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सोमवार, 8 जून 2015

सृष्टिकर्ता


   मेरे 7 वर्षीय अश्वेत मित्र टोबियस ने मुझ से एक दिन ऐसा प्रश्न पूछा जो कौतहूल जागृत करता है; उसने पूछा, "जबकि हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा श्वेत रंग के थे तो फिर अश्वेत लोग कहाँ से आए?" मैंने उत्तर दिया, "हम यह नहीं जानते कि आदम और हव्वा किस रंग के थे, क्योंकि परमेश्वर का वचन बाइबल इस बारे में कुछ नहीं कहती; लेकिन तुम ने यह कैसे मान लिया कि वे दोनों श्वेत रंग के थे?" उसने जवाब दिया कि उसने जितनी भी बाइबल संबंधित पुस्तकें देखीं, चाहे चर्च में हों या किसी पुस्तकालय में, जिस भी पुस्तक में आदम और हव्वा का चित्र बना है, उन्हें श्वेत ही दिखाया गया है। उसका यह उत्तर सुनकर मेरा मन विचलित हो गया, कि कहीं टोबियस यह ना समझने लगे कि अपने अश्वेत रंग के कारण वह किसी अन्य से हीन या नीचा है, अथवा यह कि वह परमेश्वर की सृष्टि है ही नहीं!

   संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर पिता की रचना हैं, और इसलिए चाहे उनका बाहरी रंग-रूप जो भी हो, परमेश्वर के लिए वे सब एक समान स्तर के ही हैं, परमेश्वर सब से एक समान प्रेम करता है और सबको प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार के साथ अपने पास स्वर्ग में देखना चाहता है। इसीलिए प्रेरित पौलुस ने एथेने के लोगों से कहा: "उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है" (प्रेरितों 17:26); हम सब एक ही मूल से हैं।

   डैरेल बॉक ने बाइबल की प्रेरितों के काम नामक पुस्तक की अपनी विवेचना में इस खण्ड के बारे में लिखा, "पौलुस का यह कथन उसके उन एथेनी श्रोताओं के लिए स्वीकार करने को बहुत कठिन रहा होगा, क्योंकि वे एथेनी अपने आप को औरों से बहुत उच्च कोटि का, तथा अन्य सभी जातियों को अपने से निम्न कोटि का मानते थे, उन्हें वहशी कहते थे। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें यह स्पष्ट सिखाती है कि समस्त मानव जाति एक ही आदि माता-पिता, अर्थात आदम और हव्वा से आई है, और परमेश्वर रंग या जाति के आधार पर कभी मनुष्यों में भेदभाव नहीं करता इसलिए कोई भी व्यक्ति या जाति किसी अन्य से ऊँचा या नीचा कदापि नहीं है।

   हम अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के सामने श्रद्धा के साथ झुकते हैं, उसका आदर तथा भय मानते हैं; उसने हम सब की सृष्टि करी है, वह हम सब को "जीवन, श्वास और सब कुछ" (पद 25) देता है। हम सब अपने सृष्टिकर्ता की नज़रों में एक समान हैं; तो फिर हम आपस में ऊँच-नीच के भेदभाव क्यों करें? - ऐनी सेटास


परमेश्वर पिता हम सब से ऐसा प्रेम करता है मानों हम में से प्रत्येक एकमात्र है।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-31
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे एथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31
  • यूहन्ना 18:1-18


रविवार, 7 जून 2015

रक्षक


   मैं कई वर्षों तक अपने स्थानीय चर्च में व्यसकों के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन लेता था, और उनके प्रश्नों के उत्तर देने के लिए बाइबल की बातों को स्वयं बड़े ध्यान और यत्न से अध्ययन करता था। बाद में मैंने बाइबल कॉलेज में दाखिला ले लिया; वहाँ अपने एक पाठ में मैंने जो सीखा उसके आधार पर मुझे ध्यान आया कि मैंने एक महिला को उसके द्वारा पूछे गए एक गंभीर प्रश्न का उचित उत्तर नहीं दिया था। मुझे इससे बड़ी ग्लानि हुई; साथ ही मैं अपने मन में निश्चित था कि वह महिला मेरे द्वारा दिए गए गलत उत्तर के कारण पिछले दो वर्षों से कष्ट में होगी, और मैं अपनी इस गलती को सुधारना चाहता था।

   मैं फुर्ती से घर गया, उस महिला को फोन लगाया और तुरंत ही अपनी गलती के लिए उससे क्षमा माँगने लगा। फोन पर दूसरी ओर एक लंबी खामोशी बनी रही, फिर उस महिला ने बड़े असमंजस के साथ मुझसे कहा, "मुझे क्षमा कीजिए किंतु मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि आप किस बात के लिए क्षमा माँग रहे हैं, और मुझे किस बात की सफाई दे रहे हैं।" मैंने जितना अपने आप को समझा था, मैं उतना स्मरण रखने के योग्य या हानि पहुँचाने वाला निकला नहीं। तब मुझे एहसास हुआ कि हम जब परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते, उसकी गहराईयों में बढ़ते और उन्हें दूसरों तक पहुँचाने के यत्न करते हैं तो साथ ही परमेश्वर भी अपने वचन की सत्यता और खराई की रक्षा करने के कार्य में लगा रहता है। चाहे मैंने अनजाने में, सत्य को ही बताने के अपने पूरे प्रयत्न के बावजूद, उस महिला को कुछ गलत बता दिया था; परन्तु परमेश्वर ने मेरी उस गलती को उस महिला के लिए किसी हानि का कारण बनने नहीं दिया, उसकी रक्षा करी।

   हम मसीही विश्वासी भी मनुष्य ही हैं और अपने कार्यों तथा बातों में गलती कर सकते हैं। लेकिन यह हमारा कर्तव्य है कि हम परमेश्वर के वचन की बातों को पूरी मेहनत के साथ सीखें, उन्हें दूसरों के साथ बाँटते समय पूरी सावधानी बर्तें और सदा अपने आप को सुधारने के लिए, और यदि कोई गलती हो जाए तो उसे मानने के लिए तैयार रहें (2 तिमुथियुस 2:15)। साथ ही हम प्रार्थना करें कि परमेश्वर का आत्मा परमेश्वर के वचन की, तथा ना केवल हमारे मनों की वरन सुनने वालों के मनों की भी प्रत्येक संभावित गलती से रक्षा करे। जब परमेश्वर अपने वचन का और हमारे वचन बाँटने के प्रयासों का रक्षक रहेगा तब हम साहस के साथ परमेश्वर के वचन को बाँटने पाएंगे और उसकी सेवकाई करने पाएंगे। - रैंडी किलगोर


होनें दें कि परमेश्वर का वचन आपकी याद में बस जाए, आपके मन पर राज्य करे और आपके शब्दों को मार्गदर्शित करे।

परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 4:2 

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:10-18
2 Timothy 2:10 इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्त महिमा के साथ पाएं। 
2 Timothy 2:11 यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। 
2 Timothy 2:12 यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे: यदि हम उसका इन्कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्कार करेगा। 
2 Timothy 2:13 यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वास योग्य बना रहता है, क्योंकि वह आप अपना इन्कार नहीं कर सकता। 
2 Timothy 2:14 इन बातों की सुधि उन्हें दिला, और प्रभु के साम्हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता; वरन सुनने वाले बिगड़ जाते हैं। 
2 Timothy 2:15 अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। 
2 Timothy 2:16 पर अशुद्ध बकवाद से बचा रह; क्योंकि ऐसे लोग और भी अभक्ति में बढ़ते जाएंगे। 
2 Timothy 2:17 और उन का वचन सड़े-घाव की नाईं फैलता जाएगा: हुमिनयुस और फिलेतुस उन्‍हीं में से हैं। 
2 Timothy 2:18 जो यह कह कर कि पुनरुत्थान हो चुका है सत्य से भटक गए हैं, और कितनों के विश्वास को उलट पुलट कर देते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17


शनिवार, 6 जून 2015

नेतृत्व


   स्टीफन एम्ब्रोज़ ने अमरीकी सेना की "ईज़ी कंपनी" के इतिहास को, उनके प्रशिक्षण से लेकर दूसरे विश्वयुद्ध में नॉरमैण्डी पर हुए हमले और फिर यूरोप में दूसरे विश्वयुद्ध के अन्त होने तक, अपनी पुस्तक Band of Brothers में लिखा है। उस समय के अधिकांश भाग में ईज़ी कंपनी का नेतृत्व रिचर्ड विन्टर्स ने किया था। रिचर्ड असाधारण रीति से एक अच्छा अफसर था क्योंकि वह अपनी उस टुकड़ी का नेतृत्व सदा आगे रहकर करता था। उस पूरे युद्ध काल में रिचर्ड के मूँह से सबसे अधिक सुनाई देने वाले शब्द थे, "मेरे पीछे आओ!" अन्य अफसर पीछे रहकर सुरक्षा ढूँढते थे, किंतु यदि रिचर्ड की टुकड़ी हमले के लिए जाती तो रिचर्ड सबसे आगे रहकर उनका नेतृत्व करता।

   हम मसीही विश्वासियों का सच्चा और एकमात्र अगुवा है मसीह यीशु। वह हमें भली-भाँति जानता है, यह भी जानता है कि हमें किस चीज़ कि आवश्यकता है और हम कहाँ किस बात में कमज़ोर हैं। एक चरवाहे के समान भेड़ों की रखवाली तथा देखभाल करने के उसके नेतृत्व के कारण ही परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 23 इतना लोकप्रीय भजन हुआ है। इस भजन के दूसरे पद में दाऊद कहता है, "वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है" और तीसरे पद में, "वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है।" ये दोनों विचार दिखाते हैं कि क्यों प्रभु यीशु की हमारे प्रति देखरेख इतनी परिपूर्ण है। चाहे वे तरोताज़ा करने, सामर्थ देने के समय हों ("सुखदाई जल"), या उसे पसन्द आने वाले कार्य करने के समय हों ("धर्म के मार्ग"), हम निसंकोच उसका अनुसरण कर सकते हैं।

   इसी लिए एक पुराने मसीही स्तुति गीत में कहा गया है, "मेरा प्रभु बियाबान के मार्ग को जानता है; मुझे तो बस उसके पीछे-पीछे चलते जाना है"। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु मार्ग जानता है; उसका अनुसरण करते रहिए।

वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा। क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे। - भजन 36:8-9

बाइबल पाठ: भजन 23
Psalms 23:1 यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। 
Psalms 23:2 वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; 
Psalms 23:3 वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। 
Psalms 23:4 चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।
Psalms 23:5 तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है। 
Psalms 23:6 निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16



शुक्रवार, 5 जून 2015

व्यवहार


   व्यवहार को कैसे बदला जा सकता है? अपनी पुस्तक The Social Animal में डेविड ब्रुक्स लिखते हैं कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवहार बदलने के लिए लोगों को बुरे व्यवहार के दूर-गामी दुषपरिणामों के बारे में बताना चाहिए; जैसे कि, "धुम्रपान से कैंसर हो सकता है; व्यभिचार से परिवार नाश हो जाते हैं; झूठ बोलने से विश्वास जाता रहता है। उन विशेषज्ञों तर्क यह है कि जब आप लोगों को उनके दुर्व्यवहार के दुषपरिणाम तथा मूर्खता समझाएंगे, तो लोग वह दुर्वयवहार करने से रुकने को प्रेरित होंगे, क्योंकि नैतिक निर्णय तथा आत्मसंयम बर्तने के लिए युक्ति और इच्छा दोनों की आवश्यकता होती है। लेकिन यह तर्क कामयाब नहीं रहा, देखा यही जाता है कि दुर्व्यवहार के दुषपरिणाम जानने के बावजूद लोग वह दुर्व्यवहार करने से कम ही रुकते हैं"। दूसरे शब्दों में व्यवहार परिवर्तन के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के नाते, हम अपने आत्मिक जीवन में बढ़ना चाहते हैं, आत्मिक व्यवहार में पनपना चाहते हैं। लगभग दो हज़ार वर्ष पहले प्रभु यीशु ने अपने चेलों को बताया था कि वे इस परिवर्तन तथा बढ़ोतरी को कैसे प्राप्त कर सकते हैं। प्रभु ने कहा: "तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते" (यूहन्ना 15:4)। प्रभु यीशु दाखलाता है, और उसके अनुयायी, शाखाएं हैं। यदि हम सच्चे मन से विचार करें तो यह अवश्य स्वीकार करेंगे कि प्रभु यीशु से अलग रहकर हम आत्मिक रीति से असहाय एवं प्रभावहीन होते हैं।

   प्रभु यीशु की संगति में रहने से, उसमें बने रहने से ही हमें आत्मिक रीति से परिवर्तित होते हैं, प्रभु का जीवन हम में पनपता और बढ़ता है। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु द्वारा परिवर्तित मन से ही परिवर्तित व्यवहार आरंभ होता है।

पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। - 1 यूहन्ना 2:5-6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-13
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



गुरुवार, 4 जून 2015

बढ़ते रहें बढ़ाते रहें


   मसीही पुरुषों के एक सम्मेलन में मैं अपने एक पुराने मित्र क्लाईड से, जो अनेक वर्षों से मेरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन करता रहा है, मिला और बातचीत करी। क्लाईड के साथ चीन से आए हुए दो युवक भी थे जो विश्वास में नए थे और क्लाईड की मित्रता तथा आत्मिक बढोतरी में सहायता के लिए बहुत कृतज्ञ थे। क्लाईड जो अब 80 वर्ष का होने वाला है, बहुत उत्साहित तथा प्रफुल्लित था और कह रहा था, "मसीह यीशु को जानने और उससे प्रेम करने को लेकर जितना मैं आज उत्साहित हूँ उतना पहले कभी नहीं था।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी पत्री में हम पौलुस के मन और उद्देश्य को देखते हैं जो समय के साथ कभी धूमिल नहीं हुआ: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)। प्रभु यीशु के साथ पौलुस के संबंध से उसके अन्दर यह कभी कम ना होने वाली लालसा जागी कि उसके द्वारा अन्य लोग भी मसीही विश्वास को जान सकें। पौलुस प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को प्रचार करने से तथा इस बात से कि उसे देखकर अन्य लोग मसीही विश्वास में साहसी बनते हैं, आनन्दित होता था (फिलिप्पियों 1:12-14)।

   यदि हमारे मसीही विश्वास के जीवन का उद्देश्य केवल प्रभु यीशु के लिए सेवकाई करना मात्र ही है, तो कभी ना कभी हम थक कर बैठ जाएंगे। परन्तु यदि पौलुस और क्लाईड और उनके जैसे अनेक अन्य लोगों के समान हमारा उद्देश्य मसीह यीशु को और गहराई से जानना, उससे और अधिक प्रेम करना है, तो हम पाएंगे कि प्रभु हमें सामर्थ देगा कि हम दूसरों को उसके बारे में बता सकें, उन्हें प्रभु के निकट ला सकें।

   प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली सामर्थ में आनन्दित रहकर आत्मिक जीवन में स्वयं भी आगे बढ़ते रहें तथा दूसरों को भी बढ़ाते रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु से सीखें, फिर दूसरों को उसके बारे में सिखाएं।

... उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18; 3:8-11
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14


बुधवार, 3 जून 2015

बुद्धिमान वचन


   मैं अब उम्र के साठवें दशक में चल रहा हूँ; कभी कभी मैं उन बुद्धिमान अगुवों के विषय में विचार करता हूँ जिन्होंने मेरे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला। जब मैं बाइबल स्कूल में था तो परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड के मेरे अध्यापक को परमेश्वर ने मेरे लिए अपने वचन को सजीव करने के लिए प्रयोग किया। युनानी भाषा के मेरे अध्यापक ने उच्च मानकों के अविरल उपयोग पर ज़ोर देते हुए मुझे नए नियम का अध्ययन करना सिखाया। जब मैंने अपनी प्रथम पास्टर सेवा आरंभ करी तो मेरे वरिष्ठ पास्टर ने मेरा मार्गदर्शन किया कि कैसे मैं अच्छे संबंध बनाकर लोगों को आत्मिक जीवन में बढ़ना सिखाऊँ।

   राजा सुलेमान ने बड़ी बुद्धिमानी से उन कुछ तरीकों के बारे में बताया जिनके द्वारा आत्मिक अगुवे दूसरों के बढ़ने में सहायता कर सकते हैं: "बुद्धिमानों के वचन पैनों के समान होते हैं, और सभाओं के प्रधानों के वचन गाड़ी हुई कीलों के समान हैं, क्योंकि एक ही चरवाहे की ओर से मिलते हैं" (सभोपदेशक 12:11)। कुछ शिक्षक हमें उकसाते हैं तो अन्य हमारे जीवनों में मज़बूत आत्मिक ढाँचे खड़े करते हैं तो कुछ अन्य हमारे प्रति संवेदनशील रहते हैं, जब आवश्यकता होती है, हमारी सुनते हैं और हमें समझाते सिखाते हैं।

   हमारे अच्छे चरवाहे, हमारे प्रभु यीशु ने हमें विभिन्न गुणों वाले अगुवे और मार्गदर्शक दिए हैं, हमें उकसाने, सुधारने और बेहतर बनाने के लिए। हम चाहे अगुवे हों या फिर हमने अपना आत्मिक जीवन आरंभ ही किया हो, प्रभु चाहता है कि हम सब के साथ एक नम्र हृदय और प्रेम भरा व्यवहार बनाए रखें।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कैसा अद्भुत आदर है कि हम अपने प्रभु के मार्गदर्शन में उसके लिए कार्य कर सकते हैं और दूसरों को भी उसके साथ जुड़ने और चलने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। - डेनिस फिशर


हमारे वचन हमारे प्रभु परमेश्वर के मन और बुद्धिमता को प्रतिबिंबित करने वाले होने चाहिएं।

और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। - इफिसियों 4:11-12

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 12:9-14
Ecclesiastes 12:9 उपदेशक जो बुद्धिमान था, वह प्रजा को ज्ञान भी सिखाता रहा, और ध्यान लगाकर और पूछपाछ कर के बहुत से नीतिवचन क्रम से रखता था। 
Ecclesiastes 12:10 उपदेशक ने मनभावने शब्द खोजे और सीधाई से ये सच्ची बातें लिख दीं।
Ecclesiastes 12:11 बुद्धिमानों के वचन पैनों के समान होते हैं, और सभाओं के प्रधानों के वचन गाड़ी हुई कीलों के समान हैं, क्योंकि एक ही चरवाहे की ओर से मिलते हैं। 
Ecclesiastes 12:12 हे मेरे पुत्र, इन्ही में चौकसी सीख। बहुत पुस्तकों की रचना का अन्त नहीं होता, और बहुत पढ़ना देह को थका देता है।
Ecclesiastes 12:13 सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। 
Ecclesiastes 12:14 क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38


मंगलवार, 2 जून 2015

दिखाएँ और बताएँ


   यदि आप लेखक बनने का प्रशिक्षण लें या लेखकों के किसी सम्मेलन में भाग लें तो बहुत संभव है कि आप वाक्याँश "बताओ नहीं दिखाओ" को अवश्य ही सुनने पाएँगे। कहने का तात्पर्य है कि लेखकों को सिखाया जाता है कि जो हो रहा है उसे वे अपने पाठकों को अपने शब्दों से "दिखाएँ" ना कि केवल उसके बारे में बताएँ; उन्हें पाठकों को केवल जो किया वह कहना मात्र नहीं है, वरन उनके सामने वर्णन रखना है कि कैसे किया गया जिससे वे अपने मनों में उस विवरण द्वारा उस कार्य-गतिविधि का एक चित्र बना सकें।

   किंतु सामन्यतः इस प्रकार से "दिखाने" की बजाए केवल "बताने" का एक कारण है कि बताना दिखाने से अधिक सहज और तीव्र होता है। यह दिखाने के लिए कि कोई कार्य कैसे किया गया, समय और प्रयास लगता है। शिक्षा में विद्यार्थियों को यह बताना सहज होता कि उन्होंने क्या क्या गलतियाँ करी हैं, बजाए इसके कि उन्हें दिखाया जाए कि उन गलतियों को करने से कैसे बचा जा सकता है। किंतु उत्त्म दीर्घकालीन प्रभाव बताने से नहीं, दिखाने से ही आते हैं।

   हज़ारों वर्षों से यहूदियों के पास केवल व्यवस्था ही थी जो उन्हें बताती थी उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। फिर उनके मध्य में प्रभु यीशु का आगमन हुआ, जिसने अपने जीवन के उदाहरण द्वारा उन यहूदियों तथा संसार को दिखाया कि परमेश्वर को स्वीकार्य तथा भावता हुआ जीवन कैसे जीना है; वह जीवन जिसके बारे में परमेश्वर उन्हें अपने द्वारा दी गई व्यवस्था में होकर सिखा रहा था।

   प्रभु यीशु ने केवल कहा ही नहीं कि "नम्र बनो" उसने अपने आपको दीन और नम्र किया (फिलिप्पियों 2:8); प्रभु ने केवल यही नहीं कहा कि "क्षमा करो"; उसने ना केवल हमें वरन अपने बैरियों और विरोधियों को भी क्षमा करके दिखाया (कुलुस्सियों 3:13; लूका 23:34); उसने केवल कहा ही नहीं कि "परमेश्वर और पड़ौसी से प्रेम रखो", उसका सारा जीवन प्रेम परमेश्वर तथा मनुष्यों के प्रति प्रेम का सजीव उदाहरण था (यूहन्ना 3:16; यूहन्ना 15:12)।

   मसीह यीशु के जीवन से मिलने वाले सिद्ध उदहरणों से हमें सीखने को मिलता है कि परमेश्वर का हम मनुष्यों के प्रति प्रेम कितना महान है और हम मसीही विश्वासियों को दूसरों के प्रति उस प्रेम को कैसे प्रदर्शित करना है। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


प्रेम परमेश्वर की इच्छा का कार्यकारी रूप है।

यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो। - यूहन्ना 13:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:5-17
John 13:5 तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पांव धोने और जिस अंगोछे से उस की कमर बन्‍धी थी उसी से पोंछने लगा। 
John 13:6 जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उसने उस से कहा, हे प्रभु, 
John 13:7 क्या तू मेरे पांव धोता है? यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो मैं करता हूं, तू अब नहीं जानता, परन्तु इस के बाद समझेगा। 
John 13:8 पतरस ने उस से कहा, तू मेरे पांव कभी न धोने पाएगा: यह सुनकर यीशु ने उस से कहा, यदि मैं तुझे न धोऊं, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं। 
John 13:9 शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तो मेरे पांव ही नहीं, वरन हाथ और सिर भी धो दे। 
John 13:10 यीशु ने उस से कहा, जो नहा चुका है, उसे पांव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो; परन्तु सब के सब नहीं। 
John 13:11 वह तो अपने पकड़वाने वाले को जानता था इसी लिये उसने कहा, तुम सब के सब शुद्ध नहीं।
John 13:12 जब वह उन के पांव धो चुका और अपने कपड़े पहिनकर फिर बैठ गया तो उन से कहने लगा, क्या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया? 
John 13:13 तुम मुझे गुरू, और प्रभु, कहते हो, और भला कहते हो, क्योंकि मैं वही हूं। 
John 13:14 यदि मैं ने प्रभु और गुरू हो कर तुम्हारे पांव धोए; तो तुम्हें भी एक दुसरे के पांव धोना चाहिए। 
John 13:15 क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। 
John 13:16 मैं तुम से सच सच कहता हूं, दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं; और न भेजा हुआ अपने भेजने वाले से। 
John 13:17 तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20