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मंगलवार, 12 मार्च 2013

दर्शन


   संसार की सबसे शक्तिशाली दूरबीनों में से एक ’ग्रैन टेलिस्कोपियो कैनरिस’ कैनरी द्वीप समूह के ला पालोमा में एक शान्त हो चुके ज्वालामुखी के शिखर पर स्थित है। इसका उद्घाटन सन २००९ में स्पेन के राजा कार्लोस ने किया था। इस दूरबीन से नक्षत्र और सितारे का बहुत ही स्पष्ट दिखाई देते हैं क्योंकि 7,870 फीट की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यह बादलों के ऊपर है, वहाँ की हवा साफ और बिना नमी की है तथा हवा के प्रवाह में हलचल नहीं होती। भूमध्य रेखा के निकट स्थित होने के कारण खगोलशास्त्रियों के लिए इस दूरबीन से समस्त उत्तरी खगोलीय गोलार्ध तथा दक्षिणी खगोलीय गोलार्ध के कुछ भाग का अध्ययन करना संभव है।

   प्रभु यीशु भी अपने चेलों को परमेश्वर को समर्पित जीवन के गुण सिखाने के लिए एक पहाड़ पर ले गए। वहाँ पर उन्होंने चेलों को सिखाया कि उनका व्यवहार उनके लिए परमेश्वर के दर्शन को निर्धारित करेगा। परमेश्वर को स्पष्ट जानने के लिए पहाड़ की नहीं वरन चरित्र और परमेश्वर की आज्ञाकारिता कि ऊँचाई आवश्यक है। प्रभु यीशु के उस पहाड़ी उपदेश में से एक वाक्य है: "धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे" (मत्ती 5:8)। यह उन थोड़े से लोगों के लिए नहीं है जो अपने प्रयासों से इसे संभव करना चाहते हैं, वरन उन सभी के लिए है जो दीन और नम्र होकर प्रभु यीशु को स्वीकार कर लेते हैं।

   मन की शुद्धि उन्हीं के लिए संभव है जिनके पाप प्रभु यीशु में क्षमा हो गए हों। यह पाप क्षमा का अवसर आज भी संसार के सब लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से सेंत-मेंत उपलब्ध है। परमेश्वर का संसार के सभी लोगों को आश्वासन है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   पहाड़ की ऊँचाई सितारों को देखने के लिए एक उत्तम स्थान है, लेकिन परमेश्वर के दर्शन के लिए पाप से क्षमा पाया हुआ तथा पाप से परिवर्तित हृदय चाहिए। क्या आपने परमेश्वर के आश्वासन को मानकर प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के स्पष्ट दर्शन पाने के लिए प्रभु यीशु पर दृष्टि केंद्रित करें।

धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। - मत्ती 5:8

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-12
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए।
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा,
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे।
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे।
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19 
  • मरकुस 13:1-20


सोमवार, 11 मार्च 2013

बहुतायत


   घर के बाहर से अचानक ही खुशी से चिल्लाने और शोर मचाने की आवाज़ें आने लगीं, और मैंने जानना चाहा कि ऐसा क्या हुआ है जिस से बाहर इतना आनन्द है। मैंने खिड़की के पर्दों के बीच से झांककर बाहर देखा तो पाया कि सड़क के किनारे लगा आग बुझाने के लिए पानी लाने वाला मोटा पाइप फट गया है और उसमें से पानी बड़ी तेज़ी से और मोटी धार में निकल रहा है और दो बच्चे उस बहते पानी में मज़े से खेल रहे हैं।

   उस प्रवाह को देखकर मुझे स्मरण आया कि कैसे परमेश्वर भी अपने बच्चों पर अपनी आशीषें प्रवाहित करता रहता है, और यह कितना आवश्यक है कि हम स्मरण रखें कि "धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है" (भजन 68:19)।

   यद्यपि मैं जानती हूँ कि परमेश्वर ने अनगिनित आशीषें मेरे जीवन में उण्डेली हैं, लेकिन जब अचानक ही कार खराब हो जाती है, या मेरा परिवार फ्लू संक्रमण से बीमार हो जाता है, या कहीं रिश्तों में खटास आने लगती है, या किसी बात से असन्तोष मन में आ जाता है तब परमेश्वर की आशीषों के प्रति मेरी दृष्टि धुंधला जाती है। तब वे आशीषें मोटी धार और तेज़ प्रवाह के समान नहीं वरन नल के टपकते हुए प्रवाह के समान लगने लगती हैं।

   संभवतः इसी कारण दाऊद ने भजन 103 में लिखा कि "हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना" (भजन 103:2)। और फिर हमारी सहायता के लिए वह परमेश्वर से मिली आशीषों की सूची देता है; वह हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर हमारे अधर्म को क्षमा करता है, हमें बीमारियों से स्वस्थ करता है, हमारे जीवन को नाश से बचाता है, हमारे सिर पर करुणा और दया का मुकुट बान्धता है और हमारी लालसाओं को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है (भजन 103:3-5)।

   आज यह समय है कि हम अपनी अन्धेरों, कुंठाओं तथा निराशाओं से बाहर झांक कर परमेश्वर से हर समय बहुतायत से मिलने वाली जीवन की देखरेख और आशीषों को स्मरण करें, उनके लिए उसका धन्यवाद करें और उसमें अपने विश्वास को पुनः दृढ़ करें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर से मिली आशीषों की गिनती को जोड़ के देखिए; इससे आपका आनन्द कई गुणा बढ़ जाएगा।

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन 103:2

बाइबल पाठ: भजन 103:1-13
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16 
  • मरकुस 12:28-44


रविवार, 10 मार्च 2013

प्रार्थना


   मैंने एक माँ द्वारा अपने बच्चों के लिए स्थापित किए गए ’5 मिनिट’ के नियम के बारे में पढ़ा। उस माँ ने अपने घर में यह नियम बनाया हुआ था कि प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए निकलने से 5 मिनिट पहले सब बच्चों को तैयार होकर माँ के पास एकत्रित हो जाना है। उस समय में वह उन में से प्रत्येक के लिए उनका नाम लेकर प्रार्थना करती, दिन भर के लिए परमेश्वर की सुरक्षा तथा आशीष उनपर माँगती, फिर उनमें से प्रत्येक को चुम्बन देकर स्कूल के लिए विदा करती। यदि पड़ौस का कोई बच्चा उस समय वहाँ होता तो यही प्रार्थना और सप्रेम विदाई उस बच्चे के लिए भी की जाती। कई वर्ष बाद एक बच्चे ने बताया कि इस अनुभव ने उसके मन में इस बात को स्थापित किया कि प्रार्थना दैनिक जीवन के लिए कितनी आवश्यक है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 102 का लेखक प्रार्थना के महत्व को जानता था। इस भजन के आरंभ में लिखा गया है: "दीन जन की उस समय की प्रार्थना जब वह दुख का मारा अपने शोक की बातें यहोवा के सामेन खोलकर कहता हो।" भजनकार ने लिखा: "हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन; मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे! मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले; अपना कान मेरी ओर लगा; जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले!" (भजन 102:1-2)। अपनी दोहाई देने के बाद भजनकार लिखता है: "क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले;" (भजन 102:19-20)।

   परमेश्वर आपकी चिंता करता है और आपकी प्रार्थना सुनना चाहता है। चाहे आपकी प्रार्थना छोटी हो या आप समय लगाकर अपने हृदय की वेदना उसे बयान करें, प्रतिदिन प्रार्थना में उसके साथ समय अवश्य बिताएं। यह ना केवल आपके लिए लाभकारी और आशीषमय होगा, वरन आपका यह व्यवहार और विश्वास आपके किसी निकट जन या परिवार जन के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बन सकेगा और उसके जीवन को आशीषित करेगा। - ऐने सेटास


प्रार्थना, परमेश्वर की आवश्यकता हमारे जीवनों में होने की स्वीकृति है।

वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता। - भजन 102:17

बाइबल पाठ: भजन 102:1-20
Psalms 102:1 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन; मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे!
Psalms 102:2 मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले; अपना कान मेरी ओर लगा; जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले!
Psalms 102:3 क्योंकि मेरे दिन धुएं की नाईं उड़े जाते हैं, और मेरी हडि्डयां लुकटी के समान जल गई हैं।
Psalms 102:4 मेरा मन झुलसी हुई घास की नाईं सूख गया है; और मैं अपनी रोटी खाना भूल जाता हूं।
Psalms 102:5 कराहते कराहते मेरा चमड़ा हडि्डयों में सट गया है।
Psalms 102:6 मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूं, मैं उजड़े स्थानों के उल्लू के समान बन गया हूं।
Psalms 102:7 मैं पड़ा पड़ा जागता रहता हूं और गौरे के समान हो गया हूं जो छत के ऊपर अकेला बैठता है।
Psalms 102:8 मेरे शत्रु लगातार मेरी नामधराई करते हैं, जो मेरे विराध की धुन में बावले हो रहे हैं, वे मेरा नाम ले कर शपथ खाते हैं।
Psalms 102:9 क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाई और आंसू मिला कर पानी पीता हूं।
Psalms 102:10 यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है, क्योंकि तू ने मुझे उठाया, और फिर फेंक दिया है।
Psalms 102:11 मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है; और मैं आप घास की नाईं सूख चला हूं।
Psalms 102:12 परन्तु हे यहोवा, तू सदैव विराजमान रहेगा; और जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
Psalms 102:13 तू उठ कर सिय्योन पर दया करेगा; क्योंकि उस पर अनुग्रह करने का ठहराया हुआ समय आ पहुंचा है।
Psalms 102:14 क्योंकि तेरे दास उसके पत्थरों को चाहते हैं, और उसकी धूलि पर तरस खाते हैं।
Psalms 102:15 इसलिये अन्यजातियां यहोवा के नाम का भय मानेंगी, और पृथ्वी के सब राजा तेरे प्रताप से डरेंगे।
Psalms 102:16 क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बसाया है, और वह अपनी महिमा के साथ दिखाई देता है;
Psalms 102:17 वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता।
Psalms 102:18 यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी।
Psalms 102:19 क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है,
Psalms 102:20 ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले;

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13 
  • मरकुस 12:1-27


शनिवार, 9 मार्च 2013

आशीषों की कुंजी


   यदि ऐसा कोई प्रश्न है जो सदियों से सारे विश्व में बना हुआ है तो संभवतः वह होगा: "क्या हम पहुँच गए?" अनेक पीढ़ीयों से बच्चों ने यह प्रश्न अपने अभिभावकों से किया है, फिर व्यस्क हो जाने पर अपने बच्चों को इस प्रश्न का उत्तर समझने में सहायता करी है। सभी उस समय की प्रतीक्षा में रहते हैं जब वे अपने लक्ष्य तक पहुँचेंगे - वह चाहे यात्रा हो, चाहे जीवन यात्रा, या फिर किसी कार्य का संपन्न होना।

   जब भी मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा की लिखी पुस्तकों को पढ़ता हूँ तो सोचता हूँ कि कितनी बार मूसा से इसत्राएलियों ने से इसी प्रश्न को पूछा होगा? उन्हें मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाकर ले चलने से पहले मूसा ने इस्त्राएलियों को यह आश्वासन दिया था कि परमेश्वर की योजना है "कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकाल कर एक अच्छे और बड़े देश में जिस में दूध और मधु की धारा बहती हैं" ले जाए (निर्गमन 3:8)। परमेश्वर उन्हें मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर तो ले आया किंतु उस वाचा किए हुए देश में पहुँचने से पहले उन्हें 40 वर्ष तक बियाबान में भटकना पड़ा। यह कोई साधारण भटकना नहीं था, वे मार्ग नहीं भूले थे, वरन इस भटकने के पीछे एक उद्देश्य था। परमेश्वर उन्हें इस वाचा के देश के किनारे तक ले आया था किंतु अपने मन के भय और अपनी अनाज्ञाकारिता के कारण इस्त्राएल ने उस देश में प्रवेश नहीं किया, वरन परमेश्वर के विरुद्ध बोले और वापस मिस्त्र लौटने का प्रयास किया। वे परमेश्वर की आज्ञाकारिता के लिए तैयार नहीं थे। इसत्राएल को 400 वर्ष की मिस्त्र की ग़ुलामी के बाद अपने मन, व्यवहार और विचार परमेश्वर के अनुरूप करने थे। यह कार्य उस ४० वर्ष की यात्रा में हुआ (व्यवस्थाविवरण 8:2, 15-18)। साथ ही, इन 40 वर्षों में उस बलवाई और अनाज्ञाकारी पीढ़ी के लोग जाते रहे (गिनती 32:13)। इस यात्रा के बाद इस्त्राएली सहर्ष और सामर्थ के साथ वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने पाए और आज तक वहाँ बने हुए हैं।

   हमें अपने जीवन काल में कई बार लगता है कि हम ऐसे ही भटक रहे हैं, हमें अपना लक्ष्य सूझ नहीं पड़ता। कई बार हम भी परमेश्वर से पूछते हैं, "क्या हम पहुँच गए?"; "अभी और कितना समय लगेगा?" ऐसे में यह स्मरण रखना लाभकारी रहेगा कि परमेश्वर के उद्देश्यों के लिए केवल लक्ष्य ही नहीं यात्रा भी महत्वपूर्ण है। वह यात्रा के अनुभवों के द्वारा हमें नम्र करता है, हमें तैयार करता है, हमें परखता है और हमारे मनों की दशा हम पर प्रकट करता है। अन्ततः जब हम उस आशीष के लिए तैयार हो जाते हैं तब ही वह उसे हमारे जीवनों में आने देता है।

   परमेश्वर की आज्ञाकारिता में हो जाना और अपने मन, व्यवहार और विचार को परमेश्वर के वचन के अनुरूप करना ही आशीषों को पा लेने की कुंजी है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


केवल गन्तव्य ही नहीं यात्रा भी महत्वपूर्ण है।

और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं। - व्यवस्थाविवरण 8:2

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 8
Deuteronomy 8:1 जो जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं उन सभों पर चलने की चौकसी करना, इसलिये कि तुम जीवित रहो और बढ़ते रहो, और जिस देश के विषय में यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ।
Deuteronomy 8:2 और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं।
Deuteronomy 8:3 उसने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है।
Deuteronomy 8:4 इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्र पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पांव फूले।
Deuteronomy 8:5 फिर अपने मन में यह तो विचार कर, कि जैसा कोई अपने बेटे को ताड़ना देता है वैसे ही तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को ताड़ना देता है।
Deuteronomy 8:6 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चलना, और उसका भय मानते रहना।
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है।
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है।
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा।
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा।
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे;
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे,
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए,
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है,
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला,
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे।
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई।
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।
Deuteronomy 8:19 यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर दूसरे देवताओं के पीछे हो लेगा, और उसकी उपासना और उन को दण्डवत करेगा, तो मैं आज तुम को चिता देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे।
Deuteronomy 8:20 जिन जातियों को यहोवा तुम्हारे सम्मुख से नष्ट करने पर है, उन्ही की नाईं तुम भी अपने परमेश्वर यहोवा का वचन न मानने के कारण नष्ट हो जाओगे।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 8-10 
  • मरकुस 11:19-33


शुक्रवार, 8 मार्च 2013

छोटी बात


   हज़ारों की भीड़ प्रभु यीशु के पास आई हुई थी। प्रभु उन्हें परमेश्वर के राज्य के बारे में भी बता रहे थे और उनके बीमारों को चंगा भी कर रहे थे। फिर प्रभु ने अपने चेलों से कहा कि उस भीड़ के लिए भोजन का प्रबन्ध करें। चेले अवाक रह गए - किसी भी गाँव या नगर से दूर इस एकांत स्थल पर एकदम से हज़ारों के लिए भोजन कहाँ से उपलब्ध हो सकेगा! लेकिन चेलों को यह आज्ञा देने में प्रभु का कुछ प्रयोजन था, वह उन्हें परख रहा था, और वह यह भी जानता था कि वह क्या करने जा रहा है (यूहन्ना 6:6)। एक चेले ने हिसाब लगाया कि थोड़े से भोजन का प्रबन्ध करने के लिए भी कितना खर्च आएगा, तो दूसरे ने कहा: "यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछिलयां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?" (यूहन्ना 6:7, 9)। लेकिन प्रभु यीशु के हाथों में वे पाँच रोटी और दो मछली हज़ारों की भीड़ को तृप्त करने और उसके बाद बच्चे हुए भोजन से बारह टोकरियां भरने के लिए पर्याप्त थीं।

   यदि आप सोचते हैं कि मेरे पास तो प्रभु को देने और उसके उपयोग के लायक कुछ भी नहीं है, तो थोड़ा विचार इस घटनाक्रम पर भी कीजिए: एडवर्ड किम्बल नामक एक सन्डे स्कूल शिक्षक के मन में आया कि वह अपनी सन्डे स्कूल कक्षा के एक युवक से मिले और निश्चित करे कि वह युवक मसीही विश्वास में है या नहीं। वह उससे जाकर मिला और उस दिन वह उस युवक को, जिसका नाम था डी. एल. मूडी, मसीही विश्वास में लाने पाया। मूडी आगे चलकर १९वीं सदी का सुप्रसिद्ध और अति प्रभावकारी मसीही प्रचारक बना। मूडी के जीवन और प्रचार से एक अन्य जाना माना मसीही प्रचारक विल्बर चैपमैन बहुत प्रभावित हुआ। चैपमैन ने अपनी सहायता के लिए बिली सण्डे को अपने साथ प्रचार में लगाया, और आगे चलकर बिली सण्डे भी एक विख्यात प्रचारक बन गया। बिली सण्डे के प्रचार के प्रभाव से एक शहर में मसीही सेवकाई की एक संस्था आरंभ हुई, और उस संस्था ने एक समय पर एक अन्य मसीही प्रचारक मोर्देकई हैम को प्रचार के लिए एक मसीही जागृति सभा में बुलाया। उस सभा में बिली ग्रैहम नामक एक व्यक्ति ने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया और वह आगे चलकर हमारे वर्तमान समय का सबसे विख्यात और श्रेष्ठ अन्तर्राष्ट्रीय मसीही प्रचारक बना जिसके प्रचार तथा लिखी पुस्तकों के द्वारा सारे विश्व में अनगिनित लोग मसीही विश्वास में आने पाए तथा आ रहे हैं।

   यदि आपको लगे कि आप कुछ विशेष करने में असमर्थ हैं तो उन पाँच रोटी और दो मछली तथा सन्डे स्कूल शिक्षक एडवर्ड किम्बल को स्मरण करें जिसने बस एक दोपहर का समय अपनी कक्षा के एक विद्यार्थी के साथ बिताया। किम्बल को ज़रा भी अन्देशा नहीं होगा कि 19वीं सदी की उस दोपहर का कार्य कुछ ही समय में परमेश्वर की सेवकाई के लिए कैसा प्रभाव लाने लगेगा, और उस प्रभाव से उत्पन्न लहरें २०वीं सदी में जाकर संसार भर में इस सेवकाई के लिए और कितना प्रभाव लाएंगी।

   प्रभु यीशु के हाथ में हर छोटी सी बात भी महान आश्चर्यकर्मों और अनेकों लोगों के जीवनों में सामर्थी कार्यों का माध्यम बन जाती है। हमारा परमेश्वर उसे समर्पित विश्वासयोग्यता के जीवन के छोटे छोटे बीजों से विशाल वृक्ष उगा देता है जो असंख्य लोगों के जीवनों को प्रभावित और आनन्दित कर देते हैं, अनन्तकाल के लिए सुखमय बना देते हैं। अपनी ओर ना देखें, वरन साधारण विश्वास के साथ निःसंकोच अपना हाथ उसके हाथ में दे दें; उसे आपकी योग्यता की नहीं आपके विश्वास की आवश्यकता है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर हमारी छोटी बातों को अपने बड़े उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग करता है।

क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है? - ज़कर्याह 4:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:1-14
John 6:1 इन बातों के बाद यीशु गलील की झील अर्थात तिबिरियास की झील के पास गया।
John 6:2 और एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली क्योंकि जो आश्चर्य कर्म वह बीमारों पर दिखाता था वे उन को देखते थे।
John 6:3 तब यीशु पहाड़ पर चढ़कर अपने चेलों के साथ वहां बैठा।
John 6:4 और यहूदियों के फसह के पर्व निकट था।
John 6:5 तब यीशु ने अपनी आंखे उठा कर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलेप्पुस से कहा, कि हम इन के भोजन के लिये कहां से रोटी मोल लाएं?
John 6:6 परन्तु उसने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्योंकि वह आप जानता था कि मैं क्या करूंगा।
John 6:7 फिलेप्पुस ने उसको उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए।
John 6:8 उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा।
John 6:9 यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछिलयां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?
John 6:10 यीशु ने कहा, कि लोगों को बैठा दो। उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पांच हजार के थे, बैठ गए:
John 6:11 तब यीशु ने रोटियां लीं, और धन्यवाद कर के बैठने वालों को बांट दी: और वैसे ही मछिलयों में से जितनी वे चाहते थे बांट दिया।
John 6:12 जब वे खाकर तृप्‍त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए।
John 6:13 सो उन्होंने बटोरा, और जव की पांच रोटियों के टुकड़े जो खाने वालों से बच रहे थे उन की बारह टोकिरयां भरीं।
John 6:14 तब जो आश्चर्य कर्म उसने कर दिखाया उसे वे लोग देखकर कहने लगे; कि वह भविष्यद्वक्ता जो जगत में आनेवाला था निश्‍चय यही है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7 
  • मरकुस 11:1-18


गुरुवार, 7 मार्च 2013

ध्यान


   मैं पिछली गर्मियों में निकट की एक छोटी नदी में मछली पकड़ रहा था, मेरा ध्यान पास में ही आई हुई मछली पर था। एक हलकी सी हलचल के कारण मैंने आस-पास देखा और पाया कि मेरा एक जानकार और राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मछलीमार प्रशिक्षक डेव टकर पास ही में खड़ा था। उसे देख कर मैं एकदम मछली पकड़ने के अपने प्रयास के प्रति सचेत हो गया और इसी हड़बड़ी में मछली पकड़ने की डोर ठीक से नहीं फेंक सका तथा मेरे पास आई वह मछली बच कर निकल गई। जब हम अपना ध्यान कार्य की बजाए अन्य बातों या अपने ही ऊपर लगाने लगते हैं तो वह कुछ नुकसान ही करता है।

   डब्ल्यु. एच. औडेन ने एक छोटी कविता लिखी है, उन लोगों के विषय में जो आपने अपने कार्य में खो जाते हैं - उस कविता में वे कहते हैं कि चाहे खाना पका रहा रसोइया हो या ऑपरेशन कर रहा सर्जन अथवा लदान का पर्चा बनाने वाला कोई क्लर्क, जब वे अपने कार्य में रत होते हैं तो सभी के चेहरे पर एक सा ही भाव होता है जो उनका उनके कार्य में खोए हुए होने को दिखाता है। यह ध्यान लगाना केवल कार्य के लिए ही नहीं वरन परस्पर संबंधों के लिए भी अति आवश्यक है। जब हम किसी मित्र से या रिश्तेदार से या अन्य किसी ऐसे जन से जो हमारी सहायता लेने आया हो संवाद में हों तो उसकी बात को ध्यान लगाकर सुनना अच्छे संबंधों के लिए अति आवश्यक है। उसके बोलते समय यदि हमारा ध्यान और कहीं होगा तो वह शीघ्र ही समझ जाएगा कि हमारी दिलचस्पी उसमें नहीं है और यह संबंधों में दूरी लाएगा।

   हमारा परमेश्वर भी हमें यही सिखाता है, क्योंकि वह ध्यान लगाकर हमारी हर बात सुनता है: "तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धर कर उनकी सुनता था; और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके साम्हने एक पुस्तक लिखी जाती थी" (मलाकी 3:16)। वह सारी सृष्टि का ध्यान रखता है और उसे हर पल संचालित करता रहता है, तौ भी उसका ध्यान हमारी ओर से कभी नहीं हटता। 

   कैसी अजीब बात है कि समस्त सृष्टि के संचालक के पास अपने प्रत्येक संतान की बात ध्यान से सुनने का समय है किंतु संसार और संसार की बातों में अपनी व्यस्तता की दुहाई देकर हमारे पास कितनी ही दफा उस महान प्रेमी सृष्टिकर्ता परमेश्वर की बात ध्यान से सुनने का समय नहीं होता। हम उसके वचन के अध्ययन के समय और उससे प्रार्थना में वार्तालाप करने के समय के महत्व को नहीं समझते और इन्हें एक औपचारिकता मात्र मानकर व्यर्थ कर देते हैं। जब प्रभु यीशु मार्था और मरियम के घर आया तो मरियम सब कुछ छोड़कर उसके चरणों पर बैठकर उससे सीखने लगी और प्रभु यीशु ने इस बात के लिए मरियम की सराहना करी: "परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:42)।

   ध्यान से सुनिए, मनुष्यों की भी और परमेश्वर की भी; यह आपके लिए सदैव हितकारी ही होगा।


ध्यान से सुनना प्रेम की अच्छी निशानी है।

...इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। - याकूब 1:19

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4 
  • मरकुस 10:32-52

बुधवार, 6 मार्च 2013

चित्र-पटल


   जब मैं छोटा था तो हमारे बाइबल शिक्षक बाइबल की कहानियों को दर्शाने के लिए एक "फ्लैनेल बोर्ड" का प्रयोग करते थे। यह स्कूलों में प्रयोग होने वाले लकड़ी के बने श्यामपट के समान ही होता था, बस इस पटल पर फ्लैनल का कपड़ा चढ़ा होता था, जिस पर बाइबल पात्रों के गत्ते या काग़ज़ से बने चित्र, जिनके पीछे भी फ्लैनल लगा होता था, लगा दिए जाते थे। जहाँ लगाए जाते, वहाँ वे चित्र ’चिपके’ रहते और सरलता से हटाए भी जा सकते थे। इस माध्यम से हमारे शिक्षक हमारे लिए उन कहानियों को सजीव कर देते थे। इस आधुनिक और टैकनौलोजी के युग में भी कई शिक्षक अभी भी "फ्लैनेल बोर्ड" का प्रयोग करते हैं।

   केवल वे प्राचीन "फ्लैनेल बोर्ड" ही आज भी सजीव शिक्षा देने का माध्यम नहीं हैं। परमेश्वर ने आदि काल से अपने बारे में शिक्षा देने के लिए एक और माध्यम का प्रयोग किया है, जो अब तक उतना ही कारगर है - उसकी सृष्टि। सृष्टि की अद्भुत बातों द्वारा परमेश्वर अपने बारे में बताता आया है और बता रहा है। परमेश्वर की सृष्टि उसका चित्र-पटल है जिस पर वह अपने बारे में बताता आया है और आज भी बता रहा है।

   दाऊद ने भजन 19:1 में लिखा "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।" सृष्टि में परमेश्वर ने अपने आप को इतनी स्पष्टता से प्रगट किया है कि प्रेरित पौलुस ने लिखा: "इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला" (रोमियों 1:19-23)।

   परमेश्वर की सृष्टि में हम उसके अविनाशी स्वरूप को, उसकी पवित्रता और उसके गुणों को, उसके व्यवस्थित और योजनाबद्ध रीति से कार्य करने को, उसकी सामर्थ और उसकी महिमा को, प्रत्येक बात पर उसके नियंत्रण आदि को देखते हैं। सृष्टि हमें परमेश्वर की उपासना के लिए प्रेरित करती है, और हम भजनकार के साथ कह सकते हैं: "हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है" (भजन 8:1)। - बिल क्राउडर


परमेश्वर ने अपनी सृष्टि में होकर अपने गुणों और चरित्र को प्रगट किया है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है;
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं।
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर।
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2 
  • मरकुस 10:1-31