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गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

भलाई का उद्देश्य


   बचपन में हम सण्डे स्कूल में एक गाना गाया करते थे, जो कुछ इस प्रकार था: "परमेश्वर मेरे प्रति भला है! परमेश्वर मेरे प्रति भला है! वह मेरा हाथ थामता है और मुझे सहारा देता है। परमेश्वर मेरे प्रति भला है!

   मैं इस बात का पूरी रीति से विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर मेरे प्रति भला है, और ना केवल मेरे प्रति वरन सभी मनुष्यों के प्रति वह भला है और उनके लिए भले कार्य करने में वह आनन्दित होता है। वह वास्तव में हमारे हाथ थामे रहता है, विशेषकर कठिन समयों में और जीवन की समस्याओं का सामना करने में वह हमें सहारा देता है। लेकिन क्या आपने कभी अपने आप से यह पूछा कि परमेश्वर भला क्यों है? अवश्य ही ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हम उसकी भलाई के योग्य हैं और ना ही इसलिए उसे अपने किसी प्रयोजन के लिए हमारा साथ और प्रेम चाहिए। कौन मनुष्य परमेश्वर को कुछ दे सकता है, या किसी मनुष्य के पास ऐसा क्या है जो परमेश्वर के पास नहीं; जो कुछ हम हैं और जो भी हमारे पास है वह अन्ततः उसी का प्रदान किया हुआ ही तो है!

   भजनकार ने अपनी एक प्रार्थना में कहा: "परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए" (भजन 67:1-2)। परमेश्वर से मिलने वाली हमारी प्रतिदिन की आशीषें इस बात का प्रमाण हैं कि वह भला परमेश्वर है जो अपने लोगों की चिन्ता करता है। लेकिन संसार के लोग इस बात को कैसे जानेंगे यदि हम उन भलाईयों के लिए परमेश्वर की सार्वजनिक रूप में स्तुति और बड़ाई नहीं करेंगे? परमेश्वर के भले कार्यों के वर्णन से ही लोग उसके बारे में तथा उसकी वास्तविकता और उसके गुणों के बारे में जानने पाएंगे। इसीलिए भजनकार ने आगे लिखा: "हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें" (भजन 67:3)।

   इसलिए अगली बार जब हम परमेश्वर की भलाई के पात्र होने का अनुभव करें तो साथ ही उसे सार्वजनिक रूप में धन्यवाद करना ना भूलें। उसकी भलाईयों का उपभोग बिना उसे उन भलाईयों के योग्य धन्यवाद दिए या आभार प्रकट किए हुए करते रहना, परमेश्वर का अनादर है और हमारे जीवनों में उसकी भलाई के उद्देश्य को नकारता है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर भला है - सुनिश्चित करें कि आप के आस-पास के लोग आपके जीवन से इस बात को अवश्य जानें।

परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए - भजन 67:1

बाइबल पाठ: भजन 67
Psalms 67:1 परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
Psalms 67:2 जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
Psalms 67:3 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:4 राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।
Psalms 67:5 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:6 भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
Psalms 67:7 परमेश्वर हम को आशीष देगा; और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 3-5 
  • लूका 14:25-35

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

धन की चिन्ता


   परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी प्रभु यीशु की शिक्षाओं में, विषयानुसार, सबसे अधिक शिक्षाएं धन-संपत्ति से संबंधित हैं। जितना प्रभु यीशु ने धन-संपत्ति के बारे में सिखाया उतना किसी अन्य विषय के बारे में नहीं सिखाया। लूका 12 धन के विषय में उनकी शिक्षाओं का एक अच्छा सारांश है। उन्होंने धन की निन्दा नहीं करी लेकिन अपने भविष्य और आवश्यकताओं के लिए धन-संपत्ति पर भरोसा करने के विषय में चेतावनी अवश्य दी क्योंकि धन-संपत्ति जीवन की समस्याओं का हल नहीं कर सकते।

   प्रभु यीशु ने धन-संपत्ति के विषय में बहुत सी बातें कहीं, लेकिन एक प्रश्न पर उन्होंने ध्यान केंद्रित रखा, "धन-संपत्ति का तुम्हारे जीवन में क्या प्रयोजन हैं?" धन-संपत्ति किसी के भी जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं और उनका ध्यान परमेश्वर से हटा सकते हैं। इसके विपरीत प्रभु चाहते हैं कि हम स्वर्ग में अपना धन एकत्रित करें क्योंकि वह धन ना केवल इस जीवन में वरन आते जीवन में भी हमारे काम आएगा।

   प्रभु यीशु, धन-संपत्ति अर्जित करते रहने की लालसा में पड़े रहने, इसे ही अपने जीवन का ध्येय बनाने और धन-संपत्ति की अनिश्चित सामर्थ पर भरोसे के नियंत्रण से बचाए रखने को कहते हैं चाहे इसके लिए हमें अपना सब कुछ छोड़ना ही क्यों ना पड़े। हमारा भरोसा नाश्मान धन पर नहीं वरन अविनाशी परमेश्वर पर होना चाहिए क्योंकि हमारे जीवन की आवश्यकताएं पूरी करने में परमेश्वर सक्षम है, और परमेश्वर जो देता है उससे बेहतर संसार की कोई सामर्थ, कोई धन नहीं दे सकता। उदहरणस्वरूप प्रभु ने संसार के सबसे धनी राजा सुलेमान का उदाहरण दिया और कहा कि राजा सुलेमान अपने सारे वैभव में भी मैदानों में उगने वाला एक जंगली फूल, जो आज है और कल जाता रहता है, के समान सुन्दर नहीं हो सका। इसलिए अपने खाने-पीने, रहने, पहनने-ओढ़ने की चिंता मत करो (लूका 12:27-29) वरन परमेश्वर के राज्य और उसकी धर्मिकता की खोज में रहो तो जीवन की सब आवश्यकताएं भी परमेश्वर की ओर से स्वतः ही पूरी कर दी जाएंगी (लूका 12:31)।

   सच है; नाशमान और क्षणिक धन-संपत्ति पर भरोसा रखने की बजाए अविनाशी और अनन्त परमेश्वर पर, जो सारी सृष्टि के देखभाल और संचालन करता है, भरोसा रखना अधिक युक्ति संगत तथा लाभकारी है। - फिलिप यैन्सी


हमारे धन-संपत्ति का सही माप स्वर्ग में जो हमने अर्जित किया है वही है।

हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे। - लूका 12:32 

बाइबल पाठ: लूका 12:22-31
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है।
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो?
Luke 12:27 सोसनों के पौधों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा?
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो।
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है।
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-2 
  • लूका 14:1-24

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

पीड़ा और प्राप्ति


   एक फुटबॉल टीम के खिलाड़ीयों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रोत्साहित करने वाला एक वाक्य लिखी हुई टी-शर्ट्स पहन कर रखीं; वह वाक्य था: "तुम्हें प्रतिदिन चुनाव करना होगा -  आज के अनुशासन का कष्ट अथवा बाद में खेद की पीड़ा।" अनुशासन कठोर होता है, और अकसर हम उससे बचने के प्रयास करते हैं। लेकिन जीवन हो या खेल-कूद, कुछ पाने के लिए आज अनुशासन का थोड़ा सा कष्ट कल की बड़ी उपल्बधि का कारण होता है। यदि कष्ट उठाने को तैयार नहीं हैं तो कुछ प्राप्त करना भी असंभव होगा। युद्ध के मैदान में तैयारी और प्रशिक्षण का समय नहीं होता, यह तैयारी तो पहले से ही कर के रखनी होती है और अनुशासित जीवन ही चुनौतियों का सामना करने और उन पर विजयी होने में सक्षम होते हैं। या तो आप जीवन की चुनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करे रखते हैं या फिर आपका जीवन "यदि केवल", "अगर", "काश कि मैंने" जैसे शब्दों तथा हार और खेद की पीड़ा से भरा होगा।

   किसी ने खेद की परिभाषा में कहा है कि "यह करे गए पिछले कार्यों और व्यवहार के प्रति सूझबूझपूर्ण एवं भावनात्मक नापसन्दगी है।" पीछे मुड़कर अपने गलत निर्णयों और कार्यों को देखना और उनके कारण मिली हार तथा निराशा के बोझ को उठाए रहना पीड़ादायक ही नहीं शिक्षाप्रद भी होता है। एक मसीही विश्वासी को उसका परमेश्वर पिता कभी नहीं छोड़ता; उस पीड़ा की अग्नि से परमेश्वर अपने विश्वासी जन के अन्दर की व्यर्थ बातों को भस्म करता है और उसे निर्मल करता है। यही स्थिति भजनकार की भी थी। अपने पाप और उसके कारण मिले पीड़ादायक अनुभवों के आधार पर उसने लिखा: "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)। ना केवल भजनकार ने अपनी गलती को पहचाना वरन उस पीड़ा में भी उसने परमेश्वर की उपस्थिति और सहायता को अनुभव किया।

   हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा और समर्पण; उसके सामने अपने पापों का इनकार नहीं वरन अंगीकर और क्षमा याचना एक ऐसा जीवन प्रदान करते हैं जो खेद की पीड़ा से नहीं लेकिन परमेश्वर की आशीष से भरा होता है। यही हमारा प्रतिदिन का चुनाव है मसीही जीवन के अनुशासन का कष्ट या फिर खेद की पीड़ा। - बिल क्राउडर


वर्तमान के चुनाव भविष्य की आशीषें निर्धारित करते हैं।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31 
  • लूका 13:23-35

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

अनिश्चितता में निश्चय


   अप्रैल 2010 की घटना है, आईसलैंड में फटने वाले एक ज्वालामुखी से राख के बादल आकाश में छा गए और परिणामस्वरूप यूरोप तथा इंगलैंड के वायु अड्डे 5 दिन तक बन्द रहे। इसके कारण लगभग 100,000 उडानें रद्द हो गईं और लाखों वायु यात्री अपनी यात्रा से वंचित हो गए। बहुत से लोगों के अनेक आवश्यक कार्य अवरुद्ध हो गए, संसार भर में व्यापार में बहुत घाटा हुआ और सब अनिश्चितता से भर गए क्योंकि कोई नहीं जानता था कि घटना क्रम कब सामान्य होगा।

   जब हमारी योजनाएं बिखर जाएं, कोई उपाए सूझ ना पड़े तो उस कुंठा और निराशा का सामना हम कैसे करते हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 26:3-4 जीवन के हर तूफान में हमें स्थिर बांधे रखने वाला लंगर है: "जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है" (यशायाह 26:3-4)। परमेश्वर की इस अटल प्रतिज्ञा को स्मरण रखना और हर रात सोने से पहले दोहराना हमें सदा ही हिम्मत देता रहेगा और हर परिस्थिति का सामना करने की सामर्थ देगा।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी को यह आश्वासन है कि चाहे हम झुंझला देने वाले असुविधा का सामना करें या हृदयविदारक हानि का, चाहे हमारी सभी योजनाएं बिखर जाएं और समस्या हमारी समझ और सामर्थ से परे हो, लेकिन हमारा परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ है, उसका प्रेम, शांति और सुरक्षा सदा ही हमारे जीवन में बने रहते है। वह हमारे लिए हर बात से अन्ततः भलाई ही उत्पन्न करता है (रोमियों 8:28) और हमारी सामर्थ से बाहर किसी परीक्षा में हमें नहीं पड़ने देता (1 कुरिन्थियों 10:13)।

   जीवन की हर अनिश्चितता में हर मसीही विश्वासी के साथ परमेश्वर की सदा बनी रहने वाली उपस्थिति हमारी आशीष और सुरक्षा का निश्चय है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं तो वह अपनी शांति हमारे हृदय में भर देता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: यशायाह 26:1-9
Isaiah 26:1 उस समय यहूदा देश में यह गीत गाया जाएगा, हमारा एक दृढ़ नगर है; उद्धार का काम देने के लिये वह उसकी शहरपनाह और गढ़ को नियुक्त करता है।
Isaiah 26:2 फाटकों को खोलो कि सच्चाई का पालन करने वाली एक धर्मी जाति प्रवेश करे।
Isaiah 26:3 जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है।
Isaiah 26:4 यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है।
Isaiah 26:5 वह ऊंचे पद वाले को झुका देता, जो नगर ऊंचे पर बसा है उसको वह नीचे कर देता। वह उसको भूमि पर गिराकर मिट्टी में मिला देता है।
Isaiah 26:6 वह पांवों से, वरन दरिद्रों के पैरों से रौंदा जाएगा।
Isaiah 26:7 धर्मी का मार्ग सच्चाई है; तू जो स्वयं सच्चाई है, तू धर्मी की अगुवाई करता है।
Isaiah 26:8 हे यहोवा, तेरे न्याय के मार्ग में हम लोग तेरी बाट जोहते आए हैं; तेरे नाम के स्मरण की हमारे प्राणों में लालसा बनी रहती है।
Isaiah 26:9 रात के समय मैं जी से तेरी लालसा करता हूं, मेरा सम्पूर्ण मन यत्न के साथ तुझे ढूंढ़ता है। क्योंकि जब तेरे न्याय के काम पृथ्वी पर प्रगट होते हैं, तब जगत के रहने वाले धर्म की सीखते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29 
  • लूका 13:1-22


रविवार, 14 अप्रैल 2013

उद्देश्य


   अपनी पुस्तक Life after Heart Surgery (हृदय शल्य चिकित्सा के बाद जीवन) में डेविड बर्क ने मृत्यु से अपना आमना-सामना होने के बारे में बताया है। अपने हृदय पर हुए दूसरे ऑपरेशन के बाद अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उसे असहनीय पीड़ा हुई और उसके लिए सांस लेना भी दूभर हो गया। यह समझकर कि अब अन्त निकट है और वह अनन्त में प्रवेश करने वाला है उसने एक बार फिर परमेश्वर से प्रार्थना करी, पापों से मिली क्षमा के लिए धन्यवाद किया और उस पर अपना विश्वास पुनः व्यक्त किया।

   डेविड स्वर्ग पहुँच कर अपने पिता से मिलने के बारे में सोचने लगा जिनकी मृत्यु कई वर्ष पहले हो गई थी, इतने में नर्स ने पूछा कि वह अब कैसा अनुभव कर रहा है। डेविड ने उत्तर दिया कि "ठीक है! बस अब  स्वर्ग जाकर परमेश्वर से मिलने की प्रतीक्षा में हूँ।" नर्स ने उसे उत्तर दिया, "मित्र, मेरे कार्य समय में तो मैं यह नहीं होने दूँगी!" और थोड़े ही समय में डॉक्टर फिर से उसका ऑपरेशन कर रहे थे। उसकी छाती फिर से खोली गई और वहाँ एकत्रित दो लिटर पानी निकाला गया। इसके पश्चात डेविड स्वस्थ होने लगा और ठीक होकर घर जा सका।

   हमारे लिए यह विचार करना कि पृथ्वी पर हमारे अन्तिम क्षण कैसे होंगे, और हम उनका सामना कैसे करेंगे कोई सामान्य बात नहीं है। लेकिन जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पाने के बाद मृत्यु प्राप्त करते हैं उन्हें यह पता है कि वे धन्य हैं (प्रकशितवाक्य 14:13) और परमेश्वर की नज़रों में उनकी मृत्यु बहुमूल्य है (भजन 116:15)।

   हमारे अस्तित्व में आने से पहले ही परमेश्वर ने हमारे समयों और दिनों को निर्धारित कर दिया था (भजन 139:16) और हम आज केवल इसलिए जीवित हैं क्योंकि सर्वशक्तिमान की श्वास से हमें जीवन मिलता है (अय्युब 33:4)। यद्यपि हम यह नहीं जानते कि हमारी कितनी सांसें शेष हैं, लेकिन हमें यह आशवासन है कि परमेश्वर इस बात को जानता है।

   हमारा उद्देश्य अपने जीवन के शेष समय के बारे में चिंतित होना नहीं वरन इस बात की चिंता हो कि जीवन और मृत्यु दोनों में हम परमेश्वर को भाते रहें (2 कुरिन्थियों 5:9) और हमारे जीवन तथा मृत्यु, दोनों ही से परमेश्वर की महिमा हो। तब ही हम प्रेरित पौलुस के समान कह सकेंगे: "क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों 1:21)। सिंडी हैस कैस्पर


अपनी पहली श्वास से लेकर अन्तिम श्वास तक हम परमेश्वर की देखरेख में रहते हैं।

मुझे ईश्वर की आत्मा ने बनाया है, और सर्वशक्तिमान की सांस से मुझे जीवन मिलता है। - अय्युब 33:4 

बाइबल पाठ: भजन 139:13-18
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59


शनिवार, 13 अप्रैल 2013

खमीर


   अमेरिका में मध्य-1800 के समय बहुत से लोग कैलिफोर्निया प्रांत के इलाकों में सोना खोजने के लिए निकले थे; फिर यही सोना खोजने की धुन 1890 के दशक में अलास्का प्रांत में भी देखी गई। दोनों ही समयों में उन खोजकर्ताओं में खमीरी रोटी बहुत प्रचलित हुई।। खमीर का एक गुण है कि वह बाहर से कोई परिवर्तन दिखाए बिना ही आटे को अन्दर ही अन्दर परिवर्तित करता रहता है और थोड़ा सा खमीर थोड़े ही समय में बहुत सा आटा खमीरा कर देता है। ये खोजकर्ता अपने साथ थोड़े से आटे में खमीर गूंध कर लिए चलते थे जिससे जहां भी वे पड़ाव डालें उस खमीरे आटे को नए आटे में मिलाकर अपनी पसंदीदा खमीरी रोटी बनाने का आटा शीघ्रता से तैयार कर लें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में खमीर को बुराई का सूचक करके भी दिखाया गया है। बाइबल के नए नियम में खमीर को अधिकांशतः बिगाड़ने वाले प्रभाव के रूप में दिखाया गया है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चेतावनी दी: "...कि फरीसियों के कपटरूपी खमीर से चौकस रहना" (लूका 12:1)। कपटी लोग बाहर से धार्मिकता का दिखावा करते हैं लेकिन अन्दर ही अन्दर उनके मन पापमय विचारों और व्यवहार से भरे रहते हैं। उनकी संगति मे रहने से उनका प्रभाव खमीर के समान अन्य लोगों में भी फैल जाता है, क्योंकि मनुष्य की स्वाभाविक प्रतिक्रीया है कि वह भलाई की बजाए बुराई का अनुसरण अधिक सरलता और सहजता से करता है।

   लेकिन प्रभु यीशु ने साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि, "कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा" (लूका 12:2); अर्थात कभी ना कभी सब के मन की बातें, उनकी सच्चाई प्रकट हो ही जाएगी। परमेश्वर सब के सामने सब कुछ उजागर कर ही देगा। इस बात की सच्चाई और वास्तविकता हम अपने प्रतिदिन के समाचारों में देखते रहते हैं जहां एक के बाद एक बड़ी चतुराई और सफाई से किये गए घोटालों और बेईमानियों की पोल आए दिन खुलती रहती है और समाज में अच्छे और नामी समझे जाने वालों की काली करतूतें तथा वास्तविकता प्रकट होती रहती है।

   इसलिए बेहतर यही है कि हम परमेश्वर के भय में और उसको जवाबदेह होने को सदा स्मरण रखते हुए अपने जीवनों को उसके भय और आज्ञाकारिता में बिताएं जिससे फिर कभी बदनामी और जग-हंसाई का अवसर ना रहे। साथ ही पाप और बुराई के खमीर से सावधान रहें, उसे अपने जीवन से दूर ही रखें क्योंकि थोड़ा सा खमीर बहुत से आटे को खमीरा कर देता है। - डेनिस फिशर


और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा। - गिनती 32:23

थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीरा कर डालता है। - गलतियों 5:9

बाइबल पाठ: लूका 12:1-7
Luke 12:1 इतने में जब हजारों की भीड़ लग गई, यहां तक कि एक दूसरे पर गिरे पड़ते थे, तो वह सब से पहिले अपने चेलों से कहने लगा, कि फरीसियों के कपटरूपी खमीर से चौकस रहना।
Luke 12:2 कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा।
Luke 12:3 इसलिये जो कुछ तुम ने अन्‍धेरे में कहा है, वह उजाले में सुना जाएगा: और जो तुम ने कोठिरयों में कानों कान कहा है, वह कोठों पर प्रचार किया जाएगा।
Luke 12:4 परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूं, कि जो शरीर को घात करते हैं परन्तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते उन से मत डरो।
Luke 12:5 मैं तुम्हें चिताता हूं कि तुम्हें किस से डरना चाहिए, घात करने के बाद जिस को नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो: वरन मैं तुम से कहता हूं उसी से डरो।
Luke 12:6 क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता।
Luke 12:7 वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31


शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

संकेत


   मेरे पति जे और मैं कार से जे के पिता से मिलने निकले जो दक्षिण कैरोलाइना में रहते थे। मार्ग अच्छा था और हम बिना किसी परेशानी के बढ़ते जा रहे थे। जब हम टेनिस्सी के मनोहर पहाड़ी रास्ते से होकर निकलने लगे तो कुछ समय पश्चात मुझे मार्ग के किनारे लगे संकेत दिखने आरंभ हो गए जो इस मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग की ओर जाने को कह रहे थे। लेकिन जे फिर भी उसी मार्ग पर चलते जा रहे थे, इसलिए मैंने भी यह मान लिया कि ये संकेत हमारे लिए नहीं हैं, उन संकेतों के निर्देश हम पर लागू नहीं होते। लेकिन उत्तरी कैरोलाइना की सीमा के निकट आते आते मार्ग रुका हुआ मिला और वहां लिखा था कि आगे पहाड़ी मलबा गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है। जे को बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने क्षुब्ध होकर कहा, "पहले से ही इसके संकेत क्यों नहीं दीए गए? अब कितना पीछे जाकर मार्ग बदलना पड़ेगा।" मैंने कहा, "तुमने देखा नहीं; मार्ग में तो बहुत से संकेत लगे हुए थे!" तो जे बोले, "नहीं, मैंने संकेतों की ओर ध्यान नहीं दिया; लेकिन तुमने मुझे क्यों नहीं बताया?" मेरा उत्तर था, "मैंने समझा तुम देख रहे हो और सही मार्ग जानते हो।" अब हम यह घटना अपने मित्रों को एक मनोरंजक कहानी के रूप में सुनाते हैं।

   लेकिन इस जीवन से आने वाले अनन्त जीवन को ले जाने वाले सही मार्ग के चुनाव के संकेतों की अनदेखी कोई मनोरंजक घटना नहीं होगी और ना ही फिर कोई वापसी का मार्ग होगा। मानव जाति के संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर सभी लोगों को एक के बाद एक अनेक संकेत देता आया है कि सही मार्ग कौन सा है और किस पर उन्हें चलना चाहिए, लेकिन अधिकांश लोग उन संकेतों की अन्देखी कर के अपने ही बनाए और चुने मार्ग पर चलते जा रहे हैं।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन का मार्ग बनाकर दिया। अपने जीवन काल के समय में वह इस्त्राएल के लिए एक चिन्ह और संकेत थे (लूका 11:30)। किंतु इस्त्राएल के धार्मिक अगुवों ने उनकी चेतावनियों की अनदेखी करी और अपनी गलती के बारे में सुनना नहीं चाहा (पद 43, 45)। प्रभु यीशु ने संसार के अन्त और मानव जाति के न्याय के संबंध में भी अनेक चिन्ह बताए जो आज हमारे समय में एक के बाद एक पूरे होते जा रहे हैं। यह दिखाता है कि प्रभु यीशु का दूसरा आगमन और संसार का न्याय बहुत निकट है; पापों से पश्चाताप और उद्धार पाने का समय अब थोड़ा ही रह गया है।

   आज हम भी ऐसे ही हो सकते हैं। जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है तो हम गलत मार्ग से सही मार्ग पर आने की चेतावनी संकेतों की अनदेखी करते रहते हैं। मार्ग का सुगम, तथा बाहरी दृश्य का मनोहर होना भी इस बात का निश्चय नहीं है कि मार्ग सही है। संकेतों की अनदेखी ना करें, चिन्हों पर ध्यान दें और उन्हें पहचाने, हाथ से निकला अवसर फिर नहीं मिलेगा। प्रभु यीशु आज एक प्रेमी उद्धारकर्ता के रूप में आपको बुला रहा है; ना हो कि उससे आपकी अगली मुलाकात संसार के न्यायी के रूप में हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर अपनी चेतावनियां हमें दण्डित करने के लिए नहीं, हमें सुरक्षित रखने के लिए देता है।

जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा। - लूका 11:30 

बाइबल पाठ: लूका 11:29-45
Luke 11:29 जब बड़ी भीड़ इकट्ठी होती जाती थी तो वह कहने लगा; कि इस युग के लोग बुरे हैं; वे चिन्ह ढूंढ़ते हैं; पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा।
Luke 11:30 जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा।
Luke 11:31 दक्‍खिन की रानी न्याय के दिन इस समय के मनुष्यों के साथ उठ कर, उन्हें दोषी ठहराएगी, क्योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने को पृथ्वी की छोर से आई, और देखो यहां वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है।
Luke 11:32 नीनवे के लोग न्याय के दिन इस समय के लोगों के साथ खड़े हो कर, उन्हें दोषी ठहराएंगे; क्योंकि उन्होंने यूनुस का प्रचार सुनकर मन फिराया और देखो, यहां वह है, जो यूनुस से भी बड़ा है।
Luke 11:33 कोई मनुष्य दीया बार के तलघरे में, या पैमाने के नीचे नहीं रखता, परन्तु दीवट पर रखता है कि भीतर आने वाले उजियाला पाएं।
Luke 11:34 तेरे शरीर का दीया तेरी आंख है, इसलिये जब तेरी आंख निर्मल है, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला है; परन्तु जब वह बुरी है, तो तेरा शरीर भी अन्‍धेरा है।
Luke 11:35 इसलिये चौकस रहना, कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्‍धेरा न हो जाए।
Luke 11:36 इसलिये यदि तेरा सारा शरीर उजियाला हो, ओर उसका कोई भाग अन्‍धेरा न रहे, तो सब का सब ऐसा उलियाला होगा, जैसा उस समय होता है, जब दीया अपनी चमक से तुझे उजाला देता है।
Luke 11:37 जब वह बातें कर रहा था, तो किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे यहां भेजन कर; और वह भीतर जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 11:38 फरीसी ने यह देखकर अचम्भा दिया कि उसने भोजन करने से पहिले स्‍नान नहीं किया।
Luke 11:39 प्रभु ने उस से कहा, हे फरीसियों, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर तो मांजते हो, परन्तु तुम्हारे भीतर अन्‍धेर और दुष्‍टता भरी है।
Luke 11:40 हे निर्बुद्धियों, जिसने बाहर का भाग बनाया, क्या उसने भीतर का भाग नहीं बनाया?
Luke 11:41 परन्तु हां, भीतरवाली वस्‍तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिये शुद्ध हो जाएगा।
Luke 11:42 पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भांति के साग-पात का दसवां अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो: चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते।
Luke 11:43 हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और बाजारों में नमस्‍कार चाहते हो।
Luke 11:44 हाय तुम पर! क्योंकि तुम उन छिपी कब्रों के समान हो, जिन पर लोग चलते हैं, परन्तु नहीं जानते।
Luke 11:45 तब एक व्यवस्थापक ने उसको उत्तर दिया, कि हे गुरू, इन बातों के कहने से तू हमारी निन्‍दा करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54