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शनिवार, 24 दिसंबर 2016

स्थायी शान्ति


   प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, 1914 के क्रिसमस की पूर्व-संध्या पर, पश्चिमी मोर्चे के एक तीस मील लंबी सरहद पर बन्दूकें शान्त हो गईं। सैनिकों ने सावधानी पूर्वक अपनी खंदकों के ऊपर होकर झांका, और फिर कुछ अपनी खंदकों से बाहर निकलकर अपने स्थानों की मरम्मत करने लगे तो कुछ अन्य मृतकों को दफनाने लगे। जब अंधेरा हुआ, कुछ जर्मन सैनिकों ने लालटेनें जलाईं और क्रिसमस के गीत गाने लगे। दूसरी ओर के अंग्रेज़ी सैनिकों ने इसे सराहा, तलाई बजाई और ऊँची आवाज़ में पुकार कर अपने अभिनदन उन तक सरहद पार पहुँचाए।

   अगले दिन जर्मन, फ्रैंच और अंग्रेज़ी सैनिक एक दूसरे के साथ तटस्थ भूमि पर मिले, परस्पर हाथ मिलाए, एक-दूसरे के साथ भोजन सामग्री बाँटी, और भेंटों का आदान-प्रदान किया। यह युद्ध से थोड़ी देर का अवकाश था, जो शीघ्र ही समाप्त भी हो गया और तोपें तथा मशीन गनें फिर से एक दूसरे पर प्रहार करने लग गईं। लेकिन जितनों ने उस अनाधिकारिक ’क्रिसमस युद्धविराम’ का, जैसा कि वह जाना गया, अनुभव किया, वे कभी ना तो अपने उस अनुभव को, और ना ही शान्ति के लिए उनके मनों में उससे जागृत हुई लालसा को भुला पाए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा आने वाले मसीहा के संबंध में की गई भविष्यवाणी में उसके विषय में लिखा गया है: "क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा" (यशायाह 9:6)। क्रूस पर अपने बलिदान के द्वारा प्रभु यीशु ने हमारे तथा परमेश्वर के मध्य आई दूरी को पाट दिया, और स्वयं हमारी शान्ति, हमारा मेल-मिलाप करवाने वाला बन गया (इफिसियों 2:14)।

   प्रभु यीशु मसीह में हम परमेश्वर के तथा परस्पर एक-दूसरे के साथ स्थायी शान्ति और मिल-मिलाप पाते हैं। यही क्रिसमस का जीवन परिवर्तित कर देने वाला सन्देश है। - डेविड मैक्कैसलैंड


केवल मसीह यीशु में ही सच्ची शान्ति प्राप्त हो सकती है।

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। - रोमियों 5:1

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:13-19
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।

एक साल में बाइबल: 
  • हबक्कूक 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 15


शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

उपहार


   जब हमारे बच्चे छोटे थे और हमारे साथ घर पर रहा करते थे, तब क्रिसमस की प्रातः की हमारी पारिवारिक परंपरा बड़ी साधारण परन्तु बहुत अर्थपूर्ण होती थी। हम अपने परिवार को क्रिसमस ट्री के चारों ओर एकत्रित करते, जहाँ वे सारे उपहार रखे होते थे जिन्हें हम एक दूसरे को देने के लिए लाए थे; और हम सब मिलकर क्रिसमस की कहानी को पढ़ते थे। यह एक कोमल स्मरण करवाना होता था कि हम एक दूसरे को उपहार इसलिए नहीं देते हैं क्योंकि मसीह यीशु के जन्म के समय उससे मिलने आने वाले लोग उपहार लेकर आए थे। वरन, हमारा एक दूसरे को प्रेम की भेंटों का उपहार देना, परमेश्वर के हमारे प्रति व्यक्त किए गए अति महान प्रेम की एक छोटी झलक को दिखाना था।

   जब हम क्रिसमस कथा की उन परिचित घटनाओं - स्वर्गदूतों का सन्देश देना, चरवाहों का आना, चरनी का दृश्य आदि को दोहराते थे, हमारी आशा होती थी कि उस प्रथम क्रिसमस पर जो परमेश्वर ने हमारे लिए किया उसकी महानता और महत्वता का एहसास, एक दूसरे के प्रति हमारे प्रेम प्रदर्शित करने के प्रत्येक प्रयास से कहीं अधिक बढ़कर होने पाए।

   अपने पुत्र को हमारे पापों से छुटकारे के लिए बलिदान होने भेजने के उपहार के सामने अन्य प्रत्येक उपहार बहुत छोटा और नगण्य है; यह वह यथार्थ है जिसे प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपने पत्री व्यक्त करते हुए कहा: "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो" (2 कुरिन्थियों 9:15)।

   स्पष्ट है कि परमेश्वर का अपने पुत्र को हमारा मुक्तिदाता, उद्धारकर्ता बनाकर भेजना एक ऐसा उपहार है जिसे हम शब्दों में कभी पूर्णतया बयान नहीं कर सकेंगे। लेकिन हम इसी उपहार के उपलक्ष्य में क्रिसमस का उत्सव मनाते हैं; क्रिसमस पर महत्वपूर्ण वे उपहार नहीं है जो हम एक दूसरे को देते हैं, वरन सबसे अधिक महत्वपूर्ण वह उपहार है जो परमेश्वर ने हम मनुष्यों को दिया है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु स्वयं वह सर्वोत्तम तथा महानतम उपहार हैं 
जो मानव जाति को कभी भी दिया गया हो।

क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है। - रोमियों 6:23

बाइबल पाठ: रोमियों 8:28-35
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है। 
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? 
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा? 
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है। 
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। 
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?

एक साल में बाइबल: 
  • नहूम 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 14


गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

आवरण


   हमारे घर में क्रिसमस से जुड़ी कुछ बातें प्रत्येक वर्ष एक समान ही रहती हैं। उनमें से एक है मेरी पत्नि मार्टी द्वारा बच्चों और नाती-पोतों से उपहार खोलते हुए आग्रह करना कि वे उपहार पर लपेटे गए आवरण को ध्यान से खोलें और संभाल कर रखें क्योंकि उन्हें फिर से उपयोग किया जा सकता है। मार्टी को अच्छे उपहार देना बहुत पसन्द है, परन्तु उसे उन उपहारों पर चढ़ाया जाने वाला आवरण भी अच्छा लगता है। उपहार की सुन्दरता का एक भाग उसका वह आवरण है जिसमें लपेट कर उसे दिया जाता है।

   यह मेरा ध्यान उस आवरण पर ले जाता है जिस में लिपट कर मसीह यीशु संसार का उद्धारकर्ता बन कर आया ताकि हम मनुष्यों को हमारे पापों से छुड़ा सके। अपने आगमन को प्रभु यीशु अपने विलक्षण बल-सामर्थ के प्रदर्शन तथा आकाश-मण्डल को अपनी स्वर्गीय महिमा की दिव्य ज्योति से प्रकाशित कर देने के आवरण से भी लपेट सकते थे। परन्तु, इसके स्थान पर उन्होंने अपनी सारी स्वर्गीय सामर्थ और महिमा छोड़कर, हम मनुष्यों की समानता में आना पसन्द किया (फिलिप्पियों 2:7)।

   उनके पृथ्वी पर आगमन के इस साधारण से आवरण का क्या महत्व है? उन्होंने हमारे समान ही ऐसा साधारण बन कर हमें आश्वस्त किया कि वे हमारे जीवन के संघर्षों से अनभिज्ञ नहीं हैं। पृथ्वी के अपने जीवन में उन्होंने गहरे एकाकीपन और अपने निकट-मित्र के जान-लेवा धोखे का अनुभव किया। उन्हें सार्वजनिक रूप से लज्जित किया गया, गलत समझा और समझाया गया, उन पर झूठा दोषारोपण किया गया। संक्षिप्त में, वह हमारी पीड़ाओं को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जानते हैं। परिणामस्वरूप, जैसे इब्रानियों का लेखक हमें बताता है, "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15); और यही हमें प्रोत्साहित करता है कि हम निर्भीक होकर प्रभु यीशु मसीह के पास आएं, क्योंकि वह हमारी सब बात जानता और समझता है (इब्रानियों 4:16)।

   इस क्रिसमस के समय में जब आप प्रभु यीशु के बारे में विचार करें तो उस आवरण पर भी ध्यान करें जिसमें होकर उन्होंने अपने आप को हमारे लिए प्रस्तुत किया। - जो स्टोवैल


क्रिसमस के सर्वोत्तम उपहार के आवरण की उपेक्षा ना करें।

इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे। - इब्रानियों 4:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 6-7
  • प्रकाशितवाक्य 13


बुधवार, 21 दिसंबर 2016

तैयार


   संचालक अपने मंच पर खड़ा था, उसकी आँखें संगीत मण्डली और वाद्य-मण्डली के सदस्यों का सर्वेक्षण कर रही थीं। गायकों ने संगीत के अपने कागज़ व्यवस्थित करके सही स्थान पर किए जिससे वे उन कागज़ों के ऊपर से संचालक को देख सकें तथा अपने खड़े रहने के लिए आरामदायक मुद्रा बनाई। वाद्य-मण्डली के सदस्यों ने भी संगीत के अपने कागज़ों को उनके स्थानों पर व्यवस्थित किया, आराम से बैठने के लिए अपने स्थान को ठीक किया; और तैयार होने के पश्चात सब शांत होकर संचालक की ओर देखने लगे। संचालक प्रतीक्षा में था कि सभी तैयार हो जाएं; सब के तैयार होते ही संचालन करने वाली छड़ी के साथ उसका हाथ नीचे को आया, और हैण्डल का प्रसिद्ध संगीत "Overture to Messiah" चर्च भवन में भर गया।

   उस संगीत की धुन को अपने चारों ओर गूँजते हुए सुनकर मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो मैं क्रिसमस में डूब गई हूँ; जब परमेश्वर के इशारे पर, संसार के इतिहास के सही पल में, मसीहा, जो "...आने वाली अच्छी अच्छी वस्‍तुओं का महायाजक हो कर आया..." (इब्रानियों 9:11) के जन्म की प्रक्रिया का आरंभ हो गया।

   प्रत्येक क्रिसमस पर, जब हम मसीह यीशु के जन्म के उत्सव को संगीत के साथ मनाते हैं, मुझे यह भी स्मरण आता है कि परमेश्वर के लोग अपने आप को तैयार कर रहे हैं हमारे महान संचालक परमेश्वर पिता के उस इशारे का जिस से हमारे उद्धार के संगीत की अन्तिम पंक्ति का आरंभ होगा, और मसीह यीशु अपने विश्वासियों को अपने साथ ले जाने के लिए आ जाएगा, जिसके बाद वह सब कुछ नया कर देगा (प्रकाशितवाक्य 21:5)। उस दिन हम मसीही विश्वासियों के लिए अनन्तकाल तक उसके साथ रहने के आनन्द का आरंभ होगा। जैसे परमेश्वर हमारे तैयार हो जाने की प्रतीक्षा में है, वैसे ही हमें भी अपने संचालक परमेश्वर पिता के उस इशारे के लिए तैयार हो जाना चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह के आगमन और जन्म का उत्सव उस के पुनःआगमन और 
मसीही विश्वासियों के अनन्त आनन्द की प्रत्याशा है।

और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा। - मत्ती 24:14

बाइबल पाठ: इब्रानियों 9:11-22
Hebrews 9:11 परन्तु जब मसीह आने वाली अच्छी अच्छी वस्‍तुओं का महायाजक हो कर आया, तो उसने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से हो कर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात इस सृष्‍टि का नहीं। 
Hebrews 9:12 और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया। 
Hebrews 9:13 क्योंकि जब बकरों और बैलों का लोहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है। 
Hebrews 9:14 तो मसीह का लोहू जिसने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो। 
Hebrews 9:15 और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त मीरास को प्राप्त करें। 
Hebrews 9:16 क्योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है। 
Hebrews 9:17 क्योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धने वाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती। 
Hebrews 9:18 इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लोहू के नहीं बान्‍धी गई। 
Hebrews 9:19 क्योंकि जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उसने बछड़ों और बकरों का लोहू ले कर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया। 
Hebrews 9:20 और कहा, कि यह उस वाचा का लोहू है, जिस की आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हारे लिये दी है। 
Hebrews 9:21 और इसी रीति से उसने तम्बू और सेवा के सारे सामान पर लोहू छिड़का। 
Hebrews 9:22 और व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्तुएं लोहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं; और बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 4-5
  • प्रकाशितवाक्य 12


मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

यीशु के नाम में


   परिवार की तस्वीरों के संग्रह में मेरी मनपसन्द फोटो एक पारिवारिक भोजन के समय की है। उस फोटो में पिताजी, उनके बेटे और बेटों की पत्नियाँ और उन सभी के बच्चे सब एक साथ धन्यवादी समारोह और प्रार्थना के अवसर पर एक साथ एकत्रित हैं। पिताजी को पक्षाघात के कई दौरे पड़ चुके थे, और अब वे पहले के समान बोल नहीं पाते थे। परन्तु प्रार्थना के उस समय में, मैंने उन्हें पूरे मन से कहते सुना, "हम प्रभु यीशु के नाम में माँगते हैं!" इसके लगभग एक वर्ष पश्चात, पिताजी इस संसार से कूच कर के उसके पास चले गए जिसके नाम में उन्होंने ऐसा दृढ़ विश्वास रखा था।

   प्रभु यीशु ने हमें अपने नाम में प्रार्थना करके परमेश्वर से आग्रह करना सिखाया है। अपने क्रूस पर बलिदान होने की पूर्व-संध्या को उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा: "अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए" (यूहन्ना 16:24)। परन्तु प्रभु यीशु की उनके नाम में माँगने से परमेश्वर से प्राप्त कर लेने की यह प्रतिज्ञा बैंक के किसी कोरे चेक के समान नहीं है, जिसे भुनाने वाला अपनी मर्ज़ी से चाहे जितनी रकम भर सकता है और वह रकम प्राप्त कर सकता है। इस प्रतिज्ञा में होकर हमें भी अपनी सनक के अनुसार परमेश्वर से कुछ भी माँग लेने और परमेश्वर का उस माँग को पूरा करने के लिए बाध्य होने की छूट प्रभु की इस प्रतिज्ञा से नहीं मिलती है।

   उस ही संध्या को, प्रभु ने यह भी सिखाया कि उसके नाम में माँगी गई बातों को इसलिए दिया जाता है जिससे परमेश्वर पिता की महिमा हो (यूहन्ना 14:13)। बाद में, उसी रात में प्रभु ने अपनी व्यथा में परमेश्वर से प्रार्थना की, "फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो" (मत्ती 26:39)। तात्पर्य यह है कि प्रभु ने अपने उदाहरण से दिखाया कि माँगने में परमेश्वर पिता की महिमा और आज्ञाकारिता के अनुसार माँगी गई बात ही पूरी हो सकती है (1 यूहन्ना 5:14)।

   जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो चाहिए कि हम परमेश्वर की इच्छा, समझ-बूझ, प्रेम और सार्वभौमिकता के प्रति समर्पित भी रहें; तब ही हम निःसंकोच होकर प्रार्थना में कह सकते हैं "यीशु के नाम में"। - डेनिस फिशर


प्रार्थना की पहुँच से बाहर कुछ भी नहीं है, 
बशर्ते कि वह परमेश्वर की इच्छा के बाहर ना हो।

और हमें उसके साम्हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उस की इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो हमारी सुनता है। - 1 यूहन्ना 5:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:12-21
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं। 
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। 
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा। 
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11


सोमवार, 19 दिसंबर 2016

क्रिसमस


   चार्ल्स डिकिन्स का उपन्यास A Christmas Carol सर्वप्रथम 19 दिसंबर 1843 को प्रकाशित हुआ, और तब से लेकर आज तक उसकी माँग बनी रही है, तथा वह प्रकाशन में रहा है। यह उपन्यास एबेनेज़र स्क्रूज नामक एक धनी परन्तु रूखे और कंजूस व्यक्ति की कहानी है जो कहता था, "प्रत्येक ’मेरी क्रिसमस’ कहने वाले मूर्ख को उसकी ही पुडिंग में पका देना चाहिए!" लेकिन एक क्रिसमस की शाम, स्क्रूज एक उदार और प्रसन्नचित व्यक्ति बन जाता है। डिकिन्स के इस उपन्यास ने संसार के सभी लोगों के अन्दर व्याप्त शांति की लालसा को बड़े ही हास्यस्पद और गहरी अन्तःदृष्टि के साथ व्यक्त किया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक प्रमुख पात्र, प्रेरित पौलुस, जब युवा था और शाऊल नाम से जाना जाता था, तब वह प्रभु यीशु और उनके अनुयायियों का कट्टर बैरी था; बाइबल बताती है कि, "शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट घसीट कर बन्‍दीगृह में डालता था" (प्रेरितों 8:3)। लेकिन एक दिन उसका साक्षात्कार पुनरुत्थान हुए प्रभु यीशु मसीह से हो गया, जिससे उसके जीवन की दिशा तथा दशा दोनों ही पूर्णतया परिवर्तित हो गए (प्रेरितों 9:1-16)।

   मसीही विश्वास में उसके पुत्र समान तिमुथियुस को लिखी अपनी पत्री में पौलुस प्रभु यीशु से हुए अपने जीवन परिवर्तित कर देने वाले साक्षात्कार के संबंध में लिखता है: "मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ" (1 तिमुथियुस 1:13-14)।

   प्रभु यीशु मसीह ने इस संसार में जन्म इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए लिया, उन्होंने अपना बलिदान इसीलिए दिया जिससे कि हम मनुष्य, उनमें लाए गए साधारण विश्वास के द्वारा, सेंत-मेंत ही अपने पापी स्वभाव और प्रवृत्ति से परिवर्तित होकर उनसे अपने पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर सकें, उनकी समानता में आ सकें, परमेश्वर की संतान होने का अधिकार प्राप्त कर सकें।

   मसीही विश्वास किसी धर्म परिवर्तन का नहीं वरन मनुष्य के पापी मन के परिवर्तन का नाम है; और क्रिसमस का बस यही तात्पर्य है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब हम प्रभु यीशु को अपना हृदय परिवर्तित करने देते हैं, 
जीवन में परिवर्तन स्वतः ही आ जाता है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 1:12-17
1 Timothy 1:12 और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वास योग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया। 
1 Timothy 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। 
1 Timothy 1:14 और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। 
1 Timothy 1:15 यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं। 
1 Timothy 1:16 पर मुझ पर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं। 
1 Timothy 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10


रविवार, 18 दिसंबर 2016

मित्र


   कॉन्सटैनटिनोपोल के प्रधान बिशप जौन क्राएसोस्तोम (347-407 ई०) ने मित्रता के बारे कहा: "मित्रता ऐसी होती है कि उसके द्वारा हम स्थानों और ऋतुओं को भी चाहने लगते हैं; जैसे कि फूल अपने नीचे की ज़मीन पर अपनी सुगन्धित पंखुड़ियाँ बिखेर देते हैं, उसी प्रकार मित्र जन, जहाँ भी वे रहते हैं, उन स्थानों पर अपनी कृपादृष्टि बिखेर देते हैं।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में योनातान और दाऊद सच्ची मित्रता की मधुर उदाहरण हैं। बाइबल बताती है कि उन दोनों के एक दुसरे से मिलने के साथ ही उनमें एक बंधन बंध गया (1 शमूएल 18:1-4)। उन्होंने एक दूसरे की देखभाल और चिंता के द्वारा, एक दूसरे के प्रति अपनी वफादारी को दिखाने के द्वारा अपनी मित्रता को ना केवल जीवित रखा वरन उसे बढ़ाया भी (18:3; 20:16, 42; 23:18)। योनातान ने दाऊद को उपहार दिए (18:4) और अनेक कठिन परिस्थितियों में उसका ध्यान रखा (19:1-2; 20:12-13)।

   उनकी मित्रता की पराकाष्ठा को हम 1 शमूएल 23:16-17 में देखते हैं जब दाऊद शाऊल से अपनी जान बचा कर भाग रहा था और "शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया"। जब आप अपने जीवन के किसी निम्न बिन्दु में होते हैं तब मित्र आपको परमेश्वर में सामर्थी होने में सहायक होते हैं।

   आज के इस संसार में जहाँ अधिकांश संबंध कुछ प्राप्त कर लेने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, हम मसीही विश्वासी, अपने प्रभु परमेश्वर के समान, ऐसे मित्र बनें जो दूसरों को कुछ देने पर ध्यान लगाते हैं; क्योंकि हमारे प्रभु यीशु ने कहा है, "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो" (यूहन्ना 15:13-14)। - पोह फैंग चिया


जीवन की महिमा प्रेम तथा सेवा देने में है ना कि लेने में।

मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है। - नीतिवचन 17:17

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 18:1-4; 23:15-18
1 Samuel 18:1 जब वह शाऊल से बातें कर चुका, तब योनातान का मन दाऊद पर ऐसा लग गया, कि योनातान उसे अपने प्राण के बराबर प्यार करने लगा। 
1 Samuel 18:2 और उस दिन से शाऊल ने उसे अपने पास रखा, और पिता के घर को फिर लौटने न दिया। 
1 Samuel 18:3 तब योनातान ने दाऊद से वाचा बान्धी, क्योंकि वह उसको अपने प्राण के बराबर प्यार करता था। 
1 Samuel 18:4 और योनातान ने अपना बागा जो वह स्वयं पहिने था उतारकर अपने वस्त्र समेत दाऊद को दे दिया, वरन अपनी तलवार और धनुष और कटिबन्ध भी उसको दे दिए। 
1 Samuel 23:15 और दाऊद ने जान लिया कि शाऊल मेरे प्राण की खोज में निकला है। और दाऊद जीप नाम जंगल के होरेश नाम स्थान में था; 
1 Samuel 23:16 कि शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया। 
1 Samuel 23:17 उसने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है। 
1 Samuel 23:18 तब उन दोनों ने यहोवा की शपथ खाकर आपस में वाचा बान्धी; तब दाऊद होरेश में रह गया, और योनातन अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • ओबद्याह
  • प्रकाशितवाक्य 9