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Sunday, May 31, 2015

अस्थिर अनुयायी


   लोकमत देखते ही देखते बदल जाता है, समर्थन करने वाले लोग भी अचानक ही विरोधी हो जाते हैं। जब खेल में हमारी मनपसन्द टीम जीत रही होती है, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं, उसके गुणों का बखान करते हैं; परन्तु जब वह एक-दो खेल हार जाए तो उससे विमुख होकर उसकी आलोचना करने में हमें देर नहीं लगती। जब कोई नया और उत्साहवर्धक कार्य आरंभ होता है तो उसके साथ जुड़ने में हमें संकोच नहीं होता, लेकिन कुछ समय में जब उसका वह नयापन जाता रहता है और उसके कार्य नित्यप्रायः लगने लगते हैं तो उसके प्रति हमारे उत्साह का स्तर भी गिरने लगता है।

   प्रभु यीशु ने भी लोकमत की इस अस्थिरता को अनुभव किया। जब वे फसह का पर्व मनाने यरुशालेम में आए तो लोगों ने उसका स्वागत बड़े उत्साह के साथ किया, उसे राजा माना (यूहन्ना 12:13); परन्तु स्पताह का अन्त होते होते वही भीड़ उसे क्रूस पर चढ़ाए जाने की माँग कर रही थी (यूहन्ना 19:15)। यह केवल उस भीड़ का ही बर्ताव नहीं था। जब प्रभु यीशु को पकड़वाया गया तथा क्रूस पर चढ़ाने के लिए ले जाया गया, तो उसके प्रति प्रेम और वफादारी का, तथा उसके लिए अपनी जान भी देने का दावा करने वाले उसके अनुयायी उसे अकेला छोड़ कर भाग गए। यह केवल उन अनुयायियों का ही व्यवहार नहीं था; आज मेरे जीवन में भी यही बात पाई जाती है। जब प्रभु यीशु मेरे भले के लिए कुछ असंभव कर रहे होते हैं तो मुझे उनके साथ खड़ा रहना अच्छा लगता है; परन्तु जब वे मुझे कुछ कठिन या कष्टदायक करने को कहते हैं मैं बचकर निकल लेने के प्रयास करने लगती हूँ। भीड़ की गुमनामी का भाग बनकर प्रभु यीशु का अनुयायी होने का दावा करना सरल है; जब वे चतुर लोगों की चतुराई को व्यर्थ और सामर्थी लोगों की सामर्थ को विफल करते हैं तो उन पर विश्वास रखने का दावा करना सहज है; लेकिन जब वे उस विश्वास के लिए दुख उठाने, बलिदान देने और मृत्यु का सामना करने की बात करते हैं तो उसी विश्वास को असमंजस तथा आनाकानी में बदलेते देर नहीं लगती।

   मुझे यह सोचना अच्छा लगता है कि यदी मैं वहाँ होती तो प्रभु के चेलों की तरह उन्हें छोड़कर नहीं भागती, वरन उनके साथ क्रूस तक जाती। लेकिन स्वयं मुझे ही अपने बारे में इस में कुछ शंका भी है; आखिरकर जब मैं उनके लिए अपना मूँह वहाँ भी नहीं खोलती जहाँ एक सुरक्षित माहौल है, तो मैं यह कैसे कह सकती हूँ कि उनके विरोधियों की भीड़ के समक्ष मैं उनके पक्ष में आने भी पाऊँगी, ऐसे विरोध भरे माहौल में खड़े होकर उनकी प्रशंसा करना या उनके लिए कुछ कहना तो बहुत दूर की बात है।

   हम मसीही विश्वासियों को और मुझे प्रभु परमेश्वर के प्रति और कितना अधिक धन्यवादी तथा कृतज्ञ रहना चाहिए कि हमारी दशा और व्यवहार को भली भाँति जानने के बावजूद, उसने मुझ जैसे, हम जैसे अस्थिर अनुयायियों के लिए भी अपने प्राण बलिदान किए, वह हमें आज भी अपना मानता है, हमारे साथ बना रहता है, हमारी सहायता करता रहता है जिससे कि हम उसकी संगति में रहकर, उससे सामर्थ पा सकें और उसके वफादार तथा उसे समर्पित अनुयायी बन सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु अपने लिए हमारी योग्यता नहीं, वरन उसके लिए हमारी उपलब्धता और हमारा समर्पण चाहता है।

परन्तु यीशु ने अपने आप को उन के भरोसे पर नहीं छोड़ा, क्योंकि वह सब को जानता था। और उसे प्रयोजन न था, कि मनुष्य उसके विषय में कोई गवाही दे, क्योंकि वह आप ही जानता था, कि मनुष्य के मन में क्या है। - यूहन्ना 2:24-25

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:12-19; 19:14-16
John 12:12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे, यह सुनकर, कि यीशु यरूशलेम में आता है। 
John 12:13 खजूर की, डालियां लीं, और उस से भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, कि होशाना, धन्य इस्त्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है। 
John 12:14 जब यीशु को एक गदहे का बच्‍चा मिला, तो उस पर बैठा। 
John 12:15 जैसा लिखा है, कि हे सिय्योन की बेटी, मत डर, देख, तेरा राजा गदहे के बच्‍चा पर चढ़ा हुआ चला आता है। 
John 12:16 उसके चेले, ये बातें पहिले न समझे थे; परन्तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई, तो उन को स्मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं; और लोगों ने उस से इस प्रकार का व्यवहार किया था। 
John 12:17 तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उसने लाजर को कब्र में से बुलाकर, मरे हुओं में से जिलाया था। 
John 12:18 इसी कारण लोग उस से भेंट करने को आए थे क्योंकि उन्होंने सुना था, कि उसने यह आश्चर्यकर्म दिखाया है। 
John 12:19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है।

John 19:14 यह फसह की तैयारी का दिन था और छठे घंटे के लगभग था: तब उसने यहूदियों से कहा, देखो, यही है, तुम्हारा राजा! 
John 19:15 परन्तु वे चिल्लाए कि ले जा! ले जा! उसे क्रूस पर चढ़ा: पीलातुस ने उन से कहा, क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊं? महायाजकों ने उत्तर दिया, कि कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं। 
John 19:16 तब उसने उसे उन के हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26


Saturday, May 30, 2015

नम्र मन


   साहित्य में अकसर देखा जाता है कि चरित्र का कोई छोटा सा ऐब, कहानी के नायक के पतन का कारण हो जाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम ऐसे उदाहरण पाते हैं, जिनमें से एक है राजा उज़्ज़ियाह का। उज़्ज़ियाह 16 वर्ष की आयु में यहूदा का राजा बना; राजा बनने के कई वर्ष पश्चात तक वह परमेश्वर का खोजी रहा और जब तक वह ऐसा करता रहा, परमेश्वर उसे सफलता तथा उन्नति देता रहा, उसे सामर्थी करता रहा (2 इतिहास 26:4-5)। इस सफलता, उन्नति तथा सामर्थ से उसकी ख्याति चारों ओर फैल गई; किंतु इससे उसके अन्दर घमंड भी आ गया, जो फिर उसके विनाश का कारण बन गया (2 इतिहास 26:15-16)।

   अपने घमंड में उज़्ज़ियाह को लगा कि वह परमेश्वर के नियमों की अवहेलना कर सकता है, अपनी मन-मर्ज़ी कर सकता है। वह मन्दिर में गया और मन्दिर के पुजारी के कार्य को करने लगा - परमेश्वर की वेदी पर धूप जलाने लगा। पुजारियों ने उसे चिताया कि यह करना उसके लिए सही नहीं है और रोकना चाहा, परन्तु वह उल्टे पुजारियों पर क्रोधित होने लगा; तब परमेश्वर ने उसे कोढ़ी कर दिया और वह कोढ़ की दशा में मन्दिर तथा राज-पद से निकाल दिया गया (2 इतिहास 26:16-20)।

   साहित्य तथा जीवन, दोनों में ही हम पाते हैं कि सुनामी और प्रतिष्ठित व्यक्ति अपने ही घमंड या किसी अन्य ऐब के कारण अपमान तथा कष्ठ में गिर जाते हैं; "और उज्जिय्याह राजा मरने के दिन तक कोढ़ी रहा, और कोढ़ के कारण अलग एक घर में रहता था, वह तो यहोवा के भवन में जाने न पाता था। और उसका पुत्र योताम राजघराने के काम पर नियुक्त किया गया और वह लोगों का न्याय भी करता था" (2 इतिहास 26:21)।

   प्रशंसा के अमृत को अहंकार का विष बनने से रोकने का एक ही मार्ग है, एक नम्र तथा आज्ञाकारी मन के साथ प्रभु परमेश्वर की आज्ञाकारिता में चलते रहना; उसे ही अपने मन तथा जीवन में प्राथमिकता और महिमा का स्थान देना। - डेविड मैक्कैसलैंड


जैसे चान्दी के लिये कुठाई और सोने के लिये भट्ठी हैं, वैसे ही मनुष्य के लिये उसकी प्रशंसा है। - नीतिवचन 27:21

विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन 16:18

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 26:3-21
2 Chronicles 26:3 जब उज्जिय्याह राज्य करने लगा, तब वह सोलह वर्ष का था। और यरूशलेम में बावन वर्ष तक राज्य करता रहा, और उसकी माता का नाम यकील्याह था, जो यरूशलेम की थी। 
2 Chronicles 26:4 जैसे उसका पिता अमस्याह, किया करता था वैसा ही उसने भी किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था। 
2 Chronicles 26:5 और जकर्याह के दिनों में जो परमेश्वर के दर्शन के विषय समझ रखता था, वह परमेश्वर की खोज में लगा रहता था; और जब तक वह यहोवा की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्वर उसको भाग्यवान किए रहा। 
2 Chronicles 26:6 तब उसने जा कर पलिश्तियों से युद्ध किया, और गत, यब्ने और अशदोद की शहरपनाहें गिरा दीं, और अशदोद के आसपास और पलिश्तियों के बीच में नगर बसाए। 
2 Chronicles 26:7 और परमेश्वर ने पलिश्तियों और गूर्बालवासी, अरबियों और मूनियों के विरुद्ध उसकी सहायता की। 
2 Chronicles 26:8 और अम्मोनी उज्जिय्याह को भेंट देने लगे, वरन उसकी कीर्ति मिस्र के सिवाने तक भी फैल गई्र, क्योंकि वह अत्यन्त सामथीं हो गया था। 
2 Chronicles 26:9 फिर उज्जिय्याह ने यरूशलेम में कोने के फाटक और तराई के फाटक और शहरपनाह के मोड़ पर गुम्मट बनवा कर दृढ़ किए। 
2 Chronicles 26:10 और उसके बहुत जानवर थे इसलिये उसने जंगल में और नीचे के देश और चौरस देश में गुम्मट बनवाए और बहुत से हौद खुदवाए, और पहाड़ों पर और कर्म्मेल में उसके किसान और दाख की बारियों के माली थे, क्योंकि वह खेती किसानी करने वाला था। 
2 Chronicles 26:11 फिर उज्जिय्याह के योद्धाओं की एक सेना थी जिनकी गिनती यीएल मुंशी और मासेयाह सरदार, हनन्याह नामक राजा के एक हाकिम की आज्ञा से करते थे, और उसके अनुसार वह दल बान्ध कर लड़ने को जाती थी। 
2 Chronicles 26:12 पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुष जो शूरवीर थे, उनकी पूरी गिनती दो हजार छ: सौ थी। 
2 Chronicles 26:13 और उनके अधिकार में तीन लाख साढ़े सात हजार की एक बड़ी बड़ी सेना थी, जो शत्रुओं के विरुद्ध राजा की सहायता करने को बड़े बल से युद्ध करने वाले थे। 
2 Chronicles 26:14 इनके लिये अर्थात पूरी सेना के लिये उज्जिय्याह ने ढालें, भाले, टोप, झिलम, धनुष और गोफन के पत्थर तैयार किए। 
2 Chronicles 26:15 फिर उसने यरूशलेम में गुम्मटों और कंगूरों पर रखने को चतुर पुरुषों के निकाले हुए यन्त्र भी बनवाए जिनके द्वारा तीर और बड़े बड़े पत्थर फेंके जाते थे। और उसकी कीर्ति दूर दूर तक फैल गई, क्योंकि उसे अदभुत सहायता यहां तक मिली कि वह सामथीं हो गया। 
2 Chronicles 26:16 परन्तु जब वह सामथीं हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उसने बिगड़ कर अपने परमेश्वर यहोवा का विश्वासघात किया, अर्थात वह धूप की वेदी पर धूप जलाने को यहोवा के मन्दिर में घुस गया। 
2 Chronicles 26:17 और अजर्याह याजक उसके बाद भीतर गया, और उसके संग यहोवा के अस्सी याजक भी जो वीर थे गए। 
2 Chronicles 26:18 और उन्होंने उज्जिय्याह राजा का साम्हना कर के उस से कहा, हे उज्जिय्याह यहोवा के लिये धूप जलाना तेरा काम नहीं, हारून की सन्तान अर्थात उन याजकों ही का काम है, जो धूप जलाने को पवित्र किए गए हैं। तू पवित्र स्थान से निकल जा; तू ने विश्वासघात किया है, यहोवा परमेश्वर की ओर से यह तेरी महिमा का कारण न होगा। 
2 Chronicles 26:19 तब उज्जिय्याह धूप जलाने को धूपदान हाथ में लिये हुए झुंझला उठा। और वह याजकों पर झुंझला रहा था, कि याजकों के देखते देखते यहोवा के भवन में धूप की वेदी के पास ही उसके माथे पर कोढ़ प्रगट हुआ। 
2 Chronicles 26:20 और अजर्याह महायाजक और सब याजकों ने उस पर दृष्टि की, और क्या देखा कि उसके माथे पर कोढ़ निकला है! तब उन्होंने उसको वहां से झटपट निकाल दिया, वरन यह जान कर कि यहोवा ने मुझे कोढ़ी कर दिया है, उसने आप बाहर जाने को उतावली की। 
2 Chronicles 26:21 और उज्जिय्याह राजा मरने के दिन तक कोढ़ी रहा, और कोढ़ के कारण अलग एक घर में रहता था, वह तो यहोवा के भवन में जाने न पाता था। और उसका पुत्र योताम राजघराने के काम पर नियुक्त किया गया और वह लोगों का न्याय भी करता था।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


Friday, May 29, 2015

शान्ति


   मेरी सहेली इलूइस जीवन की सामान्य बातों को चतुराई से अलग ही परिपेक्ष्य में ढाल देती है। एक दिन मैं ने उस से पूछा, "कहो, कैसी हो?" मुझे आशा थी कि वह इस प्रश्न का सामान्यतः दिया जाने वाला जाना-पहचाना उत्तर देगी, "ठीक हूँ"। किंतु उसने उत्तर दिया, "मुझे जाकर उसे जगाना है!" मैं यह सुनकर चकरा गई और उस से उसकी इस बाता का अर्थ पूछा। उसने बच्चों के समान चकित हुए कहा, "तुम अपनी बाइबल भी नहीं जानतीं?" फिर वह बोली, "जब प्रभु के चेलों के सामने संकट आया, तो वे प्रभु यीशु को जगाने गए थे ना; मुझे भी प्रभु को जगाने जाना है!"

   जब हम किसी परेशान कर देने वाली परिस्थिति में आ जाते हैं और उस से निकलने का कोई मार्ग सूझ नहीं पड़ता, तब हम क्या करते हैं? हो सकता है कि प्रभु के चेलों के समान हम भी प्रभु यीशु के पास जाते हैं (मरकुस 4:35-41)। लेकिन कभी कभी हम अपने ही प्रयासों से अपने आप को परिस्थिति से बाहर निकालने के प्रयास करते हुए, हमारी परिस्थिति के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति से बदला लेना चाहते हैं; या उसे बदनाम करने लगते हैं; या निराश और हताश होकर किसी कोने में दुबक कर बैठ जाते हैं।

   हमें प्रभु यीशु के चेलों से शिक्षा लेनी चाहिए, जो विकट परिस्थिति में अपनी एकमात्र आशा प्रभु यीशु के पास आए। हो सकता है कि प्रभु हमें तुरंत ही या हमारे सोचे तरीके से उस परिस्थिति से बाहर ना निकाले, किंतु यह ध्यान रखना कि हमारे संकट में वह हमारे साथ खड़ा है, सांत्वना देता है। हमें उसका धन्यवादी होना चाहिए कि वह सदा हमारे साथ बना रहता है और हमारे जीवन के तूफानों को भी कहता है, "शान्त रह, थम जा" (मरकुस 4:39)।

   इसलिए अपने जीवन के तूफानों में उसकी ओर देखें, उसे पुकारें, और वह अपनी शान्ती आपके जीवन में भर देगा। - जो स्टोवैल


जब जीवन में परेशानियों के तूफान भयभीत करें तो समाधान के लिए मसीह यीशु को अपना प्रथम विकल्प बनाएं।

प्रभु यीशु ने कहा: मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। -  यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29



Thursday, May 28, 2015

महिमा


   खेलों में से मुझे बचपन से ही बेसबॉल बहुत पसन्द रहा है और मैं इस खेल का शौकीन रहा हूँ। बेसबॉल खेलने वाली टीमों में से मेरी पसन्दीदा टीम रही है डेट्रौइट टाइगर्स। लेकिन हाल ही में खेल की एक श्रंखला में खराब खेल के कारण इस टीम को कई बार हार का सामना करना पड़ा जिससे मुझे बड़ी निराशा हुई। इसलिए अपनी भलाई के लिए मैंने निर्णय किया कि मैं अवकाश लूँगा और अपनी मन-पसन्द टीम से संबंधित किसी भी बात में मैंने चार दिन तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन चार दिनों में मैं मनन करने लगा कि किसी ऐसी बात को छोड़ना, जिसके हम अभ्यस्त हो चुके हैं, कितना कठिन होता है।

  लेकिन हमारे निज जीवनों में भी कभी कभी ऐसे समय आते हैं जहाँ परमेश्वर हमें दिखाता है कि हम कुछ बातों को छोड़ दें। यह तब हो सकता है जब हम किसी ऐसे कार्य में संलग्न हो रखे हैं जो हमें किसी अन्य बात के लिए समय नहीं निकालने देती, और हम यह एहसास करने लगते हैं कि उस कार्य को सीमित कर देना ही भला होगा (1 कुरिन्थियों 6:12)। या फिर हमारे अन्दर कोई आदत या पसन्द है जिस के बारे में हम जानते हैं कि उस से परमेश्वर को प्रसन्ना नहीं हो सकता। क्योंकि हम मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तथा अपने जीवनों से परमेश्वर को महिमा देना चाहते हैं, इसलिए हमें यह आभास भी होता है कि अपनी उस आदत या पसन्द को हमें छोड़ देना चाहिए।

   जब परमेश्वर की सहायता से हम उन बातों को पहचानने लगते हैं जो परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में आड़े आती हैं, तो परमेश्वर की ही सहायता से हमें उन्हें छोड़ भी देना चाहिए। इसके लिए परमेश्वर ने हमें उचित प्रावधान दिए भी हैं (1 कुरिन्थियों 10:13), और हमारे अन्दर निवास करने वाला परमेश्वर का पवित्र आत्मा इसके लिए हमें सामर्थ भी देता है (रोमियों 8:5)।

   हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य और उद्देश्य है कि हम अपने जीवनों से परमेश्वर की महिमा करें (1 कुरिन्थियों 6:19-20); हम कुछ भी ऐसा ना करें जिससे संसार के सामने परमेश्वर की महिमा धूमिल होने पाए। - डेव ब्रैनन


मसीह यीशु के निकट बने रहने से हम मसीह यीशु की समानता में ढलते जाते हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-10
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42



Wednesday, May 27, 2015

तूफान


   कहा जाता है कि वर्तमान इतोपिया देश में लाल सागर के तट पर स्थित प्राचीन देश अक्सुम के निवासियों ने खोज करी कि वर्षा ऋतु की तूफानी हवाओं के वेग को नाव में लगे पाल द्वारा वश में लेकर तेज़ी से नौकावाहन किया जा सकता है। इससे उन्होंने तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों से डर कर रहने की बजाए, उन तूफानी परिस्थितियों को अपने लाभ के लिए उपयोग करना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 भी हमारे लिए जीवन में तूफानों की भूमिका का एक उत्तम शब्दचित्र प्रस्तुत करता है। इस भजन में भजनकार वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हमारे जीवन में तूफानों को आने देता है और फिर उनमें हमें सुरक्षित निकाल कर ले आता है जिससे हम हर परिस्थिति में उस पर विश्वास रखना सीख सकें।

   परेशान परिस्थितियों में परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना बाइबल में अनेक बार दोहराया गया विषय है। इब्रानियों के नाम लिखी पत्री के 11वें अध्याय में लेखक उन अनेक परमेश्वर के विश्वासी जनों का उल्लेख करता है जिन्होंने अपनी समस्याओं तथा विकट परिस्थितियों को परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को व्यक्त करने का अवसर बनाया और परमेश्वर के अनुग्रह, प्रावाधान तथा छुटकारे का अनुभव किया (इब्रानियों 11:33-34)।

   जीवन में अनेकों तूफानों का आना तो अवश्यंभावी हैं; उन तूफानों के प्रति चाहे हमारी प्रथम प्रतिक्रीया उन से बचकर भाग निकल पाने के प्रयास की हो, फिर भी हम परमेश्वर से प्रार्थना में माँग सकते हैं कि वह हमें उन तूफानों में उस पर अपने विश्वास को बनाए रखना सिखाए और उन तूफानों का उपयोग उसकी निकटता में बढ़ने तथा उस से आशीषें प्राप्त करने के लिए करना सिखाए। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ तूफान से होकर निकलना मसीह यीशु के बिना आरामदायक जीवन जीने से बेहतर है।

इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए। आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया। - इब्रानियों 11:33-34

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 10:1-23


Tuesday, May 26, 2015

ऋणी


   कहा जाता है कि युवक रॉबर्ट रॉबिन्सन (1735-1790) को अपने मित्रों के साथ मिलकर लोगों को परेशान करने का शौक था। उसने 17 वर्ष की आयु में जॉर्ज व्हिटफील्ड द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 3:7 पर दिया गया सन्देश सुना और उसे अपने जीवन में मसीह यीशु में मिलने वाले उद्धार का बोध हुआ। प्रभु ने रॉबिन्सन के जीवन को परिवर्तित किया, और वह एक प्रचारक बन गया। उसने प्रभु की स्तुति तथा आराधना के अनेक गीत भी लिखे, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध हुआ, "ऐ खुदा, कमाल के चश्मे"।

   हाल ही में मैं रॉबर्ट रॉबिन्सन द्वारा लिखे गए उस गीत की अन्तिम कड़ी, "मैं प्रतिदिन उस महान अनुग्रह का ऋणी हूँ" पर मनन कर रही थी। इससे मुझे प्रेरित पौलुस द्वारा लिखे गए शब्द, "क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा" (2 कुरिन्थियों 5:14-15) स्मरण हो आए।

   हम हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम तथा अनुग्रह को किसी रीति से कमा नहीं सकते; उसे केवल एक उपहार के समान उससे धन्यवाद सहित स्वीकार ही कर सकते हैं। परन्तु क्योंकि परमेश्वर ने अपना यह प्रेम और अनुग्रह बहुतायत से हम पर सेंत-मेंत में उण्डेला है, इसलिए हम उससे प्रेम करे बिना और उसके लिए जीवन व्यतीत किए बिना रह भी कैसे सकते हैं? मुझे हमारे द्वारा परमेश्वर के प्रति प्रेम को शब्दों में व्यक्त करना नहीं आता, किंतु मैं निश्चित हूँ कि इस अभिव्यक्ति में उसके समीप रहना, उसकी सुननना, उसके वचन को जानना, कृतज्ञता के साथ उसकी सेवा करना तथा उसका आज्ञाकारी रहना सम्मिलित होंगे।

   हम मसीही विश्वासी अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के सदा ऋणी रहेंगे क्योंकि हमें बचाने के लिए उसने अपने प्राण बलिदान कर दिए। - ऐनी सेटास


जो परमेश्वर के अनुग्रह को जानते हैं, वे अपने जीवन से उसे प्रदर्शित भी करते हैं।

यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। - यूहन्ना 11:25

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:12-17
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं। 
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं। 
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41


Monday, May 25, 2015

सच्चा बलिदान


   एरिक एक अच्छा व्यक्ति था। वह एक पुलिस अफसर था और अपने कार्य को समाज की सेवा के रूप में देखता था; वह अपने कार्य के प्रति पूर्णतः समर्पित था, तथा उसे वह हर कीमत पर निभाने को तैयार था। उसके इस समर्पण का सूचक था पुलिस स्टेशन में एरिक की अलमारी पर लगा स्टिकर जिस पर परमेश्वर के वचन बाइबल में से "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना 15:13) लिखा हुआ था। ये शब्द एरिक के लिए केवल सुनाने-दिखाने भर के उत्कृष्ट आदर्श वाक्य मात्र नहीं थे; वे अपने कार्य के प्रति एरिक की वचनबद्धता का कथन थे, जिसे एरिक ने अपने कार्य के दौरान अपनी जान देकर निभाया और दिखाया। एरिक ने सच्चे बलिदान को वास्तविकता में दिखाया।

   प्रभु यीशु मसीह ने भी में अपने द्वारा यूहन्ना 15:13 में कहे गए उन शब्दों को कहने के कुछ ही घंटों में पूरा कर के अपने दावे को प्रमाणित किया। उस रात प्रभु यीशु ने अपने चेलों के साथ भोजन करते समय उनसे वह वार्तालाप किया जिसमें उन्होंने ये शब्द कहे जिन्हें एरिक ने अपनी अलमारी पर लगा रखा था, फिर प्रभु यीशु ने गतसमनी के बाग़ में जाकर प्रार्थना में परमेश्वर के साथ समय बिताया, फिर उन्हें विश्वासघात द्वारा बन्दी बनाकर रत भर झूठे मुकद्दमों में इधर से उधर घसीटा गया, यातनाएं दी गईं, अपमानित किया गया और फिर अगले दिन ठठ्ठा करती हुई भीड़ के समक्ष मारे जाने के लिए क्रूस पर चढ़ा दिया गया, जहाँ उन्होंने समस्त संसार के सभी जनों के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए।

   परमेश्वर का पुत्र होने के नाते प्रभु यीशु उस क्रूर दुख, ताड़ना, यातना से बच सकते थे; वे निष्पाप तथा निष्कलंक थे, उन्हें मरने की कोई आवश्यकता नहीं थी। किंतु मानव-जाति के प्रति उनका वह प्रेम, जो सच्चे बलिदान का ईंधन है, उन्हें कलवरी के क्रूस पर बलिदान होने के लिए लेकर गया; और उनके ईश्वरीय सामर्थ तथा गुण उन्हें तीसरे दिन मृतकों में से वापस ले आए। परिणामस्वरूप, आज जो भी उनके इस बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान को सच्चे साधारण विश्वास के साथ ग्रहण करता है, उनसे अपने पापों की क्षमा मांगता है, वह उस क्षमा तथा उद्धार को पाता है, परमेश्वर की सन्तान बनने का गौरव प्राप्त करता है तथा स्वर्ग में अपने परमेश्वर पिता के साथ रहना सुनिश्चित कर लेता है।

   क्या आपने आपके पापों के संति उस सच्चे बलिदान को देने वाले यीशु को साधारण विश्वास द्वारा अपना प्रभु स्वीकार कर लिया है? वह आपकी प्रतीक्षा में है। - बिल क्राउडर


केवल प्रभु यीशु ही, जो सिद्ध बलिदान बना, पाप के दोषियों को निर्दोष तथा सिद्ध घोषित कर सकता है।

किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:7-8

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-11
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 9:1-23



Sunday, May 24, 2015

स्वर्गीय देश


   हाई स्कूल के दिनों में मैं और मेरा निकटतम मित्र एक दोपहर को घोड़ों पर बैठकर घूमने निकले। हम आराम से जंगली फूलों से भरे मैदानों और पेड़ों के झुरमुटों में होकर इधर-उधर विचरण करते रहे। अपना घूमना समाप्त करने के पश्चात जब हम ने अपने घोड़ों को घर की ओर मोड़ा तो दोनों घोड़े सरपट घर की ओर भाग निकले। वे घोड़े पहचानते थे कि वापस पहुँचने पर उन्हें अच्छा भोजन और अच्छी मालिश मिलेगी, और वे इस सुख के लिए अधीर थे।

   हम मसीही विश्वासियों का वास्तविक घर स्वर्ग है (फिलिप्पियों 3:20)। लेकिन जब तक हम संसार में है, यहाँ की बातें और आवश्यकताएं हमें विभिन्न प्रकार से सांसारिकता के साथ जोड़े रखती हैं। हम परमेश्वर की आशीषों, जैसे विवाह, परिवार, बच्चे, नाती-पोते, भ्रमण, जीविका, मित्र-रिश्तेदार आदि का भी आनन्द लेते हैं। लेकिन साथ ही परमेश्वर का वचन बाइबल हमें प्रोत्साहित करती है कि हम सांसारिक नहीं वरन स्वर्गीय वस्तुओं पर अपना ध्यान लगाएं (कुलुस्सियों 3:1-2)। उन स्वर्गीय बातों में स्वर्ग के अन्देखे लाभ भी सम्मिलित हैं, जैसे कि, परमेश्वर की सदा बनी रहने वाली उपस्थिति (प्रकाशितवाक्य 22:3-5); सदा काल का विश्राम (इब्रानियों 4:9); और एक अजर अविनाशी मीरास (1 पतरस 1:4)।

   अभी हाल ही में मैंने इस विषय में पढ़ा कि "मसीही विश्वासी स्वर्गीय मीरास की लालसा रखते हैं; जितना दृढ़ उनका मसीही विश्वास होगा, उतनी ही तीव्र उनकी यह लालसा भी होगी"। बाइबल के पुराने नियम खण्ड के अनेक परमेश्वर के विश्वासी जनों ने, जिनका उल्लेख इब्रानियों में पाया जाता है, अपने दृढ़ विश्वास के कारण उन स्वर्गीय आशीषों को पाने से पहले ही उनके आनन्द को अनुभव कर लिया (इब्रानियों 11:13)। उन आशीषों में से एक है स्वर्ग। यदि हमारा विश्वास भी दृढ़ है तो परमेश्वर हमें भी स्वर्गीय देश की लालसा देगा, और हम सांसारिकता पर अपनी पकड़ ढीले करने पाएंगे। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीही विश्वासी के लिए घर का अर्थ है स्वर्ग।

पर हमारा स्‍वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं। - फिलिप्पियों 3:20

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। 
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था। 
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू की नाईं, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। 
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। 
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। 
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 22-24
  • यूहन्ना 8:28-59


Saturday, May 23, 2015

अच्छा चरवाहा


   बसन्त ऋतु के आगमन पर मेरे प्रदेश इडाहो के चरवाहे अपनी भेड़ों को नीचे के मैदानी इलाकों से निकाल कर ऊपर पहाड़ों पर ले जाते हैं। इस प्रक्रिया में हज़ारों भेड़ें ग्रीष्मकालीन पहाड़ी चरागाहों में ले जाई जाती हैं। पिछले सप्ताह मैंने तथा मेरी पत्नि ने स्वच्छ जल के एक पहाड़ी नाले के निकट हरी चारागाह में बैठे हुए भेड़ों के एक झुँड को देखा, जिसे देखकर हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 23 का स्मरण हो आया।

   लेकिन उन भेड़ों का चरवाहा कहँ था? हमें लगा कि वे भेड़ें अकेली छोड़ दी गई हैं क्योंकि उनका चरवाहा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था! तभी उन भेड़ों में से कुछ उठकर एक ओर बढ़ने लगीं; जिस ओर वे जा रही थीं वहाँ आगे एक खाई थी। उन भेड़ों के उस ओर बढ़ते ही हमें ऊपर की ओर से एक तेज़ सीटी की आवाज़ सुनाई दी। जब हमने ऊपर की ओर दृष्टि करी तो उन भेड़ों का चरवाहा वहाँ खड़ा दिखाई दिया जो उस ऊँचाई से उन भेड़ों पर नज़र रखे हुए था, और उसके साथ भेड़ों की रखवाली करने वाले कुत्ते भी थे। उस सीटी की आवाज़ सुनते ही वे कुत्ते तुरन्त नीचे उन भेड़ों की ओर भागे और झुँड से अलग होकर चल निकलने वाली भेड़ों को हाँक कर वापस झुँड में ले आए, जो उनकी सुरक्षा का स्थान था।

   ठीक इसी प्रकार हमारा प्रभु परमेश्वर भी हमपर लगातार अपनी दृष्टि बनाए रखता है। चाहे वह हमें दिखाई ना भी दे, हम सदा उसकी नज़रों में बने रहते हैं। वह हमें हमारे नाम से जानता है, हमारे बारे में, हमारी आवश्यकताओं के बारे में सब कुछ जानता है। क्योंकि हम उसकी चारागाह की भेड़ें हैं, इसलिए हमारे प्रभु परमेश्वर ने वायदा किया है कि वह अपनी भेड़ों को एकत्रित करेगा और उन्हें अच्छी चारागाहों में लेकर जाएगा, उनकी देखभाल करेगा (यहेजकेल 34:11-16)।

   आप उस अच्छे चरवाहे, प्रभु यीशु, की देखभाल में आश्वस्त तथा सुरक्षित रह सकते हैं। - डेविड रोपर


वह मेमना जो हमारे उद्धार के लिए बलिदान हुआ, वही हमारी देख-रेख करने के लिए हमारा चरवाहे के रूप में जीवित है।

प्रभु यीशु ने कहा: "अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।" - यूहन्ना 10:11 

बाइबल पाठ: यहेजकेल 34:11-16
Ezekiel 34:11 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है, देखो, मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों की सुधि लूंगा, और उन्हें ढूंढ़ूंगा। 
Ezekiel 34:12 जैसे चरवाहा अपनी भेड़-बकरियों में से भटकी हुई को फिर से अपने झुण्ड में बटोरता है, वैसे ही मैं भी अपनी भेड़-बकरियों को बटोरूंगा; मैं उन्हे उन सब स्थानों से निकाल ले आऊंगा, जहां जहां वे बादल और घोर अन्धकार के दिन तितर-बितर हो गई हों। 
Ezekiel 34:13 और मैं उन्हें देश देश के लोगों में से निकालूंगा, और देश देश से इकट्ठा करूंगा, और उन्हीं के निज भूमि में ले आऊंगा; और इस्राएल के पहाड़ों पर ओर नालों में और उस देश के सब बसे हुए स्थानों में चराऊंगा। 
Ezekiel 34:14 मैं उन्हें अच्छी चराई में चराऊंगा, और इस्राएल के ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर उन को चराई मिलेगी; वहां वे अच्छी हरियाली में बैठा करेंगी, और इस्राएल के पहाड़ों पर उत्तम से उत्तम चराई चरेंगी। 
Ezekiel 34:15 मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों का चरवाहा हूंगा, और मैं आप ही उन्हें बैठाऊंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है। 
Ezekiel 34:16 मैं खोई हुई को ढूंढ़ूंगा, और निकाली हुई को फेर लाऊंगा, और घायल के घाव बान्धूंगा, और बीमार को बलवान करूंगा, और जो मोटी और बलवन्त हैं उन्हें मैं नाश करूंगा; मैं उनकी चरवाही न्याय से करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 19-21
  • यूहन्ना 8:1-27


Friday, May 22, 2015

आवश्यकताएं


   भोजन मेरे लिए जीवन की आवश्यकता से बढ़कर जीवन का एक अति आनन्दायक भाग है। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं अच्छे से बनाए गए भोजन का आनन्द लेने बैठता हूँ, विशेषकर तब जब मैं भूखा होता हूँ। मेरे विचार से प्रभु यीशु के चेले भी, जब वे लौट कर उस कूएं पर आए जहाँ प्रभु यीशु उस सामरी स्त्री से वार्तालाप कर रहा था, भोजन के लिए भूखे थे। जब उन्होंने प्रभु से आग्रह किया कि वह भोजन ग्रहण कर ले, तो प्रभु ने उनसे कहा के उसके पास ऐसा भोजन है जिसके बारे में वे नहीं जानते; यह उत्तर सुनकर उन चेलों को लगा कि किसी अन्य ने आकर प्रभु को भोजन दिया है (यूहन्ना 4:31-33)।

   मुझे ऐसा भी लगता है कि वे चेले भोजन के बारे में सोचने में इतने व्यस्त थे कि उन्हें उसके आगे कुछ सूझ ही नहीं पड़ रहा था। जो वहाँ उस कूएं पर घटित हो रहा था, वे उस बात के महत्व से बिलकुल अनभिज्ञ थे। प्रभु यीशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात थी, "...मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं" (यूहन्ना 4:34); और जब चेले लौट कर उस कुएं पर आए, उस समय प्रभु का पूरा ध्यान उस सामरी स्त्री की आत्मिक आवश्यकताओं पर केंद्रित था, क्योंकि उस स्त्री की वह आत्मिक आवश्यकता केवल प्रभु ही पूरी कर सकता था।

   तत्कालीन आवश्यकताओं में उलझ कर अन्य बातों को नज़रन्दाज़ कर देना सरल होता है; लेकिन हमारा उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर हमें अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं से आगे निकल कर उन लोगों की आवश्यकताओं के बारे में भी सोचने को कहता है जो अपने जीवन की गहरी आत्मिक ज़रूरतों के उत्तर खोज रहे हैं, उत्तर जो केवल प्रभु यीशु के पास हैं।

   इसलिए प्रभु यीशु के साथ मिलकर चलें, और उसकी सामर्थ तथा मार्गदर्शन से दूसरों तक उस आत्मिक भोजन के सन्देश को पहुँचाएं जिसकी उन्हें आवश्यकता है; ऐसी आवश्यकता जो केवल प्रभु यीशु में ही पूरी हो सकती है। - जो स्टोवैल


अपने आस-पास के लोगों की आवश्यकताओं के निवारण का माध्यम बनने के लिए लालायित रहें।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:27-38
John 4:27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचंभा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है।
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी।
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।
John 4:31 इतने में उसके चेले यीशु से यह बिनती करने लगे, कि हे रब्बी, कुछ खा ले।
John 4:32 परन्तु उसने उन से कहा, मेरे पास खाने के लिये ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।
John 4:33 तब चेलों ने आपस में कहा, क्या कोई उसके लिये कुछ खाने को लाया है?
John 4:34 यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं।
John 4:35 क्या तुम नहीं कहते, कि कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं? देखो, मैं तुम से कहता हूं, अपनी आंखे उठा कर खेतों पर दृष्टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं।
John 4:36 और काटने वाला मजदूरी पाता, और अनन्त जीवन के लिये फल बटोरता है; ताकि बोने वाला और काटने वाला दोनों मिलकर आनन्द करें।
John 4:37 क्योंकि इस पर यह कहावत ठीक बैठती है कि बोने वाला और है और काटने वाला और।
John 4:38 मैं ने तुम्हें वह खेत काटने के लिये भेजा, जिस में तुम ने परिश्रम नहीं किया: औरों ने परिश्रम किया और तुम उन के परिश्रम के फल में भागी हुए।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53


Thursday, May 21, 2015

परित्याग


   बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं अपने पति के साथ वॉशिंगटन स्थित स्मिथ्सोनियन वायु तथा अन्तरिक्ष संग्रहालय देखने गई हुई थी। उस संग्रहालय में घूमते हुए हमने एक स्थान पर छोड़ा हुआ छोटे बच्चों को ले चलने वाला स्ट्रोलर देखा जिसके आस-पास कोई नहीं था। हमारा पहला अन्दाज़ा था कि उसके वज़नी होने के कारण अभिभावकों ने स्ट्रोलर को वहाँ छोड़ दिया और बच्चे को अपने साथ उठा कर घूम रहे थे। लेकिन उस स्ट्रोलर के निकट आने पर हमने देखा कि उसमें एक बच्चा सो रहा था। तुरंत ही हमारे अन्दर प्रश्न उठने लगे - उसके माता-पिता कहाँ हैं? उस बच्चे के साथ कोई क्यों नहीं है? क्या बच्चे का कोई भाई अथवा बहन या फिर उसकी देखभाल करने को नियुक्त कोई भी जन नहीं है? हम काफी देर तक उस बच्चे के स्ट्रोलर के पास घूमते रहे लेकिन कोई उसे अपनाने नहीं आया; अन्ततः हमने संग्रहालय के एक कर्मचारी को बुलाकर उसे परिस्थिति से अवगत कराया। उसके बारे में जो अन्तिम बात हम जानते हैं वह है कि उस बच्चे और स्ट्रोलर को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा था।

   उस अनुभव ने मुझे त्यागे जाने के बारे में सोचने पर विवश किया। यह जानना कि कोई आपके साथ नहीं है, आपके लिए नहीं है, आप बिलकुल अकेले हैं, किसी को आपकी ज़रा भी परवाह या चिंता नहीं है एक बहुत ही अभिभूत कर देने वाला कष्टदायक अनुभव है। किंतु चाहे लोग हमारा परित्याग कर दें, प्रत्येक मसीही विश्वासी को यह आश्वासन है कि परमेश्वर उसे कभी नहीं छोड़ेगा (व्यवस्थाविवरण 31:8); उसका प्रेम और उसकी उपस्थिति हमारे साथ सदा बनी रहेगी। हमारे तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)।

   प्रभु परमेश्वर अपने वायदों में कभी नहीं चूकता। चाहे औरों ने हमें किसी भी कारण से त्याग दिया हो, हम फिर भी इस बात में आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर के प्रेम से हमें कोई परिस्थिति, कोई व्यक्ति, कोई बात अलग नहीं कर सकती (रोमियों 8:35-39); वह कभी भी हमारा परित्याग नहीं करेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर की साथ बनी उपस्थिति का आश्वासन ही हमारी शांति का स्त्रोत है।

और तेरे आगे आगे चलने वाला यहोवा है; वह तेरे संग रहेगा, और न तो तुझे धोखा देगा और न छोड़ देगा; इसलिये मत डर और तेरा मन कच्चा न हो। - व्यवस्थाविवरण 31:8

बाइबल पाठ: यशायाह 49:13-16
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है। 
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता। 
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 13-15
  • यूहन्ना 7:1-27


Wednesday, May 20, 2015

आतिथ्य


   सन 1987 में मुझे कैलिफोर्निया के लौंग बीच क्षेत्र में सेवकाई के लिए स्थानान्तरित किया गया और हम सपरिवार वहाँ रहने के लिए पहुँचे। हमें हवाई अड्डे से हमारे नए घर तक ले जाने के लिए मेरी सहायक गाड़ी लेकर आई; हम जब हवाई अड्डे से निकलकर मुख्य मार्ग पर पहुँचे तो हमारे सामने वाली कार के पीछे लिखा दिखाई दिया: "कैलिफोर्निया में पधारने के लिए धन्यवाद...अब अपने घर वापस लौट जाईए!" इस वाक्य का दृष्टिकोण रखना किसी भी रीति से एक अच्छे आतिथ्य का दृष्टिकोण नहीं कहा जा सकता था।

   मैं सोचता हूँ कि कहीं अपने जीवनों से कभी हम भी जाने-अनजाने अपने आस-पास के लोगों को ऐसे ही नकारात्मक संकेत तो नहीं देते हैं? चाहे हम चर्च में हों या पड़ौसियों के साथ हों या किसी सामाजिक आयोजन में एकत्रित हुए हों, ऐसा हो सकता है कि हम लोगों को अपने हाव-भाव तथा बर्ताव से यह आभास दिलाएं कि उनका हमारे मध्य स्वागत नहीं है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, रोमियों 2:13 में प्रेरित पौलुस ने अपने पाठकों को यह निर्देश दिए कि पहुनाई करने में लगे रहें। बाइबल में इब्रानियों के नाम लिखी गई पत्री तो इससे भी बढ़कर कहती है कि, "पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है" (इब्रानियों 13:2)। जो लोग हमारे संपर्क में आते हैं उनके साथ अनुग्रहपूर्ण कृपा का बर्ताव करके हम मसीही विश्वासी अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह का संपूर्ण संसार के उद्धार के लिए दिया गया निमंत्रण दोहराते हैं, जहाँ प्रभु ने कहा, "... जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले" (प्रकाशितवाक्य 22:17)।

   किसी को प्रेम पूर्वक आतिथ्य दिखाना उसके लिए परमेश्वर से मिलने वाले उद्धार एवं अनन्तकाल की आशीष का द्वार खोलने का माध्यम हो सकता है। इसलिए पहुनाई करने को कभी नज़रन्दाज़ ना करें। - बिल क्राऊडर


ऐसे जीएं कि जब लोग आपको जानें तो वे आपके प्रभु यीशु के बारे में जानने के लिए भी उत्सुक्त हो जाएं।

पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो। - रोमियों 2:13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:16-21
Revelation 22:16 मुझ यीशु ने अपने स्वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि तुम्हारे आगे कलीसियाओं के विषय में इन बातों की गवाही दे: मैं दाऊद का मूल, और वंश, और भोर का चमकता हुआ तारा हूं। 
Revelation 22:17 और आत्मा, और दुल्हिन दोनों कहती हैं, आ; और सुनने वाला भी कहे, कि आ; और जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले। 
Revelation 22:18 मैं हर एक को जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखीं हैं, उस पर बढ़ाएगा। 
Revelation 22:19 और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा। 
Revelation 22:20 जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ। 
Revelation 22:21 प्रभु यीशु का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 6:45-71


Tuesday, May 19, 2015

लगातार


   परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड की पाँचवी पुस्तक का शीर्षक है प्रेरितों के कार्य, और इस पुस्तक में प्रभु यीशु के अनुयायियों के नेतृत्व में आरंभ हुई सर्वप्रथम मसीही विश्वासी मण्डली के कार्यों का विवरण दिया गया है। कुछ बाइबल-विद्वानों का मानना है कि इस पुस्तक का अधिक उचित नाम पवित्र आत्मा के कार्य हो सकता है, क्योंकि परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने ही उन अनुयायियों को प्रत्येक कठिनाई और परीक्षा के समय में सामर्थ प्रदान करा।

   प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गारोहण से ठीक पहले अपने शिष्यों को निर्देश दिया, "परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे" (प्रेरितों 1:8)। प्रभु यीशु के इन शब्दों के साथ, पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य का एक अध्याय समाप्त और एक नया अध्याय आरंभ हुआ; आज हम मसीही विश्वासी तब से लेकर आज तक लगातार चल रहे इस नए अध्याय के भाग हैं।

   प्रेरितों के कार्य नामक इस पुस्तक में पतरस, यूहन्ना, बरनबास, पौलुस, दोर्कस, लिडिया और अन्य अनेक प्रभु यीशु के अनुयायियों के विश्वासपूर्ण कार्यों एवं सेवकाई तथा मसीही विश्वासियों की मण्डली के आरंभिक दिनों में हुई बातों का वर्णन दिया गया है। ये सामान्य और साधारण से लोग परमेश्वर के पवित्र आत्मा से मिलने वाली सामर्थ के द्वारा परमेश्वर के प्रेम और सुसमाचार के प्रबल गवाह बने और उन्होंने परमेश्वर के वचन को अनेक कठिनाईयाँ तथा जोखिम सहते हुए संसार के अनेक स्थानों तक पहुँचाया।

   उनकी यह कहानी आज भी हम में होकर लगातार लिखी जा रही है। हम मसीही विश्वासी जब परमेश्वर पर विश्वास रखते हुए, प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को संसार के सभी लोगों तक ले कर जाते हैं तो हमारे कार्यों को लेकर, मानव जाति के उद्धार की कहानी में परमेश्वर नए पृष्ठ लगातार जोड़ता रहता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


लोग विश्वास की सच्ची कहानियों को तब ही स्वीकार करते हैं जब वे उन्हें प्रत्यक्ष देखते हैं।

और उसने उन से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। - मरकुस 16:15

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-11
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्भ में किया और करता और सिखाता रहा। 
Acts 1:2 उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। 
Acts 1:3 और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। 
Acts 1:4 ओर उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। 
Acts 1:5 क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे। 
Acts 1:6 सो उन्हों ने इकट्ठे हो कर उस से पूछा, कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा? 
Acts 1:7 उसने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं। 
Acts 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। 
Acts 1:9 यह कहकर वह उन के देखते देखते ऊपर उठा लिया गया; और बादल ने उसे उन की आंखों से छिपा लिया। 
Acts 1:10 और उसके जाते समय जब वे आकाश की ओर ताक रहे थे, तो देखो, दो पुरूष श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए उन के पास आ खड़े हुए। 
Acts 1:11 और कहने लगे; हे गलीली पुरूषों, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 6:22-44


Monday, May 18, 2015

निश्चित उद्धार


   कहा जाता है कि इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया एक चर्च उपासना के समय अत्यन्त भाव-विभोर हो गईं। बाद में उन्होंने अपने पास्टर से पूछा, "क्या कोई इस जीवन में ही आने वाले अनन्त जीवन की सुरक्षा के विषय में पूर्ण्तयः निश्चित हो सकता है?" उस पास्टर के पास महारानी के लिए कोई उत्तर नहीं था। लेकिन एक प्रचारक, जौन टाउनसेण्ड ने महारानी के इस प्रश्न के बारे में सुना, और इस बारे में बहुत प्रार्थना करने के बाद उसने महारानी को एक पत्र भेजा, जिसमें लिखा था, "काँपते हाथों किंतु प्रेम से भरे हृदय के साथ, और क्योंकि मैं यह जानता हूँ कि हम प्रभु यीशु द्वारा हमारे लिए बनाए हुए उस घर में अनन्त काल के लिए सुरक्षित हो सकते हैं, मैं महारानी से आग्रह करता हूँ कि वे परमेश्वर के वचन बाइबल से यूहन्ना 3:16 और रोमियों 10:9-10 पढ़ें।"

   दो सप्ताह पश्चात उस प्रचारक जौन टाउनसेण्ड को महारानी से उत्तर प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने लिखा था, "...परमेश्वर के वचन के जो खण्ड बताए वे मैंने प्रार्थनापूर्वक ध्यान से पढ़े हैं। मैं मसीह के द्वारा मेरे लिए पूर्ण किए गए कार्य में विश्वास करती हूँ और विश्वास करती हूँ कि परमेश्वर के अनुग्रह से उस स्थान में आपको देखने पाऊँगी जिसके विषय में प्रभु यीशु ने कहा कि ’मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूँ’। - विक्टोरिया ग्युएल्फ"

   वह प्रचारक जौन टाउनसेण्ड इस बात के लिए निश्चित था कि हम इस जीवन में अनन्त जीवन की सुरक्षा के विषय में निश्चित हो सकते हैं (पद 9) और वह इस सुरक्षा को लेकर दूसरों के बारे में भी चिंता करता था। आज आप भी इस पर विचार कीजिए कि यूहन्ना 3:16 और रोमियों 10:9-10 आपके तथा आपके अनन्त जीवन के लिए क्या महत्व रखते हैं। परमेश्वर आपको यह आश्वासन देना चाहता है कि आपके पाप क्षमा किए गए हैं और मृत्यु के बाद आप भी उसके साथ अनन्त काल तक रह सकते हैं। - ब्रेंट हैकेट, निर्देशक आर.बी.सी. कैनडा


जो जीवन परमेश्वर के अपरिवर्तनीय अनुग्रह में रोपे गए हैं वे वहाँ से कभी उखाड़े नहीं जा सकते।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 10:8-15
Romans 10:8 परन्तु वह क्या कहती है? यह, कि वचन तेरे निकट है, तेरे मुंह में और तेरे मन में है; यह वही विश्वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं। 
Romans 10:9 कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। 
Romans 10:10 क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। 
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें? 
Romans 10:15 और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो क्योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 6:1-21


Sunday, May 17, 2015

सामर्थी भुजा


   मेरी सहेली जोएन बड़े संगीत समारोहों में प्यानों-वादक बनकर स्थान स्थान की यात्रा करना चाहती थी। इस उद्देश्य से उसने कॉलेज में प्यानो बजाना सीखने को अपना मुख्य विषय बनाया; लेकिन सीखने के अभ्यास में उसके दाहिनी भुजा में दर्द आरंभ हो गया जिससे उसका दाहिनी भुजा इतनी कमज़ोर हो गई कि वह प्यानो उस प्रकार से नहीं बजा पाती थी जैसा उसे अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए बजाने की आवश्यकता थी। अन्ततः कॉलेज से जोएन संगीत इतिहास तथा साहित्य में स्नातक उपाधि लेकर निकली।

   जोएन प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में जानती और मानती थी किंतु अपने इस अनुभव के कारण वह वर्षों तक प्रभु के प्रति उदासीन बनी रही। फिर उसके जीवन में कुछ और कठिन समस्याएं आईं जिनमें होकर उसने परमेश्वर की बुलाहट को समझा और जोएन परमेश्वर के पास लौट कर आ गई। धीरे धीरे उसकी भुजा में बल भी वापस आना आरंभ हो गया, उसका प्यानो बजाना भी अच्छा हो गया और संगीत समारोहों में प्यानो बजाने के लिए यात्रा करने का उसका स्वप्न भी पूरा हुआ। आज वह कहती है कि, "अब मैं अपनी इच्छा और महिमा के लिए नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा और महिमा के लिए प्यानो बजाती हूँ। परमेश्वर ने अपना हाथ बढ़ाकर मुझे छूआ, मेरे आत्मिक जीवन को सुदृढ़ किया और मेरी बाँह में बल दिया जिससे मैं उसके द्वारा दिए गए इस वरदान को उस की ही महिमा के लिए उपयोग कर सकूँ।"

   परमेश्वर ने मूसा से वायदा किया कि उसकी बढ़ी हुई भुजा इस्त्राएलियों को मिस्त्र से निकाल लाएगी (निर्गमन 6:6)। परमेश्वर ने अपने वायदे को पूरा किया यद्यपि वे इस्त्राएली बार बार उसके विरुद्ध बलवा करते और उस पर अविश्वास करते थे (निर्गमन 14:30-31)। परमेश्वर की सामर्थी भुजा आज हमारे हित के लिए भी बढ़ी हुई रहती है। हमारी परिस्थिति का चाहे जो भी परिणाम हो, हम इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि उसके द्वारा अपने बच्चों के लिए बनाई गई प्रत्येक योजना पूरी होगी और सब बातों से उसके बच्चों की भलाई ही होगी। हम परमेश्वर की सामर्थी भुजा पर विश्वास बनाए रख सकते हैं। ऐनी सेटास


जब परमेश्वर की सामर्थ आपको पीछे से और उसकी बाहें आपको नीचे से सहारा दें तो सामने से जो भी आए, आप उसका सामना निसंकोच कर सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: निर्गमन 6:1-8
Exodus 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन से क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
Exodus 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ। 
Exodus 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं। 
Exodus 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है। 
Exodus 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा, 
Exodus 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया। 
Exodus 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 5:25-47



Saturday, May 16, 2015

मेल-मिलाप


   मैं अपने दामाद के साथ एक खेल प्रतियोगिता देखने गया हुआ था; हम वहाँ उस खेल को भी और वहाँ बैठे लोगों को भी देखने के मज़े ले रहे थे। एक घटना के दौरान उपस्थित लोगों में से एक ने, मानव व्यवहार के अच्छे और बुरे दोनों पक्षों को दिखाया। वह बाहर से आया और अपने बैठने के स्थान का अता-पता भूल गया। अपने स्थान को ढूँढ़ने के लिए वह खड़ा होकर इधर-उधर देखने लगा, किंतु उसके हमारे सामने खड़े होने से हमारा तथा हमारे पीछे बैठे एक अन्य व्यक्ति का दृश्य बाधित हो गया। हमारे पीछे वाले व्यक्ति ने उससे कहा, "कृप्या आगे बढ़िए; आप हमें खेल देखने नहीं दे रहे हैं।" अपना स्थान ढूँढ़ रहे उस व्यक्ति ने व्यंगात्मक रीति से उत्तर दिया, "बुरा है" और वहीं खड़ा देखता रहा; जब पुनः उससे यही आग्रह किया गया तो उसने खिसिया कर और भी तीखेपन से उत्तर दिया। कुछ देर पश्चात वह व्यक्ति आगे बढ़ गया। लेकिन थोड़ी देर बाद और भी आश्चरय की बात हुई; वह व्यक्ति लौट कर वापस आया और जिस व्यक्ति से वह खिसिया कर बोला था, उसे संबोधित करते हुए कहा, "श्रीमान, मुझे माफ करें; मैं अपना स्थान पहचान नहीं पाने के कारण परेशान था।" उन दोनों ने हाथ मिलाए और सारी घटना एक अच्छे वातावरण में समाप्त हो गई।

   उनके इस वार्तालाप ने मुझे सोचने पर बाध्य किया; जीवन के सफर में अनेक परिस्थितियाँ हमें खिसिया सकती हैं और हमसे हमारे मसीही विश्वास के विरुद्ध व्यवहार करवा सकती हैं। यदि ऐसा हो तो परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह हमें हिम्मत दे कि हम जाकर उन से क्षमा याचना कर सकें जिन्हें हमने अपने व्यवहार से दुखी किया है। हमारे प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि हमारी आराधना परमेश्वर को तब ही स्वीकार होगी (मत्ती 5:23-24)।

   जब हम दूसरों के साथ मेल-मिलाप बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बनाए रखते हैं, हम परमेश्वर का भी आदर करते हैं। जब हम मनुष्यों के साथ मेल-मिलाप के संग रहेंगे तो परमेश्वर पिता के संग भी सहभागिता का आनन्द ले सकेंगे। - डेव ब्रैनन


पाप का अंगीकार ही वह भूमि है जिसमें क्षमा फलती-फूलती है।

यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। - 1 यूहन्ना 4:20-21

बाइबल पाठ: मत्ती 5:21-26
Matthew 5:21 तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि हत्या न करना, और जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दण्‍ड के योग्य होगा। 
Matthew 5:22 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्‍ड के योग्य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्‍ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे “अरे मूर्ख” वह नरक की आग के दण्‍ड के योग्य होगा। 
Matthew 5:23 इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे। 
Matthew 5:24 और जा कर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर; तब आकर अपनी भेंट चढ़ा। 
Matthew 5:25 जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग ही में हैं, उस से झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे, और हाकिम तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्‍दीगृह में डाल दिया जाए। 
Matthew 5:26 मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक तू कौड़ी कौड़ी भर न दे तब तक वहां से छूटने न पाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 24-25
  • यूहन्ना 5:1-24


Friday, May 15, 2015

सतर्क


   एक व्यक्ति के कार्य का प्रभाव पूरे समूह पर पड़ सकता है; पत्रकार सेबैस्टियन जंगर ने इस बात की सच्चाई को पहचाना जब वह सैनिकों की एक पलटन के साथ जा रहा था। उस पलटन के एक सैनिक के जूतों के फीते ढीले थे और धरती पर घसिट रहे थे। यह देखकर एक अन्य सैनिक ने उस ढीले फीते वाले सैनिक को टोका और फीतों को ठीक करने के लिए कहा। टोकने वाले सैनिक का टोकने के पीछे उद्देश्य था कि उस ढीले फीते वाले एक सैनिक की लापरवाही सारी पलटन को खतरे में डाल सकती थी क्योंकि उन ढीले फीतों के कारण वह ठोकर खाकर कभी भी गिर सकता था, संभव है कि किसी नाज़ुक स्थिति के समय यह घटना हो जाती और सभी जोखिम में पड़ जाते। पत्रकार जंगर ने एहसास किया कि जो एक के साथ होता है वही सभी के साथ हो सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी एक घटना दी गई है जहाँ एक व्यक्ति के पाप ने सभी को परेशानी में डाल दिया; यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि पाप कभी व्यक्तिगत नहीं होता, उसके दुषप्रभाव आस-पास के सभी लोगों पर आते हैं। इस्त्राएलियों के कनान देश में प्रवेश करने के बाद, पहले ही युद्ध में परमेश्वर ने उन्हें यरीहो पर एक महान विजय दिलवायी थी। उस विजय से पहले परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के अगुवे, यहोशु के द्वारा उन इस्त्राएलियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि विजयी होने के पश्चात यरीहो नगर और उसकी लूट के साथ क्या करना है; परमेश्वर ने साफ-साफ कहा था कि वे अर्पण की हुई वस्तुओं से अपने आप को पृथक रखें और सारा सोना तथा चांदी भण्डार में लाकर रखी जाए (यहोशू 6:18-19)। लेकिन इस्त्राएली अनाज्ञाकारिता के दोषी ठहरे (यहोशू 7:1); विशेष बात यह है कि सभी इस्त्राएलियों पर आया यह दोष केवल व्यक्ति - आकान के कारण था। आकान के लालच और पाप ने सभी को प्रभावित किया।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि हम एक दूसरे के लिए ज़िम्मेदार और एक दूसरे के प्रति जवाबदेह भी हैं तथा हमारे व्यक्तिगत कार्य मसीह यीशु की संपूर्ण देह अर्थात उसकी मण्डली तथा परमेश्वर के नाम पर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए हमें अपनी बातों एवं कार्यों में सतर्क रहना है जिससे हमारे जीवन हमारे प्रभु और परमेश्वर के लिए निरादर का नहीं वरन आदर का कारण ठहरें। - मार्विन विलियम्स


व्यक्तिगत पापों का प्रभाव अन्ततः सार्वजनिक होगा।

और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा। - गिनती 32:23

बाइबल पाठ: यहोशू 7:1-12
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया। 
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो वा तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं। 
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए, 
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया। 
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली। 
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते। 
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है! 
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा? 
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है? 
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है। 
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23
  • यूहन्ना 4:31-54


Thursday, May 14, 2015

महत्व


   मेरी परवरिश एक छोटे से कस्बे में हुई; वहाँ ना कोई प्रसिद्ध लोग थे, ना ही मार्गों पर कोई भीड़-भाड़ थी और ना ही करने के लिए कुछ अधिक काम थे। लेकिन सांसारिकता के बुरे प्रभावों से दूर, मैं अपनी शान्त, सरल, तथा सीधी-सादी परवरिश के लिए सदा धन्यवादी रही हूँ। एक संध्या जब मैं और मेरे पति एक व्यावसायिक समारोह में रात्रि के भोजन पर आमंत्रित थे तो वहाँ उपस्थित एक स्त्री ने मुझ से पूछा कि मैं किस स्थान से हूँ; जब मैंने उसे अपने उस छोटे से कस्बे का नाम बताया तो वह तुरंत बोली, "क्या उस छोटे से स्थान को स्वीकारने में तुम्हें कोई संकोच नहीं होता?" मुझे समझ नहीं आया कि वह मज़ाक कर रही है या गंभीरता से यह कह रही है, किंतु तुरंत ही मेरा उत्तर था, "नहीं!" चाहे मेरा वह कस्बा आधुनिकता के मामले में छोटा समझा जाता हो किंतु जीवन के लिए महत्वपूर्ण बातों में वह कदापि छोटा नहीं था। मेरा परिवार एक ऐसे चर्च समूह का अंग था जहाँ अभिभावक अपने बच्चों की परवरिश परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों 6:4 में दिए गए निर्देशानुसार करते थे।

   हमारे प्रभु यीशु की परवरिश भी एक छोटे से स्थान नासरत में हुई थी। जब प्रभु यीशु की सेवकाई आरंभ हुई तो उसके विषय में नतनएल नामक एक व्यक्ति ने कहा, "...क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?..." (यूहन्ना 1:46)। प्रभु यीशु ने प्रमाणित कर दिया कि नतनएल के प्रश्न का उत्तर था "हाँ"; यद्यपि प्रभु यीशु की परवरिश एक छोटे से महत्वहीन स्थान नासरत में हुई वे संसार भर के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए और आज भी हैं।

   अनुभव ने मुझे सिखाया है और बाइबल भी इसको प्रमाणित करती है कि महत्व इस बात का नहीं है कि आप की परवरिश कहाँ पर हुई है, वरन इस बात का है कि वह परवरिश कैसी हुई है! कई बार लोग हमें बड़े स्थानों से आने वाले महत्वपूर्ण लोगों के अपेक्षा छोटा मानने लगते हैं, और यही हमें जताने का भी प्रयास करते हैं। किंतु सदा स्मरण रखे कि हम परमेश्वर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं; इतने कि हमें अपने पास ले आने के लिए उसने अपने एकलौते पुत्र को बलिदान होने के लिए भेज दिया, ताकि हम अनन्त काल तक उसके साथ रहें। जब हम परमेश्वर के वचन के अनुसार अपने जीवन को चलाते हैं तो वह हमें आत्मा में बलवन्त और बुद्धिमान भी बना देता है, किसी के सामने छोटा नहीं रहने देता और अन्ततः अपने स्वर्गीय राज्य में आदर के साथ अनन्तकाल के लिए हमारा स्वागत करता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हम कहाँ से आए हैं से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम क्या बन सके हैं और सबसे महत्वपूर्ण है कि अन्ततः हम कहाँ जाएंगे।

और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसियों 6:4

बाइबल पाठ: लूका 2:41-52
Luke 2:41 उसके माता-पिता प्रति वर्ष फसह के पर्व में यरूशलेम को जाया करते थे। 
Luke 2:42 जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए। 
Luke 2:43 और जब वे उन दिनों को पूरा कर के लौटने लगे, तो वह लड़का यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे। 
Luke 2:44 वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्बियों और जान-पहचानों में ढूंढ़ने लगे। 
Luke 2:45 पर जब नहीं मिला, तो ढूंढ़ते-ढूंढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए। 
Luke 2:46 और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया। 
Luke 2:47 और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे। 
Luke 2:48 तब वे उसे देखकर चकित हुए और उस की माता ने उस से कहा; हे पुत्र, तू ने हम से क्यों ऐसा व्यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूंढ़ते थे। 
Luke 2:49 उसने उन से कहा; तुम मुझे क्यों ढूंढ़ते थे? क्या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है? 
Luke 2:50 परन्तु जो बात उसने उन से कही, उन्होंने उसे नहीं समझा। 
Luke 2:51 तब वह उन के साथ गया, और नासरत में आया, और उन के वश में रहा; और उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं।
Luke 2:52 और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30



Wednesday, May 13, 2015

ट्यूलिप


   संसार के अनेक देश बसन्त ऋतु के स्वागत में ट्यूलिप दिवस मनाते हैं। ट्यूलिप की बात करने पर मेरा ध्यान निदिरलैंड देश पर जाता है जो अपने ट्यूलिप्स की खेती के लिए विश्व-विख्यात है। किंतु ट्यूलिप्स की व्यावसायिक खेती मध्य-पूर्व में आरंभ हुई थी, और आज ये रंगबिरंगे सुन्दर फूल सारे संसार में पाए जाते हैं। अनुमान है कि आज इस फूल की 109 उप-जातियाँ संसार भर में उद्यानों, मार्गों के किनारे, घरों के बाग़ीचों और अन्य स्थानों पर उगाई जाती हैं। पिछली पतझड़ मैंने ट्यूलिप की कुछ गाँठें अपने बाग़ीचे में बोई थीं। अब कुछ महीने पश्चात, बसन्त ऋतु के आगमन पर मेरे बाग़ीचे में सुन्दर ट्यूलिप के फूल दिखाई दे रहे हैं और मुझे स्मरण करवा रहे हैं कि ग्रीष्म ऋतु भी आने वाली है, जिसके साथ आँखों को आनन्दित करने के लिए और भी फूल देखाई देंगे।

   मेरे लिए फूल परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह को स्मरण करवाने का माध्यम हैं। हमारे प्रभु यीशु ने अपने महान पहाड़ी उपदेश में ट्यूलिप के फुलों के समान उगने वाले सोसन के फूलों के द्वारा परमेश्वर के इस अनुग्रह के बारे में शिक्षा देते हुए कहा, "और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?" (मत्ती 6:28-30)।

   ये फूल हमें प्रति वर्ष शीत ऋतु के अन्त और बसन्त के आगमन को दर्शाते हैं, साथ ही यह भी स्मरण करवाते हैं कि वह परमेश्वर जो इन फूलों का ध्यान रखता है, उन्हें सारी शीत ऋतु में सुरक्षित रखता है तथा बसन्त के आगमन पर उन्हें धरती के अन्दर से फूट कर बाहर आने और सुन्दरता बिखरने की सामर्थ देता है, वही परमेश्वर पिता मेरा भी ध्यान रखता है, मेरी भी मेरी सुरक्षा तथा प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के इंतिज़ाम करता है, उचित समय पर विलक्षण रीति से मुझ में होकर संसार पर अपनी महिमा प्रगट करता है। - डेनिस फिशर


यदि प्रभु यीशु फूलों और पक्षियों का ध्यान रखता है, तो निःसन्देह वह मेरा और आपका भी ध्यान रखता है।

सो जब तुम बुरे हो कर अपने लड़के-बालों को अच्छी वस्‍तुएं देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा। - लूका 11:13

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
2 राजा 17-18
यूहन्ना 3:19-36


Tuesday, May 12, 2015

आनन्द


   मैं बच्चों की एक बेसबॉल टीम के प्रशिक्षक का कार्य कर रहा था; एक खेल के दौरान बेसबॉल की गेन्द आकर एक बच्चे के मुँह पर लगी। उसे कोई गंभीर चोट तो नहीं आई किंतु वह इस अनुभव से डर अवश्य गया। इसके बाद हर खेल में वह बहादुरी के साथ प्रयास तो करता रहा किंतु गेन्द को बल्ले से मार पाना उसके लिए लगभग असंभव सा हो गया। अपने अन्तिम खेल में हम प्रतिद्वंदी टीम से बहुत पिछड़ गए थे, और हमारे पास आनन्दित होने की कोई आशा या कारण नहीं रह गया था। ऐसे में उस बच्चे की बारी आई और वह गेन्द को मारने के लिए स्थान पर जाकर खड़ा हो गया; गेन्द उसकी ओर फेंकी गई, और सब देखकर दंग रह गए कि उसने पूरी ताकत से गेन्द को ऐसा मारा कि वह दूर तक चली गई। टीम के उसके सभी साथी खुशी से झूम उठे; उसके अपने तथा अन्य बच्चों के अभिभावक एवं माता-पिता खुशी से उसे प्रोत्साहित करने लगे, और यद्यपि हम अभी खेल को हारने की स्थिति से बाहर नहीं आए थे, मैं तो ज़ोर ज़ोर से उछल कर खुशी से चिल्लाने लगा। हम सब उस बच्चे के साहस से अति आनन्दित हो गए थे।

   मुझे लगता है कि ऐसे ही हमारा परमेश्वर पिता भी हमें जीवन में प्रोत्साहित करता है। वह हम से बहुत प्रेम करता है और कहता है कि तुम "सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ" (इफिसियों 3:18-19)।

   कुछ लोग सोचते हैं कि परमेश्वर हम से प्रेम नहीं करता, वरन इस इंतज़ार में रहता है कि हम कोई गलती करें और वह हमें द्ण्डित करे। ऐसे लोगों को परमेश्वर के हमारे प्रति गहरे प्रेम के बारे में बताने का हमें अवसर रहता है। उनके उस आनन्द की कलपना कीजिए जब आप उन्हें परमेश्वर के प्रेम के बारे में बताएंगे कि कैसे उस प्रेम में होकर उसने हम सभी के पापों के प्रायश्चित के लिए अपने एकलौते पुत्र को कलवरी के क्रूस पर बलिदान होने के लिए दे दिया जो आज भी अपने लोगों के लिए प्रार्थना निवेदन करता है तथा उन्हें प्रोत्साहित करता है, और वे उस प्रेम को अनुभव करने पाएंगे। इस आनन्द को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाईए। - रैन्डी किलगोर


प्रभु यीशु के कीलों से छिदे हाथ, परमेश्वर के प्रेम से भरे हृदय को दिखाते हैं।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: इफिसियों 3:14-21
Ephesians 3:14 मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, 
Ephesians 3:15 जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। 
Ephesians 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ। 
Ephesians 3:17 और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। 
Ephesians 3:18 सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। 
Ephesians 3:19 और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Ephesians 3:20 अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है, 
Ephesians 3:21 कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-16
  • यूहन्ना 3:1-18



Monday, May 11, 2015

स्मारक


   हाल ही में मुझे यह आभास हुआ कि मेरे दफतर में लगे सभी चित्र और स्मारक बीते समयों को ही दिखाते हैं। मैंने उन्हें हटाने का विचार किया, लेकिन साथ ही यह विचार भी मन में आया कि कहीं उन लोगों, स्थानों और घटनाओं के स्मरण को बनाए रखने का आज के मेरे जीवन में कोई महत्व तो नहीं है? उन स्मारकों को लेकर जीवन के भूतकाल में उल्झे रहने से बचने के लिए मुझे उनमें विद्यमान अपने वर्तमान और भविष्य के लिए महत्व को खोजना था।

   जब परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल, मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा के स्थान कनान देश में पहुँचे तब परमेश्वर ने उनके अगुवे, यहोशु से कहा कि इस्त्राएल के बारहों गोत्रों से एक एक जन को चुनें जो यरदन नदी में से एक एक पत्थर उस स्थान से जहाँ उन्होंने नदी को पार किया था, लेकर आएं और अपने शिविर के पास रख दें। वे पत्थर आते दिनों के लिए स्मारक थे जिससे कि जब उनकी भावी पीढ़ीयाँ उन पत्थरों के बारे में पूछें तो वे उन्हें परमेश्वर की सामर्थ और विश्वासयोग्यता के बारे में, जिसे उन्होंने अनुभव किया था, बता सकें।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण, हमारे लिए भी यह भला है कि बीते दिनों में अनुभव किए गए उसके प्रेम और अनुग्रह के स्मारक हम अपने साथ रखें, जो ना केवल हमें उसकी विश्वासयोग्यता के बारे में स्मरण दिलाते रहें, वरन उसकी इस विश्वासयोग्यता की गवाही दूसरों के सामने रखने के अवसर भी हमें प्रदान करें। ये स्मारक हमें आज और आने वाले समय के लिए उसकी विश्वासयोग्यता के लिए भी आश्वस्त करते रहेंगे, जिससे हम सदा उसके आदर तथा भय में बनें रहें।

   परमेश्वर ने भूतकाल में जो कुछ हमारे लिए किया है वह हमारे वर्तमान तथा भविष्य के लिए एक सशक्त आश्वासन है; उसे कभी अपनी नज़रों से ओझल ना होने दें। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


बीते दिनों की बहुमूल्य यादें हमारे आज तथा कल के लिए आवश्यक विश्वास को सुदृढ़ कर सकती हैं।

यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। - व्यवस्थाविवरण 6:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 4:1-6; 20-24
Joshua 4:1 जब उस सारी जाति के लोग यरदन के पार उतर चुके, तब यहोवा ने यहोशू से कहा, 
Joshua 4:2 प्रजा में से बारह पुरूष, अर्थात गोत्र पीछे एक एक पुरूष को चुनकर यह आज्ञा दे, 
Joshua 4:3 कि तुम यरदन के बीच में, जहां याजकों ने पांव धरे थे वहां से बारह पत्थर उठा कर अपने साथ पार ले चलो, और जहां आज की रात पड़ाव होगा वहीं उन को रख देना। 
Joshua 4:4 तब यहोशू ने उन बारह पुरूषों को, जिन्हें उसने इस्राएलियों के प्रत्येक गोत्र में से छांटकर ठहरा रखा था, 
Joshua 4:5 बुलवाकर कहा, तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सन्दूक के आगे यरदन के बीच में जा कर इस्राएलियों के गोत्रों की गिनती के अनुसार एक एक पत्थर उठा कर अपने अपने कन्धे पर रखो, 
Joshua 4:6 जिस से यह तुम लोगों के बीच चिन्हानी ठहरे, और आगे को जब तुम्हारे बेटे यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है? 
Joshua 4:20 और जो बारह पत्थर यरदन में से निकाले गए थे, उन को यहोशू ने गिलगाल में खड़े किए। 
Joshua 4:21 तब उसने इस्राएलियों से कहा, आगे को जब तुम्हारे लड़के-बाले अपने अपने पिता से यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है? 
Joshua 4:22 तब तुम यह कहकर उन को बताना, कि इस्राएली यरदन के पार स्थल ही स्थल चले आए थे। 
Joshua 4:23 क्योंकि जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने लाल समुद्र को हमारे पार हो जाने तक हमारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा था, वैसे ही उसने यरदन का भी जल तुम्हारे पार हो जाने तक तुम्हारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा; 
Joshua 4:24 इसलिये कि पृथ्वी के सब देशों के लोग जान लें कि यहोवा का हाथ बलवन्त है; और तुम सर्वदा अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानते रहो।

  • एक साल में बाइबल: 2 राजा 13-14
  • यूहन्ना 2



Sunday, May 10, 2015

समय


   जब मैं पास्टर का कार्य कर रहा था तब मुझे कई माताओं के मध्य सेवकाई के अवसर मिले। मैं उनके पास अस्पतालों में गया और उनके नवजात शिशुओं के लिए उनके साथ आनन्दित हुआ। मैं उनके घरों में गया और बच्चों की अनाज्ञाकारिता के कारण व्याकुल और चिंतित महिलाओं को समझाया, मार्गदर्शन प्रदान किया, उन्हें आश्वस्त किया कि परमेश्वर उनके बलवाई बच्चों का भी ध्यान रखे हुए है। मैं उन माताओं के साथ भी खड़ा होकर दुखी हुआ जिनके बच्चे बीमार या घायल थे और मैं उन माताओं के दुख में उनके साथ दुखी होकर रोया भी जब उनके बच्चे किसी कारण इस संसार से जाते रहे।

   प्रभु यीशु की माता मरियम भी आनन्द और शोक के समयों से होकर निकली थी। उन्हें कितना आनन्द हुआ होगा जब मसीह यीशु का जन्म हुआ (लूका 2:7)। वो कितनी उत्साहित हुई होगी जब चरवाहे और फिर पूर्व देश के ज्ञानी प्रभु को देखने और दण्डवत करने आए (लूका 2:8-20; मत्ती 2:1-12)। उन्हें कितनी बेचैनी हुई होगी जब शिमौन ने भविष्यवाणी करी कि उसका दिल दुख की तलवार से छेदा जाएगा (लूका 2:35); और उसके लिए कितना हृदय-विदारक रहा होगा जब उन्होंने अपने बेटे को क्रूस पर लटके और मरते हुए देखा होगा (यूहन्ना 19:25-30)। लेकिन मरियम के लिए ये भिन्न समय उनके पुत्र की मृत्यु के भयानक दृश्य के साथ समाप्त नहीं हो गए; जब प्रभु यीशु मृतकों में से जीवित हो उठा, तब उनके लिए अभूतपूर्व आनन्द का समय भी आया।

   ने केवल माताएं, वरन हम सब अपने जीवन काल में अनेक प्रकार के आनन्द तथा दुख के समयों से होकर निकलते हैं; लेकिन जब हम अपने जीवन को प्रभु यीशु के हाथ में समर्पित कर देते हैं तो हमारे हर प्रकार के समय उसकी महिमा तथा उसके अनन्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग हो सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


माँ होना परमेश्वर के साथ एक पवित्र ज़िम्मेदारी निभाने की सहभागिता है।

हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है। - सभोपदेशक 3:1

बाइबल पाठ: लूका 2:6-35
Luke 2:6 उन के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए। 
Luke 2:7 और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा: क्योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी। 
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। 
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। 
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा, 
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। 
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। 
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। 
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं 
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 10-12
  • यूहन्ना 1:29-51