बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Monday, August 31, 2015

वास्तविक सत्य


   कभी-कभी दादाजी की अटारी को साफ करना फायदेमंद रहता है। ओहायो प्रांत के एक व्यक्ति के लिए यह लाखों डॉलर का फायदा साबित हुआ, जब उसे अटारी की सफाई करते समय 100 वर्ष से भी अधिक पुराने बेसबॉल कार्ड्स का एक संकलन मिला, जो बहुत संभाल के रखा गया था और बिलकुल नए होने के समान दशा में था; मूल्यांकन करने वालों ने उन प्राचीन और असली कार्डों की कीमत 30 लाख डॉलर आंकी!

   उन पुराने कार्ड्स की इतनी अधिक कीमत आंके जाने के दो कारण थे, पहला यह कि वे बहुत अच्छे से संभाल के रखे गए थे और ज़रा भी खराब नहीं हुए थे, लेकिन इस से भी बढ़कर महत्वपूर्ण दूसरा कारण था - वे असली थे। यदि वे नकली होते तो फिर चाहे कितनी भी अच्छी तरह से रखे गए होते, उनकी कीमत ना के बराबर ही होती।

   यही बात मसीही विश्वास और परमेश्वर के वचन बाइबल के लिए भी सत्य है; प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें कहा कि उनका प्रभु यीशु मसीह में विश्वास बिलकुल अर्थहीन और नकली होता यदि प्रभु यीशु मृतकों में से जी नहीं उठा होता। पौलुस के लिए यह कहना कि "और यदि मसीह भी नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है; और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है" (1 कुरिन्थियों 15:14); तथा यह कि, "और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो तुम्हारा विश्वास व्यर्थ है; और तुम अब तक अपने पापों में फंसे हो" (1 कुरिन्थियों 15:17) बहुत साहस और दृढ़ विश्वास की बात थी।

   मसीही विश्वास इस एक सत्य पर आधारित है कि प्रभु यीशु मसीह क्रूस पर मारा गया और तीसरे दिन मृतकों में से जी भी उठा। परमेश्वर का धन्यवाद हो उन स्पष्ट प्रमाणों के लिए जो प्रभु यीशु के पुनरुत्थान को प्रमाणित करते हैं। क्योंकि यह वास्त्विक सत्य है, इसलिए हम ना केवल अपना वर्तमान वरन अपना अनन्तकाल का भविष्य भी बिलकुल निश्चिंत होकर इस बात के आधार पर टिका सकते हैं तथा परमेश्वर पर पूरी तरह से विश्वास रख कर उसपर पूरी तरह से भरोसा रख सकते हैं। - डेव ब्रैनन


केवल प्रभु परमेश्वर ही सच्चा एवं एकमात्र परमेश्वर है।

कि मसीह को दुख उठाना होगा, और वही सब से पहिले मरे हुओं में से जी उठ कर, हमारे लोगों में और अन्यजातियों में ज्योति का प्रचार करेगा। - प्रेरितों 26:23

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:1-21
1 Corinthians 15:1 हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। 
1 Corinthians 15:2 उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। 
1 Corinthians 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। 
1 Corinthians 15:4 ओर गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। 
1 Corinthians 15:5 और कैफा को तब बारहों को दिखाई दिया। 
1 Corinthians 15:6 फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए। 
1 Corinthians 15:7 फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। 
1 Corinthians 15:8 और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं। 
1 Corinthians 15:9 क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। 
1 Corinthians 15:10 परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। 
1 Corinthians 15:11 सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।
1 Corinthians 15:12 सो जब कि मसीह का यह प्रचार किया जाता है, कि वह मरे हुओं में से जी उठा, तो तुम में से कितने क्योंकर कहते हैं, कि मरे हुओं का पुनरुत्थान है ही नहीं? 
1 Corinthians 15:13 यदि मरे हुओं का पुनरुत्थान ही नहीं, तो मसीह भी नहीं जी उठा। 
1 Corinthians 15:14 और यदि मसीह भी नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है; और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है। 
1 Corinthians 15:15 वरन हम परमेश्वर के झूठे गवाह ठहरे; क्योंकि हम ने परमेश्वर के विषय में यह गवाही दी कि उसने मसीह को जिला दिया यद्यपि नहीं जिलाया, यदि मरे हुए नहीं जी उठते। 
1 Corinthians 15:16 और यदि मुर्दे नहीं जी उठते, तो मसीह भी नहीं जी उठा। 
1 Corinthians 15:17 और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो तुम्हारा विश्वास व्यर्थ है; और तुम अब तक अपने पापों में फंसे हो। 
1 Corinthians 15:18 वरन जो मसीह में सो गए हैं, वे भी नाश हुए। 
1 Corinthians 15:19 यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं। 
1 Corinthians 15:20 परन्तु सचमुच मसीह मुर्दों में से जी उठा है, और जो सो गए हैं, उन में पहिला फल हुआ। 
1 Corinthians 15:21 क्योंकि जब मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई; तो मनुष्य ही के द्वारा मरे हुओं का पुनरुत्थान भी आया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 132-134
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


Sunday, August 30, 2015

जोखिम


   सितंबर 7, 1838 को ग्रेस डार्लिंग नामक एक महिला ने, जो समुद्र के किनारे के खतरों के प्रति सचेत करने के लिए बनाए गए प्रकाश सतंभ के रखवाले की बेटी थी, समुद्र में डूबते हुए जलपोत और बचने के लिए किनारे की ओर तैरने का प्रयास करते हुए लोगों को देखा। अपने पिता के साथ मिलकर ग्रेस लगभग एक मील दूर तक नाव को खेकर गई और बहुत से लोगों को बचाया। अपने जीवन को जोखिम में डालकर दूसरों के प्रति अनुकंपा दिखाने और स्थिर हाथों से उनकी जान बचाने के प्रयास के लिए ग्रेस प्रसिद्ध हो गई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने एक अन्य स्त्री-पुरुष की जोड़ी के बारे में उल्लेख किया जिन्होंने दूसरों की सहायता के लिए जोखिम उठाए। पौलुस ने प्रिसका एवं अक्वीला के बारे में लिखा, जो प्रभु यीशु में उसके सहकर्मी थे; पौलुस ने उनके विषय में लिखा कि "उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं" (रोमियों 16:4)।

   पौलुस ने यह तो स्पष्ट नहीं लिखा कि उन दोनों ने उसके लिए क्या जोखिम उठाया, लेकिन पौलुस के मसीही सेवकाई के जीवन में उसे जैसे पीटे जाने, बन्दीगृह में डाले जाने, जलयान के समुद्र में टूटने, जान की धमकी दिए जाने आदि बातों के द्वारा जोखिम उठाने पड़े थे, उससे यह समझना कठिन नहीं है कि उस दंपत्ति को अपने मित्र पौलुस के लिए कैसे जोखिम को उठाना पड़ा होगा। संभवतः उन दोनों के लिए पौलुस की जान बचाना उनकी अपनी सुरक्षा से बढ़कर था।

   दुसरों को खतरों से, वो चाहे शारीरिक हों या आत्मिक, बचाने का प्रयास करना अकसर जोखिम भरा होता है। लेकिन जब हम यह जोखिम उठाकर दूसरों की सहायातार्थ अपना हाथ बढ़ाते हैं तो हम अपने तथा सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के मन को, जिसने हमारे लिए अपना सब कुछ दे दिया, प्रतिबिंबित करते हैं। - डेनिस फिशर


यदि आप बचा लिए गए हैं तो फिर आप औरों के बचाए जाने के लिए प्रयास करेंगे।

इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो। - रोमियों 15:7

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-7
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।ज़ 
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार। 
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। 
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार। 
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:7 अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 129-131
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16


Saturday, August 29, 2015

प्रेम


   कुछ समय पहले मैंने अपनी पत्नि मर्लीन की चक्कर आने की बीमारी के साथ उसके संघर्ष के बारे में एक लेख लिखा था। उस लेख के छपने के पश्चात जो पाठकों द्वारा प्रोत्साहन के प्रत्युत्तरों की बाढ़ आई, मैं उसके लिए कतई तैयार नहीं था। पाठकों ने ना केवल प्रोत्साहन, वरन सलाह, सहायता और उसके स्वास्थ्य को लेकर उनकी चिंता को अपने प्रत्युत्तर में व्यक्त किया। ये सन्देश सारे संसार से आए, जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों से आए। प्रेम भरी चिंता के ये सन्देश संख्या में इतने अधिक थे कि हमारे लिए उन सभी का व्यक्तिगत उत्तर देना संभव नहीं रहा। एक अंग के परेशानी में पड़ने के कारण मसीह की देह द्वारा उसको इस प्रकार प्रेम से संभालना, हमारे लिए भलाई से भरा अपरिहार्य अनुभव था, जिसके लिए हम अति कृतज्ञ थे और सदा रहेंगे।

   यथार्त में मसीह की देह अर्थात मसीही विश्वासियों की मण्डली को इसी प्रकार कार्य करना चाहिए; मसीह यीशु में अपने भाई-बहिनों के प्रति प्रेम भरी चिंता रखना इस बात का प्रमाण है कि हमने मसीह के प्रेम को चखा है। प्रभु यीशु ने पकड़वाए जाकर क्रूस पर चढ़ा दिए जाने से पहले अपने चेलों के साथ किए गए अंतिम भोज के दौरान अपने चेलों से कहा, "मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:34-35)।

   मैंने और मर्लीन ने मसीह के समान किए गए प्रेम और चिंता का स्वाद उन संदेशों द्वारा चखा। हम सब मसीही विश्वासियों का यह कर्तव्य है कि हम अपने तथा सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के प्रेम को दूसरों को दिखाएं और अपनी इस गवाही से अपने प्रभु की आराधना तथा बड़ाई करें। - बिल क्राउडर


एक दूसरे के प्रति रखे गए हमारे प्रेम की गहराई ही परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम की ऊंचाई को दिखाती है। - मोर्ली

क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - रोमियों 13:9 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:31-35 मत्ती 22:37-40
John 13:31 जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा; अब मनुष्य पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्वर की महिमा उस में हुई। 
John 13:32 और परमेश्वर भी अपने में उस की महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा। 
John 13:33 हे बालकों, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं। 
John 13:34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। 
John 13:35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Matthew 22:40 ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 126-128
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33


Friday, August 28, 2015

बचाव का मार्ग


   पश्चिमी वर्जीनिया के अपालाचियन पहाड़ों से होकर गुज़रने वाले राजमार्ग 77 पर अनियंत्रित ट्रकों को मार्ग से किनारे कर के रोक लेने के लिए ढलानों पर अनेक स्थान बने हुए हैं। ये आधे-पक्के किए हुए स्थान राजमार्ग के उस भाग पर स्थित हैं जो 6 मील की दूरी में 1300 फीट नीचे उतर आता है। सड़क के घुमावदार होने के साथ इस तीव्र ढलान के कारण गाड़ियों, विशेषकर ट्रकों के लिए समस्या होने की संभावना सदा बनी रहती है, इसीलिए अधिकारियों ने उनकी सहायता के लिए पहले से ही उपाय बना कर रख दिया है।

   जैसे ढाल पर अनियंत्रित गाड़ी या ट्रक को बचने का मार्ग चाहिए होता है, हमें भी जीवन के मार्ग में कई बातों से बचने में सहायता चाहिए होती है, विशेषकर तब जब अनियंत्रित अभिलाषाएं हमारे आत्मिक जीवन को जोखिम में डालने लगती हैं। हमारा परमेश्वर पिता हमारी इस संभावना और स्थिति को अच्छे से जानता है, इसीलिए उसने हमारी सहायता के लिए पहले ही से साधन बना कर दे दिया है। जब भी हम किसी अनुचित प्रलोभन या लालसा में पड़ें, तो परमेश्वर के वायदे को स्मरण रखें: "...परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा..." (1 कुरिन्थियों 10:13)। परमेश्वर अपने वचन के द्वारा हमें प्रलभोनों को "नहीं" कहने की सामर्थ देता है; जब शैतान ने प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में उनके 40 दिनों के उपवास के पश्चात भोजन, अधिकार तथा परमेश्वर पर विश्वास की बातों को लेकर परीक्षा करी तो प्रभु यीशु ने उसके प्रत्येक वार को परमेश्वर के वचन के सही प्रयोग के द्वारा विफल किया।

   जब हम किसी प्रलोभन या परीक्षा में पड़ें तो हमें प्रतीत हो सकता है कि बस अब हमारा विनाश आने ही वाला है, बीते समयों की असफलताएं तथा दूसरों द्वारा हमारे तिरिस्कार की यादें हमारी निराशा को और भी बढ़ा सकती हैं। लेकिन ऐसे में भी हम परमेश्वर पर भरोसा बनाए रख सकते हैं कि हमारी हर परीक्षा में वह हमारे प्रति वफादार और सहायक है; वह ना केवल हमें परीक्षा का सामना करने की सामर्थ देगा वरन उससे बच कर निकल पाने का मार्ग भी देगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रलोभन और परीक्षा से बचने का सबसे उत्त्म मार्ग है परमेश्वर कि शरण में भाग जाना।

इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है; - व्यवस्थाविवरण 7:9 

बाइबल पाठ: मत्ती4:1-11 1 कुरिन्थियों 10:12-13
Matthew 4:1 तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो। 
Matthew 4:2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी। 
Matthew 4:3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। 
Matthew 4:4 उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। 
Matthew 4:5 तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। 
Matthew 4:6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे। 
Matthew 4:7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। 
Matthew 4:8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर 
Matthew 4:9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। 
Matthew 4:10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर। 
Matthew 4:11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे।

1 Corinthians 10:12 इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। 
1 Corinthians 10:13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18



Thursday, August 27, 2015

करुणा


   उस विशाल विज्ञापन पटल की ओर निगाह का ना जाना लगभग असंभव था; उस लाल पृष्ठभूमि वाले पटल पर बड़े बड़े सफेद अक्षरों से लिखा था, "इस वर्ष हज़ारों लोग अपनी ढिटाई के कारण मर जाएंगे!" बाद में मुझे मालुम पड़ा कि उसके जैसे सैंकड़ों और विज्ञापन पटल स्थान स्थान पर लगाए गए थे, और उनके संदेश का निशाना अधेड़ उम्र के वे हज़ारों लोग थे जो चिकित्सा जाँच करवाने से जान-बूझ कर बचते रहते थे और फिर ऐसी बीमारियों से मर जाते थे जिन से बचा जा सकता था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का 32वें भजन एक ऐसी ही बीमारी के बारे में है जिससे बचने का सरल और मुफ्त उपाय तो है लेकिन फिर भी प्रतिदिन संसार के हज़ारों लोग उस बीमारी और उसके अनन्तकालीन परिणामों की गंभीरता को नज़रंदाज़ करके अनन्तकाल के विनाश में चले जाते हैं। वह बीमारी है मनुष्य का पाप; जिसका बड़ा सरल, सब के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध और सदैव कारगर उपाय विद्यमान है - अपने पापों का अंगीकार करके सच्चे, सीधे मन से प्रभु यीशु से उन पापों की क्षमा माँगना और अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देना।

   भजन 32 के पहले पाँच पद दोष को छुपाने से होने वाली पीड़ा और फिर उन पापों को परमेश्वर के समक्ष मान लेने से मिलने वाली क्षमा के आनन्द का वर्णन करते हैं। फिर आगे हम 6-8 पद में पाते हैं कि परमेश्वर लालसा रखता है कि हम अपने संकट में उससे सहायता लें, और जो उससे सहायता तथा मार्गदर्शन माँगते हैं, उन्हें वह देता भी है: "मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा" (भजन 32:8)। आगे परमेश्वर सचेत भी करता है कि हम ढिटाई में ना पड़ें, जिस में से परमेश्वर को हमें बरबस निकालना पड़े, "तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के" (भजन 32:9)। भजन का अन्त परमेश्वर की करुणा के आश्वासन और उस करुणा के आनन्द के साथ होता है, "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)।

   क्या आप ने परमेश्वर की करुणा का लाभ उठा कर अपने अनन्तकाल को सुनिश्चित कर लिया है, या आप अभी भी अपनी ढिटाई में अनन्तकाल के विनाश को ही थामे हुए है? परमेश्वर की करुणा और क्षमा आप के लिए आज और अभी उपलब्ध है, उसे नज़रन्दाज़ मत कीजिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की क्षमा को प्राप्त करने के लिए पहला कदम है यह अंगीकार करना कि हमें उस क्षमा की आवश्यकता है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यिर्मियाह 17:7-8 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। 
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई। 
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। 
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-122
  • 1 कुरिन्थियों 9



Wednesday, August 26, 2015

सहारा


   पिछली गर्मियों में जब मेरेलिन ने एक वर्क्ष का पौधा लगाया तो उसके सामने यह प्रश्न था - पौधे को सहारा दिया जाए या ना दिया जाए? जिस से उसने पौधा खरीदा था, उस विक्रेता ने मेरेलिन को कहा था कि, "एक वर्ष तक इस पौधे को सहारा दिए रखिए जिससे वह तेज़ हवाओं को झेल सके, फिर उस सहारे को हटा दीजिए जिस से उसकी जड़ें गहरी और मज़बूत हो जाएं और उसे थामे रहें।" लेकिन मेरेलिन के एक पड़ौसी ने उसे सलाह दी कि "कोई सहारा ना लगाए जिस से वह पौधा आरंभ से ही गहरी और मज़बूत जड़ों वाला हो, वरना बड़ा होने और पूरा पेड़ बनने में उसकी जड़ें कमज़ोर रह जाएंगी। सहारा नहीं देना दीर्घ-कालीन स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।"

   रिश्तों के पनपने में भी हम इसी प्रश्न को लेकर चिंतित होते हैं। यदि हमारा कोई प्रीय अपने आप को किसी परेशानी में डाल लेता है, तब क्या हमें उसे उस परेशानी से निकालने के द्वारा उसे सहारा देना चाहिए, या फिर उसे अपने किए के परिणाम भुगतने के द्वारा स्वयं को मज़बूत बनने देना चाहिए, अपनी "जड़ें गहरी" करने देना चाहिए? उस व्यक्ति के दीर्घ-कालीन स्वास्थ्य के लिए जो बेहतर हो वही हमें करना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक के 19 अध्याय में हमें दोनों ही प्रकार के विचार मिलते हैं - हमें दया के साथ सहायता करनी चाहिए (पद 17), परन्तु ऐसा करने से खतरा भी है क्योंकि इसे बारंबार करने की आवश्यकता भी हो सकती है (पद 19)। ऐसे में सही बात को करने के लिए हमें हमारी अपनी समझ-बूझ से बढ़कर बुद्धिमता की आवश्यकता होती है।

   इसीलिए परमेश्वर ने हमें अपने ऊपर ही नहीं छोड़ दिया है। हम जब भी उससे बुद्धि माँगेंगे, उसका आश्वासन है कि वह हमें बुद्धि देगा (याकूब 1:5)। जब हम परमेश्वर को अपना सहारा बना लेते हैं, वह हमें मज़बूती प्रदान करता है और हमारी जड़ों को गहरा करता है। - ऐनी सेटास


सही बुद्धिमता संसार को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देखने में है।

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। - याकूब 1:5