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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

भरोसा



      मेरी एक सहेली को हाल ही में अपने वर्तमान स्थान से लगभग 1000 मील दूर स्थान पर स्थानांतरित होना पड़ा। क्योंकि समय कम था इसलिए उसने और उसके पति ने सम्बंधित कार्यों को आपस में बाँट लिया, और वे दोनों अपने-अपने कार्य करने लगे। मेरी सहेली सामान को बाँधने और पैक करने में लग गई, और उसका पति रहने के लिए अच्छा स्थान ढूँढने और निश्चित करने में लग गया। मैं चकित थी कि कैसे रहने के नए स्थान को बिना देखे और उसके बारे में स्वयं जाने बिना, तथा नए घर को देखे बिना वह वहाँ जाने के लिए तैयार थी। मैंने उससे इसके बारे में जब पूछा तो उसने उत्तर दिया की यह चुनौतीपूर्ण तो है, परन्तु उसे पता है कि इतने वर्षों से साथ रहने के कारण उसके पति को उसकी पसंद और नापसंद का ज्ञान है, तथा मेरी सहेली को अपने पति पर भरोसा था की वे स्थान और घर का चुनाव उसकी पसंद को ध्यान में रखते हुए ही करेंगे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से शीघ्र ही उनके पकड़वाए जाने और मारे जाने के बारे में बताया। प्रभु यीशु के पृथ्वी जीवन का, तथा शिष्यों के जीवन का भी सबसे अंधकारपूर्ण समय निकट था। ऐसे में प्रभु ने शिष्यों को आश्वस्त किया कि वह उनके लिए स्वर्ग में एक नया घर बनाएगा, जैसे की मेरी सहेली के पति ने उनके रहने के लिए नए स्थान पर घर तैयार किया। जब शिष्यों ने प्रभु यीशु से प्रश्न किए तो प्रभु ने उन्हें  स्मरण दिलाया की कैसे उन्होंने साथ समय बिताया था, कार्य किए थे, और उन्होंने प्रभु को आश्चर्यकर्म करते देखा था। प्रभु ने उन्हें आश्वस्त किया कि चाहे प्रभु के चले जाने से उन्हें दुःख होगा, किन्तु फिर भी वे प्रभु पर भरोसा बनाए रख सकते हैं कि जो वह कहता है वह उसे करता भी है।

      आज हम मसीही विश्वासी भी अपने जीवन की कठिन और विपरीत परिस्थितियों में प्रभु के प्रति आश्वस्त रह सकते हैं कि वह हर बात में होकर हमें भलाई ही की ओर लेकर जाएगा। जब हम उसके साथ चलते रहते हैं तो हम उसकी विश्वासयोग्यता पर भरोसा बनाए रखना भी सीखते रहते हैं। - कर्स्टन होल्म्बर्ग

कठिन और विपरीत परिस्थितियों में से भी हमें 
पार लगाने के लिए हम परमेश्वर पर भरोसा बनाए रख सकते हैं।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-14
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।
John 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26



गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

धन्यवाद



      मैं कंप्यूटर पर बैठी कार्य कर रही थी, और मुझे एक ईमेल मिलने का संकेत सुनाई दिया। सामान्यतः मैं प्रत्येक ईमेल को तुरंत ही देखने का प्रयास नहीं करती हूँ, परन्तु उस ईमेल का विषय, “तुम आशीष हो” बहुत लुभावना था, इसलिए मैंने उसे खोल कर पढ़ा। वह ईमेल मेरी एक सहेली का था जो बहुत दूर रहती थी, और वह मुझे बता रही थी कि वह मेरे परिवार के लिए प्रार्थना कर रही थी। मेरी उस सहेली ने अपने रसोई की मेज़ पर एक ‘आशीष का कटोरा’ रखा हुआ है, जिसमें हर सप्ताह वह अपने किसी एक प्रीय जन की फोटो रखती है और उसके परिवार के लिए प्रार्थना करती रहती है। उसने मुझे लिखा, “मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं” (फिलिप्पियों 1:3), और फिर हमारे द्वारा साथ मिलकर किए गए परमेश्वर के प्रेम को औरों के साथ बाँटने के प्रयासों को स्मरण किया और उनकी सराहना की – सुसमाचार प्रचार में हमारी सहभागिता की।

      मेरी सहेली के इस सुविचारित कार्य के द्वारा मेरे ईमेल के इनबॉक्स में परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा कहे गए शब्द आ गए, और मुझे उनसे वैसा ही आनन्द प्राप्त हुआ, जैसा मुझे लगता है उस प्रथम-शताब्दी की मसीही मण्डली को हुआ होगा जिन्हें पौलुस ने यह धन्यवाद के शब्द लिखे थे। ऐसा लगता है कि पौलुस के साथ जो लोग कार्य करते थे, उन्हें पौलुस धन्यवाद अवश्य कहता था, यह करना उसकी आदत थी। उसकी कई पत्रियों की आरंभिक पंक्ति धन्यवाद के शब्द होते हैं, जैसे कि, “पहिले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूंकि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है” (रोमियों 1:8)।

      प्रथम शताब्दी में, पौलुस ने अपने सहकर्मियों को प्रार्थना सहित कहे गए धन्यवाद के शब्दों के द्वारा आशीष दी। इक्कीसवीं शताब्दी में मेरी सहेली ने अपने ‘आशीष के कटोरे’ का प्रयोग मेरे दिन को आनन्दमय बनाने के लिए किया। आज हम हमारे साथ परमेश्वर के लिए कार्यरत लोगों के प्रति धन्यवाद व्यक्त कैसे कर सकते हैं, उन्हें प्रोत्साहित और आनन्दित कर सकते हैं? – एलिसा मौर्गन

आज आप किसे धन्यवाद कह सकते हैं?

हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब का प्रेम आपस में बहुत ही होता जाता है। - 2 थिस्सलुनीकियों 1:3

बाइबल पाठ: रोमियों 1:1-10
Romans 1:1 पौलुस की ओर से जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्वर के उस सुसमाचार के लिये अलग किया गया है।
Romans 1:2 जिस की उसने पहिले ही से अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा पवित्र शास्त्र में।
Romans 1:3 अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में प्रतिज्ञा की थी, जो शरीर के भाव से तो दाउद के वंश से उत्पन्न हुआ।
Romans 1:4 और पवित्रता की आत्मा के भाव से मरे हुओं में से जी उठने के कारण सामर्थ के साथ परमेश्वर का पुत्र ठहरा है।
Romans 1:5 जिस के द्वारा हमें अनुग्रह और प्रेरिताई मिली; कि उसके नाम के कारण सब जातियों के लोग विश्वास कर के उस की मानें।
Romans 1:6 जिन में से तुम भी यीशु मसीह के होने के लिये बुलाए गए हो।
Romans 1:7 उन सब के नाम जो रोम में परमेश्वर के प्यारे हैं और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं। हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।
Romans 1:8 पहिले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है।
Romans 1:9 परमेश्वर जिस की सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूं, वही मेरा गवाह है; कि मैं तुम्हें किस प्रकार लगातार स्मरण करता रहता हूं।
Romans 1:10 और नित्य अपनी प्रार्थनाओं में बिनती करता हूं, कि किसी रीति से अब भी तुम्हारे पास आने को मेरी यात्रा परमेश्वर की इच्छा से सफल हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14
  • मत्ती 26:51-75



बुधवार, 12 फ़रवरी 2020

प्रावधान



      कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के पश्चात, मुझे जो काम मिला उसमें वेतन बहुत कम था। पैसे की तंगी रहती थी, और कभी-कभी तो मुझे अगले भोजन के लिए भी जुटा पाना कठिन होता था। ऐसे में मैंने परमेश्वर पर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्भर होना सीखा।

      यह मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में एलिय्याह भविष्यद्वक्ता का अनुभव स्मरण करवाता है। उसकी सेवकाई के दिनों में, उसे भी अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए परमेश्वर पर निर्भर रहना सीखना पड़ा। एलिय्याह द्वारा इस्राएल पर अकाल द्वारा परमेश्वर के न्याय की घोषणा किए जाने के कुछ ही समय पश्चात परमेश्वर ने उसे एक निर्जन स्थान पर, करीत नाले के पास भेजा जहाँ कौवे आकर उसे उसका प्रतिदिन का भोजन देते थे और वह उस नाले में से पीता था (1 राजाओं 17:1-4)।

      परन्तु सूखा पड़ने से वह नाला धीरे-धीरे सूख गया, और तब परमेश्वर ने एलिय्याह से कहा, “चलकर सीदोन के सारपत नगर में जा कर वहीं रह: सुन, मैं ने वहां की एक विधवा को तेरे खिलाने की आज्ञा दी है” (पद 9)। सारपत फिनीके में था, जहां के निवासी इस्राएलियों के शत्रु थे। क्या ऐसे स्थान पर कोई एलिय्याह को शरण देगा? और, क्या एक निर्धन विधवा के पास इतना होगा कि वह एलिय्याह को खिला-पिला सके?

      हम में से अधिकाँश यही चाहते हैं कि हमारे संसाधनों के समाप्त होने से पहले ही परमेश्वर हमें बहुतायत से उपलब्ध करवा दे, बजाए इसके कि हमें प्रतिदिन के प्रावधान पर निर्भर होना पड़े। परन्तु हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता, धीमी आवाज़ में हम से कहता है, मुह पर भरोसा बनाए रखो। जैसे उसने एलिय्याह को उपलब्ध करवाने के लिए कौवों और एक निर्धन विधवा का उपयोग किया, वह हमारे लिए भी करेगा; उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। हम उसके प्रेम और सामर्थ्य पर भरोसा रख सकते हैं कि वह हमारे दैनिक प्रावधान को उपलब्ध करवाता रहेगा। - पोह फैंग चिया

परमेश्वर हमारी दैनिक आवश्यकताओं को प्रतिदिन पूरा करता है।

इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6: 31-33

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 17:7-16
1 Kings 17:7 कुछ दिनों के बाद उस देश में वर्षा न होने के कारण नाला सूख गया।
1 Kings 17:8 तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा,
1 Kings 17:9 कि चलकर सीदोन के सारपत नगर में जा कर वहीं रह: सुन, मैं ने वहां की एक विधवा को तेरे खिलाने की आज्ञा दी है।
1 Kings 17:10 सो वह वहां से चल दिया, और सारपत को गया; नगर के फाटक के पास पहुंच कर उसने क्या देखा कि, एक विधवा लकड़ी बीन रही है, उसको बुलाकर उसने कहा, किसी पात्र में मेरे पीने को थोड़ा पानी ले आ।
1 Kings 17:11 जब वह लेने जा रही थी, तो उसने उसे पुकार के कहा अपने हाथ में एक टुकड़ा रोटी भी मेरे पास लेती आ।
1 Kings 17:12 उसने कहा, तेरे परमेश्वर यहोवा के जीवन की शपथ मेरे पास एक भी रोटी नहीं है केवल घड़े में मुट्ठी भर मैदा और कुप्पी में थोड़ा सा तेल है, और मैं दो एक लकड़ी बीनकर लिये जाती हूँ कि अपने और अपने बेटे के लिये उसे पकाऊं, और हम उसे खाएं, फिर मर जाएं।
1 Kings 17:13 एलिय्याह ने उस से कहा, मत डर; जा कर अपनी बात के अनुसार कर, परन्तु पहिले मेरे लिये एक छोटी सी रोटी बना कर मेरे पास ले आ, फिर इसके बाद अपने और अपने बेटे के लिये बनाना।
1 Kings 17:14 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि जब तक यहोवा भूमि पर मेंह न बरसाएगा तब तक न तो उस घड़े का मैदा चुकेगा, और न उस कुप्पी का तेल घटेगा।
1 Kings 17:15 तब वह चली गई, और एलिय्याह के वचन के अनुसार किया, तब से वह और स्त्री और उसका घराना बहुत दिन तक खाते रहे।
1 Kings 17:16 यहोवा के उस वचन के अनुसार जो उसने एलिय्याह के द्वारा कहा था, न तो उस घड़े का मैदा चुका, और न उस कुप्पी का तेल घट गया।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50



मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

बढ़ोतरी



      हमारे समुदाय में शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय चर्चों में आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। बढ़ोतरी के साथ चुनौतियाँ भी आती हैं। चर्च के सदस्यों को इन नए लोगों का स्वागत करना सीखना होता है, साथ ही उन्हें उन लोगों की संस्कृति, भाषा, और आराधना की भिन्न पद्धति को स्वीकार करना तथा उनके साथ समायोजित होना सीखना होता है। इस नएपन के कारण कुछ अटपटी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। जहाँ कहीं लोग होंगे, वहाँ गलतफहमियाँ और मतभेद भी होंगे। यह चर्च में भी देखने को मिलता है। यदि हम अपने मतभेदों को स्वस्थ तरीके से नहीं सुलझाएंगे, तो फिर उनके कारण विभाजन उत्पन्न हो सकते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब यरूशलेम में मसीही विश्वासियों की आरंभिक मण्डली बढ़ रही थी तो उनमें सांस्कृतिक आधार पर मतभेद उत्पन्न हो गया। यूनानी भाषा बोलने वाली यहूदियों को अरामी भाषा बोलने वाले यहूदियों से शिकायत थी कि उनके समुदाय की विधवाओं की भोजन वितरण में अवहेलना की जा रही है (प्रेरितों 6:1)। जब यह मतभेद सुलझाने के लिए बात प्रेरितों तक पहुँची, तो उन्होंने कहा, “इसलिये हे भाइयो, अपने में से सात सुनाम पुरूषों को जो पवित्र आत्मा और बुद्धि से परिपूर्ण हों, चुन लो, कि हम उन्हें इस काम पर ठहरा दें” (पद 3)। इस निर्देश के अनुसार जो सात लोग चुने गए, उन सभी के नाम यूनानी हैं (पद 5); अर्थात वे सभी यूनानी भाषा बोलने वालों में से थे – उसी समुदाय से जिसे शिकायत थी, और वे समस्या को भली-भांति समझ सकते थे। प्रेरितों ने प्रार्थना कर के उन पर हाथ रखे और कलीसिया बढ़ती तथा फैलती चली गयी (पद 6-7)।

      बढ़ोतरी के साथ चुनौतियां आती हैं, क्योंकि बढ़ोतरी के साथ संस्कृतियों के पार संपर्क और आदान-प्रदान बढ़ता है। परन्तु जब हम प्रत्येक बात के लिए पवित्र आत्मा की सहायता और मार्गदर्शन की प्रार्थी रहते हैं, तो संभावित समस्याओं के लिए रचनात्मक समाधान भी हमें मिलते रहेंगे, जिन से परमेश्वर की अगुवाई में समस्याएँ बढ़ोतरी के नए अवसर बन जाएँगी। - टीम गुस्ताफासन

साथ आना आरंभ है; साथ बने रहना प्रगति है; साथ कार्य करना सफलता है।

यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका साम्हना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती। - सभोपदेशक 4:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 6:1-7
Acts 6:1 उन दिनों में जब चेले बहुत होते जाते थे, तो यूनानी भाषा बोलने वाले इब्रानियों पर कुड़कुड़ाने लगे, कि प्रति दिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती।
Acts 6:2 तब उन बारहों ने चेलों की मण्‍डली को अपने पास बुलाकर कहा, यह ठीक नहीं कि हम परमेश्वर का वचन छोड़कर खिलाने पिलाने की सेवा में रहें।
Acts 6:3 इसलिये हे भाइयो, अपने में से सात सुनाम पुरूषों को जो पवित्र आत्मा और बुद्धि से परिपूर्ण हों, चुन लो, कि हम उन्हें इस काम पर ठहरा दें।
Acts 6:4 परन्तु हम तो प्रार्थना में और वचन की सेवा में लगे रहेंगे।
Acts 6:5 यह बात सारी मण्‍डली को अच्छी लगी, और उन्होंने स्‍तिुफनुस नाम एक पुरूष को जो विश्वास और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था, और फिलेप्पुस और प्रखुरूस और नीकानोर और तीमोन और परिमनास और अन्ताकियावासी नीकुलाउस को जो यहूदी मत में आ गया था, चुन लिया।
Acts 6:6 और इन्हें प्रेरितों के साम्हने खड़ा किया और उन्होंने प्रार्थना कर के उन पर हाथ रखे।
Acts 6:7 और परमेश्वर का वचन फैलता गया और यरूशलेम में चेलों की गिनती बहुत बढ़ती गई; और याजकों का एक बड़ा समाज इस मत के आधीन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25



सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

सर्वत्र विद्यमान



      हमारी एक पारिवारिक मित्र ने, जिसकी युवा बेटी भी हमारी युवा बेटी मेलिस्सा के समान ही एक कार दुर्घटना में जाती रही, अपने बेटी लिंडसे के लिए स्थानीय अखबार में श्रद्धांजलि लिखी। उसके द्वारा लिखी गई इस श्रद्धांजलि में एक बहुत प्रभावी वाक्य था; उसने लिंडसे की अनेकों फोटो और स्मृतियों को घर में स्थान-स्थान पर रखने के वर्णन के बाद लिखा, “वह सभी स्थानों पर है, परन्तु कहीं नहीं है।”

      यद्यपि हमारी बेटियाँ, मेलिस्सा और लिंडसे, अपनी फोटो में सदा ही हमारी और मुस्कुरा कर देख रही होती हैं, फिर भी उनका वह मुस्कुराता हुए व्यक्तित्व अब कहीं नहीं है। वे सर्वत्र हैं – हमारे मानों में, हमारे विचारों में, उन सभी फोटो और स्मृतियों में – परन्तु फिर भी कहीं नहीं हैं।

      परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करता है कि उनके द्वारा मसीह यीशु में लाए गए विश्वास के कारण ऐसा नहीं है कि वे कहीं नहीं हैं। वे प्रभु यीशु की उपस्थिति में हैं, प्रभु के साथ हैं (2 कुरिन्थियों 5:8)। वे उसके साथ हैं जो एक प्रकार से सर्वत्र है, किन्तु दिखता नहीं है। हम परमेश्वर को शारीरिक स्वरूप में नहीं देखते हैं; न ही हमारे घरों में परमेश्वर के फोटो हैं। क्योंकि वह प्रगट नहीं है, इसलिए हमें यह आभास हो सकता है कि वह कहीं विद्यमान नहीं है। परन्तु सत्य इसके बिलकुल विपरीत है; वह सर्वत्र विद्यमान है!

      हम इस पृथ्वी पर चाहे जहाँ चले जाएं, परमेश्वर वहाँ विद्यमान है। वह हर स्थान पर हमारा मार्गदर्शन करने, हमें बल देने, हमें संभालने, और हमें शान्ति देने के लिए उपस्थित है। हम उसे देखते न हों, परन्तु वह सर्वत्र विद्यमान है। हमारी प्रत्येक परिक्षा के घड़ी में, यह हमारे लिए अद्भुत शांतिदायक तथ्य है। - डेव ब्रैनन

हमारे दुःख में हमारी सबसे बड़ी सांत्वना हमारे साथ परमेश्वर की उपस्थिति है।

वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:27-28

बाइबल पाठ: भजन 139:7-12
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46



रविवार, 9 फ़रवरी 2020

संबंध



      मेरे मित्र फेसबुक पर कई प्रीतिकर वीडियो भेजते रहते हैं, जानवरों में अविश्वसनीय दोस्ती और विश्वास के। अभी हाल में मैंने जो ऐसे वीडियो देखे उनमें पिल्ले और सूअर की दोस्ती, एक हिरन और बिल्ली के साथ रहने, और एक मादा वनमानुष द्वारा बाघ के शावकों की माँ के समान देखभाल करने के वीडियो सम्मिलित हैं।

      जब मैं जानवरों में इन हृदयस्पर्शी और असामान्य मित्रता को देखती हूँ तो मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में अदन की वाटिका स्मरण हो आती है, जहां आदम और हव्वा एक दूसरे तथा परमेश्वर के साथ संगति और सामंजस्य में रहते थे। और क्योंकि उस समय भोजन के लिए वनस्पति का प्रयोग होता था (उत्पत्ति 1:30), इसलिए मुझे विश्वास है कि सभी पशु भी आपस में शान्ति के साथ रहते होंगे। परन्तु यह सुखद स्थिति बदल गयी जब आदम और हव्वा ने पाप किया (उत्पत्ति 3:21-23)। तब से मानवीय संबंधों तथा सृष्टि में हम निरंतर संघर्ष और टकराव देखते हैं।

      परन्तु यशायाह भविष्यद्वकता हमें आश्वासन देता है कि एक दिन फिर ऐसी ही स्थिति वापस आ जाएगी, “तब भेडिय़ा भेड़ के बच्चे के संग रहा करेगा, और चीता बकरी के बच्चे के साथ बैठा रहेगा, और बछड़ा और जवान सिंह और पाला पोसा हुआ बैल तीनों इकट्ठे रहेंगे, और एक छोटा लड़का उनकी अगुवाई करेगा” (यशायाह 11:6)। बहुत से व्याख्याकर्ता उस आने वाले दिन की व्याख्या प्रभु यीशु के राज्य करने के लिए आने के समय की करते हैं। जब प्रभु आएगा तो फिर कोई मतभेद भी नहीं रहेंगे, और प्रभु के राज्य में, “वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं” (प्रकाशितवाक्य 21:4)। उस नई की गयी पृथ्वी पर सृष्टि अपने पहले स्वरूप में लौटा दी जाएगी और पृथ्वी के सभी जाति, राष्ट्र, और भाषा के लोग साथ मिलकर परमेश्वर की आराधना करेंगे (प्रकाशितवाक्य 7:9-10; 22:1-5)।

      वह समय आने तक, परमेश्वर की सहयाता से हम अपने बिगड़े हुए संबंधों को ठीक कर सकते हैं, और नए संबंध बना सकते हैं। - एलिसन कीडा

एक दिन परमेश्वर संसार में फिर से पूर्ण शान्ति स्थापित कर देगा।

और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे। - प्रकाशितवाक्य 22:3

बाइबल पाठ: यशायाह 11:1-10
Isaiah 11:1 तब यिशै के ठूंठ में से एक डाली फूट निकलेगी और उसकी जड़ में से एक शाखा निकल कर फलवन्त होगी।
Isaiah 11:2 और यहोवा की आत्मा, बुद्धि और समझ की आत्मा, युक्ति और पराक्रम की आत्मा, और ज्ञान और यहोवा के भय की आत्मा उस पर ठहरी रहेगी।
Isaiah 11:3 और उसको यहोवा का भय सुगन्ध सा भाएगा।। वह मुंह देखा न्याय न करेगा और न अपने कानों के सुनने के अनुसार निर्णय करेगा;
Isaiah 11:4 परन्तु वह कंगालों का न्याय धर्म से, और पृथ्वी के नम्र लोगों का निर्णय खराई से करेगा; और वह पृथ्वी को अपने वचन के सोंटे से मारेगा, और अपने फूंक के झोंके से दुष्ट को मिटा डालेगा।
Isaiah 11:5 उसकी कटि का फेंटा धर्म और उसकी कमर का फेंटा सच्चाई होगी।
Isaiah 11:6 तब भेडिय़ा भेड़ के बच्चे के संग रहा करेगा, और चीता बकरी के बच्चे के साथ बैठा रहेगा, और बछड़ा और जवान सिंह और पाला पोसा हुआ बैल तीनों इकट्ठे रहेंगे, और एक छोटा लड़का उनकी अगुवाई करेगा।
Isaiah 11:7 गाय और रीछनी मिलकर चरेंगी, और उनके बच्चे इकट्ठे बैठेंगे; और सिंह बैल की नाईं भूसा खाया करेगा।
Isaiah 11:8 दूधपिउवा बच्चा करैत के बिल पर खेलेगा, और दूध छुड़ाया हुआ लड़का नाग के बिल में हाथ डालेगा।
Isaiah 11:9 मेरे सारे पवित्र पर्वत पर न तो कोई दु:ख देगा और न हानि करेगा; क्योंकि पृथ्वी यहोवा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसा जल समुद्र में भरा रहता है।
Isaiah 11:10 उस समय यिशै की जड़ देश देश के लोगों के लिये एक झण्ड़ा होगी; सब राज्यों के लोग उसे ढूंढ़ेंगें, और उसका विश्रामस्थान तेजोमय होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30



शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

नम्र


      जो लोग असामान्य प्रसिद्धि या प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेते हैं वे “अपने जीवन काल में ही अति विशिष्ट” हो जाते हैं। मेरे एक मित्र ने, जो व्यावासायिक बेसबॉल खेलता है, मुझे बताया की वह खेल के संसार में ऐसे कई लोगों से मिला है जो “अपने मन में ही अति विशिष्ट” होते हैं। घमण्ड हमारे अपने प्रति दृष्टिकोण को बिगाड़ देती है, किन्तु नम्रता एक वास्तविक दृष्टिकोण को बनाए रखने में सहायक होती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन के लेखक ने कहा, “विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है” (16:18)। जब हम अपनी छवि अपने आप को महत्वपूर्ण समझते हुए देखते हैं तो हमें हमारा अवास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। पने आप को ऊँचा उठाना, पतन में गिरने की तैयारी होता है।

      घमण्ड के विष का तोड़ है सच्ची नम्रता, जो परमेश्वर से मिलती है, “घमण्डियों के संग लूट बांट लेने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है” (16:19)।

      प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “...तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं। परन्तु तुम में ऐसा न होगा; परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।” (मत्ती 20:25-28)।

      किसी उपलब्धि या विशेष सफलता के लिए सम्मान और प्रशंसा प्राप्त करने में कोई बुराई नहीं है। परन्तु यह हमारे लिए घमण्ड का कारण न बने इसके लिए हमें उस पर अपना ध्यान केन्द्रित रखना चाहिए जिसने हमें अपना अनुसरण करने के लिए बुलाया है, और अपने विषय कहा है, “...मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे” (मत्ती 11:29)।

सच्ची नम्रता परमेश्वर से आती है।

धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। - मत्ती 5:3

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:16-22
Proverbs 16:16 बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
Proverbs 16:17 बुराई से हटना सीधे लोगों के लिये राजमार्ग है, जो अपने चाल चलन की चौकसी करता, वह अपने प्राण की भी रक्षा करता है।
Proverbs 16:18 विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।
Proverbs 16:19 घमण्डियों के संग लूट बांट लेने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है।
Proverbs 16:20 जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
Proverbs 16:21 जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
Proverbs 16:22 जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51