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शनिवार, 23 जनवरी 2016

सीमा


   19वीं शताब्दी में कारोबार के लिए पानी के जहाज़ों पर अकसर बेहिसाब माल लाद दिया जाता था जिससे कई बार वे जहाज़ रास्ते में ही डूब जाते थे और उनके नाविक मारे जाते थे। सन 1875 में ब्रिटिश राजनितिज्ञ सैमुएल प्लिम्सोल ने लापरवाही की इस प्रथा को बन्द करने के लिए अभियान चलाया जिसके फलस्वरूप कानून बना कि हर पानी के जहाज़ के बाहर एक रेखा बनाई जाएगी जिससे पता रहे कि माल लादने से वह जहाज़ कितना पानी अन्दर चला गया है। माल लदान की वह रेखा प्लिमसोल रेखा के नाम से जानी गई और आज भी यह रेखा माल लादने की सीमा को दिखाने के लिए पानी के जहाज़ों के बाहर बनाई जाती है।

   उन पानी के जहाज़ों के समान हमारे जीवन भी कभी-कभी भय, संघर्ष और मनोव्यथा से अभिभूत होकर हमें सहने की क्षमता से अधिक बोझिल लग सकते हैं; हमें यह भी लग सकता है कि हम बस अब परिस्थितियों में डूबने की कगार पर हैं। लेकिन ऐसे समयों में हमें स्मरण करना चाहिए कि हमारा एक अद्भुत सहायक है - हमारा परमेश्वर पिता जो हमारी सहायता करने के लिए सदा तत्पर और तैयार रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:6-7)। हमारा परमेश्वर पिता हमारे जीवन में आने और हमें अभिभूत करने वाली हर परेशानी को जानता है और उसका समाधन करता है।

   जीवन की परीक्षाएं हमें हमारे सहने से बाहर बोझिल प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन हम इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमारी सीमाओं को हम से बेहतर जानता है और हमें उन सीमाओं से बाहर किसी परीक्षा में कभी नहीं पड़ने देगा, वरन हर परेशानी में वह हमें उस में से सुरक्षित निकल आने का मार्ग बना कर देगा (1 कुरिन्थियों 10:13)।


परमेश्वर हमें अशान्त जल में जाने देता है जिससे हम उस पर भरोसा करना सीख सकें।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13 

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:5-9
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20


शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

तारणहार


   हम में से कई लोग सीमित संसाधनों के साथ कार्य करने की चुनौती का सामना करते हैं। कभी-कभी हमें कम धन, समय तथा सहायकों की घटी और क्षीण होती कार्यशक्ति के साथ भी पहले के जितने कार्यभार को निभाना ही होता है; और कभी-कभी तो यह कार्यभार घटने की बजाए बढ़ भी जाता है। एक वाक्यांश है जो इस दशा को दर्शाता है - अधिक ईंटें और भूसा कम!

   जब इस्त्राएली मिस्त्र में ग़ुलामी में थे, यह वाक्यांश उनकी तब की दशा पर आधारित है। मिस्त्र के राजा फिरौन ने इस्त्राएलियों को ईंटें बनाने के लिए भूसा उपलब्ध करवाना बन्द कर दिया जिससे कि इस्त्राएलियों को भूसा स्वयं ही जुटाना पड़ता था किंतु फिरौन ने उनकी बनाई ईंटों में घटी नहीं होने दी। ऐसे में ग़ुलाम इस्त्रएली इधर-उधर से भूसा जुटाते भी फिरते थे और फिरौन द्वारा नियुक्त कार्य-निरीक्षकों से अधिक परिश्रम करके ईंटों की संख्या को पूरा करते रहने के लिए ताड़ना भी झेलते थे (निर्गमन 5:13)। इस विकट परिस्थिति से इस्त्राएली इतने हताश हो गए कि उन्होंने परमेश्वर द्वारा मूसा के माध्यम से कही गई बात, "...मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा" (निर्गमन 6:6) को मानने से इंकार कर दिया (निर्गमन 6:9)।

   चाहे इस्त्राएलियों ने परमेश्वर की बात को मानने से इंकार कर दिया हो परन्तु परमेश्वर फिर भी मूसा को निर्देश और मार्गदर्शन देता रहा, उसे फिरौन के पास जाकर उससे इस्त्राएलियों को छोड़ने के लिए बात करने को तैयार करता रहा। परमेश्वर अपनी प्रजा, इस्त्राएलियों के पक्ष में बना रहा, पृष्ठभूमि में उनके हित के लिए कार्य करता रहा और उन्हें मिस्त्र की ग़ुलामी से छुड़ाकर वाचा किए हुए कनान देश में ले आया।

   जब परिस्थितियाँ कठिन हों तो संभव है कि हम भी उन इस्त्राएलियों के समान हताश होकर परमेश्वर के प्रोत्साहन और आश्वासन को नज़रंदाज़ कर दें; परन्तु ऐसे समयों में भी हमें स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारा तारणहार है (भजन 37:5)। चाहे हमें उसका कार्य दिखाई ना भी दे, वह सदा हमारे पक्ष में कार्य करता रहता है, और हर बात में अन्ततः हमारा भला ही करेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परेशानी के समय विश्वास में दृढ़ रहने के समय होते हैं।

अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन 37:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 6:1-13
Exodus 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन ने क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
Exodus 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ। 
Exodus 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं। 
Exodus 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है। 
Exodus 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा, 
Exodus 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया। 
Exodus 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं। 
Exodus 6:9 और ये बातें मूसा ने इस्राएलियों को सुनाईं; परन्तु उन्होंने मन की बेचैनी और दासत्व की क्रूरता के कारण उसकी न सुनी।
Exodus 6:10 तब यहोवा ने मूसा से कहा, 
Exodus 6:11 तू जा कर मिस्र के राजा फिरौन से कह, कि इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे। 
Exodus 6:12 और मूसा ने यहोवा से कहा, देख, इस्राएलियों ने मेरी नहीं सुनी; फिर फिरौन मुझ भद्दे बोलने वाले की क्योंकर सुनेगा? 
Exodus 6:13 और यहोवा ने मूसा और हारून को इस्राएलियों और मिस्र के राजा फिरौन के लिये आज्ञा इस अभिप्राय से दी कि वे इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल ले जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36


गुरुवार, 21 जनवरी 2016

सामंजस्य


   मुझे पाँच तार वाला बैन्जो बजाना बहुत प्रीय है। लेकिन इस संगीत वाद्य में एक कमी है - उसका पांचवा तार बहुत ही सीमित एवं सरल स्वरों के साथ तालमेल बना सकता है। इसलिए संगीत वादक जब कुछ जटिल संगीत बजाना चाहते हैं तो बैन्जो बजाने वाले को सामंजस्य बनाने के लिए कुछ प्रयास करना पड़ता है, तालमेल बैठाना पड़ता है। किसी संगीत समारोह में अद्भुत संगीत लय देनी हो तो बैन्जो वादक को कुछ सामंजस्य और तालमेल बैठाना ही पड़ता हैं।

   जैसे संगीत वादक, संगीत मण्डली के रूप में संगीत प्रस्तुत करने से पहले अपने अपने साज़ों में परस्पर सामंजस्य स्थापित करते हैं जिससे श्रोताओं के सामने अच्छा संगीत प्रस्तुत कर सकें, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों को भी एक दूसरे के साथ सामंजस्य बैठाकर तालमेल के साथ परमेश्वर की सेवकाई को पूरा करना चाहिए। उदाहरणस्वरूप, जिन विश्वासियों को परमेश्वर के वचन को सिखाने का वरदान दिया गया है उन्हें उन लोगों के साथ सामंजस्य बैठाना चाहिए जिनका वरदान सभाएं आयोजित करना है और सभा स्थलों की सफाई और व्यवस्था बनाना है। हम सभी मसीही विश्वासियों को कोई ना कोई आत्मिक वरदान दिया गया है, और हम सबको ताल-मेल के साथ कार्य करके परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करना है।

   प्रेरित पतरस ने कहा, "जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पतरस 4:10)। भण्डारीपन के लिए परस्पर सहयोग होना चाहिए। पहले अपने आत्मिक वरदानों के बारे में विचार कीजिए (रोमियों 12; 1 कुरिन्थियों 12; इफिसियों 4; 1 पतरस 4); फिर विचार कीजिए कि आप अपने इन वरदानों का अन्य संगी विश्वासियों के वरदानों के साथ सामंजस्य कैसे बना सकते हैं जिससे सब कार्य सुचारू रीति से हो सके। जब हमारे आत्मिक वरदान एक दूसरे के पूरक होकर कार्य करेंगे तो परिणाम परमेश्वर की महिमा और हमारा परस्पर तालमेल होगा। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ सामंजस्य बनाए रखने से चर्च में परस्पर तालमेल बना रहता है।

और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। - इफिसियों 4:11-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21


बुधवार, 20 जनवरी 2016

सन्तान


   बच्चों को चर्च के लिए तैयार रखना हमेशा ही हमारे लिए चुनौती भरा रहा है। तैयार होकर चर्च पहुँचने के दस मिनट के अन्दर ही हमारा बेटा छोटा मैथ्यु ऐसा दिखने लगता था मानों उसके कोई अभिभावक हैं ही नहीं। वह चर्च के गलियारे में दौड़ लगाता जिससे उसकी आधी कमीज़ पैन्ट से बाहर हो जाती, उसका चश्मा टेढ़ा हो जाता, जूतियाँ गन्दी हो जातीं और उसके कपड़ों पर बिस्कुट का चूरा गिरा हुआ दिखने लगता। यदि उसे अपने आप पर छोड़ दिया जाता तो वह बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगता था।

   मैं सोचता हूँ कि क्या हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी छोटे मैथ्यु के समान ही बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगते हैं? प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने और उसे जीवन समर्पण करने के बाद, मसीह यीशु हमें अपनी धार्मिकता के आत्मिक वस्त्र पहना देता है, लेकिन हम फिर भी संसार की बातों में इधर-उधर भटकने लग जाते हैं और ऐसे जीवन व्यतीत करने लगते हैं मानो हम परमेश्वर की सन्तान हैं ही नहीं। इसीलिए परमेश्वर के वचन में यहूदा की पत्री में दिया गया वायदा कि प्रभु यीशु "...तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है" (यहूदा 1:24) मुझे आश्वस्त करता है, आशा देता है।

   क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे हम ऐसे ना दिखें मानों हमारी देखभाल करने वाला हमारा स्वर्गीय पिता है ही नहीं? हम जितना अपने परमेश्वर पिता कि आत्मा के चलाए चलेंगे, उसके समर्पित तथा आज्ञाकारी रहेंगे, उतना ही हम ठोकर खाकर गिरने बचे भी रहेंगे, क्योंकि पवित्र आत्मा हमें सही मार्ग पर सही रीति से चलना सिखाता है और उसमें हमारी सहायता भी करता है। ज़रा सोचिए, हमारे जीवन कितने अधिक स्वच्छ तथा धर्मी होते चले जाएंगे यदि हम नियमित रूप से परमेश्वर के वचन के स्नान से धुलते रहें (इफिसियों 5:26)।

   हमारे लिए यह कैसी बड़ी आशीष है कि प्रभु यीशु का हमसे वायदा है कि वह हमारे अव्यवस्थित, ठोकर खाकर गिरते रहने वाले जीवन लेकर उन्हें पवित्र, निषकलंक और बेझुर्री करके परमेश्वर पिता के सामने प्रस्तुत करेगा (इफिसियों 5:27)। इसलिए हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम प्रभु यीशु को अपने जीवन समर्पित करके उसे जीवनों को संवारने दें जिससे संसार के सामने हम उसके प्रेम और देखभाल को परमेश्वर की सन्तान की तरह प्रदर्शित कर सकें। - जो स्टोवैल


हमारे जीवनों में परमेश्वर पिता की उपस्थिति को प्रतिबिंबित करने के लिए हम में उसके पुत्र प्रभु यीशु की उपस्थिति अनिवार्य है।

कि उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध कर के पवित्र बनाए। और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बना कर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो। - (इफिसियों 5:26-27)

बाइबल पाठ: यहूदा 1:20-25
Jude 1:20 पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्वास में अपनी उन्नति करते हुए और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए। 
Jude 1:21 अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो। 
Jude 1:22 और उन पर जो शंका में हैं दया करो। 
Jude 1:23 और बहुतों को आग में से झपट कर निकालो, और बहुतों पर भय के साथ दया करो; वरन उस वस्‍त्र से भी घृणा करो जो शरीर के द्वारा कलंकित हो गया है।
Jude 1:24 अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है। 
Jude 1:25 उस अद्वैत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58


मंगलवार, 19 जनवरी 2016

मृत्यु और जीवन


   हमारे शहर में, एक ही दिन में, अलग अलग स्थानों पर, दो लोगों की हत्या हुई। पहला एक पुलिस अधिकारी था जो एक परिवार की सहायता करते समय मार गिराया गया। दूसरा एक बेघर व्यक्ति था जिसे प्रातः अपने मित्रों के साथ शराब पीते हुए गोली मार दी गई।

   सारा शहर उस पुलिस अधिकारी के लिए शोकित रहा; वह जवान और बहुत अच्छा व्यक्ति था जो दूसरों की परवाह किया करता था और उसके पड़ौसी तथा उसके साथी पुलिस वाले उसे बहुत चाहते थे। दूसरे के लिए कुछ अन्य बेघर लोग ही शोकित हुए।

   लेकिन मेरा मानना है कि प्रभु परमेश्वर दोनों की मृत्यु से शोकित हुआ।

   जब प्रभु यीशु ने मरियम, मार्था और मित्रों को लाज़रस की मृत्यु पर रोते देखा, "...तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?" (यूहन्ना 11:33), यद्यपि यीशु जानते थे कि शीघ्र ही वे लाज़रस को पुनः जीवित करने वाले हैं, परन्तु फिर भी वे उस शोक संतप्त परिवार के साथ रोए (यूहन्ना 11:35)। परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विद्वानों का मानना है कि प्रभु यीशु के रोने के पीछे ना केवल उस परिवार से उनका लगाव था, वरन मृत्यु और उससे लोगों के जीवनों और मनों में होने वाली पीड़ा और शोक भी इसका कारण थे।

   हानि जीवन का अंग है; परन्तु क्योंकि प्रभु यीशु "पुनरुत्थान और जीवन" (यूहन्ना 11:25) हैं, इसलिए उन पर विश्वास लाने और रखने वाले एक दिन सारे शोक और मृत्यु के दुख से निकलकर अनन्त आनन्द के जीवन में प्रवेश करेंगे। परन्तु जब तक वह समय ना आए, प्रभु हमारे दुःखों में दुःखी होता है, और हम मसीही विश्वासियों से कहता है कि, "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों 12:15)। 


करुणा दूसरों की पीड़ा को दूर करने में सहायता करती है।

यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। - यूहन्ना 11:25 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:30-37
John 11:30 (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।) 
John 11:31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये। 
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30


सोमवार, 18 जनवरी 2016

महान


   कुछ लोग अपने आप को एक विशाल खाई में कहीं खोए हुए एक छोटे से कंकड़ के समान देखते हैं; परन्तु हम अपने आप को चाहे जितना भी नगण्य समझें, हम सभी परमेश्वर द्वारा बहुतायत से प्रयोग किए जाने की क्षमता रखते हैं। सुप्रसिद्ध मसीही प्रचार्क मार्टिन लूथर किंग ने 1968 के आरंभ में, परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 में प्रभु यीशु द्वारा कही गई बातों पर आधारित एक सन्देश में कहा था, "प्रत्येक जन महान हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक जन मसीही सेवकाई कर सकता है। मसीही सेवकाई के लिए आपके पास किसी कॉलेज की कोई डिग्री होने की आवश्यकता नहीं है; आपको अपनी भाषा के व्याकरण में अच्छा होने की आवश्यकता नहीं है; आपको प्रसिद्ध दार्शनिकों प्लेटो और सुकरात के बारे में जानने की आवश्यकता नहीं है...आपके पास केवल अनुग्रह से भरा हृदय और प्रेम से जन्मी आत्मा होनी चाहिए।"

   जब प्रभु यीशु के शिष्य आपस में विवाद कर रहे थे कि स्वर्ग में अधिक आदर के स्थान किसे मिलेंगे, तो प्रभु ने उन से कहा, "...जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:43-45)।

   मैं अपने और हम सब के बारे में सोचता हूँ; क्या महानता के विषय में हमारी समझ प्रभु की समझ के अनुरूप है? क्या हम खुशी से सेवा करने और ऐसे कार्य करने को तैयार रहते हैं जहाँ हमें कोई नहीं देखता, जिसके बारे में कोई नहीं जानता? हमारी सेवा का उद्देश्य क्या है - प्रभु को प्रसन्न करना या लोगों से प्रशंसा प्राप्त करना? प्रभु हमारे हर छोटे से छोटे कार्य की भी जानकारी रखता है और उसके लिए किया गया कोई कार्य बिना प्रतिफल नहीं जाएगा: "जो कोई एक कटोरा पानी तुम्हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूं कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा" (मरकुस 9:41)।

   यदि हम समर्पित सेवक बनकर अपने स्वामी की सच्ची सेवा करेंगे, तो हमारे जीवन प्रभु यीशु की ओर संकेत करेंगे जो वास्तव में महान है, और अपने समय तथा तरीके से वह अपने सेवकों को भी महान करता है। - वैर्नन ग्राउंड्स


मसीह यीशु के नाम में किए गए छोटे छोटे कार्य भी प्रभु की दृष्टि में महान होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


रविवार, 17 जनवरी 2016

दृष्टिकोण


   शिशु अवस्था में ही फैनी क्रौसबी ने अपनी आखों की दृष्टि खो दी थी, परन्तु फिर भी, आश्चर्यजनक रीति से, वे मसीही गीत लिखने वाले सबसे प्रसिद्ध गीतकारों में से एक थीं। अपने जीवन काल में उन्होंने नौ हज़ार से अधिक गीत लिखे, जिनमें से कुछ अविस्मर्णीय गीत "Bessed Assuranace" और "To God be the Glory" हैं।

   कुछ लोग फैनी के अंधेपन लिए शोकित होते थे; एक बार एक नेकनियत प्रचारक ने उन से कहा, "मेरे विचार से यह बड़ी दयनीय बात है कि हमारे स्वामी ने आपको इतने गुण देते समय दृष्टि का गुण नहीं दिया।" यह मानना बहुत कठिन लगता है कि उस प्रचार्क को फैनी का उत्तर था, "क्या आप जानते हैं कि जन्म के समय यदि मैं किसी एक बात को माँग पाती तो वह होती कि मैं अंधी जन्मूँ?...क्योंकि जब मैं स्वर्ग पहुँचुंगी तो सबसे पहला चेहरा जो मैं देखूंगी और जो मुझे अनन्तकाल तक हर्षित करता रहेगा, वह होगा मेरे उद्धारकर्ता का।"

   फैनी ने जीवन को स्वर्गीय दृष्टिकोण से देखा। अनन्तकाल के परिप्रेक्ष्य में वर्तमान की हमारी समस्याएं बहुत भिन्न लगने लगती हैं, जैसा प्रेरित पौलुस ने लिखा: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं" (2 कुरिन्थियों 4:16-18)।

   हमारी सारी परीक्षाएं, क्लेष और विपरीत परिस्थितियाँ गौण हो जाती हैं जब हम अनन्तकाल का स्वर्गीय दृष्टिकोण रखकर स्मरण करते हैं कि एक दिन हम प्रभु यीशु मसीह को देखेंगे और फिर अनन्तकाल के आनन्द में उसके साथ रहेंगे। - डेनिस फिशर


अनन्तकाल के प्रति हमारा दृष्टिकोण वर्तमान के हमारे जीवन को प्रभावित करता है।

अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। - 1 कुरिन्थियों 13:12

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23