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गुरुवार, 21 जून 2018

प्रेम



      प्रेम केवल सँसार को चलाता ही नहीं है, वरन वह हमें भावनात्मक और चोट खाने के लिए खुला भी कर देता है। हम समय-समय पर अपने आप से कहते हैं, “क्यों प्रेम करें जब दूसरे कोई सराहना नहीं करते हैं?” या “क्यों प्रेम में पड़कर मैं अपने आप को दुखी होने के लिए खुला करूँ?” परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस प्रेम करते रहने का स्पष्ट और सीधा कारण देता है: “पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।  प्रेम का अनुकरण करो...” (1 कुरिन्थियों 13:13-14:1)।

      बाइबल के व्याख्याकर्ता सी. के. बैरट लिखते हैं, “प्रेम क्रिया है, स्वयं परमेश्वर की क्रिया; और जब मनुष्य उससे या अन्य मनुष्यों से प्रेम करते हैं, तब वे (चाहे जितने भी असिद्ध रीति से) वही करते हैं जो परमेश्वर करता है। और जब हम परमेश्वर के समान कार्य करते हैं, तो परमेश्वर प्रसन्न होता है।

      प्रेम के मार्ग का अनुकरण करने के लिए, विचार कीजिए कि आप 1 कुरिन्थियों 13:4-7 में दिए गए गुणों को अपने जीवन में कार्यशाली किस प्रकार से प्रदर्शित कर सकते हैं? उदाहरण के लिए, अपने आप से पूछिए, जैसा धैर्य परमेश्वर मेरे प्रति दिखाता है, मैं अपनी सन्तान के प्रति वैसा ही धैर्य कैसे दिखा सकता हूँ? मैं अपने माता-पिता के प्रति आदर और दया कैसे दिखा सकता हूँ? अपने कार्य-स्थल पर  कार्य करते समय मैं औरों के हित के बारे में कैसे ध्यान कर सकता हूँ? जब मेरे किसी मित्र के साथ कुछ अच्छा होता है तो क्या मैं उसके साथ आनन्दित होता हूँ या ईर्ष्या करता हूँ?

      जब हम “प्रेम का अनुकरण” करेंगे, तो हम पाएँगे कि हम बहुधा प्रेम के स्त्रोत, परमेश्वर, तथा प्रभु यीशु, जो प्रेम का सबसे महान उदाहरण है, की ओर मुड़ते हैं। और तब ही हम सच्चे प्रेम की गहरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, तथा परमेश्वर के समान औरों से प्रेम करने की सामर्थ्य पा सकते हैं। - पो फैंग चिया


हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। - 1 यूहन्ना 4:7

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42



बुधवार, 20 जून 2018

हू-आ


      अमरीकी सेना की उक्ति “हू-आ” सैनिकों द्वारा सहमति में उच्चारित किया गया प्रत्युत्तर है। इसका मूल अर्थ तो इतिहास में कहीं खो गया है, परन्तु कुछ का कहना है कि यह एक प्राचीन परिवर्णी शब्द HUA – Heard (सुना), Understood (समझा), Acknowledged (स्वीकार किया) से आया है। मैंने इसे सबसे पहले अपने आरंभिक सैन्य-प्रशिक्षण में सुना था।

      कई वर्षों के पश्चात यह शब्द पुनः मेरी शब्दावली में सम्मिलित हो गया, जब मैंने बुधवार प्रातः बाइबल अध्ययन के लिए कुछ लोगों के साथ जमा होना आरंभ किया। एक प्रातः एक पुरुष ने, जो एक सैनिक रहा था, तथा परमेश्वर के वचन बाइबल में से एक भजन को पढ़ रहा था, जब वह उस भजन में लिखे संकेत शब्द सेला पर आया तो उसने सेला के स्थान पर कहा “हू-आ”; और तब से वह हमारे लिए सेला के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला शब्द बन गया।

      कोई यह निश्चित नहीं जानता है कि सेला का वास्तविक अर्थ क्या होता है। कुछ कहते हैं यह भजन के संगीत से संबंधित संकेत शब्द है। यह बहुधा एक ऐसे सत्य के बाद प्रयोग होता है, जिसके लिए एक गंभीर, भावनात्मक उत्तर की अपेक्षा की जाती है। इस अभिप्राय में, मेरे लिए सेला के स्थान पर “हू-आ” उपयुक्त है।
      आज प्रातः मैंने भजन 68:19 पढ़ा: “धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है”। सेला

      ज़रा भजनकार द्वारा कही गई इस बात की कल्पना कीजिए, प्रति प्रातः परमेश्वर हमें अपने कंधों पर उठाता है और दिन भर लिए फिरता है। वही हमारा उद्धार है। हम उसमें सुरक्षित एवँ सकुशल हैं, हमें किसी बात की चिंता करने की या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए मैं इसके लिए कहता हूँ, “हू-आ”! – डेविड रोपर


आराधना परमेश्वर को वह सर्वोत्तम अर्पित करना है जो उसने हमें दिया है। - ओसवाल्ड चैम्बर्स

तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा। सेला – भजन 32:7

बाइबल पाठ: भजन 68:7-10, 19-20
Psalms 68:7 हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला,
Psalms 68:8 तब पृथ्वी कांप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के साम्हने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हां इस्राएल के परमेश्वर के साम्हने कांप उठा।
Psalms 68:9 हे परमेश्वर, तू ने बहुत से वरदान बरसाए; तेरा निज भाग तो बहुत सूखा था, परन्तु तू ने उसको हरा भरा किया है;
Psalms 68:10 तेरा झुण्ड उस में बसने लगा; हे परमेश्वर तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है।
Psalms 68:19 धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है। सेला
Psalms 68:20 वही हमारे लिये बचाने वाला ईश्वर ठहरा; यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21


मंगलवार, 19 जून 2018

अध्ययन



      सातवें महीने के पहले दिन, 444 ईसा पूर्व, जब सूर्योदय हुआ, तब एज्रा ने मूसा द्वारा परमेश्वर से प्राप्त हुई व्यवस्था की पुस्तक को, जो आज हमारे पास परमेश्वर के वचन बाइबल की पहली पाँच पुस्तकों के रूप में विद्यमान है, यरूशलेम के लोगों के सामने एक मंच पर खड़े होकर पढ़ना आरंभ किया, और पूरा होने तक उसे छः घंटे तक पढ़ता रहा।

      नगर के द्वार पर, जो जलफाटक भी कहलाता था, पुरुष, महिलाएँ और बच्चे, परमेश्वर द्वारा निर्धारित तुरहियों का पर्व मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। वे परमेश्वर की व्यवस्था की बातों को खड़े सुनते रहे, और उनकी प्रतिक्रिया में हम चार बातें देखते हैं। वे व्यवस्था की उस पुस्तक के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण खड़े हो गए (नहेम्याह 8:5)। उन्होंने हाथों को उठाकर परमेश्वर की स्तुति की और सहमति के लिए “आमीन” कहा। उन्होंने दीन होकर दण्डवत किया (पद 6)। उन्होंने ध्यान से पवित्रशास्त्र के पढ़े तथा समझाए जाने को सुना (पद 8)। वह कैसा अद्धभुत दिन था जब वह पुस्तक जो “परमेश्वर ने इस्राएल के लिए दी थी” उसे यरूशलेम की नवनिर्मित दीवारों अन्दर ऊँची आवाज़ में पढ़ा गया।

      एज्रा द्वारा परमेश्वर के वचन को पढ़ने के इस लंबे सत्र के वर्णन से हम सीखते हैं कि परमेश्वर के वचन को पढ़ना, उसकी स्तुति, आराधना, और उससे सीखने का माध्यम होता है। जब हम बाइबल को खोलकर उसका अध्ययन करते हैं, तो हम प्रभु यीशु के बारे में और अधिक सीखते हैं। बाइबल अध्ययन हमें परमेश्वर की स्तुति, आराधना, और हमारे लिए उसकी इच्छा एवँ योजना जानने में सहायक होता है। - डेव ब्रैनन


बाइबल अध्ययन का उद्देश्य केवल सीखना ही नहीं, वरन जीवन को सँवारना है।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: नहेम्याह 8:1-8
Nehemiah 8:1 जब सातवां महीना निकट आया, उस समय सब इस्राएली अपने अपने नगर में थे। तब उन सब लोगों ने एक मन हो कर, जलफाटक के साम्हने के चौक में इकट्ठे हो कर, एज्रा शास्त्री से कहा, कि मूसा की जो व्यवस्था यहोवा ने इस्राएल को दी थी, उसकी पुस्तक ले आ।
Nehemiah 8:2 तब एज्रा याजक सातवें महीने के पहिले दिन को क्या स्त्री, क्या पुरुष, जितने सुनकर समझ सकते थे, उन सभों के साम्हने व्यवस्था को ले आया।
Nehemiah 8:3 और वह उसकी बातें भोर से दो पहर तक उस चौक के साम्हने जो जलफाटक के साम्हने था, क्या स्त्री, क्या पुरुष और सब समझने वालों को पढ़कर सुनाता रहा; और लोग व्यवस्था की पुस्तक पर कान लगाए रहे।
Nehemiah 8:4 एज्रा शास्त्री, काठ के एक मचान पर जो इसी काम के लिये बना था, खड़ा हो गया; और उसकी दाहिनी अलंग मत्तित्याह, शेमा, अनायाह, ऊरिय्याह, हिल्किय्याह और मासेयाह; और बाई अलंग, पदायाह, मीशाएल, मल्किय्याह, हाशूम, हश्बद्दाना, जकर्याह और मशुल्लाम खड़े हुए।
Nehemiah 8:5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए।
Nehemiah 8:6 तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमीन, आमीन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया।
Nehemiah 8:7 और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान और पलायाह नाम लेवीय, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे।
Nehemiah 8:8 और उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक से पढ़कर अर्थ समझा दिया; और लोगों ने पाठ को समझ लिया।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37



सोमवार, 18 जून 2018

विजय


      प्रति वर्ष 18 जून के दिन वॉटरलू, जो अब बेलजियम में है, के महायुद्ध को स्मरण किया जाता है, क्योंकि इस दिन ड्यूक ऑफ वेलिंगटन के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने नेपोलियन की फ्रांसीसी सेना को पराजित किया था। तब से किसी प्रबल विरोधी के हाथों पराजय की स्थिति का सामना करने के लिए वाक्याँश “वॉटरलू का सामना करना” प्रयोग किया जाता है।

      हमारे आत्मिक जीवनों के संबंध में कुछ लोगों की धारणा रहती है कि अन्ततः हम विफल हो ही जाएँगे; यह केवल समय की बात है, हमें अपने वॉटरलू का सामना तो करना ही पड़ेगा। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु के अनुयायी, प्रेरित यूहन्ना ने इस निराशावादी दृष्टिकोण का खंडन करते हुए लिखा, “क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है” (1 यूहन्ना 5:4)।

      यूहन्ना अपनी इस पहली पत्री में आत्मिक विजय के सन्देश का ताना-बाना बुनता है, और अपने पाठकों से आग्रह करता है कि वे इस नश्वर सँसार की अस्थायी बातों में मन न लगाएँ, क्योंकि वे सब शीघ्र ही नष्ट हो जाएँगी “तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा” (1 यूहन्ना 2:15-17)। वरन हमें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए और उसे प्रसन्न करना चाहिए क्योंकि परमेश्वर ने अपने अनुयायियों से अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा की है: “और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है” (2:25)।

      हमारे जीवनों में उतराव-चढ़ाव आ सकते हैं, और कुछ संघर्ष ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें पराजय निश्चित सी लगे। परन्तु हम मसीही विश्वासियों को सदा इस बात का निश्चय रहना चाहिए कि मसीह यीशु में होकर अनतः विजय हमारी ही है; उसकी सामर्थ्य ने हमारे लिए यह निर्धारित और सुनिश्चित कर दिया है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर पर भरोसा रख कर आगे बढ़ते जाना ही समस्याओं का समाधान है।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं। परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।– रोमियों 8: 35-37

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 5: 1-13
1 John 5:1 जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है और जो कोई उत्पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्पन्न हुआ है।
1 John 5:2 जब हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, और उस की आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं, कि परमेश्वर की सन्‍तानों से प्रेम रखते हैं।
1 John 5:3 और परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं।
1 John 5:4 क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है।
1 John 5:5 संसार पर जय पाने वाला कौन है केवल वह जिस का यह विश्वास है, कि यीशु, परमेश्वर का पुत्र है।
1 John 5:6 यही है वह, जो पानी और लोहू के द्वारा आया था; अर्थात यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा, वरन पानी और लोहू दोनों के द्वारा आया था।
1 John 5:7 और जो गवाही देता है, वह आत्मा है; क्योंकि आत्मा सत्य है।
1 John 5:8 और गवाही देने वाले तीन हैं; आत्मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।
1 John 5:9 जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्वर की गवाही तो उस से बढ़कर है; और परमेश्वर की गवाही यह है, कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है।
1 John 5:10 जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिसने परमेश्वर को प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्वास नहीं किया, जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है।
1 John 5:11 और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।
1 John 5:12 जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।
1 John 5:13 मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


रविवार, 17 जून 2018

अब्बा, पिता



      पिताओं के दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में दिए जाने वाले एक कार्ड पर कार्टून बना हुआ था – एक पिता अपने एक हाथ से अपने आगे घास काटने की मशीन को धक्का दे रहा था, तथा साथ ही दूसरे हाथ से अपने पीछे बच्चों को घुमाने वाली एक गाड़ी को भी खींच रहा था, जिसमें उसकी तीन वर्षीय पुत्री बैठी हुई थी, और अपने पिता के साथ घर के लॉन की सैर से आनन्दित हो रही थी। ऐसा करना बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प तो नहीं है, परन्तु कौन कहता है कि पिता एक साथ कई कार्यों को नहीं कर सकते हैं।

      बचपन में यदि आपके पिता अच्छे थे, तो ऊपर दिए गए वर्णन से अनेकों अच्छी यादें उभर सकती हैं। परन्तु अनेकों लोगों के लिए “पिता” का ध्यान एक अपूर्ण विचार है। यदि हमारे बचपन में ही हमारे पिता हमें छोड़ कर चले जाएँ, अथवा उनकी मृत्यु हो जाए, या हम उनके व्यवहार से दुखित रहें, तो फिर प्रेरणा के लिए हम किस की ओर मुड़ेंगे?

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, दाऊद, के जीवन में, पिता के रूप में कुछ कमियां अवश्य थीं, परन्तु दाऊद निश्चय ही परमेश्वर के पिता होने स्वभाव को भली-भांति समझता था। दाऊद ने परमेश्वर के विषय में लिखा, “परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है। परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बन्धुओं को छुड़ाकर भाग्यवान करता है; परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है” (भजन 68:5-6)। प्रेरित पौलुस ने इसी विचार को और विस्तृत किया, और छोटे बच्चों द्वारा पिता के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले शब्द “अब्बा” का प्रयोग करते हुए लिखा “क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं” (रोमियों 8:15)। यह वही शब्द है जिसे प्रभु यीशु मसीह ने भी प्रयोग किया था, जब वह क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए अपने एक शिष्य द्वारा धोखे से पकड़वाए जाने से पहले, अत्यंत दुखी होकर परमेश्वर से प्रार्थना कर रहा था (मरकुस 14:36)।

      हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कैसा अद्धभुत विशेषाधिकार है कि हम इसी अंतरंग शब्द के प्रयोग के साथ प्रार्थना में परमेश्वर के सम्मुख आ सकते हैं। हमारा अब्बा अपने परिवार में प्रत्येक उस व्यक्ति का स्वागत करता है, जो पापों से पश्चाताप और प्रभु यीशु में विश्वास तथा समर्पण के साथ उसकी ओर मुड़ता है। - टिम गुस्ताफसन


एक अच्छा पिता, स्वर्गीय पिता का प्रेम दर्शाता है।

सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।” - मत्ती 6:9

बाइबल पाठ: रोमियों 8:12-17
Romans 8:12 सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें।
Romans 8:13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।
Romans 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।
Romans 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं।
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं।
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3



शनिवार, 16 जून 2018

निर्देश और विधि



   हमारे घर में, “विधि” मेरे लिए बड़ी खिसियाहट का, और मेरे परिवार जनों के लिए बड़े परिहास का विषय रही है। हमारी शादी के आरंभिक समय में मैं घर के मरम्मत के छोटे-मोटे कार्य करने के प्रयास करता था – परन्तु परिणाम उलटे ही होते थे, मरम्मत की गई वस्तुएँ ठीक कार्य नहीं करती थीं, वरन और कुछ को ख़राब ही कर देती थीं। हमारे बच्चे होने के बाद भी मेरी ये विफलताएं जारी रहीं; बच्चों के टूटे हुए “साधारण” से खिलौने जोड़ने में भी कुछ ठीक नहीं होता था। मेरी मुख्य समस्या थी कि मैं उन कार्यों और मरम्मत के लिए मिलने वाले निर्देशों का पालन नहीं करता था, अपनी ही सोच और विधि द्वारा सब कुछ करने का प्रयास करता था।

   धीरे-धीरे मैं ने सीख लिया कि मुझे निर्देशों का सटीक पालन करना पड़ेगा, और दी गई विधि के अनुसार ही कार्य को करना पड़ेगा। मैंने पाया कि ऐसा करने से मेरे कार्य सही और सफल होते थे। परन्तु जितना अधिक यह ठीक चलता था, उतना अधिक मुझे अपने पर भरोसा होने लगता था, और मैं फिर से अपनी ही विधि अपनाने लग जाता था, जिसके परिणाम फिर से बुरे निकलने लगते थे।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्राचीन इस्राएली भी इसी प्रवृत्ति के साथ संघर्ष करते थे। वे परमेश्वर द्वारा दिए गए निर्देशों को भुलाकर अपने इलाके के अन्यजाति लोगों के समान बाल तथा अन्य देवी-देवताओं की उपासना में पड़ा जाते थे (न्यायियों 2:12)। उनके इस अपनी ही उपासना-विधि को अपनाने के घातक परिणाम होते थे, और वे परेशानियों में पड़े रहते थे जब तक कि परमेश्वर उन्हें उस परेशानी से छुड़ा नहीं लेता था। ऐसा करने के लिए परमेश्वर उनमें से न्यायी खड़े करता था, जो परमेश्वर के निर्देशों और विधि के अनुसार कार्य करके इस्राएलियों को वापस परमेश्वर की ओर लेकर आते थे (2:18)। परन्तु कुछ ही समय के बाद वे फिर से परमेश्वर के निर्देशों को भुलाकर, अपनी ही विधि अपना कर जीवन व्यतीत करने लगते थे।

   परमेश्वर ने उसके प्रति हमारे प्रेम को बनाए रखने के लिए अनेकों निर्देश दिए हैं, और उनके पीछे उसके अपने कारण हैं। उसके ये निर्देश उसके जीवते वचन बाइबल में मिलते हैं, जिससे हमें जीवन और भक्ति से संबंधित सभी बातों की सही शिक्षाएँ मिलती हैं। परमेश्वर की जीवित उपस्थिति के एहसास में प्रतिदिन बने रहने के द्वारा ही हम अपने जीवनों को अपनी ही विधि के अनुसार चलाने के प्रलोभन से बचे रह सकते हैं। - रैंडी किल्गोर


हमारा सबसे बड़ा विशेषाधिकार है परमेश्वर की उपस्थिति का आनन्द लेना।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: न्यायियों 2:7-19
Judges 2:7 और यहोशू के जीवन भर, और उन वृद्ध लोगों के जीवन भर जो यहोशू के मरने के बाद जीवित रहे और देख चुके थे कि यहोवा ने इस्राएल के लिये कैसे कैसे बड़े काम किए हैं, इस्राएली लोग यहोवा की सेवा करते रहे।
Judges 2:8 निदान यहोवा का दास नून का पुत्र यहोशू एक सौ दस वर्ष का हो कर मर गया।
Judges 2:9 और उसको तिम्नथेरेस में जो एप्रैम के पहाड़ी देश में गाश नाम पहाड़ की उत्तर अलंग पर है, उसी के भाग में मिट्टी दी गई।
Judges 2:10 और उस पीढ़ी के सब लोग भी अपने अपने पितरों में मिल गए; तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उसने इस्राएल के लिये किया था।
Judges 2:11 इसलिये इस्राएली वह करने लगे जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और बाल नाम देवताओं की उपासना करने लगे;
Judges 2:12 वे अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया था, त्यागकर पराये देवताओं की उपासना करने लगे, और उन्हें दण्डवत किया; और यहोवा को रिस दिलाई।
Judges 2:13 वे यहोवा को त्याग कर के बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों की उपासना करने लगे।
Judges 2:14 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उन को लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उन को चारों ओर के शत्रुओं के आधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के साम्हने ठहर न सके।
Judges 2:15 जहां कहीं वे बाहर जाते वहां यहोवा का हाथ उनकी बुराई में लगा रहता था, जैसे यहोवा ने उन से कहा था, वरन यहोवा ने शपथ खाई थी; इस प्रकार से बड़े संकट में पड़ गए।
Judges 2:16 तौभी यहोवा उनके लिये न्यायी ठहराता था जो उन्हें लूटने वाले के हाथ से छुड़ाते थे।
Judges 2:17 परन्तु वे अपने न्यायियों की भी नहीं मानते थे; वरन व्यभिचारिन के समान पराये देवताओं के पीछे चलते और उन्हें दण्डवत करते थे; उनके पूर्वज जो यहोवा की आज्ञाएं मानते थे, उनकी उस लीक को उन्होंने शीघ्र ही छोड़ दिया, और उनके अनुसार न किया।
Judges 2:18 और जब जब यहोवा उनके लिये न्यायी को ठहराता तब तब वह उस न्यायी के संग रहकर उसके जीवन भर उन्हें शत्रुओं के हाथ से छुड़ाता था; क्योंकि यहोवा उनका कराहना जो अन्धेर और उपद्रव करने वालों के कारण होता था सुनकर दु:खी था।
Judges 2:19 परन्तु जब न्यायी मर जाता, तब वे फिर पराये देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना करते, और उन्हें दण्डवत कर के अपने पुरखाओं से अधिक बिगड़ जाते थे; और अपने बुरे कामों और हठीली चाल को नहीं छोड़ते थे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47



शुक्रवार, 15 जून 2018

भाषा



   अपने उत्तरी लंडन के इलाके में टहलते हुए मैं अनेकों भाषाओं में होते हुए वार्तालापों के स्वर सुन सकती हूँ। वहाँ रहने वाले भिन्न-भिन्न देशों के लोग अपनी-अपनी भाषाओं में वार्तालाप करते हैं, और चाहे मैं उनकी भाषा और वार्तालाप को समझ नहीं सकती हूँ, फिर भी इस विविधता में मुझे स्वर्ग की एक झलक दिखाई देती है। मैं कभी-कभी मनन करती हूँ कि पिन्तेकुस्त के दिन कैसा अद्भुत रहा होगा जब अनेकों देशों से आए हुए लोगों ने प्रभु यीशु के अनुयायियों द्वारा किए गए प्रचार को सुन और समझ लिया।

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि उस दिन यहूदी तीर्थयात्री यरूशलेम में कटनी का पर्व मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। उसी दिन पवित्र-आत्मा प्रभु यीशु के अनुयायियों पर उतरा और जब उन्होंने प्रचार करना आरंभ किया तो सुनने वाले उनकी बात को अपनी ही भाषा में समझ सके (प्रेरितों 2:5-6)। कैसा अद्भुत आश्चर्यकर्म कि अनेकों देशों से आए ये परदेशी परमेश्वर की प्रशंसा को अपनी ही भाषा में समझ सके, और उनमें से बहुतेरे प्रभु यीशु मसीह के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित हो सके।

   हो सकता है कि हम अनेकों भाषाएं बोलते या समझते नहीं हों, परन्तु हम मसीही विश्वासी यह जानते हैं कि हमारे अन्दर निवास करने वाला पवित्र-आत्मा हमें लोगों के साथ संपर्क करने के लिए सक्षम करता है। हम परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करने, उसके स्वर्गीय राज्य की बढ़ोतरी के लिए, उसके उपयोगी पात्र हैं। आज किस प्रकार से हम, पवित्र-आत्मा की सहायता एवँ सामर्थ्य द्वारा, हम से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति के पास प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचा सकते हैं? – एमी बाउचर पाई


प्रेम ऐसी भाषा है जिसे सब समझते हैं।

यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। - 1 कुरिन्थियों 13:1

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:1-12
Acts 2:1 जब पिन्‍तेकुस का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे।
Acts 2:2 और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया।
Acts 2:3 और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं।
Acts 2:4 और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।।
Acts 2:5 और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रहते थे।
Acts 2:6 जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।
Acts 2:7 और वे सब चकित और अचम्भित हो कर कहने लगे; देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं?
Acts 2:8 तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है?
Acts 2:9 हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसुपुतामिया और यहूदिया और कप्‍पदूकिया और पुन्‍तुस और आसिया।
Acts 2:10 और फ्रूगिया और पमफूलिया और मिसर और लिबूआ देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी, क्या यहूदी क्या यहूदी मत धारण करने वाले, क्रेती और अरबी भी हैं।
Acts 2:11 परन्तु अपनी अपनी भाषा में उन से परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।
Acts 2:12 और वे सब चकित हुए, और घबराकर एक दूसरे से कहने लगे कि यह क्या हुआ चाहता है?
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21