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शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

स्वतंत्रता


   आज अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है, और अपने चीनी मित्रों के कौशल और चतुराई के द्वारा हम अमेरीकी लोग इसे रंगीन आतिश्बाज़ी के व्यापक तथा विशाल प्रदर्शन के साथ मनाते हैं। प्रति वर्ष जब मैं अपने राष्ट्रीय गान के गाए जाने और आकाश में बारूद के धमाकों द्वारा आकर्षक रंगीन नमूनों के बनाए जाने को देखती हूँ तो मुझे स्मरण हो आता है कि साधारण्तया बारूद के बम इस आतिशबाज़ी के समान रंगीन एवं आकर्षक नहीं वरन घातक होते हैं, उनके परिणाम ऐसे आनन्दमय नहीं वरन दुखदायी होते हैं।

   यद्यपि आतिश्बाज़ी और घातक बम बनाने के लिए एक ही पदार्थ का प्रयोग होता है, एक उत्पाद का उद्देश्य मनोरंजन करना होता है तो दूसरे का घायल करना या जान लेना। यहाँ हम देखते हैं कि कैसे एक ही पदार्थ भले और बुरे दोनों ही कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। योग्य, सावधानी रखने वाले तथा दूसरों की भलाई का ध्यान रखने वालों के हाथों में वही खतरनाक वस्तु आनन्दायक एवं मनोरंजक बन जाती है। लेकिन इसका विपरीत भी इतना ही सत्य है।

   कुछ यही बात स्वतंत्रता के साथ भी लागू होती है; स्वतंत्रता को भी भलाई और बुराई दोनों ही के लिए प्रयोग किया जा सकता है। हम मसीही विश्वासियों को मूसा में होकर मिली व्यवस्था के नियमों के पालन की अनिवार्यता से स्वतंत्रता तो है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सचेत भी करता है कि हम अपनी इस आत्मिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए नहीं करें: "हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो" (गलतियों 5:13)।

   संभव है कि हम सबके पास हम अमरीकीयों के समान राजनैतिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता नहीं हो, लेकिन संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास, वह चाहे जिस भी स्थान पर रह रहा हो, आत्मिक स्वतंत्रता अवश्य है। इस आत्मिक स्वतंत्रता का उपयोग हमें अपनी इच्छा या विचारों को दूसरों पर थोपने के लिए नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा और विचारों को दूसरों तक पहुँचाने के लिए करना है जिससे सब मसीह यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाली स्वतंत्रता को जान सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि हम अपनी मनमानी करें; वरन यह कि हम परमेश्वर की इच्छा पूरी करें, उसे प्रसन्न करें।

और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। - 1 पतरस 2:16

बाइबल पाठ: गलतियों 5:1-14
Galatians 5:1 मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।
Galatians 5:2 देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्हें कुछ लाभ न होगा।
Galatians 5:3 फिर भी मैं हर एक खतना कराने वाले को जताए देता हूं, कि उसे सारी व्यवस्था माननी पड़ेगी। 
Galatians 5:4 तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो। 
Galatians 5:5 क्योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं। 
Galatians 5:6 और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्तु केवल, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। 
Galatians 5:7 तुम तो भली भांति दौड़ रहे थे, अब किस ने तुम्हें रोक दिया, कि सत्य को न मानो। 
Galatians 5:8 ऐसी सीख तुम्हारे बुलाने वाले की ओर से नहीं। 
Galatians 5:9 थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीर कर डालता है। 
Galatians 5:10 मैं प्रभु पर तुम्हारे विषय में भरोसा रखता हूं, कि तुम्हारा कोई दूसरा विचार न होगा; परन्तु जो तुम्हें घबरा देता है, वह कोई क्यों न हो दण्‍ड पाएगा। 
Galatians 5:11 परन्तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो क्यों अब तक सताया जाता हूं; फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही। 
Galatians 5:12 भला होता, कि जो तुम्हें डांवाडोल करते हैं, वे काट डाले जाते! 
Galatians 5:13 हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। 
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-123


गुरुवार, 3 जुलाई 2014

प्रार्थना


   कुछ समय पहले की बात है, मेरे एक मित्र का ऑपरेशन होना था; अपनी कमर और एड़ी की दशा के कारण वह बहुत पीड़ा में था। मैंने उसे आश्वस्त किया कि मैं उसके इलाज और स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करूँगा। प्रार्थना तो मैंने करी, लेकिन साथ ही मुझे लगा कि उसके लिए अच्छा होगा यदि मैं उसे प्रोत्साहित करने के लिए कुछ लिखित में भी दे सकूँ; इसलिए मैंने जो प्रार्थना उसके लिए करी, वही उसे ई-मेल के द्वारा भी भेज दी। 

   मैंने लिखा:
   "आज मैंने तुम्हारे लिए यह प्रार्थना करी: जीवित परमेश्वर, हमारे जीवन की हर घटना पर आपके प्रभुत्व के लिए मैं आपका धन्यवादी हूँ। आपके प्रीय सेवक के लिए मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप उसे गहरी शांति प्रदान करें। मैं उसका इलाज कर रहे चिकित्सकों के लिए भी प्रार्थना करता हूँ कि जब वे अपना चिकित्सीय कौशल उस पर उपयोग करें तो आप उन्हें सर्वोत्तम परिणाम प्रदान करें। होने दें कि आपका चंगाई देने वाला हाथ उसे स्पर्श करे, स्वस्थ करे और वह पुनः आपकी सेवकाई में लौट सके। प्रभु यीशु के नाम में, आमीन।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रेरित पौलुस ने भी अन्य मसीही विश्वासियों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी पत्रियों में उन्हें उनके लिए करी गई अपनी प्रार्थनाएं लिखीं (फिलिप्पियों 1:9-11; कुलुस्सियों 1:9-12; 2 थिस्सुलुनीकियों 1:11-12)। पौलुस ने इफुसुस की मण्डली को लिखा: "[मैं] तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे" (इफिसियों 1:16-17)।

   क्या आपके ऐसे मित्र या परिवार जन हैं जिन्हें प्रोत्साहन तथा आपकी प्रार्थनाओं की आवश्यकता है? उन्हें यह बताने के साथ ही कि आप उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं, कुछ लिखित प्रार्थनाएं भी उन्हें भेज कर देखें। - डेनिस फिशर


दूसरों के लिए प्रार्थना करना मसीही विश्वासियों का सौभाग्य भी है तथा ज़िम्मेदारी भी।

परमेश्वर जिस की सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूं, वही मेरा गवाह है; कि मैं तुम्हें किस प्रकार लगातार स्मरण करता रहता हूं। - रोमियों 1:9 

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:15-23
Ephesians 1:15 इस कारण, मैं भी उस विश्वास का समाचार सुनकर जो तुम लोगों में प्रभु यीशु पर है और सब पवित्र लोगों पर प्रगट है। 
Ephesians 1:16 तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। 
Ephesians 1:17 कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे। 
Ephesians 1:18 और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। 
Ephesians 1:19 और उस की सामर्थ हमारी ओर जो विश्वास करते हैं, कितनी महान है, उस की शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार। 
Ephesians 1:20 जो उसने मसीह के विषय में किया, कि उसको मरे हुओं में से जिलाकर स्‍वर्गीय स्थानों में अपनी दाहिनी ओर। 
Ephesians 1:21 सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आने वाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया। 
Ephesians 1:22 और सब कुछ उसके पांवों तले कर दिया: और उसे सब वस्‍तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया। 
Ephesians 1:23 यह उसकी देह है, और उसी की परिपूर्णता है, जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119


बुधवार, 2 जुलाई 2014

नया दिन


   हाल ही में एक प्रातः कालीन सभा में, सभा के संचालक ने इस प्रार्थना के साथ सभा का आरंभ किया: "प्रभु आज के लिए हम आपका धन्यवाद करते हैं। यह एक नए दिन का आरंभ है जो हमने पहले कभी नहीं देखा है।" हालाँकि यह बात बिलकुल प्रकट है, फिर भी इस प्रार्थना ने मेरे मन में कुछ विचार जगाए:

   पहली बात, क्योंकि प्रत्येक दिन एक नया अवसर है, वह ऐसी बातों से भरा होगा जिनके बारे में हम ना तो जानते हैं और ना ही जिनके लिए कोई तैयारी कर के रख सकते हैं। इसलिए यह अनिवार्य है कि हम अपनी सीमाओं को पहचानें और दिन का योग्य रीति से उपयोग करने के लिए स्वेच्छापूर्वक परमेश्वर पर ही पूर्णतया निर्भर रहें, उस दिन को अपनी इच्छाओं या योग्यताओं पर नहीं वरन परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ पर भरोसा रखते हुए व्यतीत करें।

   दूसरी बात जो मेरे ध्यान में आई, हर एक नया दिन हमें प्रदान किया गया एक अनमोल उपहार है जिसके लिए हमें आनन्दित रहना चाहिए। संभवतः इसी विचार के अन्तर्गत भजनकार ने लिखा: "आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इस में मगन और आनन्दित हों" (भजन 118:24)।

   अवश्य है कि हम हर दिन में अनेक अनजानी बातों का सामना करते हैं, जिनमें कई बहुत कठिन भी हो सकती हैं। लेकिन हर नए दिन का खज़ाना इतना बहुमूल्य है कि मूसा ने इस विषय पर लिखा: "हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं" (भजन 90:12)।

   क्योंकि हर नया दिन हमें परमेश्वर की ओर से मिला अनमोल उपहार है; इसलिए हम प्रत्येक दिन को धन्यवादी होकर स्वीकार करें, नम्रता के साथ परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए उसका उपयोग करें तथा उससे आनन्दित हों। - बिल क्राउडर


हर नया दिन हमें परमेश्वर का धन्यवाद करने के अवसर प्रदान करता है।

फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: भजन 118:19-29
Psalms 118:19 मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश कर के याह का धन्यवाद करूंगा।
Psalms 118:20 यहोवा का द्वार यही है, इस से धर्मी प्रवेश करने पाएंगे।
Psalms 118:21 हे यहोवा मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है और मेरा उद्धार ठहर गया है। 
Psalms 118:22 राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है। 
Psalms 118:23 यह तो यहोवा की ओर से हुआ है, यह हमारी दृष्टि में अद्भुत है। 
Psalms 118:24 आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इस में मगन और आनन्दित हों। 
Psalms 118:25 हे यहोवा, बिनती सुन, उद्धार कर! हे यहोवा, बिनती सुन, सफलता दे! 
Psalms 118:26 धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है! हम ने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है। 
Psalms 118:27 यहोवा ईश्वर है, और उसने हम को प्रकाश दिया है। यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों बान्धो! 
Psalms 118:28 हे यहोवा, तू मेरा ईश्वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूंगा; तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझ को सराहूंगा।
Psalms 118:29 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा बनी रहेगी!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 115-118


मंगलवार, 1 जुलाई 2014

भेंट


   मेरे पूर्व पास्टर, एड डॉबसन, अकसर कहा करते थे कि उन्हें चर्च में धन दान करने के विषय में प्रचार करना पसन्द नहीं है। उनकी पिछली नौकरी सेवा कार्यों के लिए धन एकत्रित करने की थी इसलिए उन्हें अब किसी पर दबाव डालकर उनसे भेंट निकलवाना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन जब वे परमेश्वर के वचन बाइबल से शिक्षा देते हुए प्रेरित पौलुस द्वारा कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी दूसरी पत्री के 8 और 9 अध्याय पर पहुँचे तो वे सेवा कार्यों के लिए धन भेंट देने के विषय पर प्रवचन देने से और बच नहीं सके।

   तब जो प्रवचन उन्होंने दिया उस में जो उदाहरण उन्होंने प्रस्तुत किया मैं उसे कभी भूल नहीं पाई हूँ; उन्होंने वह थाली जिसमें चर्च के लोग भेंट डालते थे फर्श पर रखी और स्वयं उस थाली में खड़े हो गए और चर्च के लोगों को सर्वप्रथम अपने आप को परमेश्वर को अर्पित करने तत्पश्चात अपने धन में से परमेश्वर के लिए भेंट देने के महत्व को समझाया।

   2 कुरिन्थियों के वे दोनों अध्याय हमारे समक्ष कई आचरण और कार्य रखते हैं जिन्हें परमेश्वर के कार्यों के लिए भेंट अर्पित करते समय हम मसीही विश्वासियों के जीवन में विद्यमान होना चाहिए:
  • सर्वप्रथम अपने आप को परमेश्वर को अर्पित करें (8:5)
  • प्रभु यीशु के उदाहरण को स्मरण रखते हुए भेंट दें (8:9)
  • अपनी आय और साधनों के अनुसार भेंट दें (8:11-12)
  • परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम के प्रमाण को ध्यान रखते हुए उत्साहपूर्वक भेंट दें (9:2)
  • किसी बाहरी दबाव में आकर अथवा अनिच्छापूर्वक कुड़कुड़ाते हुए नहीं वरन उदारता से भेंट दें (9:5-7)

   अगली बार जब परमेश्वर के कार्य के लिए या चर्च में भेंट अर्पित करने का अवसर आए, तो कलपना करें कि आप स्वयं वहाँ परमेश्वर को अर्पित भेंट के रूप में खड़े हैं; इससे आपको परमेश्वर के लिए भेंट अर्पित करने के अनुग्रह में बढ़ने में प्रोत्साहन मिलेगा। - ऐनी सेटास


जब हम अपने आप को संपूर्ण रूप से परमेश्वर को अर्पित कर देते हैं, फिर उसके बाद अन्य सभी भेंट अर्पण करने सरल हो जाते हैं।

परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - 2 कुरिन्थियों 9:6-7

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 8:1-9
2 Corinthians 8:1 अब हे भाइयों, हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है। 
2 Corinthians 8:2 कि क्‍लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनन्द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई। 
2 Corinthians 8:3 और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ भर वरन सामर्थ से भी बाहर मन से दिया। 
2 Corinthians 8:4 और इस दान में और पवित्र लोगों की सेवा में भागी होने के अनुग्रह के विषय में हम से बार बार बहुत बिनती की। 
2 Corinthians 8:5 और जैसी हम ने आशा की थी, वैसी ही नहीं, वरन उन्होंने प्रभु को, फिर परमेश्वर की इच्छा से हम को भी अपने तईं दे दिया। 
2 Corinthians 8:6 इसलिये हम ने तितुस को समझाया, कि जैसा उसने पहिले आरम्भ किया था, वैसा ही तुम्हारे बीच में इस दान के काम को पूरा भी कर ले। 
2 Corinthians 8:7 सो जैसे हर बात में अर्थात विश्वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्‍न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ। 
2 Corinthians 8:8 मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं, परन्तु औरों के उत्‍साह से तुम्हारे प्रेम की सच्चाई को परखने के लिये कहता हूं। 
2 Corinthians 8:9 तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी हो कर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 112-114


सोमवार, 30 जून 2014

अज्ञानता


   कुछ लोग डॉक्टर के पास जाना इसलिए पसन्द नहीं करते क्योंकि वे यह जानना नहीं चाहते कि उनके अन्दर कोई रोग हो सकता है। कुछ लोग इसी कारण चर्च भी जाना पसन्द नहीं करते क्योंकि वे जानना नहीं चाहते कि उनकी आत्मिक स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन जैसे हमारे शरीर की दशा के प्रति हमारी अज्ञानता हमें स्वस्थ नहीं ठहरा देती, वैसे ही हमारा हमारे पाप के प्रति अज्ञान होना हमें बेगुनाह या बेकसूर नहीं ठहरा देता।

   एक धारणा है कि रोमी कानून इस विचार का स्त्रोत है कि नियमों के प्रति अज्ञान होने से हम उनके उल्लंघन के परिणामों से बच नहीं सकते। लेकिन वास्तव में यह विचार रोमी साम्रज्य और कानून से भी बहुत पुरातन है; यह परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग है। जब हज़ारों वर्ष पहले परमेश्वर ने इस्त्राएल को अपने नियम और व्यवस्था दी थी, तब उसने उनमें यह स्थापित कर दिया था कि अनजाने में किए गए पापों के लिए भी वैसे ही प्रायश्चित की आवश्यकता है, जैसे कि जान-बूझ कर किए गए पापों के लिए (लैव्यवस्था 4; यहेजकेल 45:18-20)।

   रोम में रहने वाले मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने इस अज्ञानता और नासमझी को संबोधित किया है। जब लोग परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान हो गए तब उन्होंने अपनी धार्मिकता गढ़ ली (रोमियों 10:3)। जब हम अपनी ही गढ़ी हुई धार्मिकता के माप के अनुसार जीवन व्यतीत करते हैं तो हम अपने आप को लेकर अच्छा अनुभव कर सकते हैं। वस्तुस्थिति तो तब सामने आती है जब हम परमेश्वर की धार्मिकता के माप अर्थात प्रभु यीशु मसीह के समक्ष अपने आप को खड़ा करके देखते हैं - हमारी आत्मिक स्थिति का वास्तविक आँकलन तो तब ही होता है।

   कोई मनुष्य अपने किसी भी प्रयास द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता के माप पर खरा नहीं उतर सकता, लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद हो कि किसी मनुष्य को ऐसा करने की कोई आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि परमेश्वर अपनी धार्मिकता सभी मनुष्यों के साथ सेंत-मेंत बाँटने को तैयार है (रोमियों 5:21); वह हमें हमारे पापों की दशा में ही स्वीकार करके, स्वयं ही हमें पाप की सब मलिनता से शुद्ध और पवित्र करना चाहता है (1 यूहन्ना 1:9)।

   हमें हमारी आत्मिक दशा के प्रति अज्ञानी बने रहने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह महान परमेश्वर जो हमारी वस्तुस्थिति को भली भाँति जानता है, स्वयं ही हमें धर्मी ठहराने को तैयार है, यदि हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर उससे अपने पापों की क्षमा मांग लें और अपना जीवन उसे समर्पित कर दें, क्योंकि जो पाप क्षमा नहीं होंगे, उसे उनका न्याय करना होगा (प्रेरितों 17:30-31)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर ही हमारी आत्मिक दशा को मापने वाला तथा उसे ठीक करने वाला है।

इसलिये परमेश्वर अज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है। - प्रेरितों 17:30-31

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-21
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 
Romans 5:20 और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ। 
Romans 5:21 कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 109-111


रविवार, 29 जून 2014

सहायता


   जब चिली में एक गहरी खदान में 33 खनिक धरती की सतह के बहुत नीचे हुए हादसे में फंस गए, तब मेरे विचार से उन्हें लगा होगा कि अब उनके लिए बस एक धीमी और दर्दनाक मृत्यु ही बची है। फिर, यह भी सोचिए कि जब उन तक ऊपर सतह से सन्देश पहुँचा कि उनकी स्थिति का पता लोगों को है और एक बचाव दल उनको बाहर निकालने के लिए दिन-रात कार्यरत है तो उन्हें कितनी खुशी हुई होगी।

   हम सबके जीवन में कभी ना कभी ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि हम एक बहुत बुरी परिस्थिति या स्थान में फंस गए हैं। ऐसे में हमें लगता है कि कोई हमारी हालत को नहीं जानता या समझता, हम चिंतित और अकेला अनुभव करते हैं और हमें बाहर निकल पाने का कोई साधन या वैकलपिक मार्ग सूझ नहीं पड़ता। लेकिन ऐसे अवसरों पर भी हमें परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और आरंभिक मसीही विश्वासियों को उसके द्वारा कहे गए आश्वासन के वचनों को स्मरण रखना चाहिए। वे मसीही विश्वासी ऐसे स्थान में पंसे हुए थे जहाँ शैतान की उपस्थिति और दबदबा चारों ओर महसूस होता था; और उन्हें परमेश्वर ने आश्वस्त किया, "मैं जानता हूँ कि तू वहाँ रहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:13)। उस प्रेमी स्वर्गीय पिता से उनकी स्थिति छिपी नहीं थी, वह उनके हालात से अनभिज्ञ नहीं था। जैसे वे अपने परमेश्वर के प्रति वफादार रहे थे, परमेश्वर भी उनकी देखभाल कर रहा था, उन्हें उस परिस्थिति से सुरक्षित निकालकर लाने में लगा था (पद 17)।

   हम मसीही विश्वसियों के लिए यह एक बड़ी सांत्वना और सामर्थ की बात है कि हमारा परमेश्वर पिता हर पल और हर क्षण यह भली-भाँति जानता है कि हम कहाँ हैं और किस परिस्थिति में हैं, और उन हालात के अनुसार हमें संभाले रहने और उनसे सुरक्षित निकाल लाने के उपाय भी करता रहता है। इसलिए परिस्थिति चाहे कैसी भी क्यों ना हो, परमेश्वर मे निश्चिंत रहें क्योंकि सहायता आने को है। - जो स्टोवैल


इस पृथ्वी पर हमारी सबसे बड़ी आशा यही है कि स्वर्ग से परमेश्वर की सहायता हमारे लिए सदैव उपलब्ध है।

तौभी परमेश्वर की पड़ी नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। - 2 तिमुथियुस 2:19

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:12-17
Revelation 2:12 और पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जिस के पास दोधारी और चोखी तलवार है, वह यह कहता है, कि। 
Revelation 2:13 मैं यह तो जानता हूं, कि तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्थिर रहता है; और मुझ पर विश्वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिन में मेरा विश्वासयोग्य साक्षी अन्‍तिपास, तुम में उस स्थान पर घात किया गया जहां शैतान रहता है। 
Revelation 2:14 पर मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्योंकि तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जिसने बालाक को इस्त्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूरतों के बलिदान खाएं, और व्यभिचार करें। 
Revelation 2:15 वैसे ही तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं। 
Revelation 2:16 सो मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उन के साथ लडूंगा। 
Revelation 2:17 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है; जो जय पाए, उसको मैं गुप्‍त मन्ना में से दूंगा, और उसे एक श्वेत पत्थर भी दूंगा; और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पाने वाले के सिवाय और कोई न जानेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 106-108


शनिवार, 28 जून 2014

आराधना


   जेम्स फेनिमोर कूपर द्वारा लिखित उपन्यास The Last of the Mohicans में एक पात्र है डेविड गैमुट। गैमुट एक सच्चा मसीही भक्त है जिसका शौक है परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता नामक पुस्तक में दिए गए भजनों को संगीतबद्ध करना और उन्हें गाते रहना चाहे जीवन कैसी भी परिस्थितियों से होकर क्यों ना निकल रहा हो। गैमुट का मानना है कि परमेश्वर पर हर स्थिति में भरोसा किया जा सकता है, संकट के समयों में भी और अच्छे दिनों में भी। उसके जीवन का उद्देश्य है हर समय और हर बात में परमेश्वर की आराधना करते रहना, इस सृष्टि पर परमेश्वर की सार्वभौमिकता, अधिकार और नियंत्रण के लिए उसकी महिमा एवं प्रशंसा करते रहना।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें एक और डेविड, जिसे दाऊद भी कहते हैं, मिलता है। यह व्यक्ति दाऊद, उस उपन्यास के पात्र गैमुट के समान कोई काल्पनिक व्यक्ति नहीं वरन एक जीवता एवं वास्तविक मनुष्य था। दाऊद ने भी जीवन की अनेक अनिश्चितताओं को झेला था और उसे भी इन सभी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर की आराधना-स्तुति करना अच्छा लगता था। दाऊद ने अपने गोफन के एक ही वार से पलिश्ती दैत्य गोलियत को मरते हुए देखा; राजा शाऊल को पहले अपना प्रशंसक फिर शक एवं द्वेश में आकर अपना दुश्मन होते भी देखा और शाऊल से जान बचाते रहने को उसे कई वर्ष तक एक से दूसरे स्थान भागते भी रहना पड़ा; दाऊद ने इस्त्राएल के लोगों उसकी ओर फिरकर उसे इस्त्राएल का राजा बनाते भी देखा। लेकिन इन सभी परिस्थितियों में दाऊद ने समय निकाल कर परमेश्वर की आराधना और स्तुति के लिए भजन लिखे भी और उन्हें गाया भी। दाऊद भली भांति जानता और समझता था कि हम हर परिस्थिति में परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं उसके नियंत्रण तथा देखभाल के लिए क्योंकि परमेश्वर ही सब बातों पर अधिपति है। इसीलिए अपने एक भजन में दाऊद ने लिखा, "यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है" (भजन 103:19)।

   आज आप किस अनुभव से होकर निकल रहे हैं - किसी परीक्षा के या आशीष के? आपकी परिस्थिति कोई भी हो राजा दाऊद और डेविड गैमुट के उदाहरणों को स्मरण रखें, और हर बात के लिए परमेश्वर के धन्यवादी हों, उसकी आराधना करें, उस पर भरोसा रखें क्योंकि वह अपने बच्चों के लिए जो करेगा, भला ही करेगा। - डेनिस फिशर


हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! - भजन 103:1

यह आज्ञा पहरूओं के निर्णय से, और यह बात पवित्र लोगों के वचन से निकली, कि जो जीवित हैं वे जान लें कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है, और उसको जिसे चाहे उसे दे देता है, और वह छोटे से छोटे मनुष्य को भी उस पर नियुक्त कर देता है। - दानिय्येल 4:17

बाइबल पाठ: भजन 103:15-22
Psalms 103:15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है, 
Psalms 103:16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है। 
Psalms 103:17 परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है, 
Psalms 103:18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण कर के उन पर चलते हैं।
Psalms 103:19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है। 
Psalms 103:20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 103-105