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सोमवार, 25 नवंबर 2019

मनुष्य



      जब एक न्यायाधिकारी से कहा गया कि वह समाज में अपनी भूमिका के बारे में कुछ कहे, तो उसने न तो अपने पद का हवाला दिया, और न ही अपने अधिकारों का वर्णन किया। वरन उसने नम्रता से कहा, “हम मनुष्य हैं, जो संकट में पड़े अन्य मनुष्यों के साथ काम करते हैं।”

      उसकी यह नम्रता – उसके द्वारा यह स्वीकार करना कि वह अन्य मनुष्यों के समान ही है – मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में पतरस के शब्दों को स्मरण करवाता है, जो उसने रोमी शासन के आधीन सताव झेल रहे प्रथम शताब्दी के मसीही विश्वासियों को लिखे थे। पतरस ने कहा: “निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो” (1 पतरस 3:8)। प्रतीत होता है कि पतरस कह रहा था कि संकट में पड़े मनुष्यों के प्रति सबसे उत्तम प्रतिक्रिया है मनुष्य ही के समान होना, इस बात का बोध रखना कि हम सभी समान ही हैं। क्या परमेश्वर ने भी यही नहीं किया जब उसने अपने पुत्र को भेजा – वह मनुष्य बन कर आया ताकि हम मनुष्यों की सहायता कर सके (फिलिप्पियों 2: 5-7)।

      यदि हम केवल अपने पतित हृदयों की गहराइयों में ही झांकते रहेंगे, तो हम अपने मनुष्य होने को तुच्छ समझने का खतरा उठाते हैं। परन्तु क्या हो यदि हम अपने मनुष्य होने को संसार के लिए उपयोगी होना समझें? प्रभु यीशु हमें सिखाते हैं कि हम कैसे पूर्णतः मनुष्यों की समानता का जीवन जी सकते हैं, सेवकों के समान, इस बोध के साथ कि हम सभी समान हैं। परमेश्वर ने हमें “मनुष्य” ही बनाया है, किन्तु अपने स्वरूप में, और फिर हमारे प्रति अपने बिना किसी शर्त के प्रेम के अंतर्गत हमारा उद्धार भी किया है।

      यह निश्चित है कि हमारा सामना विभिन्न संघर्षों में पड़े मनुष्यों से होगा। उस प्रभाव की कल्पना करें जो हम लाने पाएंगे जब उनके प्रति मनुष्य के समान ही प्रत्युत्तर दें – ऐसे मनुष्य जो अन्य मनुष्यों के साथ मिलकर संकट में पड़े मनुष्यों की सहायता करने वाले साथी होते हैं। - एलीसा मॉर्गन

नम्रता परमेश्वर को, तथा उसके समक्ष अपने आप को, पहिचानने का परिणाम है।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। - फिलिप्पियों 2:5-7

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:11-17; 3:8-9
1 Peter 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
1 Peter 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1 Peter 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है।
1 Peter 2:14 और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं।
1 Peter 2:15 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो।
1 Peter 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो।
1 Peter 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1 पतरस 2



रविवार, 10 नवंबर 2019

शान्तिदायक


      नर्स ने मेरे विषय अपने विवरण में लिखा, “मरीज़ बहुत हाथ-पाँव मार रहा है।” उसे उस समय तो पता नहीं चला, बाद में पता चला कि मैं दिल की शल्यचिकित्सा होने के बाद, जब होश में आने लगा, तो मुझे किसी चीज़ से एलर्जी के कारण बहुत बेचैनी होने लगी। मेरे हाल बुरे थे; मुझे सांस दिलाने के लिए एक नाली मेरे गले से होकर श्वास-नली में जा रही थी, जिससे मैं बोल नहीं सकता था; मेरे हाथ बंधे हुए थे, कि कहीं मैं उस सांस लेने वाली नाली को निकाल न दूँ। उस एलर्जी के कारण मेरा शरीर बुरी तरह से कांपने लगा, और मेरे हाथ उन बंधनों से मुक्त होने के लिए जोर लगाने लगे। वह एक बहुत पीड़ादायक और भयावह घटना थी। ऐसे में मेरी दाहिनी और खड़ी एक नर्स की सहायिका ने हलके से मेरा हाथ थाम लिया, और उसे शान्ति से पकड़े रही। वह एक अप्रत्याशित बात थी, और मुझे बहुत कोमल लगी। मैं शांत होने लगा, जिससे फिर मेरे शरीर की प्रतिक्रया भी शांत होने लगी और मेरा हाथ-पैर पटकना बंद हो गया।

      उस नर्स सहायिका ने इस बात का अनुभव अन्य मरीजों के साथ भी किया था, इसलिए वह जानती थी कि कोमलता से पकड़ा हुआ हाथ शांतिदायक होता है, और मुझे भी शान्ति देगा। यह एक प्रत्यक्ष उदाहरण था की किस प्रकार से परमेश्वर शान्ति प्रदान करता है, जब उसके बच्चे कष्ट में होते हैं।

      किसी भी देखभाल करने वाले के लिए, परिस्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए, शांतिदायक होना एक बहुत सामर्थी और स्मरणीय तरीका है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस 2 कुरिन्थियों 1:3-4 में बताता है की यह परमेश्वर के उपयोगी उपकरणों में से एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इतना ही नहीं, परन्तु परमेश्वर उसके द्वारा हमें प्रदान की गयी शान्ति के प्रभाव को कई गुणा और बढ़ाता है, जब वह हमें कहता है कि हम उसके द्वारा हमें मिलने वाली शान्ति की स्मृति को औरों के जीवन में, जो वैसी ही परिस्थितियों में फंसे हों, शान्ति लाने के लिए प्रयोग करें (पद 4-7)। यह उसके महान प्रेम का एक और चिन्ह है; एक ऐसा चिन्ह जिसे हम औरों के साथ बाँट सकते हैं – एक साधारण से हाथ पकड़ने के द्वारा भी, और परमेश्वर की ओर से दुखी लोगों के लिए शांतिदायक हो सकते हैं। - रैंडी किल्गोर

साधारण से कार्य भी प्रबल शांतिदायक हो सकते हैं।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-7
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है।
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7


शनिवार, 21 अप्रैल 2018

प्रतिज्ञा



   मैं एक पुस्तक पढ़ने में लीन थी, तभी मेरी एक सहेली ने मेरे कंधे की ऊपर से झाँक कर देखा कि मैं क्या पढ़ रही हूँ। देखते ही वह तुरंत ही चौंक कर, यह कहते हुए पीछे हट गई, “कितना उदासीन शीर्षक है”। जो मैं पढ़ रही थी वह कहानियों के लोकप्रिय संकलन “Grimm’s Fairy Tales” की एक कहानी, “The Glass Coffin” थी, और शब्द ‘Coffin’ अर्थात ‘ताबूत, या शव रखने की पेटी’ ने उसे विचलित किया था। हम में से अधिकांश को यह पसन्द नहीं है कि हमें हमारी नश्वरता का स्मरण कराया जाए, परन्तु वास्तविकता यही है कि हम सभी को एक न एक दिन मरना ही है।

   मृत्यु का उल्लेख सदा ही एक गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया को उत्पन्न करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के विषय देखते हैं कि अपने एक निकट मित्र, लाजार, की मृत्यु के पश्चात प्रभु यीशु ने गहरी भावनाएँ व्यक्त कीं। जब उसने लाजार की बहन मरियम और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा तो वह “...आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?” (यूहन्ना 11:33)। एक अन्य अंग्रेज़ी अनुवाद में आया है “उसके अन्दर से एक गहरा क्रोध उभर कर आया” (NLT)।

   प्रभु यीशु विचलित हुए, क्रोधित भी हुए – परन्तु किस पर? संभवतः वे पाप और उसके परिणामों पर क्रुद्ध थे। परमेश्वर ने सृष्टि की रचना करते समय बीमारी, कष्ट और दुःख से भरे सँसार की रचना नहीं की थी। परन्तु पाप को प्रवेश मिलने के बाद, पाप ने परमेश्वर की सुन्दर रचना तथा योजना को बिगाड़ दिया।

   लेकिन हमारे दुःख के समय में हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे निकट रहता है, हमारे दुःख में हमारे साथ दुखी भी होता है (पद 35)। लेकिन इस सब से बढ़कर सांत्वना देने वाला तथ्य है कि हमारे स्थान पर मारे जाने और मृतकों में से जी उठने के द्वारा प्रभु यीशु ने पाप और मृत्यु को पराजित कर दिया है (1 कुरिन्थियों 15:55-57)। प्रभु यीशु की अपने अनुयायियों से प्रतिज्ञा है कि “यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा” (यूहन्ना 11:25)। आज प्रभु यीशु के विश्वासी इस जीवन में उसके साथ संगति का आनन्द लेते हैं, और उस अनन्त काल की प्रतीक्षा में हैं जहाँ मृत्योपरांत वे उसके साथ सदा काल के लिए निवास करेंगे, और वहाँ कोई आँसू, दर्द, बीमारी, या मृत्यु नहीं होगी। - पोह फैंग चिया


प्रभु यीशु की खाली कब्र मृत्यु पर विजय की निश्चितता और प्रमाण है।

हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। - 1 कुरिन्थियों 15:55-7

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:1-4; 38-44
John 11:1 मरियम और उस की बहिन मारथा के गांव बैतनिय्याह का लाजर नाम एक मनुष्य बीमार था।
John 11:2 यह वही मरियम थी जिसने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पांवों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाजर बीमार था।
John 11:3 सो उस की बहिनों ने उसे कहला भेजा, कि हे प्रभु, देख, जिस से तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।
John 11:4 यह सुनकर यीशु ने कहा, यह बीमारी मृत्यु की नहीं, परन्तु परमेश्वर की महिमा के लिये है, कि उसके द्वारा परमेश्वर के पुत्र की महिमा हो।
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ तें यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।


एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 12-13
  • लूका 16



सोमवार, 16 जनवरी 2017

विवश


   जॉन ल्युइस, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सभा के सदस्य हैं, उस समय 23 वर्ष के थे जब उन्होंने डा० मार्टिन लूथर किंग के 1963 के एतिहासिक मानवाधिकार अभियान "मार्च ऑन वॉशिंगटन" में भाग लिया। अब उस घटना के अर्ध-शताब्दी पश्चात, जब पत्रकार बिल मौयेर्स ने ल्युइस से पूछा कि उस समय डा० किंग के द्वारा दिए गए प्रसिद्ध भाषण, "आई हैव ए ड्रीम" का उन पर क्या प्रभाव हुआ, तो श्री. ल्युइस ने उत्तर दिया, "आप उन्हें सुनने के पश्चात बिना प्रभावित हुए वापस पहले जैसे कार्य पर नहीं जा सकते थे। आप कुछ करने, किसी कार्य में लगने के लिए विवश हो गए। आपको आगे बढ़ना था, आपको जाकर इस बात का समाचार फैलाना ही था।"

   प्रभु यीशु के संपर्क में आने वाले अनेकों लोगों के साथ भी यही होता है; एक बार प्रभु यीशु को सुन लेने के बाद, वे उसके विषय में तटस्थ नहीं रह पाते, वे कुछ निर्णय लेने और कार्य करने के लिए विवश अनुभव करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 7:25-46 में प्रभु यीशु के प्रति दो भिन्न प्रतिक्रियाएं दिखाई गई हैं। जबकि उसकी बातें सुनकर "बहुत से लोगों ने उस पर विश्वास किया" (पद 31), उस समय के धर्म के अगुवों ने उसे शान्त कर देने के लिए प्रभु को पकड़ने के लिए सिपाहियों को भेजा (पद 32)। जब प्रभु यीशु लोगों से कह रहे थे, "...यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (पद 37-38) तब संभवतः वे सिपाही वहाँ थे और प्रभु की बात सुन रहे थे, और वे सिपाही प्रभु यीशु को गिरफ्तार किए बिना ही लौट गए। जब उन सिपाहियों से पूछा गया कि वे प्रभु यीशु को बन्दी बना कर क्यों नहीं लाए (पद 45), तो उनका उत्तर था "किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं" (पद 46)।

   प्रभु यीशु के वचन हमें विवश करते हैं कि हम उसके बारे में अपने जीवनों में कोई निर्णय लें, अपने सामान्य कार्यों से ऊपर उठकर उसके लिए कुछ करें, आगे बढ़ें और उसके सुसमाचार को औरों तक पहुँचाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान मेरे पापों से छुटकारे का 
और उसके प्रति मेरे समर्पण एवं आज्ञाकारिता का कारण है।

शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है। - यूहन्ना 6:68-69

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:31-46
John 7:31 और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्या इस से अधिक आश्चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए? 
John 7:32 फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे। 
John 7:33 इस पर यीशु ने कहा, मैं थोड़ी देर तक और तुम्हारे साथ हूं; तब अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा। 
John 7:34 तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते। 
John 7:35 यहूदियों ने आपस में कहा, यह कहां जाएगा, कि हम इसे न पाएंगे: क्या वह उन के पास जाएगा, जो यूनानियों में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा? 
John 7:36 यह क्या बात है जो उसने कही, कि तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु न पाओगे: और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते? 
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था। 
John 7:40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है। 
John 7:41 औरों ने कहा; यह मसीह है, परन्तु किसी ने कहा; क्यों? क्‍या मसीह गलील से आएगा? 
John 7:42 क्या पवित्र शास्त्र में यह नहीं आया, कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गांव से आएगा जहां दाऊद रहता था? 
John 7:43 सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी। 
John 7:44 उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्तु किसी ने उस पर हाथ न डाला।
John 7:45 तब सिपाही महायाजकों और फरीसियों के पास आए, और उन्होंने उन से कहा, तुम उसे क्यों नहीं लाए? 
John 7:46 सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11