और करता और सिखाता रहा। 
Acts 1:2 उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। 
Acts 1:3 और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। 
Acts 1:4 ओर उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। 
Acts 1:5 क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे। 
Acts 1:6 सो उन्हों ने इकट्ठे हो कर उस से पूछा, कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा? 
Acts 1:7 उसने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं। 
Acts 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। 
Acts 1:9 यह कहकर वह उन के देखते देखते ऊपर उठा लिया गया; और बादल ने उसे उन की आंखों से छिपा लिया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2


शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

रोटी


   ऐसे समाज में जहाँ भोजन वस्तुओं की बहुतायत और विविधता हो, रोटी को दैनिक भोजन के अनिवार्य भाग के रूप में नहीं देखा जाता है; कुछ लोग कई दिन तक बिना रोटी खाए भी अन्य वस्तुओं को खाते हुए सरलता से रह लेते हैं। लेकिन प्रभु यीशु के जीवनकाल में रोटी भोजन का अनिवार्य भाग थी; रोटी बिना भोजन की कलपना भी नहीं की जा सकती थी।

   एक दिन लोगों की एक भीड़ प्रभु यीशु को खोजती हुई आई क्योंकि उन्होंने पाँच रोटी और दो मछलियों के सहारे पाँच हज़ार से अधिक लोगों की भीड़ को खिलाया था (यूहन्ना 6:11, 26)। लोगों ने चाहा कि प्रभु यीशु उनके सामने कोई आश्चर्यकर्म करें, जैसे कि परमेश्वर ने स्वर्ग से मन्ना बरसा कर अपने लोगों की बियाबान में आवश्यकता-पूर्ति करी थी (यूहन्ना 6:30-31, निर्गमन 16:4)। लेकिन जब प्रभु यीशु ने उनसे कहा कि यीशु स्वयं ही स्वर्ग से उतरने वाली सच्ची रोटी हैं तो लोगों को उनकी बात समझ नहीं आई। लोग अपने सामने प्रत्यक्ष दैनिक भोजन वाली रोटी चाहते थे, परन्तु प्रभु यीशु उनसे उनकी आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली आत्मिक रोटी की बात कर रहा था। प्रभु यीशु का तात्पर्य था कि यदि वे साधारण सामान्य विश्वास से उसके वचनों को ग्रहण करें और अपने जीवन में उन्हें लागू करें, तो वे ना केवल अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति को होता देखेंगे वरन अनन्त आत्मिक संतुष्टि को भी अनुभव करेंगे (पद 35)।

   प्रभु यीशु हमारे जीवनों में वैकल्पिक संसाधन बनकर नहीं आना चाहता; वह हमारे जीवन का अनिवार्य भाग बनकर रहना चाहता है, ऐसा भाग जिसके बिना हमारे लिए कुछ भी कर पाने की सामर्थ रखना असंभव हो। जैसे प्रभु यीशु के समय के वे लोग बिना रोटी के भोजन की कलपना भी नहीं कर सकते थे, वैसे ही आज हम भी बिना प्रभु यीशु के जीवन की कलपना ना करें। - मार्विन विलियम्स


केवल सच्ची आत्मिक रोटी ही आत्मा की भूख मिटा सकती है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा बदन है। - यूहन्ना 6:51 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। 
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है। 
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

पूर्ति


   मेरे घर में मेरे कार्यस्थल की खिड़की के बाहर गिलहरियां शीघ्र ही आने वाली शीतऋतु की तैयारी में लगी हैं; वे अपने लिए बांझ वृक्ष के फल एकत्रित कर के रख रही हैं जिससे जब बर्फ पड़े और सब कुछ बर्फ से धक जाए तब भी उनके पास उनकी आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त भोजन एकत्रित हो। ऐसा करने में उनके द्वारा मचाया जाने वाला शोर मुझे मनोरंजक लगता है। इसके बिलकुल विपरीत हिरण हैं; हिरणों का पूरा झुंड मेरे घर के पिछले आंगन से होकर निकल भी जाए तो मुझे पता नहीं चल पाता क्योंकि वे शान्त रहते हैं, परन्तु एक भी गिलहरी बाहर कुछ कर रही हो तो उसका शोर सबकि उसकी उपस्थिति का एहसास करवा देता है।

   इन दोनों प्राणियों में एक और भी भिन्नता है; गिलहरियों के समान, शीतऋतु के लिए हिरण अपना भोजन एकत्रित करके नहीं रखते। जब सब तरफ बर्फ की चादर फैल जाती है तो हिरण इधर-उधर घूम्नते हुए, उन्हें जो भी मिलता है, चाहे वह घर के बाग़ीचे में लगे पौधे ही क्यों ना हों, खाते रहते हैं। किंतु यदि गिलहरियाँ ऐसा करें तो वे आवश्यक भोजन के आभाव में भूखी मर जाएंगी।

   हिरण और गिलहरियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी देखरेख और पूर्ति करे जाने के दो उदाहरणों को दिखाते हैं। परमेश्वर ने हमें कार्य करके भविष्य के लिए संजोने की क्षमता भी दी है, और जब स्त्रोत पूरे ना पड़ने की स्थिति हो तब भी वह हमारे लिए संसाधन उपलब्ध करवा देता है।  जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में दिया गया है, परमेश्वर हमें बहुतायत के समय प्रदान करता है जिससे हम घटी के दिनों के लिए तैयार हो सकें (नीतिवचन 12:11)। साथ ही बाइबल में भजन 23 हमें आश्वस्त करता है कि संकट की स्थितियों में भी परमेश्वर हमें संभाले रखकर सुखद चारागाहों में ले जाता है। एक और तरीका है जिसके द्वारा परमेश्वर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है - जिनके पास बहुतायत से हो, वे उनके साथ बांटें जो घटी में हों (व्यवस्थाविवरण 24:19)।

   अतः हमारी आवश्यकातों की पूर्ति के लिए बाइबल की शिक्षा है कि, जब हम कार्य सकते हैं तो कार्य करें, जब संचय कर सकते हैं तो संचय करें, और जो आवश्यकता में हैं उनके साथ अपनी आशीषों को बाँटने से ना कतराएं, और परमेश्वर पर हमारी सभी आवश्यक्ताओं की पूर्ति करते रहने के लिए विश्वास को बनाए रखें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी आवश्यकताएं कभी भी परमेश्वर के संसाधनों से बढ़कर नहीं हो पाएंगी।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा। नीतिवचन 3:27-28

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 24:19-22
Deuteronomy 24:19 जब तू अपने पक्के खेत को काटे, और एक पूला खेत में भूल से छूट जाए, तो उसे लेने को फिर न लौट जाना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये पड़ा रहे; इसलिये कि परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में तुझ को आशीष दे। 
Deuteronomy 24:20 जब तू अपने जलपाई के वृक्ष को झाड़े, तब डालियों को दूसरी बार न झाड़ना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये रह जाए। 
Deuteronomy 24:21 जब तू अपनी दाख की बारी के फल तोड़े, तो उसका दाना दाना न तोड़ लेना; वह परदेशी, अनाथ और विधवा के लिये रह जाए। 
Deuteronomy 24:22 और इस को स्मरण रखना कि तू मिस्र देश में दास था; इस कारण मैं तुझे यह आज्ञा देता हूं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4