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मंगलवार, 12 नवंबर 2019

उपहार



      हाल ही में मेरे पति ने अपना महत्वपूर्ण जन्मदिन मनाया, ऐसा जिसके अंत में शून्य आता है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उन्हें सम्मान देने के सबसे उत्तम तरीके के बारे में मैंने बहुत विचार किया। मैंने अपने विचारों के बारे में अपने बच्चों के साथ भी चर्चा की, जिससे मैं सर्वोत्तम विचार पर पहुँच सकूँ। मैं चाहती थी कि हमारा उत्सव उनके जीवन के उस नए दशक के महत्व को दिखाए और इसे भी कि हमारे परिवार के लिए वे कितने महत्वपूर्ण हैं। मैं चाहती थी कि हमारा उन्हें दिया जाने वाला उपहार उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर के महत्त्व के अनुरूप हो।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलैमान भी परमेश्वर को एक बहुत महान भेंट अर्पित करना चाहता था, जो किसी भी अन्य भेंट से बढ़कर हो। उसकी इच्छा थी कि जो मंदिर वह बनवा रहा था वह उसमें परमेश्वर की उपस्थिति के योग्य हो। उस मंदिर के निर्माण में लगने वाले सामान के लिए उसने सोर के राजा को सन्देश भेजा। अपने सन्देश में सुलैमान ने बताया की मंदिर भव्य होगा क्योंकि “हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है” (2 इतिहास 2:5)। उसने यह माना की परमेश्वर की महानता और भलाई उस सब से कहीं अधिक बढ़कर है जो मनुष्य अपने हाथों से बना कर दे सकता है, परन्तु फिर भी परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम और भक्ति के अंतर्गत उसने मंदिर बनाने के कार्य को आरंभ कर दिया।

      निःसंदेह हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है। उसने हमारे जीवनों में अद्भुत कार्य किए हैं, जिससे हमारे हृदय उसे प्रेम के बहुमूल्य उपहार अर्पित करने के लिए प्रेरित होते हैं, चाहे उनका भौतिक मूल्य जो भी हो। सुलैमान जानता था कि उसके उपहार की कीमत कभी भी परमेश्वर के तुल्य नहीं हो सकेगी, परन्तु फिर भी उसने आनन्द के साथ अपने उपहार को परमेश्वर के सम्मुख अर्पित किया; परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बने रहकर हम भी ऐसा ही कर सकते हैं। - कर्स्टिन होल्म्बर्ग

परमेश्वर को जो सबसे मूल्यवान उपहार हम अर्पित कर सकते हैं, 
वह उसके प्रति सप्रेम आज्ञाकारिता है।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 2:1-10
2 Chronicles 2:1 और सुलैमान ने यहोवा के नाम का एक भवन और अपना राजभवन बनाने का विचार किया।
2 Chronicles 2:2 इसलिये सुलैमान ने सत्तर हजार बोझिये और अस्सी हजार पहाड़ से पत्थर काटने वाले और वृक्ष काटने वाले, और इन पर तीन हजार छ: सौ मुखिये गिनती कर के ठहराए।
2 Chronicles 2:3 तब सुलैमान ने सोर के राजा हूराम के पास कहला भेजा, कि जैसा तू ने मेरे पिता दाऊद से बर्त्ताव किया, अर्थात उसके रहने का भवन बनाने को देवदार भेजे थे, वैसा ही अब मुझ से भी बर्त्ताव कर।
2 Chronicles 2:4 देख, मैं अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाने पर हूँ, कि उसे उसके लिये पवित्र करूं और उसके सम्मुख सुगन्धित धूप जलाऊं, और नित्य भेंट की रोटी उस में रखी जाए; और प्रतिदिन सबेरे और सांझ को, और विश्राम और नये चांद के दिनों में और हमारे परमेश्वर यहोवा के सब नियत पर्ब्बों में होमबलि चढ़ाया जाए। इस्राएल के लिये ऐसी ही सदा की विधि है।
2 Chronicles 2:5 और जो भवन मैं बनाने पर हूं, वह महान होगा; क्योंकि हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है।
2 Chronicles 2:6 परन्तु किस की इतनी शक्ति है, कि उसके लिये भवन बनाए, वह तो स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी नहीं समाता? मैं क्या हूँ कि उसके साम्हने धूप जलाने को छोड़ और किसी मनसा से उसका भवन बनाऊं?
2 Chronicles 2:7 सो अब तू मेरे पास एक ऐसा मनुष्य भेज दे, जो सोने, चान्दी, पीतल, लोहे और बैंजनी, लाल और नीले कपड़े की कारीगरी में निपुण हो और नक्काशी भी जानता हो, कि वह मेरे पिता दाऊद के ठहराए हुए निपुण मनुष्यों के साथ हो कर जो मेरे पास यहूदा और यरूशलेम में रहते हैं, काम करे।
2 Chronicles 2:8 फिर लबानोन से मेरे पास देवदार, सनोवर और चंदन की लकड़ी भेजना, क्योंकि मैं जानता हूँ कि तेरे दास लबानोन में वृक्ष काटना जानते हैं, और तेरे दासों के संग मेरे दास भी रहकर,
2 Chronicles 2:9 मेरे लिये बहुत सी लकड़ी तैयार करेंगे, क्योंकि जो भवन मैं बनाना चाहता हूँ, वह बड़ा और अचम्भे के योग्य होगा।
2 Chronicles 2:10 और तेरे दास जो लकड़ी काटेंगे, उन को मैं बीस हजार कोर कूटा हुआ गेहूं, बीस हजार कोर जव, बीस हजार बत दाखमधु और बीस हजार बत तेल दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9



सोमवार, 11 नवंबर 2019

दृश्य



      सन 1968 के अपोलो 8 अन्तरिक्ष अभियान के एस्ट्रोनौट, बिल सैंडर्स ने चन्द्रमा की परिक्रमा करते हुए निकट से उन्हें दिखाई देने वाली चन्द्रमा की सतह का विवरण दिया। उन्होंने उसे “अनिष्ट क्षितिज का दर्शन...एक फीका और बेस्वाद दिखने वाला स्थान” बताया। इसके बाद यान के अन्तरिक्ष यात्रियों ने बारी-बारी से परमेश्वर के वचन बाइबल के आरंभिक भाग, उत्पत्ति 1:1-10 को धरती से उन्हें देख रहे लोगों को पढ़ कर सुनाया। यान के कमांडर फ्रैंक बोरमैन ने पद 10 “और परमेश्वर ने देखा की अच्छा है” को पढ़ने के बाद समाप्त करते हुए कहा, “अच्छी धरती पर रहने वाले आप सभी पर परमेश्वर की आशीष हो।”

      बाइबल का आरंभिक अध्याय दो तथ्यों पर बल देता है:
      सृष्टि परमेश्वर की रचना है – वाक्यांश, “और परमेश्वर ने कहा...” सारे अध्याय में व्याप्त है, बारम्बार दोहराया गया है। यह समस्त भव्य संसार, जिसमें हम रहते हैं, परमेश्वर का रचनात्मक कार्य है। बाइबल में इसके बाद आने वाली प्रत्येक बात उत्पत्ति अध्याय 1 के इस सन्देश की पुनःपुष्टि करती है। समस्त इतिहास के पीछे, परमेश्वर विद्यमान है।

      सृष्टि अच्छी है – एक अन्य वाक्य जो पहले वाले के साथ इस पूरे अध्याय में चलता रहता है, है: “और परमेश्वर ने देखा की अच्छा है।” सृष्टि के उस प्रारंभिक पल के बाद से आज तक के समय में बहुत कुछ बदल गया है। उत्पत्ति 1 संसार का उस दशा में वर्णन करती है जिसमें परमेश्वर ने उसे रचा था और उसे रखना चाहा था, पाप द्वारा उसे बिगाड़ दिए जाने से पहले। जो भी सुन्दरता हम आज प्रकृति, संसार और सृष्टि में देखते हैं, वह उस भव्य सुन्दरता की, जिसमें इनकी रचना की गयी थी, एक फीकी से छाया मात्र है।

      अपोलो 8 के अन्तरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी को एक अकली लटकी हुई चमकीली गेंद के समान देखा, जो बहुत सुन्दर किन्तु नाज़ुक दिख रही थी। वह दृश्य उत्पत्ति वाले दृश्य के समान का दृश्य था। - फिलिप यैंसी

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:1

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-10
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया।
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8



रविवार, 10 नवंबर 2019

शान्तिदायक


      नर्स ने मेरे विषय अपने विवरण में लिखा, “मरीज़ बहुत हाथ-पाँव मार रहा है।” उसे उस समय तो पता नहीं चला, बाद में पता चला कि मैं दिल की शल्यचिकित्सा होने के बाद, जब होश में आने लगा, तो मुझे किसी चीज़ से एलर्जी के कारण बहुत बेचैनी होने लगी। मेरे हाल बुरे थे; मुझे सांस दिलाने के लिए एक नाली मेरे गले से होकर श्वास-नली में जा रही थी, जिससे मैं बोल नहीं सकता था; मेरे हाथ बंधे हुए थे, कि कहीं मैं उस सांस लेने वाली नाली को निकाल न दूँ। उस एलर्जी के कारण मेरा शरीर बुरी तरह से कांपने लगा, और मेरे हाथ उन बंधनों से मुक्त होने के लिए जोर लगाने लगे। वह एक बहुत पीड़ादायक और भयावह घटना थी। ऐसे में मेरी दाहिनी और खड़ी एक नर्स की सहायिका ने हलके से मेरा हाथ थाम लिया, और उसे शान्ति से पकड़े रही। वह एक अप्रत्याशित बात थी, और मुझे बहुत कोमल लगी। मैं शांत होने लगा, जिससे फिर मेरे शरीर की प्रतिक्रया भी शांत होने लगी और मेरा हाथ-पैर पटकना बंद हो गया।

      उस नर्स सहायिका ने इस बात का अनुभव अन्य मरीजों के साथ भी किया था, इसलिए वह जानती थी कि कोमलता से पकड़ा हुआ हाथ शांतिदायक होता है, और मुझे भी शान्ति देगा। यह एक प्रत्यक्ष उदाहरण था की किस प्रकार से परमेश्वर शान्ति प्रदान करता है, जब उसके बच्चे कष्ट में होते हैं।

      किसी भी देखभाल करने वाले के लिए, परिस्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए, शांतिदायक होना एक बहुत सामर्थी और स्मरणीय तरीका है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस 2 कुरिन्थियों 1:3-4 में बताता है की यह परमेश्वर के उपयोगी उपकरणों में से एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इतना ही नहीं, परन्तु परमेश्वर उसके द्वारा हमें प्रदान की गयी शान्ति के प्रभाव को कई गुणा और बढ़ाता है, जब वह हमें कहता है कि हम उसके द्वारा हमें मिलने वाली शान्ति की स्मृति को औरों के जीवन में, जो वैसी ही परिस्थितियों में फंसे हों, शान्ति लाने के लिए प्रयोग करें (पद 4-7)। यह उसके महान प्रेम का एक और चिन्ह है; एक ऐसा चिन्ह जिसे हम औरों के साथ बाँट सकते हैं – एक साधारण से हाथ पकड़ने के द्वारा भी, और परमेश्वर की ओर से दुखी लोगों के लिए शांतिदायक हो सकते हैं। - रैंडी किल्गोर

साधारण से कार्य भी प्रबल शांतिदायक हो सकते हैं।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-7
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है।
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7


शनिवार, 9 नवंबर 2019

अच्छा अन्त



      हम “अपोलो 13” फिल्म देखने गए थे; फिल्म आरंभ होने से पहले जब बत्तियाँ बन्द होने लगीं तो मेरे मित्र ने दबी आवाज़ में कहा, “दुःख की बात है, उन सबकी मृत्यु हो गई।” मैं 1970 के उस अंतरिक्ष यात्रा की फिल्म देखने लगी, उस दुर्घटना के घटित होने की प्रत्याशा में, और तब अन्त के निकट आकर ही मुझे पता चला कि मैं धोखे में थी। मैं उस घटना की सच्ची कहानी को या तो जानती नहीं थी, या भूल गई थी – उन अंतरिक्ष यात्रियों को बहुत से कठिनाइयाँ तो झेलनी पड़ीं थीं, परन्तु वे जीवित वापस घर लौट आए थे।

      मसीह यीशु में, हम भी कहानी के अन्त को जानते हैं – हम भी जीवित घर पहुँच जाएँगे। यह कहने से मेरा तात्पर्य है कि हम सभी मसीही विश्वासी अपने स्वर्गीय परेम्श्वर पिता के साथ अनन्तकाल तक रहेंगे, जैसा कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल की अंतिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में देखते हैं। परमेश्वर सब कुछ नया कर देगा, एक नए आकाश और नई पृथ्वी की रचना करेगा (21:1, 5)। उस नए नगर में परमेश्वर अपने साथ अपने लोगों को रहने के लिए स्वागत करेगा, और वहाँ हम उसके साथ बिना किसी भय, बिना रात्रि के आए सदा काल तक रहेंगे। इस कहानी का अन्त जानने के कारण हम आशा से भर जाते हैं।

      इससे क्या फर्क पड़ता है? इससे अत्यंत दुःख या कठिनाई के समय में, जैसे कि जब कोई किसी प्रिय जन की मृत्यु का, या अपनी ही मृत्यु का सामना कर रहा हो, तो यह अनन्त आशा दृष्टिकोण को परिवर्तित कर सकती है। यद्यपि मृत्यु का विचार हमें घबराता है, परन्तु साथ ही अनन्त आनन्द को प्राप्त करने की प्रतिज्ञा शांतिदायक होती है। हम उस नगर की बाट जोह रहे हैं जहाँ कोई श्राप नहीं होगा, जहाँ हम परमेश्वर की ज्योति में सदा निवास करेंगे (22:5); यह अन्त अच्छा है। - एमी बाउचर पाई

परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए कहानी का अच्छा अन्त रखा है।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:1-5
Revelation 22:1 फिर उसने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी।
Revelation 22:2 और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे।
Revelation 22:3 और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे।
Revelation 22:4 और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा।
Revelation 22:5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा: और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6



शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

सहायता



      चुआंग अपनी पत्नि से नाराज़ था क्योंकि जिस प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में भोजन करने के लिए वे जाना चाहते थे, वहाँ पहुँचने के सही निर्देश वह ठीक से प्राप्त नहीं करने पाई थी। वे लोग पारिवारिक छुट्टी पर घूमने के लिए जापान आए हुए थे और वापस घर जाने से पहले वे उस रेस्टोरेंट में भोजन करके वापसी की उड़ान लेने वाले थे। परन्तु अब देर होते जा रही थी और उन्हें वह भोजन कर पाना कठिन लग रहा था। चुआंग ने खिसियाहट में अपने पत्नि की आलोचना की, ठीक से कार्य-योजना न बनाने के लिए उससे कटु शब्द कहे।

      बाद में चुआंग को अपने शब्दों के लिए खेद हुआ। उसे बोध हुआ कि वह आवश्यकता से अधिक कटु हो गया था, साथ ही उसे यह भी एहसास हुआ कि वह स्वयँ भी तो रेस्टोरेंट के लिए दिशानिर्देश ले सकता था, जो उसने नहीं किया था। उसे यह भी ध्यान आया कि उसकी पत्नि के अच्छे आयोजन के कारण ही वे लोग पिछले सात दिन से अपनी छुट्टियों का भरपूरी से आनन्द ले रहे थे।

      हम में से बहुतेरे चुआंग के समान व्यवहार करने के दोषी हो सकते हैं। जब हम किसी बात को लेकर क्रोधित होते हैं तो आपा खो देते हैं और अनियंत्रित होकर बोलना आरंभ कर देते हैं। हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के भजनकार के समान “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर” (भजन 141:3) प्रार्थना करने की कितनी अधिक आवश्यकता रहती है!

      किन्तु हम यह किस प्रकार से कर सकते हैं? इसके लिए एक सहायक परामर्श है, बोलने से पहले विचार कर लें कि क्या जो शब्द आप बोलने जा रहे हैं वे भले और सहायक, अनुग्रहपूर्ण तथा दयालु हैं (देखें इफिसियों 4:29-32)?

      मुँह पर पहरा बैठाने का अर्थ है हम जब भी चिढ़े हुए या क्रोधित हों, तो अपने मुँह को बन्द रखें, तथा कुछ भी कहने से पहले परमेश्वर की सहायता मांगे कि वह हमें सही शब्द और सही तरीका प्रदान करे; या हमें बिलकुल शान्त हो जाने की सामर्थ्य प्रदान करे। अपने शब्दों पर काबू रखना आजीवन कार्य है। हम परमेश्वर के धन्यवादी हों कि वह सदा हमारी सहायता करता रहता है। - पो फैंग चिया

मन भावने वचन मधु भरे छते के समान प्राणों को मीठे लगते
और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। - नीतिवचन 16:24

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: भजन 141
Psalms 141:1 हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है; मेरे लिये फुर्ती कर! जब मैं तुझ को पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा!
Psalms 141:2 मेरी प्रार्थना तेरे साम्हने सुगन्ध धूप, और मेरा हाथ फैलाना, संध्या काल का अन्नबलि ठहरे!
Psalms 141:3 हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!
Psalms 141:4 मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं!
Psalms 141:5 धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा; मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा। लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लवलीन रहूंगा।
Psalms 141:6 जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए गए, तब उन्होंने मेरे वचन सुन लिये; क्योंकि वे मधुर हैं।
Psalms 141:7 जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं, वैसे ही हमारी हडि्डयां अधोलोक के मुंह पर छितराई हुई हैं।
Psalms 141:8 परन्तु हे यहोवा, प्रभु, मेरी आंखे तेरी ही ओर लगी हैं; मैं तेरा शरणागत हूं; तू मेरे प्राण जाने न दे!
Psalms 141:9 मुझे उस फन्दे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है, और अनर्थकारियों के जाल से मेरी रक्षा कर!
Psalms 141:10 दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फंसें, और मैं बच निकलूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5



गुरुवार, 7 नवंबर 2019

अवसर



      लिंडा को बहुत अचम्भा हो रहा था; उसने उस दंपत्ति से कहा, “जबकि आप मुझे जानते भी नहीं हैं, तो भी आप मेरे प्रति इतने कृपालु कैसे हो सकते हैं?” लिंडा के कुछ गलत निर्णयों के कारण उसे एक अन्य देश में जेल में छः वर्ष बिताने पड़े थे। जब वह रिहा हुई तो उसके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं था और उसे लग रहा था कि अब जीवन में उसके लिए कुछ शेष नहीं रहा है। उसका परिवार उसे वापस घर लाने के लिए आवश्यक पैसों को जुटाने के प्रयास में लगा था; ऐसे में एक कृपालु दंपत्ति ने उसे अपने घर में आश्रय और भोजन दिया, तथा उसकी सहायता करने के लिए हाथ बढ़ाया। लिंडा उनकी इस कृपा से इतनी प्रभावित हुई कि उसने उनसे उस प्रेमी और दयालु परमेश्वर के सुसमाचार के बारे में सुनना स्वीकार किया जो अब भी उससे भी प्रेम करता था और उसे फिर से जीवन का अवसर देना चाहता था।

      लिंडा मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल की एक पात्र, नाओमी की याद दिलाती है; नाओमी विधवा थी, उसने परदेश में अपने पति और दोनों बेटों को गँवा दिया था, और तब उसे भी लगता था कि अब उसके जीवन में कुछ शेष नहीं रहा है (रूत 1)। परन्तु प्रभु परमेश्वर ने नाओमी को नहीं छोड़ा था; नाओमी की बहु के प्रेम और बोआज़ नामक एक धर्मी व्यक्ति की सहायता से नाओमी ने परमेश्वर के प्रेम का अनुभव किया और उसे जीवन में एक अवसर और मिला (रूत 4:13-17)।

      वही परमेश्वर आज हमारी भी चिंता एवँ देखभाल करता है। औरों के प्रेम के द्वारा हमें उसकी उपस्थिति और कार्य का आभास मिलता है; वह हमें ऐसे लोगों के द्वारा भी जिन्हें हम भलीभांति नहीं जानते हैं, सहायता प्रदान करता है। सबसे उत्तम बात यह है कि वह हमें भी एक और अवसर देने के लिए तैयार है। लिंडा और नाओमी के समान हमें भी हमारे दैनिक जीवन में कार्यरत परमेश्वर के अनदेखे हाथ की पहचान, और उसके द्वारा प्रदान किए गए अवसर का सदुपयोग करने की आवश्यकता है। - कीला ओकोआ

परमेश्वर हमें अवसर देता है।

उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! – रूत 2:20

बाइबल पाठ: रूत 4:13-17
Ruth 4:13 तब बोअज ने रूत को ब्याह लिया, और वह उसकी पत्नी हो गई; और जब वह उसके पास गया तब यहोवा की दया से उसको गर्भ रहा, और उसके एक बेटा उत्पन्न हुआ।
Ruth 4:14 तब स्त्रियों ने नाओमी से कहा, यहोवा धन्य है, जिसने तुझे आज छुड़ाने वाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा; इस्राएल में इसका बड़ा नाम हो।
Ruth 4:15 और यह तेरे जी में जी ले आनेवाला और तेरा बुढ़ापे में पालने वाला हो, क्योंकि तेरी बहू जो तुझ से प्रेम रखती और सात बेटों से भी तेरे लिये श्रेष्ट है उसी का यह बेटा है।
Ruth 4:16 फिर नाओमी उस बच्चे को अपनी गोद में रखकर उसकी धाई का काम करने लगी।
Ruth 4:17 और उसकी पड़ोसिनों ने यह कहकर, कि नाओमी के एक बेटा उत्पन्न हुआ है, लड़के का नाम ओबेद रखा। यिशै का पिता और दाऊद का दादा वही हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42
  • इब्रानियों 4



बुधवार, 6 नवंबर 2019

समय



      कभी-कभी परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देने में अपना ही समय लगाता है, और यह हमारे लिए समझना सहज नहीं होता है।

      हम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र ज़कर्याह के जीवन में यही होता देखते हैं। ज़कर्याह मंदिर का एक याजक (पुरोहित) था, जिसके पास परमेश्वर का स्वर्गदूत जिब्राइल आया, और उससे कहा, “परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे जकरयाह, भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्‍नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना” (लूका 1:13)। परन्तु संभवतः ज़कर्याह ने परमेश्वर से सन्तान की माँग वर्षों पहले की थी; अब वह जिब्राइल के सन्देश के साथ संघर्ष कर रहा था क्योंकि उसकी पत्नि इलीशिबा की बच्चा जानने की आयु बहुत पहले बीत चुकी थी। फिर भी, हम देखते हैं कि, परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना का उत्तर दिया।

      परमेश्वर की यादाशत सिद्ध है। वह हमारी प्रार्थनाओं को केवल वर्षों तक ही नहीं वरन हमारे जीवन काल से आगे पीढ़ियों तक स्मरण रखता है। वह कभी नहीं भूलता है, और प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए हमारे द्वारा अपने निवेदन प्रस्तुत किए जाने के वर्षों बाद भी कार्यवाही कर सकता है। कभी-कभी उसका उत्तर “नहीं” होता है, और कभी “प्रतीक्षा करो” होता है – परन्तु उसका प्रत्येक उत्तर सप्रेम होता है। परमेश्वर की कार्यविधि हमारी समझ से कहीं परे है, परन्तु सदा हमारे हित में होती है।

      ज़कर्याह ने भी यही पाठ सीखा। उसने पुत्र माँगा था, परन्तु परमेश्वर ने उसे और भी बढ़कर दिया। ज़कर्याह का पुत्र यूहन्ना वह भविष्यद्वक्ता बना जिसने सँसार के समक्ष जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के आगमन की घोषणा की। ज़कर्याह का अनुभव एक महत्वपूर्ण सत्य को प्रगट करता है, जो हमारी प्रार्थनाओं में हमारे प्रोत्साहन के लिए है: परमेश्वर का समय शायद ही कभी हमारे समय के अनुसार होता हो, परन्तु उसके समय की प्रतीक्षा करना सदा लाभदायक होता है। - जेम्स बैंक्स

हम चाहे परमेश्वर के हाथ को कार्य करते नहीं देख सकते हैं, 
परन्तु हमें उसके हृदय पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है – इफिसियों 3:20

बाइबल पाठ: लूका 1:5-17
Luke 1:5 यहूदियों के राजा हेरोदेस के समय अबिय्याह के दल में जकरयाह नाम का एक याजक था, और उस की पत्‍नी हारून के वंश की थी, जिस का नाम इलीशिबा था।
Luke 1:6 और वे दोनों परमेश्वर के साम्हने धर्मी थे: और प्रभु की सारी आज्ञाओं और विधियों पर निर्दोष चलने वाले थे। उन के कोई भी सन्तान न थी,
Luke 1:7 क्योंकि इलीशिबा बांझ थी, और वे दोनों बूढ़े थे।
Luke 1:8 जब वह अपने दल की पारी पर परमेश्वर के साम्हने याजक का काम करता था।
Luke 1:9 तो याजकों की रीति के अनुसार उसके नाम पर चिट्ठी निकली, कि प्रभु के मन्दिर में जा कर धूप जलाए।
Luke 1:10 और धूप जलाने के समय लोगों की सारी मण्‍डली बाहर प्रार्थना कर रही थी।
Luke 1:11 कि प्रभु का एक स्वर्गदूत धूप की वेदी की दाहिनी ओर खड़ा हुआ उसको दिखाई दिया।
Luke 1:12 और जकरयाह देखकर घबराया और उस पर बड़ा भय छा गया।
Luke 1:13 परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे जकरयाह, भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्‍नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना।
Luke 1:14 और तुझे आनन्द और हर्ष होगा: और बहुत लोग उसके जन्म के कारण आनन्‍दित होंगे।
Luke 1:15 क्योंकि वह प्रभु के साम्हने महान होगा; और दाखरस और मदिरा कभी न पिएगा; और अपनी माता के गर्भ ही से पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाएगा।
Luke 1:16 और इस्राएलियों में से बहुतेरों को उन के प्रभु परमेश्वर की ओर फेरेगा।
Luke 1:17 वह एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ में हो कर उसके आगे आगे चलेगा, कि पितरों का मन लड़के बालों की ओर फेर दे; और आज्ञा न मानने वालों को धर्मियों की समझ पर लाए; और प्रभु के लिये एक योग्य प्रजा तैयार करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3