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सोमवार, 17 नवंबर 2014

मार्गदर्शक


   एक ऐसी प्रणाली बनाना जिसके द्वारा अन्तरिक्ष में विद्यमान ’आँख’ सभी गाड़ियों, वायुयानों तथा नौकाओं एवं जलपोतों पर नज़र बनाए रखे और उनका मार्गदर्शन करती रहे बहुत जटिल कार्य है; लेकिन आज का ’जीपीएस’ अर्थात ’ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम’ यही कार्य करता है। पृथ्वी से 12,500 मील की ऊँचाई पर अन्तरिक्ष में हर समय 24 से 32 उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगा रहे होते हैं और पृथ्वी से संबंध बनाए रखते हैं, जानकारी का आदान-प्रदान करते रहते हैं। इन उपग्रहों द्वारा दी जाने वाली जानकारी के सही होने और उनसे ठीक मार्गदर्शन मिलने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वे पृथ्वी से एक निर्धारित दूरी तथा गति को बनाए रखें।

   मनुष्यों द्वारा बनाया गया यह ’जीपीएस’ परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले मार्गदर्शन का छोटा सा नमूना भर है। परमेश्वर के वचन बाइबल में उससे मिलने वाले मार्गदर्शन और सहायता के अनेक उदाहरण और वायदे हैं: परमेश्वर ने इस्त्राएल को आश्वस्त किया कि "और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता" (यशायाह 58:11)। भजनकार यह भली-भांति जानता था कि ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ परमेश्वर की नज़र उस पर बनी ना रहे (भजन 139:7-8)। ’जीपीएस’ के आने के बहुत पहले ही परमेश्वर "पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान" (यशायाह 40:22) संसार की हर बात पर अपनी नज़र और नियंत्रण बनाए हुए है, अपने लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है।

   इस बात का ज्ञान कि कोई है जो आप पर लगातार नज़र बनाए हुए है और उसकी नज़र से कहीं पर भी छिप पाना असंभव है उन्हें भयभीत कर सकता है जो किसी बात को छिपाना चाहते हैं या स्वयं छिपकर रहना चाहते हैं; परन्तु एक मसीही विश्वासी के लिए यह बात एक बड़े आनन्द, सान्तवना और आश्वासन की बात है। भजनकार इस बात से भी आश्वस्त था कि परमेश्वर का मार्गदर्शन सदा उसके साथ है (भजन 139:10); परमेश्वर का यही आश्वासन आज प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ भी है। परमेश्वर सदा ही आपको सही दिशा और सही मार्ग से ले जाना चाहता है। उसके हाथों में अपने जीवनों को समर्पित करके निशचिंत हो जाएं; आपको परमेश्वर से बेहतर कोई मार्गदर्शक कभी नहीं मिल सकता। सी. पी. हिया


गलत मार्ग पर चलने से बचने के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलते रहें।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। - भजन 32:8

बाइबल पाठ:  भजन 139:1-10
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 25-26


रविवार, 16 नवंबर 2014

कार्य और सामर्थ


   1924 में जौनी नामक एक बालक ने, जिसे बास्केटबॉल खेलना बहुत अच्छा लगता था, गाँव के एक छोटे से स्कूल से आठवीं कक्षा की परीक्षा पास करी। उसके पिता का दिल अपने बेटे के लिए प्रेम से तो भरा था, किन्तु बेटे के स्कूल पास कर लेने पर उसे कोई ईनाम दे पाने के लिए उनकी जेब खाली थी। इसलिए जौनी के पिता ने उसे एक कार्ड पर जीवन निर्वाह के 7 सिद्धांत लिख कर ईनाम के रूप में दिए, और उसे प्रोत्साहित किया कि वह उनका प्रतिदिन पालन करना आरंभ कर दे। उन सात सिद्धांतों में से तीन थे: अच्छी पुस्तकों का, विशेष कर परमेश्वर के वचन बाइबल का प्रतिदिन गहराई के साथ अध्य्यन करना; प्रत्येक दिन को अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति बनाने का प्रयास करना; और, प्रतिदिन अपने मार्गदर्शन के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करना और उससे मिलने वाली आशीषों के लिए प्रतिदिन उसका धन्यवादी बने रहना।

   अपने सारे जीवन भर जौनी परमेश्वर से सामर्थ माँग कर अपना प्रत्येक दिन व्यतीत करता रहा। बड़ा होकर वह एक उतकृष्ठ बास्केटबॉल खिलाड़ी बना जिसने परड्यू विश्वविद्यालय में तीन बार सर्वश्रेष्ठ अमेरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ी होने का खिताब जीता, और फिर आगे चलकर वह तब तक का सर्वश्रेष्ठ बास्केटबॉल प्रशिक्षक भी बना। जब 99 वर्ष की आयु में प्रशिक्षक जौन वुडेन की मृत्यु हुई, वह मृत्योप्रांत सबसे अधिक अपने चरित्र, अपने विश्वास और अनेक जीवनों को प्रभावित करने के लिए सराहे गए।

   परमेश्वर का वचन बाइबल आपके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन और उन्नति लाने की सामर्थ रखती है। उसका हर खण्ड परमेश्वर के अद्भुत ज्ञान तथा सामर्थ से परिपूर्ण है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को एक छोटी सी प्रार्थना सिखाई (मत्ती 6:9-13); किन्तु इस छोटी सी प्रार्थना में परमेश्वर और उससे हमारे संबंध के बारे में विलक्षण बातें हैं। यह प्रार्थना सिखाती है कि परमेश्वर से हमारा संबंध पिता और सन्तान का है और हम इसी संबंध के आधार पर प्रार्थना में उसके सम्मुख निसंकोच आ सकते हैं; उसकी आराधना और स्तुति कर सकते हैं (पद 9); हमें परमेश्वर के राज्य और उसकी इच्छा के खोजी होना चाहिए (पद 10); अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उस पर भरोसा रखना चाहिए (पद 11); और उससे क्षमा, छुटकारा तथा सामर्थ लेते रहना चाहिए (पद 12-13)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की यह अद्भुत शिक्षाएं, जैसे जौनी के जीवन में वैसे ही हमारे जीवनों में भी अद्भुत कार्य कर सकती हैं और हमें सामर्थ प्रदान कर सकती हैं कि हम भी अपने चरित्र, अपने विश्वास और अनेक जीवनों को प्रभावित करने के लिए जाने तथा सराहे जाने वाले व्यक्ति हो सकें। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


प्रभु यीशु के प्रति समर्पण प्रतिदिन निर्वाह की बुलाहट है।

जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। - भजन 119:9

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-15
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन। 
Matthew 6:14 इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा। 
Matthew 6:15 और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 22-24


शनिवार, 15 नवंबर 2014

वर्णन


   बच्चों की प्रार्थनाएं हमें दिखाती हैं कि वे परमेश्वर के बारे में क्या विचार रखते हैं। हाल ही में मैंने दो प्रार्थनाएं पढ़ीं:
   - "प्रीय परमेश्वर, इसका क्या अर्थ हुआ कि आप ’जलन रखने वाले’ परमेश्वर हैं? मैंने तो सोचा था कि आप ही के पास तो सब कुछ है।"

   - "मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि नारंगी रंग बैंगनी रंग के साथ मेल खाएगा, जब तक कि आपके द्वारा मंगलवार शाम को बनाया गया सूर्यास्त का दृश्य मैंने नहीं देख लिया - वह बहुत अच्छा था।"

   पहले बच्चे की समझ है कि क्योंकि परमेश्वर हर चीज़ का सृष्टिकर्ता और स्वामी है इसलिए उसे किसी बात की कोई घटी नहीं हो सकती; और दूसरे की सोच है कि परमेश्वर हमें बहुत सुन्दर दृश्य बना और दिखा सकता है। ये दोनों बच्चे अपनी अपनी सोच में सही हैं, लेकिन परमेश्वर अपने बारे में हमें क्या वर्णन देता है?

   जब परमेश्वर ने उसे इस्त्राएल को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर वाचा किए हुए देश कनान में ले जाने के लिए चुना तब मूसा के सामने भी यही प्रश्न था और उसे इस बात का उत्तर चाहिए था। वह अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति और अगुवाई के लिए सुनिश्चित हो जाना चाहता था, इसलिए मूसा ने परमेश्वर से विनती करी कि अपने आप को प्रगट करे (निर्गमन 33:13, 18)। प्रत्युत्तर में परमेश्वर बादल में होकर उतर आया और अपने आप को मूसा पर यह कहते हुए प्रगट किया: "तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया। और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है" (निर्गमन 34:5-7)।

   इस महान और अद्वितीय परमेश्वर के बारे में आज हम भी जान सकते हैं और हमारे साथ उसके संबंध के विषय में आश्वस्त हो सकते हैं, क्योंकि उसने अपने आप को अपने पुत्र, प्रभु यीशु मसीह के रूप में प्रकट किया है, अपने वचन बाइबल में अपना वर्णन दिया है। जैसे जैसे हम प्रभु यीशु और परमेश्वर के वचन बाइबल की निकटता में बढ़ते जाएंगे, हम परमेश्वर को, हमारे प्रति उसके प्रेम को, सदा हमारी भलाई करते रहने की उसकी लालसा को और अधिक सफाई से समझते जाएंगे। - ऐनी सेटास


परमेश्वर पिता के समान और तुल्य और कोई नहीं है।

क्योंकि उस[मसीह यीशु] में ईश्वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है। - कुलुस्सियों 2:9

बाइबल पाठ: निर्गमन 34:1-8, इब्रानियों 1:1-3
Exodus 34:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, पहिली तख्तियों के समान पत्थर की दो और तख्तियां गढ़ ले; तब जो वचन उन पहिली तख्तियों पर लिखे थे, जिन्हें तू ने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख्तियों पर भी लिखूंगा। 
Exodus 34:2 और बिहान को तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे साम्हने खड़ा होना। 
Exodus 34:3 और तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन पर्वत भर पर कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरते पाएं। 
Exodus 34:4 तब मूसा ने पहिली तख्तियों के समान दो और तख्तियां गढ़ी; और बिहान को सवेरे उठ कर अपने हाथ में पत्थर की वे दोनों तख्तियां ले कर यहोवा की आज्ञा के अनुसार पर्वत पर चढ़ गया। 
Exodus 34:5 तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया। 
Exodus 34:6 और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, 
Exodus 34:7 हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है। 
Exodus 34:8 तब मूसा ने फुर्ती कर पृथ्वी की ओर झुककर दण्डवत की।

Hebrews 1:1 पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। 
Hebrews 1:2 इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। 
Hebrews 1:3 वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 19-21


शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

नई शुरूआत


   मुझे एक गन्ध आई, जो किसी चीज़ के जलने की गन्ध के समान थी। मैं तुरंत दौड़कर रसोईघर में गई, लेकिन वहाँ तो कुछ भी नहीं पक रहा था, स्टोव और तंदूर दोनो बन्द थे। मैं उस गन्ध को सूँघते-सूँघते सारे घर में घूम ली, हर कमरे में गई, और अन्ततः मुझे मेरी नाक मेरे दफतर की ओर ले गई, और फिर मेरे काम करने की मेज़ पर, जिसके नीचे हमारी पालतु कुतिया मैगी बड़ी-बड़ी आँखों से मेरी ओर देख रही थी; वह गन्ध उससे ही आ रही थी और वह उस गन्ध से बचाने का मानो मुझ से आग्रह कर रही थी। जिसे मैं पहले जलने की गन्ध समझ बैठी थी वह वास्तव में स्कंक की गन्ध थी, जो हमारे इलाके में पाया जाने वाला एक छोटा जानवर होता है, और जब उस पर कोई हमला करता है तो वह हमलावर से बचने के लिए तेज़ बदबू छोड़ता है। मैगी ने बाहर किसी स्कंक पर हमला किया होगा और उस स्कंक की वह गन्ध अब मैगी पर आ गई थी, जिससे बचने के लिए वह सारे घर में घूमकर अब मेरे दफतर में मेरी मेज़ के नीचे आकर बैठ गई थी। उस दुर्गन्ध से बचने के लिए मैगी ने जो कुछ उससे बन सकता था किया, घर के हर स्थान पर गई, लेकिन वह यह नहीं समझ पा रही थी कि परेशान करने वाली वह दुर्गन्ध कहीं और से नहीं, स्वयं उसी में से आ रही थी, और वह चाहे जहाँ छुपने का प्रयास कर ले, दुर्गन्ध उसके साथ ही रहेगी। उस दुर्गन्ध को मैगी और घर से दूर करने के लिए मुझे मैगी को साफ करना पड़ा, तब ही उस समस्या का निवारण हो सका।

   मैगी की इस दुविधा ने मुझे मेरे प्रयासों के बारे में स्मरण कराया; अनेक बार मैं कष्टदायी परिस्थितियों से भागने का असफल प्रयास करती हूँ, परन्तु फिर मालुम पड़ता है कि समस्या परिस्थिति में नहीं स्वयं मुझे में ही है। समस्याओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराने या उनसे छिपने का प्रयास करने की हमारी यह प्रवृत्ति हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा से हमें मिली है, जिन्होंने पाप करके पहले परमेश्वर से छुपने का फिर दूसरों पर दोषारोपण का प्रयास किया। लेकिन जैसे तब, वैसे ही अब भी, समस्या से भागने से उसके दुषपरिणामों से बचा नहीं जा सकता, क्योंकि समस्या भी हमारे ही साथ है और उसके दुषपरिणाम भी हमारे ही साथ होंगे।

   जैसे मैगी को, वैसे ही हमें भी अपनी सफाई के लिए समस्या से भागने या छिपने का प्रयास करने की नहीं वरन साफ कर सकने वाले एक सहायक की आवश्यकता होती है। हमारा प्रभु यीशु ही वह सहायक है जिसका कलवरी के क्रूस पर बहाया गया लोहू संसार के हर व्यक्ति के हर पाप को धोकर उसे शुद्ध और साफ करने की क्षमता रखता है। मैं परमेश्वर की बहुत धन्यवादी हूँ कि जब कभी मैं किसी पाप में पड़ती हूँ, और पश्चाताप के साथ उसे उसके सामने मान लेती हूँ तो वह अपने वायदे: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9) के अनुसार मुझे क्षमा करता है और साफ भी करता है, तथा मुझे एक नई शुरूआत प्रदान करता है; और यही नई शुरूआत हर उस व्यक्ति के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है जो प्रभु यीशु के पास पापों की क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए आता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


पाप के दाग़ मसीह यीशु के लोहू ही से धुल सकते हैं।

पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। - 1 यूहन्ना 1:7

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:6-24
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। 
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए। 
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? 
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया। 
Genesis 3:11 उसने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैं ने तुझे बर्जा था, क्या तू ने उसका फल खाया है? 
Genesis 3:12 आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैं ने खाया। 
Genesis 3:13 तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मैं ने खाया। 
Genesis 3:14 तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, तू ने जो यह किया है इसलिये तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा: 
Genesis 3:15 और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा। 
Genesis 3:16 फिर स्त्री से उसने कहा, मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा। 
Genesis 3:17 और आदम से उसने कहा, तू ने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैं ने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना उसको तू ने खाया है, इसलिये भूमि तेरे कारण शापित है: तू उसकी उपज जीवन भर दु:ख के साथ खाया करेगा: 
Genesis 3:18 और वह तेरे लिये कांटे और ऊंटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा ; 
Genesis 3:19 और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा। 
Genesis 3:20 और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई। 
Genesis 3:21 और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बना कर उन को पहिना दिए। 
Genesis 3:22 फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिये अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ा कर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे। 
Genesis 3:23 तब यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की बाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस में से वह बनाया गया था। 
Genesis 3:24 इसलिये आदम को उसने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करुबों को, और चारों ओर घूमने वाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 17-18


गुरुवार, 13 नवंबर 2014

इन्कार


   उसके घर पर हमारे पहुँचने के पश्चात मार्टी ने हम से कहा, "अच्छा, तो नियम इस प्रकार से हैं; आप सब जो चाहें, जब चाहें, जहाँ चाहें वह सब कर सकते हैं सिवाय उसके जिसके लिए आप को इन्कार किया जाए।" जब हम छुट्टी बिताने हमारे मित्र मार्टी के झील के किनारे बने घर पर गए तब उससे हमें मिलने वाले ये पहले निर्देश थे। मार्टी और उसकी पत्नि लिन्न को आतिथ्य बहुत अच्छा लगता है और वे अपने अतित्थियों को अपने घर में आनन्द मनाने के लिए बहुत स्वतंत्रता देते हैं। हमने जब वहाँ झील में नौका विहार के लिए भिन्न नावों को देखा तो हम समझ गए कि वह दोपहर हमारे लिए बड़े आनन्द का समय होने वाली थी। मार्टी के घर में हमारे प्रवास के सारे समय में मार्टी ने केवल एक बार ’ना’ बोला, जब उसने देखा कि हमारी नाव के निकट तैर रहे कुछ हंसों को हम कुछ खाना खिलाने पर थे। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह उन हंसों के बर्ताव को जानता था, जो हम नहीं जान्ते थे - यदि एक बार उन्हें कुछ खाने को दिया जाता तो वे और माँगने लगते और नहीं मिलने पर आक्रमक हो जाते।

   परमेश्वर ने हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा के लिए एक बहुत अच्छा स्थान बना कर दिया था और उन्हें वहाँ आनन्दित रहने के लिए बहुत स्वतंत्रता थी। परमेश्वर ने केवल एक बात के लिए उन्हें मना किया था - एक विशेष पेड़ से उन्हें फल नहीं खाना था, बाकि सब कुछ उनके लिए खुला था। लेकिन शैतान के बहकावे में आकर उन्होंने परमेश्वर की इस आज्ञा की अवहेलना करी, शैतान की बातों के कारण उन्हें लगा कि वे परमेश्वर से बेहतर जानते हैं। उनकी इस एक अनाज्ञाकारिता के कारण पाप संसार में आया और पाप के साथ मृत्यु भी आई तथा संसार में फैल गई।

   हम भी कई बार वही गलती करते हैं जो आदम और हव्वा ने करी थी - परमेश्वर के इन्कार के बावजूद अपनी इच्छा को पूरा करना। अनेक बार हम नहीं समझ पाते हैं कि परमेश्वर ने किसी बात के लिए इन्कार क्यों किया है। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर का उद्देश्य सदा हमारी भलाई ही रहता है, और उसका इन्कार भी इसी भलाई के लिए होता है। आज चाहे किसी बात के लिए हमें उसके इन्कार का सामना करना पड़े, लेकिन स्मरण रखें कि उस इन्कार के साथ परमेश्वर हम से यह भी कह रहा है कि, "मेरा विश्वास करो, मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए क्या भला है; बस मेरी बात मान कर चलते रहो।" - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर हमारी कोई विनती अस्वीकार कर सकता है परन्तु हमारी भलाई करते रहने के विश्वास को कभी तोड़ नहीं सकता।

पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा। -  उत्पत्ति 2:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-7
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? 
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं। 
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे। 
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे, 
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे। 
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।

एक साल में बाइबल: 
प्रेरितों 15-16

बुधवार, 12 नवंबर 2014

जोखिम


   बुनियादी सैनिक प्रशिक्षण के समय डेनिस रौस से उसके साथी सैनिक तथा उसका प्रशिक्षक बहुत अप्रसन्न रहते थे क्योंकि वह शान्तिप्रीय था और युद्ध के लिए हथियार उठाने से इन्कार करता था। उसके इस भाव के कारण उसके साथी उसके साहस पर शक करते थे। डेनिस मसीही विश्वासी था और उसका प्रशिक्षण युद्ध समय में घायल सैनिकों तक चिकित्सा सहायता पहुँचाने का था, उसे युद्ध भूमि पर जाने में कोई संकोच नहीं था, लेकिन वहाँ वह जान बचाने के लिए जाना चाहता था, जान लेने के लिए नहीं।

   डेनिस के साहस को लेकर उसके साथियों का सन्देह जाता रहा जब उसकी टुकड़ी को युद्ध क्षेत्र में जाने का आदेश मिला। दूसरे विश्वयुद्ध के समय ओकिनावा के युद्ध में डेनिस ने अद्भुत साहस का प्रदर्शन किया। मशीनगन से हो रही गोलियों की बौछार में भी वह युद्ध में घायल हो रहे सैनिकों को खींच-खींच कर सुरक्षित स्थानों पर लाता रहा। उसकी प्रार्थना रहती थी, "प्रभु, मुझे एक और घायल सैनिक को बचा लाने की सामर्थ दे।" अन्ततः डेनिस ने 70 से भी अधिक घायल सैनिकों को एक पहाड़ी से नीचे सुरक्षित स्थान पर चिकित्सीय सहायता के लिए पहुँचाया। उसके इस साहसिक कार्य के लिए उसे अपने देश का सर्वोच्च सैनिक सम्मान पदक दिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसे ही मसीही विश्वासी "सैनिक" का उल्लेख है जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की सहायता करी। प्रेरित पौलुस ने इपफ्रुदितुस के विषय में लिखा, "इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे" (फिलिप्पियों 2:29-30)।

   आज सारे संसार में अनेकों मसीही विश्वासी प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा सारे संसार के हर व्यक्ति के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाने के कारण अपने प्राणों को जोखिम में डाले हुए हैं। उन सभी के लिए प्रार्थना करें कि उन संकटपूर्ण परिस्थितियों में उसकी सेवकाई करते समय परमेश्वर उनकी रक्षा करता रहे और उनकी सहायता के लिए उपयुक्त सेवकों को भी खड़ा करे। - डेनिस फिशर


साहस का अर्थ आगे बढ़ने की शक्ति रखना नहीं है, वरन शक्ति ना होते हुए भी आगे बढ़ते रहना है।

और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो। - 1 थिस्सुलुनीकियों 5:12 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:25-30
Philippians 2:25 पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। 
Philippians 2:26 क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था। 
Philippians 2:27 और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो। 
Philippians 2:28 इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए। 
Philippians 2:29 इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। 
Philippians 2:30 क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 13-14


मंगलवार, 11 नवंबर 2014

मृत्यु तक विश्वासयोग्य


   इंगलैंड के लिवरपूल शहर में स्थित वॉल्कर आर्ट गैलरी में एक चित्र है जिसका शीर्षक है "Faithful unto Death" अर्थात मृत्यु तक विश्वासयोग्य। यह चित्र प्राचीन शहर पौम्पी का है जो सन 79 के माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी फटने से कुछ ही पलों में लावा और राख में दफन हो गया और वहाँ के जीवन के वे क्षण राख में दबे हुए आज भी अपनी कहानी बताते हैं। उस चित्र में एक रोमी सिपाही को दिखाया गया है जो अपने सैनिक वस्त्र धारण किए हुए सन्तरी के कार्य पर डटा हुआ है जबकि उसके आस-पास सब कुछ लावा और राख में दबता जा रहा है। यह चित्र पौम्पी में राख में दबे हुए खड़े एक सैनिक के अवशेषों को देखकर बनाया गया है। यह चित्र गवाह है उन विश्वासयोग्य पहरेदारों का जो अपने चारों ओर हो रहे भयनाक विनाश में भी अपने स्थानों पर स्थिर डटे रहे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में भी प्रभु यीशु पहली शताब्दी की स्मुरना की मसीही विश्वासियों की मण्डली को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वस्त करता है कि वह उनके मसीही विश्वास के कारण उन पर आ रहे सताव को जानता है, उसने उनकी विश्वासयोग्यता को देखा है, और मसीह यीशु उन्हें उन विकट परिस्थितियों में भी विश्वासयोग्य बने रहने को प्रेरित करता है: "मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा" (प्रकाशितवाक्य 2:9-10)।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी परिस्थितियों और हमारे अनुभवों को भली-भांति जानता है, वह हमारे विषय में कुछ ऐसा भी जानता है जिसे हम नहीं जानते - हमारा भविष्य। चाहे इस संसार में हमें क्लेषों से होकर निकलना पड़े और सांसारिक वस्तुओं या जीवन का नुकसान भी उठाना पड़े, लेकिन हमारी अनन्तकाल की आशीषें और अनन्तकाल का जीवन सदा हमारे प्रभु परमेश्वर के साथ सुरक्षित है, और अपने प्रभु की सामर्थ से हम जब तक इस संसार में हैं, उसके द्वारा निर्धारित स्थानों पर उसके लिए मृत्यु तक विश्वासयोग्य बने रह सकते है (फिलिप्पियों 4:12-13) तथा मृत्योप्रांत उसके साथ अनन्त महिमा में प्रवेश करने को तैयार हो सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे विश्वास की परीक्षा, परमेश्वर की विश्वास्योग्यता प्रमाणित करने का अवसर होती है।

मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। फिलिप्पियों 4:12-13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:8-11
Revelation 2:8 और स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो प्रथम और अन्‍तिम है; जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है कि। 
Revelation 2:9 मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। 
Revelation 2:10 जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा। 
Revelation 2:11 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, उसको दूसरी मृत्यु से हानि न पहुंचेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 10-12