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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

क्रूस



      मैं जिस चर्च में जाती हूँ, वहाँ वेदी के सामने एक बड़ा सा क्रूस टंगा हुआ है, जो उस क्रूस की स्मृति है जिसपर प्रभु यीशु मसीह को मारा गया था – वह स्थान जहाँ हम मनुष्यों के पाप परमेश्वर की पवित्रता के साथ संपर्क में आए थे। उस क्रूस पर परमेश्वर पिता ने अपने सिद्ध, निष्पाप, निष्कलंक पुत्र को, समस्त मानव जाति के प्रत्येक पाप, गलती, अपराध के लिए, जो उन्होंने कभी भी मन, ध्यान, विचार या कर्मों से, प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष, किए हों, बलिदान होने के लिए दे दिया। क्रूस पर प्रभु यीशु मसीह ने हमें उस मृत्यु से, जिसे हमें सहना था, बचाने के कार्य को पूरा किया, जिससे हम प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा अनन्त जीवन प्राप्त कर सकें (रोमियों 6:23)।

      जब भी मैं क्रूस को देखती हूँ तो मुझे वह सब ध्यान आता है जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए सहन किया। क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले, उसे कोड़े मारे गए, उस पर थूका गया। सैनिकों ने उसके सिर पर मारा और ठट्ठे में उसके सामने झुक कर उसका उपहास किया। उन्होंने रात भर उसे ताड़नाएं देने के बाद, जिस क्रूस पर उसे ठोका जाना था, उसे उठा कर क्रूसित होने के स्थान तक ले जाने को कहा, किन्तु रात भर की उस ताड़ना से उसका शरीर क्रूस उठाने के लिए बहुत दुर्बल हो चुका था, इसलिए मार्ग से एक अन्य व्यक्ति को पकड़ कर उससे जबरन यह बेगार करवाया गया। क्रूस पर चढ़ाने के स्थान, गुलगुता, पर आकर, उसके हाथ और पांवों में ठोकी गई कीलों से उसे क्रूस पर टांग दिया गया, और उन कीलों के सहारे लटके हुए उसके शरीर का वजन हर साँस खींचने और छोड़ने के साथ उसकी पीड़ा को बढ़ाता था। छः घण्टे क्रूस पर लटके हुए यह सब तथा उपस्थित लोगों के ताने और उपहास सहने के बाद प्रभु यीशु ने अपनी अंतिम साँस ली (मरकुस 15:37)। वहाँ उपस्थित सूबेदार ने यह सब देखने के बाद कहा, “सचमुच, यह मनुष्य परमेश्वर का पुत्र था!” (पद 39)।

      अगली बार जब भी आप क्रूस के चिन्ह को देखें, तो थोड़ा रुक कर विचार करें कि आप के लिए उसका क्या अर्थ है, क्या महत्व है? परमेश्वर के पुत्र ने उस क्रूस पर घोर पीड़ा और मृत्यु को सहा जिससे आपके लिए अनन्त जीवन का चिर-स्थाई आनन्द संभव हो सके। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह का क्रूस हमारे पाप की सर्वाधिक बुरी दशा, 
तथा परमेश्वर के प्रेम की सर्वोत्तम स्थिति को दिखाता है।

क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। - 1 कुरिन्थियों 1:18

बाइबल पाठ: मरकुस 15:16-21,29-39
Mark 15:16 और सिपाही उसे किले के भीतर आंगन में ले गए जो प्रीटोरियुन कहलाता है, और सारी पलटन को बुला लाए।
Mark 15:17 और उन्होंने उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया और कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा।
Mark 15:18 और यह कहकर उसे नमस्‍कार करने लगे, कि हे यहूदियों के राजा, नमस्‍कार!
Mark 15:19 और वे उसके सिर पर सरकण्‍डे मारते, और उस पर थूकते, और घुटने टेककर उसे प्रणाम करते रहे।
Mark 15:20 और जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो उस पर से बैंजनी वस्‍त्र उतारकर उसी के कपड़े पहिनाए; और तब उसे क्रूस पर चढ़ाने के लिये बाहर ले गए।
Mark 15:21 और सिकन्‍दर और रूफुस का पिता, शमौन नाम एक कुरेनी मनुष्य, जो गांव से आ रहा था उधर से निकला; उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा, कि उसका क्रूस उठा ले चले।
Mark 15:29 और मार्ग में जाने वाले सिर हिला हिलाकर और यह कहकर उस की निन्‍दा करते थे, कि वाह! मन्दिर के ढाने वाले, और तीन दिन में बनाने वाले! क्रूस पर से उतर कर अपने आप को बचा ले।
Mark 15:30 इसी रीति से महायाजक भी, शास्‍त्रियों समेत,
Mark 15:31 आपस में ठट्ठे से कहते थे; कि इस ने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता।
Mark 15:32 इस्राएल का राजा मसीह अब क्रूस पर से उतर आए कि हम देखकर विश्वास करें: और जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे, वे भी उस की निन्‍दा करते थे।
Mark 15:33 और दोपहर होने पर, सारे देश में अन्धियारा छा गया; और तीसरे पहर तक रहा।
Mark 15:34 तीसरे पहर यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा, इलोई, इलोई, लमा शबक्तनी जिस का अर्थ यह है; हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?
Mark 15:35 जो पास खड़े थे, उन में से कितनों ने यह सुनकर कहा: देखो यह एलिय्याह को पुकारता है।
Mark 15:36 और एक ने दौड़कर इस्‍पंज को सिरके में डुबोया, और सरकण्‍डे पर रखकर उसे चुसाया; और कहा, ठहर जाओ, देखें, कि एलिय्याह उसे उतारने कि लिये आता है कि नहीं।
Mark 15:37 तब यीशु ने बड़े शब्द से चिल्लाकर प्राण छोड़ दिये।
Mark 15:38 और मन्दिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया।
Mark 15:39 जो सूबेदार उसके सम्हने खड़ा था, जब उसे यूं चिल्लाकर प्राण छोड़ते हुए देखा, तो उसने कहा, सचमुच यह मनुष्य, परमेश्वर का पुत्र था।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 6-8
  • लूका 15:1-10



गुरुवार, 18 अप्रैल 2019

सहन



      यदि कोई मित्र साथ हो तो क्या पीड़ा अधिक सहनीय हो जाती है? वर्जीनिया विश्विद्यालय के कुछ शोधकर्ताओं ने इस प्रश्न का उत्तर पाने के लिए एक रोचक अध्ययन किया। वे देखना चाहते थे कि पीड़ा होने की आशंका के प्रति मस्तिष्क में क्या प्रतिक्रियाएं होती हैं, और क्या ये प्रतिक्रियाएं भिन्न होती हैं यदि व्यक्ति अकेला हो, या किसी अजनबी का हाथ थामे हुए हो या, फिर किसी घनिष्ट मित्र ने हाथ थामा हुआ हो।

      शोधकर्ताओं ने दर्जनों बार इस प्रयोग को किया, और उनके परिणाम सदा समान ही थे। जब व्यक्ति अकेला हो या किसी अजनबी का हाथ थामे हुए हो तो मस्तिष्क का वह भाग जो खतरे से आशंकित होता है वह सक्रीय हो गया। किन्तु जब हाथ किसी घनिष्ट मित्र ने थामा हुआ था तो मस्तिष्क भी शान्त था। मित्र के निकट होने के आभास ने पीड़ा को अधिक सहनीय बना दिया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले के समय में, जब वे गतसमनी के बाग़ में प्रार्थना कर रहे थे, तब प्रभु को भी अपने मित्रों से दिलासा की अपेक्षा थी। वे जानते थे कि थोड़े ही समय में उन्हें धोखे, गिरफतारी और मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने अपने निकट के मित्रों से कहा कि “मेरा जी बहुत उदास है” (मत्ती 26:38), और वे लोग उनके साथ रहें और प्रार्थना करें; परन्तु पतरस, याकूब और यूहन्ना सोते ही रहे।

      प्रभु यीशु ने गतसमनी के बाग़ में उस पीड़ा को अकेले ही सहन किया, उनके साथ, उनका हाथ थामने वाला, उन्हें दिलासा देने वाला, कोई नहीं था। परन्तु क्योंकि उन्होंने उस पीड़ा को सहन कर लिया, आज हम निश्चिन्त हो सकते हैं कि हमारा प्रभु परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा (इब्रानियों 13:5)। प्रभु यीशु ने हमारे पापों की पीड़ा को अपने ऊपर लेकर सहन कर लिया जिससे हमें कभी भी परमेश्वर के प्रेम से अलग होने की पीड़ा को सहना नहीं पड़े (रोमियों 8:39)। आज हम मसीही विश्वासियों के साथ उसकी सदा बनी रहने वाली उपस्थिति, जीवन की हर परिस्थिति की हर पीड़ा को सहन करना हमारे लिए सहज करती रहती है। - एमी पीटरसन


परमेश्वर के प्रेम के कारण हम कभी अकेले नहीं होते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-46
Matthew 26:36 तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं।
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके?
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है।
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।
Matthew 26:43 तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं।
Matthew 26:44 और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की।
Matthew 26:45 तब उसने चेलों के पास आकर उन से कहा; अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
Matthew 26:46 उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 3-5
  • लूका 14:25-35



बुधवार, 17 अप्रैल 2019

स्वीकार


      प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने से कुछ समय पहले मरियम नामक एक स्त्री ने बहुत कीमती इत्र प्रभु की पाँव पर उंडेला, और फिर उसके पांवों को अपने बालों से पोंछा (यूहन्ना 12:3), जो उस समय के सामाजिक व्यवहार के अनुसार एक बहुत साहसिक कार्य था। ने केवल मरियम ने अपने जीवन भर की बचत को प्रभु के पांवों पर डाल दिया परन्तु सब के सामने अपने बालों को खोल कर उसने अपनी मर्यादा भी दांव पर लगा दी। उस समय के सामाजिक व्यवहार में, संभ्रांत स्त्रियाँ अपने बाल कभी भी सार्वजनिक स्थितियों में नहीं खोलती थीं। परन्तु सच्ची आराधना में यह नहीं देखा जाता है कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे या कहेंगे (2 शमूएल 6:21-22)। प्रभु यीशु की आराधना करने के लिए मरियम अशिष्ट या अनैतिक कहलाने के लिए भी तैयार थी।

      हम में से कुछ चर्च जाते समय अपने आप को बिलकुल सिद्ध दिखाने के प्रयास करते हैं जिससे लोग हमारे बारे में भला सोचें। हम अपने आप को सावधानी-पूर्वक संवार कर लोगों के सामने आते हैं। परन्तु परमेश्वर की उपस्थिति वह स्थान है जहाँ हम अपनी वास्तविकता में आ सकते हैं, जहाँ हमें अपनी कोई गलती या कमजोरी छुपाने की, सिद्ध होने का ढोंग रचने की आवश्यकता नहीं है।

      जब हम उपासना के लिए चर्च में परमेश्वर के सामने आते हैं तो वह यह दिखाने के लिए नहीं होता है कि हम में, या हमारे साथ, कुछ भी गलत नहीं है। वरन इसलिए होता है कि हम परमेश्वर के सामने अपनी गलतियों और कमजोरियों को स्वीकार कर सकें और उससे उनके लिए सामर्थ्य तथा मार्गदर्शन पाएँ; और परमेश्वर तथा अन्य लोगों के साथ सब कुछ ठीक-ठाक कर के जा सकें। जब हमारा सबसे बड़ा भय, हमारी गलती या कमजोरी का प्रगट हो जाना हो, तो हमारा सबसे बड़ा पाप उस गलती या कमजोरी को छुपाए रखना होता है। परमेश्वर के सामने स्वीकार कर लेने से हम और सामर्थी, और भले हो जाते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर के साथ सही होते हैं, तब हमारा जीवन भी सही होता है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:1-8
John 12:1 फिर यीशु फसह से छ: दिन पहिले बैतनिय्याह में आया, जहां लाज़र था: जिसे यीशु ने मरे हुओं में से जिलाया था।
John 12:2 वहां उन्होंने उसके लिये भोजन तैयार किया, और मारथा सेवा कर रही थी, और लाजर उन में से एक था, जो उसके साथ भोजन करने के लिये बैठे थे।
John 12:3 तब मरियम ने जटामासी का आध सेर बहुमूल्य इत्र ले कर यीशु के पावों पर डाला, और अपने बालों से उसके पांव पोंछे, और इत्र की सुगंध से घर सुगन्‍धित हो गया।
John 12:4 परन्तु उसके चेलों में से यहूदा इस्करियोती नाम एक चेला जो उसे पकड़वाने पर था, कहने लगा।
John 12:5 यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर कंगालों को क्यों न दिया गया?
John 12:6 उसने यह बात इसलिये न कही, कि उसे कंगालों की चिन्‍ता थी, परन्तु इसलिये कि वह चोर था और उसके पास उन की थैली रहती थी, और उस में जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था।
John 12:7 यीशु ने कहा, उसे मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रहने दे।
John 12:8 क्योंकि कंगाल तो तुम्हारे साथ सदा रहते हैं, परन्तु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूंगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 1-2
  • लूका 14:1-24


मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

देना



      एक पास्टर ने चर्च के लोगों के सामने बेचैन करने वाली चुनौती रखते हुए कहा, “कैसा हो यदि हम अपने कोट उतार कर उन्हें दे दें जिनके पास नहीं हैं, और जिन्हें आवश्यकता है?” यह कहकर उसने अपना कोट उतारा और चर्च के आगे रख दिया। उसके बाद कई औरों ने भी उसके उदाहरण का अनुसरण किया और अपने कोट उतारकर सामने रख दिए। यह सर्दियों में हुआ, इसलिए कुछ के लिए उस दिन घर वापस जाना कुछ कम आरामदायक था, परन्तु कुछ अन्य के लिए सर्दी के उस मौसम में कुछ गर्माहट आ गई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने उसके पास उसका सन्देश सुनने और बपतिस्मा लेने के लिए आने वालों को एक कड़ी चेतावनी दी। उसने कहा, “हे सांप के बच्चों... मन फिराव के योग्य फल लाओ” (लूका 3:7-8)। उन लोगों ने चकित होकर उससे पूछा “हम क्या करें?” इस पर जब, “लोगों ने उस से पूछा, तो हम क्या करें? उसने उन्हें उतर दिया, कि जिस के पास दो कुरते हों वह उसके साथ जिस के पास नहीं हैं बांट दे और जिस के पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे” (पद 10-11)। सच्चा पश्चाताप उदार हृदय उत्पन्न करता है: “मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35)।

      क्योंकि वचन में लिखा है कि “हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है” (2 कुरिन्थियों 9:7); इसलिए देना कभी भी दोष-भावना या किसी दबाव से प्रेरित होकर नहीं होना चाहिए। जब हम मुक्त भाव से और उदारता से देते हैं, तो हम पाएँगे कि वास्तव में लेने से देना धन्य है। - टिम गुस्ताफसन


उदार प्राणी हृष्ट पुष्ट हो जाता है, और जो औरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी। - नीतिवचन 11:25

बाइबल पाठ: लूका 3:7-14
Luke 3:7 जो भीड़ की भीड़ उस से बपतिस्मा लेने को निकल कर आती थी, उन से वह कहता था; हे सांप के बच्चों, तुम्हें किस ने जता दिया, कि आने वाले क्रोध से भागो।
Luke 3:8 सो मन फिराव के योग्य फल लाओ: और अपने अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता इब्राहीम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
Luke 3:9 और अब ही कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर धरा है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
Luke 3:10 और लोगों ने उस से पूछा, तो हम क्या करें?
Luke 3:11 उसने उन्हें उतर दिया, कि जिस के पास दो कुरते हों वह उसके साथ जिस के पास नहीं हैं बांट दे और जिस के पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।
Luke 3:12 और महसूल लेने वाले भी बपतिस्मा लेने आए, और उस से पूछा, कि हे गुरू, हम क्या करें?
Luke 3:13 उसने उन से कहा, जो तुम्हारे लिये ठहराया गया है, उस से अधिक न लेना।
Luke 3:14 और सिपाहियों ने भी उस से यह पूछा, हम क्या करें? उसने उन से कहा, किसी पर उपद्रव न करना, और न झूठा दोष लगाना, और अपनी मजदूरी पर सन्‍तोष करना।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35



सोमवार, 15 अप्रैल 2019

दिशा-निर्देश



      हमारे विवाह की सालगिरह पर मेरे पति माईक ने अपने मित्र से एक ऐसी साइकिल कुछ समय के लिए ली जिसपर आगे-पीछे दो जन बैठ सकते थे, जिसमें दो हैंडल तथा दो पैडल थे, और उस पर बैठकर हम दोनों एक रोमांचक सप्रेम भ्रमण पर जा निकले। उस साइकिल पर हमारे चलने के थोड़े ही समय में मुझे बोध हो गया कि क्योंकि मैं पीछे बैठी हुई थी और मेरे सामने माइक के चौड़े कंधे थे, इसलिए मैं अपने सामने के सड़क को स्पष्ट नहीं देख सकती थी, केवल दोनों ओर के दृश्य को ही निहार सकती थी। साथ ही, जो हैंडल मैंने पकडे हुए थे, वे स्थिर जमे हुए थे और उनसे साइकिल को मोड़ा नहीं जा सकता था, वे बस मेरे शरीर के ऊपरी भाग को सहारा देने भर का काम कर रहे थे। अब यह मेरा निर्णय था कि उन सीमाओं के साथ पीछे बैठकर कुड़कुड़ाउँ, या साइकिल को चलाने और सही दिशा देने का नियंत्रण माईक पर छोड़कर आस-पास के दृश्यों और अपने पति के साथ होने का आनन्द लूँ।

      जब परमेश्वर ने अब्राहम को कहा कि वह अपने स्वदेश और परिवार को छोड़कर उसके पीछे हो ले, तो अब्राहम को गंतव्य-स्थान के विषय में कोई विवरण या जानकारी प्रदान नहीं की। न ही परमेश्वर ने अब्राहम को बताया कि वह स्थान कहाँ स्थित है, न् ही वहां के तथा वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों बारे में कोई जानकारी प्रदान की। उसे यह भी नहीं बताया कि उस स्थान तक पहुँचने में कितना समय लगेगा या किस मार्ग से होकर जाना होगा। परमेश्वर ने उससे बस इतना कहा कि वह उस देश को जाए जिसे वह उसे दिखाएगा। सामान्यतः किसी यात्रा के लिए जिस जानकारी के होने की अधिकांश मनुष्य लालसा रखते हैं, उसमें से कुछ भी उपलब्ध न होते हुए भी अब्राहम ने परमेश्वर की बात स्वीकार कर ली और उसकी आज्ञाकारिता में परमेश्वर के पीछे निकल पड़ा, और इसे उसका विश्वास कहा गया (इब्रानियों 11:8)।

      आज यदि हम अपने आप को अनिश्चितताओं, अस्पष्ट भविष्य, परिस्थितियों पर नियंत्रण न होने अदि स्थितियों का सामना करते हुए पाते हैं, तो अब्राहम के समान परमेश्वर पर विश्वास रखकर उसका अनुसरण करते रहें; हमारी जीवन यात्रा के लिए परमेश्वर हमें सदा सही दिशा-निर्देश प्रदान करता रहेगा। - कर्स्टन होम्बर्ग


जीवन यात्रा के लिए सही निर्देशों के लिए परमेश्वर पर सदा भरोसा किया जा सकता है।

विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। - इब्रानियों 11:8

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-9
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा।
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा।
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे।
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था।
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए।
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे।
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई।
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22



रविवार, 14 अप्रैल 2019

वचन



सन 1880 में पहली बार प्रकाशित होने के बाद से ल्यू वॉलेस का सुप्रसिद्ध उपन्यास, “बेन-हर : ए टेल ऑफ द क्राईस्ट,” कभी भी अप्रकाशित नहीं रहा है, सदा ही उसकी माँग रही है और वह उपलब्ध रहा है। उसे उन्नीसवीं सदी की सबसे अधिक प्रभावी पुस्तक भी कहा गया है, और आज भी वह प्रभु यीशु की वास्तविक कहानी के साथ एक काल्पनिक कुलीन युवा यहूदी पात्र, जूडाह बेन-हर, के जीवन को लेकर चलते हुए, पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

      एमी लिफ्सन ने ह्युमैनीटीज़ पत्रिका में इस उपन्यास के विषय लिखते हुए कहा कि इस पुस्तक के लिखने के द्वारा उसके लेखक का जीवन बदल गया; “जैसे बेन-हर पाठकों को यीशु के जीवन और उससे संबंधित भावनाओं के दृश्यों से लिए चलता है , वैसे ही वह ल्यू वॉलेस को मसीह यीशु में विश्वास की ओर भी लेकर चला।” वॉलेस ने कहा, “मैंने नासरी के कार्यों को देखा है...ऐसे कार्य जो मात्र मनुष्य कभी भी नहीं कर सकता था।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड के आरंभ में दी गई प्रभु यीशु की जीवनियाँ हमें भी अवसर देती है कि हम भी उसके साथ संपर्क में चलें, उसके आश्चर्यकर्मों को देखें, उसके वचनों को सुनें, और यरूशलेम में ‘पाम सन्डे’ के नाम से जाने वाले दिन में उसके आदर साहित प्रवेश के गवाह बनें। यूहन्ना ने अपने द्वारा लिखे गए सुसमाचार के अन्त में लिखा, “यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ” (यूहन्ना 20:30-31)।

      जिस प्रकार से ल्यू वॉलेस के शोध, बाइबल अध्ययन, और उसके विषय में लिखने के द्वारा वह प्रभु यीशु मसीह में विश्वास ला सका, उसी प्रकार परमेश्वर का वचन हमें भी मनों और हृदयों के परिवर्तन की ओर खींचता है, जिससे हम प्रभु यीशु में विश्वास करने के द्वारा पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन प्राप्त कर सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


अनेकों पुस्तकें ज्ञान बढ़ा सकती है, परन्तु केवल बाइबल ही है जो जीवन बदल सकती है।

और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। - 2 तिमुथियुस 3:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:24-31
John 20:24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था।
John 20:25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
John 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा हो कर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले।
John 20:27 तब उसने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो।
John 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!
John 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया।
John 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए।
John 20:31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59



शनिवार, 13 अप्रैल 2019

स्मरण



      सूर्यास्त में ऐसा क्या है कि उसे देखने के लिए लोग अपने काम रोक कर उसे होता हुई देखने लग जाते हैं, उसकी तस्वीरें लेते हैं, उसके सुंदरता से आनन्दित होते हैं? हाल ही में मैंने और मेरी पत्नि ने मेक्सिको की खाड़ी में होते हुए सूर्यास्त को देखा; वहाँ समुद्र के किनार हमारे साथ और भी बहुत से लोग खड़े थे, और जैसे ही सूर्य क्षितिज से नीचे गया, उस अद्भुत सुन्दर दृश्य को देखने वाले आनन्द के मारे तालियाँ बजाने लगे!

      लोग ऐसा क्यों करते हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता नामक पुस्तक हमें संकेत देती है। भजनकार ने लिखा है कि परमेश्वर ने सूर्य को अपने सृष्टिकर्ता की महिमा करने की आज्ञा दी है (भजन 148:3)। जहाँ भी पृथ्वी पर सूर्य की किरणें पहुँचती हैं, उस स्थान पर लोग परमेश्वर की महिमा करने के लिए प्रेरित हो जाते हैं।

      प्रकुति की सुन्दरता जैसे हमारे मनों से बातें करती है वैसे शायद ही कुछ और करता हो। उस अद्भुत प्राकृतिक सुन्दरता में न केवल हमें स्तव्ध कर देने तथा अपनी ओर हमारा ध्यान खींच लेने की क्षमता है, उससे प्रेरित हो कर हम अपने सृष्टिकर्ता की ओर भी अपना ध्यान केंद्रित कर लेते हैं, उसे तथा उसकी महानता को स्मरण करते हैं।

      परमेश्वर की विशाल और भव्य सृष्टि हमें थम कर वह स्मरण करने के लिए उकसा सकती है जो वास्तव में महत्वपूर्ण है – सृष्टिकर्ता परमेश्वर। सृष्टि हमें स्मरण करवाती है कि प्रकृति की प्रत्येक बात के पीछे सृष्टिकर्ता है; ऐसा सृष्टिकर्ता जिसने अपनी रचना से इतना प्रेम रखा कि उसके उद्धार के लिए उसने स्वयँ सृष्टि में प्रवेश ले लिया, जिससे उसे बचा ले और बहाल कर दे। - जेफ़ ओल्सन


परमेश्वर के साथ मिलकर उसकी सृष्टि में आनदित हों।

क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। - रोमियों  8:19

बाइबल पाठ: भजन  148:1-6
Psalms 148:1 याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो!
Psalms 148:2 हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर!
Psalms 148:3 हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिर्मय तारागण उसकी स्तुति करो!
Psalms 148:4 हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।
Psalms 148:5 वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।
Psalms 148:6 और उसने उन को सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है; और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31