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गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

बुराई में से भलाई

हमें कितना धन्यवादी होना चाहिये कि हम एक ऐसे परमेश्वर की उपासना और सेवा करते हैं जो सर्वसामर्थी, सर्वज्ञानी, प्रेमी और सार्वभौमिक है। उसकी निगरानी से कुछ नहीं छिपता, उसे रोक पाने की सामर्थ किसी में नहीं है। वह हर एक बात को लेकर उससे अपने बच्चों के लिये अन्ततः भला ही उत्पन्न कर देता है। यह यथार्थ न केवल हमें बड़ा हियाव, आनन्द और शांति देता है, वरन हमें हर एक बात के लिये परमेश्वर को धन्यवाद देने को प्रेरित भी करता है - "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है।" - १ थिसुलिनिकियों ५:१८

अपनी पुस्तक "Vital Union With Christ" में ऐ. टी. पाएरसन ने लिखा : "परमेश्वर की योजना किसी बात को अन्देखा नहीं करती। सब बातें मिलकर भला ही उत्पन्न करती हैं - सब बातें, वे कठिनाईयां और परीक्षाएं भी जिनके लिये हम शिकायत करते हैं, कुड़कुड़ाते हैं। वे तूफान जो पेड़ों को झकझोर देते हैं वास्तव में उन्हें मिट्टी में और मज़बूती से जड़ पकड़ने में सहायक होते हैं। तपाए हुए लोहे पर पड़ने वाले घन की मार उसे टुकड़े टुकड़े नहीं करती वरन उसे और बेहतर और मज़बूत बना देती है। कला के आलोचक जौन रस्किन का कहना है कि जीवन में दुख और तकलीफ, बिमारी और निराशाओं के कारण आने वाली रुकावटें संगीत की लय में आने वाले पल भर के उस ठहराव की तरह हैं जो संगीत को और मधुर बना देता है। हमारा स्वर्गीय संगीतकार हमारे जीवन संगीत की लय का कोई सुर-ताल अधूरा या अकेला नहीं छोड़ता, वह एक से दूसरे को अद्भुत रीति से जोड़कर हमारे जीवन से विलक्षण संगीत उत्पन्न कर देता है।"

जब हम अपने प्रभु से प्रेम करते हैं, तो उसे हर बात के लिये धन्यवाद भी दें, उन बुरी लगने वाली बातों के लिये भी, जिन के द्वारा भी वह हमारी भलाई ही उत्पन्न कर रहा है। - रिचर्ड डी. हॉन


परमेश्वर हमें कई तंग गलियारों से निकलने देता है, क्योंकि वे सही मंज़िल की सही राह होते हैं।

हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है। - १ थिसुलिनिकियों ५:१८


बाइबल पाठ: १ थिसुलिनिकियों ५:१५-२४

सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो।
सदा आनन्‍दित रहो।
निरन्‍तर प्रार्यना मे लगे रहो।
हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है।
आत्मा को न बुझाओ।
भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो।
सब बातों को परखो: जो अच्‍छी हैं उसे पकड़े रहो।
सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरिक्षित रहें।
तुम्हारा बुलाने वाला सच्‍चा है, और वह ऐसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २१-२२
  • मत्ती २८

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

केवल भलाई ही के लिये

चीन की एक कहानी है - एक मनुष्य अपने जीवनयापन के लिये घोड़े पालता था। एक दिन उसका एक कीमती और बहुत अच्छी नसल का घोड़ा भाग गया। उसके मित्र जन उसके इस नुकसान पर उसके पास शोक व्यक्त करने आए। जब वे अपना शोक व्यक्त कर चुके तो उस मनुष्य ने उनसे पूछा, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" दो दिन के बाद उसका घोड़ा लौट आया और उसके साथ, उसके पीछे पीछे कई अन्य लावारिस घोड़े भी आ गए। अब फिर उसके मित्र आनन्द मनाने जमा हो गए। फिर उस मनुष्य ने वही प्रश्न किया, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" उसी दोपहर को एक लावारिस घोड़े ने उस मनुष्य के बेटे को दुलत्ती मार कर उसकी टांग तोड़ दी। फिर मित्र शोक करने को जमा हुए, फिर वही सवाल उठा, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" इसके कुछ दिन बाद युद्ध छिड़ गया और राजा ने सभी जवानों का फौज में भरती होने का आदेश निकलवा दिया। लेकिन टूटी टांग के कारण उसका पुत्र फौज और युद्ध में जाने से बच गया। फिर मित्र आए, फिर वही सवाल उठा.....

अपने सीमित मानवीय दृष्टिकोण के कारण हम जीवन की परिस्थितियों को सही रीति से नहीं आंक सकते। लेकिन मसीही विश्वासी के लिये बात बिलकुल भिन्न है - उसे परमेश्वर का आश्वासन है कि प्रत्येक बात और परिस्थिति के ज़रिये परमेश्वर उसकी भलाई ही का कार्य कर रहा है।

उस चीनी मनुष्य की तरह हमें हर बात के लिये प्रश्न करने कि आवश्यक्ता नहीं है कि "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" हमारे पास परमेश्वर का कभी न टलने कभी न बदलने वाला वायदा है "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।" (रोमियों ८:२८) - रिचर्ड डी हॉन


जिसे अविश्वासी "सौभाग्य" कहते हैं, मसीही विश्वासी उसे परमेश्वर से मिली परमेश्वर के प्रेम की सौगात जानते हैं।


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों ८:२८


बाइबल पाठ: रोमियों ८:१८-२८

क्‍योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं।
क्‍योंकि सृष्‍टि बड़ी आशाभरी दृष्‍टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।
क्‍योंकि सृष्‍टि अपनी इच्‍छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।
कि सृष्‍टि भी आप ही विनाश के दासत्‍व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्‍तानों की महिमा की स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करेगी।
क्‍योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्‍टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं, और लेपालक होने की, अर्थत अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्‍तु जिस वस्‍तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही क्‍योकि जिस वस्‍तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्‍या करेगा?
परन्‍तु जिस वस्‍तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जाहते भी हैं।
इसी रीति से आत्मा भी हमारी र्दुबलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए परन्‍तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्‍या है क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है।
और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १९-२०
  • मत्ती २७:५१-६६

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

नियंत्रण

सृष्टि का सृष्टिकर्ता परमेश्वर अपनी सृष्टि पर पूरा नियंत्रण रखता है। संसार इस सत्य को अन्देखा करता है या समझता नहीं; बिरले ही होते हैं जो परमेश्वर की सामर्थ को सही रीति से समझते हैं। अधिकांशतः संसार के लोग नहीं समझते कि मनुष्यों के जीवन और संसार की घटनाओं के पीछे एक नियंत्रित और संचालित करने वाला अदृश्य हाथ है - परमेश्वर का हाथ जो प्रत्येक नियति निर्धारित करता है।

दो ऐतिहासिक घटनाएं इस बात को भली भांति प्रमाणित करतीं हैं। रोमी शासक डोमिशियन ने सोचा कि प्रभु यीशु के चेले यूहन्ना को पतमोस के टापू पर ’काला पानी’ की सज़ा भोगने के लिये निशकासित करने के द्वारा वह मसीही विश्वास के प्रसार में रोक लगा देगा। लेकिन उस टापू के एकांत में परमेश्वर ने यूहन्ना को स्वर्गीय दर्शन देकर अन्त के दिनों में होने वाली घटनाओं को प्रगट किया जो अब हमारे पास बाइबल की अन्तिम पुस्तक - प्रकाशितवाक्य के रूप में उपलब्ध है। डोमिशियन से पहले के एक और रोमी शासक अगस्तुस ने अपने राज्य की जन्गणना का आदेश दिया, जिस के कारण प्रभु यीशु के माता-पिता को नासरत से बेतेलेहम आना पड़ा, जहां यीशु का जन्म हुआ और परमेश्वर के वचन में उसके जन्म स्थान से संबंधित भविष्यवाणी पूरी हो गई। सब कुछ परमेश्वर के निर्देषानुसार ही पूरा हुआ।

जेम्स रसल लोवल ने अपने एक गीत में लिखा, "चाहे सत्य सदा फांसी के तख्त पर रहा और असत्य सिंहासनों पर विराजमान रहा; लेकिन वह सत्य ही है जो भविष्य को हिलाता है, और अज्ञात अनजाने भविष्य की परछाइयों में परमेश्वर खड़ा अपने लोगों पर पहरा देता रहता है।"

युगों के लिये परमेश्वर की योजना है - योजना जिसे वह पूरा भी करेगा। चाहे वर्तमान की घटनाएं यह आभास दें कि दुष्टता सत्य पर हावी है, अन्तिम निष्कर्ष परमेश्वर का ही होगा - वह पूर्णतः नियंत्रण में है। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर की समयसूची चाहे धीमी चले, परन्तु वह अटल है और उसकी योजनाओं के अनुसार अग्रसर है।

निश्चय मनुष्य की जलजलाहट तेरी स्तुति का कारण हो जाएगी, और जो जलजलाहट रह जाए, उसको तू रोकेगा। - भजन ७६:१०


बाइबल पाठ: भजन ७६:७-१२

केवल तू ही भययोग्य है, और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे साम्हने कौन खड़ा रह सकेगा?
तू ने स्वर्ग से निर्णय सुनाया है, पृथ्वी उस समय सुनकर डर गई, और चुप रही,
जब परमेश्वर न्याय करने को, और पृथ्वी के सब नम्र लोगों का उद्धार करने को उठा।
निश्चय मनुष्य की जलजलाहट तेरी स्तुति का कारण हो जाएगी, और जो जलजलाहट रह जाए, उसको तू रोकेगा।
अपने परमेश्वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो, वह जो भय के योग्य है, उसके आस पास के सब उसके लिये भेंट ले आएं।
वह तो प्रधानों का अभिमान मिटा देगा, वह पृथ्वी के राजाओं को भययोग्य जान पड़ता है।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १७-१८
  • मत्ती २७:२७-५०

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

उद्देश्य

हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की योजना है जो अपने प्रत्येक पहलू में सिद्ध है और हमारे लाभ के लिये है। सृष्टि का सार्वभौमिक सृष्टिकर्ता कुछ भी "संयोग" या "भाग्य" के लिये नहीं छोड़ता - प्रभु यीशु मसीह का जीवन इसका जीवन्त उदाहरण है। प्रभु यीशु का बेतेलेहम में शिशु के रूप में जन्म लेना, उसका जीवन, संसार में उसकी सेवकाई, उसकी मृत्यु, उसका पुनरुत्थान - सब कुछ परमेश्वर की योजना के अनुसर हुआ। यह दिखाने के लिये कि प्रभु यीशु अपने स्वर्गीय पिता की इच्छा को पूरा करने के लिये पूर्णतः समर्पित था, लूका लिखता है "जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, तो उस ने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया।" (लूक ९:५१) प्रभु यीशु की मृत्यु कोई "दुर्भाग्यवश" घटी हुई घटना नहीं थी - वह परमेश्वर की योजना के अन्तर्गत हुई थी और उसकी आज्ञा का पालन था - वह समस्त संसार के प्रत्येक जन के पापों के लिये अपने प्राण देने आया था।

इसी प्रकार यह भी उतना ही सत्य है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन परमेश्वर द्वारा किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिये बनाया गया है। प्रसिद्ध प्रचारक और बाइबल शिक्षक सी. एच. स्पर्जन ने कहा था, "मैं यह कभी मान नहीं सकता कि परमेश्वर ने कोई मनुष्य, विशेष कर मसीही मनुष्य को निरुद्देश्य बनाया है, और वह अपना जीवन बिना किसी मकसद के व्यतीत करने के लिये है। उसने आप को एक उद्देश्य के अन्तर्गत बनाया है। उस उद्देश्य का पता कीजिए और फिर अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा कीजिए।"

हमें अपने जीवन की घटनाओं को स्वर्गीय दृष्टिकोण से देखना चाहिये। हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की एक योजना है। जब हम यह जान लेंगे तो उस योजना को पूरा करने और उसकी आज्ञाकारिता द्वारा उसकी सेवा और उसकी महिमा करने को भी तत्पर रहेंगे।

हमारा जीवन न तो व्यर्थ है न निरुद्देश्य। हम जहां भी हैं, वहां परमेश्वर ने हमें एक उद्देश्य के अन्तर्गत रखा है - उस उद्देश्य को पहिचानिये और उसकी पूर्ति में संलग्न होकर अपने जीवन को साकार कीजिए। - पौल वैन गौर्डर


कर्तव्य पूर्ति हमारे लिये है, उनके परिणाम देना परमेश्वर के लिये।


....मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्‍द सुनता है। - यूहन्ना १८:३७

बाइबल पाठ: यूहन्ना १८:३३-३७

तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उस से पूछा, क्‍या तू यहूदियों का राजा है?
यीशु ने उत्तर दिया, क्‍या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?
पीलातुस ने उत्तर दिया, क्‍या मैं यहूदी हूं? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्‍या किया है?
यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्‍तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं।
पीलातुस ने उस से कहा, तो क्या तू राजा है? यीशु ने उत्तर दिया कि तू कहता है, क्‍योंकि मैं राजा हूं; मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्‍द सुनता है।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १५-१६
  • मत्ती २७:१-२६

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

बुद्धिमान योजनाकार

जब प्रसिद्ध चित्रकार और शिल्पकार माईकिलऐंजलो भव्य भवन "St. Peter's Cathedral" पर कार्य कर रहे थे, तो उसके साथ काम करने वाले अन्य लोग उसकी आलोचना करने लगे। उस महान कलाकर ने उन्हें कहा "यदि मैं जो कर रहा हूँ वह तुम्हें समझा भी सकूँ - जो मैं नहीं कर सकता - तौ भी मैं ऐसा करने के लिये बाध्य नहीं हूँ। मैं तुम से केवल इतना ही कहना चाहता हूँ कि मेरी भरसक सहायता करो, और जब काम पूरा हो जाएगा तो तुम्हारी समझ भी आ जाएगा।" इतिहास इस बात का गवाह है कि वह सही था। जो उसके काम की आलोचना कर रहे थे वे अपने अज्ञान के कारण ऐसा कर रहे थे; क्योंकि महान कलाकार के मन की बात वे समझ नहीं पा रहे थे, वे पूरी तस्वीर और उसकी सुन्दरता की कलपना भी नहीं कर पा रहे थे।

कुछ ऐसा ही परमेश्वर की योजनओं के साथ भी है। हमारे सीमित दृष्टिकोण के कारण हमें बहुत सी बातें अनियंत्रित और अनायास प्रतीत होती हैं। जो लोग क्लेष, विरोध और परीक्षाओं से होकर निकलते हैं उनके लिये कई बार परमेश्वर के कार्य और योजनाएं समझ से बाहर होती हैं, लेकिन हमारा स्वर्गीय पिता चाहता है कि चाहे हम उसे और उसके कार्यों को न भी समझ सकें, लेकिन उस पर भरोसा बनाए रखें। क्योंकि परमेश्वर सब कुछ जानता है और आखिरकर उसकी योजना और कार्य का परिणाम भला ही होगा और हम एक दिन परमेश्वर के बुद्धिमान योजनाओं में आनन्दित होंगे।

स्तुति गीतों के लेखक विलियम काउपर ने सर्वज्ञानी और सर्वसामर्थी परमेश्वर की अद्भुत और समझ से परे योजनाओं के लिये अपने एक गीत में लिखा "परमेश्वर रहस्यमय तरीकों से अपने अद्भुत कार्य करता है; वह अपने कदम परिस्थितियों के समुद्र पर स्थिर रखता है और जीवन के तूफानों पर सवारी करता है।"

हमारा परमेश्वर एक बुद्धिमान योजनाकार है, उस पर और उसकी योजनओं पर विश्वास बनाए रखें। - रिचर्ड डी हॉन


जब परमेश्वर कुछ अद्भुत करना चाहता है तो अकसर मुश्किलों से आरंभ करता है।

परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ, और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा। - अय्युब २३:१०



बाइबल पाठ:
अय्युब १:१३-२२, ४२:१२-१७

१:१३-२२

एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे।
तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थीं,
कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला, और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए, और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला, और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,
कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचणड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दणडवत करके कहा,
मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।
इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।


४२:१२-१७

और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी, और उसके चौदह हजार भेंड़ बकरियां, छ:हजार ऊंट, हजार जोड़ी बैल, और हजार गदहियां हो गईं।
और उसके सात बेटे ओर तीन बेटियां भी उत्पन्न हुई।
इन में से उस ने जेठी बेटी का नाम तो यमीमा, दूसरी का कसीआ और तीसरी का केरेन्हप्पूक रखा।
और उस सारे देश में एंसी स्त्रियां कहीं न थीं, जो अय्यूब की बेटियों के समान सुन्दर हों, और उनके पिता ने उनको उनके भाइयों के संग ही सम्पत्ति दी।
इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और चार पीढ़ी तक अपना वंश देखने पाया।
निदान अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।


एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १४
  • मत्ती २६:५१-७५

शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

सब बातों द्वारा भलाई

युसुफ के भाईयों ने उस की इमानदारी और खराई के कारण उससे बैर रखा और उसे मार डलने की योजना बनाई, फिर उसे दास होने के लिये बेच दिया, और वह दास बनाकर मिस्त्र ले जाया गया। लेकिन मिस्त्र में युसुफ वहां के शासक फिरौन का विश्वासपात्र बना और फिरौन ने उसे अपने बाद देश के दूसरे शासक होने का पद दिया और युसुफ की सूझ बूझ द्वारा मिस्त्र भयंकर अकाल का सामना कर सका और वहां भोजन सामग्री उपलब्ध रही। उस अकाल के समय यूसुफ के भाई मिस्त्र से भोजन लेने आये, वे यह नहीं जानते थे कि यूसुफ जीवित है और वह ही भोजन सामग्री के वितरण को नियंत्रित करता है। उन्होंने उसे नहीं पहचाना, लेकिन बाद में यूसुफ ने अपने आप को उनपर प्रगट किया और उनसे कहा: "अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।" ( उत्पत्ति ४५:५) और बाद में उनहें फिर दिलासा दी: "यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था, परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं।" ( उत्पत्ति ५०:२०)

मैं परमेश्वर का बहुत धन्यवादी और उससे आश्वस्त हूँ कि उसकी सामर्थ और बुद्धिमता के कारण उसके कोई भी उद्देश्य कभी विफल नहीं होते; यहां तक की वह लोगों के षड़यंत्रों और नुकसान की योजनाओं से भी भलाई उत्पन्न कर सकता है। मेरे लिये उसकी यह सामर्थ कि चाहे कोई मेरी कैसी भी बुराई करने का प्रयत्न करे, मेरा परमेश्वर मेरे लिये उसमें से भी मेरे लिये भलाई और अपनी महिमा उत्पन्न कर देगा बहुत उत्साहित, आश्वस्त और प्रोत्साहित करने वाली है।

जब हम परिस्थितियों, चुनौतियों और क्लेशों के कारण निराश हों तो हम परमेश्वर की बुद्धिमता, सामर्थ और सार्वभौमिकता में विश्वास रख कर आनन्दित हो सकते हैं - वह हमारे लिये सब बातों द्वारा हमारी भलाई ही करवा रहा है "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं, अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।" (रोमियों ८:२८) - रिचर्ड डी हॉन


ठोकर खाकर अटक जाना परमेश्वर द्वारा किसी नए और उत्तम मार्ग के खोले जाने का सूचक हो सकता है।

यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था, परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। - उत्पत्ति ५०:२०


बाइबल पाठ: उत्पत्ति ४५:१-८

तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा : और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तब जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उस ने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिसको तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।


एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १३
  • मत्ती २६:२६-५०

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

स्त्रोत

इंगलैंड के ब्रिस्टॉल शहर में जौर्ज म्यूलर २००० बच्चों के लिये अनाथालय चलाते थे। एक शाम, यह जानकर कि बच्चों के प्रातः के नाशते तक के लिये अनाथालय में भोजन सामग्री नहीं बची है, उन्होंने अपने सहकर्मियों को बुलाया, और उन्हें स्थिति से अवगत कराया। उसके बाद वे सब प्रार्थना करने बैठे। जब दो, तीन जन प्रार्थना कर चुके तो जौर्ज म्यूलर ने कहा कि "इतना काफी है, अब आईये उठकर प्रार्थना का उत्तर देने के लिये परमेश्वर का धन्यवाद करें"; इसके बाद वे सब अपने अपने स्थानों को विश्राम के लिये चले गये। प्रातः होने पर जब उन्होंने अनाथालय का प्रवेश द्वार खोलने का प्रयास किया तो किसी चीज़ के दबाव के कारण वे उसे खोलने नहीं पाये। कारण जांचने के लिये वे पिछले दरवाज़े से बाहर निकले और अनाथालय का चक्कर लगा कर प्रवेश द्वार पर पहुंचे और कारण देखा - भोजन से भरे हुए कई टोकरे जो द्वार से सटाकर रखे गए थे, जिससे द्वार खुल नहीं पा रहा था। बाद में अनाथालय के एक कार्यकर्ता ने कहा, "हम यह तो जानते हैं कि यह सब भोजन किसने भेजा, बस यह नहीं जानते कि यहां तक लेकर कौन आया।"

यदि हम मसीही विश्वासी अपने जीवन में होने वाली अनपेक्षित घटनाओं के पीछे चलने वाली प्रक्रिया को देख सकते तो पाते कि सब कुछ परमेश्वर द्वारा अद्भुत रीति से नियंत्रित और संचालित है। वह अपने प्रत्येक सन्तान की प्रत्येक आवश्यक्ता को जानता भी है और उसे पूरा करने का इंतज़ाम भी करता है। परमेश्वर कई प्रकार के सन्देशवाहक और साधन अपनी आशीशें अपने बच्चों तक पहुंचाने के लिये प्रयोग करता है। चाहे हम उसके छिपे हुए हाथ को कार्य करते नहीं देख पाते, लेकिन वह सदा हमारे लिये कार्यरत रहता है। कभी कभी हमें लगता है कि हम अपने संसाधनों के बिल्कुल अंत पर आ गये हैं, परन्तु आश्वस्त रहिये, आप का स्वर्गीय पिता स्थिति को भली भांति जानता है, और यह भी कि आपको कब किस चीज़ की आवश्यक्ता है।

जब हम स्त्रोत को जानते हैं और उस पर विश्वास रखते हैं, तो हमें उसके द्वारा उपलब्ध कराने के माध्यम, विधि और समय के लिये चिंतित या विचिलित होने की आवश्यक्ता नहीं है। हमारा दिव्य स्त्रोत ही हमारे मसीही विश्वासी जीवन में शांति और सन्तुष्टि का कारण है। - पौल वैन गौर्डर


परमेश्वर अकसर अपनी सहायता मनुष्यों द्वारा ही उपलब्ध कराता है।

...और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिएं। - मत्ती ६:३२


बाइबल पाठ: मत्ती ६:२४-३४

कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते।
इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे? क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है, क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते?
तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा?
इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे?
क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिएं।
इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।
सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था ११-१२
  • मत्ती २६:१-२५