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गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

केंद्र

 

          कड़ाके की सर्दी के एक दिन क्रिस्टा झील के किनारे खड़ी हुई बर्फ से ढके हुए लाईटहाउस के सुन्दर दृश्य को निहार रही थी, और उसके मन में उस दृश्य को अपने फोन के कैमरे में उतर लेने का विचार आया। तस्वीरें लेने के लिए फोन को बाहर निकालते समय, उसकी ऐनक पर धुंध जम गई, और उसे कुछ भी साफ़ दिखना बन्द हो गया। क्रिस्टा ने उस लाईटहाउस की ओर कैमरा कर के तीन भिन्न कोणों से उसकी तस्वीरें खींच लीं। बाद में उन तस्वीरों को देखते समय उसे पता चला कि उसके फोन का कैमरा तो सेल्फी लेने के लिए सेट किया हुआ था, इसलिए तीनों तस्वीरों में उसे केवल अपना ही चेहरा दिखाए दे रहा था। उसने हँसते हुए कहा, “मेरे ध्यान का केंद्र तो मैं स्वयं ही थी, इसलिए मुझे सिर्फ मैं ही दिखाई दी।” क्रिस्टा की उस गलती से मैं उस जैसी ही गलती, जो हम करते रहते हैं, के बारे में सोचने लगी – हम कभी-कभी अपने ही पर इतना केन्द्रित हो जाते हैं कि परमेश्वर की योजना के बड़े दृश्य को अनदेखा करने लग जाते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला जानता था कि उसकी सेवकाई का केंद्र वह स्वयं नहीं था। वह अपनी सेवकाई के आरंभ से ही जानता था कि उसकी बुलाहट और कार्य औरों को परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु की ओर संकेत करना था। जब उसने प्रभु यीशु को अपने तथा अपने शिष्यों के ओर आते देखा, तो उसने अपने शिष्यों से कहा “देखो परमेश्वर का मेमना” (यूहन्ना 1:29)। उसने उन से यह भी कहा, कि वह इसलिए बपतिस्मा देता हुआ आया था जिससे कि प्रभु प्रकट हो जाए। बाद में जब यूहन्ना के शिष्यों ने उससे कहा कि यीशु के अनुयायी बहुत बढ़ने लगे हैं, तो यूहन्ना ने उन्हें याद दिलाया कि उसने उनसे पहले ही कह दिया था कि वह मसीहा नहीं है, परन्तु उसका मार्ग तैयार करने के लिए भेजा गया था, और यह अवश्य होना था कि प्रभु बढ़े और वह घटे।

          हमारे जीवनों का केंद्र भी प्रभु यीशु और उससे अपने पूरे मन से प्रेम करना, उसके गवाह बनकर उसके लिए जीवन जीना हो। - ऐनी सेटास

 

हे प्रभु मेरा ध्यान मुझ पर से हटा कर अपने पर केन्द्रित कर।


पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:22-35

यूहन्ना 3:22 इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।

यूहन्ना 3:23 और यूहन्ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।

यूहन्ना 3:24 क्योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था।

यूहन्ना 3:25 वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ।

यूहन्ना 3:26 और उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।

यूहन्ना 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।

यूहन्ना 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं।

यूहन्ना 3:29 जिस की दुलहन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।

यूहन्ना 3:30 अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।

यूहन्ना 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है; और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।

यूहन्ना 3:32 जो कुछ उसने देखा, और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उस की गवाही ग्रहण नहीं करता।

यूहन्ना 3:33 जिसने उस की गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप दे दी कि परमेश्वर सच्चा है।

यूहन्ना 3:34 क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है: क्योंकि वह आत्मा नाप नापकर नहीं देता।

यूहन्ना 3:35 पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएं उसके हाथ में दे दी हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 34-35 
  • मत्ती 22:23-46

शुक्रवार, 29 मई 2020

केंद्र बिंदु



     हम जलपोत में यात्रा करने जा रहे थे। जैसे ही उस जलपोत ने चलना आरम्भ किया, मेरी बेटी की तबियत खराब होने लगी, उसे मितली आने लगी। थोड़ी ही देर में मैं भी वैसा ही अनुभव करने लगी। ऐसे में करने के लिए मुझे नाविकों द्वारा कही जाने वाली बात याद आई, “क्षितिज पर टकटकी लगाए रहो।”

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम लिखा पाते हैं कि क्षितिज का बनाने वाला (अय्यूब 26:10) जानता है कि जीवन में हमें विचलित और भयभीत करने वाले समय आएँगे। उन समयों में भी हम अपनी अनंत नियति के दूर किन्तु स्थिर बिंदु पर ध्यान केन्द्रित करने के द्वारा अपने दृष्टिकोण को सही कर सकते हैं।

     बाइबल में इब्रानियों के नाम लिखी पत्री का लेखक यह बात जानता था। उसने अपने पाठकों में एक निराशा की अनुभूति की; उन के मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव ने उन में से अनेकों को बेघर कर दिया था। इस लिए उस ने उन्हें स्मरण कराया कि अन्य विश्वासी लोगों ने भी विकट परिस्थितियों को झेला था और बेघर भी रहे थे। उन्होंने इस सब को इस लिए सहन किया क्योंकि उन्हें कुछ और बेहतर के आशा थी।

     निर्वासित लोग होने के कारण, वे स्वर्गीय देश में स्थित उस नगर की बाट देख सकते थे जिसका रचयिता परमेश्वर है, वह स्थान जो परमेश्वर ने उन के लिए तैयार किया था (इब्रानियों 11:10, 14, 16)। इस लिए अपनी पत्री का समापन करते हुए लेखक अपने पाठकों से कहता है कि वे परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अपने ध्यान केन्द्रित रखें, “क्योंकि यहां हमारा कोई स्थिर रहने वाला नगर नहीं, वरन हम एक आने वाले नगर की खोज में हैं” (इब्रानियों 13:14)।

     हमारी वर्तमान परेशानियाँ कुछ समय की हैं। हम “पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं” (11:13), लेकिन परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के क्षितिज पर ध्यान केन्द्रित करने से हमें वह स्थिर केंद्र बिंदु मिलता है जो हमें विचलित नहीं होने देगा। - कीला ओकोआ

परमेश्वर पर ध्यान केन्द्रित कर करके स्थिर दृष्टिकोण प्राप्त करें।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
इब्रानियों 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
इब्रानियों 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
इब्रानियों 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
इब्रानियों 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
इब्रानियों 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
इब्रानियों 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।
इब्रानियों 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं।
इब्रानियों 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था।
इब्रानियों 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29



रविवार, 1 जून 2014

केंद्रित


   व्यावासायिक गोल्फ में मास्टर्स टूर्नमेंट सबसे अधिक प्रतिष्ठित होता है। सन 2009 में इस प्रतियोगिता के अन्तिम राउंड में कैनी पैरी सबसे आगे चल रहे थे किंतु अन्ततः वे दूसरे स्थान पर रहे। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार के लिए लिखने वाले बिल पैनिंगटन ने अपने विशलेषण में पैरी के बारे में लिखा कि अपनी हार के बाद "वे निराश तो थे किंतु मायूस नहीं थे"। अपनी हार के बारे में पैरी का कहना था, "मैं कभी कभी इसे याद करूँगा और सोचूँगा कि मैं और क्या कर सकता था, परन्तु इस पर सदा ही ध्यान लगाए नहीं रहूँगा। यदि मेरे जीवन की यह सबसे खराब बात भी हो, तो भी मैंने खासा अच्छा किया है; मैं इसे अपने पीछे पड़ने नहीं दूँगा। जीवन में और बहुत सी बातें हैं जो इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं....अब बस मैं घर जाऊँगा और अपने परिवार के साथ एक अच्छी शाम बिताऊँगा, उनके साथ मज़ा करूँगा"।

   अपनी निराशाओं से आगे देख पाना मसीही विश्वासियों के लिए अति आवश्यक है। हम जिन बातों पर अपने ध्यान और विचार केंद्रित रखते हैं वह निर्धारित करता है कि हम जीवन के उतार-चढ़ाव, जय-पराजय का सामना कैसे करते हैं। प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में ध्यान केंद्रित रखने के विषय में लिखा, "सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ" (कुलुस्सियों 3:1-2)। पौलुस के इस कथन के अनुसार सोच रखने से, हम हर बात की सार्थकता और पुष्टि के लिए मसीह यीशु की ओर देखते है ना कि अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों या निराशाओं तथा क्षमताओं की ओर; ऐसा करने से हम मसीह के खोजी बने रहते हैं ना कि सांसारिक सफलता के।

   जब हम उत्तमता के लिए यत्न करते हैं, उसके लिए भरसक प्रयत्न करते हैं परन्तु फिर भी वैसे सफल नहीं हो पाते जैसा चाहते थे तो यह अवश्य ही दुखदायी होता है, लेकिन यह हमारे लिए हानिकारक भी हो जाए इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने मन और मस्तिष्क को कहाँ केंद्रित रखते हैं। जो मन स्वर्ग और स्वर्ग की वस्तुओं पर केंद्रित है वह सांसारिक बातों की हार से कभी हानि नहीं उठा सकता। - डेविड मैक्कैसलैंड


यदि मसीह यीशु आपके जीवन और विचारों का केंद्रबिंदु है तो बाकी सब बातें स्वतः ही सही परिपेक्ष में आ जाती हैं।

मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला। - भजन 119:36-37

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-12
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। 
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। 
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। 
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे। 
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। 
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है। 
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे। 
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। 
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। 
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। 
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 22-24


सोमवार, 27 अगस्त 2012

निकट एवं दूर


   हमारे आंगन में सब शांत था। मैं आंगन में रखी मेज़ पर बैठी काम कर रही थी, मेरा पालतू कुत्ता मेरे निकट घास में लेट हुआ था। अचानक सूखे पत्तों में हुई सरसराहट की आवाज़ ने सब कुछ बदल डाला। कुत्ता लपक कर आवाज़ की ओर दौड़ा और शीघ्र ही एक पेड़ के चारों ओर चक्कर लगाने लगा जहां एक छोटा जीव अपनी जान बचाने के लिए थोड़ी ऊंचाई पर पेड़ से चिपका हुआ था। मैंने कुत्ते को पुकारा और वह मेरे पास आ तो गया, लेकिन उसकी आंखें उस पेड़ ही की ओर लगी हुई थीं। मेरे भरसक प्रयत्न के बावजूद वह मेरी ओर नहीं देख रहा था, उस पेड़ पर चिपके उस छोटे से जीव ने मेरे कुत्ते का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच रखा था, और अब उसका सारा ध्यान मेरी ओर नहीं वरन उस जीव को पकड़ लेने पर ही था। शारीरिक रूप से वह मेरे निकट था परन्तु वास्तव में वह मुझ से दूर था क्योंकि उसका मन और चाह उस पेड़ पर चिपके जीव के साथ थीं, मेरे साथ नहीं।

   इस घटना ने मेरे विचार मेरे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के साथ मेरे संबंधों की ओर मोड़े; कितनी सरलता से मैं अन्य बातों में उलझकर अपना ध्यान अपने प्रभु से हटा लेती हूँ। चाहे वे प्रलोभन हों या ज़िम्मेदारियां, या फिर किसी चीज़ को पाने की लालसा हो या किसी आनन्द का मोह - ये सब उससे, जो मुझ से प्रेम करता है और सदा मेरा भला तथा मेरे लिए सर्वोत्तम ही चाहता है, मेरा ध्यान हटा सकने में सक्षम हैं। अपनी प्राथमिकताओं को सही और अपने ध्यान को अपने प्रभ यीशु की ओर लगाए रखने के लिए मुझे सदैव प्रयत्नशील रहना पड़ता है।

   एक ऐसे ही बंटे हुए ध्यान के रोग से प्रभु यीशु के समय के धार्मिक अगुवे भी ग्रसित थे (मत्ती १५:८-९)। वे परमेश्वर के मन्दिर में बने रहते थे, वहां सेवकाई करते थे और लोगों को परमेश्वर और उसके वचन की शिक्षाएं देते थे, उन्हें परमेश्वर के प्रति उनकी ज़िम्मेदारियां सिखाते थे, किंतु स्वयं उनके मन परमेश्वर से कोसों दूर थे।

   यही दशा आज हम मसीही विश्वासियों की भी हो सकती है। हम भी चर्च जाने, लोगों को सिखाने, परमेश्वर के नाम से कई कार्यों में अपने आप को लगाए रखने वाले तो हो सकते हैं, और यह मानते हुए चल सकते हैं कि हम परमेश्वर के निकट हैं; किंतु हमारे मनों की अशांति और जीवन में रहने वाली बेचैनी दिखाती है कि वास्तव में हम उससे दूर हैं। यदि हमारा ध्यान हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर लगातार बना हुआ नहीं है तो यह सब हमारे लिए व्यर्थ कार्य हैं जिनसे ना हमें और ना दूसरों को कोई शांति या लाभ मिलेगा। जब हम अपने ध्यान व्यर्थ बातों और लालसाओं से हटा कर अपने प्रभु की ओर देखना आरंभ करेंगे और उस ही पर केंद्रित करेंगे, तब ही प्रभु यीशु हमारे मनों को एक नए उत्साह से भर कर परमेश्वर से हूई हमारी दूरी को वास्तविक निकटता में बदल सकेगा।

   यदि आज आप परमेश्वर के निकट होने के अपने प्रयासों के बावजूद भी परमेश्वर से दूर हैं, तो प्रभु यीशु की ओर देखना आरंभ कीजिए। इस दूरी को पाटने का वो ही एकमात्र रास्ता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब प्रभु यीशु हमारे जीवनों का केंद्र बिंदु होता है, अन्य सब कुछ स्वतः ही सही परिपेक्ष में आ जाता है।

मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला। - भजन ११९:३७

बाइबल पाठ: मत्ती १५:७-२०
Mat 15:7  हे कपटियों, यशायाह ने तुम्हारे विषय में यह भविष्यद्वाणी ठीक की। 
Mat 15:8  कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है। 
Mat 15:9  और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्य की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं। 
Mat 15:10   और उस ने लोगों को अपने पास बुलाकर उन से कहा, सुनो और समझो। 
Mat 15:11   जो मुंह में जाता है, वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुंह से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। 
Mat 15:12  तब चेलों ने आकर उस से कहा, क्‍या तू जानता है कि फरीसियों ने यह वचन सुनकर ठोकर खाई? 
Mat 15:13  उस ने उत्तर दिया, हर पौधा जो मेरे स्‍वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। 
Mat 15:14  उन को जाने दो; वे अन्‍धे मार्ग दिखाने वाले हैं: और अन्‍धा यदि अन्‍धे को मार्ग दिखाए, तो दोनों गड़हे में गिर पड़ेंगे। 
Mat 15:15  यह सुनकर, पतरस ने उस से कहा, यह दृष्‍टान्‍त हमें समझा दे। 
Mat 15:16  उस ने कहा, क्‍या तुम भी अब तक ना समझ हो? 
Mat 15:17  क्‍या नहीं समझते, कि जो कुछ मुंह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्‍डास में निकल जाता है; 
Mat 15:18   पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। 
Mat 15:19  क्‍योंकि कुचिन्‍ता, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्‍दा मन ही से निकलती है। 
Mat 15:20  यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्‍तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १२०-१२२ 
  • १ कुरिन्थियों ९