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शनिवार, 17 अगस्त 2019

घर



      आज के हमारे सँसार भर में शरणार्थियों की – उनकी जिन्हें संघर्ष और सताव के कारण अपने घर और देश छोड़ने पड़े हैं, संख्या इतनी अधिक हो चुकी है जितनी पहले कभी नहीं थी। संयुक्त राष्ट्र ने देशों के नेताओं से आग्रह किया है कि वे साथ मिलकर कार्य करें और शरणार्थियों को स्वीकार करें जिससे प्रत्येक बच्चे को शिक्षा तथा प्रत्येक व्यसक को जीविका कमाने के लिए काम मिल सके, और प्रत्येक परिवार के पास रहने के लिए एक घर हो।

      संकट के समय में शरणार्थियों के लिए घर बनाने के सपने से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में यहूदा राष्ट्र को परमेश्वर द्वारा दी गई प्रतिज्ञा स्मरण हो आई, जब क्रूर अश्शूरी सेनाओं ने उनके घरों को उजाड़ने की धमकी दी थी। ऐसे समय में परमेश्वर ने मीका नबी को नियुक्त किया कि वह यहूदा के लोगों को सचेत करे कि वे अपने प्रिय शहर यरूशलेम और उसमें स्थित उनके मंदिर को खो देंगे। परन्तु परमेश्वर ने यह वायदा भी किया कि इस हानि से परे, भविष्य में, एक बहुत सुन्दर भविष्य उनके लिए रखा हुआ है।

      मीका ने कहा कि एक ऐसा दिन आएगा जब परमेश्वर समस्त सँसार के सभी लोगों को अपने पास बुलाएगा। हिंसा का अन्त हो जाएगा। युद्ध के हथियार खेती के उपकरण बन जाएँगे, और प्रत्येक वह व्यक्ति जो परमेश्वर के आह्वान को स्वीकार करेगा उसे परमेश्वर के राज्य में शांतिमय घर और फलवन्त जीवन प्राप्त होगा (4:3-4)।

      आज सँसार के अनेकों लोगों के लिए, और हो सकता है कि आप के लिए भी एक सुरक्षित घर वास्तविकता नहीं, परन्तु एक सपना है। परन्तु हम परमेश्वर की प्राचीन प्रतिज्ञा पर भरोसा रख सकते हैं कि सँसार के सभी राष्ट्रों के लोगों को एक घर मिलेगा; और हम उस शांतिपूर्ण घर की प्रतिज्ञा को वास्तविक होने के लिए प्रार्थना, कार्य और प्रतीक्षा करते रह सकते हैं। - एमी पीटरसन


परमेश्वर अपने बच्चों को अपने राज्य में एक शांतिपूर्ण घर देने का वायदा करता है।

वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे। - यशायाह 2:4

बाइबल पाठ: मीका 4:1-5
Micah 4:1 अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाडिय़ों से अधिक ऊंचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा की नाईं उसकी ओर चलेंगे।
Micah 4:2 और बहुत जातियों के लोग जाएंगे, और आपस में कहेंगे, आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हम को अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा।
Micah 4:3 वह बहुत देशों के लोगों का न्याय करेगा, और दूर दूर तक की सामर्थी जातियों के झगड़ों को मिटाएगा; सो वे अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल, और अपने भालोंसे हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध तलवार फिर न चलाएगी;
Micah 4:4 और लोग आगे को युद्ध विद्या न सीखेंगे। परन्तु वे अपनी अपनी दाखलता और अंजीर के वृक्ष तले बैठा करेंगे, और कोई उन को न डराएगा; सेनाओं के यहोवा ने यही वचन दिया है।।
Micah 4:5 सब राज्यों के लोग तो अपने अपने देवता का नाम ले कर चलते हैं, परन्तु हम लोग अपने परमेश्वर यहोवा का नाम ले कर सदा सर्वदा चलते रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 97-99
  • रोमियों 16



शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

विश्वास



      मेरी एक सहेली ने बताया कि उसके पति को काम में तरक्की के साथ एक दूसरे देश में जाने का प्रस्ताव दिया गया। परन्तु वह सहेली अपना घर छोड़कर जाने को लेकर आशंकित थी, इसलिए उसके पति ने, न चाहते हुए भी, उस प्रस्ताव को मना कर दिया। उसने समझाया कि एक बड़े परिवर्तन को लेकर उसके भय ने, उसे एक नए अभियान के रोमाँच से वंचित कर दिया, और वह कभी-कभी सोचा करती थी कि नहीं जाने के द्वारा वह क्या कुछ अनुभव करने से रह गई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब इस्राएलियों को एक उपजाऊ देश में, जहाँ “दूध और मधु की धाराएँ” (निर्गमन 33:3) बहती थीं जाने के लिए कहा गया तो उनके भय और आशंकाओं ने उन्हें स्तंभित कर दिया। जब इस्राएलियों ने उस देश के बड़े-बड़े नगरों में रहने वाले शक्तिशाली लोगों के बारे में सुना (गिनती 13:28) तो वे भयभीत हो गए। लगभग सभी इस्राएलियों ने उस देश में प्रवेश करने के आह्वान को मानने से इन्कार कर दिया।

      परन्तु यहोशू और कालेब ने उन्हें परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ने के लिए कहा, “तुम यहोवा के विरुद्ध बलवा न करो; और न तो उस देश के लोगों से डरो, क्योंकि वे हमारी रोटी ठहरेंगे; छाया उनके ऊपर से हट गई है, और यहोवा हमारे संग है; उन से न डरो” (गिनती 14:9)। यद्यपि वहाँ के निवासी विशालकाय लगते थे, परन्तु इस्राएली अपने साथ बनी हुई परमेश्वर की उपस्थिति पर विश्वास रख कर आगे बढ़ सकते थे।

      मेरी सहेली को दूसरे देश में जाने के लिए वैसी आज्ञा तो नहीं मिली थी, जैसी कि इस्राएलियों को दी गई थी, परन्तु फिर भी उसे पछतावा था कि उसने अपने भय के कारण उसके जीवन में आए एक अवसर गँवा दिया।

      आज आपका हाल कैसा है – क्या आप भी किसी अनिश्चितता या भयावह परिस्थिति का सामना कर रहे हैं? यदि ऐसा है तो हम मसीही विश्वासी इस बात पर सदा विश्वास रखे रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ बना रहता है और हमारा मार्गदर्शन करता है। उसके कभी न बदलने और अचूक प्रेम पर भरोसा रख कर हम विश्वास के साथ उसके निर्देशानुसार आगे बढ़ सकते हैं। - एमी बाउचर पाई


भय शक्तिहीन बना सकता है, 
परन्तु विश्वास हमें परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। सलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: गिनती 13:25-14:9
Numbers 13:25 चालीस दिन के बाद वे उस देश का भेद ले कर लौट आए।
Numbers 13:26 और पारान जंगल के कादेश नाम स्थान में मूसा और हारून और इस्त्राएलियों की सारी मण्डली के पास पहुंचे; और उन को और सारी मण्डली को संदेशा दिया, और उस देश के फल उन को दिखाए।
Numbers 13:27 उन्होंने मूसा से यह कहकर वर्णन किया, कि जिस देश में तू ने हम को भेजा था उस में हम गए; उस में सचमुच दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और उसकी उपज में से यही है।
Numbers 13:28 परन्तु उस देश के निवासी बलवान हैं, और उसके नगर गढ़ वाले हैं और बहुत बड़े हैं; और फिर हम ने वहां अनाकवंशियों को भी देखा।
Numbers 13:29 दक्षिण देश में तो अमालेकी बसे हुए हैं; और पहाड़ी देश में हित्ती, यबूसी, और एमोरी रहते हैं; और समुद्र के किनारे किनारे और यरदन नदी के तट पर कनानी बसे हुए हैं।
Numbers 13:30 पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है।
Numbers 13:31 पर जो पुरूष उसके संग गए थे उन्होंने कहा, उन लोगों पर चढ़ने की शक्ति हम में नहीं है; क्योंकि वे हम से बलवान हैं।
Numbers 13:32 और उन्होंने इस्त्राएलियों के साम्हने उस देश की जिसका भेद उन्होंने लिया था यह कहकर निन्दा भी की, कि वह देश जिसका भेद लेने को हम गये थे ऐसा है, जो अपने निवासियों निगल जाता है; और जितने पुरूष हम ने उस में देखे वे सब के सब बड़े डील डौल के हैं।
Numbers 13:33 फिर हम ने वहां नपीलों को, अर्थात नपीली जाति वाले अनाकवंशियों को देखा; और हम अपनी दृष्टि में तो उनके साम्हने टिड्डे के सामान दिखाई पड़ते थे, और ऐसे ही उनकी दृष्टि में मालूम पड़ते थे।
Numbers 14:1 तब सारी मण्डली चिल्ला उठी; और रात भर वे लोग रोते ही रहे।
Numbers 14:2 और सब इस्त्राएली मूसा और हारून पर बुड़बुड़ाने लगे; और सारी मण्डली उसने कहने लगी, कि भला होता कि हम मिस्र ही में मर जाते! वा इस जंगल ही में मर जाते!
Numbers 14:3 और यहोवा हम को उस देश में ले जा कर क्यों तलवार से मरवाना चाहता है? हमारी स्त्रियां और बाल-बच्चे तो लूट में चलें जाएंगे; क्या हमारे लिये अच्छा नहीं कि हम मिस्र देश को लौट जाएं?
Numbers 14:4 फिर वे आपस में कहने लगे, आओ, हम किसी को अपना प्रधान बना लें, और मिस्र को लौट चलें।
Numbers 14:5 तब मूसा और हारून इस्त्राएलियों की सारी मण्डली के साम्हने मुंह के बल गिरे।
Numbers 14:6 और नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालिब, जो देश के भेद लेने वालों में से थे, अपने अपने वस्त्र फाड़कर,
Numbers 14:7 इस्त्राएलियों की सारी मण्डली से कहने लगे, कि जिस देश का भेद लेने को हम इधर उधर घूम कर आए हैं, वह अत्यन्त उत्तम देश है।
Numbers 14:8 यदि यहोवा हम से प्रसन्न हो, तो हम को उस देश में, जिस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, पहुंचाकर उसे हमे दे देगा।
Numbers 14:9 केवल इतना करो कि तुम यहोवा के विरुद्ध बलवा न करो; और न तो उस देश के लोगों से डरो, क्योंकि वे हमारी रोटी ठहरेंगे; छाया उनके ऊपर से हट गई है, और यहोवा हमारे संग है; उन से न डरो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 94-96
  • रोमियों 15:14-33



गुरुवार, 15 अगस्त 2019

शरण स्थान



      जब हम शरण स्थान के विषय विचार करते हैं, तो पक्षियों के पंखों का ध्यान करना स्वाभाविक नहीं होता है। यद्यपि पक्षियों के पंख बचाव के लिए बहुत कमज़ोर दिखाई दे सकते हैं, परन्तु जैसे वे दिखते हैं, उससे कहीं अधिक उनमें और भी है। पक्षियों के पंख परमेश्वर की कारीगरी का अद्भुत उदाहरण हैं। पंख के दो प्रकार होते हैं, एक कोमल सपाट और दूसरा रोएँदार। सपाट प्रकार के पंख में बहुत छोटे-छोटे हुक समान कांटे होते हैं जो आपस में फंस कर ज़िप के समान एक साथ बन्द हो जाते हैं; और रोएँदार पंख पक्षी को गरम रखते हैं। दोनों प्रकार के पंख मिलकर पक्षी की हवा और वर्षा से रक्षा करते हैं। परन्तु पक्षियों के बच्चों के केवल रोएँदार पंख ही होते हैं, इसलिए माता-पक्षी को उन्हें अपने पंखों तले ले कर उनकी हवा और वर्षा से रक्षा करनी पड़ती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इसी प्रकार से परमेश्वर द्वारा हमें अपनी आड़ में लेकर हमारी रक्षा करने का चित्रण किया गया है (भजन 91:4)। इससे जो चित्र उभरता है वह आराम और सुरक्षा का है, जैसे कि माता पक्षी अपने बच्चों को अपने पंखों तले लेकर उन्हें बचा कर रखती है। जैसे बच्चे अपने माता-पिता की बाहों की छत्र-छाया में जीवन की कठिनाइयों की आँधियों से सुरक्षित बचे रहते हैं, उसी प्रकार परमेश्वर की उपस्थिति भी हम मसीही विश्वासियों के लिए जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में एक सुरक्षित शरण-स्थान है।

      हम चाहे परेशानियों और दुखों से होकर निकलें, फिर भी हम उनका सामना बिना किसी भय के कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर हमारा शरण स्थान है। - लिंडा वॉशिंगटन


जब भय के कारण आशा धूमिल पड़ने लगे, 
तो हमारे शरण स्थान पिता परमेश्वर की आड़ में आ जाएँ।

तू जो अपने दाहिने हाथ के द्वारा अपने शरणगतों को उनके विरोधियों से बचाता है, अपनी अद्भुत करूणा दिखा। अपने आंखो की पुतली के समान सुरक्षित रख; अपने पंखों के तले मुझे छिपा रख, उन दुष्टों से जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, मेरे प्राण के शत्रुओं से जो मुझे घेरे हुए हैं। - भजन 17:7-9

बाइबल पाठ: भजन 91
Psalms 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।
Psalms 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।
Psalms 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;
Psalms 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।
Psalms 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,
Psalms 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।
Psalms 91:7 तेरे निकट हज़ार, और तेरी दाहिनी ओर दस हज़ार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।
Psalms 91:8 परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा।
Psalms 91:9 हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,
Psalms 91:10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।
Psalms 91:11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
Psalms 91:12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
Psalms 91:13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।
Psalms 91:14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।
Psalms 91:15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।
Psalms 91:16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93
  • रोमियों 15:1-13



बुधवार, 14 अगस्त 2019

प्रेम


      थोमस बर्नाडो ने, चीन में मिशनरी डॉक्टर बन कर जाने के सपने के साथ, 1865 में लंडन अस्पताल के मेडिकल स्कूल में प्रवेश लिया। लेकिन शीघ्र ही बर्नाडो को अपने ही आँगन में एक अत्यावश्यकता दिखाई दी – लंडन की गलियों में रहने और मरने वाले अनेकों बेघर बच्चे। बर्नाडो ने इस भयावह स्थिति के बारे में कुछ करने का निश्चय किया। लंडन के पूर्वी छोर पर निर्धन बच्चों की देखभाल के लिए घर बनाने के साथ बर्नाडो ने लगभग 60,000 लड़के और लड़कियों को गरीबी और अकाल मृत्यु से बचाया। धर्मशास्त्री और पास्टर जौन स्टोट ने कहा, “आज हम उसे लावारिस बच्चों का संरक्षक संत कह सकते हैं।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि, “यीशु ने कहा, बालकों को मेरे पास आने दो: और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है” (मत्ती 19:14)। प्रभु की यह बात सुनने से वहाँ की भीड़, तथा प्रभु यीशु के शिष्यों को हुए अचरज की कल्पना कीजिए। प्राचीन काल में, बच्चों का कोई विशेष महत्व नहीं होता था, और उन्हें जीवन के हाशिए पर ही अधिक रखा जाता था। लेकिन फिर भी प्रभु यीशु ने बच्चों का स्वागत किया, उन्हें आशीष दी, और महत्व दिया।

      बाइबल के नए नियम खण्ड के एक लेखक ने मसीही अनुयायियों के लिए एक चनौती प्रस्तुत की जब उसने लिखा, “हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें” (याकूब 1:27)। प्रथम शताब्दी के उन अनाथ बच्चों के समान, आज समाज के प्रत्येक वर्ग, जाति, और पारिवारिक वातावरण के बच्चे, उपेक्षाओं, मानव व्यापार, दुर्व्यवहार, मादक पदार्थों इत्यादि के कारण खतरे में हैं। हम इन छोटे बच्चों की देखभाल करके जिनसे प्रभु यीशु प्रेम करता है, उस परमेश्वर पिता के प्रति अपना आदर व्यक्त कर सकते हैं जो हम से प्रेम करता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु के प्रेम की अभिव्यक्ति बनें।

हे भाइयो, तुम समझ में बालक न बनो: तौभी बुराई में तो बालक रहो, परन्तु समझ में सियाने बनो। - 1 कुरिन्थियों 14:20

बाइबल पाठ: मत्ती 18:1-10
Matthew 18:1 उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?
Matthew 18:2 इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया।
Matthew 18:3 और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे।
Matthew 18:4 जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा।
Matthew 18:5 और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है।
Matthew 18:6 पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।
Matthew 18:7 ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है; पर हाय उस मनुष्य पर जिस के द्वारा ठोकर लगती है।
Matthew 18:8 यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काटकर फेंक दे; टुण्‍डा या लंगड़ा हो कर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्त आग में डाला जाए।
Matthew 18:9 और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकाल कर फेंक दे।
Matthew 18:10 काना हो कर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आंख रहते हुए तू नरक की आग में डाला जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 89-90
  • रोमियों 14



मंगलवार, 13 अगस्त 2019

विश्वास



      डॉक्टर के शब्द उसके हृदय पर हथोडे के समान पड़े – उसे कैंसर हो गया था। अपने बच्चों और पति के बारे में सोचने पर मानों उसका सँसार ठहर गया। उन्होंने बहुत ज़ोर लगा कर प्रार्थनाएं की थीं कि परिणाम कुछ और हो। लेकिन अब वे क्या करें? बहते हुए आँसुओं से भीगे चहरे को हाथों में छुपाते हुए उसने धीमी आवाज़ में प्रार्थना की, “परमेश्वर, यह हमारे नियंत्रण से बाहर है। कृपया हमारी सामर्थ्य बनें।”

       ऐसे में हम क्या करें जब परिणाम विनाशक हों; जब परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण से बाहर हों? जब संभावनाएं आशाविहीन हों, तब हम किस की ओर मुड़ें?

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हबक्कूक नबी की परिस्थिति भी उसके नियंत्रण से बाहर थी और भय ने उसे दबोच रखा था। आने वाला न्याय विनाशकारी होने वाला था (हबक्कूक 3:16-17)। लेकिन फिर भी उस अवश्यंभावी नाश में, हबक्कूक ने चुनाव किया कि वह अपने विश्वास के सहारे जीएगा (2:4) और परमेश्वर में आनन्दित होगा (3:18)। उसने अपना भरोसा और विश्वास अपनी परिस्थितियों, अपनी योग्यताओं, या अपने संसाधनों पर नहीं रखा, वरन परमेश्वर की भलाई और महानता पर रखा। परमेश्वर पर उसके विश्वास ने उसे कहने के लिए बाध्य किया कि “यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है” (पद 19)।

      हम जब कठिन परिस्तिथियों का सामना करें – कोई बीमारी, पारिवारिक संकट, आर्थिक परेशानी, इत्यादि – हमें भी अपना विश्वास परमेश्वर में बनाए रखते हुए उसपर भरोसा बनाए रखना है। वह हमारी प्रत्येक परिस्थिति में हमारे सदैव साथ है। - कैरेन वुल्फ


जब कठिन परिस्थितियों का सामना करना हो 
तो हम परमेश्वर पर हमारा बल होने के लिए भरोसा रख सकते हैं।

परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूंगा, मैं अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट जोहता रहूंगा; मेरा परमेश्वर मेरी सुनेगा। - मीका  7:7

बाइबल पाठ: हबक्कूक 3:16-19
Habakkuk 3:16 यह सब सुनते ही मेरा कलेजा कांप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियां सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े कांपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूंगा जब दल बांध कर प्रजा चढ़ाई करे।।
Habakkuk 3:17 क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों,
Habakkuk 3:18 तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।।
Habakkuk 3:19 यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 87-88
  • रोमियों 13



सोमवार, 12 अगस्त 2019

धन्यवादी



      ऑस्ट्रेलिया में एक शहर से दूसरे तक गाड़ी चलाकर जाने में घंटों लग सकते हैं, जिससे होने वाली थकान के कारण दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए छुट्टियों के व्यस्त समयों में मुख्य राजमार्गों पर विश्राम के स्थान बनाए जाते हैं जहाँ स्वयंसेवी लोगों मुफ्त कॉफी भी देते हैं। वहाँ पर हमारी लंबी यात्राओं में हम इन विश्राम-स्थलों पर रुक कर उनका आनन्द लिया करता थे।

      ऐसी ही एक यात्रा में हम एक विश्राम स्थान पर रुके और अन्दर जाकर अपने लिए कॉफी की माँग की। एक स्वयंसेवक ने हमें दो कप कॉफी पकड़ाई, और मुझसे दो डॉलर देने के लिए कहा। मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों? तो उसने वहाँ लगे सूचना-पट पर छोटे अक्षरों में लिखी सूचना की ओर संकेत किया, जहाँ लिखा हुआ था कि कॉफी गाड़ी चलाने वाले के लिए तो मुफ्त है, परन्तु अन्य सभी यात्रियों को कॉफी के लिए पैसे देने होंगे। मैं इससे नाराज़ हुआ और उससे कहा कि यह गलत है, उसे दो डॉलर दिए और बाहर अपनी कार को चला गया। कार में मेरी पत्नि ने मुझे मेरी गलती का ध्यान दिलाया – मैंने एक उपहार को अपना व्यक्तिगत अधिकार समझ लिया था, और जो मुझे दिया जा रहा था उसके लिए धन्यवादी होने की बजाए नाराज़ हो रहा था। मेरी पत्नि का कहना सही था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि जब इस्राएली वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने पर थे, तो मूसा ने उनसे आग्रह किया कि वे परमेश्वर के प्रति धन्यवादी रहने वाले लोग बनें (व्यवस्थाविवरण 8:10)। परमेश्वर की आशीष के कारण उस देश में बहुतायत थी, परन्तु वे लोग इस संपन्नता को सरलता से अपना अधिकार समझने की गलती कर सकते थे (पद 17-18)। मूसा द्वारा कही गई इस बात से इस्राएलियों ने प्रत्येक भोजन के समय परमेश्वर को उसके लिए धन्यवाद कहना आरंभ किया, चाहे भोजन कितना भी थोड़ा क्यों न हो। उनके लिए वह परमेश्वर से मिला उपहार ही था।

      मैं वापस अन्दर उस विश्राम-स्थान में गया और अपने व्यवहार के लिए क्षमा माँगी। कॉफी का वह मुफ्त कप एक उपहार था, मेरा अधिकार नहीं – और मैंने उसके लिए अपना धन्यवाद व्यक्त किया। - शेरिडन वौएसे


हर छोटी से छोटी बात के लिए भी परमेश्वर के धन्यवादी रहो।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ:  व्यवस्थाविवरण 8:6-18
Deuteronomy 8:6 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चलना, और उसका भय मानते रहना।
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है।
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है।
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा।
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा।
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे;
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे,
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए,
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है,
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला,
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे।
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई।
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 84-86
  • रोमियों 12



रविवार, 11 अगस्त 2019

काश...



      हम कार-पार्किंग के स्थान से निकल रहे थे और मेरे पति ने साइकिल चला कर आ रही एक युवती को पहले निकलने देने के लिए कार को धीमा किया, और उसे संकेत किया कि वह पहले निकल जाए। उस युवती ने मुस्कुरा कर अभिनंदन में हमारी ओर हाथ हिलाया और आगे निकल गई; किन्तु अगले ही पल एक अन्य कार के चालाक ने बिना ध्यान किए अपनी कार का दरवाज़ा खोला और वह युवती उससे टकरा कर गिर गई। उसकी साइकिल टेढ़ी हो गई, उसकी टांगों से खून बहने लगा और वह रोती हुई अपनी तथा अपनी साइकिल की दशा को देखने लगी।

      बाद में हम उस दुर्घटना पर विचार कर रहे थे – ‘काश हमनें उसे पहले निकलने न दिया होता...’; ‘काश उस दूसरी गाड़ी के चालाक ने सावधानी बर्ती होती और देखने के बाद ही दरवाज़ा खोला होता...’। कठिनाइयों के समय में हम बातों और कार्यों के अनुमान लगाने के चक्कर में पड़ जाते हैं – ‘काश मैंने पहले ध्यान किया होता कि मेरा बच्चा ऐसे बच्चों की संगति में है जो नशा करते है...;काश हमें पहले पता चल जाता कि कैंसर है...’।

      जब अप्रत्याशित परेशानियां आती हैं, तो कभी-कभी हम परमेश्वर और उसकी भलाई पर भी प्रश्न-चिन्ह लगाने लगते हैं। हम भी उसी निराशा का अनुभव करते हैं जो परमेश्वर के वचन बाइबल में मरियम और मार्था ने अपने भाई लाज़रस की मृत्यु पर अनुभव की थी; ‘काश कि प्रभु यीशु पहले आ जाते, जैसे ही उन्हें पता चला कि लाज़रस बीमार है (यूहन्ना 11:21, 32)।

      मरियम और मार्था के समान हम भी सदा ही यह नहीं समझने पाते हैं कि हमारे साथ ही कठिनियाँ क्यों हो रही हैं। परन्तु हम इस बात में भरोसा रख सकते और आश्वस्त रह सकते हैं कि उन सब बातों में होकर परमेश्वर अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर रहा है, हमारे लिए भलाई कर रहा है। हर परिस्थिति और परेशानी में हम अपने विश्वासयोग्य और प्रेमी पिता परमेश्वर की बुद्धिमत्ता पर भरोसा रख सकते हैं, और ‘काश...’ की प्रवृत्ति से बच कर संतुष्ट रह सकते हैं। - सिंडी हैस कैस्पर


रौशनी के समय में परमेश्वर पर विश्वास करना छोटी बात है;
 अन्धकार में उस पर अपने विश्वास को बनाए रखना ही सच्चा विश्वास है – स्पर्जन

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:21-35
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।
John 11:28 यह कहकर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुलाकर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।
John 11:29 वह सुनते ही तुरन्त उठ कर उसके पास आई।
John 11:30 (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।)
John 11:31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये।
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले।
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83
  • रोमियों 11:19-36