ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 25 मार्च 2017

दृष्टिकोण


   मैं समय निकाल कर दो वृद्ध महिलाओं से मिलने जाया करती हूँ। उन में से एक को कोई आर्थिक घटी या चिंता नहीं है, अपनी उम्र के अनुसार वह स्वस्थ है, और अपने ही घर में रहती है। परन्तु उसके पास कहने के लिए सदा ही कुछ ना कुछ नकारात्मक होता है। दूसरी महिला गठिया से अपंग और भूल जाने वाली है। वह साधारण से स्थान पर रहती है, और अपने आप को स्मरण दिलाते रहने के लिए अपने कार्य एक पुस्तिका में लिखती रहती है, जिसे वह अपने पास रखती है। उससे मिलने जो भी आता है, उससे उस महिला के पहले शब्द होते हैं "परमेश्वर मेरे साथ बहुत भला है।" पिछली बार जब मैं उस महिला से मिलने गया था, तो उसकी स्मरण पुस्तिका उसे लौटाते समय मेरा ध्यान पिछले दिन के विषय में लिखी उसकी टिप्पणी पर गया, जहाँ उसने लिखा था, "कल दोपहर के भोजन पर बाहर आमंत्रण है! अद्भुत! जीवन का एक और अच्छा दिन।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रभु यीशु के जन्म के समय में, हन्नाह नामक परमेश्वर की एक भक्त थी, जो कठिन परिस्थितियों में रहती थी (लूका 2:36-37)। वह बहुत पहले विधवा हो गई थी और संभवतः निःसन्तान थी। वह अपने आप को निर्बल और निरुद्देश्य समझ सकती थी, परन्तु उसका दृष्टिकोण भिन्न था। उसका ध्यान परमेश्वर और उसकी सेवकाई की ओर, तथा लालसा आने वाले जगत के उद्धारकर्ता के प्रति थी। इन बातों में तल्लीन, वह परमेश्वर के कार्यों - प्रार्थना करना, उपवास रखना और जो कुछ उसने परमेश्वर से सीखा था उसे दूसरों को सिखाने में व्यस्त रहती थी।

   इतने वर्षों से उस आने वाले उद्धारकर्ता की प्रतीक्षा में लगे, अब उसकी आयु अस्सी वर्ष से अधिक की हो गई थी, परन्तु उसने अपना दृष्टिकोण नहीं बदला था, वह निरन्तर यही सब करती रहती थी। अब परमेश्वर का समय आ गया, और जब यहूदियों की रीति के अनुसार शिशु प्रभु यीशु को मन्दिर में लाया गया, तो हन्नाह को भी उसे देखने का अवसर मिल गया, वर्षों की उसकी धैर्यपूर्ण साधना पूरी हो गई। जगत के उद्धारकर्ता को देखकर उसका मन आनन्द और स्तुति से भर उठा, उसने तुरंत ही परमेश्वर की आराधना की, और फिर इस सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाने में लग गई; कैसा विलक्षण तथा शिक्षाप्रद धैर्य एवं दृष्टिकोण!

   आज परिस्थितियों के कारण आपका दृष्टिकोण कैसा है - हर बात में परमेश्वर के प्रति धन्यवादी और आनन्दित रहने वाला, या कुड़कुड़ाते रहने वाला। - मैरियन स्ट्राउड


परमेश्वर की योजना तथा हमारे उत्तरदायित्वों, 
दोनों पर नज़र बनाए रखना कठिन होता है,
 परन्तु इन दोनों का जहाँ मिलन होता है, 
वही सर्वोत्तम स्थान है।

मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है; - भजन 130:5

बाइबल पाठ: लूका 2:36-40
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी। 
Luke 2:39 और जब वे प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ निपटा चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए।
Luke 2:40 और बालक बढ़ता, और बलवन्‍त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52


शुक्रवार, 24 मार्च 2017

भरोसा


   जब हमारे बच्चे छोटे थे तो उन्हें डॉक्टर के पास बिमारी से बचने के टीके लगवाने ले जाना एक रोचक अनुभव होता था। डॉक्टर का प्रतीक्षालय खिलौनों और बच्चों की पुस्तकों तथा पत्रिकाओं से भरा हुआ था, जिनसे वे खेलते थे या जिन्हें मैं उन्हें पढ़कर सुनाता था। यहाँ तक तो कोई समस्या नहीं होती थी। लेकिन जैसे ही मैं उन्हें उठाकर अन्दर डॉक्टर से मिलने ले कर जाता था, सब कुछ बदल जाता था। जैसे ही वे नर्स को टीका लेकर अपनी ओर आता देखते थे, उनका आनन्द भय में परिवर्तित हो जाता था; और नर्स जितनी निकट आती जाती थी वे उतनी ही ज़ोर से सांत्वना तथा शान्ति पाने के लिए मुझ से चिपटते जाते थे, क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा था।

   पाप और अशान्ति में पड़े हुए इस संसार में कभी कभी हम शान्ति और आराम की स्थिति से निकल कर पीड़ादायक क्षेत्रों में आ जाते हैं। ऐसे समय में प्रश्न होता है कि उस परिस्थिति के प्रति हमारी प्रतिक्रिया क्या होगी? हम भयभीत होकर परमेश्वर से प्रश्न कर सकते हैं कि उसने हमारे साथ ऐसा क्यों होने दिया? या हम उस पर भरोसा रखते हुए यह मानकर चल सकते हैं कि उन परेशानियों में भी वह हमारे लिए कुछ ऐसा कर रहा है जो हमारी भलाई के लिए है, चाहे अभी वह बात कष्टदायक ही क्यों ना हो। जब ऐसी परिस्थितियाँ आएं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा लिखे गए शब्द स्मरण रखने चाहिएं, "जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा" (भजन 56:3)।

   जैसे मेरे बच्चे मुझ से ज़ोर से लिपट जाते थे, हमें प्रभु परमेश्वर से ज़ोर से लिपटे रहना चाहिए, और जितनी कठिन परिस्थिति हो, उतने ही अधिक ज़ोर से हम प्रभु से लिपटे रहें; उस पर भरोसा रखें क्योंकि उसका प्रेम कभी चूकता नहीं है। - जो स्टोवैल


अपने परमेश्वर पिता से लिपटे रहें, वही आपकी एकमात्र भरोसेमन्द आशा है।

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है। - नीतिवचन 29:25

बाइबल पाठ: भजन 56
Psalms 56:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं। वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं। 
Psalms 56:2 मेरे द्रोही दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं, क्योंकि जो लोग अभिमान कर के मुझ से लड़ते हैं वे बहुत हैं। 
Psalms 56:3 जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। 
Psalms 56:4 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:5 वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। 
Psalms 56:6 वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों। 
Psalms 56:7 क्या वे बुराई कर के भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे! 
Psalms 56:8 तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? 
Psalms 56:9 जब जिस समय मैं पुकारूंगा, उसी समय मेरे शत्रु उलटे फिरेंगे। यह मैं जानता हूं, कि परमेश्वर मेरी ओर है। 
Psalms 56:10 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, यहोवा की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा। 
Psalms 56:11 मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों का भार मुझ पर बना है; मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा। 
Psalms 56:13 क्योंकि तू ने मुझ को मृत्यु से बचाया है; तू ने मेरे पैरों को भी फिसलने से बचाया है, ताकि मैं ईश्वर के साम्हने जीवतों के उजियाले में चलूं फिरूं?

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24


गुरुवार, 23 मार्च 2017

ज्योति


   नॉरवे में एक छोटा सा गाँव है रजुकान, जो रहने के लिए बहुत आरामदायक स्थान है - शरद ऋतु के अन्धेरे दिनों को छोड़ कर। ऐसा इसलिए क्योंकि यह गाँव ऊँचे गॉस्टाटोपन पर्वत की तली में स्थित वादी में बसा हुआ है और लगभग आधे वर्ष यहाँ सूर्य की सीधी रौशनी नहीं आने पाती। यहाँ के निवासी लंबे समय से पहाड़ के ऊपर दर्पण लगाकर सूर्य की रौशनी को गाँव में प्रतिबिंबित करने के बारे में सोचते रहे थे। परन्तु कुछ समय पहले तक ऐसा कर पाना संभव नहीं था। सन 2005 में एक स्थानीय कलाकार ने "दर्पण परियोजना" आरंभ की जिससे ऐसे लोगों को एक साथ लाया जा सके जो इस विचार को व्यवहार में बदल सकें। इसके आठ वर्ष पश्चात, 2013 में, वे दर्पण कार्यान्वित हो सके। ऐसा होने पर उस गाँव के निवासी वहाँ के मुख्य मैदान में एकत्रित होकर प्रतिबिंबित सूर्य की ज्योति को सोखने का आनन्द लेने लग गए।

   आत्मिक रीति से, अधिकांश संसार उस गाँव रजुकान के समान है - समस्याओं के पहाड़ संसार के लोगों तक प्रभु यीशु की ज्योति पहुँचने नहीं देते हैं। परन्तु परमेश्वर ने अपनी सन्तानों को उन तक प्रभु यीशु की ज्योति प्रतिबिंबित करने वाले दर्पण बनाकर उचित स्थानों पर उनके मध्य रखा है। ऐसा ही एक व्यक्ति था यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला, जो संसार में "ज्योति की गवाही देने आया" - अर्थात प्रभु यीशु की, उन्हें जो "अन्धकार और मृत्यु की छाया में हैं" (यूहन्ना 1:7; लूका 1:79)।

   जैसे हमारे शारीरिक और मान्सिक स्वास्थ्य के लिए सूर्य की ज्योति अनिवार्य है, उसी प्रकार हमारे आत्मिक स्वास्थ्य तथा विकास के लिए हमें प्रभु यीशु की ज्योति में आना भी अनिवार्य है। धन्यवादी हों कि प्रत्येक मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की ज्योति को संसार के अंधकारपूर्ण स्थानों में प्रतिबिंबित कर सकता है; और हमें ऐसा करना है जिससे अंधकार में रहने वालों को सच्ची ज्योति मिल सके। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अन्धकार में पड़े संसार को यीशु की ज्योति की आवश्यकता है।

यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए। - लूका 1:78-79

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80


बुधवार, 22 मार्च 2017

परिवार


   1980 के दशक में, मृत्यु या तलाक के कारण अकेले हो गए लोगों में से बहुतेरों के लिए, हमारे चर्च में अयोजित की जाने वाली कक्षा ने एक करीबी संगठित परिवार का रूप ले लिया। यदि किसी का स्थानान्तरण होता तो कक्षा के सदस्य मिलकर उसका सामान बक्सों में बाँधते, उसके मेज़-कुर्सी उठाते और उसे भोजन सामग्री उपलब्ध कराते। जन्मदिन और छुट्टियाँ अब अकेले मनाए जाने के लिए नहीं रह गए थे, क्योंकि मसीही विश्वास और मित्रता में एक साथ मिलकर चलने ने प्रोत्साहित करने वाले घनिष्ठ संबंध बना दिए थे। उन अकेलेपन और परेशानी के दिनों में जो संबंध तीन दशक पहले बने थे, वे आज भी फल-फूल रहे हैं, तथा उन व्यक्तियों और उनके परिवारों को संभाल रहे हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, थिस्सलुनीकिया में मसीह यीशु का अनुसरण करने वालों को पौलुस द्वारा लिखी गई पत्री में, परमेश्वर के परिवार के सदस्य होने के कारण उनमें परस्पर बनने वाले जीवन-दायक संबंधों के बारे में लिखा गया है: "परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है" (1 थिस्सलुनीकियों 2:7)। "क्योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो" (1 थिस्सलुनीकियों 2:9)। "जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे" (1 थिस्सलुनीकियों 2:11)। क्योंकि थिस्सलुनीकिया के मसीही विश्वासी पौलुस और उसके साथियों को "प्यारे हो गए थे" इसलिए उनके साथ वे ना केवल सुसमाचार वरन अपना जीवन भी माता-पिता, भाई-बहन के समान साझा करने के लिए तैयार थे (1 थिस्सलुनीकियों 2:8)।

   मसीही विश्वास से बने परमेश्वर के परिवार में वह हमें माँ, बाप, बहिनें और भाई; अर्थात संपूर्ण परिवार उपलब्ध करवाता है। जब हम परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम में होकर, उसके परिवार में अपने जीवन एक दूसरे के साथ साझा करते हैं, तो परमेश्वर अपना आनन्द हमारे जीवनों में भर देता है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


परमेश्वर आपसे और मुझसे प्रेम करता है;
 आईए हम भी एक दूसरे से प्रेम करें।

पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। - इफिसियों 2:13-14

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 2:1-14
1 Thessalonians 2:1 हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ। 
1 Thessalonians 2:2 वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं। 
1 Thessalonians 2:3 क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है। 
1 Thessalonians 2:4 पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 
1 Thessalonians 2:5 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है। 
1 Thessalonians 2:6 और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से। 
1 Thessalonians 2:7 परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है। 
1 Thessalonians 2:8 और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर का सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्यारे हो गए थे। 
1 Thessalonians 2:9 क्योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों। 
1 Thessalonians 2:10 तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धामिर्कता और निर्दोषता से रहे। 
1 Thessalonians 2:11 जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे। 
1 Thessalonians 2:12 कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।
1 Thessalonians 2:13 इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुंचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्तु परमेश्वर का वचन समझकर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है। 
1 Thessalonians 2:14 इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्होंने यहूदियों से पाया था।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56


मंगलवार, 21 मार्च 2017

न्यायी शरणस्थान


   जब कोई अभियुक्त अदालत में न्यायी के सामने खड़ा होता है, तो वह अदालत के न्याय और रहम दोनों पर निर्भर होता है। यदि अभियुक्त निर्दोष है तो अदालत और न्यायी को उसे सुरक्षा देने वाले शरणस्थान के समान होना चाहिए। परन्तु यदि वह दोषी है तो अदालत तथा न्यायी से आशा की जाती है कि वे उसको उचित दण्ड दें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में नहूम की पुस्तक में, निनवे शहर के संदर्भ में, हम परमेश्वर को उपरोक्त दोनों ही - न्यायी और शरणस्थान, रूपों में देखते हैं। वहाँ परमेश्वर के विषय लिखा है, "यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है" (नहूम 1:7)। और इससे अगली ही पद में परमेश्वर के विषय लिखा है, "परन्तु वह उमड़ती हुई धारा से उसके स्थान का अन्त कर देगा, और अपने शत्रुओं को खदेड़ कर अन्धकार में भगा देगा" (नहूम 1:8)। इससे लगभग 100 वर्ष पहले, योना के वहाँ परमेश्वर का प्रचार करने पर, निनवे के लोगों ने पश्चाताप किया था, परमेश्वर की क्षमा को पाया था और सुरक्षित हो गए थे (योना 3:10)। परन्तु अब नहूम के दिन आने पर, निनवे के लोग परमेश्वर के विरुद्ध योजना बना रहे थे (नहूम 1:9, 11)। नहूम की पुस्तक के तीसरे अध्याय में हम निनवे के नाश का वर्णन पाते हैं।

   अनेकों लोग मनुष्यों के साथ परमेश्वर के व्यवहार का केवल एक ही पहलू जानते हैं दूसरा नहीं। वे या तो यह सोचते हैं कि परमेश्वर केवल पवित्र है और हम अपवित्र मनुष्यों को दण्ड देना चाहता है; या यह कि परमेश्वर दयालु है और केवल दया और करुणा के साथ ही कार्य करता है। सत्य यह है कि परमेश्वर न्यायी भी है और शरण्स्थान भी। पतरस ने लिखा कि प्रभु यीशु "...अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था" (1 पतरस 2:23)। तभी तो, "वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए" (1 पतरस 2:24)।

   परमेश्वर के बारे मे संपूर्ण सत्य, सुसमाचार है! परमेश्वर न्यायी है, परन्तु प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान एवं पुनरुत्थान के कारण, हम परमेश्वर के पास उसे अपना शरस्थान बनाकर जा सकते हैं। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर का न्याय और करुणा कलवरी के क्रूस पर
 प्रभु यीशु के बलिदान में दिखाई देते हैं।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे। - इब्रानियों 4:15-16

बाइबल पाठ: नहूम 1:1-15
Nahum 1:1 नीनवे के विषय में भारी वचन। एल्कोशी नहूम के दर्शन की पुस्तक।
Nahum 1:2 यहोवा जल उठने वाला और बदला लेने वाला ईश्वर है; यहोवा बदला लेने वाला और जलजलाहट करने वाला है; यहोवा अपने द्रोहियों से बदला लेता है, और अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता। 
Nahum 1:3 यहोवा विलम्ब से क्रोध करने वाला और बड़ा शक्तिमान है; वह दोषी को किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा। यहोवा बवंडर और आंधी में हो कर चलता है, और बादल उसके पांवों की धूलि है। 
Nahum 1:4 उसके घुड़कने से महानद सूख जाते हैं, और समुद्र भी निर्जल हो जाता है; बाशान और कर्म्मैल कुम्हलाते और लबानोन की हरियाली जाती रहती है। 
Nahum 1:5 उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाडिय़ां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहने वालों समेत थरथरा उठता है।
Nahum 1:6 उसके क्रोध का साम्हना कौन कर सकता है? और जब उसका क्रोध भड़कता है, तब कौन ठहर सकता है? उसकी जलजलाहट आग की नाईं भड़क जाती है, और चट्टानें उसकी शक्ति से फट फटकर गिरती हैं। 
Nahum 1:7 यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है। 
Nahum 1:8 परन्तु वह उमड़ती हुई धारा से उसके स्थान का अन्त कर देगा, और अपने शत्रुओं को खदेड़ कर अन्धकार में भगा देगा। 
Nahum 1:9 तुम यहोवा के विरुद्ध क्या कल्पना कर रहे हो? वह तुम्हारा अन्त कर देगा; विपत्ति दूसरी बार पड़ने न पाएगी। 
Nahum 1:10 क्योंकि चाहे वे कांटों से उलझे हुए हों, और मदिरा के नशे में चूर भी हों, तौभी वे सूखी खूंटी की नाईं भस्म किए जाएंगे। 
Nahum 1:11 तुझ में से एक निकला है, जो यहोवा के विरुद्ध कल्पना करता और नीचता की युक्ति बान्धता है।
Nahum 1:12 यहोवा यों कहता है, चाहे वे सब प्रकार के सामर्थी हों, और बहुत भी हों, तौभी पूरी रीति से काटे जाएंगे और शून्य हो जाएंगे। मैं ने तुझे दु:ख दिया है, परन्तु फिर न दूंगा। 
Nahum 1:13 क्योंकि अब मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूंगा, और तेरा बन्धन फाड़ डालूंगा।
Nahum 1:14 यहोवा ने तेरे विषय में यह आज्ञा दी है कि आगे को तेरा वंश न चले; मैं तेरे देवालयों में से ढली और गढ़ी हुई मूरतों को काट डालूंगा, मैं तेरे लिये कबर खोदूंगा, क्योंकि तू नीच है।
Nahum 1:15 देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है! अब हे यहूदा, अपने पर्व मान, और अपनी मन्नतें पूरी कर, क्योंकि वह ओछा फिर कभी तेरे बीच में हो कर न चलेगा, और पूरी रीति से नाश हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38


सोमवार, 20 मार्च 2017

आशा


   सन 2013 में फिलिपीन्स देश के टाकलोबान शहर से होकर एक शक्तिशाली चक्रवाधी तूफान निकला, जिससे लगभग 10,000 लोग मारे गए, और जो बच गए उनमें से अनेकों बेघर, बेरोज़गार हो गए। जीवन यापन की आवश्यकताएं मिलना दुर्लभ हो गया। इसके तीन माह पश्चात, अभी शहर उस विनाश से निकल पाने के प्रयासों में लगा हुआ ही था, जब तेज़ हवाओं और मूसलाधार बारिश में टाकलोबान की एक सड़क के किनारे एक शिशु का जन्म हुआ। यद्यपि मौसम ने उस तूफान की उन पीड़ादायक यादों को ताज़ा कर दिया था, परन्तु फिर भी निवासियों ने मिलकर बच्चे के जन्म में सहायता के लिए दाई का प्रयोजन किया और माँ तथा नवजात शिशु को एक क्लिनिक तक पहुँचाया। वह बच्चा बच गया, बढ़ता गया, और हताशा के उस समय में आशा का प्रतीक बन गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्ज इस्त्राएल के इतिहास की एक घटना है - चालीस वर्ष तक पलिश्तियों द्वारा इस्त्राएलियों का दमन उनके राष्ट्रीय इतिहास में बहुत कठिनाई का समय था। इस समय में एक स्वर्गदूत ने एक इस्त्राएली महिला को सूचना दी कि वह एक विशेष बालक को जन्म देगी (न्यायियों 13:3)। स्वर्गदूत के अनुसार, वह बालक जन्म से नाज़िर - अर्थात परमेश्वर के लिए पृथक किया हुआ होगा, और "...इस्राएलियों को पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाने में वही हाथ लगाएगा" (पद 5)। वह शिशु, शिमशोन, कठिन समयों में इस्त्राएल के लिए आशा का उपहार था।

   पाप और शैतान के चँगुल में पड़े संसार की कठिन परिस्थितियों से बचने के लिए प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर द्वारा दिया गया उपाय है, क्योंकि शैतान पर केवल वही जयवंत है। प्रभु यीशु के जन्म के उद्देश्य के विषय बाइबल कहती है: "कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए" (लूका 1:79)। प्रभु यीशु ही संसार की एकमात्र आशा है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु वह आशा है जो जीवन के तूफानों को शान्त कर देता है।

जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। - मत्ती 1:20-21

बाइबल पाठ: न्यायियों 13:1-7
Judges 13:1 और इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया; इसलिये यहोवा ने उन को पलिश्तियों के वश में चालीस वर्ष के लिये रखा।
Judges 13:2 दानियों के कुल का सोरावासी मानोह नाम एक पुरूष था, जिसकी पत्नी के बांझ होने के कारण कोई पुत्र न था। 
Judges 13:3 इस स्त्री को यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, सुन, बांझ होने के कारण तेरे बच्चा नहीं; परन्तु अब तू गर्भवती होगी और तेरे बेटा होगा। 
Judges 13:4 इसलिये अब सावधान रह, कि न तो तू दाखमधु वा और किसी भांति की मदिरा पीए, और न कोई अशुद्ध वस्तु खाए, 
Judges 13:5 क्योंकि तू गर्भवती होगी और तेरे एक बेटा उत्पन्न होगा। और उसके सिर पर छूरा न फिरे, क्योंकि वह जन्म ही से परमेश्वर का नाजीर रहेगा; और इस्राएलियों को पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाने में वही हाथ लगाएगा। 
Judges 13:6 उस स्त्री ने अपने पति के पास जा कर कहा, परमेश्वर का एक जन मेरे पास आया था जिसका रूप परमेश्वर के दूत का सा अति भययोग्य था; और मैं ने उस से न पूछा कि तू कहां का है? और न उसने मुझे अपना नाम बताया; 
Judges 13:7 परन्तु उसने मुझ से कहा, सुन तू गर्भवती होगी और तेरे एक बेटा होगा; इसलिये अब न तो दाखमधु वा और किसी भांति की मदिरा पीना, और न कोई अशुद्ध वस्तु खाना, क्योंकि वह लड़का जन्म से मरण के दिन तक परमेश्वर का नाजीर रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20


रविवार, 19 मार्च 2017

स्थान


   समय, घटनाओं, और लोगों के हज़ारों धागों से बुना गया होता है वह जिसे हम ’स्थान’ कहते हैं। वह केवल घर नहीं है, वरन उस से भी बढ़कर, ’स्थान’ वह है जहाँ निःस्वार्थ प्रेम में ढंपे हुए अपनापन, सुरक्षा तथा अर्थपूर्ण संबंध एक साथ होते हैं। ’स्थान’ हमारे मनों में गहराई से बसी अपनी यादों के द्वारा हमें आकर्षित करता है। चाहे वह ’स्थान’ सिद्ध ना भी हो, परन्तु हम पर उसका वश नाटकीय होता है और उसके प्रति हमारा आकर्षण चुम्बकीय।

   परमेश्वर का वचन बाइबल बहुधा स्थान के बारे में बात करती है। इसका एक उदाहरण हम नहेम्याह की यरुशलेम के पुनः बसाए जाने की लालसा में देखते हैं (नहेम्याह 1:3-4; 2:2)। इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि प्रभु यीशु ने भी हमें शान्ति और सांत्वना देने के लिए एक स्थान का उल्लेख किया है। प्रभु ने आरंभ किया, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो" (यूहन्ना 14:1) और फिर उसने इस विषय में आगे कहा, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं" (यूहन्ना 14:2)।

   उनके लिए जो किसी सांसारिक स्थान से आकर्षित और जुड़े हुए हैं, प्रभु की इस प्रतिज्ञा को समझना कठिन नहीं है, और वे सरलता से उस स्थान की बाट जोह सकते हैं जिसके बारे में प्रभु बात कर रहा था। और, उनके लिए जिनके स्थान शान्ति और सुरक्षा से जुड़े नहीं थे, प्रभु यीशु की प्रतिज्ञा है कि एक दिन वे उस स्थान में रहकर मधुर संगीत सुनेंगे, क्योंकि वे उसके साथ वहाँ निवास करेंगे।

   आपका संघर्ष चाहे कोई भी हो, आपकी मसीही विश्वास की जीवन यात्रा में चाहे कोई भी अस्थिरता हो, चाहे आपके कदम कहीं भी डगमगाएं, सदा यह स्मरण रखें कि आपके लिए प्रभु यीशु ने स्वर्ग में एक स्थान बना कर तैयार रखा हुआ है, ऐसा स्थान जो आपके लिए सर्वथा उपयुक्त है, और वह आपके साथ वहाँ अनन्तकाल तक निवास करेगा। यदि यह सत्य नहीं होता, तो प्रभु यीशु आपसे इसके बारे में कदापि नहीं कहता (यूहन्ना 14:3)। - रैंडी किल्गोर


पृथ्वी के हमारे घर की यादें आशा के साथ हमें हमारे स्वर्गीय घर की ओर प्रेरणा दें।

और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:3 

बाइबल पाठ: नहेम्याह 1
Nehemiah 1:1 हकल्याह के पुत्र नहेमायाह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था, 
Nehemiah 1:2 तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विष्य में पूछा। 
Nehemiah 1:3 उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं। 
Nehemiah 1:4 ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा। 
Nehemiah 1:5 हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भययोग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विष्य अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है; 
Nehemiah 1:6 तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है। 
Nehemiah 1:7 हम ने तेरे साम्हने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना। 
Nehemiah 1:8 उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा। 
Nehemiah 1:9 परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है। 
Nehemiah 1:10 अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है। 
Nehemiah 1:11 हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16