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शनिवार, 1 जुलाई 2023

Miscellaneous Questions / कुछ प्रश्न – 42d – Biblical Instructions / बाइबल से निर्देश


क्या बाइबल के अनुसार, क्या मसीही कलीसियाओं में स्त्रियों को पुलपिट से प्रचार करने और पास्टर की भूमिका निभाने की अनुमति है? 

भाग 4 – कलीसिया में स्त्रियों के लिए बाइबल से निर्देश

 

    बाइबल में स्त्रियों को कलीसिया में या पुलपिट से प्रचार करने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग बाइबल के कुछ उदाहरणों का गलत उपयोग कर के स्त्रियों द्वारा प्रचार करने, तथा पुलपिट का प्रयोग करने को सही ठहराने का प्रयास करते हैं। किन्तु यह उनके द्वारा वचन से ऐसे अर्थ निकालना है, जो बाइबल की व्याख्या के सिद्धान्तों के अनुसार अनुचित एवं अस्वीकार्य हैं। उनके ये प्रयास वचन को एक गलत धारणा में बैठाने, उसके अनुरूप करने के लिए वचन के खंडों को तोड़ना-मरोड़ना और उनका दुरुपयोग करना है। उनके इन प्रयासों एवं उदाहरणों का बाइबल के आधार पर विश्लेषण हम आने वाले लेखों में देखेंगे। आज के लेख में हम देखते हैं कि इस विषय पर बाइबल में क्या लिखा गया है। स्त्रियों को जिस बात के लिए प्रभु ने मना किया है वह है पुरुषों को सिखाना या कलीसिया अर्थात चर्च में बोलना या उपदेश करना। इस निर्देश को दो स्थानों पर लिखा गया है:


    इस विषय पर परमेश्वर के वचन बाइबल का पहला निर्देश है: 1 कुरिन्थियों 14:34-35 “स्त्रियां कलीसिया की सभा में चुप रहें, क्योंकि उन्हें बातें करने की आज्ञा नहीं, परन्तु आधीन रहने की आज्ञा है: जैसा व्यवस्था में लिखा भी है। और यदि वे कुछ सीखना चाहें, तो घर में अपने अपने पति से पूछें, क्योंकि स्त्री का कलीसिया में बातें करना लज्ज़ा की बात है।” परमेश्वर पवित्र आत्मा द्वारा पौलुस से लिखवाए गए इन शब्दों पर ध्यान कीजिए:

·        यह मात्र सुझाव अथवा इच्छा नहीं है; यह आज्ञा है।

·        यह कलीसिया की सभा में सम्मिलित होने वाली सभी स्त्रियों के लिए है।

·        इस आज्ञा का आधार परमेश्वर का वचन है, न कि पौलुस की कोई व्यक्तिगत धारणा।


    उपरोक्त पदों के साथ, पौलुस द्वारा उन्हें साथ ही में कही गई एक और बात को भी देखना यहाँ पर सहायक होगा – 1 कुरिन्थियों 14:36-38 “क्या परमेश्वर का वचन तुम में से निकला? या केवल तुम ही तक पहुंचा है? यदि कोई मनुष्य अपने आप को भविष्यद्वक्ता या आत्मिक जन समझे, तो यह जान ले, कि जो बातें मैं तुम्हें लिखता हूं, वे प्रभु की आज्ञाएं हैं। परन्तु यदि कोई न जाने, तो न जाने।”


    पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को यह पत्री उनकी बहुत सी गलतियों को ठीक करने के लिए लिखी थी; और उन गलतियों में से एक महिलाओं द्वारा कलीसिया में अधिकार जताने और बोलने से भी संबंधित थी, जिसे उसने उपरोक्त पदों में संबोधित किया है। अब पत्री के अन्त की ओर पहुँचते हुए, वह पवित्र आत्मा की अगुवाई में, अभी तक कि लिखी सुधार की सभी बातों, महिलाओं के कलीसिया में बोलने के सहित, के सन्दर्भ में पौलुस उपरोक्त पद 36-38 में उस मण्डली के लोगों को कहता है कि कुरिन्थुस की मण्डली के लोगों का परमेश्वर के वचन और उसके निर्देशों पर कोई एकाधिकार अथवा विशेषाधिकार नहीं है। उन्हें भी परमेश्वर के वचन और निर्देशों को वैसे ही स्वीकार तथा पालन करना है जैसे कि अन्य कलीसियाओं को। जैसा अन्य कलीसियाओं में है, उन्हें भी वैसे ही रहना है।


    साथ ही उन्हें, और विशेषकर उन्हें जो उन में अपने आप को आत्मिक जन समझते हैं, यह भी समझना और स्वीकार करना है कि पौलुस ने जो उन्हें लिखा है वह उसकी अपनी इच्छा नहीं, परमेश्वर की आज्ञाएँ हैं। किन्तु यदि कोई इस बात को स्वीकार नहीं करता है तो इससे उनके लिए परमेश्वर का वचन बदला नहीं जाएगा। उसे फिर अनाज्ञाकारिता का स्वयं अपना हिसाब देना होगा।


    इस विषय पर परमेश्वर के वचन बाइबल का दूसरा निर्देश है: 1 तीमुथियुस 2:11-12 “और स्त्री को चुपचाप पूरी अधीनता में सीखना चाहिए। और मैं कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश करे, और न पुरुष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।” साथ ही इससे आगे के दो पदों पर भी ध्यान कीजिए: 1 तीमुथियुस 2:13-14 “क्योंकि आदम पहिले, उसके बाद हव्वा बनाई गई। और आदम बहकाया न गया, पर स्त्री बहकाने में आकर अपराधिनी हुई।”

यहाँ पर आकर, इस विषय पर स्पष्टीकरण देते हुए, वह इस निर्देश के दिए जाने के आधार को बताता है – उनकी रचना किए जाने के समय से ही प्राथमिकता पुरुष की है, स्त्री को पुरुष का सहायक होने के लिए बनाया गया (उत्पत्ति 2:18), उसकी निर्देशक या स्वामिनी होने के लिए नहीं, और पाप में पड़ने के बाद स्त्री को पुरुष के आधीन किया गया (उत्पत्ति 3:16)। साथ ही पौलुस पवित्र आत्मा की अगुवाई द्वारा यह भी दिखाता है कि स्त्री कमज़ोर पात्र है, जैसा कि पतरस ने लिखा है (1 पतरस 3:7), और इसीलिए शैतान ने, परमेश्वर के वचन का दुरुपयोग कर के अपनी चाल को कामयाब करने के लिए स्त्री को चुना, न कि आदम को, क्योंकि स्त्री के बहकाए जाने की संभावना अधिक थी, और यही हुआ भी। क्योंकि उसकी सृष्टि से ही परमेश्वर ने स्त्री को एक भिन्न भूमिका के लिए बनाया है, जिसमें पुरुषों को वचन सिखाना सम्मिलित नहीं है, इसलिए स्त्री को परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीमाओं का आदर करना चाहिए न कि उनका उल्लंघन।

    

वचन के ये दोनों निर्देश बताते हैं कि परमेश्वर की आज्ञा है कि कलीसिया की सभाओं में स्त्रियाँ चुप रहें, उपदेश न करें, और न पुरुषों पर आज्ञा चलाएँ, वरन आधीन होकर सीखें – जो उत्पत्ति 3:16 के अनुसार है, और यदि कुछ पूछना या समझना हो तो वह घर जाकर करें। यहाँ पर यह भी ध्यान करना चाहिए कि “आधीन” होने से अर्थ दासी समान होने या गुलामी करना नहीं है, वरन आदर और प्राथमिकता देना है। इन पदों से स्पष्ट है कि बाइबल के अनुसार स्त्रियों को पुलपिट से प्रचार करने या पास्टर होने की जिम्मेदारियों को निभाना परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता है, अनुचित है।


    अगले लेख में हम स्त्रियों के प्रचार करने और कलीसियाओं में पास्टर होने की बात का समर्थन करने वालों के कुछ तर्कों, और उनके द्वारा उठाई गई कुछ आपत्तियों को देखेंगे; और फिर बाद में उनके द्वारा बाइबल से दिए जाने वाले उदाहरणों के बारे में देखेंगे।


    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 


- क्रमशः 

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According to the Bible, Do Women Have the Permission to Serve as Pastors and Preach from the Pulpit in the Church?

Part 4 – Biblical Instructions for Women in the Church

 

    The Bible does not permit to women to use the Pulpit, i.e., preach in the Church. Some people by misusing some Biblical examples try to justify women’s preaching in the Church and say that there is nothing wrong with it. But this is misinterpreting God’s Word, by not following principles of Bible interpretation, to give it inappropriate and unacceptable meanings. Their efforts are to twist and trim God’s Word, misuse it to make it conform to a particular line of thought. We will look at the examples and explanations given by them in the coming articles and analyze them from God’s Word the Bible. In today’s article we will see what the Bible says on this topic. What the Lord has not permitted the women is to teach men, and to speak or preach in the Church. This instruction has been given at two places:


    The first instruction about this in God’s Word is: 1 Corinthians 14:34- 35 “Let your women keep silent in the churches, for they are not permitted to speak; but they are to be submissive, as the law also says. And if they want to learn something, let them ask their own husbands at home; for it is shameful for women to speak in church.” Pay attention to the words written by Paul through God the Holy Spirit:

·        This not a mere suggestion or desire; it is a command.

·        It is for all women gathered and participating in the Church service.

·        The basis of this command is God’s Word, not Paul’s own or personal concept.


    Here, along with the above verses, it will be helpful to consider another thing said in the very next verses - 1 Corinthian 14:36-38 “Or did the word of God come originally from you? Or was it you only that it reached? If anyone thinks himself to be a prophet or spiritual, let him acknowledge that the things which I write to you are the commandments of the Lord. But if anyone is ignorant, let him be ignorant.


    Paul had written this letter to the Church in Corinth to correct many errors that had come into the Church; and one of their mistakes was related to women exercising authority and speaking during the Church service, which has been addressed in these aforementioned verses. Now, coming towards the end of this letter, under the guidance of the Holy Spirit, in context of all the corrections that he had written to them, including about women speaking in the Church, Paul says in the above-mentioned verses 36-38 that the members of the Church in Corinth do not have any special rights or privileges related to God’s Word. They too have to accept and obey God’s Word, just the same as the other Churches do. As is the practice in other Churches, they too have to follow the same.


    Moreover, those amongst them, who consider themselves to be spiritual, they should understand and accept that what Paul had written to them are not his own desires, but God’s commands. But if anyone is not willing to accept this, then the Word of God will not be altered for that person. Then he will have to answer for himself before God.


    The second instruction in God’s Word on this topic is in 1 Timothy 2:11-12 “Let a woman learn in silence with all submission. And I do not permit a woman to teach or to have authority over a man, but to be in silence.” Also, pay attention to the next two verses written here, 1 Timothy 2:13-14 “For Adam was formed first, then Eve. And Adam was not deceived, but the woman being deceived, fell into transgression.


    Here, to clarify, he provides the basis for this instruction – since their creation the primacy is of man, the woman was made as a helper for man (Genesis 2:18), and not someone to direct, or to dominate him; and after the committing of sin, the woman was put under man (Genesis 3:16). Through the Holy Spirit, Paul also says that woman was created as a weaker vessel, as Peter has written (1 Peter 3:7), and that is why, Satan misused God’s instructions to make Eve fall, not Adam, since his chances of success were better working on Eve than on Adam, and that is what happened as well. From her very creation, woman has been created for a different role than man, and her role does not include teaching God’s Word to men. Hence, women should respect her God assigned limits, and not transgress them.


    Both of these instructions on this topic show that it is God’s command that in a Church service, women should remain silent, should not preach, and should not exercise authority over men. Rather, learn under submission – which is in accordance with Genesis 3:16. If the women need to ask or understand anything, they should do that at home. It is also important to note here that being under submission does not mean becoming a slave or a servant, but giving respect and due honor, the primacy, to men. It is clear from these verses that the Bible does not permit women to use the pulpit, i.e., preach in the Church, nor to be a Pastor in the Church; doing either of these is disobeying God and is inappropriate.

In the next article we will look at some of the arguments given, objections raised by those who are in favor of women preaching and being Pastors; and then we will look at the examples they cite from the Bible to justify their stand.


    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

 


- To Be Continued 

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शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

शान्ति

 

          सर्दियों में मैं अकसर जब सुबह उठती हूँ तो मेरे आस-पास का संसार, रात में पड़ी हुई बर्फ से ढका हुआ, शांत और शान्ति के साथ होता है। वह बर्फ बहुत शान्ति से रात में किसी समय गिर चुकी होती है; जबकि बसंत की आँधियाँ शोर और गर्जन के साथ पानी बरसाती हैं।

          ऑड्रे अस्सद ने “Winter Snow Song” में गाया कि प्रभु यीशु पृथ्वी पर बवंडर के समान सामर्थ्य प्रदर्शित करते हुए भी आ सकते थे, परन्तु उन्होंने शान्ति के साथ, मेरी खिड़की के बाहर की उस बर्फ के समान आना चुना।

          प्रभु यीशु के आगमन से बहुत से लोग आश्चर्यचकित तथा शांत रह गए। किसी राजमहल में जन्म लेने की बजाए, वे एक बहुत ही अनपेक्षित स्थान, बैतलहम के बाहर एक विनीत स्थान में पैदा हुए। और वे उस एकमात्र उपलब्ध बिस्तर, चरनी में सोए (लूका 2:7)। उनके स्वागत, सेवा और देखभाल के लिए राजसी लोग या उच्च अधिकारी उपस्थित नहीं थे, प्रभु यीशु का स्वागत तो साधारण चरवाहों ने किया (पद 15-16)। उनके पास धन-संपत्ति नहीं थी; जब व्यवस्था के अनुसार मंदिर में बलिदान चढ़ाने का समय आया तब उनके माता-पिता केवल दो पक्षियों के सस्ते बलिदान को ही चढ़ा सके (पद 24)।

          प्रभु यीशु के संसार में इस विनम्र प्रवेश के बारे में यशायाह भविष्यद्वक्ता पहले ही लिख चुका था। यशायाह ने भविष्यवाणी की थी कि आने वाला उद्धारकर्ता चिल्लाएगा नहीं (यशायाह 42:2), और न ही वह सामर्थ्य के प्रदर्शन के साथ आएगा जिससे कोई कुचला हुआ सरकंडा टूट जाए या टिमटिमाती बत्ती बुझ जाए (पद 3)। वरन वह शान्ति के साथ आया कि हमें परमेश्वर के साथ शान्ति में ले आने के प्रस्ताव के साथ अपनी ओर आकर्षित करे।

          उसका यह शान्ति का प्रस्ताव सारे संसार के सभी लोगों को आज भी उपलब्ध है; उस प्रत्येक व्यक्ति के लिए है जो चरनी में जन्मे जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास लाता है और उससे अपने पापों की क्षमा मांगकर उसे अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है, उसकी शान्ति को ग्रहण कर लेता है। - लीसा सामरा

 

यह अद्भुत उपहार कितनी शान्ति से संसार को दिया गया।


वह कुचले हुए सरकण्डे को न तोड़ेगा; और धुआं देती हुई बत्ती को न बुझाएगा, जब तक न्याय को प्रबल न कराए। - मत्ती 12:20

बाइबल पाठ: यशायाह 42:1-4

यशायाह 42:1 मेरे दास को देखो जिसे मैं संभाले हूं, मेरे चुने हुए को, जिस से मेरा जी प्रसन्न है; मैं ने उस पर अपना आत्मा रखा है, वह अन्यजातियों के लिये न्याय प्रगट करेगा।

यशायाह 42:2 न वह चिल्लाएगा और न ऊंचे शब्द से बोलेगा, न सड़क में अपनी वाणी सुनायेगा।

यशायाह 42:3 कुचले हुए नरकट को वह न तोड़ेगा और न टिमटिमाती बत्ती को बुझाएगा; वह सच्चाई से न्याय चुकाएगा।

यशायाह 42:4 वह न थकेगा और न हियाव छोड़ेगा जब तक वह न्याय को पृथ्वी पर स्थिर न करे; और द्वीपों के लोग उसकी व्यवस्था की बाट जोहेंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • सपन्याह 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 16

सोमवार, 1 जून 2020

ठहरो



     मैं अपनी सहेली के साथ समुद्र तट पर सागर के किनारे रेत पर बैठी थी। सूर्यास्त का समय था और समुद्र की लहरें हमारे पांवों के पास तक आ आ कर वापस लौट जा रही थीं, पास तो पहुँचती थीं, किन्तु हमारे पांवों को छू नहीं पाती थीं। मेरी सहेली ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे सागर पसंद है, वह गतिमान रहता है इसलिए मैं शांत होकर बैठ सकती हूँ।”

     कैसा अद्भुत विचार था! हम में से कितने हैं जो ठहर कर शांत हो जाने के लिए संघर्ष करते रहते हैं। हम करते, करते, करते रहते हैं, चलते, चलते, चलते रहते हैं, इस भय में कि यदि हम ने प्रयास करने छोड़ दिए तो हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा। या ठहर जाने के द्वारा हम अपने आप को उन वास्तविकताओं के समक्ष खड़ा पाएँगे, जिन्हें दूर रखने के लिए हम परिश्रम करते रहते हैं।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 46:8-9 में परमेश्वर अपनी सामर्थ्य प्रदर्शित करता है और कहता है, “आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! ” परमेश्वर व्यस्त परमेश्वर है, जो इसलिए कार्यरत रहता है जिस से हमारे अस्त-व्यस्त दिनों की गड़बड़ी में शान्ति ला सके। और फिर वह 10 पद में कहता है, “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!

     निःसंदेह, इधर-उधर भागते हुए भी परमेश्वर को जाना जा सकता है। परन्तु भजनकार द्वारा इस प्रकार का थका देने वाला परिश्रम करना छोड़ कर परमेश्वर को जानने के लिए उस के साथ समय बिताने के आह्वान में एक अलग ही अभिप्राय है। यह समझना कि हम ठहर सकते हैं, हम शांत हो सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर सदा गतिमान रहता है; हमारे लिए, हमारे पक्ष में हो कर कार्य करता रहता है। तभी हम जान पाते हैं कि यह परमेश्वर की सामर्थ्य है जो हमें वास्तव में महत्त्व, सुरक्षा, और शान्ति देती है।

     आज, कुछ समय के लिए, उस की उपस्थिति में ठहर जाएँ। - एलीसा मॉर्गन

जब हम परमेश्वर की प्रेम भरी बाहों में, 
तथा उसकी सिद्ध इच्छा को पूरा करते हुए होते हैं, 
तो हम पूर्ण आराम में होते हैं।

हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। - 1 इतिहास 29:11

बाइबल पाठ: भजन संहिता 46
भजन संहिता 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
भजन संहिता 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
भजन संहिता 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
भजन संहिता 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
भजन संहिता 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
भजन संहिता 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
भजन संहिता 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
भजन संहिता 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
भजन संहिता 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
भजन संहिता 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
भजन संहिता 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।   

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50



रविवार, 24 मई 2020

शांत



     क्या कुछ ऐसा है जो आपको रात को ठीक से सोने नहीं देता है? हाल ही में मैं ठीक से सो नहीं पा रही हूँ, बिस्तर पर इधर से उधर करवट बदलती रहती हूँ, और फिर मुझे चिंता होने लगती है कि मैं आने वाले दिन की समस्याओं का सामना करने के लिए पर्याप्त आराम नहीं करने पाऊँगी। क्या आप का भी यही अनुभव रहता है? किसी संबंध को लेकर चिंता, भविष्य की अनिश्चितता, या अन्य जो भी बात हो – हम सभी कभी न कभी चिंता करते ही हैं।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद वास्तव में परेशानियों में था, जब उस ने भजन 4 लिखा था। लोग मिथ्या, आधारहीन आरोप लगा कर उसकी साख़ को ख़राब कर रहे थे (पद 2)। कुछ तो उस के राज करने की योग्यता पर प्रश्न चिह्न लगा रहे थे (पद 6)। संभवतः ऐसे अनुचित व्यवहार के कारण दाऊद क्रोधित भी हो रहा होगा। लेकिन फिर भी हम ये अद्भुत शब्द पढ़ते हैं: “मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है” (पद 8)।

     सुविख्यात मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने पद 8 की बहुत सुन्दर व्याख्या की है; वे कहते हैं, “इस प्रकार से लेट जाने के द्वारा...[दाऊद] ने अपने आप को एक अन्य के हाथों में छोड़ दिया; उस ने ऐसा संपूर्णतः किया, क्योंकि वह फिर निश्चिन्त हो कर सो गया; उसे पूरा भरोसा था।” उसे यह भरोसा क्यों था? आरम्भ से ही दाऊद को विश्वास था कि परमेश्वर उस की प्रार्थनाएं सुनेगा और उन का उत्तर देगा (पद 3)। और वह निश्चित था कि क्योंकि परमेश्वर ने उस से प्रेम करना चुना है, इस लिए वह अपने प्रेम में होकर उस की प्रत्येक आवश्यकता को पूरा भी करेगा।

     जब भी हमें चिंताएँ सताएँ, परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसकी सामर्थ्य और उपस्थिति में शांत हो सकें। हम उस की सर्वशक्तिशाली और प्रेम भरी बाहों में शांत हो कर लेट जाएं और सो जाएं। - पोह फैंग चिया

हम पूर्णतः विश्वासयोग्य परमेश्वर में अपना पूरा भरोसा रख सकते हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!  - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 4
भजन संहिता 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
भजन संहिता 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?
भजन संहिता 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
भजन संहिता 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।
भजन संहिता 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
भजन संहिता 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
भजन संहिता 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।
भजन संहिता 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 22-24
  • यूहन्ना 8:28-59



शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

शांत



     क्या कुछ ऐसा है जो आपको रात को ठीक से सोने नहीं देता है? हाल ही में मैं ठीक से सो नहीं पा रही हूँ, बिस्तर पर इधर से उधर करवट बदलती रहती हूँ, और फिर मुझे चिंता होने लगती है कि मैं आने वाले दिन की समस्याओं का सामना करने के लिए पर्याप्त आराम नहीं करने पाऊँगी। क्या आप का भी यही अनुभव रहता है? किसी संबंध को लेकर चिंता, भविष्य की अनिश्चितता, या अन्य जो भी बात हो – हम सभी कभी न कभी चिंता करते ही हैं।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद वास्तव में परेशानियों में था, जब उस ने भजन 4 लिखा था। लोग मिथ्या, आधारहीन आरोप लगा कर उसकी साख़ को ख़राब कर रहे थे (पद 2)। कुछ तो उस के राज करने की योग्यता पर प्रश्न चिह्न लगा रहे थे (पद 6)। संभवतः ऐसे अनुचित व्यवहार के कारण दाऊद क्रोधित भी हो रहा होगा। लेकिन फिर भी हम ये अद्भुत शब्द पढ़ते हैं: “मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है” (पद 8)।

     सुविख्यात मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने पद 8 की बहुत सुन्दर व्याख्या की है; वे कहते हैं, “इस प्रकार से लेट जाने के द्वारा...[दाऊद] ने अपने आप को एक अन्य के हाथों में छोड़ दिया; उस ने ऐसा संपूर्णतः किया, क्योंकि वह फिर निश्चिन्त हो कर सो गया; उसे पूरा भरोसा था।” उसे यह भरोसा क्यों था? आरम्भ से ही दाऊद को विश्वास था कि परमेश्वर उस की प्रार्थनाएं सुनेगा और उन का उत्तर देगा (पद 3)। और वह निश्चित था कि क्योंकि परमेश्वर ने उस से प्रेम करना चुना है, इस लिए वह अपने प्रेम में होकर उस की प्रत्येक आवश्यकता को पूरा भी करेगा।

     जब भी हमें चिंताएँ सताएँ, परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसकी सामर्थ्य और उपस्थिति में शांत हो सकें। हम उस की सर्वशक्तिशाली और प्रेम भरी बाहों में शांत हो कर लेट जाएं और सो जाएं। - पोह फैंग चिया

हम पूर्णतः विश्वासयोग्य परमेश्वर में अपना पूरा भरोसा रख सकते हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!  - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 4
भजन संहिता 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
भजन संहिता 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?
भजन संहिता 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
भजन संहिता 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।
भजन संहिता 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
भजन संहिता 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
भजन संहिता 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।
भजन संहिता 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 22-24
  • यूहन्ना 8:28-59



बुधवार, 2 नवंबर 2016

हाथ


   मुझे अपने बचपन का एक खेल स्मरण है - सेब पकड़ना; इसके लिए खेलने वाले के हाथ पीछे करके बाँध दिए जाते थे और उसे अपने मुँह तथा दाँतों से एक धागे से बंधे और झूलते हुए सेब को पकड़ना होता था। झूलते हुए सेब को ऐसे पकड़ना बड़ा कठिन और खिसियाने वाला होता था। यह मुझे स्मरण दिलाता है कि हाथ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं - हम उनकी सहायता से ही खाने पाते हैं, किसी का अभिनंदन करने पाते हैं, कुछ थामने पाते हैं, अपनी सुरक्षा करने पाते हैं। कहने का तातपर्य यह है कि जीवन के लिए जो भी आवश्यक है, वह करने के लिए हाथों की बहुत महत्वपूर्ण तथा आवश्यक भूमिका होती है।

   जब परमेश्वर के वचन बाइबल में मैं भजन 46:10 पढ़ता हूँ, तो इसे रोचक पाता हूँ कि यहाँ परमेश्वर कहता है कि "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं"। मूल इब्रानी भाषा में प्रयुक्त जिस शब्द का अनुवाद यहाँ ’चुप’ हुआ है उसका अर्थ है ’संघर्ष बन्द करना’, या, यदि बिलकुल शब्दार्थ को लें तो ’हाथ बगल में रख लेना’। पहली नज़र में यह परामर्श बड़ा जोखिम भरा लगता है, क्योंकि किसी भी कठिन परिस्थिति में हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है उस परिस्थिति में अपना हाथ डालकर उसे अपने लाभ के लिए मोड़ देने का प्रयास करना। लेकिन यहाँ परमेश्वर हम से कह रहा है, "अपने हाथ हटा लो और केवल मुझे ही इस समस्या का निवारण कर लेने दो; और विश्वास रखो कि निवारण मैं ही दूँगा।"

   लेकिन सामान्यतः अपने हाथ पूर्णतया हटा कर परमेश्वर को पूरी स्वतंत्रता के साथ कार्य करने देने में हम अपने अन्दर असुरक्षित अनुभव करते हैं। किंतु यदि हम वास्तव में इस बात पर विश्वास रखते हैं कि, जैसा भजनकार इस भजन में लिखता है, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (भजन 46:1) और यह कि, "सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है" (भजन 46:7), तो हम हर परिस्थिति, परेशानी, समस्या में शांत होकर, अपने हाथ हटा कर परमेश्वर की देखभाल में विश्राम कर सकते हैं; सभी निवारण को उसके हाथों में छोड़ सकते हैं। - जो स्टोवैल


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं, 
तब वह अपनी शांति हमारे हृदयों में भर देता है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया - यशायाह 30:15 

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3


रविवार, 2 अक्टूबर 2016

तूफान


   एक भयानक तूफान के आने के लक्षण साफ दिख रहे थे - केवल क्षितिज़ पर ही नहीं, वरन मेरे एक मित्र के घर में भी। उस मित्र ने बताया कि जब वह हाँग-काँग में थी तो स्थानीय मौसम विभाग ने चेतावनी ज़ारी करी कि एक तीव्र तूफान आने को है। लेकिन घर की खिड़की के बाहर दस्तक दे रहे उस तूफान से भी बड़ा तूफान घर के अन्दर आने की तैयारियाँ कर रहा था। उस मित्र के पिता बीमार थे, अस्पताल में भरती थे, और उनकी देखभाल में लगे परिवार के लोग अपनी पारिवारिक तथा कार्य संबंधी ज़िम्मेदारियों को निभाने और उन ज़िम्मेदारियों में परस्पर संतुलन बनाए रखने तथा घर एवं अस्पताल के बीच आने-जाने की कशमकश में लगे हुए थे। सब थक रहे थे, सबका धैर्य कमज़ोर पड़ रहा था और घर के अन्दर की परिस्थिति तनावपूर्ण होती जा रही थी।

   जब बदकिस्मती, दुःख और तनाव के थपेड़े हमें इधर से उधर पटकते हैं, तब जीवन एक तूफान के समान प्रतीत हो सकता है। ऐसे में हम किस ओर मुड़ें? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जब प्रभु यीशु के चेले नाव द्वारा झील पार करते समय एक तूफान में फंस गए, और नाव भयानक रीति से हिचकोले लेने लगी, और उन्हें लगा कि वे अब डूबने पर हैं, तब उनके मन में उनके साथ यात्रा कर रहे प्रभु यीशु को लेकर विचार आया कि क्या प्रभु को उनकी कोई चिन्ता नहीं है? अर्थात, उस विकट परिस्थिति में भी चेले जानते थे कि उन्हें किसकी ओर मुड़ना है; उनकी सहायता कौन कर सकता है। और प्रभु यीशु ने उस तूफान को शांत करके अपनी सामर्थ उन पर प्रकट करी (मरकुस 4:38-39)।

   लेकिन कई बार प्रभु तुरंत ही तूफान को शांत नहीं करता है, जिससे उस समय उन चेलों के समान, आज हम भी यही सोचने लगते हैं कि क्या प्रभु को हमारी चिंता है भी? अपने भय को शांत करने के लिए हमें अपने उस विश्वास को थामे रहना है कि परमेश्वर कौन है और क्या कुछ कर सकता है। हम उसमें शरण ले सकते हैं: "जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा" (भजन 91:1)। हम उसकी सहायता से, उसके अनुग्रह के द्वारा दूसरों को सांत्वना और शांति दे सकते हैं। हम सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, प्रेम करने वाले सबसे बुद्धिमान पिता परमेश्वर की शरण में आकर शांत होकर बैठ सकते हैं; क्योंकि वह जीवन के हर तूफान में हमारे साथ बना रहता है, और उस तूफान में से हमें सुरक्षित निकाल भी लाता है। - पोह फैंग चिया


किसी को ज़ोर से चिल्लाकर उसे पुकारने की आवश्यकता नहीं है; 
प्रभु हमारे सोचने से भी अधिक निकट है। - भाई लॉरेंस

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16
  • इफिसियों 5:1-16


मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

शांत और विश्राम से


   जब मेरे नेत्र विशेषज्ञ मुझे शांत होकर विश्राम करने का परामर्ष देते हैं तो मैं वैसा ही करती हूँ; मैं उन से बहस नहीं करती, उनकी अनाज्ञाकारी नहीं होती और उनके पीठ पीछे अपने आप को काम में व्यस्त नहीं कर लेती। क्यों? क्योंकि मैं जानती हूँ कि वे एक बहुत प्राख्यात नेत्र विशेज्ञ हैं, वे मेरी दृष्टि को बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं और इस कार्य में उन्हें मेरा पर्याप्त सहयोग चाहिए। उनके निर्देशों की अवहेलना कर के अपनी मन मर्ज़ी करना मेरे लिए मूर्खता होगी।

   तो, जब मैं शारीरिक बातों के लिए एक चिकित्सक के निर्देशों का पालन इतनी गंभीरता से करती हूँ तो आत्मिक बातों के लिए परमेश्वर के निर्देशों का पालन करने में आनाकानी क्यों करती हूँ? यदि मैं एक मनुष्य के कहने पर शांत होकर विश्राम करने को तैयार हो जाती हूँ जिससे मुझे लाभ हो सके तो परमेश्वर के कहने पर शांत होकर विश्राम करने को तैयार क्यों नहीं होती? जैसे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वैसे ही आत्मिक स्वास्थ्य के लिए भी शांत हो जाना और उचित विश्राम करना अति आवश्यक है। परमेश्वर ने विश्राम को इतना महत्व दिया है कि उसे जीवन की लय में पिरो दिया है। बिना पर्याप्त विश्राम के हम ठीक से कोई भी कार्य नहीं कर पाते, हमारी शक्ति क्षीण होने लगती है, हमारी गलतियाँ करने की प्रवृति बढ़ने लगती है। यही हमारे आत्मिक जीवन में भी होता है यदि हम कुछ थम के, शांत होकर, परमेश्वर के साथ बैठकर कुछ समय व्यतीत ना करें।

   जब परमेश्वर के नबी एलियाह ने दुष्ट राजा आहाब और उसकी पत्नि इज़ेबेल का सामना किया तो उस तनावपूर्ण संघर्ष के बाद वह थक गया। परमेश्वर ने उसकी सेवा करने के लिए अपना एक दूत भेजा, और शांत हो जाने के बाद एलियाह के पास परमेश्वर का वचन आया। उस समय उस तनाव की स्थिति में एलियाह को लग रहा था कि केवल वह ही परमेश्वर के प्रति वफादार है और उसके लिए कार्य कर रहा है। लेकिन परमेश्वर ने उसे बताया कि अभी उसके अलावा 7000 और लोग हैं जिन्होंने बाल देवता के आगे घुटने नहीं टेके हैं।

   हो सकता है कि हमें लगे कि यदि हम शांत होकर विश्राम करने लगेंगे तो फिर कैसे काम चलेगा; हमारे कार्य किए बिना क्या हो सकेगा? लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि यदि वे शांत होकर विश्राम नहीं करेंगे तो उसका परिणाम क्या होगा? क्योंकि शारीरिक या आत्मिक रीति से थकित होकर तो हम कुछ भी सही नहीं कर सकते। जब हम शांत और विश्राम में होते हैं तब ही शरीर और आत्मा को स्वस्थ करने की क्रियाएं हमारे जीवनों में कार्य कर पाती हैं और हमें और अधिक कार्य के लिए तैयार तथा मज़बूत कर पाती हैं।

   जैसे मेरे लिए आवश्यक था कि मैं अपने नेत्र विशेषज्ञ की बात मानकर अपनी दृष्टि को ठीक रखने के लिए शांत और विश्राम में हो जाऊँ, वैसे ही हम सब को परमेश्वर की बात मानकर शांत और एकाग्र होकर उसके साथ समय बिताने की आवश्यकता है जिससे हमारे शरीर और मन स्वस्थ रहें। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारी सबसे बड़ी सामर्थ हमारा परमेशवर के सम्मुख शांत होकर खड़े रहना और उसपर भरोसा रखना ही है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजा 19:1-18
1 Kings 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उसने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला। 
1 Kings 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें। 
1 Kings 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण ले कर भागा, और यहूदा के बेर्शेबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया। 
1 Kings 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जा कर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उसने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ। 
1 Kings 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेटकर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठ कर खा। 
1 Kings 19:6 उसने दृष्टि कर के क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उसने खाया और पिया और फिर लेट गया। 
1 Kings 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठ कर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है। 
1 Kings 19:8 तब उसने उठ कर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा। 
1 Kings 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:10 उन ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के साम्हने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हूआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था। 
1 Kings 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाईं दिया।
1 Kings 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाईं दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:14 उसने कहा, मुझे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त बड़ी जलन हुई, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, और तेरी वेदियों को गिरा दिया है और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है; और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:15 यहोवा ने उस से कहा, लौटकर दमिश्क के जंगल को जा, और वहां पहुंचकर अराम का राजा होने के लिये हजाएल का, 
1 Kings 19:16 और इस्राएल का राजा होने को निमशी के पोते येहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिये आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलीशा का अभिषेक करना। 
1 Kings 19:17 और हजाएल की तलवार से जो कोई बच जाए उसको येहू मार डालेगा; और जो कोई येहू की तलवार से बच जाए उसको एलीशा मार डालेगा। 
1 Kings 19:18 तौभी मैं सात हजार इस्राएलियों को बचा रखूंगा। ये तो वे सब हैं, जिन्होंने न तो बाल के आगे घुटने टेके, और न मुंह से उसे चूमा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6