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रविवार, 26 मार्च 2017

दृढ़ संकल्प


   अपने जीवन के अन्त समय में आकर, मेरे 90 वर्षीय पिता, जो पैतृक देवताओं को बड़ी श्रद्धा से मानते आए थे, के मुख से बड़े परिश्रम से कही गई यह बात सुनना बहुत असाधारण तथा विशिष्ट था कि "मेरी मृत्यु के बाद कोई भी और कुछ ना करे सिवाए उसके जो चर्च करता है। कोई झाड़ा-फूँकी नहीं, कोई पैत्रिक रीति के बलिदान नहीं, कोई अन्य अनुष्ठान नहीं। जैसे मेरा जीवन प्रभु यीशु मसीह के हाथों में है, वैसे ही मेरी मृत्यु भी रहेगी!"

   मेरे पिता ने प्रभु यीशु के मार्ग पर उसके पीछे चलने का निर्णय अपने बुढ़ापे में लिया था, जब उन्होंने प्रभु यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया और स्वेच्छा से अपना जीवन उसे समर्पित कर दिया। उनके साथ के लोगों ने उनका उपहास किया, "तुम्हारी आयु के व्यक्ति को अब चर्च नहीं जाना चाहिए।" परन्तु उस एकमात्र सच्चे और जीवते परमेश्वर का अनुसरण तथा उपासना करने का मेरे पिता का निर्णय बिलकुल दृढ़ था, जैसे कि उन इस्त्राएलियों का जिन्हें यहोशू ने संबोधित किया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, इसत्राएलियों को कनान देश में बसाने के पश्चात, यहोशू ने उन्हें चुनौति दी, "और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (यहोशू 24:15)। उन इस्त्राएलियों का निर्णय दृढ़ था - वे प्रभु परमेश्वर ही के पीछे चलना चाहते थे। यहोशू ने उन्हें इस बात की कीमत स्मरण कराई (पद 19-20), परन्तु वे इस्त्राएली बीते दिनों में परमेश्वर के छुटकारे, प्रावाधानों और सुरक्षा के अनुभवों को स्मरण करते हुए (पद 16-17, 21), प्रभु परमेश्वर का अनुसरण करने के अपने संकल्प पर दृढ़ बने रहे।

   परन्तु ऐसा दृढ़ निर्णय, उस ही के अनुरूप कार्य भी माँगता है, जैसा कि यहोशू ने उन्हें निर्देष दिया "अपने बीच पराए देवताओं को दूर कर के अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर की ओर लगाओ" (यहोशू 24:23)। क्या आपने संपूर्ण जगत के उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह का अनुसरण करने का निर्णय कर लिया है? क्या आप उसका अनुसरण करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं? - लॉरेंस दरमानी


दृढ़ संकल्प उसके अनुसार स्पष्ट कार्यों की माँग करता है।

क्योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था। - इब्रानियों 3:14-15

बाइबल पाठ: यहोशू 24:14-24
Joshua 24:14 इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर कर के यहोवा की सेवा करो। 
Joshua 24:15 और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। 
Joshua 24:16 तब लोगों ने उत्तर दिया, यहोवा को त्यागकर दूसरे देवताओं की सेवा करनी हम से दूर रहे; 
Joshua 24:17 क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा वही है जो हम को और हमारे पुरखाओं को दासत्व के घर, अर्थात मिस्र देश से निकाल ले आया, और हमारे देखते बड़े बड़े आश्चर्य कर्म किए, और जिस मार्ग पर और जितनी जातियों के मध्य में से हम चले आते थे उन में हमारी रक्षा की; 
Joshua 24:18 और हमारे साम्हने से इस देश में रहनेवाली एमोरी आदि सब जातियों को निकाल दिया है; इसलिये हम भी यहोवा की सेवा करेंगे, क्योंकि हमारा परमेश्वर वही है। 
Joshua 24:19 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती; क्योंकि वह पवित्र परमेश्वर है; वह जलन रखनेवाला ईश्वर है; वह तुम्हारे अपराध और पाप क्षमा न करेगा।
Joshua 24:20 यदि तुम यहोवा को त्यागकर पराए देवताओं की सेवा करने लगोगे, तो यद्दपि वह तुम्हारा भला करता आया है तौभी वह फिरकर तुम्हारी हानि करेगा और तुम्हारा अन्त भी कर डालेगा। 
Joshua 24:21 लोगों ने यहोशू से कहा, नहीं; हम यहोवा ही की सेवा करेंगे। 
Joshua 24:22 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम आप ही अपने साक्षी हो कि तुम ने यहोवा की सेवा करनी अंगीकार कर ली है। उन्होंने कहा, हां, हम साक्षी हैं। 
Joshua 24:23 यहोशू ने कहा, अपने बीच पराए देवताओं को दूर कर के अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर की ओर लगाओ। 
Joshua 24:24 लोगों ने यहोशू से कहा, हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही की सेवा करेंगे, और उसी की बात मानेंगे। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



रविवार, 20 मार्च 2016

दृढ़निश्चय


   टेलिविज़न पर युद्ध से ध्वस्त एक देश से विस्थापित हुए शरणार्थियों की बदहाल दशा पर रिपोर्ट प्रसारित हो रही थी। उन शरणार्थियों में एक दस वर्षीय लड़की की दृढ़निश्चयता को देखकर मैं चकित हुआ; यद्यपि उनके वापस अपने देश लौट पाने कि संभावनाएं ना के बराबर थीं परन्तु फिर भी उसने बड़े दृढ़ विश्वास के साथ कहा, "जब हम वापस जाएंगे तब मैं फिर से अपने पड़ौसियों से मिलने जाऊँगी, अपनी सहेलियों के साथ खेलूँगी; मेरे पिताजी कहते हैं कि हमारा घर अब नहीं रहा है, लेकिन मैं कहती हूँ कि हम लौटकर उसे फिर से बना लेंगे।"

   जीवन में कुछ बातों के प्रति दृढ़निश्चय रहने का स्थान अवश्य ही है, विशेषकर तब जब वे बातें परमेश्वर में हमारे विश्वास तथा हमारे द्वारा औरों के प्रति प्रेम दर्शाने से संबंधित हो। परमेश्वर के वचन बाइबल में रूत की पुस्तक का आरंभ होता है तीन महिलाओं के विवरण से जो एक त्रासदी में होकर एक दूसरे से जुड़ी हैं। अपने पति और दोनों बेटों की मृत्यु के पश्चात मोआब में रह रही नाओमी ने वापस अपने शहर बेतलेहम लौट जाने का निर्णय लिया, और अपनी दोनों विधवा बहुओं से आग्रह किया कि वे अपने देश मोआब में ही रह जाएं और पुनः अपने घर बसाएं। एक बहु, ओर्पा ने तो नाओमी की बात मान ली, लेकिन दूसरी बहु रूत ने नाओमी के साथ ही वापस जाने की ठान ली। रूत ने नाओमी से कहा: "...जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे" (रूत 1:16-17)। जब नाओमी ने देखा कि रूत अपने इरादे में पक्की है तो वे दोनों बेतलेहम लौट आए और वहाँ अपनी ज़िन्दगी दोबारा स्थापित करने लगे। परमेश्वर ने रूत की दृढ़निश्चयता और नाओमी तथा परमेश्वर के प्रति वफादारी का अच्छा प्रतिफल दिया और रूत का विवाह एक संपन्न व्यक्ति के साथ हो गया, और फिर उसकी संतान के वंश से इस्त्राएल के सुप्रसिद्ध राजा दाऊद और बाद में जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ।

   घमण्ड से तो ढिठाई आती है, परन्तु प्रेम के कारण दृढ़निश्चयता आती है। बाइबल में प्रभु यीशु के लिए आया है कि, "जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, जो उसने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया" (लूका 9:51)। प्रभु यीशु के हम पापियों के लिए अपने जीवन का बलिदान कराने के इस प्रेमपूर्ण दृढ़निश्चय के कारण ही आज हम अनन्त जीवन पाने वाले बन सके हैं। दूसरों के पापों के लिए स्वयं मृत्यु स्वीकार कर लेने का उसका यह दृढ़निश्चय हमें उसके लिए जीवन जीने की प्रेरणा और निश्चय कर लेने की सामर्थ देता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रेम समर्पण से प्रगट होता है।

क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया क्योंकि मुझे निश्चय था कि मुझे लज्जित होना न पड़ेगा। - यशायाह 50:7

बाइबल पाठ: रूत 1:8-18
Ruth 1:8 तब नाओमी ने अपनी दोनों बहुओं से कहा, तुम अपने अपने मैके लौट जाओ। और जैसे तुम ने उन से जो मर गए हैं और मुझ से भी प्रीति की है, वैसे ही यहोवा तुम्हारे ऊपर कृपा करे। 
Ruth 1:9 यहोवा ऐसा करे कि तुम फिर पति कर के उनके घरों में विश्राम पाओ। तब उसने उन को चूमा, और वे चिल्ला चिल्लाकर रोने लगीं, 
Ruth 1:10 और उस से कहा, निश्चय हम तेरे संग तेरे लोगों के पास चलेंगी। 
Ruth 1:11 नाओमी ने कहा, हे मेरी बेटियों, लौट जाओ, तुम क्यों मेरे संग चलोगी? क्या मेरी कोख में और पुत्र हैं जो तुम्हारे पति हों? 
Ruth 1:12 हे मेरी बेटियों, लौटकर चली जाओ, क्योंकि मैं पति करने को बूढ़ी हूं। और चाहे मैं कहती भी, कि मुझे आशा है, और आज की रात मेरे पति होता भी, और मेरे पुत्र भी होते, 
Ruth 1:13 तौभी क्या तुम उनके सयाने होने तक आशा लगाए ठहरी रहतीं? और उनके निमित्त पति करने से रुकी रहतीं? हे मेरी बेटियों, ऐसा न हो, क्योंकि मेरा दु:ख तुम्हारे दु:ख से बहुत बढ़कर है; देखो, यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है। 
Ruth 1:14 तब वे फिर से उठीं; और ओर्पा ने तो अपनी सास को चूमा, परन्तु रूत उस से अलग न हुई। 
Ruth 1:15 तब उसने कहा, देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिये तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा। 
Ruth 1:16 रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; 
Ruth 1:17 जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे। 
Ruth 1:18 जब उसने यह देखा कि वह मेरे संग चलने को स्थिर है, तब उसने उस से और बात न कही। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 4-6
  • लूका 1:1-20


बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

संकल्प


   सामान्यतः लोग नव-वर्ष के आगमन पर अपने जीवनों में सुधार के लिए कुछ संकल्प करते हैं, परन्तु मैंने नव-वर्ष के साथ नए संकल्प करना सन 1975 से छोड़ रखा है। मुझे नए संकल्प करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती - अभी तो मैं अभी पुराने संकल्प जैसे कि, प्रतिदिन जो परमेश्वर मुझे सिखाता है उसे लिख कर संकलित करके रखना, परमेश्वर के वचन बाइबल को नियमित प्रतिदिन पढ़ना, परमेश्वर के साथ प्रार्थना में प्रतिदिन समय बिताना, अपने समय को नियोजित करके उसका सदुप्योग करना, अपने कमरे को साफ-सुथरा रखना (अब तो मेरे पास साफ-सुथरा रखने के लिए पूरा घर है) आदि को ही भली-भांति पूरे करने के प्रयास में लगी हूँ!

   लेकिन इस वर्ष मैंने अपने संकल्पों की सूचि में एक नया संकल्प जोड़ा है, जो मुझे प्रेरित पौलुस द्वारा रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री से मिला: "सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष ना लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे" (रोमियों 14:13)। यद्यपि यह संकल्प नया नहीं, अपितु लगभग 2000 वर्ष पुराना है, परन्तु फिर भी यह एक ऐसा संकल्प है जिसे हमें हर वर्ष दोहराते रहना चाहिए। जैसे उस समय रोम के मसीही विश्वासी कर रहे थे, आज के मसीही विश्वासी भी कई बार वैसा ही करते हैं - दूसरों के पालन के लिए नियम बनाते हैं, और दूसरों को बाध्य करते हैं कि वे कुछ ऐसी बातों और व्यवहार पर चलें जिनके बारे में बाइबल या तो कुछ कहती ही नहीं है अथवा उनकी बात से अलग ही कहती है। उनके बनाए ऐसे नियम और व्यवहार लोगों के लिए ठोकर का कारण बनते हैं, मसीही विश्वासियों के जीवनों में कठिनाई लाते हैं तथा दूसरों को मसीह यीशु के पास आने में बाधा बनते हैं।

   प्रभु यीशु ने यह स्पष्ट सिखाया, और बाइबल में भी स्पष्ट लिखा गया है कि उद्धार केवल प्रभु के अनुग्रह से ही है, ना कि किसी परिवार में जन्म लेने अथवा कुछ कर्मों के द्वारा (गलतियों 2:16); पापों की क्षमा प्राप्त करने और उद्धार पाने के लिए प्रत्येक जन को व्यक्तिगत रीति और स्वेच्छा से प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान तथा प्रभु यीशु पर विश्वास करना है। इसके विप्रीत बहुत से लोग इस साधारण मसीही विश्वास को धर्म-कर्म और विधि-विधानों के साथ जोड़ देते हैं, जो प्रभु यीशु तथा बाइबल की शिक्षाओं से बिलकुल मेल नहीं खाता है।

   आईए इस नए वर्ष में हम प्रभु यीशु के आगमन के सुसमाचार को लोगों के साथ बाँटने का और उनके आगे प्रभु के निकट आने या प्रभु के साथ साधारण विश्वास का जीवन बिताने में कोई भी अड़चन या बाधा या ठोकर का कारण ना रखने का संकल्प ले कर चलें। - जूली ऐकरमैन लिंक


विश्वास पहले वह हाथ है जो परमेश्वर के वरदान को ग्रहण करता है, फिर वह पाँव है जो परमेश्वर के साथ चलता है

तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा। - गलतियों 2:16

बाइबल पाठ: रोमियों 14:1-13
Romans 14:1 जो विश्वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो; परन्तु उसी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं। 
Romans 14:2 क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है। 
Romans 14:3 और खानेवाला न-खाने वाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खाने वाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है। 
Romans 14:4 तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बन्ध रखता है, वरन वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है। 
Romans 14:5 कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले। 
Romans 14:6 जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जा नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है। 
Romans 14:7 क्योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है। 
Romans 14:8 क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं। 
Romans 14:9 क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो। 
Romans 14:10 तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर क्यों अपने भाई को तुच्छ जानता है? हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे। 
Romans 14:11 क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे साम्हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी। 
Romans 14:12 सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा।
Romans 14:13 सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। 

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22


बुधवार, 16 मई 2012

दृढ़ संकल्प


   मूडी बाइबल संस्थान में सेवा करने का एक बड़ा लाभ था उस संस्थान से अध्ययन कर के निकलने और फिर अपनी सेवकाई के द्वारा प्रभु यीशु मसीह के लिए संसार पर छाप छोड़ने वाले लोगों के उत्साहवर्धक जीवनों के बारे में सुनते और जानते रहना। उन लोगों के त्याग, अथक परिश्रम और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए उत्साह की उनकी जीवन गाथाएं बहुत प्रेर्णादायक होती थीं। एक ऐसी ही सच्ची कहानी है मेरी बेथुने की।

   १९वीं सदी के अंतिम भाग में, अफ्रीका में मिशनरी बनकर जाने के उद्देश्य से, अश्वेत रंग की मेरी मैक्लिओड बेथुने ने दो वर्ष मूडी बाइबल संस्थान में लगाए। लेकिन जब वे अपना अध्ययन पूरा कर चुकीं तो किसी भी मिशनरी संस्था ने उन्हें मिशनरी कार्य के लिए लेने और भेजने में रुचि नहीं दिखाई। उनका अफ्रीका में सेवकाई के लिए जाने का सपना पूरा नहीं हो सका। किंतु इससे प्रभु यीशु की सेवकाई के लिए उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई। अपने प्रति मिशनरी संस्थाओं की उदासीनता से हतोसाहित हुए बिना उन्होंने फ्लोरिडा में अश्वेत महिलाओं के लिए एक छोटा बाइबल स्कूल खोला, जो आते समय में बढ़ कर बेथुने-कोल्मैन कॉलेज बन गया और अमेरिका के इतिहास में महिलाओं के दर्जे में परिवर्तन और सुधार लाने में उनकी और इस कॉलेज की बहुत महत्वपुर्ण भूमिका रही।

   अमेरिका को मेरी बेथुने की यह धरोहर टूटे सपनों के बावजुद अपने प्रभु की सेवकाई में कोई कमी ना आने देने के दृढ संकल्प का नतीजा थी। उन्हें निश्चय था कि परमेश्वर ने उन्हें "मेल मिलाप की सेवकाई" (२ कुरिन्थियों ५:१८) सौंपी है, और इस सेवाकाई की पूर्ति के लिए उन्हें परिस्थितियों से हार मान लेना स्वीकार नहीं था।

   प्रभु की सेवकाई की यह पुकार, केवल मेरी बेथुने के लिए ही नहीं, प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए है। हम सब को संसार के पास मसीह का यह सन्देश पहुंचाना है कि मसीह में होकर हमारा मेल मिलाप परमेश्वर के साथ संभव है, मसीह यीशु में होकर इसके लिए मार्ग सब के लिए उपलब्ध है।

   आप जहां भी हैं, वहीं पर मसीह के लिए प्रभावी होने का कोई माध्यम खोजिए और अपने उद्धारकर्ता प्रभु के लिए संसार पर अपनी छाप छोड़िए। प्रभु की सामर्थ से यह आपके द्वारा भी हो सकता है! - जो स्टोवैल


जो एक गुण परमेश्वर अपने लोगों में ढूंढ़ता है वह है उसकी सेवकाई करने वाला समर्पित मन।

और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। - २ कुरिन्थियों ५:१८

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१६-२१
2Co 5:16  सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उस को ऐसा नहीं जानेंगे। 
2Co 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2Co 5:18  और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2Co 5:19  अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2Co 5:20  सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2Co 5:21  जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।


एक साल में बाइबल: 

  • २ राजा २४-२५ 
  • यूहन्ना ५:१-२४