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मंगलवार, 22 अगस्त 2017

प्रेम


   दूसरे विश्व-युद्ध में उत्तरी अफ्रीका में अपनी सैनिक टुकड़ी की अगुवाई करते समय मेरे पिताजी की टांग में गोली लगी। उसके पश्चात मेरे पिता फिर कभी शारीरिक रूप से 100% स्वस्थ्य नहीं रहे। इस घटना के अनेकों वर्षों के पश्चात मेरा जन्म हुआ, और अपने बचपन में मुझे कभी ज्ञात ही नहीं हुआ कि पिताजी के साथ ऐसी कोई घटना घटित हुई थी। मुझे तो इसका बाद में किसी अन्य के द्वारा बताए जाने पर पता चला। यद्यपि उनको टांग में दर्द बना रहता था, लेकिन पिताजी ने कभी इस बात की कोई शिकायत नहीं की; और उन्होंने इस कारण से हमारी देखभाल और परवरिश में कभी कोई कमी भी नहीं आने दी। वे भरसक अपने परिवार के पालन-पोषण में लगे रहे।

   मेरे माता-पिता जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु से प्रेम करते थे और उन्होंने हमारी परवरिश में हमें भी प्रभु से प्रेम करना, उस पर विश्वास रखना, और उसकी सेवकाई करना सिखाया। परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, समय सरल हो या कठिन, वे हर बात के लिए प्रभु परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखते थे, परिश्रम करते थे, और हम से निःस्वार्थ प्रेम करते थे। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 14:26 में लिखा है, "यहोवा के भय मानने से दृढ़ भरोसा होता है, और उसके पुत्रों को शरणस्थान मिलता है।" मेरे पिताजी ने परिवार के लिए यही किया। उन्हें चाहे किसी भी कठिनाई का सामना क्यों न करना पड़ा हो, उन्होंने हमारे आत्मिक, भावनात्मक और शारीरिक जीवनों के लिए सदा एक सुरक्षित स्थान बना कर रखा।

   जितना प्रेम हम अपने बच्चों से करते हैं, उससे कहीं अधिक प्रेम हमारा परमेश्वर पिता हमसे करता है। उस प्रेम के अन्तर्गत हम अभिभावक, प्रभु परमेश्वर के मार्गदर्शन और सहायता से अपने परिवारों के लिए एक सुरक्षित स्थान बना कर रख सकते हैं। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर पिता का प्रेम असीम है।

यहोवा का भय मानने से जीवन बढ़ता है; और उसका भय मानने वाला ठिकाना पा कर सुखी रहता है; उस पर विपत्ती नहीं पड़ने की। - नीतिवचन 19:23

बाइबल पाठ: भजन 112:1-10
Psalms 112:1 याह की स्तुति करो। क्या ही धन्य है वह पुरूष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है! 
Psalms 112:2 उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी। 
Psalms 112:3 उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा। 
Psalms 112:4 सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है। 
Psalms 112:5 जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकद्दमें को जीतेगा। 
Psalms 112:6 वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा। 
Psalms 112:7 वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है। 
Psalms 112:8 उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के सन्तुष्ट होगा। 
Psalms 112:9 उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा। 
Psalms 112:10 दुष्ट उसे देख कर कुढेगा; वह दांत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 110-112
  • 1 कुरिन्थियों 5


गुरुवार, 14 मई 2015

महत्व


   मेरी परवरिश एक छोटे से कस्बे में हुई; वहाँ ना कोई प्रसिद्ध लोग थे, ना ही मार्गों पर कोई भीड़-भाड़ थी और ना ही करने के लिए कुछ अधिक काम थे। लेकिन सांसारिकता के बुरे प्रभावों से दूर, मैं अपनी शान्त, सरल, तथा सीधी-सादी परवरिश के लिए सदा धन्यवादी रही हूँ। एक संध्या जब मैं और मेरे पति एक व्यावसायिक समारोह में रात्रि के भोजन पर आमंत्रित थे तो वहाँ उपस्थित एक स्त्री ने मुझ से पूछा कि मैं किस स्थान से हूँ; जब मैंने उसे अपने उस छोटे से कस्बे का नाम बताया तो वह तुरंत बोली, "क्या उस छोटे से स्थान को स्वीकारने में तुम्हें कोई संकोच नहीं होता?" मुझे समझ नहीं आया कि वह मज़ाक कर रही है या गंभीरता से यह कह रही है, किंतु तुरंत ही मेरा उत्तर था, "नहीं!" चाहे मेरा वह कस्बा आधुनिकता के मामले में छोटा समझा जाता हो किंतु जीवन के लिए महत्वपूर्ण बातों में वह कदापि छोटा नहीं था। मेरा परिवार एक ऐसे चर्च समूह का अंग था जहाँ अभिभावक अपने बच्चों की परवरिश परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों 6:4 में दिए गए निर्देशानुसार करते थे।

   हमारे प्रभु यीशु की परवरिश भी एक छोटे से स्थान नासरत में हुई थी। जब प्रभु यीशु की सेवकाई आरंभ हुई तो उसके विषय में नतनएल नामक एक व्यक्ति ने कहा, "...क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?..." (यूहन्ना 1:46)। प्रभु यीशु ने प्रमाणित कर दिया कि नतनएल के प्रश्न का उत्तर था "हाँ"; यद्यपि प्रभु यीशु की परवरिश एक छोटे से महत्वहीन स्थान नासरत में हुई वे संसार भर के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए और आज भी हैं।

   अनुभव ने मुझे सिखाया है और बाइबल भी इसको प्रमाणित करती है कि महत्व इस बात का नहीं है कि आप की परवरिश कहाँ पर हुई है, वरन इस बात का है कि वह परवरिश कैसी हुई है! कई बार लोग हमें बड़े स्थानों से आने वाले महत्वपूर्ण लोगों के अपेक्षा छोटा मानने लगते हैं, और यही हमें जताने का भी प्रयास करते हैं। किंतु सदा स्मरण रखे कि हम परमेश्वर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं; इतने कि हमें अपने पास ले आने के लिए उसने अपने एकलौते पुत्र को बलिदान होने के लिए भेज दिया, ताकि हम अनन्त काल तक उसके साथ रहें। जब हम परमेश्वर के वचन के अनुसार अपने जीवन को चलाते हैं तो वह हमें आत्मा में बलवन्त और बुद्धिमान भी बना देता है, किसी के सामने छोटा नहीं रहने देता और अन्ततः अपने स्वर्गीय राज्य में आदर के साथ अनन्तकाल के लिए हमारा स्वागत करता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हम कहाँ से आए हैं से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम क्या बन सके हैं और सबसे महत्वपूर्ण है कि अन्ततः हम कहाँ जाएंगे।

और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसियों 6:4

बाइबल पाठ: लूका 2:41-52
Luke 2:41 उसके माता-पिता प्रति वर्ष फसह के पर्व में यरूशलेम को जाया करते थे। 
Luke 2:42 जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए। 
Luke 2:43 और जब वे उन दिनों को पूरा कर के लौटने लगे, तो वह लड़का यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे। 
Luke 2:44 वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्बियों और जान-पहचानों में ढूंढ़ने लगे। 
Luke 2:45 पर जब नहीं मिला, तो ढूंढ़ते-ढूंढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए। 
Luke 2:46 और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया। 
Luke 2:47 और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे। 
Luke 2:48 तब वे उसे देखकर चकित हुए और उस की माता ने उस से कहा; हे पुत्र, तू ने हम से क्यों ऐसा व्यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूंढ़ते थे। 
Luke 2:49 उसने उन से कहा; तुम मुझे क्यों ढूंढ़ते थे? क्या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है? 
Luke 2:50 परन्तु जो बात उसने उन से कही, उन्होंने उसे नहीं समझा। 
Luke 2:51 तब वह उन के साथ गया, और नासरत में आया, और उन के वश में रहा; और उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं।
Luke 2:52 और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30