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गुरुवार, 14 मई 2015

महत्व


   मेरी परवरिश एक छोटे से कस्बे में हुई; वहाँ ना कोई प्रसिद्ध लोग थे, ना ही मार्गों पर कोई भीड़-भाड़ थी और ना ही करने के लिए कुछ अधिक काम थे। लेकिन सांसारिकता के बुरे प्रभावों से दूर, मैं अपनी शान्त, सरल, तथा सीधी-सादी परवरिश के लिए सदा धन्यवादी रही हूँ। एक संध्या जब मैं और मेरे पति एक व्यावसायिक समारोह में रात्रि के भोजन पर आमंत्रित थे तो वहाँ उपस्थित एक स्त्री ने मुझ से पूछा कि मैं किस स्थान से हूँ; जब मैंने उसे अपने उस छोटे से कस्बे का नाम बताया तो वह तुरंत बोली, "क्या उस छोटे से स्थान को स्वीकारने में तुम्हें कोई संकोच नहीं होता?" मुझे समझ नहीं आया कि वह मज़ाक कर रही है या गंभीरता से यह कह रही है, किंतु तुरंत ही मेरा उत्तर था, "नहीं!" चाहे मेरा वह कस्बा आधुनिकता के मामले में छोटा समझा जाता हो किंतु जीवन के लिए महत्वपूर्ण बातों में वह कदापि छोटा नहीं था। मेरा परिवार एक ऐसे चर्च समूह का अंग था जहाँ अभिभावक अपने बच्चों की परवरिश परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों 6:4 में दिए गए निर्देशानुसार करते थे।

   हमारे प्रभु यीशु की परवरिश भी एक छोटे से स्थान नासरत में हुई थी। जब प्रभु यीशु की सेवकाई आरंभ हुई तो उसके विषय में नतनएल नामक एक व्यक्ति ने कहा, "...क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?..." (यूहन्ना 1:46)। प्रभु यीशु ने प्रमाणित कर दिया कि नतनएल के प्रश्न का उत्तर था "हाँ"; यद्यपि प्रभु यीशु की परवरिश एक छोटे से महत्वहीन स्थान नासरत में हुई वे संसार भर के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए और आज भी हैं।

   अनुभव ने मुझे सिखाया है और बाइबल भी इसको प्रमाणित करती है कि महत्व इस बात का नहीं है कि आप की परवरिश कहाँ पर हुई है, वरन इस बात का है कि वह परवरिश कैसी हुई है! कई बार लोग हमें बड़े स्थानों से आने वाले महत्वपूर्ण लोगों के अपेक्षा छोटा मानने लगते हैं, और यही हमें जताने का भी प्रयास करते हैं। किंतु सदा स्मरण रखे कि हम परमेश्वर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं; इतने कि हमें अपने पास ले आने के लिए उसने अपने एकलौते पुत्र को बलिदान होने के लिए भेज दिया, ताकि हम अनन्त काल तक उसके साथ रहें। जब हम परमेश्वर के वचन के अनुसार अपने जीवन को चलाते हैं तो वह हमें आत्मा में बलवन्त और बुद्धिमान भी बना देता है, किसी के सामने छोटा नहीं रहने देता और अन्ततः अपने स्वर्गीय राज्य में आदर के साथ अनन्तकाल के लिए हमारा स्वागत करता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हम कहाँ से आए हैं से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम क्या बन सके हैं और सबसे महत्वपूर्ण है कि अन्ततः हम कहाँ जाएंगे।

और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसियों 6:4

बाइबल पाठ: लूका 2:41-52
Luke 2:41 उसके माता-पिता प्रति वर्ष फसह के पर्व में यरूशलेम को जाया करते थे। 
Luke 2:42 जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए। 
Luke 2:43 और जब वे उन दिनों को पूरा कर के लौटने लगे, तो वह लड़का यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे। 
Luke 2:44 वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्बियों और जान-पहचानों में ढूंढ़ने लगे। 
Luke 2:45 पर जब नहीं मिला, तो ढूंढ़ते-ढूंढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए। 
Luke 2:46 और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया। 
Luke 2:47 और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे। 
Luke 2:48 तब वे उसे देखकर चकित हुए और उस की माता ने उस से कहा; हे पुत्र, तू ने हम से क्यों ऐसा व्यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूंढ़ते थे। 
Luke 2:49 उसने उन से कहा; तुम मुझे क्यों ढूंढ़ते थे? क्या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है? 
Luke 2:50 परन्तु जो बात उसने उन से कही, उन्होंने उसे नहीं समझा। 
Luke 2:51 तब वह उन के साथ गया, और नासरत में आया, और उन के वश में रहा; और उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं।
Luke 2:52 और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30



बुधवार, 13 मई 2015

ट्यूलिप


   संसार के अनेक देश बसन्त ऋतु के स्वागत में ट्यूलिप दिवस मनाते हैं। ट्यूलिप की बात करने पर मेरा ध्यान निदिरलैंड देश पर जाता है जो अपने ट्यूलिप्स की खेती के लिए विश्व-विख्यात है। किंतु ट्यूलिप्स की व्यावसायिक खेती मध्य-पूर्व में आरंभ हुई थी, और आज ये रंगबिरंगे सुन्दर फूल सारे संसार में पाए जाते हैं। अनुमान है कि आज इस फूल की 109 उप-जातियाँ संसार भर में उद्यानों, मार्गों के किनारे, घरों के बाग़ीचों और अन्य स्थानों पर उगाई जाती हैं। पिछली पतझड़ मैंने ट्यूलिप की कुछ गाँठें अपने बाग़ीचे में बोई थीं। अब कुछ महीने पश्चात, बसन्त ऋतु के आगमन पर मेरे बाग़ीचे में सुन्दर ट्यूलिप के फूल दिखाई दे रहे हैं और मुझे स्मरण करवा रहे हैं कि ग्रीष्म ऋतु भी आने वाली है, जिसके साथ आँखों को आनन्दित करने के लिए और भी फूल देखाई देंगे।

   मेरे लिए फूल परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह को स्मरण करवाने का माध्यम हैं। हमारे प्रभु यीशु ने अपने महान पहाड़ी उपदेश में ट्यूलिप के फुलों के समान उगने वाले सोसन के फूलों के द्वारा परमेश्वर के इस अनुग्रह के बारे में शिक्षा देते हुए कहा, "और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?" (मत्ती 6:28-30)।

   ये फूल हमें प्रति वर्ष शीत ऋतु के अन्त और बसन्त के आगमन को दर्शाते हैं, साथ ही यह भी स्मरण करवाते हैं कि वह परमेश्वर जो इन फूलों का ध्यान रखता है, उन्हें सारी शीत ऋतु में सुरक्षित रखता है तथा बसन्त के आगमन पर उन्हें धरती के अन्दर से फूट कर बाहर आने और सुन्दरता बिखरने की सामर्थ देता है, वही परमेश्वर पिता मेरा भी ध्यान रखता है, मेरी भी मेरी सुरक्षा तथा प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के इंतिज़ाम करता है, उचित समय पर विलक्षण रीति से मुझ में होकर संसार पर अपनी महिमा प्रगट करता है। - डेनिस फिशर


यदि प्रभु यीशु फूलों और पक्षियों का ध्यान रखता है, तो निःसन्देह वह मेरा और आपका भी ध्यान रखता है।

सो जब तुम बुरे हो कर अपने लड़के-बालों को अच्छी वस्‍तुएं देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा। - लूका 11:13

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
2 राजा 17-18
यूहन्ना 3:19-36


मंगलवार, 12 मई 2015

आनन्द


   मैं बच्चों की एक बेसबॉल टीम के प्रशिक्षक का कार्य कर रहा था; एक खेल के दौरान बेसबॉल की गेन्द आकर एक बच्चे के मुँह पर लगी। उसे कोई गंभीर चोट तो नहीं आई किंतु वह इस अनुभव से डर अवश्य गया। इसके बाद हर खेल में वह बहादुरी के साथ प्रयास तो करता रहा किंतु गेन्द को बल्ले से मार पाना उसके लिए लगभग असंभव सा हो गया। अपने अन्तिम खेल में हम प्रतिद्वंदी टीम से बहुत पिछड़ गए थे, और हमारे पास आनन्दित होने की कोई आशा या कारण नहीं रह गया था। ऐसे में उस बच्चे की बारी आई और वह गेन्द को मारने के लिए स्थान पर जाकर खड़ा हो गया; गेन्द उसकी ओर फेंकी गई, और सब देखकर दंग रह गए कि उसने पूरी ताकत से गेन्द को ऐसा मारा कि वह दूर तक चली गई। टीम के उसके सभी साथी खुशी से झूम उठे; उसके अपने तथा अन्य बच्चों के अभिभावक एवं माता-पिता खुशी से उसे प्रोत्साहित करने लगे, और यद्यपि हम अभी खेल को हारने की स्थिति से बाहर नहीं आए थे, मैं तो ज़ोर ज़ोर से उछल कर खुशी से चिल्लाने लगा। हम सब उस बच्चे के साहस से अति आनन्दित हो गए थे।

   मुझे लगता है कि ऐसे ही हमारा परमेश्वर पिता भी हमें जीवन में प्रोत्साहित करता है। वह हम से बहुत प्रेम करता है और कहता है कि तुम "सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ" (इफिसियों 3:18-19)।

   कुछ लोग सोचते हैं कि परमेश्वर हम से प्रेम नहीं करता, वरन इस इंतज़ार में रहता है कि हम कोई गलती करें और वह हमें द्ण्डित करे। ऐसे लोगों को परमेश्वर के हमारे प्रति गहरे प्रेम के बारे में बताने का हमें अवसर रहता है। उनके उस आनन्द की कलपना कीजिए जब आप उन्हें परमेश्वर के प्रेम के बारे में बताएंगे कि कैसे उस प्रेम में होकर उसने हम सभी के पापों के प्रायश्चित के लिए अपने एकलौते पुत्र को कलवरी के क्रूस पर बलिदान होने के लिए दे दिया जो आज भी अपने लोगों के लिए प्रार्थना निवेदन करता है तथा उन्हें प्रोत्साहित करता है, और वे उस प्रेम को अनुभव करने पाएंगे। इस आनन्द को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाईए। - रैन्डी किलगोर


प्रभु यीशु के कीलों से छिदे हाथ, परमेश्वर के प्रेम से भरे हृदय को दिखाते हैं।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: इफिसियों 3:14-21
Ephesians 3:14 मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, 
Ephesians 3:15 जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। 
Ephesians 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ। 
Ephesians 3:17 और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। 
Ephesians 3:18 सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। 
Ephesians 3:19 और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Ephesians 3:20 अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है, 
Ephesians 3:21 कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-16
  • यूहन्ना 3:1-18



सोमवार, 11 मई 2015

स्मारक


   हाल ही में मुझे यह आभास हुआ कि मेरे दफतर में लगे सभी चित्र और स्मारक बीते समयों को ही दिखाते हैं। मैंने उन्हें हटाने का विचार किया, लेकिन साथ ही यह विचार भी मन में आया कि कहीं उन लोगों, स्थानों और घटनाओं के स्मरण को बनाए रखने का आज के मेरे जीवन में कोई महत्व तो नहीं है? उन स्मारकों को लेकर जीवन के भूतकाल में उल्झे रहने से बचने के लिए मुझे उनमें विद्यमान अपने वर्तमान और भविष्य के लिए महत्व को खोजना था।

   जब परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल, मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा के स्थान कनान देश में पहुँचे तब परमेश्वर ने उनके अगुवे, यहोशु से कहा कि इस्त्राएल के बारहों गोत्रों से एक एक जन को चुनें जो यरदन नदी में से एक एक पत्थर उस स्थान से जहाँ उन्होंने नदी को पार किया था, लेकर आएं और अपने शिविर के पास रख दें। वे पत्थर आते दिनों के लिए स्मारक थे जिससे कि जब उनकी भावी पीढ़ीयाँ उन पत्थरों के बारे में पूछें तो वे उन्हें परमेश्वर की सामर्थ और विश्वासयोग्यता के बारे में, जिसे उन्होंने अनुभव किया था, बता सकें।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण, हमारे लिए भी यह भला है कि बीते दिनों में अनुभव किए गए उसके प्रेम और अनुग्रह के स्मारक हम अपने साथ रखें, जो ना केवल हमें उसकी विश्वासयोग्यता के बारे में स्मरण दिलाते रहें, वरन उसकी इस विश्वासयोग्यता की गवाही दूसरों के सामने रखने के अवसर भी हमें प्रदान करें। ये स्मारक हमें आज और आने वाले समय के लिए उसकी विश्वासयोग्यता के लिए भी आश्वस्त करते रहेंगे, जिससे हम सदा उसके आदर तथा भय में बनें रहें।

   परमेश्वर ने भूतकाल में जो कुछ हमारे लिए किया है वह हमारे वर्तमान तथा भविष्य के लिए एक सशक्त आश्वासन है; उसे कभी अपनी नज़रों से ओझल ना होने दें। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


बीते दिनों की बहुमूल्य यादें हमारे आज तथा कल के लिए आवश्यक विश्वास को सुदृढ़ कर सकती हैं।

यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। - व्यवस्थाविवरण 6:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 4:1-6; 20-24
Joshua 4:1 जब उस सारी जाति के लोग यरदन के पार उतर चुके, तब यहोवा ने यहोशू से कहा, 
Joshua 4:2 प्रजा में से बारह पुरूष, अर्थात गोत्र पीछे एक एक पुरूष को चुनकर यह आज्ञा दे, 
Joshua 4:3 कि तुम यरदन के बीच में, जहां याजकों ने पांव धरे थे वहां से बारह पत्थर उठा कर अपने साथ पार ले चलो, और जहां आज की रात पड़ाव होगा वहीं उन को रख देना। 
Joshua 4:4 तब यहोशू ने उन बारह पुरूषों को, जिन्हें उसने इस्राएलियों के प्रत्येक गोत्र में से छांटकर ठहरा रखा था, 
Joshua 4:5 बुलवाकर कहा, तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सन्दूक के आगे यरदन के बीच में जा कर इस्राएलियों के गोत्रों की गिनती के अनुसार एक एक पत्थर उठा कर अपने अपने कन्धे पर रखो, 
Joshua 4:6 जिस से यह तुम लोगों के बीच चिन्हानी ठहरे, और आगे को जब तुम्हारे बेटे यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है? 
Joshua 4:20 और जो बारह पत्थर यरदन में से निकाले गए थे, उन को यहोशू ने गिलगाल में खड़े किए। 
Joshua 4:21 तब उसने इस्राएलियों से कहा, आगे को जब तुम्हारे लड़के-बाले अपने अपने पिता से यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है? 
Joshua 4:22 तब तुम यह कहकर उन को बताना, कि इस्राएली यरदन के पार स्थल ही स्थल चले आए थे। 
Joshua 4:23 क्योंकि जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने लाल समुद्र को हमारे पार हो जाने तक हमारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा था, वैसे ही उसने यरदन का भी जल तुम्हारे पार हो जाने तक तुम्हारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा; 
Joshua 4:24 इसलिये कि पृथ्वी के सब देशों के लोग जान लें कि यहोवा का हाथ बलवन्त है; और तुम सर्वदा अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानते रहो।

  • एक साल में बाइबल: 2 राजा 13-14
  • यूहन्ना 2



रविवार, 10 मई 2015

समय


   जब मैं पास्टर का कार्य कर रहा था तब मुझे कई माताओं के मध्य सेवकाई के अवसर मिले। मैं उनके पास अस्पतालों में गया और उनके नवजात शिशुओं के लिए उनके साथ आनन्दित हुआ। मैं उनके घरों में गया और बच्चों की अनाज्ञाकारिता के कारण व्याकुल और चिंतित महिलाओं को समझाया, मार्गदर्शन प्रदान किया, उन्हें आश्वस्त किया कि परमेश्वर उनके बलवाई बच्चों का भी ध्यान रखे हुए है। मैं उन माताओं के साथ भी खड़ा होकर दुखी हुआ जिनके बच्चे बीमार या घायल थे और मैं उन माताओं के दुख में उनके साथ दुखी होकर रोया भी जब उनके बच्चे किसी कारण इस संसार से जाते रहे।

   प्रभु यीशु की माता मरियम भी आनन्द और शोक के समयों से होकर निकली थी। उन्हें कितना आनन्द हुआ होगा जब मसीह यीशु का जन्म हुआ (लूका 2:7)। वो कितनी उत्साहित हुई होगी जब चरवाहे और फिर पूर्व देश के ज्ञानी प्रभु को देखने और दण्डवत करने आए (लूका 2:8-20; मत्ती 2:1-12)। उन्हें कितनी बेचैनी हुई होगी जब शिमौन ने भविष्यवाणी करी कि उसका दिल दुख की तलवार से छेदा जाएगा (लूका 2:35); और उसके लिए कितना हृदय-विदारक रहा होगा जब उन्होंने अपने बेटे को क्रूस पर लटके और मरते हुए देखा होगा (यूहन्ना 19:25-30)। लेकिन मरियम के लिए ये भिन्न समय उनके पुत्र की मृत्यु के भयानक दृश्य के साथ समाप्त नहीं हो गए; जब प्रभु यीशु मृतकों में से जीवित हो उठा, तब उनके लिए अभूतपूर्व आनन्द का समय भी आया।

   ने केवल माताएं, वरन हम सब अपने जीवन काल में अनेक प्रकार के आनन्द तथा दुख के समयों से होकर निकलते हैं; लेकिन जब हम अपने जीवन को प्रभु यीशु के हाथ में समर्पित कर देते हैं तो हमारे हर प्रकार के समय उसकी महिमा तथा उसके अनन्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग हो सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


माँ होना परमेश्वर के साथ एक पवित्र ज़िम्मेदारी निभाने की सहभागिता है।

हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है। - सभोपदेशक 3:1

बाइबल पाठ: लूका 2:6-35
Luke 2:6 उन के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए। 
Luke 2:7 और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा: क्योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी। 
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। 
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। 
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा, 
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। 
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। 
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। 
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं 
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 10-12
  • यूहन्ना 1:29-51


शनिवार, 9 मई 2015

निश्चिंत


   पिछली गर्मियों में मेरे पति और मैंने मिलकर एक संगीत समारोह आयोजित किया जो कैंसर से पीड़ित बच्चों के इलाज संबंधी अनुसन्धान में सहायता राशि जमा करने के लिए था। हमने उस समारोह को अपने घर के पीछे के आंगन में आयोजित किया था किंतु बिगड़ते मौसम ने ऐन मौके पर हमें हमारी योजना बदलने पर मजबूर कर दिया और समारोह से कुछ घंटे पहले ही हमें आयोजन से संबंधित सब कुछ अपने चर्च प्रांगण में बनी व्यायामशाला में ले जाना पड़ा। आयोजन के स्थानांतरण के कार्य में हमारे मित्र और परिवार के लोग सहायता करने लगे, कोई खाने-पीने के सामान को तो कोई सजावट की चीज़ों को तो कोई अन्य संगीत संबंधित सामान को नए स्थान पर ले जाने लगा, तो कोई अन्य निमंत्रित 100 से भी अधिक मेहमानों को फोन करके आयोजन के नए स्थल के बारे में बताने लगा। इस व्यस्तता में मेरे पति के चिंतित चेहरे को देख, हमारी बेटी रोज़ी ने अपने पिता को गले लगाते हुए उनसे कहा, "पापा चिंता मत करो; हम सब आपके साथ हैं!"

   किसी परेशानी के समय ऐसा सुनना बहुत शान्तिदायक होता है, हमें स्मरण दिलाता है कि हम अकेले नहीं हैं; कोई और भी हमारे साथ है जो हमें आश्वस्त कर रहा है, "मत घबराओ, मैं तुम्हारे लिए यहीं हूँ, उपलब्ध हूँ, और जहाँ कहीं कुछ रह जाएगा, मैं उसे संभाल लूँगा। मैं तुम्हारे लिए आँखों और हाथों का एक और जोड़ा बन जाऊँगा।" 

   जब इस्त्राएली मिस्त्र के दास्तव से निकल कर वाचा किए हुए कनान देश की स्वतंत्रता की ओर जा रहे थे तो उन्हें वापस दास्तव में खींच लाने के लिए मिस्त्र के राजा फिरौन ने अपनी सेना और रथों को उनके पीछे भेजा (निर्गमन 14:17); परन्तु "तब परमेश्वर का दूत जो इस्राएली सेना के आगे आगे चला करता था जा कर उनके पीछे हो गया; और बादल का खम्भा उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा ठहरा" (निर्गमन 14:19)। परमेश्वर ने इस प्रकार उनकी रात भर रक्षा और अगुवाई करी तथा उन्हें लाल समुद्र को दो भाग करके सुरक्षित दूसरे छोर पर ले गया।

   आज भी हमारा परमेश्वर पिता हमें आश्वस्त करता है, निश्चिंत रहो, मैं सर्वदा तुम्हारे साथ हूँ (इब्रानियों 13:5); इसीलिए प्रेरित पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें समझाया, "सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?" (रोमियों 8:31) - सिंडी हैस कैस्पर


हमारी ज़िम्मेदारी है अपनी चिंताओं को उतार देना, परमेश्वर की ज़िम्मेदारी है उन चिंताओं को समाधान के लिए उठा लेना।

तब तेरा प्रकाश पौ फटने की नाईं चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा। - यशायाह 58:8

बाइबल पाठ: निर्गमन 14:19-25
Exodus 14:19 तब परमेश्वर का दूत जो इस्राएली सेना के आगे आगे चला करता था जा कर उनके पीछे हो गया; और बादल का खम्भा उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा ठहरा। 
Exodus 14:20 इस प्रकार वह मिस्रियों की सेना और इस्राएलियों की सेना के बीच में आ गया; और बादल और अन्धकार तो हुआ, तौभी उस से रात को उन्हें प्रकाश मिलता रहा; और वे रात भर एक दूसरे के पास न आए। 
Exodus 14:21 और मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया; और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाई, और समुद्र को दो भाग कर के जल ऐसा हटा दिया, जिससे कि उसके बीच सूखी भूमि हो गई। 
Exodus 14:22 तब इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर हो कर चले, और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार का काम देता था। 
Exodus 14:23 तब मिस्री, अर्थात फिरौन के सब घोड़े, रथ, और सवार उनका पीछा किए हुए समुद्र के बीच में चले गए। 
Exodus 14:24 और रात के पिछले पहर में यहोवा ने बादल और आग के खम्भे में से मिस्रियों की सेना पर दृष्टि कर के उन्हें घबरा दिया। 
Exodus 14:25 और उसने उनके रथों के पहियों को निकाल डाला, जिससे उनका चलना कठिन हो गया; तब मिस्री आपस में कहने लगे, आओ, हम इस्राएलियों के साम्हने से भागें; क्योंकि यहोवा उनकी ओर से मिस्रियों के विरुद्ध युद्ध कर रहा है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 7-9
  • यूहन्ना 1:1-28



शुक्रवार, 8 मई 2015

सृष्टि


   मैं और मेरा बेटा अपने घर वापस लौट रहे थे। हमने दूर से ही एक विशाल खाई के किनारे उगे हुए अकेले पेड़ पर बैठे एक विशाल पक्षी को देखा। हमारे निकट आने पर वह पक्षी, अमेरिका में पाया जाने वाला सुनहला गरुड़, पेड़ से उछला, अपने पंख फैलाए और उड़ान भरने लगा। उस गरुड़ के विशालकाय पंखों में बनी सुनहरी धारियाँ प्रातः के सूरज की रौशनी में झिलमिलाने लगीं; उसके विशाल आकार और अद्भुत सुन्दरता ने हमें मन्त्रमुग्ध सा कर दिया। परमेश्वर की सृष्टि की उस विलक्षण रचना तथा सुन्दरता को देख पाने के अवसर के लिए हमने अपने आप को धन्य जाना।

   सृष्टि परमेश्वर के विस्मयकारी तथा पराक्रमी कामों का वर्णन करती है (भजन 145:5) और जब हम थम कर परमेश्वर के उन कामों पर मनन करते हैं तो उन्हें बनाने और चलाने वाले परमेश्वर के चरित्र और सामर्थ पर हमें आश्चर्य होता है, उसके सामने हम नतमस्तक हो जाते हैं। उस दिन उस सुनहले गरुड़ ने मुझे और मेरे पुत्र को परमेश्वर की विलक्षण कारीगरी और महानता का एक पाठ पढ़ाया। लेकिन इस पाठ को हमें केवल विशालकाय चीज़ें ही नहीं पढ़ाती हैं, वरन परमेश्वर की सारी सृष्टि उसका गुणगान करती है, उसकि गवाही देती है; चहकता और मधुर गीत गाता कोई छोटा सा पक्षी, जंगल में विचरण करती हिरणी और कुलाँचे भरता उसका मेमना, कभी शाँत तो कभी रौद्र रूप ले लेने वाली सागर की लहरें, इधर-उधर मैदानों में खिलने वाले छोटे छोटे रंगीन सुन्दर फूल, बसन्त ऋतु आते ही सूखे पेड़ों का परिवर्तित होकर हरियाली से ढक जाना - ये सब परमेश्वर की उस अद्भुत रचना-कला और बुद्धिमता के नमूने और प्रमाण हैं।

   परमेश्वर अनायास ही अपनी रचना-कला, सुन्दरता और बुद्धिमता के प्रमाण हमारे समक्ष बिलकुल अप्रत्याशित रीति से और अनपेक्षित स्थानों पर ले आता है, उनमें होकर उसकी महिमा हमारे सामने चमकती है, और हमें अवसर प्रदान करता है कि हम उसकी सृष्टि में होकर उसके गुणों को समझ सकें, फिर उन गुणों पर मनन तथा विचार कर के उसे और निकटता से जान सकें, उसकी आराधना कर सकें। - डेव एग्नर


आश्चर्यचकित होने के लिए सदा तैयार रहें। - ई. बी. व्हाईट

आकाश ईश्वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: भजन 145:1-7
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा। 
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा। 
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है। 
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा। 
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा। 
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा। 
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 4-6
  • लूका 24:36-53