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शनिवार, 30 मई 2020

शब्द



     कुछ समय पहले मैंने अपनी पत्नी कैरी को मोबाइल फोन पर बोल कर लिखा गया एक सन्देश भेजा। मैं उसे उसके कार्य स्थल से लेने के लिए जा रहा था, और मैंने जो सन्देश भेजने के लिए बोला था, वह था, “हे वृद्धा, तुम कहाँ चाहोगी कि मैं पहुँच कर तुम्हें लेने के लिए मिलूँ?” कैरी को बुरा नहीं लगता है जब मैं उसे ‘old gal’ (हे वृद्धा) कहता हूँ – यह हमारा घर में, परस्पर प्रेम व्यक्त करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपनामों में से एक है। परन्तु मेरे फोन को ‘old gal’ समझ नहीं आया, और सन्देश में लिखा गया ‘old cow’ (बूढ़ी गाय), जो एक गाली के समान अपमानजनक शब्द है।

     सौभाग्य से कैरी तुरंत समझ गई कि क्या हुआ होगा, और उसने इसे मज़ाक के समान लिया। बाद में उसने मेरे इस सन्देश को, मेरी टांग खींचने के लिए, सोशल मीडिया पर भी डाला, और लोगों से पूछा “अब बताओ मुझे क्या करना चाहिए?” हम दोनों इसे लेकर हँसी-मज़ाक करते रहे।

     उस दिन मेरे सन्देश के भद्दे शब्द के प्रति मेरी पत्नी की प्रेम भरी प्रतिक्रिया ने मुझे हमारी प्रार्थनाओं के प्रति परमेश्वर की प्रेम तथा समझ से भरी प्रतिक्रिया के बारे में विचार करने पर विवश किया। जब हम प्रार्थना करते हैं तो हो सकता है कि हम अपने आप को ठीक से व्यक्त नहीं करने पाते हैं, या कभी-कभी हमें समझ भी नहीं होती है कि हम क्या मांगें। परन्तु क्योंकि हम मसीह यीशु के हैं, और हमारे अन्दर उसका पवित्र आत्मा निवास करता है, इसलिए “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है” (रोमियों 8:26)। स्वयं परमेश्वर ही हमारे लिए प्रावधान करता है कि हमारी आवश्यकताएँ उस के समक्ष रखी जा सकें।

     हमारा स्वर्गीय पिता दूर खड़ा यह प्रतीक्षा नहीं करता रहता है कि हम सही शब्द लेकर उस के समक्ष प्रार्थना में प्रस्तुत हो सकें। हम अपनी प्रत्येक आवश्यकता के लिए निःसंकोच उस के समक्ष आ सकते हैं, आश्वस्त कि वह हमें प्रेम के साथ स्वीकार करता है, वह हमारे हर शब्द को समझता है। - जेम्स बैंक्स

परमेश्वर का प्रेम शब्दों से परे है।

हे यहोवा जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करूणा भी हम पर हो। - भजन 33:22

बाइबल पाठ: रोमियों 8:22-27
रोमियों 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
रोमियों 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
रोमियों 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
रोमियों 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
रोमियों 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
रोमियों 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57



शुक्रवार, 29 मई 2020

केंद्र बिंदु



     हम जलपोत में यात्रा करने जा रहे थे। जैसे ही उस जलपोत ने चलना आरम्भ किया, मेरी बेटी की तबियत खराब होने लगी, उसे मितली आने लगी। थोड़ी ही देर में मैं भी वैसा ही अनुभव करने लगी। ऐसे में करने के लिए मुझे नाविकों द्वारा कही जाने वाली बात याद आई, “क्षितिज पर टकटकी लगाए रहो।”

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम लिखा पाते हैं कि क्षितिज का बनाने वाला (अय्यूब 26:10) जानता है कि जीवन में हमें विचलित और भयभीत करने वाले समय आएँगे। उन समयों में भी हम अपनी अनंत नियति के दूर किन्तु स्थिर बिंदु पर ध्यान केन्द्रित करने के द्वारा अपने दृष्टिकोण को सही कर सकते हैं।

     बाइबल में इब्रानियों के नाम लिखी पत्री का लेखक यह बात जानता था। उसने अपने पाठकों में एक निराशा की अनुभूति की; उन के मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव ने उन में से अनेकों को बेघर कर दिया था। इस लिए उस ने उन्हें स्मरण कराया कि अन्य विश्वासी लोगों ने भी विकट परिस्थितियों को झेला था और बेघर भी रहे थे। उन्होंने इस सब को इस लिए सहन किया क्योंकि उन्हें कुछ और बेहतर के आशा थी।

     निर्वासित लोग होने के कारण, वे स्वर्गीय देश में स्थित उस नगर की बाट देख सकते थे जिसका रचयिता परमेश्वर है, वह स्थान जो परमेश्वर ने उन के लिए तैयार किया था (इब्रानियों 11:10, 14, 16)। इस लिए अपनी पत्री का समापन करते हुए लेखक अपने पाठकों से कहता है कि वे परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अपने ध्यान केन्द्रित रखें, “क्योंकि यहां हमारा कोई स्थिर रहने वाला नगर नहीं, वरन हम एक आने वाले नगर की खोज में हैं” (इब्रानियों 13:14)।

     हमारी वर्तमान परेशानियाँ कुछ समय की हैं। हम “पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं” (11:13), लेकिन परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के क्षितिज पर ध्यान केन्द्रित करने से हमें वह स्थिर केंद्र बिंदु मिलता है जो हमें विचलित नहीं होने देगा। - कीला ओकोआ

परमेश्वर पर ध्यान केन्द्रित कर करके स्थिर दृष्टिकोण प्राप्त करें।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
इब्रानियों 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
इब्रानियों 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
इब्रानियों 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
इब्रानियों 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
इब्रानियों 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
इब्रानियों 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।
इब्रानियों 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं।
इब्रानियों 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था।
इब्रानियों 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29



गुरुवार, 28 मई 2020

स्मरण


     दो दशक तक अपने देश की सेवा एक हेलीकॉप्टर पायलेट हो कर करने के पश्चात, जेम्स अपने समुदाय में सेवा निवृत हो कर आया, कि एक शिक्षक बन कर समुदाय की सेवा कर सके। किन्तु उसे हेलीकॉप्टर उड़ाने का बहुत चाव था, इसलिए वह अपने स्थानीय अस्पताल के लिए लोगों को हेलीकॉप्टर से लाने-लेजाने का कार्य करने लग गया, और काफी आयु तक यह करता रहा।

     अब वह दिन आ गया जब हम सब उसे अंतिम विदाई देते। कब्रिस्तान में परिवार जन, मित्रगण, और वर्दी पहने हुए सह-कर्मी खड़े थे, और जेम्स के एक सहकर्मी ने रेडियो से उसके लिए अंतिम उड़ान की पुकार की। थोड़ी ही देर में हेलीकॉप्टर उड़ने की आवाज़ आने लगी, उस हेलीकॉप्टर ने कब्रिस्तान का एक चक्कर लगाया, कुछ देर जेम्स की कब्र पर स्थिर उड़ता रहा, और फिर वापस उड़ कर अस्पताल चला गया। वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें भर आईं, उपस्थित सेना के अधिकारियों की भी।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब राजा शाऊल और उस का पुत्र योनातान युद्ध में मारे गए, और दाऊद को इस का पता चला, तो उसने उनके लिए एक विलापगीत लिखा, जो “धनुष गीत” (2 शमूएल 1:18) के नाम से परमेश्वर के वचन का अनन्तकाल के लिए भाग बन गया। दाऊद ने लिखा, “हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊंचे स्थान पर मारा गया। हाय, शूरवीर क्योंकर गिर पड़े हैं” (पद 19)। योनातान दाऊद का निकटतम मित्र और साथी योद्धा था। यद्यपि शाऊल दाऊद का शत्रु बन गया था और उस की जान लेने के प्रयास करता रहा था, फिर भी दाऊद ने दोनों को आदर दिया; उस ने लिखा, “...शाऊल के लिये रोओ...हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ...” (पद 24, 26)।

     सब से अच्छे से निभाए गए अंतिम विदाई के क्षण भी कितने कठिन होते हैं। परन्तु हम मसीही विश्वासियों के लिए, जाने वाले प्रिय जनों का स्मरण कटु नहीं मधुर होता है, क्योंकि हम जानते हैं कि यह सदा के लिए नहीं है; प्रभु में हमारी एक आशा है, और जो प्रभु में सो गए हैं वे सदा काल तक एक साथ रहने के लिए जागृत भी होंगे। वह समय आने तक, उन के स्मरण और प्रभु की आशा हमें सांत्वना देते हैं। - टिम गुस्ताफ्सन

जब हम उसकी सृष्टि के लोगों को आदर देते हैं, हम सृष्टिकर्ता को आदर देते हैं।

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों के समान शोक करो जिन्हें आशा नहीं। क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:13-14

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 1:17-27
2 शमूएल 1:17 (शाऊल और योनातन के लिये दाऊद का बनाया हुआ विलापगीत ) तब दाऊद ने शाऊल और उसके पुत्र योनातन के विषय यह विलापगीत बनाया,
2 शमूएल 1:18 और यहूदियों को यह धनुष नाम गीत सिखाने की आज्ञा दी; यह याशार नाम पुस्तक में लिखा हुआ है;
2 शमूएल 1:19 हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊंचे स्थान पर मारा गया। हाय, शूरवीर क्योंकर गिर पड़े हैं!
2 शमूएल 1:20 गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना; न हो कि पलिश्ती स्त्रियाँ आनन्दित हों, न हो कि खतनारहित लोगों की बेटियां गर्व करने लगें।
2 शमूएल 1:21 हे गिलबो पहाड़ो, तुम पर न ओस पड़े, और न वर्षा हो, और न भेंट के योग्य उपज वाले खेत पाए जाएं! क्योंकि वहां शूरवीरों की ढालें अशुद्ध हो गई। और शाऊल की ढाल बिना तेल लगाए रह गई।
2 शमूएल 1:22 जूझे हुओं के लोहू बहाने से, और शूरवीरों की चर्बी खाने से, योनातन का धनुष लौट न जाता था, और न शाऊल की तलवार छूछी फिर आती थी।
2 शमूएल 1:23 शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे।
2 शमूएल 1:24 हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था।
2 शमूएल 1:25 हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए,
2 शमूएल 1:26 हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था।
2 शमूएल 1:27 हाय, शूरवीर क्योंकर गिर गए, और युद्ध के हथियार कैसे नाश हो गए हैं!  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42


बुधवार, 27 मई 2020

व्यवाहरिक प्रेम



     मेरे पति को एक महीने के लिए काम से बाहर जाना पड़ा, और उन के जाने लगभग तुरंत बाद ही मेरे घर, मेरे काम, और मेरे बच्चों से संबंधित कार्यों ने मझे अभिभूत कर दिया। मुझे एक लेख लिख कर देना था, जिसकी समय सीमा सिर पर थी; आँगन की घास काटने वाली मशीन में कुछ खराबी आ गई; मेरे बच्चे जो उन दिनों स्कूल की छुट्टी के कारण घर पर थे, ऊब का व्याकुल हो रहे थे। मैं अकेली इन सब बातों का एक साथ ख्याल कैसे कर पाती?

     लेकिन तभी मुझे पता चल गया कि मैं अकेली नहीं हूँ। हमारे चर्च से मित्र लोग मेरी सहायता करने के लिए आगे आए। जौश ने घर आकर घास काटने वाली मशीन को ठीक कर दिया। जॉन हम सब के लिए दोपहर का भोजन बना कर ले आया। कैसीड्डी ने कपड़ों की धुलाई करने में मेरी सहायता की। एबी ने मेरे बच्चों को अपने बच्चों के साथ समय बिताने और खेलने के लिए अपने घर बुला लिया, जिस से मुझे अपना लेख लिख कर भेजने के लिए समय मिल जाए। परमेश्वर ने उन सभी मित्रों में हो कर कार्य किया और मेरी आवश्यकताओं को पूरा कर दिया। वे सभी मिलकर परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 12 में वर्णित समुदाय का सजीव चित्रण थे। उनका प्रेम निष्कपट था (पद 9), उन्होंने केवल अपनी ही नहीं वरन औरों की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा (पद 10), और मेरी आवश्यकता के समय में मेरी सहायता की, और आतिथ्य दिखाया (पद 13)।

     उस प्रेम के कारण जो मेरे मित्रों ने मुझ से दिखाया, मैं “आशा में आनन्दित” और एक महीने तक अकेले ही घर चलाने के “क्लेश में स्थिर” (पद 12) रह सकी। मसीह में मेरे भाई और बहन, जैसा एक मित्र कहता है “परमेश्वर की सदेह सहायता” बन गए। उन्होंने मुझे वह सच्चा व्यवहारिक प्रेम दिखाया जो हमें सभी को दिखाना चाहिए, विशेष कर हम मसीही विश्वासियों के समुदाय में परस्पर दिखाना चाहिए (गलातियों 6:10)। मेरा प्रयास है कि मैं भी उन के समान ही व्यवहारिक प्रेम को दिखा सकूँ।

ऐसा कौन है जिस के लिए मैं आज “परमेश्वर की सदेह सहायता” बन सकता हूँ?

इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ। - गलतियों 6:10

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-18
रोमियों 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
रोमियों 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
रोमियों 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
रोमियों 12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
रोमियों 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
रोमियों 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
रोमियों 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
रोमियों 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
रोमियों 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
रोमियों 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 10:1-23



मंगलवार, 26 मई 2020

परवाह



     बचपन में मैं जब भी अपने आप को अकेला, या तिरस्कृत, या खेदित अनुभव करता था, तो मेरी माँ मुझे उभारने और प्रसन्न करने के लिए एक छोटा सा गीत गाने लगती थीं, “मुझे कोई नहीं चाहता है; सब मुझ से घृणा करते हैं; मुझे लगता है कि मुझे अब कीड़े ही खाने होंगे।” जब यह सुन कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आती तो वह मेरे साथ बैठतीं और मुझे उन सभी संबंधों और कृतज्ञ होने के कारणों को समझातीं जो वास्तव में मेरे साथ थे।

     जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में पढ़ता हूँ कि दाऊद को भी कुछ ऐसी ही अकेलेपन और उपेक्षा की भावनाओं का सामना करना पड़ा था, तो मुझे अपनी माँ का वही गीत स्मरण हो आता है। लेकिन मेरी भावनाओं के समान, दाऊद की वे दुखदायी भावनाएँ कोई बढ़ा-चढ़ा कर कही गई बात नहीं थीं। मैं तो मेरी उस आयु में सामान्यतः सभी को होने वाली भावनाएँ अनुभव करता था, किन्तु दाऊद के पास अकेला और उपेक्षित अनुभव करने के उचित और पर्याप्त कारण थे।

     दाऊद ने वे शब्द एक गुफा में लिखे थे, जहाँ वह शाउल से अपनी जान बचाने के लिए  छुपा हुआ था, क्योंकि शाउल दाऊद की जान लेना चाहता था (1 शमूएल 22:1; 24:3-10)। दाऊद ने शाउल की सेवा में कई वर्ष बिताए थे, और उसे पर्म्केश्वर की ओर से इस्राएल का भावी राजा अभिषेक किया जा चुका था (16:13), परन्तु अब उस का जीवन एक से दूसरे स्थान अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए बीत रहा था। अपने उस अकेलेपन और जोखिम की स्थिति में दाऊद ने परमेश्वर को पुकारा, उसे अपना “शरणस्थान” और जीवन का भाग कहा (भजन 142:5)।

     दाऊद के समान हम भी, जब भी अकेला, उपेक्षित, और बेसहारा अनुभव करें, तो अपनी भावनाओं को परमेश्वर के सम्मुख व्यक्त कर सकते हैं, और उस के प्रेम में शरणस्थान पा सकते हैं। परमेश्वर हमारे अकेलेपन को कभी कम नहीं आंकता है। वह हमारे जीवन की गहरी अंधेरी गुफाओं में हमारा साथी बन कर रहना चाहता है। चाहे हमें लगे कि किसी को हमारी परवाह नहीं है, परन्तु परमेश्वर हमेशा हमारी परवाह करता है। - कर्स्टिन होल्म्बर्ग

हमारे जीवन के अकेलेपन के समयों में भी परमेश्वर सदा हमारे साथ है।

तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। - यहोशू 1:5

बाइबल पाठ: भजन 142
भजन संहिता 142:1 मैं यहोवा की दोहाई देता, मैं यहोवा से गिड़गिड़ाता हूं,
भजन संहिता 142:2 मैं अपने शोक की बातें उस से खोल कर कहता, मैं अपना संकट उस के आगे प्रगट करता हूं।
भजन संहिता 142:3 जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो रही थी, तब तू मेरी दशा को जानता था! जिस रास्ते से मैं जाने वाला था, उसी में उन्होंने मेरे लिये फन्दा लगाया।
भजन संहिता 142:4 मैं ने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता है। मेरे लिये शरण कहीं नहीं रही, न मुझ को कोई पूछता है।
भजन संहिता 142:5 हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है; मैं ने कहा, तू मेरा शरणस्थान है, मेरे जीते जी तू मेरा भाग है।
भजन संहिता 142:6 मेरी चिल्लाहट को ध्यान देकर सुन, क्योंकि मेरी बड़ी दुर्दशा हो गई है! जो मेरे पीछे पड़े हैं, उन से मुझे बचा ले; क्योंकि वे मुझ से अधिक सामर्थी हैं।
भजन संहिता 142:7 मुझ को बन्दीगृह से निकाल कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूं! धर्मी लोग मेरे चारों ओर आएंगे; क्योंकि तू मेरा उपकार करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41



सोमवार, 25 मई 2020

निर्णय



     कुछ वर्ष पहले एक महिला ने उसके साथ उसके घर में हुई एक घटना के बारे में बताया था। उस महिला ने अपने 13 वर्ष से भी कम आयु के बेटे को टेलिविज़न पर हिंसा से भरी घटनाओं के समाचार देखते हुए पाया। उस ने टेलिविज़न का रिमोट उठाया और कोई दूसरा प्रोग्राम लगा दिया, और उस से कुछ रूखेपन से कहा, “तुम्हें यह सब नहीं देखना चाहिए।” इस के बाद उन दोनों में कुछ बहस हुई, और अंततः उस महिला ने अपने बेटे से कहा कि “...जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो” (फिलिप्पियों 4:8) उन से अपने मन को से भरना चाहिए न कि ऐसी घटनाओं और बातों से। रात के भोजन के पश्चात, वह और उसके पति साथ बैठ कर समाचार देख रहे थे जब उनकी पांच वर्षीय पुत्री अन्दर आई, और टेलिविज़न को बंद कर दिया, और अपनी माँ की नक़ल करते हुए बोली, “तुम्हें यह सब देखने की आवश्यकता नहीं है; बाइबल की उन बातों के बारे में ध्यान करो!”

     व्यसक होने के कारण, हम अपने बच्चों के अपेक्षा समाचारों की बेहतर समझ रखते हैं, अपने जीवनों में उनके प्रभावों को नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन फिर भी उनकी पुत्री के द्वारा की और कही गई वह अपनी माँ की नक़ल लेने वाली बात हंसाने वाली भी थी और बुद्धिमानी से भरी भी थी। परिपक्व व्यस्क भी जीवन के नकारात्मक पक्ष से प्रभावित हो सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस द्वारा फिलिपियों 4:8 में लिखी गई बातों पर मनन करना संसार में हो रही बातों और हालात के कारण होने वाली निराशा का प्रबल समाधान हैं।

     हमारे मनों में क्या भरता है और हमें क्या प्रभावित कर ने पाता है, उस के विषय सही निर्णय करना न केवल हमारे मनों की सुरक्षा का, वरन परमेश्वर को आदर देने का भी एक अच्छा तरीका है। - रैंडी किलगोर

हम जो अपने मनों में आ लेने देते हैं, वह हमारे अंदर की दशा को निर्धारित करता है।

फिर उसने कहा; जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्‍ता, व्यभिचार। चोरी, हत्या, पर स्त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्‍दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं। - मरकुस 7:20-23

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
फिलिप्पियों 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो।
फिलिप्पियों 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
फिलिप्पियों 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
फिलिप्पियों 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
फिलिप्पियों 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
फिलिप्पियों 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 9:1-23



रविवार, 24 मई 2020

शांत



     क्या कुछ ऐसा है जो आपको रात को ठीक से सोने नहीं देता है? हाल ही में मैं ठीक से सो नहीं पा रही हूँ, बिस्तर पर इधर से उधर करवट बदलती रहती हूँ, और फिर मुझे चिंता होने लगती है कि मैं आने वाले दिन की समस्याओं का सामना करने के लिए पर्याप्त आराम नहीं करने पाऊँगी। क्या आप का भी यही अनुभव रहता है? किसी संबंध को लेकर चिंता, भविष्य की अनिश्चितता, या अन्य जो भी बात हो – हम सभी कभी न कभी चिंता करते ही हैं।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद वास्तव में परेशानियों में था, जब उस ने भजन 4 लिखा था। लोग मिथ्या, आधारहीन आरोप लगा कर उसकी साख़ को ख़राब कर रहे थे (पद 2)। कुछ तो उस के राज करने की योग्यता पर प्रश्न चिह्न लगा रहे थे (पद 6)। संभवतः ऐसे अनुचित व्यवहार के कारण दाऊद क्रोधित भी हो रहा होगा। लेकिन फिर भी हम ये अद्भुत शब्द पढ़ते हैं: “मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है” (पद 8)।

     सुविख्यात मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने पद 8 की बहुत सुन्दर व्याख्या की है; वे कहते हैं, “इस प्रकार से लेट जाने के द्वारा...[दाऊद] ने अपने आप को एक अन्य के हाथों में छोड़ दिया; उस ने ऐसा संपूर्णतः किया, क्योंकि वह फिर निश्चिन्त हो कर सो गया; उसे पूरा भरोसा था।” उसे यह भरोसा क्यों था? आरम्भ से ही दाऊद को विश्वास था कि परमेश्वर उस की प्रार्थनाएं सुनेगा और उन का उत्तर देगा (पद 3)। और वह निश्चित था कि क्योंकि परमेश्वर ने उस से प्रेम करना चुना है, इस लिए वह अपने प्रेम में होकर उस की प्रत्येक आवश्यकता को पूरा भी करेगा।

     जब भी हमें चिंताएँ सताएँ, परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसकी सामर्थ्य और उपस्थिति में शांत हो सकें। हम उस की सर्वशक्तिशाली और प्रेम भरी बाहों में शांत हो कर लेट जाएं और सो जाएं। - पोह फैंग चिया

हम पूर्णतः विश्वासयोग्य परमेश्वर में अपना पूरा भरोसा रख सकते हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!  - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 4
भजन संहिता 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
भजन संहिता 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?
भजन संहिता 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
भजन संहिता 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।
भजन संहिता 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
भजन संहिता 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
भजन संहिता 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।
भजन संहिता 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 22-24
  • यूहन्ना 8:28-59