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शुक्रवार, 29 मई 2020

केंद्र बिंदु



     हम जलपोत में यात्रा करने जा रहे थे। जैसे ही उस जलपोत ने चलना आरम्भ किया, मेरी बेटी की तबियत खराब होने लगी, उसे मितली आने लगी। थोड़ी ही देर में मैं भी वैसा ही अनुभव करने लगी। ऐसे में करने के लिए मुझे नाविकों द्वारा कही जाने वाली बात याद आई, “क्षितिज पर टकटकी लगाए रहो।”

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम लिखा पाते हैं कि क्षितिज का बनाने वाला (अय्यूब 26:10) जानता है कि जीवन में हमें विचलित और भयभीत करने वाले समय आएँगे। उन समयों में भी हम अपनी अनंत नियति के दूर किन्तु स्थिर बिंदु पर ध्यान केन्द्रित करने के द्वारा अपने दृष्टिकोण को सही कर सकते हैं।

     बाइबल में इब्रानियों के नाम लिखी पत्री का लेखक यह बात जानता था। उसने अपने पाठकों में एक निराशा की अनुभूति की; उन के मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव ने उन में से अनेकों को बेघर कर दिया था। इस लिए उस ने उन्हें स्मरण कराया कि अन्य विश्वासी लोगों ने भी विकट परिस्थितियों को झेला था और बेघर भी रहे थे। उन्होंने इस सब को इस लिए सहन किया क्योंकि उन्हें कुछ और बेहतर के आशा थी।

     निर्वासित लोग होने के कारण, वे स्वर्गीय देश में स्थित उस नगर की बाट देख सकते थे जिसका रचयिता परमेश्वर है, वह स्थान जो परमेश्वर ने उन के लिए तैयार किया था (इब्रानियों 11:10, 14, 16)। इस लिए अपनी पत्री का समापन करते हुए लेखक अपने पाठकों से कहता है कि वे परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अपने ध्यान केन्द्रित रखें, “क्योंकि यहां हमारा कोई स्थिर रहने वाला नगर नहीं, वरन हम एक आने वाले नगर की खोज में हैं” (इब्रानियों 13:14)।

     हमारी वर्तमान परेशानियाँ कुछ समय की हैं। हम “पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं” (11:13), लेकिन परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के क्षितिज पर ध्यान केन्द्रित करने से हमें वह स्थिर केंद्र बिंदु मिलता है जो हमें विचलित नहीं होने देगा। - कीला ओकोआ

परमेश्वर पर ध्यान केन्द्रित कर करके स्थिर दृष्टिकोण प्राप्त करें।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
इब्रानियों 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
इब्रानियों 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
इब्रानियों 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
इब्रानियों 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
इब्रानियों 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
इब्रानियों 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।
इब्रानियों 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं।
इब्रानियों 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था।
इब्रानियों 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29



गुरुवार, 20 सितंबर 2018

चित्र



      फ़्रांसीसी कलाकार जॉरजेस सेयुरत ने 1880 के समय में कला की एक नई विधि को प्रस्तुत किया, जिसे “बिंदु चित्रण” (pointillism) भी कहा जाता है। जैसा कि नाम से पता चलता है, सेयुरत ने रंगों की कूची की बजाए, चित्र बनाने के लिए रंगीन बिंदुओं का प्रयोग किया। निकट से देखने पर उसकी कृतियाँ अलग-अलग बिंदुओं के समूह जैसी लगती हैं। परन्तु जब उन्हें थोड़ा सा पीछे हटाकर, कुछ दूरी से देखा जाए तो मानव आँख उन बिंदुओं एक-दूसरे के साथ मिलाकर रंगीन चित्र बना देती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल का दूर से दिखने वाला बड़ा चित्र भी कुछ ऐसा ही है। जब हम बाइबल की बातों को निकट से देखते हैं तो वे हमें सेयुरत के चित्र बनाने के पटल पर बिखरे उन बिंदुओं के समान जटिल और समझने में कठिन दिखाई दे सकती हैं। बाइबल को पढ़ते समय हम अपने आप को प्रभु यीशु के उन शिष्यों, क्लियोपास और उसके मित्र के समान देख सकते हैं जो प्रभु के पुनारुत्थान के पश्चात, संध्या काल को यरूशलेम से इम्माउस को हाल ही में घटित हुई घटनाओं के विषय परस्पर चर्चा करते हुए जा रहे थे। वे उस सप्ताहांत में हुई त्रासदीपूर्ण घटनाओं के “बिंदुओं” को परस्पर मिला और समझ नहीं पा रहे थे। उन्हें अपेक्षा थी प्रभु यीशु ही वह मसीहा हैं जो इस्राएल को छुटकारा देंगे (लूका 24:21), परन्तु अभी हाल ही में उन्होंने प्रभु यीशु को क्रूस पर मारे जाते हुए देखा था।

      तभी अचानक एक व्यक्ति जिसे वे पहचानते नहीं थे, उनके साथ चलने लगा, और उनके वार्तालाप में रुचि दिखाने लगा। उस व्यक्ति ने उन्हें, वचन में पहले से मसीह यीशु के संबंध में, उसके सताए जाने, मारे जाने और मृतकों में से जी उठने के बारे में लिखी भविष्यवाणियों के उन “बिंदुओं” को जोड़ने में सहायता की। बाद में जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा तो उस व्यक्ति ने उन्हें उसे पहचानने दिया, कि वह प्रभु यीशु ही है, और फिर जैसे वह आश्चर्यजनक रीति से उनके पास आया था, वैसे ही चला भी गया।

      जब हम पवित्र-शास्त्र और प्रभु यीशु के संबंध में दी गई भविष्यवाणियों के “बिंदुओं” को मिलाकर देखते हैं, तो हमारे सामने एक ऐसे परमेश्वर का चित्र उभर कर आता है जो हमसे इतना अधिक प्रेम करता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। - मार्ट डीहॉन


प्रभु यीशु ने हमारे प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए अपने आप को बलिदान किया।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना 15:13

बाइबल पाठ: लूका 24:13-32
Luke 24:13 देखो, उसी दिन उन में से दो जन इम्माऊस नाम एक गांव को जा रहे थे, जो यरूशलेम से कोई सात मील की दूरी पर था।
Luke 24:14 और वे इन सब बातों पर जो हुईं थीं, आपस में बातचीत करते जा रहे थे।
Luke 24:15 और जब वे आपस में बातचीत और पूछताछ कर रहे थे, तो यीशु आप पास आकर उन के साथ हो लिया।
Luke 24:16 परन्तु उन की आंखे ऐसी बन्‍द कर दी गईं थी, कि उसे पहिचान न सके।
Luke 24:17 उसने उन से पूछा; ये क्या बातें हैं, जो तुम चलते चलते आपस में करते हो? वे उदास से खड़े रह गए।
Luke 24:18 यह सुनकर, उनमें से क्‍लियुपास नाम एक व्यक्ति ने कहा; क्या तू यरूशलेम में अकेला परदेशी है; जो नहीं जानता, कि इन दिनों में उस में क्या क्या हुआ है?
Luke 24:19 उसने उन से पूछा; कौन सी बातें? उन्होंने उस से कहा; यीशु नासरी के विषय में जो परमेश्वर और सब लोगों के निकट काम और वचन में सामर्थी भविष्यद्वक्ता था।
Luke 24:20 और महायाजकों और हमारे सरदारों ने उसे पकड़वा दिया, कि उस पर मृत्यु की आज्ञा दी जाए; और उसे क्रूस पर चढ़वाया।
Luke 24:21 परन्तु हमें आशा थी, कि यही इस्त्राएल को छुटकारा देगा, और इन सब बातों के सिवाय इस घटना को हुए तीसरा दिन है।
Luke 24:22 और हम में से कई स्‍त्रियों ने भी हमें आश्चर्य में डाल दिया है, जो भोर को कब्र पर गई थीं।
Luke 24:23 और जब उस की लोथ न पाई, तो यह कहती हुई आईं, कि हम ने स्‍वर्गदूतों का दर्शन पाया, जिन्हों ने कहा कि वह जीवित है।
Luke 24:24 तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए, और जैसा स्‍त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया; परन्तु उसको न देखा।
Luke 24:25 तब उसने उन से कहा; हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्‍दमतियों!
Luke 24:26 क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठा कर अपनी महिमा में प्रवेश करे?
Luke 24:27 तब उसने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ कर के सारे पवित्र शास्‍त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया।
Luke 24:28 इतने में वे उस गांव के पास पहुंचे, जहां वे जा रहे थे, और उसके ढंग से ऐसा जान पड़ा, कि वह आगे बढ़ना चाहता है।
Luke 24:29 परन्तु उन्होंने यह कहकर उसे रोका, कि हमारे साथ रह; क्योंकि संध्या हो चली है और दिन अब बहुत ढल गया है। तब वह उन के साथ रहने के लिये भीतर गया।
Luke 24:30 जब वह उन के साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी ले कर धन्यवाद किया, और उसे तोड़कर उन को देने लगा।
Luke 24:31 तब उन की आंखे खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उन की आंखों से छिप गया।
Luke 24:32 उन्होंने आपस में कहा; जब वह मार्ग में हम से बातें करता था, और पवित्र शास्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हुई?


एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6
  • 2 कुरिन्थियों 12