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बुधवार, 16 दिसंबर 2020

दर्पण

 

          मैं जब अपने होटल से बाहर निकला, तो मुझे देखकर मेरी सहायिका, जो मुझे सेमिनार के स्थान को ले जाने के लिए आई थी, के चेहरे पर एक विचित्र सी मुस्कराहट आ गई। मैंने उस से पूछा, “हास्यास्पद क्या है?” तो वह हंस पड़ी और मुझ से पूछा, “क्या आप ने अपने बाल बनाए हैं?” अब हंसने की मेरी बारी थी, क्योंकि मैं वास्तव में बाल बनाना भूल गया था। मैंने होटल के दर्पण में अपने आप को देखा तो था, लेकिन फिर भी जो मुझे दिखाई दिया, न जाने क्यों मैंने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब अपनी पत्री में इसी दिखाई देने वाली बात पर ध्यान न देने का एक व्यावहारिक उदाहरण लिखता है। परमेश्वर का पवित्र शास्त्र एक दर्पण के समान है। हम तैयार होते समय अपने आप को दर्पण में देखते हैं, कि हमारे स्वरूप में कहीं कोई ऐसी बात तो नहीं है हमें जिसे ठीक कर लेना चाहिए? क्या हमारे बाल ठीक से बने हुए, चेहरा धुला हुआ, कमीज़ के बटन ठीक से लगे हुए, और कमीज़ ठीक से पैंट में की गई है कि नहीं? दर्पण के समान ही बाइबल भी हमें अपने चरित्र, रवैये, विचारों, और व्यवहार को जाँचने में सहायता करती है (याकूब 1:23-24)। ऐसा करने से हम परमेश्वर द्वारा दिए गए जीवन के सिद्धांतों के साथ अपने आप को अनुकूलित करने और उनके अनुसार जीवन जीने के लिए जाँच-परख सकते हैं। तब हम अपनी जीभ पर लगाम (पद 26), तथा विधवाओं और अनाथों की सुधि (पद 27) रख सकते हैं। तब हम अपने अन्दर निवास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा की बातों का पालन करेंगे, और अपने आप को संसार से दूषित होने (पद 27) से बचाए रखेंगे।

          जब हम परमेश्वर की सिद्ध व्यवस्था पर, जो हमें पाप के दासत्व से स्वतंत्र करती है, ध्यान देंगे, और उसे अपने जीवनों में लागू करेंगे, तो हम जो करेंगे उसमें आशीष पाएँगे (पद 25)। परमेश्वर के पवित्र शास्त्र में अपने आप का निरीक्षण करते रहने के द्वारा हम उस वचन को जो हमारे हृदयों में बोया गया है, नम्रता से ग्रहण भी कर सकेंगे (पद 21)। - लॉरेंस दर्मानी

 

दर्पण के समान बाइबल हमारे भीतरी मनुष्यत्व को प्रतिबिंबित करती है।


क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं! - भजन 119:1

बाइबल पाठ: याकूब 1:16-27

याकूब 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।

याकूब 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।

याकूब 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्टि की हुई वस्तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

याकूब 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयों, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।

याकूब 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।

याकूब 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।

याकूब 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।

याकूब 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।

याकूब 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।

याकूब 1:25 पर जो व्यक्ति स्वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।

याकूब 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।

याकूब 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्कलंक रखें।

 

एक साल में बाइबल: 

  • आमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7

शनिवार, 18 नवंबर 2017

प्रतिबिंबित


   ऊँचे और सीधे खड़े पहाड़ों की तलहटी में स्थित होने तथा उत्तरी ध्रुव के निकट की अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण नॉर्वे देश के रजूकान शहर में अक्तुबर से मार्च तक सूर्य की सीधी रौशनी पहुँचने नहीं पाती है। उस शहर को रौशन करने के लिए रजूकान शहर के लोगों ने पहाड़ों पर विशाल दर्पण लगाए जो सूर्य के प्रकाश को शहर में प्रतिबिंबित करते हैं; क्योंकि ये दर्पण आकाश में सूरज की स्थिति के साथ-साथ घूमते रहते हैं इसलिए सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक वे शहर में लगातार रौशनी को बनाए रखते हैं।

   मैं मसीही जीवन को भी इसी प्रकार से देखता हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा कि उसके अनुयायी "जगत की ज्योति हैं" (मत्ती 5:14); और यूहन्ना ने लिखा कि मसीह यीशु ही वह सच्ची ज्योति है जो "अन्धकार में चमकती है" (यूहन्ना 1:5)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आमंत्रित किया कि, "तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। यह प्रभु की ओर से आवाहन है कि हम जो उसके लोग हैं, घृणा का प्रत्युत्तर प्रेम से दें, परेशानी में धैर्य दिखाएं, और संघर्षों में शान्ति को प्रदर्शित करें। प्रेरित पौलुस हमें स्मरण करवाता है कि, "क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान के समान चलो" (इफिसियों 5:8)।

   प्रभु यीशु ने यह भी कहा कि, "...जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा" (यूहन्ना 8:12)। हमारी ज्योति परमेश्वर के पुत्र हमारे प्रभु यीशु से है; हम उसकी ज्योति को संसार में प्रतिबिंबित करते हैं। जैसे कि यदि सूर्य न हो तो रजूकान के उन विशाल दर्पणों को प्रतिबिंबित करने के लिए कोई ज्योति नहीं मिलेगी, उसी प्रकार यदि हम में प्रभु यीशु का वास न हो तो हम भी संसार को कोई ज्योति प्रतिबिंबित नहीं करने पाएंगे। - लॉरेंस दरमानी


प्रभु की ज्योति को प्रतिबिंबित करें और उसके लिए चमकें।

और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। - यूहन्ना 1:5

बाइबल पाठ: मत्ती 5:14-16
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13


गुरुवार, 23 मार्च 2017

ज्योति


   नॉरवे में एक छोटा सा गाँव है रजुकान, जो रहने के लिए बहुत आरामदायक स्थान है - शरद ऋतु के अन्धेरे दिनों को छोड़ कर। ऐसा इसलिए क्योंकि यह गाँव ऊँचे गॉस्टाटोपन पर्वत की तली में स्थित वादी में बसा हुआ है और लगभग आधे वर्ष यहाँ सूर्य की सीधी रौशनी नहीं आने पाती। यहाँ के निवासी लंबे समय से पहाड़ के ऊपर दर्पण लगाकर सूर्य की रौशनी को गाँव में प्रतिबिंबित करने के बारे में सोचते रहे थे। परन्तु कुछ समय पहले तक ऐसा कर पाना संभव नहीं था। सन 2005 में एक स्थानीय कलाकार ने "दर्पण परियोजना" आरंभ की जिससे ऐसे लोगों को एक साथ लाया जा सके जो इस विचार को व्यवहार में बदल सकें। इसके आठ वर्ष पश्चात, 2013 में, वे दर्पण कार्यान्वित हो सके। ऐसा होने पर उस गाँव के निवासी वहाँ के मुख्य मैदान में एकत्रित होकर प्रतिबिंबित सूर्य की ज्योति को सोखने का आनन्द लेने लग गए।

   आत्मिक रीति से, अधिकांश संसार उस गाँव रजुकान के समान है - समस्याओं के पहाड़ संसार के लोगों तक प्रभु यीशु की ज्योति पहुँचने नहीं देते हैं। परन्तु परमेश्वर ने अपनी सन्तानों को उन तक प्रभु यीशु की ज्योति प्रतिबिंबित करने वाले दर्पण बनाकर उचित स्थानों पर उनके मध्य रखा है। ऐसा ही एक व्यक्ति था यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला, जो संसार में "ज्योति की गवाही देने आया" - अर्थात प्रभु यीशु की, उन्हें जो "अन्धकार और मृत्यु की छाया में हैं" (यूहन्ना 1:7; लूका 1:79)।

   जैसे हमारे शारीरिक और मान्सिक स्वास्थ्य के लिए सूर्य की ज्योति अनिवार्य है, उसी प्रकार हमारे आत्मिक स्वास्थ्य तथा विकास के लिए हमें प्रभु यीशु की ज्योति में आना भी अनिवार्य है। धन्यवादी हों कि प्रत्येक मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की ज्योति को संसार के अंधकारपूर्ण स्थानों में प्रतिबिंबित कर सकता है; और हमें ऐसा करना है जिससे अंधकार में रहने वालों को सच्ची ज्योति मिल सके। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अन्धकार में पड़े संसार को यीशु की ज्योति की आवश्यकता है।

यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए। - लूका 1:78-79

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80


सोमवार, 13 मार्च 2017

संवारना


   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब मूसा ने परमेश्वर के मण्डप, उसके निवास-स्थान, के बनाने का कार्य आरंभ किया तो सारे इस्त्राएलियों को बुलाया (निर्गमन 35-39), और परमेश्वर द्वारा तैयार कर के नियुक्त किए गए कुशल कारीगर बसलेल को यह कार्य करने की ज़िम्मेदारी सौंपी। इस्त्राएल के लोगों से कहा गया कि वे इस कार्य के लिए अपने पास उपलब्ध सामान में से वे स्वेच्छा से दें; और कुछ स्त्रियों ने अपने पीतल के बहुमूल्य दर्पण भी परमेश्वर की उपस्थिति के स्थान का सामान बनाने के लिए दिए (निर्गमन 38:8)।

   अपने दर्पण दान कर दिए? हम में से अनेकों के लिए यह करना कठिन होगा कि कोई ऐसी वस्तु दान कर दें जिसके द्वारा हम अपने आप को देखने संवारने पाते हैं। हमें ऐसा करने के लिए कहा तो नहीं जाता है, परन्तु यह मुझे विचारने पर विवश करता है कि हम अपने आप को देखने, संवारने और अपने स्वरूप की जाँच करते रहने में कितना समय बिताते हैं? ऐसा करना हमें अपने बारे में अधिक और दूसरों के बारे कम सोचने वाला बना देता है।

   लेकिन जब हम बाइबल की इस शिक्षा पर ध्यान देते हैं कि हम जैसे भी हैं, हमारी खामियों और अधूरेपन के बावजूद, परमेश्वर हम से ऐसे में भी प्रेम करता है, तो यह हमें अपने चेहरों या स्वरूप के बारे में चिंतित होने की बजाए परमेश्वर तथा अन्य लोगों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है (फिलिप्पियों 2:4)।

   ऑगस्टीन ने कहा, हम अपने आप से प्रेम करने से तो खो जाते हैं, परन्तु दूसरों से प्रेम करने में पाए जाते हैं। दूसरे शब्दों में, आनन्दित रहने का रहस्य अपने चेहरों को संवारने में नहीं वरन अपने हृदय, अपने जीवन, अपने आप को दूसरों को संवारने के लिए दे देने में है, जैसा कि हमारे प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया और हमारे सामने अनुसरण करने के लिए उदाहरण रखा। - डेविड रोपर


वह हृदय जो दूसरों को संवारने पर केंद्रित है, 
स्वार्थ द्वारा कभी नाश नहीं हो सकता।

निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। - रोमियों 15:1-2

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 20-22
  • मरकुस 13:21-37


शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

दर्पण


   हम अपने आप को दर्पण में कितनी बार देखते हैं? कुछ अध्ययनों के अनुसार, एक व्यक्ति दिन भर में औसतन 8 से 10 बर दर्पण में अपने आप को दर्पण में देखता है; जबकि कुछ अन्य सर्वेक्षण कहते हैं कि यदि दुकानों के शीशों में दिखने वाले अपने प्रतिबिंब तथा स्मार्ट-फोन के स्क्रीन पर अपने देखने आदि को भी सम्मिलित कर लें तो यह संख्या बढ़कर 60 से 70 बार प्रतिदिन हो जाती है। हम क्यों अपने आप को इतनी बार देखते हैं? अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि हम ऐसा यह जाँचने के लिए करते हैं कि हम दूसरों को कैसे दिखाई दे रहे हैं जिससे अपने आप को ठीक और व्यवस्थित कर सकें, रख सकें; विशेषकर तब जब हमें किसी सभा या सामजिक समारोह में सम्मिलित होना होता है। यदि हम में कुछ बुरा या भद्दा दिखाई दे और हम उसे ठीक करने की इच्छा ना रखें तो फिर हमारे अपने आप को दर्पण में देखने से क्या लाभ?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित याकूब ने अपनी पत्री में लिखा है कि परमेश्वर के वचन को पढ़ने या सुनने के पश्चात उसके अनुसार कार्य ना करना अपने आप को दर्पण में देखकर जो देखा है फिर उसे भूल जाना है (याकूब 1:22-24)। लेकिन बेहतर विकल्प है कि परमेश्वर के वचन के दर्पण में अपने आप को ध्यान से देखें, और जो दिखाई दे उसके अनुसार योग्य प्रतिक्रिया करें: "पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है" (पद 25)।

   यदि हम परमेश्वर के वचन के सुनने वाले हैं, परन्तु उसके अनुसार अपने जीवन में कार्य नहीं करते हैं, तो हम स्वयं अपने आप को ही धोखा देते हैं (पद 22)। परन्तु जब हम परमेश्वर के वचन की रौशनी में अपना आँकलन करते हैं और उसके निर्देशों का पालन करते हैं, तो परमेश्वर हमारी सहायता करता है और हमें दिन प्रति दिन अपनी समानता में बढ़ाता जाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


बाइबल वह दर्पण है जो हमें वैसा दिखाती है, जैसे हम परमेश्वर को देखाई देते हैं।

इसलिये जो कोई इन छोटी से छोटी आज्ञाओं में से किसी एक को तोड़े, और वैसा ही लोगों को सिखाए, वह स्वर्ग के राज्य में सब से छोटा कहलाएगा; परन्तु जो कोई उन का पालन करेगा और उन्हें सिखाएगा, वही स्वर्ग के राज्य में महान कहलाएगा। - मत्ती 5:19

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 23-24
  • मत्ती 1:1-22


सोमवार, 7 मार्च 2011

व्यवस्था का उद्देश्य

व्यवस्था ने न कभी किसी का उद्धार किया है न कभी कर सकती है। परमेश्वर ने व्यवस्था हमें पाप से छुड़ाने के लिये नहीं वरन पाप का बोध कराने और पाप से उद्धार की हमारी आवश्यक्ता को हमपर प्रगट करने के लिये दिया। इसीलिये प्रेरित पौलुस व्यवस्था को "शिक्षक" की संज्ञा देता है।

सुसमाचार प्रचारक फ्रेड ब्राउन ने अपने एक अविस्मरणीय प्रचार में व्यवस्था के उद्देश्य की व्याख्या तीन उदाहरणों से करी। व्यवस्था के उद्देश्य के लिये उसने सबसे पहला उदाहरण दिया एक छोटे दर्पण का जिसका उपयोग दन्तचिकित्सक मुंह के अन्दर का हाल जानने के लिये करते हैं। उस दर्पण के माध्यम से वे दांतों की सड़ाहट और दांतों में हुए छेदों को देख सकते हैं, लेकिन वह दर्पण न तो सड़े दांत निकाल सकता है और न ही उनका कोई उपचार कर सकता है। दर्पण केवल व्याधि को दिखा सकता है, उसका उपचार नहीं कर सकता।

ब्राउन ने व्यवस्था के उद्देश्य के लिये दूसरा उदाहरण टॉर्च से दिया। यदि रात में घर का फ्यूज़ उड़ जाए और घर की बिजली चली जाने से अनधकार हो जाए तो अन्धकार में टॉर्च के सहारे आप फ्यूज़ बॉक्स तक पहुंच सकते हैं और उड़े हुए फ्यूज़ के तार को देख सकते हैं, लेकिन उस तार को निकाल कर आप उसकी जगह टॉर्च को नहीं लगा सकते; वहां तो आपको फ्यूज़ का नया तार ही लगाना पड़ेगा, तब ही घर फिर से रौशन हो सकेगा। टॉर्च समस्या दिखा सकती है, उसका समाधान नहीं कर सकती।

व्यवस्था के उद्देश्य के लिये तीसरा उदाहरण ब्राउन ने दिया उस सीध नापने वाली डोर से जिसका उपयोग राजमिस्त्री भवन बनाते समय दीवार की सीध देखने के लिये करते हैं। यह डोर दिखा तो सकती है कि दीवार सीधी बन रही है या नहीं, परन्तु यदि दीवार में कोई टेढ़ापन है तो डोर उसे दूर नहीं कर सकती; यह सुधारने का काम तो राजमिस्त्री को ही करना होता है।

दर्पण, टॉर्च और सीध नापने वाली डोर की तरह व्यवस्था भी समस्या, अर्थात पाप की पहचान करवाती है, किंतु वह समस्या का निवारण नहीं कर सकती। पाप की समस्या का निवारण तो केवल प्रभु यीशु मसीह में है, और वही एकमात्र उद्धारकर्ता है जिसने व्यव्स्था की हर बात को पूरा करके क्रूस अपने बलिदान द्वारा समस्त मानव जाति के लिये उद्धार का मार्ग खोल दिया और अब कोई भी उसपर सहज विश्वास द्वारा, बिना किसी रीति रिवाज़ों, कार्यों अथवा व्यवस्था के पालन की समस्या में उलझे, अपने पापों से मुक्ति और उद्धार पा सकता है। - डेव एगनर


व्यवस्था हमें हमारी वह आवश्यक्ता दिखाती है जिसे केवल परमेश्वर का अनुग्रह पूरी कर सकता है।

इसलिये व्यवस्था मसीह तक पहुंचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्वास से धर्मी ठहरें। - गलतियों ३:२४


बाइबल पाठ: गलतियों ३:१९-२९

तब फिर व्यवस्था क्‍या रही? वह तो अपराधों के कारण बाद में दी गई, कि उस वंश के आने तक रहे, जिस को प्रतिज्ञा दी गई थी, और वह स्‍वर्गदूतों के द्वारा एक मध्यस्थ के हाथ ठहराई गई।
मध्यस्थ तो एक का नहीं होता, परन्‍तु परमेश्वर एक ही है।
तो क्‍या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विरोध में है? कदापि न हो क्‍योंकि यदि ऐसी व्यवस्था दी जाती जो जीवन दे सकती, तो सचमुच धामिर्कता व्यवस्था से होती।
परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र ने सब को पाप के आधीन कर दिया, ताकि वह प्रतिज्ञा जिस का आधार यीशु मसीह पर विश्वास करना है, विश्वास करने वालों के लिये पूरी हो जाए।
पर विश्वास के आने से पहिले व्यवस्था की आधीनता में हमारी रखवाली होती थी, और उस विश्वास के आने तक जो प्रगट होने वाला था, हम उसी के बन्‍धन में रहे।
इसलिये व्यवस्था मसीह तक पहुंचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्वास से धर्मी ठहरें।
परन्‍तु जब विश्वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के आधीन न रहे।
क्‍योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्‍तान हो।
और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्‍होंने मसीह को पहिन लिया है।
अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्‍योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो।
और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ३-४
  • मरकुस १०:३२-५२