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गुरुवार, 22 नवंबर 2018

धन्यवादी



      कौर्नार्स्टोन विश्वविद्यालय में हम प्रत्येक पतझड़ में धन्यवादी दिवस के दिन एक बड़े और भव्य भोज का आयोजन करते हैं। हमारे छात्रों को यह बहुत पसन्द है। पिछले वर्ष भोजन के लिए बैठे छात्रों में से एक मेज़ के चारों ओर बैठे कुछ छात्रों ने एक विशेष खेल को खेलने का निर्णय लिया – उन्होंने एक दूसरे को चुनौती दी कि वे किसी एक विषय का नाम लेंगे जिसके लिए वे धन्यवादी हैं, और विषय को दोहराया नहीं जाएगा; प्रत्येक छात्र के पास नाम लेने के लिए केवल तीन सेकेंड होंगे, और जो नाम नहीं लेने पाया वह खेल से बाहर हो जाएगा।

      पढ़ाई के दौरान अनेकों बातें होती हैं जिनके लिए छात्र शिकायत कर सकते हैं या फिर कुड़कुड़ा सकते हैं; परन्तु इन छात्रों ने धन्यवादी होना चुना था। और मेरा विश्वास है कि उस खेल को खेलने के पश्चात उन सब ने बहुत अच्छा अनुभव किया होगा, विशेषकर उसकी तुलना में जैसा वे शिकायतें करने के पश्चात अनुभव करते।

      जीवन में शिकायत करने और कुड़कुड़ाने के तो बहुतेरे अवसर आते रहेंगे, परन्तु यदि हम ध्यान से देखें तो धन्यवादी होने के लिए मिली हुई आशीषों की भी कमी नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास से उन्हें मिले नए जीवन के विषय में बताता है, और तीन बार वह “धन्यवादी” होने के गुण का उल्लेख करता है। कुलुस्सियों 3:15 में वह उन्हें “धन्यवादी बने रहो” कहता है; फिर 3:16 में वह उनसे कहता है कि “...अपने अपने मन में अनुग्रह [धन्यवाद] के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ”; और 3:17 में कहता है, “वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो”। जब हम इस बात का संज्ञान लेते हैं कि पौलुस ने यह पत्री रोमी कैदखाने से लिखी थी, तो हमें सोच कर विसमय होता है कि उस कठिन परिस्थति में भी पौलुस स्वयँ परमेश्वर के प्रति धन्यवादी रहता था तथा औरों को भी धन्यवादी रहने के लिए प्रोत्साहित करता था।

      आज, हम निर्णय लें कि हम परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बने रहेंगे, क्योंकि वह हर बात, हर परिस्थिति के द्वारा अन्ततः हमारा भला ही करना चाहता है। - जो स्टोवैल


धन्यवादी बने रहने के रवैये को अपनाएँ।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4



बुधवार, 21 नवंबर 2018

धन्यवाद



      एमिली सुन रही थी, जब उसके मित्र धन्यवाद दिवस से संबंधित अपने परिवार में प्रचलित परंपराओं की बारे में बता रहे थे। गैरी ने कहा, “हम एक से दूसरे कमरे में जाते हैं और प्रत्येक जन बताता है कि वह परमेश्वर के प्रति किन किन बातों के लिए धन्यवादी है।” एक अन्य मित्र ने अपने परिवार के एक साथ बैठकर धन्यावद का भोजन करने और साथ प्रार्थना करने के विषय बताया। उसने अपने पिता के साथ बिताए गए समय के बारे में स्मरण करते हुए कहा कि जब वे जीवित थे तब, “यद्यपि पिताजी को भूल जाने की बीमारी हो गई थी परन्तु परमेश्वर के प्रति धन्यवाद देने में उनकी यादाशत बिलकुल स्पष्ट होती थी।” रैंडी ने कहा कि “मेरे परिवार में साथ मिलकर परमेश्वर के प्रति स्तुति और धन्यवाद के गीत गाने की परम्परा है, और मेरी दादी तो गाती ही चली जाती हैं, रुकने का नाम ही नहीं लेती हैं!”

      यह सब सुनते सुनते और अपने परिवार के बारे में सोचते हुए एमिली की उदासी और ईर्ष्या बढ़ती चली जा रही थी, और जब उसकी बारी आई तो उसने शिकायत के भाव में कहा, “हमारी परम्परा तो बस टर्की खाना और बैठकर टेलिविज़न देखना है। हमारे घर में कोई परमेश्वर का नाम भी नहीं लेता है और न ही उसे धन्यवाद करता है।”

      तुरंत ही एमिली को अपने रवैये पर ग्लानी हुई। उसके मन में आवाज़ उठी, “तुम उसी परिवार की सदस्या हो। तुम ऐसा क्या भिन्न कर सकती हो जो उस दिन के महत्व को परिवार के सामने सार्थक करे?” उसने निर्णय लिया कि वह वह अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत रीति से यह बताना चाहती है कि वह परमेश्वर की धन्यवादी है कि वह उसके बहन, भाई, या संबंधी हैं। जब धन्यवादी दिवस आया, तो उसने एक एक करके प्रत्येक से उनके प्रति और उनके लिए परमेश्वर के प्रति अपने धन्यवाद को व्यक्त किया, और उन सब को भी उसका यह प्रेम भरा व्यवहार देखकर बहुत अच्छा लगा। ऐसा करना एमिली के लिए सरल नहीं था क्योंकि यह उसके परिवार का सामान्य व्यवहार या वार्तालाप नहीं था, परन्तु उन सब से उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने से उसे और उन्हें दोनों को बहुत अच्छा लगा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, “कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो” (इफिसियों 4: 29) औरों के प्रति, तथा औरों के लिए हमारे धन्यवाद के शब्द हमें अपने तथा परमेश्वर के लिए उनकी कीमत का एहसास दिला सकते हैं। - ऐनी सेटास


प्रोत्साहन के शब्दों से मनुष्य की आत्मा आशा से भर जाती है।

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा। - नीतिवचन 18:21

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:25-32
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3



मंगलवार, 20 नवंबर 2018

दृष्टिकोण



      रैले देखने में एक बलवान कुत्ता प्रतीत होता है – वह आकार में बड़ा है, उसकी मांसपेशियाँ सुडौल हैं, उसके घने बाल हैं, और उसका वज़न 100 पाउंड से भी अधिक है। परन्तु अपने स्वरूप के प्रतिकूल, रैले लोगों के साथ बहुत सरलता से घुल-मिल जाता है। उसका स्वामी उसे लेकर अस्पतालों में जाता है जहाँ  लोग उसके साथ समय बिताने से आनन्दित होते हैं। एक बार एक चार वर्षीय लड़की ने उसे कमरे के पार देख कर उसे सहलाना चाहा, परन्तु उसके आकार को देखकर वह भयभीत रही। अन्ततः उसकी जिज्ञासा उसके भय पर जयवंत हुई और वह रैले के पास आई, उसे थपथपाया, सहलाया और कुछ मिनिट तक उससे बातें भी करती रही। उस लड़की ने जाना कि रैले चाहे देखने में बलवान है परन्तु स्वभाव से बहुत नम्र और मिलनसार है।

      बलवान होते हुए भी नम्र और मिलनसार होने के ये गुण मुझे प्रभु यीशु मसीह के स्वभाव का भी स्मरण करवाते हैं। प्रभु यीशु मसीह के विषय में हम परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में पढ़ते हैं। प्रभु यीशु सुगम्य थे – उन्होंने छोटे बच्चों का स्वागत किया (मत्ती 19:13-15)। वे व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री के साथ उसकी कठिन स्थिति में भी दयालु और कृपालु हुए (यूहन्ना 8:1-11)। सामान्य लोगों के प्रति उनकी अनुकम्पा के अन्तर्गत उन्होंने उन लोगों को परमेश्वर और उसके राज्य के विषय सिखाया (मरकुस 6:34)। लेकिन साथ ही प्रभु यीशु की सामर्थ्य अभूतपूर्व और विस्मयकारी थी। उनके द्वारा दुष्ट-आत्माओं को निकाले जाने, प्रचण्ड आँधी-तूफानों को शान्त करने, और मृतकों को पुनः जीवित करने के द्वारा लोग अवाक रह गए (मरकुस 1:21-34, 4:35-41; यूहन्ना 11)।

      प्रभु यीशु मसीह के प्रति हमारा दृष्टिकोण निर्धारित करता है कि हम उसके साथ कैसा संबंध बनाते हैं। यदि हम केवल उसके बल पर ही ध्यान बनाए रखेंगे, तो हम उससे अंतरंग समबन्ध नहीं बनाने पाएँगे, और एक औपचारिक आदर एवँ आराधना मात्र ही देने पाएँगे। परन्तु यदि हम उसकी दया और कृपा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे, तो हम उसे बहुत हलके में लेने और उसके साथ लापरवाही का व्यवहार करने के जोखिम में पड़ जाएँगे।

      सत्य तो यह है कि अपनी महानता और सामर्थ्य के कारण प्रभु यीशु को हमारी आज्ञाकारिता और समर्पण मिलना चाहिए, और उनकी नम्रता एवँ प्रेम के कारण वे हमारे अंतरंग मित्र भी बनना चाहते हैं। हम प्रभु यीशु मसीह के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते हैं? – जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के प्रति हमारा दृष्टिकोण, उसके साथ हमारे संबंध को निर्धारित करता है।

पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। - इब्रानियों  1:1-2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15: 9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2



सोमवार, 19 नवंबर 2018

मैं हूँ



      कार्य स्थल और घर की परेशानियों से विचलित होकर मैट ने बाहर निकल कर टहलने का निर्णय लिया। बसंत ऋतु की संध्या की ठंडी हवा उसे आनन्दित कर रही थी, और जैसे जैसे आसमान नीले से गहरे स्याह रंग का होता गया, वहाँ के दलदली इलाके से कोहरा उठने लगा, आकाश पर सितारे टिमटिमाने लगे, और दूर पूर्व से चाँद भी निकलने लगा। मैट के लिए यह सब एक बहुत आत्मिक अनुभव था। उसके मन में शान्ति आई; उसे आभास हुआ कि परमेश्वर वहाँ उसके साथ है, और सब कुछ जो हो रहा है वह परमेश्वर के नियंत्रण में है।

      कुछ लोग रात्रि के आकाश की ओर देखते हैं किन्तु उनके लिए वहाँ प्रकृति के अतिरिक्त और कुछ नहीं होता है। औरों को ऐसे ईश्वर की अनुभूति होती है जो सितारों के समान दूर और पहुँच से बाहर। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि वही परमेश्वर जो “...पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है” वह ही है जो “... इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है” (यशायाह 40:22, 26)। हमारा जीवता, सच्चा परमेश्वर पिता अपनी सारी सृष्टि को व्यक्तिगत रीति तथा बहुत निकटता से जानता है।

      इसी व्यक्तिगत परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्राएलियों से पूछा, “हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?”; और उनके प्रति अपने लगाव के कारण परमेश्वर ने उन इस्राएलियों  स्मरण दिलाया कि बुद्धिमता एवँ भलाई परमेश्वर के खोजी होने में ही है, “क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है” (पद 27-29)।

      हम बहुत सरलता से परमेश्वर को नज़रंदाज़ कर देते हैं या फिर भुला देते हैं। संध्या के समय बाहर टहलने निकलने से हमारी समस्याएँ चली तो नहीं जाती हैं, परन्तु उस शान्ति और एकांत में परमेश्वर और उसकी सृष्टि के विषय में मनन करने से हमें शान्ति और निश्चय होता है कि परमेश्वर है जो अपने भले उद्देश्यों को हमारे जीवनों के द्वारा पूरा कर रहा है; हम से कह रहा है, “मैंने सब संभाल रखा है, भयभीत मत हो मैं हूँ।” – टिम गुस्ताफ्सन


हमें परमेश्वर को अपने हृदयों में वही स्थान देना चाहिए जो सृष्टि में उसका है।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! – भजन 96:8

बाइबल पाठ: यशायाह 40:21-31
Isaiah 40:21 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया? क्या तुम ने पृथ्वी की नेव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया?
Isaiah 40:22 यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहने वाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल के समान फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है;
Isaiah 40:23 जो बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है।
Isaiah 40:24 वे रोपे ही जाते, वे बोए ही जाते, उनके ठूंठ भूमि में जड़ ही पकड़ पाते कि वह उन पर पवन बहाता और वे सूख जाते, और आंधी उन्हें भूसे की नाईं उड़ा ले जाती है।
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है।
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है।
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं;
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1



रविवार, 18 नवंबर 2018

बलिदान



      चीन में 1900 के बॉक्सर विद्रोह के समय ताई यूआन फू नामक स्थान पर एक घर में फंसे हुए कुछ मिशनरियों ने निर्णय लिया कि उनके लिए जान बचाने का एक ही मार्ग है, कि वे उन्हें मार डालने पर उतारू भीड़ के बीच में से होकर भाग निकलने का प्रयास करें। अपने हाथों में कुछ हथियार लिए हुए, उन्होंने ऐसा ही किया, और उस समय के खतरे से बच निकले। परन्तु उनमें से एक, एडिथ कूम्ब्स ने ध्यान किया कि उनके दो घायल चीनी शिष्य बचकर निकलने नहीं पाए थे, और उन्हें बचाने के लिए वह वापस दौड़कर उस खतरे के स्थान में गई। वह एक को तो सुरक्षित बाहर निकाल लाई परन्तु दूसरे को लाते समय वह लड़खड़ाई और मारी गई।

      उसी समय में सीन चौऊ जिले में स्थित एक अन्य स्थान पर मिशनरी लोग बच निकलने में सफल रहे थे और आबादी के बाहर के इलाके में, अपने चीनी मित्र, हो त्सुएन केई के पास छुपे हुए थे। उनका वह मित्र, हो त्सुएन केई, उनके बचकर निकल जाने के लिए सुरक्षित मार्ग ढूँढने बाहर निकला, परन्तु पकड़ लिया गया, और क्योंकि उसने अपने छुपे हुए मिशनरी मित्रों का स्थान बताने से इन्कार कर दिया, इसलिए उसे मार डाल गया ।

      एडिथ कूम्ब्स और हो त्सुएन केई के जीवनों से हम एक ऐसे प्रेम को देखते हैं जो सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना के प्रेम से ऊपर उठकर कार्य करता है। उनका बलिदान हमें प्रभु परमेश्वर के प्रेम और बलिदान का स्मरण करवाता है।

      मार डाले जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले प्रभु यीशु ने परमेश्वर पिता से प्रार्थना की, “हे पिता यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले,” परन्तु अपनी इस प्रार्थना का अन्त उन्होंने साहस, प्रेम और बलिदान के दृढ़ निश्चय के साथ किया, यह कहते हुए कि “तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42)। प्रभु यीशु के इस बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा सँसार के प्रत्येक व्यक्ति के लिए, वह चाहे कहीं का और कोई भी हो, पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग खुलकर तैयार हो गया, और अभी भी सभी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। प्रभु के इस बलिदान के सदुपयोग द्वारा अपने पापों के दण्ड से बच जाना हमारा अपना निर्णय है। - रैंडी किल्गोर


घृणा और पाप के अन्धकार को केवल मसीह यीशु के प्रेम की ज्योति ही दूर कर सकती है।

मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना 15:12-13

बाइबल पाठ: लूका 22:39-46
Luke 22:39 तब वह बाहर निकलकर अपनी रीति के अनुसार जैतून के पहाड़ पर गया, और चेले उसके पीछे हो लिए।
Luke 22:40 उस जगह पहुंचकर उसने उन से कहा; प्रार्थना करो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो।
Luke 22:41 और वह आप उन से अलग एक ढेला फेंकने के टप्‍पे भर गया, और घुटने टेक कर प्रार्थना करने लगा।
Luke 22:42 कि हे पिता यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो।
Luke 22:43 तब स्वर्ग से एक दूत उसको दिखाई दिया जो उसे सामर्थ देता था।
Luke 22:44 और वह अत्यन्‍त संकट में व्याकुल हो कर और भी हृदय वेदना से प्रार्थना करने लगा; और उसका पसीना मानो लोहू की बड़ी बड़ी बून्‍दों के समान भूमि पर गिर रहा था।
Luke 22:45 तब वह प्रार्थना से उठा और अपने चेलों के पास आकर उन्हें उदासी के मारे सोता पाया; और उन से कहा, क्यों सोते हो?
Luke 22:46 उठो, प्रार्थना करो, कि परीक्षा में न पड़ो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13



शनिवार, 17 नवंबर 2018

सेवा



      केरी बहुत प्रयास करती है कि उसे लोगों से प्रशंसा मिले। वह अधिकांश समय प्रसन्न रहने का व्यवहार करती है जिससे कि लोग उसके आनन्दित रहने के रवैये को देखें और उसकी तारीफ़ करें। कुछ लोग उसे समाज में औरों की सहायता करते हुए देख कर उसे सराहते हैं, परन्तु कभी-कभी जब वह अपने मन की बात को खुल कर कहती है तो वह स्वीकार करती है कि “मैं प्रभु से प्रेम तो करती हूँ, परन्तु कुछ बातों में मुझे लगता है कि मेरा जीवन एक दिखावे का जीवन है।” औरों को अच्छा दिखाई देने के उसके प्रयासों के पीछे उसके अन्दर की उसकी असुरक्षा की भावना है, और वह कहती है कि उसे लगने लगा है कि यह सब कर पाने की उसकी सामर्थ्य समाप्त होती जा रही है।

      हम सभी केरी के इस अनुभव के साथ संबंधित हो सकते हैं क्योंकि यह संभव नहीं है कि हमारे सभी उद्देश्य सदा ही सिद्ध भी हों। हम अपने प्रभु परमेश्वर से तथा औरों से भी प्रेम करते हैं, परन्तु मसीही जीवन जीने के लिए हमारे उद्देश्य औरों से महत्व और प्रशंसा पाने के साथ मिले हुए होते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु की शिक्षाओं में देखते हैं कि उन्होंने औरों को दिखाने के लिए दान करने, प्रार्थनाएं करने और उपवास रखने वालों के विषय सिखाया था (मत्ती 6:1-18)। प्रभु ने अपने अनुयायियों को अपने पहाड़ी उपदेश में सिखाया के वे अपने दान गुप्त रखें, पिता परमेश्वर से एकांत में प्रार्थानाएं करें, और उपवास रखते समय उसे प्रकट न करें (पद 4, 6, 16)।

      अधिकाँशतः सेवा सामाजिक रीति से ही की जाती है, परन्तु सेवा को अप्रत्यक्ष रखकर करना हमें हमारे प्रति परमेश्वर की राय को समझने में सहायक होगा। प्रभु परमेश्वर, जिसने हमें अपने ही स्वरूप में सृजा है, हमें इतना महत्वपूर्ण मानता है कि उसने हमारे लिए अपने पुत्र को बलिदान कर दिया, और अपने प्रेम को प्रतिदिन हम पर प्रकट करता रहता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर को प्रसन्न करने की हमारी इच्छा, 
परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी होने का हमारा सर्वोच्च उद्देश्य होना चाहिए।

मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं। - यिर्मयाह 17:10

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-8
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे।
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके।
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए।
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों के समान बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।
Matthew 6:8 सो तुम उनके समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12



शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

प्रोत्साहक



      टेक्सस प्रांत के ‘ए एण्ड एम’ विश्वविद्यालय के फुटबॉल स्टेडियम में एक बड़ा सा चिन्ह लग है, “12वें खिलाड़ी का स्थान।” खेल में प्रत्येक टीम को मैदान में ग्यारह खिलाड़ी रखने होते हैं, और वह  ‘12वां खिलाड़ी’ खेल के समय उपस्थित हज़ारों ‘ए एण्ड एम’ विश्वविद्यालय के छात्र होते हैं जो सारे खेल के दौरान खड़े रहकर अपनी टीम को प्रोत्साहित करते रहते हैं। इस परंपरा का आरंभ 1922 में हुआ था जब टीम के प्रशिकक्षक ने दर्शक दीर्घा में उपस्थित एक छात्र को बुलाया और उसे तैयार होकर खेल मैदान के किनारे पर खड़े रहने के लिए कहा, जिससे कि यदि कोई खेलने वाला खिलाड़ी चोटिल हो जाए तो वह बाहर वाला खिलाड़ी तुरंत मैदान में जाकर उस घायल हुए खिलाड़ी का स्थान लेकर खेलना आरंभ कर दे। यद्यपि इस ‘12वें खिलाड़ी’ को सारे खेल के दौरान अन्दर आकर खेलना नहीं पड़ा, परन्तु उसकी उपस्थिति ने खेलने वाले खिलाड़ियों को खेल के दौरान बहुत प्रोत्साहित बनाए रखा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री के 11वें अध्याय में परमेश्वर के प्रति विश्वासी, उन महान नायकों का उल्लेख है जिन्होंने अपने इस विश्वास के लिए बहुत कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना किया, परन्तु विश्वास में परमेश्वर के प्रति दृढ़ बने रहे। इसके बाद 12वें अध्याय का आरंभ  इन शब्दों के साथ होता है, “इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें” (इब्रानियों 12:1)।

      अपने मसीही विश्वास की यात्रा में हम मसीही विश्वासी अकेले नहीं हैं। वे महान संत और सामान्य जन जो प्रभु परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य बने रहे हैं, अपने जीवन की गवाही, उदाहरण और अब स्वर्ग में अपनी उपस्थिति के द्वारा हमारा प्रोत्साहन करते हैं। हम जब इस सँसार के मैदान में अपने मसीही विश्वास के लिए जूझते हैं, तो ऐसे में हमारे अनुसरणीय वे जन हमारे लिए उस ‘12वें खिलाड़ी’ के समान प्रोत्साहक का कार्य करते हैं।

      हम जब अपने ‘विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर (इब्रानियों 12: 2) ताकते रहते हैं तो हम से पहले हुए मसीही विश्वासी हमें प्रोत्साहित करते हैं कि हम अपने विश्वास में स्थिर और दृढ़ बने रहें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


बीते समय के मसीही विश्वासी आज हमारे लिए प्रोत्साहक हैं।

यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:12-14

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:32-12:3
Hebrews 11:32 अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
Hebrews 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
Hebrews 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
Hebrews 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों।
Hebrews 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
Hebrews 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
Hebrews 11:38 और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
Hebrews 11:39 संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।
Hebrews 11:40 क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40