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मंगलवार, 22 जनवरी 2019

चेहरा



      एक लेखक के रूप में मेरी अधिकांश जीविका दुःख की समस्या को संबोधित करने में व्यतीत हुई है। मैं बारंबार लौट कर उन्हीं प्रश्नों पर आ जाता हूँ, मानो एक ऐसे घाव को कुरेदता रहता हूँ जो कभी भरने का नहीं। मुझे अपने पाठकों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त होती हैं, और उनकी दुखद कहानियाँ मेरी शंकाओं को एक मान्वीय चहरे प्रदान करती हैं। मुझे स्मरण है कि एक युवा पास्टर ने मुझे फोन करके प्रश्न किया, “अब भला मैं अपने युवाओं के समूह के साथ एक प्रेमी परमेश्वर के बारे में कैसे बात कर सकता हूँ?” – उसकी पत्नि और शिशु बच्ची ऐड्स से ग्रसित होकर मर रहे थे क्योंकि उन्हें एड्स से संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था!

      मैंने सीख लिया है कि इस प्रकार के “क्यूँ?” प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास भी नहीं करूँ। उस पास्टर के पत्नि को वही एक संक्रमित खून की बोतल ही क्यों मिली? क्यों चक्रवाधि तूफ़ान ने एक नगर को तबाह कर दिया और पास के दूसरे नगर की कुछ हानि नहीं हुई? क्यों शारीरिक चंगाई के लिए की गई प्रार्थनाएं निरुत्तरित चली जाती हैं?

      लेकिन एक प्रश्न है जो मुझे अब वैसे परेशान नहीं करता है, जैसे पहले किया करता था – “क्या परमेश्वर को हमारी परवाह है?” मैं इस प्रश्न का केवल एक ही उत्तर जानता हूँ, और वह उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर ने हमें वह चेहरा दिया है जिसे देखने से हमें पता चल जाता है कि परमेश्वर इस दुःख से कराहते हुए सँसार की परवाह करता है कि नहीं।

      “क्या परमेश्वर को हमारी प्रवाह है?” हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पुत्र की मृत्यु, जिससे अन्तः सारा दुःख, कष्ट, पीड़ा, और मृत्यु भी सदा के लिए समाप्त हो जाएँगी, ही इस प्रश्न का उत्तर है – “इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो” (2 कुरिन्थियों 4: 6)। - फिलिप यैंसी


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम का विस्तार क्रूस पर मसीह यीशु की फ़ैली हुई बाहों के जितना है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-11
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14: 22-36



सोमवार, 21 जनवरी 2019

भरोसा



      जब मैं कॉलेज में बास्केटबॉल खेला करता था, तो खेल के प्रत्येक समय में मुझे जान-बूझकर निर्णय लेना और निभाना होता था कि मैं खेलने के लिए नियमित रूप से क्रीड़ास्थल तक जाऊँगा, और अपने प्रशिक्षक पर पूरा भरोसा रखते हुए उसके कहे के अनुसार करूँगा और खेलूँगा। यह मेरे स्वयँ के लिए तथा मेरी टीम के लिए भी कदापि लाभप्रद नहीं होता यदि मैं खेल के स्थान पर पहुँचकर कहने लगता, “देखिए प्रशिक्षक महोदय, मैं यहाँ आ गया हूँ और मैं गेंद को बास्केट में डालना, तथा उसे टप्पा खिलाते हुए लेकर भागना तो चाहता हूँ, परन्तु मुझ से दौड़ कर मैदान के चक्कर लगाने, पीछे रहकर रक्षक की भूमिका में खेलने, या पसीना बहाने के लिए मत कहिए!” प्रत्येक सफल खिलाड़ी को अपने प्रशिक्षक पर भरोसा रख कर उसके कहे के अनुसार करना होता है, अपने तथा टीम के भले के लिए।

      इसी प्रकार मसीही विश्वास के जीवन में भी हमें परमेश्वर को समर्पित “जीवित बलिदान” (रोमियों 12:1) बनना होता है। हम अपने उद्धारकर्ता और प्रभु से कहते हैं, “मैं आप पर भरोसा रखता हूँ; आप जो और जैसा चाहेंगे मैं वो और वैसा करूँगा।” हमारे ऐसे समर्पण एवँ आज्ञाकारिता के परिणामस्वरूप वह हमारे मनों को उन बातों पर लगाने में हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है जो उसे पसन्द हैं और हमारे तथा मसीही समाज की भलाई के लिए हैं, और इसके द्वारा हमें अपने स्वरूप में परिवर्तित करता रहता है।

      यह ध्यान रखना हमारे लिए लाभदायक है कि परमेश्वर हमें कभी ऐसे कार्य करने के लिए नहीं बुलाएगा जिनके लिए उसने हमें आवश्यक सामर्थ्य नहीं दे दी है, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को स्मरण करवाया: “और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं...” (पद 6)।

      यह जानते हुए कि हम अपने जीवनों और आवश्यकताओं के लिए परमेश्वर पर पूरा भरोसा रख सकते हैं, हम निश्चिन्त होकर उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत कर सकते हैं, इस ज्ञान से आश्वस्त कि जिसने हमें रचा है, वही हमारा रक्षक और मार्गदर्शक भी है। - डेव ब्रैनन


निश्चिन्त होकर अपने आप को परमेश्वर के हाथों में छोड़ देने में कोई जोखिम नहीं है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14: 1-21



रविवार, 20 जनवरी 2019

कृतज्ञता और धन्यवाद



      एक सर्द, जमा देने वाली ठंडी की प्रातः, मैं और मेरी बेटी चलकर स्कूल जा रहे थे, और उस ठण्ड में हम अपने श्वास को भाप में परिवर्तित होता देखकर आनन्दित हो रहे थे। हम भाप के उन छोटे बादलों को बनाने से आनन्दित हो रहे थे, मेरे लिए वे पल एक उपहार के समान थे, जब मैं अपनी बेटी की संगति में आनदित हो सकती थी, जीवित अनुभव कर सकती थी।

      हमारी श्वास जो सामान्यतः अदृश्य रहती है, हवा के ठन्डे होने के कारण दिखाई दे रही थी, और इससे मैं अपने जीवन और श्वास के स्त्रोत – हमारे सृष्टिकर्ता प्रभु के बारे में सोचने लगी। उसी ने आदम को धरती की मिट्टी से बनाया और उसमें जीवन का श्वास फूंका, और वही है जो हमें तथा सभी जीवित प्राणियों को जीवन का दान देता है (उत्पत्ति 2:7)। सभी वस्तुएँ उस ही से आती हैं, हमारी श्वास भी, जिसे अन्दर-बाहर लेते हुए हम उसके बारे में सोचते भी नहीं हैं।

      हम आज की तकनीकियों और सुविधाओं में होकर अपने आरंभ को तथा इस तथ्य को कि परमेश्वर ही है जो हमें जीवन देता है, भूल सकते हैं। परन्तु जब हम थोड़ा थम कर यह स्मरण करते हैं कि परमेश्वर ही हमारा सृष्टिकर्ता है, तो हम उसके प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी बन सकते हैं। हम उससे अपने जीवन एवं कार्यों के लिए सहायता माँग सकते हैं, और कृतज्ञ तथा धन्यवादी हृदयों के साथ उससे मिलने वाली सहायता, कृपा और सुरक्षा के लिए उसकी आराधना कर सकते हैं। हमारा यह कृतज्ञ एवँ धन्यवादी होना औरों को भी छू सकता है, और उन्हें भी इन बातों के प्रति सजग करके, उनके मनों से भी कृतज्ञता एवँ धन्यवाद के साथ परमेश्वर की आराधना और स्तुति करवा सकता है। - एमी बाउचर पाई


अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी रहो, 
जिससे जीवन और सभी आशीषें मिलती हैं।

इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। - 1 तिमुथियुस 6:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 2:4-8
Genesis 2:4 आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया:
Genesis 2:5 तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था;
Genesis 2:6 तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी
Genesis 2:7 और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।
Genesis 2:8 और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58



शनिवार, 19 जनवरी 2019

खज़ाना



      मार्च 1974 में चीन में कुछ किसानों द्वारा कूँआ खोदते समय एक चौंका देने वाली खोज हुई: मध्य चीन की उस सूखी भूमि में चीन की प्रसिद्ध टेराकोटा सेना छुपी हुई थी – मिट्टी की आदम-कद मूर्तियाँ जिन्हें आग में पका कर मजबूत किया गया था, और जो ईसा-पूर्व तीसरी शताब्दी में बनाई गई थीं। उस अद्भुत खोज में 8000 सैनिकों, 150 अश्वरोही सेना, 130 रथ, जिन्हें 520 घोड़े खींच रहे थे पाए गए। वह टेराकोटा सेना चीन के प्रमुख सैलानी स्थलों में से एक बन गई है, जहाँ दस लाख से भी अधिक सैलानी प्रति वर्ष आते हैं। वह अद्भुत खज़ाना शताब्दियों तक छिपा पड़ा रहा, परन्तु अब उसे सँसार के साथ साझा किया जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, कि हम मसीही अनुयायियों में एक खज़ाना उपलब्ध करवाया गया है, जिसे हमें संसार के साथ बाँटना है: “परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे” (2 कुरिन्थियों 4:7)। हमारे अन्दर रखा गया वह खज़ाना मसीह यीशु के प्रेम और उसमें सँसार के प्रत्येक व्यक्ति को मिल सकने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार का सन्देश है।

      इस खजाने को हमें छिपा कर नहीं रखना है वरन इसे सँसार के साथ बाँटना है जिससे परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह में होकर सँसार के प्रत्येक स्थान के लोग परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो सकें। आज, हम मसीही विश्वासियों में निवास करने वाली परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सहायता से, इस अद्भुत खजाने को किसी के साथ बाँटें। - बिल क्राउडर


औरों को मसीही जीवन की अपनी गवाही को देखने और सुनने दें।

और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:15-16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-7
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30



शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

प्रभाव



      कई वर्ष पहले की बात है, मेरी पत्नि और मैं इंग्लैंड के एक ग्रामीण इलाके के एक छोटे से होटल में रुके थे, जहाँ चार और ब्रिटिश जोड़े भी रुके हुए थे, किन्तु हम एक दूसरे से पहले कभी नहीं मिले थे। रात्रि के भोजन के पश्चात हम सब बैठे कॉफी पी रहे थे और वार्तालाप हो रहा था, जिसमें हमारे कार्य के बारे में बात उठी। उस समय मैं अमेरिका के शिकागो शहर में मूडी बाइबल इंस्टीट्यूट का अध्यक्ष था, और मुझे लगा कि उन उपस्थित परिवारों में से किसी ने भी मेरे कार्यस्थल का नाम नहीं सुना होगा, और न ही उसके संस्थापक डी. एल. मूडी के विषय वे कुछ जानते होंगे। परन्तु मेरे द्वारा मूडी का नाम लेते ही, उन सबकी तुरन्त प्रतिक्रिया से मैं अचंभित हुआ; एक ने कहा “वह मूडी जो मूडी और सैन्की वाले हैं?” एक अन्य ने कहा, “हमारे पास सैन्की के भजनों की पुस्तक है, और हमारा परिवार बहुधा प्यानों के चारों ओर एकत्रित होकर उसमें से परमेश्वर की स्तुति में भजन गाता है।” मुझे बहुत अचरज हुआ! सुसमाचार प्रचारक ड्वाइट मूडी और उनके साथ की संगीतज्ञा आयरा सैन्की ने ब्रिटेन के इलाकों में 120 वर्ष से भी अधिक पहले सुसमाचार सभाएं संबोधित की थीं, और उनका प्रभाव अभी भी अनुभव किया जा रहा था।

      उस रात्रि, उस कमरे से जाते हुए, मैं सोच रहा था कि हमारे जीवन परमेश्वर के लिए बहुत दूर तक प्रभाव डाल सकते हैं – एक प्रार्थना करने वाले माँ का उसके बच्चों के जीवन पर प्रभाव, एक सहकर्मी द्वारा कहे गए प्रोत्साहन के शब्दों का प्रभाव, एक शिक्षक अथवा परामर्शदाता से मिलने वाली सहायता और चुनौतियों का प्रभाव, एक मित्र के सप्रेम कहे गए सुधारने वाले शब्दों का प्रभाव – सभी बहुत दूर तक जीवन में प्रभाव दिखाते हैं।

      परमेश्वर के आश्वासन, “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) में होकर उसके लिए कार्य करना एक महान सौभाग्य है। - जो स्टोवैल


केवल वही स्थाई रहेगा जो मसीह यीशु में होकर किया गया है।

इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है; - व्यवस्थाविवरण 7:9

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50



गुरुवार, 17 जनवरी 2019

जीवन



      रवि के पिता के शब्दों ने रवि के मन में गहरी चोट करी। उसके पिता उस डांट रहे थे, “तुम पूर्णतः असफल रहे हो, परिवार के लिए तुम शर्मिन्दगी का कारण हो।” अपने भाई-बहनों की तुलना में रवि को एक कलंक के रूप में देखा जाता था। उसने खेल-कूद में अच्छे प्रदर्शन करने के प्रयास किए, और वह इसमें सफल भी हुआ, परन्तु फिर भी वह अपने आप को जीवन में असफल अनुभव करता था। वह सोचता था, “मेरा क्या होगा? क्या मैं ऐसे ही पूर्णतः असफल ही बना रहूँगा? क्या कोई विधि है कि मैं जीवन समाप्त कर सकूँ, बिना किसी पीड़ा के?” वह इन विचारों से जूझता तो रहता था परन्तु उन्हें किसी के साथ बाँटता नहीं था; उसकी संस्कृति में ऐसा किया ही नहीं जाता था। उसे तो यही सिखाया गया था कि अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को व्यक्तिगत ही रखो; और पने गिरते हुए जीवन को संभाले रखो।”

      इस कारण वह अपनी परेशानी से अकेले ही जूझता रहा, और उसने आत्म-हत्या का प्रयास किया। इस विफल प्रयास से अस्पताल में स्वस्थ होते समय, एक मिलने वाले ने उसे परमेश्वर के वचन बाइबल की एक प्रति दी जो यूहन्ना 14 अध्याय पर खुली हुई थी। रवि की माँ ने उसे बाइबल से पढ़ कर सुनाया, और वहाँ एक स्थान पर प्रभु यीशु ने कहा है, “इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे” (पद 19)। रवि को लगा कि उसके लिए यही एकमात्र आशा है, जीवन जीने का एक नया तरीका। जीवन के रचनाकार के द्वारा दी गई जीवन की परिभाषा “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता” (पद 6); रवि ने परभु यीशु की बात पर विश्वास कर के प्रार्थना की, “यीशु, यदि आप ही हैं जो सार्थक जीवन देते हैं, तो मुझे आप से वह जीवन चाहिए।”

      जीवन में घोर निराशा के पल भी आ सकते हैं; परन्तु हमारी हर परेशानी में हम रवि के समान जीवन के रचियता, प्रभु यीशु मसीह के पास जाकर आशा का संचार प्राप्त कर सकते हैं। परमेश्वर चाहता है कि हम एक अच्छा और संतुष्टि का जीवन जीएँ। - पोह फैंग चिया


केवल प्रभु यीशु ही नया जीवन दे सकता है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:5-14
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।
John 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



बुधवार, 16 जनवरी 2019

घाटी



      फ्रांस के कलाकार हेनरी मातिस्से के अनुसार, उनके जीवन के अन्त के समय उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियां उनके जीवन की सब से उत्तम प्रतीक थीं। उस समय में उन्होंने चित्र बनाने की एक नई शैली के साथ प्रयोग किया, विशाल तसवीरें बनाना, रंग के साथ नहीं वरन रंगीन कागज़ का उपयोग करने के द्वारा। उन्होंने अपने कमरे की दीवारों को इन चटकीले रंग की तस्वीरों से सजा लिया था। उनके लिए यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि तब वे कैंसर पीड़ित थे और अकसर बिस्तर पर ही रहने के लिए बाध्य होते थे।

      बीमार पड़ना, नौकरी खो देना, किसी दुखद स्थिति से होकर निकलना, आदि ऐसे अनुभव हैं जिन्हें कुछ लोग “घाटी के अनुभव” कहते हैं, जहाँ भय अन्य हर बात पर छाया रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में हम देखते हैं कि यहूदा के लोगों ने भी ऐसी ही स्थिति का अनुभव किया जब उन्हें पता चला कि तीन बड़ी जातियां एक संयुक्त सेना बनाकर उन पर चढ़ाई करने के लिए आ रही है (2 इतिहास 20: 1-3)। यहूदा के राजा ने परमेश्वर के आगे अपनी विनती रखी, “हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं” (पद 12); और परमेश्वर ने उन्हें उत्तर दिया कि “इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा” (पद 17)।

      परमेश्वर के कहे अनुसार यहूदा के राजा ने अपनी सेना को युद्ध-भूमि में भेजा, और वे परमेश्वर की स्तुति करते हुए गए (पड़ 20-21)। उन्होंने पाया कि उन्हें किसी युद्ध में नहीं पड़ना पड़ा, वरन उनके विरुद्ध आई सेना के लोग आपस में ही लड़ मरे, और यहूदा की सेना तीन दिन तक उन पर से लूट को जमा करती रही। उन्होंने उस युद्ध-स्थल का नाम “बराका की तराई,” अर्थात “आशीष” रखा।

      हमारे जीवनों के न्यूनतम बिंदुओं में भी परमेश्वर हमारे साथ होता है। उसके साथ होने से हम अपनी घाटी के अनुभव में भी आशीष को पा सकते हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर बोझ को भी आशीष में बदल देने में माहिर है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1, 12-22
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की।
2 Chronicles 20:12 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं।
2 Chronicles 20:13 और सब यहूदी अपने अपने बाल-बच्चों, स्त्रिीयों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे।
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया।
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहनेवालो, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे।
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया।
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे।
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11