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बुधवार, 23 जुलाई 2014

परेशानी और शांति


   यदि आपने मर्फी के नियम के बारे में सुना नहीं भी हो, तो भी उसे अनुभव अवश्य किया होगा। मर्फी का नियम कहता है, "यदि कोई भी बात बिगड़ सकती है, तो वह बिगड़ेगी अवश्य"; अर्थात अगर कुछ गलत हो सकने की संभावना है तो देर-सवेर वह होकर रहेगा।

   मर्फी का यह नियम मुझे प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों से कहे गए एक सिद्धांत की याद दिलाता है: "...संसार में तुम्हें क्लेष होता है..." (यूहन्ना 16:33)। अर्थात, हम मसीही विश्वासी इस बात के लिए निश्चित रह सकते हैं कि देर-सवेर हमें संसार से परेशानियों का सामना करना ही पड़ेगा। यह संभावना परमेश्वर की आरंभिक योजना के अनुसार नहीं है, लेकिन जब से मानव जाति शैतान के प्रलोभन में फंस कर पाप में पड़ गई, तभी से सृष्टि की सभी बातें पाप के दुषप्रभावों की आधीनता में आ गईं, और परिणामस्वरूप तब से सृष्टि की सभी बातों में गड़बड़ एवं दुष्क्रीया दिखाई देती है।

   जीवन में परेशानी होने की वास्तविकता तो सर्वविदित है किंतु शांति होने की वस्तविकता अकसर नज़र नहीं आती। यह एक रोचक बात है कि जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को परेशानियों के बारे में चिताया, उसके साथ ही, उसी वाक्य में उन्हें अपनी शांति के बारे में आश्वस्त भी किया: "...ढाढ़स बांधो, मैंने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। "जीत लिया" से प्रभु यीशु का तात्पर्य था मैंने ऐसा कर के दे दिया है जिसका प्रभाव आते समयों में भी मिलता रहेगा। क्रूस पर अपने बलिदान और फिर तीसरे दिन अपने पुनरुत्थान के द्वारा ना केवल प्रभु यीशु ने तब संसार के पाप पर विजय प्राप्त कर ली थी, वरन आज भी वह इस विजय को अपने चेलों के जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखता है। हम चाहे जितनी और चाहे जैसी परेशानी का सामना करें, प्रभु यीशु की उपस्थिति और शांति सदा ही हम मसीही विश्वासियों के साथ बनी रहती है, हमें संभाले रहती है।

   इसलिए इस पतित संसार से चाहे हमें परेशानियाँ और समस्याएं झेलनी पड़ें, लेकिन सुसमाचार यह है कि प्रभु यीशु की शांति उन सभी कष्टों में हमारे साथ बनी रहेगी, हमें संभाले रहेगी और अन्ततः प्रभु यीशु में हम विजयी ठहरेंगे। - जो स्टोवैल


सभी परेशानियों और समस्याओं के मध्य, विजय एवं शांति प्रभु यीशु में ही उपलब्ध रहती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9


मंगलवार, 22 जुलाई 2014

घेरे हुए


   मेरी सहेली मेलिस्सा की 9 वर्षीय पुत्री, सिडनी, बीमार थी, अस्पताल में भर्ती थी और उसे कीमोथैरपी तथा बोन-मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी। मुझे उसके बारे में एक स्वपन दिखाई दिया जिसमें मैंने देखा कि सिडनी अस्पताल के एक केंद्रीय कक्ष में अपने माता-पिता के साथ है, उस कक्ष के चारों ओर अन्य कमरे बने हैं जिनमें उनके परिवार तथा मित्रगण हैं और वे सभी सिडनी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वास्तविक जीवन में, भौतिक रूप से, सिडनी परिवार या मित्रजनों से घिरी हुई नहीं थी, वे उसके चारों ओर उपस्थित नहीं थे किंतु आत्मिक रीति से उन सबकी प्रार्थनाओं और प्रेम ने उसे घेर रखा था।

   प्रेरित पौलुस भी प्रार्थनाओं से घिरे रहने की लालसा रखता था। पौलुस द्वारा भिन्न मसीही मण्डलियों को लिखी पत्रियों में से अधिकांश में उसने उन मण्डलियों से अनुरोध किया कि वे उसे अपनी प्रार्थनाओं में प्रभु के सम्मुख स्मरण रखें (2 कुरिन्थियों 1:11; इफिसीयों 6:18-20; कुलुस्सियों 4:2-4; फिलेमॉन 1:22)। रोम की मसीही मण्डली के सदस्यों को पौलुस ने लिखा: "और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो" (रोमियों 15:30)। पौलुस जानता था कि जब तक सहयोगियों तथा सहकर्मियों की प्रार्थना की सामर्थ उसके साथ नहीं है, वह परमेश्वर के लिए अपनी सेवकाई में प्रभावी नहीं हो सकता।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु भी हमारे लिए प्रार्थना करता है (यूहन्ना 17:20; इब्रानियों 7:25) और परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी प्रार्थना में हमारी सहायता करता है कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर सकें (रोमियों 8:27)। हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कितनी शांति, सांत्वना और सामर्थ की बात है कि अन्य मसीही विश्वासियों, प्रभु यीशु और पवित्र आत्मा की प्रार्थनाएं हमें घेरे हुए रखती हैं, सुरक्षित रखती हैं, प्रभावी बनाती हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करते रहें, एक दूसरे को प्रार्थनाओं से घेरे रहें। - ऐनी सेटास


पवित्र आत्मा की प्रेरणा से करी गई प्रार्थना अति प्रभावी होती है।

हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। - इब्रानियों 13:18

बाइबल पाठ: रोमियों 15:22-33
Romans 15:22 इसी लिये मैं तुम्हारे पास आने से बार बार रूका रहा। 
Romans 15:23 परन्तु अब मुझे इन देशों में और जगह नहीं रही, और बहुत वर्षों से मुझे तुम्हारे पास आने की लालसा है। 
Romans 15:24 इसलिये जब इसपानिया को जाऊंगा तो तुम्हारे पास होता हुआ जाऊंगा क्योंकि मुझे आशा है, कि उस यात्रा में तुम से भेंट करूं, और जब तुम्हारी संगति से मेरा जी कुछ भर जाए, तो तुम मुझे कुछ दूर आगे पहुंचा दो। 
Romans 15:25 परन्तु अभी तो पवित्र लोगों की सेवा करने के लिये यरूशलेम को जाता हूं। 
Romans 15:26 क्योंकि मकिदुनिया और अखया के लोगों को यह अच्छा लगा, कि यरूशलेम के पवित्र लोगों के कंगालों के लिये कुछ चन्दा करें। 
Romans 15:27 अच्छा तो लगा, परन्तु वे उन के कर्जदार भी हैं, क्योंकि यदि अन्यजाति उन की आत्मिक बातों में भागी हुए, तो उन्हें भी उचित है, कि शारीरिक बातों में उन की सेवा करें। 
Romans 15:28 सो मैं यह काम पूरा कर के और उन को यह चन्दा सौंप कर तुम्हारे पास होता हुआ इसपानिया को जाऊंगा। 
Romans 15:29 और मैं जानता हूं, कि जब मैं तुम्हारे पास आऊंगा, तो मसीह की पूरी आशीष के साथ आऊंगा।
Romans 15:30 और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो। 
Romans 15:31 कि मैं यहूदिया के अविश्वासियों बचा रहूं, और मेरी वह सेवा जो यरूशलेम के लिये है, पवित्र लोगों को भाए। 
Romans 15:32 और मैं परमेश्वर की इच्छा से तुम्हारे पास आनन्द के साथ आकर तुम्हारे साथ विश्राम पाऊं। 
Romans 15:33 शान्ति का परमेश्वर तुम सब के साथ रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6


सोमवार, 21 जुलाई 2014

साथ


   हमारे क्षेत्र में इंग्लिश फुटबॉल खेल का एक प्रमुख आकर्षण है सालाना एफ ए कप प्रतियोगिता का फाइनल मैच। सौ वर्ष से भी अधिक समय से यह दिन उत्साह, उत्सव और प्रतिस्पर्धा के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस दिन को लेकर मेरे लिए जो सबसे रोमांचकारी बात रही है वह है खेल के आरंभ होने का तरीका। प्रति वर्ष इस सालाना प्रतियोगिता का यह फाईनल मैच आरम्भ होता है एक पारंपरिक भक्ति गीत Abide With Me (रह मेरे साथ) के गाए जाने के द्वारा।

   पहले मुझे यह बड़ा अटपटा सा लगा - भला फुटबॉल के साथ भक्ति गीत का क्या लेना-देना हो सकता है? जब मैंने इस पर थोड़ा विचार किया, तो मुझे समझ आया कि एक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर की संगति हर समय महत्वपूर्ण है, चाहे वह खेल-कूद, बाज़ार-खरीददारी, व्यवसाय-कार्य स्थल, स्कूल, या अन्य कोई भी कार्य करना क्यों ना हो। प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन का ऐसा कोई पहलु नहीं है जिसमें परमेश्वर की उपस्थिति का प्रभाव नहीं होता; इसलिए यह लालसा कि परमेश्वर हर समय साथ बना रहे हम मसीही विश्वासियों के लिए सबसे स्वाभाविक लालसा है।

   लेकिन परमेश्वर का यह लगातार बना रहने वाला साथ कोई ऐसी बात नहीं है जिसके लिए हमें परमेश्वर के सामने गिड़गड़ाते रहना पड़ेगा, वरन यह तो परमेश्वर पिता की ओर से अपने बच्चों को दिया गया वायदा है: "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)। ना केवल परमेश्वर का साथ हम मसीही विश्वासियों की हर परिस्थिति में संतुष्टि की कुँजी है, वरन यह साथ हमें सद्बुद्धि, शांति, सांत्वना, और सामर्थ भी देता है - हम चाहे जहाँ हों, चाहे कोई भी कार्य कर रहे हों, चाहे जिस भी परिस्थिति में हों। - बिल क्राउडर


हम मसीही विश्वासियों का सबसे महान सौभग्य है प्रभु यीशु की संगति और उसका आनन्द।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:1-8
Hebrews 13:1 भाईचारे की प्रीति बनी रहे। 
Hebrews 13:2 पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। 
Hebrews 13:3 कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उन के साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है। 
Hebrews 13:4 विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और बिछौना निष्‍कलंक रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा। 
Hebrews 13:5 तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। 
Hebrews 13:6 इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।
Hebrews 13:7 जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्हों ने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देखकर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 
Hebrews 13:8 यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3


रविवार, 20 जुलाई 2014

भूल और भलाई


   कलाकार जेम्स हब्बल का कहना है कि गलतियाँ उपहार होती हैं। वे जब किसी प्रोजैक्ट पर कार्य कर रहे होते हैं और कोई गलती हो जाती है तो वे उस कार्य को पुनः आरम्भ नहीं करते; वे ऐसे तरीके ढूँढ़ते हैं कि उस गलती से भी वहाँ कुछ बेहतर बना सकें। हम में से कोई ऐसा नहीं है जो गलती ना करता हो, और हम सब के उन गलतियों के प्रति व्यवहार के अपने अपने तरीके हैं; कोई उन्हें छुपाता है, कोई उन्हें नज़रन्दाज़ कर देता है, कोई उनकी ज़िम्म्दारी से मुँह मोड़ लेता है तो कोई उन्हें स्वीकार करके उनके लिए क्षमा माँगता है या उसे सुधारने का प्रयास करता है।

   जैसा हम अपनी गलतियों के साथ करते हैं, वैसा ही हम अपने जीवनों के पापों के साथ भी करते हैं। लेकिन परमेश्वर जो हम सब का सृष्टिकर्ता है, हम सबको अन्दर-बाहर से भलि-भांति जानता है, हमारी गलतियों और पापों के कारण हमें त्यागना नहीं चाहता वरन चाहता है कि हमें सुधार सके, पाप के परिणाम से बचाकर भला और बेहतर बना सके। इसका एक उदाहरण हम प्रभु यीशु के चेले पतरस के जीवन से पाते हैं।

   पतरस अपने अविवेकपूर्ण बड़बोलेपन के लिए जाना जाता है - उस पल में जो उसके मन में आता था उसके बारे में कुछ भी सोचे समझे बिना ही वह उसे बोल देता था। जब प्रभु यीशु ने अपनी आती मृत्यु के बारे में अपने चेलों से चर्चा करी तब पतरस ने उसके प्रति अपने समर्पण तथा वफादारी के बड़े बड़े दावे किए; किंतु थोड़े ही समय पश्चात जब प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए वास्तव में पकड़वाया गया, तब पतरस ने भयवश तीन बार प्रभु यीशु को पहचानने और उसका अनुयायी होने से इन्कार कर दिया। लेकिन अपने मृतकों में से पुनरुत्थान के पश्चात प्रभु यीशु ने पतरस के दोषपूर्ण अतीत के बावजूद तीन बार पतरस को अपने आने वाले अनुयायीयों की देखभाल करने कि ज़िम्मेदारी दी (यूहन्ना 21)।

   यदि आपने भी कोई ऐसी भूल करी है जो आपको अपरिवर्तनीय लगती है, जिसके दुषपरिणाम आपको परेशान करते हैं, तो उन्हें सुधारने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आप प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं, उसे अपना जीवन समर्पित करके अपना उद्धारकर्ता स्वीकार किया है अथवा नहीं। यदि आप प्रभु यीशु के अनुयायी हैं तो बिना कोई सन्देह किए अपनी उस भूल और उसके दुषपरिणामों को प्रभु यीशु के सामने स्वीकार कर के उन्हें उसके हाथों में सौंप दीजिए। प्रभु यीशु हमारी बड़ी भूलों को भी बड़ी भलाई में बदल सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर ही है जो हमारी चूक को चमत्कार में परिवर्तित कर सकता है।

हे यहोवा, हम को अपनी ओर फेर, तब हम फिर सुधर जाएंगे। प्राचीनकाल की नाईं हमारे दिन बदल कर ज्यों के त्यों कर दे! - विलापगीत 5:21

बाइबल पाठ: यूहन्ना 21:15-19
John 21:15 भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा। 
John 21:16 उसने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उसने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर। 
John 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा। 
John 21:18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। 
John 21:19 उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 29-31


शनिवार, 19 जुलाई 2014

झूठी छवि


   विक्टोरियन काल के उपन्यास The Picture of Dorian Grey दिखाता है कि जो हम अपने आप को बाहरी रीति से दिखाते हैं वह हमारी वास्तविक भीतरी दशा से कितना भिन्न होता है। उस उपन्यास का नायक अपनी जवानी में बहुत सुन्दर था; उसने जब अपना चित्र बनवाया तो उसके मन में अभिलाषा जागी कि वह सदा ही ऐसा सुन्दर और आकर्षक बना रहे, उसके स्थान पर वह चित्र उम्र के साथ बूढ़ा होता जाए। शीघ्र ही डोरियन ग्रे को पता चला कि उसकी यह इच्छा स्वीकार हो गई है, और उसका वह चित्र जो उसके परेशान मन के साथ जोड़ दिया गया था, समय के साथ बूढ़ा होता गया तथा डोरियन ग्रे द्वारा किए गए हर पाप के साथ और अधिक बदसूरत होता चला गया। थोड़े ही समय में डोरियन ग्रे का बाहरी स्वरूप और उसके अन्दर के भ्रष्ट मन से जुड़ा वह चित्र एक समान दिखने बन्द हो गए - डोरियन ग्रे जो अन्दर से था वह बाहर नहीं दिखता था, और जैसा वह बाहर से दिखता था, वैसा वह अन्दर से था नहीं।

   प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने समय के धर्म गुरु फरीसियों की ऐसा ही दोगला जीवन जीने के लिए भर्त्सना करी। बहुत से फरीसी समाज के सामने अपनी धार्मिकता का प्रदर्शन तो करते थे, लेकिन उनके मन अनेक छुपे हुए पापों से भरे हुए थे। इस कारण प्रभु यीशु ने उनकी तुलना "चूना फिरी हुई कब्र" से करी जो बाहर की लीपा-पोती से सुन्दर तो दिखाई देती है, परन्तु अन्दर सड़ाहट तथा दुर्गन्ध से भरी होती हैं (मत्ती 23:27)।

   हमारे समक्ष भी यही प्रलोभन, कि हम अपने आप को समाज तथा अन्य लोगों के सामने अच्छा दिखाएं सदा बना रहता है, परन्तु परमेश्वर हमारी वास्तविक दशा को, हमारे मन को भलि-भांति जानता है (1 शमूएल 16:7; नीतिवचन 15:3)। उसकी दृष्टि से कुछ छिपा नहीं है, और हम सभी को अन्ततः उसके सामने हर एक बात का हिसाब देना ही होगा; हमारे पाप यदि क्षमा नहीं होंगे, तो हमारा उनके परिणाम को भोगना अवश्यंभावी है। हमारी झूठी छवि समाज को, लोगों को धोखा दे सकती है, परमेश्वर और उसके न्याय को नहीं।

   प्रभु यीशु के सामने सच्चे मन से पापों के अंगीकार और उनकी क्षमा याचना के द्वारा तथा अपने हृदय को प्रभु यीशु तथा उसके वचन के लिए खोलने के द्वारा ही हम अपने जीवन की भीतरी मलिनता की सफाई का तथा परमेश्वर की पवित्रता एवं स्वच्छता का अनुभव कर सकते हैं, अपने अन्दर की एक ऐसी आत्मिक दशा को अनुभव कर सकते हैं जो दिखावे के नहीं वरन सच्ची धार्मिकता के कार्यों में प्रकट होती है। प्रभु यीशु को अवसर दें कि वह आपकी झूठी छवि को बदलकर आपको सच्चे आत्मिक स्वरूप में ले आए (2 कुरिन्थियों 17-18)। - डेनिस फिशर


केवल प्रभु यीशु मसीह ही पाप क्षमा करके हमें अन्दर से बदल सकता है।

क्योंकि उनका पूरा चाल-चलन मेरी आंखों के साम्हने प्रगट है; वह मेरी दृष्टि से छिपा नहीं है, न उनका अधर्म मेरी आखों से गुप्त है। सो मैं उनके अधर्म और पाप का दूना दण्ड दूंगा - यर्मियाह 16:17

बाइबल पाठ: मत्ती 23:23-31
Matthew 23:23 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। 
Matthew 23:24 हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छर को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। 
Matthew 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। 
Matthew 23:26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों। 
Matthew 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। 
Matthew 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Matthew 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। 
Matthew 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपने बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते। 
Matthew 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्तान हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-28


शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

सर्वोत्तम वस्तुएं


   एक पुरानी कहावत है, "जीवन की सर्वोत्तम वस्तुएं मुफ्त होती हैं।" बहुत से लोगों के लिए यह काफी हद तक सही हो सकता है। लेकिन कुछ अन्य लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि जीवन की सर्वोत्त्म वस्तुएं महंगी या मुशकिल से ही मिलने वाली होती हैं। लेकिन हाल ही में मैंने एक स्थान पर कुछ लिखा देखा जिसे पढ़कर मैं मुस्कुरा दिया और उसने मुझे सोचने पर भी बाध्य किया; वह था, "जीवन में सर्वोत्तम, वस्तु नहीं होता!" बात कहने का कितना अद्भुत तरीका था। परिवार जन, प्रीय जन, मित्रगण, विश्वास आदि जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं वे वास्तव में वस्तु नहीं हैं वरन वे सब किसी व्यक्ति एवं प्रभु परमेश्वर में निहित होते हैं।

   राजा सुलेमान भौतिक वस्तुओं के बारे में राय देने के लिए बहुत योग्य था क्योंकि "...राजा सुलैमान, धन और बुद्धि में पृथ्वी के सब राजाओं से बढ़कर हो गया" (1 राजा 10:23)। उसकी राय? "धनी होने के लिये परिश्रम न करना; अपनी समझ का भरोसा छोड़ना। क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा, जो है ही नहीं? वह उकाब पक्षी की नाईं पंख लगा कर, नि:सन्देह आकाश की ओर उड़ जाता है" (नीतिवचन 23:4-5)। इस कारण उसने आगे सिखाया, "अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाना। क्योंकि अन्त में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी" (नीतिवचन 23:12, 18)।

   जीवन की सर्वोत्तम वस्तुएं वे अनन्तकाल की आशीषें हैं जो परमेश्वर की भलाई तथा प्रभु यीशु के अनुग्रह से मिलती हैं; ना वे खराब हो सकती हैं, ना कोई उन्हें चुरा सकता है और ना ही वे कभी घट सकती हैं; हम उन्हें हाथों में नहीं वरन हृदय में रखते हैं। वे तो ऐसा अनमोल धन हैं जो इस जीवन में भी हमारे साथ रहेगा और आने वाले जीवन में भी अनन्तकाल तक हमारे साथ बना रहेगा, और दोनों ही स्थानों पर हमारे काम आएगा। क्या आपने इन वास्तविक ’सर्वोत्तम वस्तुओ’ को अर्जित कर लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


हमारा सबसे बड़ा धन वही है जो मसीह यीशु में होकर हमें मिलता है।

अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। - मत्ती 6:19-20

बाइबल पाठ: नीतिवचन 23:1-18
Proverbs 23:1 जब तू किसी हाकिम के संग भोजन करने को बैठे, तब इस बात को मन लगा कर सोचना कि मेरे साम्हने कौन है? 
Proverbs 23:2 और यदि तू खाऊ हो, तो थोड़ा खा कर भूखा उठ जाना। 
Proverbs 23:3 उसकी स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं की लालसा न करना, क्योंकि वह धोखे का भोजन है। 
Proverbs 23:4 धनी होने के लिये परिश्रम न करना; अपनी समझ का भरोसा छोड़ना। 
Proverbs 23:5 क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा, जो है ही नहीं? वह उकाब पक्षी की नाईं पंख लगा कर, नि:सन्देह आकाश की ओर उड़ जाता है। 
Proverbs 23:6 जो डाह से देखता है, उसकी रोटी न खाना, और न उसकी स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं की लालसा करना; 
Proverbs 23:7 क्योंकि जैसा वह अपने मन में विचार करता है, वैसा वह आप है। वह तुझ से कहता तो है, खा पी, परन्तु उसका मन तुझ से लगा नहीं। 
Proverbs 23:8 जो कौर तू ने खाया हो, उसे उगलना पड़ेगा, और तू अपनी मीठी बातों का फल खोएगा। 
Proverbs 23:9 मूर्ख के साम्हने न बोलना, नहीं तो वह तेरे बुद्धि के वचनों को तुच्छ जानेगा। 
Proverbs 23:10 पुराने सिवानों को न बढ़ाना, और न अनाथों के खेत में घुसना; 
Proverbs 23:11 क्योंकि उनका छुड़ाने वाला सामर्थी है; उनका मुकद्दमा तेरे संग वही लड़ेगा। 
Proverbs 23:12 अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाना। 
Proverbs 23:13 लड़के की ताड़ना न छोड़ना; क्योंकि यदि तू उसका छड़ी से मारे, तो वह न मरेगा। 
Proverbs 23:14 तू उसको छड़ी से मार कर उसका प्राण अधोलोक से बचाएगा। 
Proverbs 23:15 हे मेरे पुत्र, यदि तू बुद्धिमान हो, तो विशेष कर के मेरा ही मन आनन्दित होगा। 
Proverbs 23:16 और जब तू सीधी बातें बोले, तब मेरा मन प्रसन्न होगा। 
Proverbs 23:17 तू पापियों के विषय मन में डाह न करना, दिन भर यहोवा का भय मानते रहना। 
Proverbs 23:18 क्योंकि अन्त में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 22-24


गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मुसीबत की जड़


   मेरे घर के लॉन में कुछ गड़बड़ी थी; वह गड़बड़ी मुझे दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन उसके दुषप्रभाव मेरे सामने थे - पूरी देख-रेख के बावजूद सारी घास और मैदान खराब होता जा रहा था। मैंने बारीकी से जाँच करनी आरंभ करी और शीघ्र ही मुसीबत कि जड़ सामने आ गई - छछूंदर। कीड़े-मकौड़े खाते रहने वाले और धरती की सतह के नीचे बिलों में रहने वाले वे छोटे जन्तु बड़ी देख-भाल के साथ रखे गए मेरे घास के लॉन की सतह के नीचे यहाँ से वहाँ अपने बिल बनाए जा रहे थे और घास को बरबाद करे जा रहे थे। ना तो वे जन्तु और ना ही उनके बिल ऊपर से दिखाई देते थे, किंतु उन से हो रहा नुकसान सबके सामने प्रगट था।

   इस्त्राएलियों के साथ भी एक छिपी हुई मुसीबत की जड़ थी जो उनके लिए परेशानी का कारण ठहरी (यहोशु 7)। इस्त्राएली मुसीबत में तो पड़े किंतु उसका कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा था। कुछ तो था जो उनकी दृष्टि से ओझल था किंतु उसके दुषप्रभाव उनके सामने थे। वे दुषप्रभाव तब उजागर हुए जब यहोशु ने छोटे से नगर ऐ को जीतने के लिए 3000 की सेना भेजी। ऐ की छोटी से सेना को पराजित करने के लिए यह काफी होनी चाहिए थी किंतु परिणाम उलटा ही निकला। ऐ के सैनिकों ने इस्त्राएलियों को खदेड़ दिया और उनके 36 सैनिक मार डाले। यहोशु को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो गया। कारण जानने के लिए वह प्रार्थना में परमेश्वर के आगे गिड़गिड़ा कर पड़ गया और परमेश्वर ने उसे बताया कि मुसीबत की जड़ क्या है - उन इस्त्राएलियों में एक ऐसा जन भी था जिसने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता करी और यरिहो से हुए पिछले युद्ध में अर्पण की हुई वस्तुओं में से अपने लिए कुछ चुरा लीं (यहोशु 7:11)। अनाज्ञाकारिता और झूठ के पाप के दुषप्रभाव से परमेश्वर की सुरक्षा और आशीष इस्त्राएली सेना पर से हट गई और उनकी हार का कारण हो गई। जब उस पाप को एवं पाप करने वाले को प्रकट किया गया तथा पाप का निर्धारित समाधान किया गया तत्पश्चात ही इस्त्राएल फिर विजय प्राप्त कर सका।

   हमारे जीवनों के छिपे हुए पाप हमारे लिए बहुत मुसीबत की जड़ होते हैं। हम चाहे अपने निकट के लोगों और परिवार जनों से बहुत कुछ छुपा लें, परमेश्वर से कुछ नहीं छुपा सकते। यदि पाप का समाधान नहीं होगा तो उसके दुषपरिणाम झेलने ही पड़ेंगे। इस मुसीबत की जड़ को अपने जीवन से दूर ही रखिए, तब ही परमेश्वर की आशीषें आपके साथ रहेंगी और आप जयवंत रहेंगे। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के समक्ष पाप अंगीकार और उसके लिए पश्चताप से ही क्षमा प्राप्त हो सकती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: यहोशु 7:1-13
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया। 
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो वा तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं। 
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए, 
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया। 
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली। 
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते। 
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है! 
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा? 
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है? 
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है। 
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा। 
Joshua 7:13 उठ, प्रजा के लोगों को पवित्र कर, उन से कह; कि बिहान तक अपने अपने को पवित्र कर रखो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि हे इस्राएल, तेरे मध्य में अर्पण की वस्तु है; इसलिये जब तक तू अर्पण की वस्तु को अपने मध्य में से दूर न करे तब तक तू अपने शत्रुओं के साम्हने खड़ा न रह सकेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21