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मंगलवार, 17 नवंबर 2015

विजेता नायक


   कुछ समय पहले किसी ने मुझ से एक बहुत कठिन प्रश्न पूछा: "बगैर पाप किए आप अधिक से अधिक कितनी देर तक रहने पाई हैं? एक सप्ताह, एक दिन, एक घण्टा?" ऐसे प्रश्न का हम क्या उत्तर दे सकते हैं? यदि हम सच्चे हों तो संभवतः हम कहेंगे, "बिना पाप किए कोई एक दिन भी रह पाया हो, ऐसा संभव नहीं है।" यदि हम अपने जीवन के पिछले सप्ताह का अवलोकन करें तो हो सकता है कि हमने पूरे सप्ताह परमेश्वर से किसी भी पाप के लिए अंगीकार ना किया हो, क्षमा ना माँगी हो; लेकिन यदि इससे हम यह मान बैठें के हमने अपने मन, या ध्यान या विचारों में पूरे सप्ताह कभी एक भी पाप नहीं किया है तो हम अपने आप को धोखा ही देंगे।

   परमेश्वर हमारे मनों को जानता है, और यह भी कि हम परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा पापों के लिए कायल किए जाने के प्रति संवेदनशील रहते हैं या नहीं। यदि हम वास्तव में अपने आप को जानते हैं और अपने पाप तथा परमेश्वर के पवित्र आत्मा के निर्देशों के प्रति संवेदनशील हैं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के कथन: "यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं" (1 यूहन्ना 1:8) को स्वीकार कर लेने में कोई संकोच नहीं होगा; और ना ही हम इससे आगे के पद में कही बात, "यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है" (1 यूहन्ना 1:10) के दोषी होना चाहेंगे।

   मुझसे जो प्रश्न मुझसे पूछा गया था, उसकी बजाए उससे बेहतर और उत्साहजनक प्रश्न होगा, "जब हम अपने पाप को मान लेते हैं और उसके लिए परमेश्वर से क्षमा माँगते हैं तो परमेश्वर का प्रत्युत्तर क्या होता है?" उत्तर है उपरोक्त दोनों पदों के बीच का पद, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। प्रभु यीशु ने हमारे पाप और उसके सारे दोष को अपने ऊपर लेकर उसका सारा दण्ड भी हमारे लिए सह लिया; वह हमारे पापों के लिए ही क्रूस पर बलिदान हुआ और फिर मृतकों में से जी उठा। इसीलिए वह हमारे अन्दर एक शुद्ध मन उत्पन्न करने और हमें एक नया जीवन, जो परमेश्वर के प्रति समर्पित और संवेद्नशील है, देने में सक्षम है (भजन 51:10)। जो कोई स्वेच्छा और पूरे समर्पण के साथ उसके पास पाप क्षमा के लिए आता है वह नए जीवन को प्राप्त करता है।

   मेरा युवा मित्र जेडन बिलकुल सही कहता है, प्रभु यीशु हमारे पापों का विजेता, हमारा नायक है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु से मिलने वाली क्षमा नए जीवन का आरंभ है।

हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। - भजन 51:10

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए। 
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12


सोमवार, 16 नवंबर 2015

श्रेय


   मैं और मेरे पति एक ग्रामीण इलाके में रहते हैं जिसके चारों ओर खेत ही खेत हैं। हमारे इस खेतीहर इलाके में अनेक स्थानों पर यह वाक्य लिखा हुआ है: ’यदि आज आपने भोजन किया है तो किसान के धन्यवादी हों।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि किसान हमारे धन्यवाद के हकदार हैं; वे हर मौसम को झेलते हुए खेत जोतने की कड़ी मेहनत करते हैं, बीज बोते हैं, फसल की देखभाल करते हैं फिर अन्न काट कर बाज़ारों में पहुँचाते हैं जिससे सब लोगों को भोजन मिलता रहे, उन्हें भूखों परेशान ना होना पड़े।

   लेकिन जितनी बार मैं किसानों का धन्यवाद करती हूं, साथ ही उस परमेश्वर पिता की भी धन्यवादी होती हूँ जिसे इस सारे भोजन को बनाने, उगाने, उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है। खेत में अन्न उगाने के लिए धरती में उपयुक्त गुण, सूरज की रौशनी, सींचने के लिए बारिश, धरती से निकल कर बाहर आने के लिए अँकुर को सामर्थ, अँकुर से पौधा और फिर पौधे में अन्न उगना आदि सब परमेश्वर की ओर से ही तो दिया जाता है। यद्यपि धरती और उसकी हर चीज़ परमेश्वर की है (भजन 24:1), परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उसके रख-रखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए संसाधनों का प्रयोग वैसे करें जैसा वह चाहता है, पृथ्वी पर उसके कार्य करने के लिए (भजन 115:16)।

   जैसे हम मनुष्य परमेश्वर की भौतिक सृष्टि के भंडारी हैं, हम समाज के लिए परमेश्वर की आत्मिक योजना को पूरा करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यह आत्मिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें उनको योग्य आदर देना है जिन्हें उसने हमारा अधिकारी ठहराया है, हमें अपने कर अदा करने हैं और आपस में प्रेम से एक दूसरे के साथ रहना और निर्वाह करना है (रोमियों 13:7-8)। लेकिन एक बात है जिसका हकदार केवल परमेश्वर है - हमारी सारी स्तुति और हमारे द्वारा उसकी महिमा, क्योंकि सृष्टि की हर बात को बनाने, संचालित तथा संभव करने वाला केवल परमेश्वर ही है (भजन 96:8-9)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के रहस्यमय तरीके हमारी असीमित आराधना के हकदार हैं।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! - भजन 96:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों13:1-10
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40


रविवार, 15 नवंबर 2015

निर्भीक सहायक


   बचपन में मेरे लिए रात को सो जाना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। जैसे ही मेरे माता-पिता कमरे की बत्ती बन्द करते, कुर्सी पर जो कपड़े बेतरतीब पड़े हुए थे, उनकी ऊबड़-खाबड़ दशा मेरे लिए विभिन्न काल्पनिक डरावने जानवरों का रूप ले लेती थी और साथ ही मुझे भय सताता था कि मेरे पलंग के नीचे कुछ है जो बस अभी बाहर निकलकर मुझ पर हमला कर देगा। भय की इस मनोदशा में नींद मेरी आँखों से कोसों दूर भाग जाती थी।

   उम्र और अनुभव के साथ मुझे यह एहसास हो चला है कि भय ना केवल बच्चों को वरन व्यसकों को भी कमज़ोर और जड़ कर देता है, सब कुछ जानते और समझते हुए भी सही कार्य को करने से रोक देता है। भय के कारण ही हम क्षमा नहीं करते, अपने कार्य स्थल पर सही बात के लिए निर्णय लेकर खड़े नहीं होते या अपने विचार सबके सामने नहीं रखते, अपने संसाधनों को परमेश्वर के राज्य में उपयोग होने के लिए नहीं देते, जब हमारे सब मित्र ’हाँ’ बोल रहे होते हैं तब ’ना’ कहने की हिम्मत नहीं रख पाते। यदि हम अपने सहारे हों तो हमारे जीवनों में ना जाने कितने डरावनी बातें हैं जो हमें सही और सच का साथ देने से रोकती रहती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्ज की गई प्रभु यीशु और उनके चेलों का तूफान में फंसी नाव की घटना को जब मैं देखता हूँ तो उस नाव में केवल एक ही था जो भयभीत नहीं था - प्रभु यीशु। ना तो प्रभु कभी किसी तूफान से डरा, ना ही दुष्ट-आतमाओं का सामना करने से और ना ही कब्रों में रहने वाले और दुष्ट-आत्मा की सेना से भरे उन व्यक्तियों से डरा जिन्हें कोई वश में नहीं कर सका था (मत्ती 8:23-34)। संसार या जीवन की कोई परिस्थिति, व्यक्ति, घटना, सामर्थ, अधिकार या कोई भी बात हमारे प्रभु को कभी ज़रा सा भी भयभीत नहीं करने पाई, उससे कभी कुछ गलत या अनुचित नहीं करवाने पाई; क्योंकि ऐसा कुछ नहीं है जिस पर हमारा प्रभु सामर्थी नहीं है, जिसे वश में नहीं कर सकता, जिसे बदल नहीं सकता, जिसकी दुषक्रीयाओं को विफल नहीं कर सकता, जिसकी हानिकारक योजनाओं को पलट नहीं सकता। हमारे प्रभु ने हम मसीही विश्वासियों से वायदा किया है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)।

   अगली बार जब हमें किसी डर का सामना करना पड़े, या कोई भय हमें सही निर्णय लेने से रोकना चाहे, तब हमें चाहिए कि हम प्रभु यीशु द्वारा चेलों से किया गया प्रश्न अपने सामने रखें: "...हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो?..." (मत्ती 8:26) और स्मरण करें कि उसने वायदा किया है कि वह हमें ना तो कभी छोड़ेगा और ना त्यागेगा (इब्रानियों 13:5-6)। जब कभी संसार और शैतान की शक्तियाँ हमें कमज़ोर करने, हमसे गलत करने या करवाने, हमारी मसीही विश्वासी होने की गवाही को बिगाड़ने के लिए हमें किसी भय के द्वारा अपनी आधीनता में लाना चाहें तो अपने निर्भीक और सदैव जयवन्त प्रभु यीशु और उसके हमारे साथ सदा बने रहने के वायदे को याद करें और भयभीत होकर कभी कुछ भी गलत, अनुचित या असंगत ना करें। - जो स्टोवैल


हर भय के समय में अपने निर्भीक सहायक प्रभु यीशु को पुकारें।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: मत्ती 8:23-34
Matthew 8:23 जब वह नाव पर चढ़ा, तो उसके चेले उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 8:24 और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफान उठा कि नाव लहरों से ढंपने लगी; और वह सो रहा था। 
Matthew 8:25 तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा, हे प्रभु, हमें बचा, हम नाश हुए जाते हैं। 
Matthew 8:26 उसने उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उसने उठ कर आन्‍धी और पानी को डांटा, और सब शान्‍त हो गया। 
Matthew 8:27 और लोग अचम्भा कर के कहने लगे कि यह कैसा मनुष्य है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं। 
Matthew 8:28 जब वह उस पार गदरेनियों के देश में पहुंचा, तो दो मनुष्य जिन में दुष्टात्माएं थीं कब्रों से निकलते हुए उसे मिले, जो इतने प्रचण्‍ड थे, कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। 
Matthew 8:29 और देखो, उन्होंने चिल्लाकर कहा; हे परमेश्वर के पुत्र, हमारा तुझ से क्या काम? क्या तू समय से पहिले हमें दु:ख देने यहां आया है? 
Matthew 8:30 उन से कुछ दूर बहुत से सूअरों का एक झुण्ड चर रहा था। 
Matthew 8:31 दुष्टात्माओं ने उस से यह कहकर बिनती की, कि यदि तू हमें निकालता है, तो सूअरों के झुण्ड में भेज दे। 
Matthew 8:32 उसने उन से कहा, जाओ, वे निकलकर सूअरों में पैठ गए और देखो, सारा झुण्ड कड़ाड़े पर से झपटकर पानी में जा पड़ा और डूब मरा। 
Matthew 8:33 और चरवाहे भागे, और नगर में जा कर ये सब बातें और जिन में दुष्टात्माएं थीं उन का सारा हाल कह सुनाया। 
Matthew 8:34 और देखो, सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर बिनती की, कि हमारे सिवानों से बाहर निकल जा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19


शनिवार, 14 नवंबर 2015

सहायक


   जब चारागाहें बर्फ से ढक जाती हैं तब पशु-पालकों को पशुओं के लिए चारा और भूसा अपने हाथों से डालना पड़ता है। जब चारा और भूसा मैदान में डाला जा रहा होता है, तब ताकतवर और कद्दावर जानवर अपने बल के द्वारा आगे आकर पहले खाने लगते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ जानवरों को खाने के लिए कुछ नहीं मिलता जब तक कि पशु-पालक स्वयं कुछ यत्न करके उन्हें भोजन उपलब्ध ना करवा दें।

   शरणार्थी शिविरों और ज़रूरतमन्दों के मध्य भोजन बाँटने के भंडारे में कार्य करने वाले भी इसी समस्या का सामना करते हैं; जब भोजन वितरण आरंभ होता है तब बलवान आगे आकर भोजन छीन-झपट लेते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ बिना भोजन के रह जाते हैं जब तक कि भंडारे का आयोजन करने वाले कुछ विशेष प्रबंध करके उन कमज़ोरों और अस्वस्थ लोगों को भोजन उपलब्ध ना करवाएं। यह समाज का प्रचलन है कि गरीबों, कमज़ोरों और लाचारों तक अकसर सही सहायता नहीं पहुँचती, जब तक की किसी विशेष प्रबंध के द्वारा उन्हें वह ना पहुँचाई जाए।

   किनारा किए गए लोगों तक विशेष प्रबंध द्वारा सहायता पहुँचाना परमेश्वर द्वारा स्थापित सिद्धांत का पालन करना है। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपनी प्रजा इस्त्राएल के लोगों को निर्देश दिए कि वे अपने खेतों और दाख की बारियों से फसल जमा करते समय कुछ कुछ वहीं छोड़ दिया करें जिससे गरीबों और परदेशियों के पास भोजन के लिए कुछ हो (लैव्यवस्था 19:9-10)।

   आज हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए गुणों और संसाधनों के सही उपयोग के द्वारा कमज़ोर, थके-मांदे और लाचारों के सहायक बन सकते हैं; शिक्षक भीरु, शर्मीले और दब्बू छात्रों को प्रोत्साहित करके, उनकी सहायता करके उन्हें बेहतर बना सकते हैं; मज़दूर अपने किसी कमज़ोर सह-कर्मी के काम में हाथ बंटा सकते हैं; कैदी नए कैदियों को समझाने और उन्हें शान्त करने में सहायता कर सकते हैं; अभिभावक अपने बच्चों को उभारने और संवारने में सहायक हो सकते हैं - यदि इच्छा हो तो सहायक होने के अवसरों की कमी नहीं है, सहायक बन कर हम परमेश्वर का आदर करते हैं, उसे महिमा देते हैं।

   जैसे परमेश्वर ने हमारी कमज़ोरी की दशा में हम पर अनुकंपा और अनुग्रह किया, हमारा सहायक बना, हमें उठा कर खड़ा किया, वैसे ही आज हम परमेश्वर के इसी गुण और वरदान को दूसरों तक पहुँचा कर परमेश्वर के प्रेम को उनके साथ बांट सकते हैं, उन्हें जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के निकट आने और उसे समझने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। - रैंडी किलगोर


दूसरों की सेवा करके हम परमेश्वर की सेवा करते हैं।

हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:4-5

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 19:9-15
Leviticus 19:9 फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो तब अपने खेत के कोने कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना। 
Leviticus 19:10 और अपनी दाख की बारी का दाना दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 19:11 तुम चोरी न करना, और एक दूसरे से न तो कपट करना, और न झूठ बोलना। 
Leviticus 19:12 तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:13 एक दूसरे पर अन्धेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। और मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात बिहान तक न रहने पाए। 
Leviticus 19:14 बहिरे को शाप न देना, और न अन्धे के आगे ठोकर रखना; और अपने परमेश्वर का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:15 न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुंह देखा विचार करना; उस दूसरे का न्याय धर्म से करना।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39


शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

पूरक


   क्रिस्टी ने अपने जन्मदिन के उत्सव के दिन आए हुए सब मेहमानों को अपनी ओर से भेंट देकर चकित कर दिया। क्रिस्टी ने हम सब को एक एक व्यक्तिगत चिठ्ठी दी जिसमें उसने प्रत्येक के लिए व्यक्तिगत रिति से लिखा था कि उसके जीवन में हम क्या स्थान रखते हैं, और साथ ही परमेश्वर ने हमें जैसा बनाया और जो जो कार्य सौंपा है उसके विषय में हमें प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ शब्द लिखे थे; प्रत्येक व्यक्ति को लिखी चिठ्ठी के साथ क्रिस्टी ने एक और चीज़ रखी थी - जिग्सौ पहेली के अंश, हमें यह स्मरण दिलाने के लिए हम अपने आप में अद्वितीय तो हैं, किसी के भी बिलकुल जैसा और कोई अन्य नहीं है, लेकिन साथ ही हम एक दूसरे के पूरक भी हैं, जिग्सौ पहेली के समान हम एक साथ मिलकर ही परमेश्वर की योजना का पूरा चित्र बना सकते हैं।

   इस अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए 1 कुरिन्थियों 12 के विविरण को नए दृष्टिकोण से पढ़ने-समझने में सहायता करी। इस अध्याय में प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के विश्वासियों की मण्डली अर्थात चर्च की तुलना मानव शरीर से करी है, यह समझाने के लिए जैसे शरीर अनेक अंगों जैसे हाथ, पैर, आँख, कान इत्यादि से मिलकर बना है और प्रत्येक अंग का अपना उपयोग, अपनी भूमिका, अपनी आवश्यकता है, वैसे ही मसीही मण्डली या चर्च भी मसीह यीशु के सभी विश्वासियों से मिलकर बनी है और सबकी अपनी उपयोगिता, भूमिका और आवश्यकता है, जिसके बिना मण्डली या चर्च अपूर्ण है।

   बहुत सरल होता है किसी दूसरे की सेवकाई और वरदानों को देखकर अपने आप को गौण और महत्वहीन समझ लेना, विशेषकर तब जब वह दूसरा किसी प्रमुख या प्रगट कार्य में लगा हो। लेकिन प्रभु चाहता है कि हम अपने आप को उस नज़रिए से देखें जिससे प्रभु हमें देखता है - उसके द्वारा सृजन में अद्वितीय और भूमिका तथा उपयोगिता में बहुमूल्य तथा अति महत्वपूर्ण। इस सृष्टि और परमेश्वर की योजना रूपी जिग्सौ पहेली में आप एक महत्वपूर्ण भाग हैं, आपके बिना उसका चित्र पूरा नहीं हो सकता। इस चित्र में अपने स्थान को भरने के लिए परमेश्वर ने आपको एक स्वरूप और कुछ गुण दिए हैं, और आप उन ही संसाधनों के द्वारा परमेश्वर के लिए कार्यकारी, उपयोगी और उसे महिमा देने वाले बन सकते हैं।

   अन्य लोगों से अपनी तुलना करने के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर की मण्डली में अन्य लोगों के साथ पूरक बनाईए और उसके द्वारा दिए गए संसाधनों का सदुपयोग कीजिए। - डेविड मैक्कैअसलैंड


आपका जीवन परमेश्वर की ओर से आपको दिया गया उपहार है; इस जीवन को परमेश्वर को भेंट करके उसकी महिमा के लिए कार्य करें।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों 12:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18


गुरुवार, 12 नवंबर 2015

असफलता तथा शर्मिंदगी


   मार्ग के किनारे पुलिस की गाड़ी की जलती-बुझती बत्तियों ने मेरा ध्यान वहाँ खड़ी एक अन्य गाड़ी की ओर खेंचा, उसे यातायात नियम के उल्लंघन के लिए रोका गया था। मुझे पुलिस कार से उतरकर, हाथ में चालान काटने की पुस्तिका लिए उस गाड़ी की ओर बढ़ता हुआ पुलिस अधिकारी दिखाई दिया, और गाड़ी के अन्दर बैठी चालिका भी जो अपने चेहरे को अपने हाथों से ढाँपे हुए थी जिससे आते-जाते लोग उसको पहचान ना सकें। उसकी प्रतिक्रीया दिखा रही थी कि वह अपने गलत चुनाव और उसके दुषपरिणाम को लेकर कैसी शर्मिंदा थी।

   प्रभु यीशु के सामने जब भीड़ एक दोषी स्त्री को लाई, और उसके व्यभिचार को प्रकट किया तो भीड़ की मनसा केवल उस स्त्री को शर्मिंदा मात्र ही करने की नहीं थी; वे देखना चाहते थे कि प्रभु की क्या प्रतिक्रीया होगी। वे उस स्त्री को दोषी और दंड पाने के योग्य देखना चाहते थे, लेकिन प्रभु यीशु ने उस पर दया दिखाई; वह, केवल जिसे पाप का दोष और उसका दण्ड देने का अधिकार है, उस स्त्री के विफल चरित्र के प्रति करुणामय और क्षमाशील था। जब उस स्त्री पर दोषारोपण करने वाले चले गए, तब "यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना" (यूहन्ना 8:11)।

   प्रभु यीशु की यह करुणा हमें उसके क्षमा करने वाले अनुग्रह की याद दिलाती है, और उस स्त्री को दिया गया उसका निर्देश दिखाता है कि प्रभु चाहता है कि हम इस अनुग्रह के आनन्द में सदा बने रहें; और यह दोनों बातें मिलकर ठोकर खाकर पाप में गिरने वालों के प्रति प्रभु यीशु के नज़रिए को दिखाती हैं कि वह पापियों को भी नाश नहीं वरन पाप से परिवर्तित जीवन, पाप और उसके दोष तथा दुषपरिणामों से रहित आनन्दमय जीवन देना चाहता है।

   हम अपने सबसे बुरी नैतिक असफलता तथा शरमिंदगी की हालात में भी पूरे भरोसे के साथ उसे पुकार सकते हैं, उसकी ओर निःसंकोच हाथ बढ़ा सकते हैं क्योंकि उस की करुणा वास्तव में अद्भुत है, उसकी दया और क्षमा असीम हैं, वह किसी को भी अपने से दूर रखना नहीं चाहता। - बिल क्राउडर


हर परीक्षा का सामना करने के लिए आवश्यक अनुग्रह और सामर्थ हमें केवल प्रभु यीशु से ही प्राप्त हो सकती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। 
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। 
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा। 
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है। 
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है? 
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा। 
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे। 
John 8:8 और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा। 
John 8:9 परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। 
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी। 
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9


बुधवार, 11 नवंबर 2015

आशा


   यीव्स कोंगर 10 वर्ष का बालक था जब प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ और फ्रांस के जिस कसबे में वह रहता था उसपर जर्मन सेना का हमाला हुआ। यीव्स की माँ ने उसे प्रोत्साहित किया कि वह अपने अनुभवों को एक डायरी में लिखे, जिसका परिणाम था उस सैन्य कबज़े का एक स्पष्ट और विस्तृत विवरण जिसमें रंगीन रेखा-चित्र भी सम्मिलित थे। यीव्स की डायरी में एक बच्चे के नज़रिये से उस आपदा का चित्रण किया गया; जो कुछ उसने देखा और अनुभव किया उसका इतना गहरा प्रभाव उसके जीवन पर पड़ा कि उसने अपने आप को विवश महसूस किया कि वो मसीह यीशु में उपलब्ध आश्गा को अन्य लोगों तक पहुँचाने में प्रयासरत रहे।

   सदियों पहले यिर्मयाह नबी भी एक आपदा का गवाह रहा था, यरुशालेम पर राजा नबूक्दनेस्सर की चढ़ाई और विनाश का। यिर्मयाह ने भी अपने अनुभव और जो कुछ उसने देखा एक पुस्तिका में लिखा जो आज ’विलापगीत’ के नाम से परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग है। उन दिनों के कष्टप्रद अनुभवों और बातों के बावजूद यिर्मयाह ने परमेश्वर में आशा और शान्ति पाई; उसने लिखा, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:22-23)।

   जीवन के भिन्न समयों में हम कटु अनुभवों, त्रास्दियों और आपदाओं से होकर निकल सकते हैं, लेकिन ये कष्ट और परेशानी के समय सदा बने नहीं रहते। यिर्मयाह के समान ही हमारी सबसे भरोसेमन्द आशा है अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की विश्वासयोग्यता और प्रावधानों पर विचार करना और उसपर अपने विश्वास को बनाए रखना। जब हम ऐसा करना आरंभ करेंगे तो जैसा यिर्मयाह का अनुभव था, हम भी पाएंगे कि परमेश्वर की करुणा हमारे लिए प्रतिदिन नई रहती है, हर परिस्थिति में हमारे प्रति उसकी विश्वासयोग्यता अति महान बनी रहती है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता ही हमारी आशा का सर्वोत्तम आधार है।

क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है। हबकुक 3:17-19

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:19-33
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8