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रविवार, 24 जनवरी 2021

देना

 

          परिवार के एक सदस्य को दिसंबर का किराया चुकाने के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता पड़ी, और उसने इसे अपने परिवार के सामने रखा। परिवार के लिए, वर्ष के अन्त में उनके अपने अनपेक्षित खर्चो के कारण इस अनुरोध को पूरा करना कठिन लगा; परन्तु उन्होंने अपनी बचत को खंगाला, आवश्यक पैसे एकत्रित किए और, परमेश्वर के प्रावधानों के लिए धन्यवाद के साथ उस सदस्य को दे दिए – और उस सदस्य ने भी उन्हें उनकी इस सहायता के लिए कृतज्ञ होकर आशीष दी। उसने उन सभी को धन्यवाद व्यक्त करने के लिए एक कार्ड दिया, जिस पर उसने अपनी कृतज्ञता को व्यक्त करते हुए लिखा था, “आप लोगों ने एक बार फिर से इसे कर दिया है – औरों के लिए भलाई करना, मानो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है!”

          हो सकता है कि मनुष्यों के लिए औरों की सहायता करने में कोई बड़ी बात न हो, परन्तु परमेश्वर इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि यशायाह भविष्यद्वक्ता ने इस्राएल राष्ट्र को इस बात को समझाया। लोग उपासना के लिए उपवास तो रखते थे, किन्तु आपस में वाद-विवाद और झगड़े भी करते थे। परमेश्वर ने यशायाह में होकर उनसे कहा कि ऐसा करने की बजाए,जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूँ, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जूओं को टूकड़े टूकड़े कर देना? क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बाँट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहनाना, और अपने जाति-भाइयों से अपने को न छिपाना?” (यशायाह 58:6-7)।

          यशायाह ने कहा कि इस प्रकार से बलिदान देना न केवल परमेश्वर की ज्योति को औरों के साथ बाँटता है, वरन साथ ही हमारे टूटेपन को भी चंगा करता है (पद 8)। जब परिवार उस सदस्य की सहायता कर रहा था, तब उन्होंने बीते वर्ष के अपने खर्चो को भी ध्यान से देखा, और ध्यान किया कि कैसे वे लोग वर्ष भर अपनी आवश्यकताओं को पहले से भली प्रकार से पूरी करते चले आए थे। यह उनके लिए उदार होने कारण परमेश्वर की आशीषें पाने की पुष्टि थी: “तब तेरा प्रकाश पौ फटने के समान चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा” (यशायाह 58:8)।

          अन्ततः, अपने रिश्तेदार को देने के द्वारा वे और भी अधिक आशीषित हुए। और परमेश्वर? उसने तो पहले ही अपने प्रेम में होकर हमारे लिए अपना सर्वोत्तम दे दिया है। - पेट्रीशिया रेबौन

 

परमेश्वर ने अपना सब कुछ दे दिया; हम भी उसका अनुसरण करें।


क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: यशायाह 58

यशायाह 58:1 गला खोल कर पुकार, कुछ न रख छोड़, नरसिंगे का सा ऊंचा शब्द कर; मेरी प्रजा को उसका अपराध अर्थात याकूब के घराने को उसका पाप जता दे।

यशायाह 58:2 वे प्रति दिन मेरे पास आते और मेरी गति बूझने की इच्छा ऐसी रखते हैं मानो वे धर्मी लोगे हैं जिन्होंने अपने परमेश्वर के नियमों को नहीं टाला; वे मुझ से धर्म के नियम पूछते और परमेश्वर के निकट आने से प्रसन्न होते हैं।

यशायाह 58:3 वे कहते हैं, क्या कारण है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।

यशायाह 58:4 सुनो, तुम्हारे उपवास का फल यह होता है कि तुम आपस में लड़ते और झगड़ते और दुष्टता से घूंसे मारते हो। जैसा उपवास तुम आजकल रखते हो, उस से तुम्हारी प्रार्थना ऊपर नहीं सुनाई देगी।

यशायाह 58:5 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं अर्थात जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ के समान झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैलाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो?

यशायाह 58:6 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जूओं को टूकड़े टूकड़े कर देना?

यशायाह 58:7 क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बांट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहनाना, और अपने जाति-भाइयों से अपने को न छिपाना?

यशायाह 58:8 तब तेरा प्रकाश पौ फटने के समान चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।

यशायाह 58:9 तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा; तू दोहाई देगा और वह कहेगा, मैं यहां हूं। यदि तू अन्धेर करना और उंगली मटकाना, और, दुष्ट बातें बोलना छोड़ दे,

यशायाह 58:10 उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दुखियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा।

यशायाह 58:11 और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता।

यशायाह 58:12 और तेरे वंश के लोग बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे; तू पीढ़ी पीढ़ी की पड़ी हुई नेव पर घर उठाएगा; तेरा नाम टूटे हुए बाड़े का सुधारक और पथों का ठीक करने वाला पड़ेगा।।

यशायाह 58:13 यदि तू विश्राम दिन को अशुद्ध न करे अर्थात मेरे उस पवित्र दिन में अपनी इच्छा पूरी करने का यत्न न करे, और विश्राम दिन को आनन्द का दिन और यहोवा का पवित्र किया हुआ दिन समझ कर माने; यदि तू उसका सम्मान कर के उस दिन अपने मार्ग पर न चले, अपनी इच्छा पूरी न करे, और अपनी ही बातें न बोले,

यशायाह 58:14 तो तू यहोवा के कारण सुखी होगा, और मैं तुझे देश के ऊंचे स्थानों पर चलने दूंगा; मैं तेरे मूल पुरुष याकूब के भाग की उपज में से तुझे खिलाऊंगा, क्योंकि यहोवा ही के मुख से यह वचन निकला है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 9-11 
  • मत्ती 15:21-39

शनिवार, 23 जनवरी 2021

मन

 

          जब कॉलेज की एक कक्षा सांस्कृतिक भ्रमण के लिए गई, तो प्रशिक्षक ने अपने सर्वोत्तम विद्यार्थियों में से एक लगभग पहचाना ही नहीं। कक्षा में वह अपनी पैंट के अन्दर छः इंच ऊँची एड़ियों वाले जूते छिपाए रहती थी जिससे कि लम्बी दिखे। परन्तु अब चलने फिरने के लिए जो जूते उसने पहने हुए थे, उनमें वह पाँच फीट से भी कम ऊँचाई की थी! उसने हँसते हुए कहा, “ऊँची एड़ी वाले मेरे जूते दिखाते हैं कि मैं कैसी दिखना चाहती हूँ; लेकिन ये जूते दिखा रहे हैं कि मैं वास्तव में कैसी हूँ।”

          हमारा भौतिक स्वरूप हमारी वास्तविकता को नहीं दिखाता है; हमारी सच्चाई हमारे मन के द्वारा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने उन स्वांग भरने में निपुण, अत्यधिक धर्मी दिखने वाले धर्म के अगुवों, उन “फरीसियों और व्यवस्था के शिक्षकों” की कठोर शब्दों में आलोचना की। उन्होंने प्रभु यीशु से पूछा कि उसके शिष्य भोजन खाने से पहले अपने हाथ क्यों नहीं धोते थे, जैसा कि उनकी धार्मिक परंपराओं की माँग थी (मत्ती 15:1-2)। प्रभु यीशु ने उन से पूछा,तुम भी अपनी रीतियों के कारण क्यों परमेश्वर की आज्ञा टालते हो?” (पद 3)। फिर प्रभु ने प्रकट किया कि कैसे उन्होंने बाहर से परमेश्वर की व्यवस्था के आज्ञाकारी प्रतीत होने के लिए अपने लिए बचने का एक वैधानिक मार्ग बना लिया था, और उसके द्वारा, अपने माता-पिता की देखभाल में लगाने के स्थान पर वे अपने धन को अपने ही पास बचाकर रखे रहते थे (पद 4-6), जो कि पाँचवीं आज्ञा का उल्लंघन (निर्गमन 20:12) और माता-पिता का निरादर करना था।

          यदि हम बाहरी स्वरूपों पर ही ध्यान देते रहेंगे, और परमेश्वर के स्पष्ट आज्ञाओं की आज्ञाकारिता से बचने के लिए अपने लिए बचने के मार्ग बनाते रहेंगे, तो हम उसकी व्यवस्था की आत्मा का उल्लंघन करने वाले होंगे। प्रभु यीशु ने कहा,क्योंकि कुचिन्‍ता, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलतीं है” (मत्ती 15:19)। केवल परमेश्वर ही, उसके पुत्र और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की धार्मिकता के द्वारा, हमें एक स्वच्छ मन दे सकता है जो उसका आज्ञाकारी बना रहे। - टिम गुस्ताफसन

 

यदि हमारा उद्देश्य अन्य मनुष्यों को प्रभावित करने का रहेगा, 

तो हम परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले नहीं होंगे।


तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। - 1 यूहन्ना 2:15

बाइबल पाठ: मत्ती 15:1-11, 16-20.

मत्ती 15:1 तब यरूशलेम से कितने फरीसी और शास्त्री यीशु के पास आकर कहने लगे।

मत्ती 15:2 तेरे चेले पुरनियों की रीतियों को क्यों टालते हैं, कि बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?

मत्ती 15:3 उसने उन को उत्तर दिया, कि तुम भी अपनी रीतियों के कारण क्यों परमेश्वर की आज्ञा टालते हो?

मत्ती 15:4 क्योंकि परमेश्वर ने कहा था, कि अपने पिता और अपनी माता का आदर करना: और जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, वह मार डाला जाए।

मत्ती 15:5 पर तुम कहते हो, कि यदि कोई अपने पिता या माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह परमेश्वर को भेंट चढ़ाई जा चुकी।

मत्ती 15:6 तो वह अपने पिता का आदर न करे, सो तुम ने अपनी रीतियों के कारण परमेश्वर का वचन टाल दिया।

मत्ती 15:7 हे कपटियों, यशायाह ने तुम्हारे विषय में यह भविष्यवाणी ठीक की।

मत्ती 15:8 कि ये लोग होंठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है।

मत्ती 15:9 और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की विधियों को धर्मोपदेश कर के सिखाते हैं।

मत्ती 15:10 और उसने लोगों को अपने पास बुलाकर उन से कहा, सुनो; और समझो।

मत्ती 15:11 जो मुंह में जाता है, वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुंह से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।

मत्ती 15:16 उसने कहा, क्या तुम भी अब तक ना समझ हो?

मत्ती 15:17 क्या नहीं समझते, कि जो कुछ मुंह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्‍डास में निकल जाता है?

मत्ती 15:18 पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।

मत्ती 15:19 क्योंकि कुचिन्‍ता, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलतीं है।

मत्ती 15:20 यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 7-8 
  • मत्ती 15:1-20

शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

संतान


          एक चर्च सभा के दौरान, जिस में मैं अपने माता-पिता के साथ सम्मिलित हुई थी, सामान्य परंपरा के अनुसार, हम प्रभु की प्रार्थना को दोहराते हुए एक दूसरे के हाथ पकड़े हुए खड़े थे। मेरा एक हाथ मेरी माँ ने थामा हुआ था, और दूसरा मेरे पिता ने, और मेरे मन विचार आया कि कुछ भी हो जाए, मैं सदा ही उनकी पुत्री, उनकी संतान बनी रहूँगी। चाहे अब मैं अपने अधेड़ आयु काल में ही क्यों न पहुँच गई हूँ, लेकिन मुझे सदा ही ‘लियो और फिलीस की बेटी कहा जा सकता है। साथ ही यह बात भी ध्यान में आई कि उसी प्रकार से मैं  सदा ही परमेश्वर की संतान भी रहूँगी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस चाहता था कि रोम के चर्च के लोग इस बात को समझें कि मसीही विश्वास में आ जाने के द्वारा अब उनकी पहचान परमेश्वर के परिवार में गोद ले लिए गए सदस्यों की है (रोमियों 8:15)। क्योंकि उन्होंने आत्मा के द्वारा नया जन्म प्राप्त कर लिया था (पद 14), इसलिए अब उन्हें व्यर्थ बातों के दासत्व में बने रहने की कोई आवश्यकता नहीं थी। वरन, परमेश्वर के पवित्र आत्मा के वरदानों के द्वारा, वे अब “वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं” (पद 17)।

          जो प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलने लगते हैं, उनके लिए यह तथ्य उनके जीवन में क्या परिवर्तन लाता है? सीधी सी बात है, सब कुछ बदल जाता है; वे एक नई सृष्टि हो जाते हैं! परमेश्वर की संतान होने की हमारी पहचान अब हमारे जीवन का आधार हो जाती है और हमें संसार तथा अपने आप को देखने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, इस बात का एहसास रखना कि हम परमेश्वर के परिवार के सदस्य हैं, हमें उसका अनुसरण करते समय, अपने आराम की स्थिति से बाहर निकलकर उसके लिए कार्य करने का साहस और सामर्थ्य प्रदान करता है। फिर हमें अन्य मनुष्यों की स्वीकृति और प्रशंसा के खोजी होने से भी मुक्ति मिल जाती है।

          आज क्यों न गंभीरता से इस बात पर मनन करें कि परमेश्वर की संतान होने का क्या अर्थ है? – एमी बाउचर पाई

 

जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, वे ही परमेश्वर की संतान हैं।


सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: रोमियों 8:9-17

रोमियों 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।

रोमियों 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।

रोमियों 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।

रोमियों 8:12 सो हे भाइयों, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें।

रोमियों 8:13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रियाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।

रोमियों 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।

रोमियों 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं।

रोमियों 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं।

रोमियों 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।

 

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36

गुरुवार, 21 जनवरी 2021

गीत

 

          खगोल विद्या में खोज के लिए ध्वनि तरंगों के प्रयोग के द्वारा वैज्ञानिक अंतरिक्ष में उत्पन्न होने वाली ध्वनियों और स्पंदनों को सुनते और उनका अध्ययन करते हैं। उन्हें पता चला है कि सितारे अपनी कक्षा में मूक होकर विचरण नहीं करते हैं, परन्तु उनमें से संगीत ध्वनियाँ निकलती रहती हैं। जैसे कि हम्पबैक व्हेल मछलियों की ध्वनि तरंगें होती हैं, वैसे ही सितारों की ध्वनि तरंगें भी मनुष्य के कानों के द्वारा सुनी तो नहीं जा सकतीं हैं, किन्तु वैज्ञानिक उपकरणों के द्वारा उनकी जानकारी ली जा सकती है। सितारों, व्हेल मछलियों और अन्य प्राणियों के द्वारा उत्पन्न की गई ध्वनि मिलकर परमेश्वर की महानता का वर्णन करने वाले संगीत को बनाते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 19:1-4 में लिखा है,आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं।

          नए नियम में, प्रेरित पौलुस ने यह प्रकट किया है कि प्रभु यीशु में,सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएँ, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं” (कुलुस्सियों 1:16)। प्रत्युत्तर में प्राकृतिक संसार की सभी वस्तुएँ, उसकी गहराई और ऊँचाई, सब कुछ मिलकर अपने सृष्टिकर्ता की स्तुति का गीत गाती हैं। हम भी सृष्टि के साथ मिलकर अपने सृष्टिकर्ता, जिसने “महासागर को चुल्लू से मापा और किस [जिस] के बित्ते से आकाश का नाप हुआ...” (यशायाह 40:12) की महानता के गीत गाएं। - रेमी ओयेडेली

 

 वे[हम] यहोवा के नाम की स्तुति करें

क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये[हम] सिरजे गए। - भजन संहिता 148:5


इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। कि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ्य, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:19-20

बाइबल पाठ: भजन 19:1-6

भजन 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।

भजन 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।

भजन 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।

भजन 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,

भजन 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर के समान अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।

भजन 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21

बुधवार, 20 जनवरी 2021

लक्ष्य

 

          हम अपने जीवन की दिशा कैसे निर्धारित कर सकते हैं? एक बार मैंने इस प्रश्न का उत्तर एक अप्रत्याशित स्थान पर सुना – एक मोटर साइकिल सीखने के स्थान पर। मैं और मेरे कुछ मित्र मोटर साइकिल चलाना चाहते थे, इसलिए हम उसे चलाना सीखने के लिए गए। हमारे प्रशिक्षण का एक भाग था लक्ष्य निर्धारण करना। हमारे प्रशिक्षक ने हम से कहा, “कभी न कभी आपको कोई अनपेक्षित बाधा का सामना करना पड़ेगा। यदि आप उस बाधा ही को देखते रहोगे, तो वही लक्ष्य बन जाएगा, और आप उस से जा टकराओगे। परन्तु यदि आप उस बाधा के इधर-उधर और उसके पार देखोगे तो लक्ष्य भी उस बाधा से हट कर हो जाएगा और सामान्यतः आप उस बाधा से बचने पाओगे। आप जहाँ देखते हैं, वहीं पहुँचते भी हैं।”

          यही सरल और साधारण सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों पर भी लागू होता है। जब हम अपनी समस्याओं और संघर्षों पर ही अपने ध्यान को केन्द्रित रखते हैं, तो वे ही हमारा लक्ष्य बने रहते हैं, और स्वतः ही हम अपने जीवनों को उन्हीं के चारों ओर चलाते रहते हैं।

          किन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें प्रोत्साहित किया गया है कि हम अपनी समस्याओं के पार, उसकी ओर देखें जो उनके समाधान दे सकता है, हमारी सहायता कर सकता है। हम भजन 121:1 में पढ़ते हैं, मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?” फिर भजनकार स्वयं ही उत्तर देता है “मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।... यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा” (पद 2, 8)।

          हो सकता है कि हमें अपनी बाधाएँ इतनी बड़ी लगें कि हमें लगने लगे कि हम उन्हें पार नहीं कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें आमंत्रित करता है कि हम अपनी उन बाधाओं के पार उसकी ओर देखें, उसी पर अपनी दृष्टि लगाए रहें। उन बाधाओं को नहीं, परमेश्वर को अपना लक्ष्य बनाएँ, और वह हमें बाधाओं के पार निकाल ले जाएगा। - एडम होल्ज़

 

यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है। (भजन 124:8)


तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। - ज़कर्याह 4:6

बाइबल पाठ: भजन 121

भजन 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?

भजन 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।

भजन 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।

भजन 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।

भजन 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।

भजन 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।

भजन 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।

भजन 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58

मंगलवार, 19 जनवरी 2021

प्रेम

 

          “जाराब टपैटियो”, या मैक्सिकन टोपी का नृत्य, रोमांस या प्रेम का नृत्य है। इस तेज़ लय और ताल वाले नृत्य में  पुरुष अपनी टोपी धरती पर रख देता है, और नृत्य के अन्त होने के समय उसकी महिला साथी उस टोपी को उठाती और दोनों उसके पीछे मुँह छिपा कर एक दूसरे से अपने प्रेम को चुम्बन के द्वारा व्यक्त करते हैं।

          यह नृत्य मुझे विवाह में विश्वासयोग्य बने रहने के महत्व को याद दिलाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक के पाँचवें अध्याय में, अनैतिकता और व्यभिचार के कारण चुकाई जाने वाली बड़ी कीमत के बारे में लिखने के बाद हम पढ़ते हैं कि विवाह विशिष्ट है; “तू अपने ही कुण्ड से पानी, और अपने ही कुंए से सोते का जल पिया करना” (पद 15)। जाराब नृत्य में दस जोड़े एक साथ नृत्य कर रहे होते हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति अपने ही साथी के साथ ही नृत्य करता है, केवल उसी पर अपना ध्यान लगाए रहता है। हमें अपने विवाहित साथी पर ही संपूर्ण और अविभाजित ध्यान लगाए रखना है (पद 18)।

          जैसे नृत्य करने वाले जोड़ों के प्रेम को लोग देख रहे होते हैं, और वे जोड़े भी जानते हैं कि उन पर दृष्टि लगी हुई है, वैसे ही हमारा अपने साथी के साथ संबंध किसी की दृष्टि में रहता है; “क्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैं, और वह उसके सब मार्गों पर ध्यान करता है” (पद 21)। परमेश्वर हमारे वैवाहिक जीवन को सुरक्षित रखना चाहता है, इसलिए हम पर अपनी दृष्टि लगातार बनाए रखता है। अपने जोड़ीदार के साथ वफ़ादारी दिखाने के द्वारा, हम परमेश्वर को प्रसन्न रखें।

          जिस प्रकार से जाराब नृत्य में एक लय और ताल होती है, जिसके साथ उस नृत्य को करना होता है, वैसे ही जीवन की भी एक लय और ताल होती है जिसका पालन करना आवश्यक है। जब हम अपने सृष्टिकर्ता के द्वारा निर्धारित की गई हमारे जीवन की लय और ताल को निभाते हैं, उसके प्रति आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य बने रहते हैं, तो चाहे हम विवाहित हों अथवा अविवाहित, हम उसके हमारे प्रति प्रेम में आनन्द और आशीष प्राप्त करते हैं। - कीला ओकोआ

 

वफादारी आनन्द और आशीष लाती है।


क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्तु पवित्र होने के लिये बुलाया है। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:7

बाइबल पाठ: नीतिवचन 5

नीतिवचन 5:1 हे मेरे पुत्र, मेरी बुद्धि की बातों पर ध्यान दे, मेरी समझ की ओर कान लगा;

नीतिवचन 5:2 जिस से तेरा विवेक सुरक्षित बना रहे, और तू ज्ञान के वचनों को थामे रहे।

नीतिवचन 5:3 क्योंकि पराई स्त्री के ओठों से मधु टपकता है, और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं;

नीतिवचन 5:4 परन्तु इसका परिणाम नागदौना सा कड़वा और दोधारी तलवार सा पैना होता है।

नीतिवचन 5:5 उसके पांव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं; और उसके पग अधोलोक तक पहुंचते हैं।

नीतिवचन 5:6 इसलिये उसे जीवन का समथर पथ नहीं मिल पाता; उसके चालचलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह आप नहीं जानती।

नीतिवचन 5:7 इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुंह न मोड़ो।

नीतिवचन 5:8 ऐसी स्त्री से दूर ही रह, और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;

नीतिवचन 5:9 कहीं ऐसा न हो कि तू अपना यश औरों के हाथ, और अपना जीवन क्रूर जन के वश में कर दे;

नीतिवचन 5:10 या पराए तेरी कमाई से अपना पेट भरें, और परदेशी मनुष्य तेरे परिश्रम का फल अपने घर में रखें;

नीतिवचन 5:11 और तू अपने अन्तिम समय में जब कि तेरा शरीर क्षीण हो जाए तब यह कह कर हाय मारने लगे, कि

नीतिवचन 5:12 मैं ने शिक्षा से कैसा बैर किया, और डांटने वाले का कैसा तिरस्कार किया!

नीतिवचन 5:13 मैं ने अपने गुरुओं की बातें न मानी और अपने सिखाने वालों की ओर ध्यान न लगाया।

नीतिवचन 5:14 मैं सभा और मण्डली के बीच में प्रायः सब बुराइयों में जा पड़ा।

नीतिवचन 5:15 तू अपने ही कुण्ड से पानी, और अपने ही कुंए से सोते का जल पिया करना।

नीतिवचन 5:16 क्या तेरे सोतों का पानी सड़क में, और तेरे जल की धारा चौकों में बह जाने पाए?

नीतिवचन 5:17 यह केवल तेरे ही लिये रहे, और तेरे संग औरों के लिये न हो।

नीतिवचन 5:18 तेरा सोता धन्य रहे; और अपनी जवानी की पत्नी के साथ आनन्दित रह,

नीतिवचन 5:19 प्रिय हरिणी या सुन्दर सांभरनी के समान उसके स्तन सर्वदा तुझे संतुष्ट रखे, और उसी का प्रेम नित्य तुझे आकर्षित करता रहे।

नीतिवचन 5:20 हे मेरे पुत्र, तू अपरिचित स्त्री पर क्यों मोहित हो, और पराई को क्यों छाती से लगाए?

नीतिवचन 5:21 क्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैं, और वह उसके सब मार्गों पर ध्यान करता है।

नीतिवचन 5:22 दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फंसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बन्धा रहेगा।

नीतिवचन 5:23 वह शिक्षा प्राप्त किए बिना मर जाएगा, और अपनी ही मूर्खता के कारण भटकता रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30

सोमवार, 18 जनवरी 2021

प्रश्न तथा आराधना

 

          किसी यात्रा के समय, यह सामान्य है कि यात्रियों में से कोई न कोई यह पूछ ही लेता है, “क्या हम पहुँच गए हैं?” या फिर, “पहुँचने में अभी और कितनी देर है?” अपनी मंजिल पर पहुँचने के इच्छुक बच्चों या बड़ों के होंठों से ये सामान्य प्रश्न किसने नहीं सुने होंगे? किन्तु सभी आयु के लोग, ऐसे ही प्रश्न, जीवन की कभी समाप्त न होने वाली परेशानियों से थक कर भी पूछते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भी दाऊद के साथ भजन 13 में हम कुछ ऐसी ही परिस्थिति देखते हैं। उसने भजन के पहले दो पदों में चार बार विलाप के साथ पूछा, “कब तक” – क्योंकि वह भुलाया गया, त्यागा हुआ, और पराजित अनुभव कर रहा था। दूसरे पद में वह पूछता है,मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?” इस प्रकार के विलाप वाले प्रश्नों के भजन हमें परमेश्वर के सामने अपने प्रश्नों के साथ आराधना करने आने की अनुमति देते हैं। हमारे तनाव और दुःख के समयों में, भला परमेश्वर से बेहतर और कौन हो सकता है जिसके साथ हम अपने मन की बात बाँट सकें। हम परमेश्वर के सामने बीमारी के साथ अपने संघर्ष, किसे प्रिय जन के हम से दूर चले जाने, किसी के साथ संबंधों में खटास आ जाने, आदि सभी बातों को खुल कर कह सकते हैं।

          जब हमारे मनों में प्रश्न होते हैं, तो इससे आराधना रुक नहीं जानी चाहिए। स्वर्ग का सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने चिंतित करने वाले प्रश्नों को लेकर उसके सामने आएँ। संभव है, दाऊद के समान, हमारे प्रश्न ही परमेश्वर के प्रति भरोसे और स्तुति की विनतियों तथा आराधना की अभिव्यक्तियों में परिवर्तित हो जाएंगे। - आर्थर जैक्सन

 

अपने प्रश्नों को परमेश्वर के पास लाएं।


मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बढ़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता। - यिर्मयाह 33:3

बाइबल पाठ: भजन 13

भजन 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?

भजन 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?

भजन 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;

भजन 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।

भजन 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।

भजन 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

 

एक साल में बाइबल: उत्पत्ति 43-45; मत्ती 12:24-50