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रविवार, 22 नवंबर 2015

छाया


   पचास से भी अधिक वर्ष पूर्व हुई अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ. केनेडी की हत्या ने सारे विश्व के लोगों को स्तब्ध कर दिया था। हत्या के अगले दिन लंडन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ’द टाइम्स’ ने इस घटना के कारण सारे विश्व के आर्थिक बाज़ारों पर आए प्रभाव के बारे में लिखा। उस अखबार का मुख्य शीर्षक था, "अमेरीकी त्रासदी के छाया अन्य सभी बातों पर।"

   हमारे जीवनों में ऐसे समय आते हैं जब कोई मृत्यु, कोई त्रासदी या घटनाओं का अचानक मोड़े ले लेना अन्य हर एक बात से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, प्रत्येक बात पर पर छा जाता है। कुछ ऐसा ही लगभग दो हज़ार वर्ष से कुछ पूर्व एक कुँवारी युवती मरियम के साथ इस्त्राएल में हुआ - परमेश्वर के एक स्वर्गदूत जिब्राईल ने आकर उसे बताया कि वह परमेश्वर के पुत्र और संसार के उद्धारकर्ता की माँ बनेगी (लूका 1:26-33)। जब उस युवती ने स्वर्गदूत से पूछा कि ऐसा कैसे होगा, तो उस स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, "...पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा" (लूका 1:35), और स्वर्गदूत को उसका प्रत्युत्तर आज भी हमें आश्चर्य में डाल देता है: "...देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो..." (लूका 1:38)। इतिहास गवाह है कि असंभव प्रतीत होने वाली इस घटना से मरियम के जीवन पर अन्धकार की नहीं वरन परमेश्वर की सामर्थ और महिमा की छाया आई।

   आते सप्ताहों में जब हम क्रिसमस की घटना और संसार में प्रभु यीशु के जन्म के बारे में और पढ़ेंगे तथा विचार करेंगे, तो इस शब्द ’छाया’ पर चिंतन करना लाभदायक रहेगा। यदि प्रभु यीशु की उपस्थिति हमारे जीवनों पर छाया करे तो वह हमारे जीवन के सबसे अन्धकारपूर्ण पलों को भी अपनी ज्योति से रौशन कर देगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


हर परिस्थिति में परमेश्वर का सर्वसामर्थी प्रेम हम पर छाया किए रहता है।

परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ। - यूहन्ना 20:31 

बाइबल पाठ: लूका 1:26-38
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
 Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4


शनिवार, 21 नवंबर 2015

नाम


   हमारे साथ मिशिगन में कुछ समय बिताने के बाद हमारी एक वर्षीय पोती मैगी और उसका परिवार वापस अपने घर मिसूरी चले गए। मैगी की माँ ने हमें बताया कि घर वापस लौटने के कुछ दिन बाद तक मैगी घर के अन्दर घूमते-फिरते बड़े आनन्द के साथ ’मिशिगन’, ’मिशिगन’ कहती रहती थी। उस नाम में कुछ था जिसने मैगी को आकर्षित किया; शायद उसका उच्चारण, शायद वह आनन्दायक समय जो उसने मिशिगन में हमारे साथ बिताया। वह क्या आकर्षण था यह एक वर्ष के बच्चे के विषय में कहना तो संभव नहीं है, लेकिन उस नाम ’मिशिगन’ ने मैगी पर ऐसा प्रभाव डाला था कि वह उसे बार बार लेने से रुक नहीं पा रही थी।

   यह मुझे एक और नाम का स्मरण दिलाता है - हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु का नाम - यीशु, जिस नाम के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा गया है, "...परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है" (फिलिप्पियों 2:9)। क्यों यह नाम हम मसीही विश्वासियों को इतना प्रीय है? क्योंकि यह हमारे उद्धारकर्ता, हमें पापों से मुक्ति देने वाले, हमारी चिंता और रक्षा करने वाले, हमें अनन्त जीवन और परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार देने वाले का नाम है। जो संज्ञाएं प्रभु यीशु का वर्णन करती हैं उनमें कितनी गहराई है! जब हम यीशु के महान नाम का उल्लेख उन से करते हैं जिन्हें उसे मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, तो हम उन्हें बता सकते हैं कि उसने हमारे तथा संसार के सभी लोगों के लिए क्या कुछ किया है, क्या कुछ सेंत-मेंत उपलब्ध करवाया है।

   यीशु हमारा उद्धारकर्ता है, उसने अपने लहु के द्वारा हमें छुड़ाया है, हम ने स्वेच्छा से अपने जीवन उसे समर्पित किए हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार किया है; और अब अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर हम सब लोगों से बाइबल की बात निःसंकोच कह सकते हैं कि यीशु के नाम के अतिरिक्त और किसी नाम में उद्धार नहीं है (प्रेरितों 4:12), इसलिए संपूर्ण स्वर्ग और सारी पृथ्वी और उसके सब निवासी यीशु नाम को महिमा दें उसका आदर करें। - डेव ब्रैनन


समस्त सृष्टि में सबसे बहुमूल्यतम नाम है यीशु।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:5-11
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

वास्तविक चिंता


   परिवारों के लिए आयोजित एक शिविर की पहली रात को शिविर के निर्देशक ने उपस्थित सभी परिवारों को उस पूरे सप्ताह का कार्यक्रम बताया और अपनी बात समाप्त करते हुए पूछा कि किसी को कुछ और कहना या जानना है? एक युवा लड़की ने खड़े होकर सबसे सहायता के लिए भावुक निवेदन किया। उसने अपने छोटे भाई के बारे में बताया, जिसे कुछ शारीरिक कमज़ोरियाँ थीं जिनके कारण उसकी देखभाल करना एक चुनौती भरा कार्य था, और यह कार्य उसके परिवार के लिए कठिन तथा थका देने वाला हो जाता था; इसलिए उसका सबसे निवेदन था कि वे उसके भाई पर नज़र बनाए रखें जिससे उसकी देखभाल ठीक से करी जा सके। उसका यह निवेदन अपने माता-पिता तथा अपने भाई के लिए उसकी वास्तविक चिंता के कारण था। जैसे जैसे शिविर में वह सप्ताह बीतता गया, लोगों द्वारा उस परिवार को लगातार दी जा रही सहायता देखना बहुत उत्साहवर्धक था।

   उस युवती का निवेदन हमें यह स्मरण दिलाता है कि कैसे अपने ही संसार, जीवन और समस्याओं में उलझ कर हम दूसरों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं और उनकी समस्याओं के प्रति ध्यान देने से चूक जाते हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि जैसे हमारा प्रभु हमारी चिंता करता है वैसे ही हम भी दूसरों की सहायता के लिए जागरूक रहें: "हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो" (फिलिप्पियों 2:4-5)।

   हमारे प्रभु यीशु मसीह की हमारे प्रति चिंता और देखभाल हमें दुखी लोगों की चिंता और देखभाल करने को प्रेरित करती है। परमेश्वर पिता के अनुग्रह में हमें मिलने वाला विश्राम और उस पर हमारा विश्वास दूसरों के दुख के समयों में उनके प्रति वास्तविक चिंता तथा उनकी देखभाल करने में प्रकट होता है। - बिल क्राउडर


दूसरों की वास्तविक देखभाल तथा चिंता करने जितना महंगा और कुछ नहीं है; सिवाए देखभाल और चिंता ना करने के।

प्रभु यीशु ने कहा: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।" - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-5
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


गुरुवार, 19 नवंबर 2015

यात्रा


   हाल ही में मैंने अपने साथ कॉलेज से स्नात्क होने वाले छात्रों के बारे में पता लगाया, और पाया कि मेरे साथ के कई विद्यार्थी अब संसार से कूच कर चुके हैं; जीवन के अल्पकालीन होने का यह गंभीर स्मरण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्य की आयु के लिए लिखा है, "हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं" (भजन 90:10) - बस अस्सी वर्ष के लगभग और हमारे संसार से कूच करके अनन्तकाल में प्रवेश करने का समय हो जाता है। भजनकार सही है, हम इस पृथ्वी पर परदेशी और यात्री ही तो हैं (भजन 39:12)।

   जीवन के अल्पकालीन होने के कारण हमें अपने ’अन्त’ तथा अनन्त, दोनों के बारे में गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए, यह जानते हुए कि हम कैसे अनित्य हैं (भजन 39:4); और जैसे जैसे हमारा अन्त समय निकट आता जाता है, यह भावना और प्रबल होती जाती है कि संसार हमारा घर नहीं है, हम तो यहाँ परदेशी और यात्री मात्र हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को एक बहुत सामर्थी आश्वासन भी है - इस यात्रा में हम अकेले नहीं हैं; हमारा परमेश्वर पिता भी हमारे हर पल, हर पग में हमारे साथ बना रहता है। इस कारण यात्री और परदेशी होने तथा अनन्तकाल व्यतीत करने संसार से बाहर जाने का विचार हमारे लिए कम परेशानी, कम भय और कम चिंता उत्पन्न करने वाला है। इस संसार में भी और आने वाले संसार में भी हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक बनकर सदा हमारे साथ रहता है (मत्ती 28:20); अपनी यात्रा में हम कभी अकेले नहीं होते (भजन 73:24-25)।

   हमारे माता-पिता, जीवन साथी, मित्रगण हमारी नज़रों से ओझल हो सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, और जैसा एक पुरानी कहावत है, ’अच्छे साथी के साथ मार्ग सरल प्रतीत होता है’ - इस लोक तथा आते लोक, दोनों में परमेश्वर का साथ हमारी यात्रा को सरल और सार्थक बना देता है। - डेविड रोपर


जीवन के थका देने वाले मार्ग पर प्रभु यीशु आपका भारी बोझ उठाना चाहता है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। - भजन 73:24-25

बाइबल पाठ: - भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तेरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


बुधवार, 18 नवंबर 2015

पुनःस्वागत


   जिम ने दस वर्ष की आयु में प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय किया था। इसके पन्द्रह वर्ष बाद उसका यह समर्पण फीका पड़ चुका था। उसने परिस्थिति और आवश्यकतानुसार जीवन जीने का दृष्टिकोण अपना लिया था और उसके जीवन में अनेक बुरी आदतें और बातें आ गई थीं। फिर उसका जीवन बिखर सा गया; उसके कार्य में समस्याएं आईं, उसके परिवार के तीन सदस्य एक के बाद एक करके जाते रहे, जिम को डर और संदेह सताने लगे, और कोई भी, कुछ भी उसकी सहायता नहीं कर पा रहा था। एक दिन जिम ने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 121:2 पढ़ा: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है"; बाइबल के इन शब्दों ने उसके मन से सारी निराशा, संदेह और डर को निकाल डाला। वह सहायता के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ा, और परमेश्वर ने सहर्ष उसे अपने पास स्वीकार कर लिया (लूका 15:22, 24)।

   जिम के आत्मिक जीवन की यह यात्रा मुझे प्राचीन इस्त्राएल के इतिहास की याद दिलाती है। परमेश्वर के साथ इस्त्रएलियों का एक अनूठा रिश्ता था - वे उसके चुने हुए लोग थे (नहेम्याह 9:1-15)। लेकिन फिर भी उन इस्त्राएलियों ने अनेक वर्ष परमेश्वर की भलाईयों को नज़रंदाज़ करने, अपनी इच्छानुसार चलने और परमेश्वर के निर्देशों तथा शिक्षाओं के विरुद्ध बलवा करने में बिताए थे (नहेम्याह 9:16-21)। लेकिन जब वे इस्त्राएली अपने पापों से पश्चाताप करके परमेश्वर की ओर मुड़े तो परमेश्वर ने उन्हें स्वीकार कर लिया क्योंकि वह "...क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है" (नहेम्याह 9:17)।

   परमेश्वर के ये गुण हमें उत्साहित करते हैं कि हम परमेश्वर की निकटता में आएं - चाहे हम उससे कितने भी समय पहले, कितनी ही दूर ही क्यों ना चले गए हों। हम जब भी नम्र मन के साथ उसे समर्पित रहने, अपने विरोधी स्वभाव को त्यागकर पुनः परमेश्वर की इच्छानुसार चलने का निर्णय लेते हैं, वह अपने अनुग्रह और दया में होकर हमारा पुनःस्वागत करता है, हमें फिर से अपने साथ ले लेता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की बाहें हमारा स्वागत करने के लिए सदा खुली रहती हैं।

परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्‍छे से अच्छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ। क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे। - लूका 15:22, 24

बाइबल पाठ: नहेम्याह 9:7-21
Nehemiah 9:7 हे यहोवा! तू वही परमेश्वर है, जो अब्राहाम को चुनकर कसदियों के ऊर नगर में से निकाल लाया, और उसका नाम इब्राहीम रखा; 
Nehemiah 9:8 और उसके मन को अपने साथ सच्चा पाकर, उस से वाचा बान्धी, कि मैं तेरे वंश को कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, यबूसियों, और गिर्गाशियों का देश दूंगा; और तू ने अपना वह वचन पूरा भी किया, क्योंकि तू धमीं है। 
Nehemiah 9:9 फिर तू ने मिस्र में हमारे पुरखाओं के दु:ख पर दृष्टि की; और लाल समुद्र के तट पर उनकी दोहाई सुनी। 
Nehemiah 9:10 और फ़िरौन और उसके सब कर्मचारी वरन उसके देश के सब लोगों को दण्ड देने के लिये चिन्ह और चमत्कार दिखाए; क्योंकि तू जानता था कि वे उन से अभिमान करते हैं; और तू ने अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जैसा आज तक वर्तमान है। 
Nehemiah 9:11 और तू ने उनके आगे समुद्र को ऐसा दो भाग किया, कि वे समुद्र के बीच स्थल ही स्थल चलकर पार हो गए; और जो उनके पीछे पड़े थे, उन को तू ने गहिरे स्थानों में ऐसा डाल दिया, जैसा पत्थर महाजलराशि में डाला जाए। 
Nehemiah 9:12 फिर तू ने दिन को बादल के खम्भे में हो कर और रात को आग के खम्भे में हो कर उनकी अगुआई की, कि जिस मार्ग पर उन्हें चलना था, उस में उन को उजियाला मिले। 
Nehemiah 9:13 फिर तू ने सीनै पर्वत पर उतर कर आकाश में से उनके साथ बातें की, और उन को सीधे नियम, सच्ची व्यवस्था, और अच्छी विधियां, और आज्ञाएं दीं। 
Nehemiah 9:14 और उन्हें अपने पवित्र विश्राम दिन का ज्ञान दिया, और अपने दास मूसा के द्वारा आज्ञाएं और विधियां और व्यवस्था दीं। 
Nehemiah 9:15 और उनकी भूख मिटाने को आकाश से उन्हें भोजन दिया और उनकी प्यास बुझाने को चट्टान में से उनके लिये पानी निकाला, और उन्हें आज्ञा दी कि जिस देश को तुम्हें देने की मैं ने शपथ खाई है उसके अधिकारी होने को तुम उस में जाओ। 
Nehemiah 9:16 परन्तु उन्होंने और हमारे पुरखाओं ने अभिमान किया, और हठीले बने और तेरी आज्ञाएं न मानी; 
Nehemiah 9:17 और आज्ञा मानने से इनकार किया, और जो आश्चर्यकर्म तू ने उनके बीच किए थे, उनका स्मरण न किया, वरन हठ करके यहां तक बलवा करने वाले बने, कि एक प्रधान ठहराया, कि अपने दासत्व की दशा में लौटे। परन्तु तू क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है, तू ने उन को न त्यागा। 
Nehemiah 9:18 वरन जब उन्होंने बछड़ा ढालकर कहा, कि तुम्हारा परमेश्वर जो तुम्हें मिस्र देश से छुड़ा लाया है, वह यही है, और तेरा बहुत तिरस्कार किया, 
Nehemiah 9:19 तब भी तू जो अति दयालु है, उन को जंगल में न त्यागा; न तो दिन को अगुआई करने वाला बादल का खम्भा उन पर से हटा, और न रात को उजियाला देने वाला और उनका मार्ग दिखाने वाला आग का खम्भा। 
Nehemiah 9:20 वरन तू ने उन्हें समझाने के लिये अपने आत्मा को जो भला है दिया, और अपना मन्ना उन्हें खिलाना न छोड़ा, और उनकी प्यास बुझाने को पानी देता रहा। 
Nehemiah 9:21 चालीस वर्ष तक तू जंगल में उनका ऐसा पालन पोषण करता रहा, कि उन को कुछ घटी न हुई; न तो उनके वस्त्र पुराने हुए और न उनके पांव में सूजन हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13


मंगलवार, 17 नवंबर 2015

विजेता नायक


   कुछ समय पहले किसी ने मुझ से एक बहुत कठिन प्रश्न पूछा: "बगैर पाप किए आप अधिक से अधिक कितनी देर तक रहने पाई हैं? एक सप्ताह, एक दिन, एक घण्टा?" ऐसे प्रश्न का हम क्या उत्तर दे सकते हैं? यदि हम सच्चे हों तो संभवतः हम कहेंगे, "बिना पाप किए कोई एक दिन भी रह पाया हो, ऐसा संभव नहीं है।" यदि हम अपने जीवन के पिछले सप्ताह का अवलोकन करें तो हो सकता है कि हमने पूरे सप्ताह परमेश्वर से किसी भी पाप के लिए अंगीकार ना किया हो, क्षमा ना माँगी हो; लेकिन यदि इससे हम यह मान बैठें के हमने अपने मन, या ध्यान या विचारों में पूरे सप्ताह कभी एक भी पाप नहीं किया है तो हम अपने आप को धोखा ही देंगे।

   परमेश्वर हमारे मनों को जानता है, और यह भी कि हम परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा पापों के लिए कायल किए जाने के प्रति संवेदनशील रहते हैं या नहीं। यदि हम वास्तव में अपने आप को जानते हैं और अपने पाप तथा परमेश्वर के पवित्र आत्मा के निर्देशों के प्रति संवेदनशील हैं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के कथन: "यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं" (1 यूहन्ना 1:8) को स्वीकार कर लेने में कोई संकोच नहीं होगा; और ना ही हम इससे आगे के पद में कही बात, "यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है" (1 यूहन्ना 1:10) के दोषी होना चाहेंगे।

   मुझसे जो प्रश्न मुझसे पूछा गया था, उसकी बजाए उससे बेहतर और उत्साहजनक प्रश्न होगा, "जब हम अपने पाप को मान लेते हैं और उसके लिए परमेश्वर से क्षमा माँगते हैं तो परमेश्वर का प्रत्युत्तर क्या होता है?" उत्तर है उपरोक्त दोनों पदों के बीच का पद, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। प्रभु यीशु ने हमारे पाप और उसके सारे दोष को अपने ऊपर लेकर उसका सारा दण्ड भी हमारे लिए सह लिया; वह हमारे पापों के लिए ही क्रूस पर बलिदान हुआ और फिर मृतकों में से जी उठा। इसीलिए वह हमारे अन्दर एक शुद्ध मन उत्पन्न करने और हमें एक नया जीवन, जो परमेश्वर के प्रति समर्पित और संवेद्नशील है, देने में सक्षम है (भजन 51:10)। जो कोई स्वेच्छा और पूरे समर्पण के साथ उसके पास पाप क्षमा के लिए आता है वह नए जीवन को प्राप्त करता है।

   मेरा युवा मित्र जेडन बिलकुल सही कहता है, प्रभु यीशु हमारे पापों का विजेता, हमारा नायक है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु से मिलने वाली क्षमा नए जीवन का आरंभ है।

हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। - भजन 51:10

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए। 
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12


सोमवार, 16 नवंबर 2015

श्रेय


   मैं और मेरे पति एक ग्रामीण इलाके में रहते हैं जिसके चारों ओर खेत ही खेत हैं। हमारे इस खेतीहर इलाके में अनेक स्थानों पर यह वाक्य लिखा हुआ है: ’यदि आज आपने भोजन किया है तो किसान के धन्यवादी हों।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि किसान हमारे धन्यवाद के हकदार हैं; वे हर मौसम को झेलते हुए खेत जोतने की कड़ी मेहनत करते हैं, बीज बोते हैं, फसल की देखभाल करते हैं फिर अन्न काट कर बाज़ारों में पहुँचाते हैं जिससे सब लोगों को भोजन मिलता रहे, उन्हें भूखों परेशान ना होना पड़े।

   लेकिन जितनी बार मैं किसानों का धन्यवाद करती हूं, साथ ही उस परमेश्वर पिता की भी धन्यवादी होती हूँ जिसे इस सारे भोजन को बनाने, उगाने, उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है। खेत में अन्न उगाने के लिए धरती में उपयुक्त गुण, सूरज की रौशनी, सींचने के लिए बारिश, धरती से निकल कर बाहर आने के लिए अँकुर को सामर्थ, अँकुर से पौधा और फिर पौधे में अन्न उगना आदि सब परमेश्वर की ओर से ही तो दिया जाता है। यद्यपि धरती और उसकी हर चीज़ परमेश्वर की है (भजन 24:1), परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उसके रख-रखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए संसाधनों का प्रयोग वैसे करें जैसा वह चाहता है, पृथ्वी पर उसके कार्य करने के लिए (भजन 115:16)।

   जैसे हम मनुष्य परमेश्वर की भौतिक सृष्टि के भंडारी हैं, हम समाज के लिए परमेश्वर की आत्मिक योजना को पूरा करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यह आत्मिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें उनको योग्य आदर देना है जिन्हें उसने हमारा अधिकारी ठहराया है, हमें अपने कर अदा करने हैं और आपस में प्रेम से एक दूसरे के साथ रहना और निर्वाह करना है (रोमियों 13:7-8)। लेकिन एक बात है जिसका हकदार केवल परमेश्वर है - हमारी सारी स्तुति और हमारे द्वारा उसकी महिमा, क्योंकि सृष्टि की हर बात को बनाने, संचालित तथा संभव करने वाला केवल परमेश्वर ही है (भजन 96:8-9)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के रहस्यमय तरीके हमारी असीमित आराधना के हकदार हैं।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! - भजन 96:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों13:1-10
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40