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शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

स्वतंत्र


      औलूडा इक्कविआनो (1745-1796) केवल 11 वर्ष का था जब  उसे अगुवा करके दासत्व में बेच दिया गया। उसने दास के रूप में पश्चिमी अफ्रीका से वेस्ट इंडीज़, और उसके बाद अमेरिका के विरजीनिया प्रांत, और फिर इंग्लैण्ड तक की कठोर तथा दुखदायी यात्रा की। 20 वर्ष की आयु में उसने अपनी स्वतंत्रता मोल ले ली, किन्तु उसमें दासत्व में सहे अमानवीय बर्ताव के शारीरिक और मानसिक दाग़ बने रहे। औरों को दासत्व में देखने के कारण वह अपनी स्वतंत्रता का आनन्द  नहीं उठा पा रहा था, इसलिए इक्कविआनो इंग्लैण्ड में दासत्व को समाप्त करवाने के आन्दलोन में सक्रीय हो गया। उसने अपनी आत्मकथा लिखी, जो उस समय में एक दास द्वारा किया जाने वाला अति अनपेक्षित कार्य था। उसने अपनी आत्मकथा में उस निर्मम एवं अमानवीय व्यवहार का विवरण दिया जो उसने सहा था।

      प्रभु यीशु ने सँसार में अवतरित होकर समस्त मानव जाति के लिए, उनके पाप और शैतान के दासत्व से छुड़ाए जाने की जंग लड़ी, और हम सबके लिए, जो इस लड़ाई को लड़ने तथा जीतने में असमर्थ थे, स्वतंत्रता का मार्ग बना कर दे दिया। हम मनुष्यों का दासत्व बाहरी नहीं है; हम अपने पाप और आत्मिक टूटेपन के दास हैं। प्रभु यीशु ने कहा, “यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है। सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे” (यूहन्ना 8:34, 36)।

      सँसार में जहाँ भी प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप से स्वतंत्रता का यह समाचार अभी तक नहीं पहुँचा है, हमें वहाँ तक इसे पहुँचाना है। हम मसीही विश्वासियों को सँसार के सभी लोगों को बताना है कि हम पाप के दोष, निन्दा, और निराशा से छुड़ाए जा सकते हैं – प्रभु यीशु पर विश्वास लाने, उससे अपने पापों के लिए क्षमा माँगने और अपना जीवन उसे समर्पित करने के द्वारा सँसार का कोई भी जन, वास्तव में स्वतंत्र हो सकता है। - बिल क्राउडर


हमारी स्वतंत्रता की कीमत प्रभु यीशु के लहू द्वारा चुकाई गई।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? – रोमियों 5:8-9

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-37
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 132-134
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


गुरुवार, 9 अगस्त 2018

स्वतंत्रता



      दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो गया था, और शान्ति घोषित हो चुकी थी। परन्तु जापानी शाही सेना के जवान लेफ्टिनेंट हीरू ओनोडा, जिन्हें फिलीपींस के एक द्वीप पर तैनात किया गया था, यह नहीं जानते थे कि युद्ध समाप्त हो चुका है। उनका पता लगाने के लिए प्रयास किए गए। उनके संभावित स्थान पर वायुयान द्वारा इस संबंध में पर्चे डलवाए गए, परन्तु ओनोडा ने, जिनको 1945 में अंतिम आज्ञा मिली थी कि वे अपने स्थान पर डटे रहें और लड़ते रहें, इन सभी प्रयासों को शत्रु की चालाकी और दुष्प्रचार माना, और उन पर्चों के संदेशों की अवहेलना कर दी। अन्ततः युद्ध की समाप्ति के लगभग तीस वर्ष के बाद उन्होंने मार्च 1974 में तब समर्पण किया, जब उनके भूतपूर्व अफसर ने जापान से फिलीपींस आकर उन्हें पहले दिए गई आज्ञा को निरस्त किया और ओनोडा को आधिकारिक तौर पर उस द्वीप पर डटे रहने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर दिया। तब ही ओनोडा ने अन्ततः स्वीकार किया कि युद्ध की समाप्ति हो चुकी थी।

      प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के विषय भी अभी तक बहुत से लोगों ने या तो सुना नहीं है, या फिर वे उस सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते हैं कि प्रभु यीशु में विश्वास और पापों की क्षमा के द्वारा अनन्त जीवन की आशीष सारे सँसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है (2 तिमुथियुस 1:10)।हम में से कुछ, जिन्होंने सुना और विश्वास किया भी है, वे भी अभी तक एक हारा हुआ जीवन व्यतीत कर रहे हैं, अपने ही बल-बूते पर जीवन के संघर्षों से पार पाने के तरीके ढूँढ़ रहे हैं।

      आज ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो जाकर प्रभु यीशु मसीह के द्वारा पाप और मृत्यु पर हासिल की गई विजय के बारे में लोगों को बताएँ, उनके संदेह या संशय का निवारण करने में उनकी सहायता करें। उनकी उस स्वतंत्रता की कल्पना करें जिसे वे तब अनुभव करेंगे जब मसीह यीशु उनके मनों को पाप के विरुद्ध युद्ध को जीत लिए जाने के समाचार से भर देगा। - पो फैंग चिया


क्या आज आप किसी को सुसमाचार बताएंगे?

पर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रगट होने के द्वारा प्रकाश हुआ, जिसने मृत्यु का नाश किया, और जीवन और अमरता को उस सुसमाचार के द्वारा प्रकाशमान कर दिया। - 2 तिमुथियुस 1:10

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:1-6
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 77-78
  • रोमियों 10



सोमवार, 13 नवंबर 2017

मुर्दा फूल


   अगस्त 2013 में, पेन्सिल्वेनिया की फिप्प्स संरक्षिका में एक उष्णकटिबंधीय पौधे के फूल को खिलते हुए देखने के लिए एक बड़ी भीड़ एकत्रित हुई। इस फूल को मुर्दा फूल (Corpse Flower) कहते हैं क्योंकि जब यह खिलता है तो उसमें से सड़ते हुए माँस जैसी दुर्गन्ध आती है। इस पौधे का मूल स्थान इंडोनेशिया है, और यह कई वर्षों में एक ही बार खिलता है। इसे खिलते देखना भी एक अनुभव होता है। उसके फूलों की बहुत विशाल, लाल, सुन्दर और नोकीली पंखुड़ियाँ होती हैं; परन्तु उससे निकलने वाली दुर्गन्ध के कारण मक्खियाँ और अन्य माँस-भक्षी कीट पतंगे उसकी ओर आकर्षित होते हैं, परन्तु उसके निकट आने पर उन्हें कुछ नहीं मिलता है क्योंकि उसमें कोई रस नहीं होता है।

   उस मुर्दा फूल के समान, पाप भी हमारे सामने आकर्षक और लुभावनी बातें रखता है, परन्तु देता कुछ भी नहीं है। अदन की वाटिका में हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा ने यह कटु अनुभव से सीखा। अदन की वाटिका परमेश्वर ने उन्हें बना कर दी थी और बहुत सुन्दर थी; तब तक जब तक कि आदम और हव्वा के पाप ने उसे बिगाड़ नहीं दिया। परमेश्वर ने उन्हें केवल एक कार्य को करने के लिए मना किया था; उसके अतिरिक्त उस वाटिका में उन्हें हर प्रकार से पूरी स्वतंत्रता थी। परमेश्वर की भलाईयों के प्रति शंका में पड़कर, वे परमेश्वर की चेतावनी को नज़रन्दाज़ कर बैठे और उन्होंने वह किया जो मना किया गया था; वे परमेश्वर के अनाज्ञाकारी हो गए, और अपने निर्दोश होने को सदा के लिए खो दिया। परमेश्वर द्वारा भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष और उसके फल को दी गई सुन्दरता, उनके लिए मुर्दा फूल के समान हो गई - वे उससे आकर्षित तो हुए, परन्तु उन्हें मिला कुछ भी नहीं; वरन उनके इस अनाज्ञाकारिता के पाप की सड़ान्द से सारी मानव जाति दूषित हो गई। उनके इस पाप के परिणामस्वरूप उनके तथा उनकी सनतान के जीवनों में परमेश्वर से दूरी, पीड़ा, खालीपन, परिश्रम और मृत्यु आ गए।

   पाप आकर्षक लगता है, ऊपरी तौर से अच्छा और सुन्दर भी लग सकता है, परन्तु परमेश्वर कि आज्ञाकारिता से मिलने वाली आशीष, सुन्दरता और सुगन्ध के सामने पाप के प्रतिफल बहुत दुःखदाई और कड़ुवे हैं। परमेश्वर ने हमें अपने साथ रहने और उससे आशीषित होने के लिए बनाया है; वह हमें अपने आनन्द से भर देना चाहता है। उसके प्रति समर्पित और आज्ञाकारी होकर इस आनन्द से अपने जीवन को भर लें। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर की आज्ञाएं शैतान के सुझावों को पराजित कर सकती हैं।

इन विधियों में अपनी इच्छा के अनुसार गढ़ी हुई भक्ति की रीति, और दीनता, और शारीरिक योगाभ्यास के भाव से ज्ञान का नाम तो है, परन्तु शारीरिक लालसाओं को रोकने में इन से कुछ भी लाभ नहीं होता। - कुलुस्सियों 2:23

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:6-13; 22-24
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। 
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए। 
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? 
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया। 
Genesis 3:11 उसने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैं ने तुझे मना किया था, क्या तू ने उसका फल खाया है? 
Genesis 3:12 आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैं ने खाया। 
Genesis 3:13 तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मैं ने खाया। 
Genesis 3:22 फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिये अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ा कर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे। 
Genesis 3:23 तब यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की बाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस में से वह बनाया गया था। 
Genesis 3:24 इसलिये आदम को उसने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करुबों को, और चारों ओर घूमने वाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18


शनिवार, 5 अगस्त 2017

उस्ताद


   हाई स्कूल की पढ़ाई करते समय मुझे अपने शतरंज खेलने की योग्यता पर गर्व था। मैंने शतरंज क्लब की सदस्यता ली, और दोपहर के भोजन अवकाश के समय मैं अन्य सदस्यों के साथ बैठा हुआ पाया जाता था; हम शतरंज के खेल से संबंधित अनेकों किताबें पढ़ते थे, खेल की रणनीति बनाने के नए-नए तरीके सीखते थे; मैंने अपनी अधिकांशतः स्पर्धाएं जीतीं, और फिर खेलना छोड़ दिया। लगभग 20 वर्ष पश्चात मेरी मुलाकात एक कुशल शतरंज खिलाड़ी से हुई, जो हाई स्कूल के बाद भी अपने कौशल को निखारता चला जा रहा था, और उससे खेलने पर मुझे पता चला कि एक उस्ताद के साथ खेलना क्या होता है। यद्यपि शतरंज की बिसात पर मैं कोई भी चाल चलने के लिए स्वतंत्र था, परन्तु उसके सामने मेरे द्वारा बनाए गई कोई भी रणनीति, मेरी कोई भी चाल किसी काम की नहीं थी। उस उस्ताद के श्रेष्ठ कौशल के कारण मेरे द्वारा चली गई प्रत्येक चाल, वह अपने पक्ष में, अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए परिवर्तित कर लेता था।

   यहाँ पर हमारे लिए एक आत्मिक शिक्षा का चित्रण है। परमेश्वर ने हम मनुष्यों को अपने निर्णय लेने और अपनी इच्छानुसार करने की स्वतंत्रता दी है, और हम में से अधिकांश परमेश्वर की इच्छा और योजना के बाहर, उसके उद्देश्यों के विरुद्ध अपनी मनमर्ज़ी करते हैं, योजनाएं बनाते हैं, और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। परन्तु ऐसा करने पर भी हम अन्ततः हमारे पुनःस्थापन के परमेश्वर के उद्देश्य को ही पूरा कर देते हैं (रोमियों 8:21, 2 पतरस 3:13, प्रकाशितवाक्य 21:1)। इस एहसास ने जीवन में भली और बुरी दोनों ही प्रकार की बातों के प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। भली बातें, जैसे स्वास्थ्य, योग्यताएं, धन आदि को मैं परमेश्वर को उसके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अर्पित कर सकता हूँ। बुरी बातें, जैसे कि कोई अक्षमता, निर्धनता, पारिवारिक समस्याएं, असफलताएं आदि को मैं परमेश्वर के निकट आने और उसकी निकटता में बढ़ने का साधन बनाकर उनका सदुपयोग कर सकता हूँ।

   हम मसीही विश्वासियों को आश्वस्त रहना चाहिए कि उस उस्ताद, हमारे परमेश्वर पिता के हाथों से, हर बात और परिस्थिति में हमारी विजय सुनिश्चित है, चाहे जीवन के शतरंज की बिसात कैसी भी प्रतीत क्यों न हो रही हो। - फिलिप यैन्सी


जब हमें परमेश्वर का हाथ दिखाई न भी दे, 
तब भी हम उसके हृदय को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं।

पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी। - 2 पतरस 3:13

बाइबल पाठ: रोमियों 8:16-25
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। 
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
Romans 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। 
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी। 
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। 
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। 
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? 
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 68-69
  • रोमियों 8:1-21


शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

बुद्धिमता


   इंटरनैट पर उपलब्ध समाचार साईट्स को देखते हुए जब आप उस पृष्ठ पर बिलकुल नीचे तक पहुँचते हैं तो वहाँ एक भाग मिलता है जिसमें पाठक उस समाचार विषय के बारे में अपनी टिप्पणी लिख सकते हैं। सबसे प्रतिष्ठित और अच्छी मानी जाने वाली साईट्स पर भी इस टिप्पणी वाले स्थान में अनेकों लोगों द्वारा निरादरपूर्ण बातें, अधूरी जानकारी वाली अपमानजनक बातें, लोगों को अपशब्द कहना, इत्यादि पाएंगे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक बुद्धिमता की बातों का संग्रह है जो लगभग 3000 वर्ष पहले संकलित किया गया था; परन्तु इस पुस्तक की बातें आज भी उतनी ही समकालिक और उपयोगी हैं जितनी कि आज का सबसे ताज़ा समाचार। इस पुस्तक के 26वें अध्याय में दो शिक्षाएं हैं जो प्रथम दृष्टि में परस्पर विरोधी प्रतीत होती हैं, और दोनों ही आज के सामाजिक चर्चा माध्यमों पर सटीक लागू होती हैं: "मूर्ख को उस की मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे" (नीतिवचन 26:4); और फिर "मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे" (नीतिवचन 26:5)।

   इन दोनों परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाली बातों में परस्पर संतुलन वहाँ प्रयुक्त ’के अनुसार’ में है। कहने का तात्पर्य है कि पहली शिक्षा है कि किसी भी बात पर ऐसे उत्तर या टिप्पणी मत दो जैसे मूर्ख देते हैं। दूसरी शिक्षा का अर्थ है कि ऐसे उत्तर या टिप्पणी दो कि मूर्ख की मूर्खता उसकी बुद्धिमता प्रतीत न हो।

   मेरी समस्या है कि जिस मूर्खता का मुझे बहुधा सामना करना पड़ता है, वह मेरी अपनी ही होती है। मैंने भी कभी-कभी टिप्पणी वाले स्थान पर या तो कोई कटाक्ष अथवा निन्दनीय बात लिखी है, या किसी और की टिप्पणी को पलट कर निरादरपूर्ण रीति से उसी के ऊपर डाल दिया है। यह परमेश्वर को कतई नहीं भाता है जब मैं अपने किसी संगी मनुष्य के प्रति ऐसा अनादर करूँ, चाहे वे मूर्खतापूर्ण व्यवहार ही क्यों न कर रहे हों।

   परमेश्वर ने हमें अभिव्यक्ति की अद्भुत स्वतंत्रता दी है। हमें जो कहना है, जब कहना है, जिस प्रकार कहना है, आदि बातों का हम अपनी इच्छा और समझ के अनुसार स्वयं निर्णय कर सकते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें साथ ही प्रभु यीशु मसीह के शब्दों में यह भी चिताती है कि "और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे" (मत्ती 12:36)। साथ ही परमेश्वर ने हमें एक स्वतंत्रता और दी है, हम जब चाहे उसके पास आकर, उससे आवश्यकता तथा परिस्थिति के अनुसार बुद्धिमता माँग सकते हैं, मार्गदर्शन ले सकते हैं, और वह हमें कभी निराश नहीं करेगा। - टिम गुस्टाफ्सन


जो करो या कहो, प्रेम से करो या कहो।

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। - याकूब 1:5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 26:1-12
Proverbs 26:1 जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती। 
Proverbs 26:2 जैसे गौरिया घूमते घूमते और सूपाबेनी उड़ते-उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता। 
Proverbs 26:3 घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये बाग, और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है। 
Proverbs 26:4 मूर्ख को उस की मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे। 
Proverbs 26:5 मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे। 
Proverbs 26:6 जो मूर्ख के हाथ से संदेशा भेजता है, वह मानो अपने पांव में कुल्हाड़ा मारता और विष पीता है। 
Proverbs 26:7 जैसे लंगड़े के पांव लड़खड़ाते हैं, वैसे ही मूर्खों के मुंह में नीतिवचन होता है। 
Proverbs 26:8 जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देनी होती है। 
Proverbs 26:9 जैसे मतवाले के हाथ में कांटा गड़ता है, वैसे ही मूर्खों का कहा हुआ नीतिवचन भी दु:खदाई होता है। 
Proverbs 26:10 जैसा कोई तीरन्दाज जो अकारण सब को मारता हो, वैसा ही मूर्खों वा बटोहियों का मजदूरी में लगाने वाला भी होता है। 
Proverbs 26:11 जैसे कुत्ता अपनी छाँट को चाटता है, वैसे ही मूर्ख अपनी मूर्खता को दुहराता है। 
Proverbs 26:12 यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उस से अधिक आशा मूर्ख ही से है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 66-67
  • रोमियों 7


शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

कीमत


   लेखक माइकल सैंडल ने अपनी पुस्तक "What Money Can't Buy" में लिखा है कि कुछ चीज़ें हैं जो पैसे से खरीदी नहीं जा सकती हैं - लेकिन आजकल उनकी संख्या बहुत कम है। बन्दीगृह में सज़ा काटने वाला 90 डॉलर प्रति रात्रि के दर से अपनी कैद-कोठरी में बेहतर सुविधाएं प्राप्त कर सकता है, विलुप्त होने की कगार पर आए हुए काले गेंडे का शिकार 250,000 डॉलर में किया जा सकता है, आपके डॉक्टर के सेल फोन का नंबर 1500 डॉलर में प्राप्त किया जा सकता है। लगता है कि जैसे हर चीज़ बिकाऊ हो गई है।

   लेकिन एक चीज़ है जिसे पैसे से कभी खरीदा नहीं जा सकता है - उद्धार अर्थात पापों से छुटकारा, पाप के चँगुल से स्वतंत्रता। यह छुटकारा, यह स्वतंत्रता केवल प्रभु यीशु मसीह ही दे सकता है, और वह संसार के सभी लोगों को इसे सेंत-मेंत देना भी चाहता है, यदि वे इसे लेने के लिए तैयार हों तो। परमेश्वर के वचन बाइबल में जब पौलुस ने हमारे उद्धार के लिए परमेश्वर की अद्भुत योजना के बारे में लिखना आरंभ किया तो उसका हृदय प्रशंसा से भर उठा, और उसने लिखा, "हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया" (इफिसियों 1:7-8)।

   क्रूस पर प्रभु यीशु मसीह का बलिदान वह कीमत थी जो हमारे उद्धार के लिए परमेश्वर ने हमारे लिए चुका दी है। पापों से छुटकारे की यह कीमत केवल प्रभु यीशु ही चुका सकता था क्योंकि वही एकमात्र है जो निष्पाप, निष्कलंक, सिद्ध है, परमेश्वर का पुत्र है। ऐसे कीमती, परन्तु हमारे लिए बिना किसी कीमत उपलब्ध करवाए गए उद्धार के लिए हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया हृदयों से निकली कृतज्ञता और धन्यवाद की भेंट होनी चाहिए, उस परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के प्रति जिसने अपने जीवन से कीमत चुका कर हमें शैतान के चँगुल में से छुड़ा लिया है (इफिसियों 1:13-14)।

   हमारे महान प्रभु परमेश्वर की स्तुति और प्रशंसा हो - हमें छुड़ाने के लिए वह पृथ्वी पर आ गया और हमारे छुटकारे की पूरी कीमत चुका दी। - मार्विन विलियम्स


केवल प्रभु यीशु की मृत्यु ही हमारे छुटकारे की कीमत चुका सकती थी।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:3-14
Ephesians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उसने हमें मसीह में स्‍वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है। 
Ephesians 1:4 जैसा उसने हमें जगत की उत्‍पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। 
Ephesians 1:5 और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, 
Ephesians 1:6 कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्‍तुति हो, जिसे उसने हमें उस प्यारे में सेंत मेंत दिया। 
Ephesians 1:7 हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। 
Ephesians 1:8 जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया। 
Ephesians 1:9 कि उसने अपनी इच्छा का भेद उस सुमति के अनुसार हमें बताया जिसे उसने अपने आप में ठान लिया था। 
Ephesians 1:10 कि समयों के पूरे होने का ऐसा प्रबन्‍ध हो कि जो कुछ स्वर्ग में है, और जो कुछ पृथ्वी पर है, सब कुछ वह मसीह में एकत्र करे। 
Ephesians 1:11 उसी में जिस में हम भी उसी की मनसा से जो अपनी इच्छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है, पहिले से ठहराए जा कर मीरास बने। 
Ephesians 1:12 कि हम जिन्हों ने पहिले से मसीह पर आशा रखी थी, उस की महिमा की स्‍तुति के कारण हों। 
Ephesians 1:13 और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। 
Ephesians 1:14 वह उसके मोल लिये हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उस की महिमा की स्‍तुति हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 34-35
  • मत्ती 22:23-46


बुधवार, 11 जनवरी 2017

भय


   गुफाओं में रहने वाले प्राचीन लोगों को लेकर बनाए गए एक चलचित्र में, ग्रग क्रूड नामक एक परिवार का मुख्या यह मान कर रहता है कि उसकी गुफा के बाहर और कोई सुरक्षित स्थान नहीं है; रात के समय वे सब एक साथ सिमट कर रहते हैं जिससे ग्रग उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सके। ग्रग चाहता है कि उसकी युवा पुत्री इधर-उधर घूमने और नई चीज़ें देखने की अपनी प्रवृत्ति बदल ले क्योंकि इस से खतरा ही हो सकता है। अपने परिवार से ग्रग का कहना है, "सदा भयभीत रहो।"

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों से सदा ही कहा कि वे भयभीत नहीं हों। यह बात प्रभु ने शिमोन से कही (लूका 5:10) जब प्रभु ने उसे अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया। जब अराधनालय का सरदार, याईर, अपनी मरणासन पुत्री के जीवन की माँग लेकर प्रभु यीशु के पास आया तो प्रभु ने उसे भी इन्हीं शब्दों के साथ आश्वस्त किया (लूका 8:50)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका द्वारा लिखित प्रभु यीशु के जीवन-वृतान्त में लूका 12 अध्याय में प्रभु ने अपने चेलों को सिखाया कि कैसे परमेश्वर उनकी चिंता एवं देख-भाल करता है, इसलिए उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है (लूका 12:7)। मृतकों में से अपने पुनरुत्थान के बाद कब्र पर आई हुई स्त्रियों से भी उसने यही कहा, "मत डरो! (मत्ती 28:10)।

   भयभीत होना एक सर्वव्यापी भावना है। हम अपने प्रीय जनों को लेकर चिंतित होते हैं; अपनी आवश्यकताओं तथा अज्ञात भविष्य के लिए आशंकित होते हैं। संसार की दुविधाओं, परिस्थितियों और परेशानियों में हम कैसे विश्वास में बने रहना तथा भयभीत ना होना सीख सकते हैं? प्रभु परमेश्वर ने स्वयं ही हमें इसका आधार दिया है, जिससे हम उस पर अपना भरोसा बनाए रख सकें: "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है" (इब्रानियों 13:5-6)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर का प्रेम हमें हर एक भय की कैद से स्वतंत्र करता है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। - इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: लूका 12:4-7, 12:22-32
Luke 12:4 परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूं, कि जो शरीर को घात करते हैं परन्तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते उन से मत डरो। 
Luke 12:5 मैं तुम्हें चिताता हूं कि तुम्हें किस से डरना चाहिए, घात करने के बाद जिस को नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो: वरन मैं तुम से कहता हूं उसी से डरो। 
Luke 12:6 क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। 
Luke 12:7 वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। 
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे। 
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है। 
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है। 
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? 
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहने हुए न था। 
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा? 
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएँगे, और न सन्‍देह करो। 
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है। 
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34


रविवार, 3 मई 2015

नियम


   मेरी मुलाकात एक बड़ी खुशमिज़ाज़ स्त्री से हुई जो "मॉम्मा चार्ली" के नाम से जानी जाती थीं और जिसने एक दर्जन दत्तक बच्चों का पालन-पोषण किया है। उसे यह बच्चे न्यायालयों द्वारा देख-रेख के लिए दिए जाते थे, और वह महिला उन बच्चों को रहने और बढ़ने के लिए प्रेम और मार्गदर्शन देने वाला एक स्थिर घर उपलब्ध करवाती थी। उसने मुझे बताया कि जब भी कोई नया बच्चा उसके घर में आता तो पहला कार्य होता था उसे "मॉम्मा के नियम" बताना और समझाना। ये नियम परस्पर व्यवहार, एक दूसरे के प्रति जवाबदेही और एक दूसरे की सहायता करने तथा घर के कार्यों में हाथ बंटाने से संबंधित होते थे जिससे घर को सुचारू रूप से चलाया और संचालित किया जा सके क्योंकि वे बच्चे इन बातों को पहले से भली-भांति नहीं जानते थे।

   कुछ बच्चे "मॉम्मा के नियम" सुनकर घबरा जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इन नियमों के कारण उनके आनन्द और स्वतंत्रता में बाधा आएगी। लेकिन यह सत्य नहीं था; सत्य तो यह था कि इन नियमों के पालन द्वारा ही वह घर सुचारू रूप से चल सकता था जिससे वे सभी बच्चे और मॉम्मा शान्तिपूर्ण और आनन्दायक जीवन व्यतीत कर सकते थे।

   इसी प्रकार कुछ लोग परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए परमेश्वर के नियमों एवं परस्पर व्यवहार के मानकों को जीवन का मज़ा लेने में बाधक के रूप में देखते हैं। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है; जो सीमाएं परमेश्वर ने हमारे चारों ओर निर्धारित करी हैं वे हमें हमारी बुरी प्रवृत्तियों और उनके दुषप्रभावों से बचाने और हमारे जीवनों में उसके तथा अन्य लोगों के प्रति अच्छे व्यवहार तथा प्रतिक्रीयाओं को उत्पन्न करने के लिए हैं।

   उदाहरणस्वरूप इफिसीयों के 4 अध्याय में प्रेरित पौलुस हमें जीवन व्यतीत करने के कुछ मार्गदर्शन देता है। जब हम परमेश्वर के इन मार्गदर्शनों के अनुसार जीवन जीना आरंभ करते हैं तो हमें उसकी सुरक्षा तथा सच्चे आनन्द को पाने के अवसर भी मिलते हैं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का वचन वह कुतुबनुमा है जिसकी आज्ञाकारिता हमें सही मार्ग पर बनाए रखती है।

पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। - कुलुस्सियों 3:8-9

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:17-32
Ephesians 4:17 इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो। 
Ephesians 4:18 क्योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं। 
Ephesians 4:19 और वे सुन्न हो कर, लुचपन में लग गए हैं, कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें। 
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई। 
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए। 
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। 
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ। 
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 14-15
  • लूका 22:21-46



शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

स्वतंत्रता


   आज अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है, और अपने चीनी मित्रों के कौशल और चतुराई के द्वारा हम अमेरीकी लोग इसे रंगीन आतिश्बाज़ी के व्यापक तथा विशाल प्रदर्शन के साथ मनाते हैं। प्रति वर्ष जब मैं अपने राष्ट्रीय गान के गाए जाने और आकाश में बारूद के धमाकों द्वारा आकर्षक रंगीन नमूनों के बनाए जाने को देखती हूँ तो मुझे स्मरण हो आता है कि साधारण्तया बारूद के बम इस आतिशबाज़ी के समान रंगीन एवं आकर्षक नहीं वरन घातक होते हैं, उनके परिणाम ऐसे आनन्दमय नहीं वरन दुखदायी होते हैं।

   यद्यपि आतिश्बाज़ी और घातक बम बनाने के लिए एक ही पदार्थ का प्रयोग होता है, एक उत्पाद का उद्देश्य मनोरंजन करना होता है तो दूसरे का घायल करना या जान लेना। यहाँ हम देखते हैं कि कैसे एक ही पदार्थ भले और बुरे दोनों ही कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। योग्य, सावधानी रखने वाले तथा दूसरों की भलाई का ध्यान रखने वालों के हाथों में वही खतरनाक वस्तु आनन्दायक एवं मनोरंजक बन जाती है। लेकिन इसका विपरीत भी इतना ही सत्य है।

   कुछ यही बात स्वतंत्रता के साथ भी लागू होती है; स्वतंत्रता को भी भलाई और बुराई दोनों ही के लिए प्रयोग किया जा सकता है। हम मसीही विश्वासियों को मूसा में होकर मिली व्यवस्था के नियमों के पालन की अनिवार्यता से स्वतंत्रता तो है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सचेत भी करता है कि हम अपनी इस आत्मिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए नहीं करें: "हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो" (गलतियों 5:13)।

   संभव है कि हम सबके पास हम अमरीकीयों के समान राजनैतिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता नहीं हो, लेकिन संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास, वह चाहे जिस भी स्थान पर रह रहा हो, आत्मिक स्वतंत्रता अवश्य है। इस आत्मिक स्वतंत्रता का उपयोग हमें अपनी इच्छा या विचारों को दूसरों पर थोपने के लिए नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा और विचारों को दूसरों तक पहुँचाने के लिए करना है जिससे सब मसीह यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाली स्वतंत्रता को जान सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि हम अपनी मनमानी करें; वरन यह कि हम परमेश्वर की इच्छा पूरी करें, उसे प्रसन्न करें।

और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। - 1 पतरस 2:16

बाइबल पाठ: गलतियों 5:1-14
Galatians 5:1 मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।
Galatians 5:2 देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्हें कुछ लाभ न होगा।
Galatians 5:3 फिर भी मैं हर एक खतना कराने वाले को जताए देता हूं, कि उसे सारी व्यवस्था माननी पड़ेगी। 
Galatians 5:4 तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो। 
Galatians 5:5 क्योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं। 
Galatians 5:6 और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्तु केवल, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। 
Galatians 5:7 तुम तो भली भांति दौड़ रहे थे, अब किस ने तुम्हें रोक दिया, कि सत्य को न मानो। 
Galatians 5:8 ऐसी सीख तुम्हारे बुलाने वाले की ओर से नहीं। 
Galatians 5:9 थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीर कर डालता है। 
Galatians 5:10 मैं प्रभु पर तुम्हारे विषय में भरोसा रखता हूं, कि तुम्हारा कोई दूसरा विचार न होगा; परन्तु जो तुम्हें घबरा देता है, वह कोई क्यों न हो दण्‍ड पाएगा। 
Galatians 5:11 परन्तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो क्यों अब तक सताया जाता हूं; फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही। 
Galatians 5:12 भला होता, कि जो तुम्हें डांवाडोल करते हैं, वे काट डाले जाते! 
Galatians 5:13 हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। 
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-123


रविवार, 2 जून 2013

सूर्योदय


   अमेरिका के जिस प्रांत में हम रहते हैं - इडाहो, उसका नाम रेड इंडियन्स के शोशोने कबीले के एक शब्द - ई-डाह-हाओ से आता है, जिसका अर्थ है "देखो! पहाड़ों के ऊपर से सूर्योदय हो रहा है"। जब मैं अपने घर के सामने के पहाड़ों के ऊपर सूर्योदय को होते और सूर्य के प्रकाश को अपनी उस घाटी को रौशन करते हुए देखता हूँ जहाँ हम रहते हैं तो मैं अकसर इसे स्मरण करता हूँ। साथ ही मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में मिलने वाली एक भविष्यवाणी और प्रतिज्ञा को भी स्मरण करता हूँ: "परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे" (मलाकी 4:2 )। यह परमेश्वर की अटल प्रतिज्ञा है कि प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के साथ ही "सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी" (रोमियों 8:21)।

   हर नया सूर्योदय उस अनन्तकाल के आरंभ के सूर्योदय का स्मरण दिलाता है जब धर्म का सूर्य उदय होगा, उसकी किरणों में चंगाई होगी। तब सारी सृष्टि की सब वस्तुएं सिद्ध हो जाएंगी। उस के बाद फिर कभी कोई दुखता जोड़ या पीड़ा से टूटता बदन नहीं रहेगा, कोई आर्थिक संघर्ष नहीं रहेगा, कोई हानि नहीं होगी और बुढ़ापा नहीं रहेगा; हम सब मसीही विश्वासी प्राण-देह-आत्मा की एक अद्भुत स्वतंत्रता का अनुभव करेंगे और सृष्टि के वर्तमान सभी दुखदायी बन्धनों से स्वतंत्र होकर "पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदेंगे और फांदेंगे"। अपने बुढ़ापे और दुखते जोड़ों की अवस्था में मेरे लिए जब यह सब कल्पना करना भी इतना रोमांचकारी है, तो जब प्रत्यक्ष अनुभव करूँगा तो कैसा अद्भुत आनन्द होगा!

   प्रभु यीशु ने आश्वासन दिया है: "हां, मैं शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ।" (प्रकाशितवाक्य 22:20)। - डेविड रोपर


यदि आप प्रभु यीशु के पुनः आगमन की बाट जोह रहे हैं तो आपकी यह आशा व्यर्थ नहीं है।

जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ। प्रभु यीशु का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन। - प्रकाशितवाक्य 22:20-21

बाइबल पाठ: मलाकी 4:1-6
Malachi 4:1 क्योंकि देखो, वह धधकते भट्ठे का सा दिन आता है, जब सब अभिमानी और सब दुराचारी लोग अनाज की खूंटी बन जाएंगे; और उस आने वाले दिन में वे ऐसे भस्म हो जाएंगे कि उनका पता तक न रहेगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
Malachi 4:2 परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे।
Malachi 4:3 तब तुम दुष्टों को लताड़ डालोगे, अर्थात मेरे उस ठहराए हुए दिन में वे तुम्हारे पांवों के नीचे की राख बन जाएंगे, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
Malachi 4:4 मेरे दास मूसा की व्यवस्था अर्थात जो जो विधि और नियम मैं ने सारे इस्रएलियों के लिये उसको होरेब में दिए थे, उन को स्मरण रखो।
Malachi 4:5 देखो, यहोवा के उस बड़े और भयानक दिन के आने से पहिले, मैं तुम्हारे पास एलिय्याह नबी को भेजूंगा।
Malachi 4:6 और वह माता पिता के मन को उनके पुत्रों की ओर, और पुत्रों के मन को उनके माता-पिता की ओर फेरेगा; ऐसा न हो कि मैं आकर पृथ्वी को सत्यानाश करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18 
  • यूहन्ना 13:1-20


शनिवार, 15 दिसंबर 2012

आधीन


   एक ख्याति प्राप्त महिला ने टी.वी. पर हो रहे साक्षात्कार में स्वीकार किया कि प्रति वर्ष अपने बालों की देख-रेख और उन्हें सजाने संवारने में वे हज़ारों डॉलर तथा सईकड़ों घंटे लगा देती हैं। उसने यह भी स्वीकार किया कि यह उसके लिए व्यसन के समान हो गया है और वह अपने बालों के आधीन हो गई है। आधीन हो जाने का तात्पर्य है कि किसी अन्य के अधिकार या नियंत्रण में हो जाना। अपने आप को सुंदर दिखाने के प्रयास में इस महिला ने अपने जीवन का नियंत्रण अपने बालों को सौंप दिया था।

   इस महिला की कहानी से हमें भी अपने जीवनों को टटोलने की आवश्यक्ता है - हमारी कौन सी इच्छाएं हमें अपनी आधीनता में लिए हुए हैं और हमें नियंत्रित कर रही हैं? क्या हम किसी चीज़ के प्रति ऐसे आसक्त हो जाते हैं कि उसे प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहते हैं? क्या हम ख्याति, प्रशंसा, धन-संपदा, आनन्द, भोजन, अहम आदि के हाथों अपने जीवन को दे चुके हैं?

   प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा "क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है" (रोमियों ६:१६)। जब हमारी शारीरिक लालसाएं और सांसारिक इच्छाएं हम पर हावी होने लगें तो समय है परमेश्वर के आधीन हो जाने का और उस के हाथों में अपना नियंत्रण छोड़ देने का "और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो" (रोमियों ६:१३)।

   यदि शरीर और संसार आप पर हावी हैं, आप को अपनी आधीनता में लिए हुए हैं तो परमेश्वर के सामने दीन होकर अपने आप को उसे सौंप दें और उससे प्रार्थना करें कि वह आपको आपके हृदय की वास्तविक दशा दिखाए, उसके लिए पश्चाताप का मन और निवारण दे।


सच्ची स्वतंत्रता अपना मार्ग चुनने और अपनाने में नहीं वरन परमेश्वर की आधीनता में है।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब ४:१०

बाइबल पाठ: रोमियों ६:११-२३
Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Rom 6:12   इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो। 
Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
Rom 6:15  तो क्‍या हुआ क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं कदापि नहीं। 
Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है? 
Rom 6:17  परन्‍तु परमेशवर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। 
Rom 6:19  मैं तुम्हारी शारीरिक र्दुबलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। 
Rom 6:20  जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे। 
Rom 6:21  सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्‍या फल पाते थे? 
Rom 6:22  क्‍योंकि उन का अन्‍त तो मृत्यु है परन्‍तु अब पाप से स्‍वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है। 
Rom 6:23  क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ६

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

अवकाश

   मेरे एक मित्र ने उसके चर्च के अगुवों द्वारा लिए गए अवकाश के बारे में बताया। २ दिनों के लिए चर्च के अगुवे एक एकांत स्थान पर प्रार्थना तथा आराधना करने और भविष्य में चर्च के कार्यों के लिए के लिए योजना बनाने के लिए एकत्रित हुए। मेरे मित्र का अनुभव था कि यह अवकाश का समय बहुत लाभकारी रहा और इससे सबको एक ताज़गी और स्फूर्ति मिली, जिससे चर्च के कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से करने मे बहुत सहायता मिलेगी।

   मुझे यह बहुत रोचक लगा - कार्य करने के लिए कार्य से अवकाश लेना। किंतु यह एक सही सिद्धांत है। कई बार पीछे हट कर पुनः संगठित होना प्रभावपूर्ण रीति से कार्यकारी होने के लिए आवश्यक हो जाता है। यह परमेश्वर के साथ हमारे संबंधों में और भी अधिक महत्व रखता है।

   स्वयं प्रभु यीशु ने इस सिद्धांत का अनुसरण किया। गलील के सागर के इलाके में एक व्यस्त दिन के अन्त में वे अवकाश के समय लिए एकांत में चले गए: "वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था" (मत्ती १४:२३)। समय निकाल कर एकांत में परमेश्वर के साथ प्रार्थना में समय बिताना प्रभु यीशु के जीवन का एक महत्वपुर्ण भाग था: "और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा" (मरकुस १:३५); "और उन दिनों में वह पहाड़ पर प्रार्थना करने को निकला, और परमेश्वर से प्रार्थना करने में सारी रात बिताई" (लूका ६:१२)।

   इस अति व्यस्त और एक दुसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे संसार में, इस होड़ में शामिल हो कर अपने आप को थका लेना कोई कठिन बात नहीं है, यह अनायास ही हो जाता है। मसीही विश्वासियों को परमेश्वर के लिए प्रभावी होने के लिए परमेश्वर की उपस्थिति में भी आना आवश्यक है। जब तक हम संसार की भाग-दौड़ से अवकाश लेकर परमेश्वर की उपस्थिति में शांत हो कर नहीं बैठेंगे, परमेश्वर से सामर्थ और मार्गदर्शन नहीं पा सकेंगे।

   अवकाश ले कर परमेश्वर की उपस्थिति में आने के द्वारा ही सामर्थी हो कर आगे बढ़ने की कुंजी है। अवकाश लेकर प्रभु की उपस्थिति में आइए और सामर्थ पाकर आगे बढ़िए। - बिल क्राउडर


पिता परमेश्वर के साथ एकांत का स्थान ही वह एकमात्र स्थान है जहां से आगे बढ़ने की सामर्थ मिलती है।

वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था। - मत्ती १४:२३

बाइबल पाठ: - मत्ती १४:१३-२३
Mat 14:13  जब यीशु ने यह सुना, तो नाव पर चढ़ कर वहां से किसी सुनसान जगह एकान्‍त में चला गया; और लोग यह सुनकर नगर नगर से पैदल उसके पीछे हो लिए।
Mat 14:14  उस ने निकल कर बड़ी भीड़ देखी और उन पर तरस खाया, और उस ने उन के बीमारों को चंगा किया।
Mat 14:15  जब सांझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्‍तियों में जाकर अपने लिये भोजन मोल लें।
Mat 14:16  यीशु ने उन से कहा उन का जाना आवश्यक नहीं! तुम ही इन्‍हें खाने को दो।
Mat 14:17  उन्‍होंने उस से कहा यहां हमारे पास पांच रोटी और दो मछिलयों को छोड़ और कुछ नहीं है।
Mat 14:18   उस ने कहा, उन को यहां मेरे पास ले आओ।
Mat 14:19  तब उस ने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछिलयों को लिया, और स्‍वर्ग की ओर देख कर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।
Mat 14:20  और सब खाकर तृप्‍त हो गए, और उन्‍होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकिरयां उठाई।
Mat 14:21  और खाने वाले स्‍त्रियों और बालकों को छोड़ कर पांच हजार पुरूषों के अटकल थे।
Mat 14:22  और उस ने तुरन्‍त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उस से पहिले पार चले जाएं, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mat 14:23  वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ३०-३१ 
  • प्रेरितों १३:२६-५२

बुधवार, 4 जुलाई 2012

सच्ची स्वतंत्रता

   उत्तरी अमेरिका के १३ उपनिवेशों ने सन १७७६ में इंगलैंड के राजा द्वारा उन पर लगाई गई सीमाओं और बन्धनों का विरोध किया और विरोध का संघर्ष आरंभ किया। इस संघर्ष ने एक नए गण्तंत्र को जन्म दिया और इस नवजात राष्ट्र - अमेरिका के लोगों ने शीघ्र ही एक घोषणा पत्र अपनाया जो आज स्वतंत्रता की घोषणा के द्स्तावेज़ के रूप में जाना जाता है।

   लगभग २००० वर्ष पहले, प्रभु यीशु ने क्रूस पर से पुकारा "पूरा हुआ", यह उस पर विश्वास करने वालों के लिए स्वतंत्रता का एलान था। समस्त मानव जाति पाप के दासत्व और अत्याचार के आधीन है, उसके दुषप्रभावों से त्रस्त है। किंतु निष्पाप और निष्कलंक प्रभु यीशु ने हमारे पाप और उनका दण्ड अपने ऊपर ले लिया और क्रूस पर हमारी संति बलिदान हो गए। परमेश्वर की धार्मिकता की मांगों को पूरा करके, तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जीवित हो कर प्रभु यिशु ने समस्त मानव जाति के सभी लोगों के लिए पाप से स्वतंत्रता और उद्धार का मार्ग खोल दिया है। अब जो कोई साधारण विश्वास के साथ उसे ग्रहण कर लेता है, उस पर अपना विश्वास ले आता है और उससे पापों की क्षमा मांग लेता है, वह पाप के दासत्व से अनन्त काल के लिए स्वतंत्र हो जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा "मसीह ने जो हमारे लिये श्रापित बना, हमें मोल लेकर व्यवस्था के श्राप से छुड़ाया क्‍योंकि लिखा है, जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह श्रापित है। यह इसलिये हुआ, कि इब्राहिम की आशीष मसीह यीशु में अन्यजातियों तक पंहुचे, और हम विश्वास के द्वारा उस आत्मा को प्राप्‍त करें, जिस की प्रतिज्ञा हुई है" (गलतियों ३:१३-१४)। रोमियों ८ में वह हमें आश्वस्त करता है "सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया" (रोमियों ८:१-२)। इस कारण वह गलतियों ५ में विश्वासियों से याचना करता है कि "मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो" (गलतियों ५:१)।

   हम अपने देश में हमें मिली स्वतंत्रता के लिए परमेश्वर के धन्यवादी हैं। लेकिन मसीही विश्वासियों को इससे भी बढ़कर परमेश्वर के धन्यवादी रहना चाहिए उस अनन्त काल की स्वतंत्रता के लिए जो उन्हें पाप के अत्याचार और दासत्व से मसीह यीशु में हो कर मिली है, और जिसे अब कोई उनसे किसी प्रकार छीन नहीं सकता। - रिचर्ड डी हॉन


हमारी सबसे बड़ी स्वतंत्रता पाप से स्वतंत्रता है।

मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो। - गलतियों ५:१

बाइबल पाठ: - गलतियों ४:१-७
Gal 4:1  मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं।
Gal 4:2  परन्‍तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है।
Gal 4:3   वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में होकर दास बने हुए थे।
Gal 4:4  परन्‍तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्‍पन्न हुआ।
Gal 4:5  ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल लेकर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले।
Gal 4:6  और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है।
Gal 4:7  इसलिये तू अब दास नहीं, परन्‍तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब २८-२९ 
  • प्रेरितों १३:१-२५

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

सिद्धांत - स्वतंत्रता का या प्रेम का

अमेरिका में, जहां सड़क के दाहिनी ओर चलने का नियम है, कई प्रांतों में चौराहों की लाल बत्ती पर दाहिनी ओर मुड़ने की अनुमति है, यदि मार्ग साफ हो और कोई अन्य उस ओर से न आ-जा रहा हो। यह वाहन चालकों को दी गई स्वतंत्रता है। लेकिन कुछ चौराहों पर चेतावनी लगी होती है "दाहिनी ओर मुड़ना मना है" क्योंकि वे चौराहे खतरनाक हैं और वहां दुर्घटना की संभावना अधिक है।

बाइबल में १ कुरिन्थियों ८ अध्याय में भी मसीही स्वतंत्रता के संबंध में कुछ ऐसी ही परिस्थिति है। पौलुस मूर्तियों को भेंट के रूप में चढ़ाई गई भोजन वस्तुओं को खाने के लिये स्वतंत्रता था। उसे मालूम था कि मूर्तियां कुछ नहीं होतीं और उन पर चढ़ाई गई भोजन वस्तु खाना न सही था न गलत।

परन्तु सभी विश्वासी ऐसा नहीं समझते थे। वे जिनके विवेक कमज़ोर थे मानते थे कि मूर्ति को चढ़ाने से भोजन वस्तु अशुद्ध हो गई है इसलिये अब उसे नहीं खाना चाहिये। पौलुस ने इस बात का ध्यान किया कि इस विष्य में उसे विशेष सावधानी बरतनी है, कहीं उसके ऐसा भोजन खाने से वह कमज़ोर विवेक वाला ठोकर न खाए। विश्वास में नए और अपरिपक्व लोगों के विवेक की चिंता ने उसे अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करने से रोक कर रखा।

मसिही विश्वासी मसीह में स्वतंत्र हैं समाज की उन बातों में भाग लेने के लिये जिनके विष्य में बाइबल स्पष्ट रूप से मना नहीं करती, लेकिन परमेश्वर का पवित्र आत्मा किन्ही परिस्थितियों में हमें कुछ ऐसी जायज़ बातों में भाग लेने से मना कर सकता है। ये हमारे वे निर्ण्य हैं जहां प्रेम के सिद्धांत का पालन स्वतंत्रता के सिद्धांत के पालन से ऊपर होता है।

एक परिपक्व मसीही विश्वासी अपने कमज़ोर साथी का ध्यान करके किसी "लाल बत्ती" पर बिना ध्यान किये " वर्जित दाहिने" नहीं मुड़ेगा। - डेनिस डी हॉन


जब तक हम सही करने के कर्तव्य को नहीं निभाते, हमें अपनी मर्ज़ी करने की स्वतंत्रता भी नहीं निभा सकते।

परन्‍तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्‍वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए। - १ कुरिन्थियों ८:९


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ८

अब मूरतों के साम्हने बलि की हुई वस्‍तुओं के विषय में हम जानते हैं, कि हम सब को ज्ञान है: ज्ञान घमण्‍ड उत्‍पन्न करता है, परन्‍तु प्रेम से उन्नति होती है।
यदि कोई समझे, कि मैं कुछ जानता हूं, तो जैसा जानना चाहिए वैसा अब तक नहीं जानता।
परन्‍तु यदि कोई परमेश्वर से प्रेम रखता है, तो उसे परमेश्वर पहिचानता है।
सो मूरतों के साम्हने बलि की हुई वस्‍तुओं के खाने के विषय में हम जानते हैं, कि मूरत जगत में कोई वस्‍तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं।
यद्यपि आकाश में और पृथ्वी पर बहुत से ईश्वर कहलाते हैं, (जैसा कि बहुत से ईश्वर ओर बहुत से प्रभु हैं)।
तौभी हमारे निकट तो एक ही परमेश्वर है: अर्थात पिता जिस की ओर से सब वस्‍तुएं हैं, और हम उसी के लिये हैं, और एक ही प्रभु है, अर्थात यीशु मसीह जिस के द्वारा सब वस्‍तुएं हुई, और हम भी उसी के द्वारा हैं।
परन्‍तु सब को यह ज्ञान नही; परन्‍तु कितने तो अब तक मूरत को कुछ समझने के कारण मूरतों के साम्हने बलि की हुई को कुछ वस्‍तु समझ कर खाते हैं, और उन का विवेक निर्बल होकर अशुद्ध होता है।
भोजन हमें परमेश्वर के निकट नहीं पहुंचाता, यदि हम न खांए, तो हमारी कुछ हानि नहीं, और यदि खाएं, तो कुछ लाभ नहीं।
परन्‍तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्‍वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए।
क्‍योंकि यदि कोई तुझ ज्ञानी को मूरत के मन्‍दिर में भोजन करते देखे, और वह निर्बल जन हो, तो क्‍या उसके विवेक में मूरत के साम्हने बलि की हुई वस्‍तु के खाने का हियाव न हो जाएगा?
इस रीति से तेरे ज्ञान के कारण वह निर्बल भाई जिस के लिये मसीह मरा नाश हो जाएगा।
सो भाइयों का अपराध करने से ओर उन के निर्बल विवेक को चोट देने से तुम मसीह का अपराध करते हो।
इस कारण यदि भोजन मेरे भाई को ठोकर खिलाए, तो मैं कभी किसी रीति से मांस न खाऊंगा, न हो कि मैं अपने भाई के ठोकर का कारण बनूं।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण १४-१६
  • मरकुस १२:२८-४४

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

स्वतंत्र कैसे हों?

हर कोई स्वतंत्रता चाहता है, लेकिन स्वतंत्रता के प्रयत्न कभी कभी बन्धनों में बांध देते हैं। बाइबल शिक्षिका हेन्रियेटा मीयरस सच्ची स्वतंत्रता का भेद जानती थीं। उन्होंने कहा, "पक्षी आकाश में स्वतंत्र है, लेकिन उसी पक्षी को आप पानी में डाल दीजिए और वह अपनी स्वतंत्रता खो देगा। इसी प्रकार एक मसीही विश्वासी भी जब तक परमेश्वर की आज्ञाकरिता में जीता है और परमेश्वर की इच्छा पूरी करता रहता है, स्वतंत्र है। यह परमेश्वर समर्पण का जीवन परमेश्वर की सन्तानों के लिये वैसे ही स्वभाविक है जैसे मछली के लिये जल और पक्षी के लिये आकाश में रहने का जीवन।"

बुद्धिमान राजा सुलेमान ने अपने पुत्र को समझाने के लिये उसे उपदेश दिया कि सच्ची स्वतंत्रता केवल परमेश्वर पर केंद्रित जीवन रीति द्वारा ही संभव है, क्योंकि परमेश्वर ने इसी के लिये ही हमारी सृष्टि करी है। इसकी तुलना में, जो कोई परमेश्वर के इस सत्य के विमुख चलता है, वह अवश्य ही बन्धुवाई में पड़ता है। नीतिवचन का १६वां अध्याय वर्णन करता है उस स्वतंत्रता और सन्तुष्टि का जो नम्रता, विश्वास, आत्म संयम और अच्छे बोल-चाल का पालन करने से मिलती है। साथ ही यह अध्याय चेतावनी भी देता है उस अवश्यंभावी बन्धुवाई के विष्य में जो उन लोगों के जीवन में आ जाती है जो विद्रोह, घमंड, बैर, द्वेष और दूसरों के लिये जानबूझ कर परेशानी खड़ी करने वालों को मिलती है।

बाइबल का नया नियम हमें प्रभु यीशु से परिचय करवाता है - हमारी स्वतंत्रता का एकमात्र आधार। हमारे उस सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता ने कहा, "...यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।" (यूहन्ना ८:३१, ३२)

सत्य को जानिये, सत्य ही आपको स्वतंत्र करेगा। - मार्ट डी हॉन


सच्ची स्वतंत्रता अपनी मनमर्ज़ी करने में नहीं वरन परमेश्वर की मर्ज़ी करने में है।

दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फंसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बन्धा रहेगा। - नीतिवचन ५:२२

बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:१६-३३
बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
बुराई से हटना सीधे लोगों के लिये राजमार्ग है, जो अपने चालचलन की चौकसी करता, वह अपने प्राण की भी रक्षा करता है।
विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।
घमण्डियों के संग लूट बांट लने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है।
जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
जिसके ह्रृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।
बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।
मनभावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है।
अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लगा जाती है।
टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसला कर कुमार्ग पर चलाता है।
आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है।
पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं; वे धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होते हैं।
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है।
चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ३१-३३
  • मरकुस ९:१-२९

मंगलवार, 1 मार्च 2011

स्वतंत्रता का जीवन

हमारे इलाके के स्थानीय अखबार में एक ३९ वर्षीय ऐसे आदमी की खबर छपी जिसने अपने जीवन के केवल १६ महीने ही कारावास से बाहर बिताये थे। उसके जन्म के समय उसकी माता जेल में थी और वह भी उसके साथ १४ वर्ष की आयु तक जेल ही में बड़ा हुआ। जब उसे बाहर भेजा गया तो उसने कई जुर्म करे और वापस कारावास में आ गया। पूछे जाने पर उसने बताया कि, "मुझे यहां से बाहर रहना नहीं आता। यही मेरा घर है, और मैं सारी उम्र यहीं रहना चाहता हूँ।" इस अभागे मनुष्य को बन्धुवाई में ही सुरक्षा का अनुभव होता था, उसके लिये बन्धुवाई ही स्वतंत्रता थी।

इसी प्रकार कई लोगों को आत्मिक स्वतंत्रता के साथ परमेश्वर की सेवा करना बहुत कठिन और धार्मिक रीति रिवाज़ों के बाहरी दिखावे के साथ बने रहना अधिक आसान लगता है। यही कारण था कि प्रथम शताब्दी की गलतिया प्रांत में स्थित मसीही मंडली के कुछ लोगों को मूसा द्वारा दिये गए नियमों का पालन करना ज़्यादा आसान लगा, यद्यपि अब मसीह में आने के बाद उन नियमों के पालन करने की कोई बाध्यता उनपर नहीं थी। सम्भवतः उन्हें अपनी यह स्वतंत्रता घबरा देने वाली लगी, वे समझ नहीं सके कि इस स्वतंत्रता के साथ कैसे रहा जाए और वे वापस रीति रिवाज़ों के बन्धनों में चले जाना चाहते थे।

आज भी कई मसीही भी ऐसा ही करते हैं। वे अपनी धार्मिक सुरक्षा ऐसे विधि-विधानों में ढूंढते हैं जो केवल बाहरी रूप से "अच्छे व्यवहार" में बने रहने पर निर्भर हो। ऐसे लोगों के लिये क्या कुछ करना है, और क्या नहीं; कैसे रहना और जीना है, कैसे नहीं - यह उनकी संस्कृति और समाज निर्धारित करता है, बाइबल नहीं। वे स्वतंत्रता में नहीं, बन्धुवाई में जीना चाहते हैं।

संस्कृति और समाज का आदर तब ही सार्थक होता है जब हम अपने मनफिराव द्वारा बदले हुए जीवन को समाज में प्रदर्शित करें और समाज के समक्ष हम परमेश्वर के प्रति उससे मिले उद्धार के लिये धन्यवादी रहें। उद्धार द्वारा मिली स्वतंत्रता और जीवन उद्देश्य हमें समाज में और भी अधिक उपयोगी, ज़िम्मेदार और विश्वसनीय बना देता है, तथा परमेश्वर से प्राप्त उद्धार के जीवन और स्वत्रंत्रता की गवाही प्रस्तुत करता है।

वैधानिकता और रीति रिवाज़ों की दीवारों के पीछे छिप कर परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली असली स्वतंत्रता से मुँह मत मोड़िये। - मार्ट डी हॉन


जो मसीह के बन्धुए हैं केवल वही वासत्व में स्वतंत्र हैं।

क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ करके अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे? - गलतियों ३:३

बाइबल पाठ: गलतियों ५:१-१४

मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।
देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्हें कुछ लाभ न होगा।
फिर भी मैं हर एक खतना कराने वाले को जताए देता हूं, कि उसे सारी व्यवस्था माननी पड़ेगी।
तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो।
क्‍योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं।
और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्‍तु केवल विश्वास जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।
तुम तो भली भांति दौड रहे थे, अब किस ने तुम्हें रोक दिया, कि सत्य को न मानो?
ऐसी सीख तुम्हारे बुलाने वाले की ओर से नहीं।
थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीर कर डालता है।
मैं प्रभु पर तुम्हारे विषय में भरोसा रखता हूं, कि तुम्हारा कोई दूसरा विचार न होगा परन्‍तु जो तुम्हें घबरा देता है, वह कोई क्‍यों न हो दण्‍ड पाएगा।
परन्‍तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो क्‍यों अब तक सताया जाता हूं? फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही।
भला होता, कि जो तुम्हें डांवाडोल करते हैं, वे काट डाले जाते!
हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्‍तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।
क्‍योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २३-२५
  • मरकुस ७:१४-३७

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

परमेश्वर की ’ज़बरदस्ती’?

एक मोटरसाईकिल चालकों का दल अपने राज्य की राजधानी की ओर जा रहा था। उनका उद्देश्य था वहां जाकर अनिवार्यतः हेल्मेट पहनने के नियम के विरोध में प्रदर्शन करना। उन्हें एक नियत स्थान पर जमा होकर कुछ भाष्ण देने थे और अपना विरोध दर्ज करने के लिये अपने हेल्मेट जलाने थे। लेकिन विरोध स्थल पर जाते हुए एक चालक अपनी मोटरसाईकिल का नियंत्रण खो बैठा और उसका गंभीर एक्सीडेंट हो गया। उसके सिर और चेहरे पर काफी गहरी चोटें आईं, जिन से वह बच जाता यदि उसने अपनी हेल्मेट पहनी हुई होती!

कभी कभी हम भी इन्हीं चालकों की तरह व्यवहार करते हैं। परमेश्वर द्वारा हमारे बचाव के लिये दिये गए नियम हमें अनुचित और बाधापूर्ण लगते हैं। यद्यपि हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं और चाहते हैं कि उसकी सुरक्षा हमारे साथ बनी रहे, फिर भी उसके निर्देशों के विरुद्ध हम बलवा करते हैं, उनका पालन नहीं करते तथा परमेश्वर के भले उद्देश्यों का अनुचित अर्थ निकलते हैं; हम इस बात को समझना नहीं चाहते के परमेश्वर ने अपने प्रेम में हमारी भलाई और सुरक्षा के लिये ही ये नियम और निर्देश दिये हैं।

अनुशासन और नियमों के पालन से मुक्त होने से हमें अधिक खुशी, स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा मिल जाएगी - ऐसा भी नहीं है; वरन यह अवश्य है कि हम अपना आदर, अपने जीवन का उद्देश्य और अपनी सुरक्षा खो बैठेंगे। संसार भर में सामाजिक व्यवहार के आंकड़े गवाह हैं कि जिनके जीवनों में परमेश्वर का भय और आदर नहीं है, और जो अपनी मनमानी करने पर उतारू रहते हैं, उनके जीवनों में दुर्व्यवहार, तलाक, हिंसा, अशांति और शारीरिक एवं मान्सिक रोग अधिक पाए जाते हैं।

हम नहीं चाहते कि हमारे जीवन नियमों द्वारा बन्धे हों, परन्तु जब हम इसका विकल्प यशायाह के पहले अध्याय में पढ़ते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर के नियम सदैव हमारी भलाई ही के लिये हैं। परमेश्वर ज़बरदस्ती का परमेश्वर नहीं, प्रेम का परमेश्वर है। - मार्ट डी हॉन


यदि आप अनुशासन का पालन नहीं करना चाहते तो नियमों को दोषी मत ठहराईये।

यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे। - यशायाह १:१८

बाइबल पाठ: यशायाह १:१-२०
आमोस के पुत्र यशायाह का दर्शन, जिसको उस ने यहूदा और यरूशलेम के विषय में उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह नाम यहूदा के राजाओं के दिनों में पाया।
हे स्वर्ग सुन, और हे पृथ्वी कान लगा क्योंकि यहोवा कहता है: मैं ने बाल-बच्चों का पालन पोषण किया, और उनको बढ़ाया भी, परन्तु उन्होंने मुझ से बलवा किया।
बैल तो अपने मालिक को और गदहा अपने स्वामी की चरनी को पहिचानता है, परन्तु इस्राएल मुझें नहीं जानता, मेरी प्रजा विचार नहीं करती।
हाय, यह जाति पाप से कैसी भरी है! यह समाज अधर्म से कैसा लदा हुआ है! इस वंश के लोग कैसे कुकर्मी हैं, ये लड़केबाले कैसे बिगड़े हुए हैं! उन्होंने यहोवा को छोड़ दिया, उन्होंने इस्राएल के पवित्र को तुच्छ जाना है! वे पराए बनकर दूर हो गए हैं।
तुम बलवा कर करके क्यों अधिक मार खाना चाहते हो? तुम्हारा सिर घावों से भर गया, और तुम्हारा ह्रृदय दु:ख से भरा है।
नख से सिर तक कहीं भी कुछ आरोग्यता नहीं, केवल चोट और कोड़े की मार के चिन्ह और सड़े हुए घाव हैं जो न दबाये गए, न बान्धे गए, न तेल लगाकर नरमाये गए हैं।
तुम्हारा देश उजड़ा पड़ा है, तुम्हारे नगर भस्म हो गए हैं तुम्हारे खेतों को परदेशी लोग तुम्हारे देखते ही निगल रहे हैं; वह परदेशियों से नाश किए हुए देश के समान उजाड़ है।
और सिय्योन की बेटी दाख की बारी में की झोंपड़ी की नाईं छोड़ दी गई है, वा ककड़ी के खेत में की छपरिया या घिरे हुए नगर के समान अकेली खड़ी है।
यदि सेनाओं का यहोवा हमारे थोड़े से लोगों को न बचा रखता, तो हम सदोम के समान हो जाते, और अमोरा के समान ठहरते।
हे सदोम के न्याइयों, यहोवा का वचन सुनो! हे अमोरा की प्रजा, हमारे परमेश्वर की शिक्षा पर कान लगा।
यहोवा यह कहता है, तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूं;
मैं बछड़ों वा भेड़ के बच्चों वा बकरों के लोहू से प्रसन्न नहीं होता। तुम जब अपने मुंह मुझे दिखाने के लिये आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पांव से रौंदो?
व्यर्थ अन्नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नये चांद और विश्रामदिन का मानना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है। महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझ से सहा नहीं जाता।
तुम्हारे नये चांदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूं; वे सब मुझे बोझ से जान पड़ते हैं, मैं उनको सहते सहते उकता गया हूं।
जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुंह फेर लूंगा तुम कितनी ही प्रार्थना क्यों न करो, तौभी मैं तुम्हारी न सुनूंगा क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से भरे हैं।
अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आंखों के साम्हने से अपने बुरे कामों को दूर करो भविष्य में बुराई करना छोड़ दो,
भलाई करना सीखो, यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो, अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।
यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।
यदि तुम आज्ञाकारी होकर मेरी मानो,
तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे और यदि तुम ने मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २०-२२
  • मरकुस ७:१-१३