ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 28 मार्च 2017

मार्ग


   हाल के कुछ वर्षों से मेरी बेटी उत्तरी मिशिगन प्रांत, जहाँ वह निवास करती है, के मूल निवासियों के इतिहास की ओर बहुत आकर्षित हुई है। एक ग्रीष्म काल में, जब मैं उसके पास मिलने गई हुई थी, उसने मुझे एक मार्ग दिखाया जिसका नाम वहाँ लगी पट्टिया पर लिखा था "मार्ग संकेत वृक्ष"। उसने मुझे समझाया कि बहुत पहले, वे मूल निवासी छोटे पेड़ों को किसी विशेष दिशा में मोड़ देते थे जिससे कुछ विशेष स्थानों की दिशा दिखाई जा सके, और वे पेड़ उस टेढ़ेपन के साथ ही दिशा दिखाते हुए बढ़ते जाते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का पुराना नियम खण्ड भी कुछ ऐसे ही उद्देश्य की पूर्ति करता है। वहाँ दी गई अनेकों आज्ञाएं तथा शिक्षाएं हमें वह दिशा एवं मार्ग दिखाते हैं जिस पर प्रभु परमेश्वर चाहता है कि हम चलें और जिनके अनुसार हम जीवन व्यतीत करें। बाइबल में दी गई दस आज्ञाएं इसका एक महान उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त, पुराने नियम के भविष्यद्वक्ताओं ने आने वाले जगत के उद्धारकर्ता मसीहा की ओर प्रभु यीशु के जन्म से हज़ारों वर्ष पूर्व इशारा किया। उन्होंने बताया कि प्रभु यीशु का जन्म बेतलहेम में होगा (देखें मीका 5:2 और मत्ती 2:1-6)। उन भविष्यद्वाक्ताओं ने प्रभु यीशु के क्रूस पर मारे जाने का आश्चर्यजनक रीति से सटीक विवरण दिया "क्योंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है; कुकर्मियों की मण्डली मेरी चारों ओर मुझे घेरे हुए है; वह मेरे हाथ और मेरे पैर छेदते हैं। मैं अपनी सब हडि्डयां गिन सकता हूं; वे मुझे देखते और निहारते हैं; वे मेरे वस्त्र आपस में बांटते हैं, और मेरे पहिरावे पर चिट्ठी डालते हैं" (भजन 22:16-18); (देखें भजन 22:14-18 और यूहन्ना 19:23-24) जबकि उन के द्वारा यह लिखे जाने के समय में क्रूस द्वारा मृत्युदण्ड था ही नहीं। यशायाह 53 में प्रभु यीशु द्वारा दिए गए अपने बलिदान को बताया गया है (देखें यशायाह 53:1-2, 6 और लूका 23:33)।

   हज़ारों वर्ष पहले, परमेश्वर के भविष्यद्वक्ताओं ने संसार के लोगों को परमेश्वर के पुत्र की ओर इशारा किया; जगत के पाप क्षमा और उद्धार के मार्ग की ओर। वही सारे जगत के सभी लोगों के लिए परमेश्वर के अनुग्रह में सेंत-मेंत प्रदान किया गया उद्धार और जीवन का मार्ग है। - सिंडी हैस कैस्पर


प्रभु यीशु ने हमें अनन्त जीवन देने के लिए अपने प्राण बलिदान किए।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यशायाह 53
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ? 
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। 
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। 
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। 
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला। 
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी। 
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी। 
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा। 
Isaiah 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44


सोमवार, 27 मार्च 2017

असली और नकली


   फिल्में बनाने के आरंभिक दिनों में फिल्मों में चल रहे घटनाक्रम को बताने की सहायता के लिए कुछ कृत्रिम ध्वनियाँ बनाई जाती थीं और उन्हें वास्तविक घटनाक्रम के साथ जोड़कर दिखाया जाता था। जैसे कि, चमड़े की थैली में मक्कई के आटे को भरकर दबाने से बर्फ पर चलते समय बर्फ के पैरों तले चटकने के समान ध्वनि उत्पन्न होती थी; इसी प्रकार दस्तानों को हवा में हिलाने से पक्षियों के पंख फड़फड़ाने की ध्वनि, हवा में तेज़ी से एक छड़ी को हिलाने से किसी वस्तु के तेज़ी से पास से निकलने के समान की ध्वनि होती थी। फिल्मों को अधिक से अधिक वास्तविक दिखाने के लिए ये ध्वनि कलाकार अनेकों कृत्रिम ध्वनियाँ उत्पन्न करने के रचनात्मक तरीके अपनाते थे।

   ध्वनि के समान सन्देशों की भी नकल बनाई जा सकती है; और शैतान इस विधि का उपयोग बहुतायत से करता है। वह परमेश्वर के वचन और सन्देश में मिलावट कर के उन नकली सन्देशों को वास्तविक जता कर हमारे सामने प्रस्तुत करता है जिससे हम असली के स्थान पर नकली सन्देश को सुनें, मानें और अपनाएं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इस विषय में चेतावनी दी है, "क्योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, और छल से काम करने वाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरने वाले हैं। और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है" (2 कुरिन्थियों 11:13-14)। पौलुस यहाँ उन झूठे शिक्षकों के विषय सचेत कर रहा था जो हमारा ध्यान सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु और उसके अनुग्रह के सन्देश से हटा कर कर्मों द्वारा धार्मिकता आदि गलत शिक्षाओं की ओर ले जाते हैं।

   इन गलत शिक्षाओं से बचाव के लिए प्रभु परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को अपना पवित्र आत्म दिया है; जिसके विषय में प्रभु यीशु ने कहा है, "परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा..." (यूहन्ना 16:13)। पवित्र आत्मा की आधीनता में परमेश्वर के वचन बाइबल की बातों का अध्ययन एवं मनन करने, उसके मार्गदर्शन के अनुसार चलने के द्वारा हम नकली सन्देशों से भरे इस संसार में, असली की पहचान पा सकते हैं, असली का अनुसरण कर सकते हैं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारा सदैव उपलब्ध सहायक एवं शिक्षक है।

हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। - 1 यूहन्ना 4:1-2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:7-15
John 16:7 तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। 
John 16:8 और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा। 
John 16:9 पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते। 
John 16:10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं, 
John 16:11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है। 
John 16:12 मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। 
John 16:13 परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आने वाली बातें तुम्हें बताएगा। 
John 16:14 वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा। 
John 16:15 जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30


रविवार, 26 मार्च 2017

दृढ़ संकल्प


   अपने जीवन के अन्त समय में आकर, मेरे 90 वर्षीय पिता, जो पैतृक देवताओं को बड़ी श्रद्धा से मानते आए थे, के मुख से बड़े परिश्रम से कही गई यह बात सुनना बहुत असाधारण तथा विशिष्ट था कि "मेरी मृत्यु के बाद कोई भी और कुछ ना करे सिवाए उसके जो चर्च करता है। कोई झाड़ा-फूँकी नहीं, कोई पैत्रिक रीति के बलिदान नहीं, कोई अन्य अनुष्ठान नहीं। जैसे मेरा जीवन प्रभु यीशु मसीह के हाथों में है, वैसे ही मेरी मृत्यु भी रहेगी!"

   मेरे पिता ने प्रभु यीशु के मार्ग पर उसके पीछे चलने का निर्णय अपने बुढ़ापे में लिया था, जब उन्होंने प्रभु यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया और स्वेच्छा से अपना जीवन उसे समर्पित कर दिया। उनके साथ के लोगों ने उनका उपहास किया, "तुम्हारी आयु के व्यक्ति को अब चर्च नहीं जाना चाहिए।" परन्तु उस एकमात्र सच्चे और जीवते परमेश्वर का अनुसरण तथा उपासना करने का मेरे पिता का निर्णय बिलकुल दृढ़ था, जैसे कि उन इस्त्राएलियों का जिन्हें यहोशू ने संबोधित किया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, इसत्राएलियों को कनान देश में बसाने के पश्चात, यहोशू ने उन्हें चुनौति दी, "और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (यहोशू 24:15)। उन इस्त्राएलियों का निर्णय दृढ़ था - वे प्रभु परमेश्वर ही के पीछे चलना चाहते थे। यहोशू ने उन्हें इस बात की कीमत स्मरण कराई (पद 19-20), परन्तु वे इस्त्राएली बीते दिनों में परमेश्वर के छुटकारे, प्रावाधानों और सुरक्षा के अनुभवों को स्मरण करते हुए (पद 16-17, 21), प्रभु परमेश्वर का अनुसरण करने के अपने संकल्प पर दृढ़ बने रहे।

   परन्तु ऐसा दृढ़ निर्णय, उस ही के अनुरूप कार्य भी माँगता है, जैसा कि यहोशू ने उन्हें निर्देष दिया "अपने बीच पराए देवताओं को दूर कर के अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर की ओर लगाओ" (यहोशू 24:23)। क्या आपने संपूर्ण जगत के उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह का अनुसरण करने का निर्णय कर लिया है? क्या आप उसका अनुसरण करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं? - लॉरेंस दरमानी


दृढ़ संकल्प उसके अनुसार स्पष्ट कार्यों की माँग करता है।

क्योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था। - इब्रानियों 3:14-15

बाइबल पाठ: यहोशू 24:14-24
Joshua 24:14 इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर कर के यहोवा की सेवा करो। 
Joshua 24:15 और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। 
Joshua 24:16 तब लोगों ने उत्तर दिया, यहोवा को त्यागकर दूसरे देवताओं की सेवा करनी हम से दूर रहे; 
Joshua 24:17 क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा वही है जो हम को और हमारे पुरखाओं को दासत्व के घर, अर्थात मिस्र देश से निकाल ले आया, और हमारे देखते बड़े बड़े आश्चर्य कर्म किए, और जिस मार्ग पर और जितनी जातियों के मध्य में से हम चले आते थे उन में हमारी रक्षा की; 
Joshua 24:18 और हमारे साम्हने से इस देश में रहनेवाली एमोरी आदि सब जातियों को निकाल दिया है; इसलिये हम भी यहोवा की सेवा करेंगे, क्योंकि हमारा परमेश्वर वही है। 
Joshua 24:19 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती; क्योंकि वह पवित्र परमेश्वर है; वह जलन रखनेवाला ईश्वर है; वह तुम्हारे अपराध और पाप क्षमा न करेगा।
Joshua 24:20 यदि तुम यहोवा को त्यागकर पराए देवताओं की सेवा करने लगोगे, तो यद्दपि वह तुम्हारा भला करता आया है तौभी वह फिरकर तुम्हारी हानि करेगा और तुम्हारा अन्त भी कर डालेगा। 
Joshua 24:21 लोगों ने यहोशू से कहा, नहीं; हम यहोवा ही की सेवा करेंगे। 
Joshua 24:22 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम आप ही अपने साक्षी हो कि तुम ने यहोवा की सेवा करनी अंगीकार कर ली है। उन्होंने कहा, हां, हम साक्षी हैं। 
Joshua 24:23 यहोशू ने कहा, अपने बीच पराए देवताओं को दूर कर के अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर की ओर लगाओ। 
Joshua 24:24 लोगों ने यहोशू से कहा, हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही की सेवा करेंगे, और उसी की बात मानेंगे। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



शनिवार, 25 मार्च 2017

दृष्टिकोण


   मैं समय निकाल कर दो वृद्ध महिलाओं से मिलने जाया करती हूँ। उन में से एक को कोई आर्थिक घटी या चिंता नहीं है, अपनी उम्र के अनुसार वह स्वस्थ है, और अपने ही घर में रहती है। परन्तु उसके पास कहने के लिए सदा ही कुछ ना कुछ नकारात्मक होता है। दूसरी महिला गठिया से अपंग और भूल जाने वाली है। वह साधारण से स्थान पर रहती है, और अपने आप को स्मरण दिलाते रहने के लिए अपने कार्य एक पुस्तिका में लिखती रहती है, जिसे वह अपने पास रखती है। उससे मिलने जो भी आता है, उससे उस महिला के पहले शब्द होते हैं "परमेश्वर मेरे साथ बहुत भला है।" पिछली बार जब मैं उस महिला से मिलने गया था, तो उसकी स्मरण पुस्तिका उसे लौटाते समय मेरा ध्यान पिछले दिन के विषय में लिखी उसकी टिप्पणी पर गया, जहाँ उसने लिखा था, "कल दोपहर के भोजन पर बाहर आमंत्रण है! अद्भुत! जीवन का एक और अच्छा दिन।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रभु यीशु के जन्म के समय में, हन्नाह नामक परमेश्वर की एक भक्त थी, जो कठिन परिस्थितियों में रहती थी (लूका 2:36-37)। वह बहुत पहले विधवा हो गई थी और संभवतः निःसन्तान थी। वह अपने आप को निर्बल और निरुद्देश्य समझ सकती थी, परन्तु उसका दृष्टिकोण भिन्न था। उसका ध्यान परमेश्वर और उसकी सेवकाई की ओर, तथा लालसा आने वाले जगत के उद्धारकर्ता के प्रति थी। इन बातों में तल्लीन, वह परमेश्वर के कार्यों - प्रार्थना करना, उपवास रखना और जो कुछ उसने परमेश्वर से सीखा था उसे दूसरों को सिखाने में व्यस्त रहती थी।

   इतने वर्षों से उस आने वाले उद्धारकर्ता की प्रतीक्षा में लगे, अब उसकी आयु अस्सी वर्ष से अधिक की हो गई थी, परन्तु उसने अपना दृष्टिकोण नहीं बदला था, वह निरन्तर यही सब करती रहती थी। अब परमेश्वर का समय आ गया, और जब यहूदियों की रीति के अनुसार शिशु प्रभु यीशु को मन्दिर में लाया गया, तो हन्नाह को भी उसे देखने का अवसर मिल गया, वर्षों की उसकी धैर्यपूर्ण साधना पूरी हो गई। जगत के उद्धारकर्ता को देखकर उसका मन आनन्द और स्तुति से भर उठा, उसने तुरंत ही परमेश्वर की आराधना की, और फिर इस सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाने में लग गई; कैसा विलक्षण तथा शिक्षाप्रद धैर्य एवं दृष्टिकोण!

   आज परिस्थितियों के कारण आपका दृष्टिकोण कैसा है - हर बात में परमेश्वर के प्रति धन्यवादी और आनन्दित रहने वाला, या कुड़कुड़ाते रहने वाला। - मैरियन स्ट्राउड


परमेश्वर की योजना तथा हमारे उत्तरदायित्वों, 
दोनों पर नज़र बनाए रखना कठिन होता है,
 परन्तु इन दोनों का जहाँ मिलन होता है, 
वही सर्वोत्तम स्थान है।

मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है; - भजन 130:5

बाइबल पाठ: लूका 2:36-40
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी। 
Luke 2:39 और जब वे प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ निपटा चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए।
Luke 2:40 और बालक बढ़ता, और बलवन्‍त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52


शुक्रवार, 24 मार्च 2017

भरोसा


   जब हमारे बच्चे छोटे थे तो उन्हें डॉक्टर के पास बिमारी से बचने के टीके लगवाने ले जाना एक रोचक अनुभव होता था। डॉक्टर का प्रतीक्षालय खिलौनों और बच्चों की पुस्तकों तथा पत्रिकाओं से भरा हुआ था, जिनसे वे खेलते थे या जिन्हें मैं उन्हें पढ़कर सुनाता था। यहाँ तक तो कोई समस्या नहीं होती थी। लेकिन जैसे ही मैं उन्हें उठाकर अन्दर डॉक्टर से मिलने ले कर जाता था, सब कुछ बदल जाता था। जैसे ही वे नर्स को टीका लेकर अपनी ओर आता देखते थे, उनका आनन्द भय में परिवर्तित हो जाता था; और नर्स जितनी निकट आती जाती थी वे उतनी ही ज़ोर से सांत्वना तथा शान्ति पाने के लिए मुझ से चिपटते जाते थे, क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा था।

   पाप और अशान्ति में पड़े हुए इस संसार में कभी कभी हम शान्ति और आराम की स्थिति से निकल कर पीड़ादायक क्षेत्रों में आ जाते हैं। ऐसे समय में प्रश्न होता है कि उस परिस्थिति के प्रति हमारी प्रतिक्रिया क्या होगी? हम भयभीत होकर परमेश्वर से प्रश्न कर सकते हैं कि उसने हमारे साथ ऐसा क्यों होने दिया? या हम उस पर भरोसा रखते हुए यह मानकर चल सकते हैं कि उन परेशानियों में भी वह हमारे लिए कुछ ऐसा कर रहा है जो हमारी भलाई के लिए है, चाहे अभी वह बात कष्टदायक ही क्यों ना हो। जब ऐसी परिस्थितियाँ आएं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा लिखे गए शब्द स्मरण रखने चाहिएं, "जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा" (भजन 56:3)।

   जैसे मेरे बच्चे मुझ से ज़ोर से लिपट जाते थे, हमें प्रभु परमेश्वर से ज़ोर से लिपटे रहना चाहिए, और जितनी कठिन परिस्थिति हो, उतने ही अधिक ज़ोर से हम प्रभु से लिपटे रहें; उस पर भरोसा रखें क्योंकि उसका प्रेम कभी चूकता नहीं है। - जो स्टोवैल


अपने परमेश्वर पिता से लिपटे रहें, वही आपकी एकमात्र भरोसेमन्द आशा है।

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है। - नीतिवचन 29:25

बाइबल पाठ: भजन 56
Psalms 56:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं। वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं। 
Psalms 56:2 मेरे द्रोही दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं, क्योंकि जो लोग अभिमान कर के मुझ से लड़ते हैं वे बहुत हैं। 
Psalms 56:3 जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। 
Psalms 56:4 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:5 वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। 
Psalms 56:6 वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों। 
Psalms 56:7 क्या वे बुराई कर के भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे! 
Psalms 56:8 तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? 
Psalms 56:9 जब जिस समय मैं पुकारूंगा, उसी समय मेरे शत्रु उलटे फिरेंगे। यह मैं जानता हूं, कि परमेश्वर मेरी ओर है। 
Psalms 56:10 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, यहोवा की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा। 
Psalms 56:11 मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों का भार मुझ पर बना है; मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा। 
Psalms 56:13 क्योंकि तू ने मुझ को मृत्यु से बचाया है; तू ने मेरे पैरों को भी फिसलने से बचाया है, ताकि मैं ईश्वर के साम्हने जीवतों के उजियाले में चलूं फिरूं?

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24


गुरुवार, 23 मार्च 2017

ज्योति


   नॉरवे में एक छोटा सा गाँव है रजुकान, जो रहने के लिए बहुत आरामदायक स्थान है - शरद ऋतु के अन्धेरे दिनों को छोड़ कर। ऐसा इसलिए क्योंकि यह गाँव ऊँचे गॉस्टाटोपन पर्वत की तली में स्थित वादी में बसा हुआ है और लगभग आधे वर्ष यहाँ सूर्य की सीधी रौशनी नहीं आने पाती। यहाँ के निवासी लंबे समय से पहाड़ के ऊपर दर्पण लगाकर सूर्य की रौशनी को गाँव में प्रतिबिंबित करने के बारे में सोचते रहे थे। परन्तु कुछ समय पहले तक ऐसा कर पाना संभव नहीं था। सन 2005 में एक स्थानीय कलाकार ने "दर्पण परियोजना" आरंभ की जिससे ऐसे लोगों को एक साथ लाया जा सके जो इस विचार को व्यवहार में बदल सकें। इसके आठ वर्ष पश्चात, 2013 में, वे दर्पण कार्यान्वित हो सके। ऐसा होने पर उस गाँव के निवासी वहाँ के मुख्य मैदान में एकत्रित होकर प्रतिबिंबित सूर्य की ज्योति को सोखने का आनन्द लेने लग गए।

   आत्मिक रीति से, अधिकांश संसार उस गाँव रजुकान के समान है - समस्याओं के पहाड़ संसार के लोगों तक प्रभु यीशु की ज्योति पहुँचने नहीं देते हैं। परन्तु परमेश्वर ने अपनी सन्तानों को उन तक प्रभु यीशु की ज्योति प्रतिबिंबित करने वाले दर्पण बनाकर उचित स्थानों पर उनके मध्य रखा है। ऐसा ही एक व्यक्ति था यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला, जो संसार में "ज्योति की गवाही देने आया" - अर्थात प्रभु यीशु की, उन्हें जो "अन्धकार और मृत्यु की छाया में हैं" (यूहन्ना 1:7; लूका 1:79)।

   जैसे हमारे शारीरिक और मान्सिक स्वास्थ्य के लिए सूर्य की ज्योति अनिवार्य है, उसी प्रकार हमारे आत्मिक स्वास्थ्य तथा विकास के लिए हमें प्रभु यीशु की ज्योति में आना भी अनिवार्य है। धन्यवादी हों कि प्रत्येक मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की ज्योति को संसार के अंधकारपूर्ण स्थानों में प्रतिबिंबित कर सकता है; और हमें ऐसा करना है जिससे अंधकार में रहने वालों को सच्ची ज्योति मिल सके। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अन्धकार में पड़े संसार को यीशु की ज्योति की आवश्यकता है।

यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए। - लूका 1:78-79

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80


बुधवार, 22 मार्च 2017

परिवार


   1980 के दशक में, मृत्यु या तलाक के कारण अकेले हो गए लोगों में से बहुतेरों के लिए, हमारे चर्च में अयोजित की जाने वाली कक्षा ने एक करीबी संगठित परिवार का रूप ले लिया। यदि किसी का स्थानान्तरण होता तो कक्षा के सदस्य मिलकर उसका सामान बक्सों में बाँधते, उसके मेज़-कुर्सी उठाते और उसे भोजन सामग्री उपलब्ध कराते। जन्मदिन और छुट्टियाँ अब अकेले मनाए जाने के लिए नहीं रह गए थे, क्योंकि मसीही विश्वास और मित्रता में एक साथ मिलकर चलने ने प्रोत्साहित करने वाले घनिष्ठ संबंध बना दिए थे। उन अकेलेपन और परेशानी के दिनों में जो संबंध तीन दशक पहले बने थे, वे आज भी फल-फूल रहे हैं, तथा उन व्यक्तियों और उनके परिवारों को संभाल रहे हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, थिस्सलुनीकिया में मसीह यीशु का अनुसरण करने वालों को पौलुस द्वारा लिखी गई पत्री में, परमेश्वर के परिवार के सदस्य होने के कारण उनमें परस्पर बनने वाले जीवन-दायक संबंधों के बारे में लिखा गया है: "परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है" (1 थिस्सलुनीकियों 2:7)। "क्योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो" (1 थिस्सलुनीकियों 2:9)। "जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे" (1 थिस्सलुनीकियों 2:11)। क्योंकि थिस्सलुनीकिया के मसीही विश्वासी पौलुस और उसके साथियों को "प्यारे हो गए थे" इसलिए उनके साथ वे ना केवल सुसमाचार वरन अपना जीवन भी माता-पिता, भाई-बहन के समान साझा करने के लिए तैयार थे (1 थिस्सलुनीकियों 2:8)।

   मसीही विश्वास से बने परमेश्वर के परिवार में वह हमें माँ, बाप, बहिनें और भाई; अर्थात संपूर्ण परिवार उपलब्ध करवाता है। जब हम परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम में होकर, उसके परिवार में अपने जीवन एक दूसरे के साथ साझा करते हैं, तो परमेश्वर अपना आनन्द हमारे जीवनों में भर देता है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


परमेश्वर आपसे और मुझसे प्रेम करता है;
 आईए हम भी एक दूसरे से प्रेम करें।

पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। - इफिसियों 2:13-14

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 2:1-14
1 Thessalonians 2:1 हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ। 
1 Thessalonians 2:2 वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं। 
1 Thessalonians 2:3 क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है। 
1 Thessalonians 2:4 पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 
1 Thessalonians 2:5 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है। 
1 Thessalonians 2:6 और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से। 
1 Thessalonians 2:7 परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है। 
1 Thessalonians 2:8 और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर का सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्यारे हो गए थे। 
1 Thessalonians 2:9 क्योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों। 
1 Thessalonians 2:10 तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धामिर्कता और निर्दोषता से रहे। 
1 Thessalonians 2:11 जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे। 
1 Thessalonians 2:12 कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।
1 Thessalonians 2:13 इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुंचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्तु परमेश्वर का वचन समझकर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है। 
1 Thessalonians 2:14 इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्होंने यहूदियों से पाया था।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56