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गुरुवार, 15 जनवरी 2015

प्रार्थना


   जब मुझे ज्ञात हुआ कि मेरी बहन को कैंसर है तब मैंने अपने मित्रों से उसके लिए प्रार्थना करने को कहा। जब इलाज के लिए उसका ऑपरेशन किया गया तब हम ने प्रार्थना करी कि सर्जन सारे कैंसर को निकालने पाए, कुछ भी अन्दर ना रहने पाए जिससे मेरी बहन को कीमोथैरपी या विकिरण चिकित्सा से होकर ना निकलना पड़े - और परमेश्वर ने हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया, हाँ! जब मैंने यह समाचार अपने मित्रों को बताया, तो एक मित्र ने कहा, "मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि प्रार्थना में सामर्थ है"; और मैंने कहा, "मैं बहुत धन्यवादी हूँ कि इस बार परमेश्वर ने हमें ’हाँ’ में उत्तर दिया है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने कहा, "...धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है" (याकूब 5:16)। लेकिन क्या इसका यह तात्पर्य है कि हम जितने अधिक ज़ोर से, या जितने अधिक लोगों को साथ लेकर प्रार्थना करेंगे, प्रार्थना का उत्तर ’हाँ’ में पाने की संभावना उतनी अधिक बढ़ जाएगी? मुझे अनेकों प्राथनाओं के उत्तर ’नहीं’ में, या फिर ’अभी प्रतीक्षा करो’ में मिल चुके हैं इसलिए मैं उस संभावना बढ़ाने वाले तर्क से सहमत नहीं हूँ।

   यह निश्चित है कि प्रार्थना में सामर्थ है, लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि प्रार्थना में बड़ा भेद भी है। बाइबल हमें सिखाती है कि हमें विश्वास के साथ, दृढ़तापूर्वक, निर्भीक होकर, धैर्य के साथ अपनी इच्छा प्रार्थना में परमेश्वर के सम्मुख रखनी चाहिए किंतु साथ ही हमें परमेश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित भी रहना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर अपनी इच्छा और बुद्धिमता में होकर जो भी देता है वही सर्वोत्तम तथा सबसे उपयुक्त होता है। मुझे इस बात से शांति है कि परमेश्वर हमारे दिल की बात सुनना चाहता है, और उसका उत्तर जो भी हो, वह भला ही करता है।

   मुझे ओले हैल्सबी का कथन पसन्द है, उन्होंने कहा, "प्रार्थना और सांसारिक रीति से असहाय होना एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते। जो सांसारिक रीति से असहाय होते हैं वे ही वास्तव में प्रार्थना कर सकते हैं। आपका सांसारिक रीति से असहाय होना ही आपकी प्रार्थना के सफल होने की कुँजी है।"

   प्रार्थना में लगे रहें! - ऐनी सेटास


असहाय सन्तान द्वारा प्रेमी सामर्थी पिता को भेजी गई पुकार ही प्रार्थना है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: याकूब 5:13-18
James 5:13 यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए। 
James 5:14 यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें। 
James 5:15 और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठा कर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उन की भी क्षमा हो जाएगी। 
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। 
James 5:17 एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा। 
James 5:18 फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42



बुधवार, 14 जनवरी 2015

प्रोत्साहक


   कठिन मंदी के दौर में मैंने अपने साथी मसीही विश्वासियों के साथ अन्य बेरोज़गार मसीही विश्वासियों की सहायता और प्रोत्साहन के लिए एक सहायता समूह बनाया। हम उन बेरोज़गार लोगों के नौकरी पाने में सहायता के लिए उनकी अर्ज़ियों, शैक्षिक एवं कार्य अनुभव आदि को अच्छी रीति से लिखने में सहायता करते, लोगों के साथ संपर्क करके उनके रोज़गार के अवसर तलाशते और उनके लिए प्रार्थनाएं किया करते थे। लेकिन एक समस्या बार-बार सामने आने लगी, जब किसी को नौकरी मिल जाती तो विरला ही कोई होगा जो समूह के लोगों को प्रोत्साहित करने लौटा होगा। इससे समूह में शेष रह गए लोगों में एकाकीपन और निराशा बढ़ जाती थी।

   लेकिन इस से भी बदतर थीं वे टिप्पणियाँ जो उन लोगों से सुनने को मिलती थीं जिन्होंने कभी बेरोज़गारी का कष्ट अनुभव नहीं करा था। उन लोगों की बातें अय्युब के मित्रों द्वारा उसके कष्ट के समय में उस पर लगाए जाने वाले लांछनों के समान ही होते थे; जैसा अय्युब के मित्रों ने उससे कहा: "और यदि तू निर्मल और धमीं रहता, तो निश्चय वह तेरे लिये जागता; और तेरी धमिर्कता का निवास फिर ज्यों का त्यों कर देता" (अय्युब 8:6)। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब और उसके मित्रों के बीच हो रहे इस संवाद को पढ़ते हैं तो अय्युब की पुस्तक के बारहवें अध्याय में पहुँचने तक अय्युब उनसे कहना आरंभ कर देता है कि जिन लोगों का जीवन सरल रहा है, वह उन से उपेक्षित अनुभव कर रहा है (पद 5)।

   जब हमारे लिए सब कुछ अच्छा चल रहा हो तब कभी-कभी हम यह सोचना आरंभ कर देते हैं कि या तो हम उन लोगों से जो कष्ट में होकर निकल रहे हैं भले हैं, या फिर परमेश्वर उनसे तो कम और हम से अधिक प्रेम रखता है। हम यह नज़रन्दाज़ कर बैठते हैं कि परमेश्वर तो सभी से समान ही प्रेम रखता है, और सब का ही भला चाहता है, इसीलिए तो उसने सारे संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु को इस संसार में बलिदान होने के लिए भेजा। साथ ही हम यह भी भूल जाते हैं कि इस पतित संसार के दुषप्रभाव किसी को भी, कभी भी और किसी भी सीमा तक प्रभावित कर सकते हैं; जो स्थिति आज किसी और की है, वही या उससे भी बुरी कल हमारी भी हो सकती है।

   हम चाहे अच्छे समय से होकर निकल रहे हों या फिर बुरे, हमें परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता सदा ही रहती है। परमेश्वर हम से यह भी आशा रखता है कि उसके द्वारा हमें प्रदान करी गई सफलता, समृद्धि और सामर्थ को हम दूसरों की भलाई और प्रोत्साहन में उपयोग करें। वह हमें आलोचक नहीं प्रोत्साहक देखना चाहता है। - रैन्डी किलगोर


परमेश्वर के प्रति दीनता हमें दूसरों के प्रति नम्रता प्रदान करती है।

हम पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, हम पर अनुग्रह कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत ही भर गए हैं। हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:3-4

बाइबल पाठ: अय्युब 12:1-10
Job 12:1 तब अय्यूब ने कहा; 
Job 12:2 नि:सन्देह मनुष्य तो तुम ही हो और जब तुम मरोगे तब बुद्धि भी जाती रहेगी। 
Job 12:3 परन्तु तुम्हारी नाईं मुझ में भी समझ है, मैं तुम लोगों से कुछ नीचा नहीं हूँ कौन ऐसा है जो ऐसी बातें न जानता हो? 
Job 12:4 मैं ईश्वर से प्रार्थना करता था, और वह मेरी सुन लिया करता था; परन्तु अब मेरे पड़ोसी मुझ पर हंसते हैं; जो धमीं और खरा मनुष्य है, वह हंसी का कारण हो गया है। 
Job 12:5 दु:खी लोग तो सुखियों की समझ में तुच्छ जाने जाते हैं; और जिनके पांव फिसला चाहते हैं उनका अपमान अवश्य ही होता है। 
Job 12:6 डाकुओं के डेरे कुशल क्षेम से रहते हैं, और जो ईश्वर को क्रोध दिलाते हैं, वह बहुत ही निडर रहते हैं; और उनके हाथ में ईश्वर बहुत देता है। 
Job 12:7 पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे। 
Job 12:8 पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; ओर समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी। 
Job 12:9 कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है। 
Job 12:10 उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


मंगलवार, 13 जनवरी 2015

सुनिश्चित भविष्य


   मुझे फुटबॉल का खेल बहुत पसन्द है, और मैं इंगलैण्ड के लिवरपूल फुटबॉल क्लब का प्रशंसक हूँ। जब वे खेल रहे होते हैं तो वह मेरे लिए बहुत उत्सुकता से भरा समय होता है, क्योंकि एक गोल या एक चूक खेल के परिणाम को बदल सकती है। इसलिए जब तक वह खेल चल रहा होता है मैं तनाव में बना रहता हूँ, और यही रोमांच खेल को आनन्दपूर्ण भी बनाता है। लेकिन हाल ही में मैंने लिवरपूल द्वारा खेली गई एक प्रतिस्पर्धा की रिकॉर्डिंग देखी, और मुझे आश्चर्य हुआ कि मैं उस खेल को देखते हुए कितना शांत था। ऐसा क्यों? क्योंकि मुझे उस खेल का परिणाम पहले ही पता था! इस कारण मैं शान्त मन और शरीर से उस खेल को देख सका, भाग ले रहे खिलाड़ियों के खेल की बारीकियों पर ध्यान देने पाया और खेल का एक अलग ही आनन्द उठाने पाया।

   जीवन भी रोमांचक खेलों के सीधे प्रसारण के समान ही होता है। कब कुछ अनेपक्षित हो जाए, कुछ अन्होना घट जाए, कब कोई निराशा की स्थिति आ जाए या कोई भय हावी हो जाए, कुछ पता नहीं होता; भविष्य को लेकर तनाव बना रहता है। क्योंकि हम परिणाम से अनभिज्ञ होते हैं इसलिए चिंतित और व्याकुल रहते हैं। लेकिन मसीही विश्वासी इस बात के द्वारा शान्ति प्राप्त कर सकते हैं कि हमारे प्रभु यीशु द्वारा क्रूस पर पूरे किए गए कार्य के द्वारा हमारा भविष्य अनन्तकाल के लिए सुनिश्चित हो चुका है।

   प्रभु यीशु के अनुयायी प्रेरित यूहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा, "मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है" (1 यूहन्ना 5:13)। जीवन हमारे सामने चाहे कैसी भी और कितनी भी अनेपक्षित बातें और परिस्थितियाँ लेकर आए, लेकिन प्रभु यीशु के कार्य के द्वारा हमारा भविष्य सुनिश्चित किया जा चुका है, इसलिए हम मसीही विश्वासियों के लिए कोई चिंता का विषय शेष नहीं रहा है; अनन्त शांति और आनन्द हमारे लिए तैयार हैं। - बिल क्राउडर


जब मसीह यीशु हृदय में राज्य करेगा तो उसकी शान्ति हमारे जीवन में राज्य करेगी।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। - यूहन्ना 1:12

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 5:10-15
1 John 5:10 जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिसने परमेश्वर को प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्वास नहीं किया, जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। 
1 John 5:11 और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।
1 John 5:12 जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।
1 John 5:13 मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है। 
1 John 5:14 और हमें उसके साम्हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उस की इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो हमारी सुनता है। 
1 John 5:15 और जब हम जानते हैं, कि जो कुछ हम मांगते हैं वह हमारी सुनता है, तो यह भी जानते हैं, कि जो कुछ हम ने उस से मांगा, वह पाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38


सोमवार, 12 जनवरी 2015

उपहार


   अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद अनिवार्य है। वैज्ञानिक यह तो भली-भांति नहीं जानते के नींद क्यों आवश्यक है, लेकिन वे यह अवश्य जानते हैं कि अपर्याप्त नींद के क्या-क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। यदि हम अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं लेते तो शरीर की शीथलता, वज़न का बढ़ना, और अनेक बिमारियाँ जैसे ज़ुकाम या फ्लू से लेकर कैंसर तक होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हमारे सो जाने के बाद जो कुछ परमेश्वर हमारे शरीरों में करता है वह किसी आश्चर्यकर्म से कम नहीं है। जब हम नींद में निष्क्रीय पड़े होते हैं, तब परमेश्वर हमारे शरीरों के रख-रखाव में सक्रीय होता है; वह हमारी ऊर्जा को पुनः स्थापित करता है, हमारे शरीर की कोषिकाओं की मरम्मत करके उन्हें भी पुनःस्थापित करता है और हमारे मस्तिष्क में जमा बातों को सुसंगठित करके सही प्रकार से रखता है।

   अच्छी प्रकार से नींद ना ले पाने के अनेक कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिनका निवारण संभवतः हमारे हाथों में ना हो, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि कार्य की अधिकाई अपर्याप्त नींद का कारण नहीं होना चाहिए (भजन 127:2)। नींद परमेश्वर का दिया हुआ एक ऐसा उपहार है जिसे हमें कृतज्ञता के साथ स्वीकार करना चाहिए। यदि हमारी नींद अपर्याप्त है तो हमें यह पता लगाना चाहिए कि ऐसा क्यों है। कहीं ऐसा तो नहीं कि हम प्रातः जल्दी उठते और रात देर से सोते हैं जिससे उन बातों के लिए धन कमा सकें जिनकी हमें आवश्यकता नहीं है। या फिर हम मसीही सेवकाई के ऐसे कार्यों में लगे हैं जिनके लिए हमें लगता है कि उन कार्यों को हमारे सिवाय कोई और अच्छे से नहीं कर सकता।

   मुझे कभी-कभी लगने लगता है कि जो कार्य मैं जागते हुए करती हूँ, वह उस कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है जो परमेश्वर मेरे अन्दर तब करता है जब मैं सो रही होती हूँ। लेकिन परमेश्वर के नींद के उपहार की अवहेलना करके उसे हमारे शरीरों में अपना कार्य करने देने में बाधा बनना, एक प्रकार से उससे यह कहना है कि मेरा अपना कार्य आपके कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर नहीं चाहता कि हम में से कोई भी शारीरिक कार्यों एवं सांसारिक उपलब्धियों की लालसाओं का दास हो जाए। वह चाहता है कि हम उसके उपहार को स्वीकार करके अपने शरिरों को स्वस्थ एवं सुचारू रखें और उसे हमारे अन्दर अपना कार्य अच्छे से करने दें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि हम पर्याप्त आराम नहीं करेंगे तो बिखर जाएंगे।

तुम जो सवेरे उठते और देर कर के विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है। - भजन 127:2

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17


रविवार, 11 जनवरी 2015

चश्मदीद गवाह


   जब लोगों की जीवनियों पर आधारित हमारे टेलिविज़न कार्यक्रम, Day of Discovery में प्रसारण के लिए हमारी टीम लोगों से साक्षात्कार द्वारा उनके अनुभव रिकॉर्ड करती है तो हमें सबसे अधिक आनन्द ऐसे लोगों की बातों से आता है जो उस व्यक्ति को जिसकी जीवनी हम दिखाने का प्रयास कर रहे हैं व्यक्तिगत रीति से या निकटता से जानते थे। वर्षों से चले आ रहे इस कार्यक्रम में प्रसारण के लिए हमने साक्षात्कार लिया एक ऐसे व्यक्ति का जो चीन में कैदखाने में एरिक लिडिल के साथ उनके कमरे में रहता था; एक ऐसी महिला का जो अपनी किशोरावस्था में दूसरे विश्व-युद्ध के काल में सी. एस. लूइस के घर में रहा करती थी; एक ऐसे व्यक्ति का जो डॉ० जॉर्ज वॉशिंग्टन कारवर की दक्षिणी अमेरिका प्रचार यात्रा में उनकी गाड़ी का चालक होकर उनके साथ-साथ रहा। वे सब बड़े खुले तौर से उस व्यक्ति के बारे में बताते थे जिसे एक विशेष व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने निकट से जाना था।

   जब प्रभु यीशु के एक शिष्य यूहन्ना ने अपनी वृद्धावस्था में मसीही विश्वासियों को पत्री लिखी, तो उस पत्री के आरंभिक शब्दों के द्वारा उसने अपने आप को प्रभु यीशु का एक करीबी सहयोगी और उसके जीवन का चश्मदीद गवाह स्थापित किया: "यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ" (1 यूहन्ना 1:2); और पत्री लिखने के अपने उद्देश्य को स्पष्ट किया: "जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए" (1 यूहन्ना 1:3-4)।

   प्रभु यीशु मसीह के साथ रहने और कार्य करने वाले उनके चेलों की आँखों देखी तथा व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर दी गई गवाही हमें प्रभु यीशु पर विश्वास लाने में सहायता करती है; चाहे आज हम प्रभु यीशु को अपनी शारीरिक आँखों से नहीं देखते हैं, लेकिन उन चश्मदीद गवाहों के बयान हमें उस पर विश्वास करने को प्रेरित करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया। - प्रभु यीशु (यूहन्ना 20:29)

क्योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें। - प्रेरितों 4:20

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए।
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34


शनिवार, 10 जनवरी 2015

संपदा


   क्यूबा की जेल में 14 वर्ष बिता कर भी जीवित निकल आने वाले एक कैदी ने बताया कि कैसे उसने अपने हौंसले और अपनी आशा को बनाए रखा; उसने कहा, "मेरी कैद-कोठरी में कोई खिड़की नहीं थी, बाहर देख पाने का कोई साधन नहीं था, इसलिए मैंने मानसिक रूप से अपने दरवाज़े में एक खिड़की बना ली और अपने मन की आँखों से उस में से मैं बाहर के सुन्दर दृश्य देखा करता था, जैसे पहाड़, झरने, घाटी में पत्थरों पर बहता हुआ पानी आदि। वे सब मेरे लिए इतने वास्तविक बन गए थे कि मुझे उनकी कलपना करने के लिए कोई प्रयास नहीं करना पड़ता था, जब भी मैं कैद-कोठरी के दरवाज़े की ओर देखता, वे सब मुझे दिखने लग जाते थे।"

   यह भी एक विचित्र बात है कि परमेश्वर के वचन बाइबल की सबसे आशावान पुस्तकें - पौलुस प्रेरित ने फिलिप्पी, कुलुस्से और इफसुस की मसीही विशवासी मण्डलियों को जो पत्रियाँ लिखीं, वे सब उस ने कैदखाने में सांकलों से बन्धे होने के समय में लिखीं। इफसुस की मण्डली को लिखी पत्री से अन्दाज़ा होता है कि पौलुस ने जब अपनी कैद से बाहर के जीवन के बारे में विचार किया तो उसने क्या देखा होगा।

   सबसे पहली बात उसने उन मसीही विश्वासी मण्डलियों में, जिन्हें वह पीछे छोड़ कर आया था, आत्मिक उन्नति देखी। उसकी यह पत्री इफसुस की मण्डली के उत्साह के लिए परमेश्वर के प्रति धन्यवाद से भरी हुई है (इफिसियों 1:15-16)। फिर उसने प्रयास किया कि उनके मन की आँखों को और भी महिमामय दृश्यों की ओर मोड़े - परमेश्वर के अनुग्रह के असीम धन की ओर (इफिसियों 2:7); और फिर जब पौलुस ने परमेश्वर के प्रेम की योजना को प्रगट करने वाले स्वरों को उठाया तो उनमें निराशा का कोई दबा हुआ सा भी सुर नहीं था।

   यदि आप कभी निराशा की स्थिति में हों, या इस कशमकश से होकर निकलें कि मसीही विश्वास का जीवन कोई सार्थक जीवन है भी या नहीं, तो ऐसे में इफिसियों के विश्वासियों को लिखी यह पत्री बहुत सहायक होती है क्योंकि मसीह यीशु में मिलने वाली संपदा का इसमें अच्छा वर्णन है। इसे प्रयोग करके अवश्य देखिए। - फिलिप यैन्सी


जिसकी आशा परमेश्वर और उसके वचन पर स्थापित है वह कभी आशाहीन हो ही नहीं सकता।

हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। - इफिसियों 1:7

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:15-23
Ephesians 1:15 इस कारण, मैं भी उस विश्वास का समाचार सुनकर जो तुम लोगों में प्रभु यीशु पर है और सब पवित्र लोगों पर प्रगट है। 
Ephesians 1:16 तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। 
Ephesians 1:17 कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे। 
Ephesians 1:18 और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। 
Ephesians 1:19 और उस की सामर्थ हमारी ओर जो विश्वास करते हैं, कितनी महान है, उस की शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार। 
Ephesians 1:20 जो उसने मसीह के विषय में किया, कि उसको मरे हुओं में से जिलाकर स्‍वर्गीय स्थानों में अपनी दाहिनी ओर। 
Ephesians 1:21 सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आने वाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया। 
Ephesians 1:22 और सब कुछ उसके पांवों तले कर दिया: और उसे सब वस्‍तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया। 
Ephesians 1:23 यह उसकी देह है, और उसी की परिपूर्णता है, जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17


शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

ठीक


   चमकती हुई धूप निकली थी और सर्दी थी नहीं इसलिए उन घरेलू वस्तुओं की, जो अब हमारे काम की नहीं रहीं थी, बिकरी और निपटारे के लिए वह एक अच्छा दिन था। हमारे गैराज में लगे इस "सेल" में आकर लोग कपड़ों, किताबों, बर्तनों आदि को देख रहे थे कि उनके काम का कुछ उसमें मिल जाए और वे उसे खरीद लें। मैंने देखा कि एक युवती वहाँ रखा एक सफेद मोतियों का हार बड़े चाव के साथ देख रही थी; कुछ ही समय के पश्चात वह युवती और उसके साथ ही वह हार भी वहाँ से ग़ायब थे। मैंने इधर-उधर नज़र करी तो उसे सड़क की ओर जाते देखा; मैं दौड़ कर उसके पास गई, और उस हार को उसकी मुठ्ठी में बन्द पाया। हम एक-दूसरे के सामने खड़े थे, दोनों को ही पता था कि क्या हुआ है; उस युवती ने उस हार की कीमत चुकाने की पेशकश करी और बिना किसी गहमागहमी के मामला वहीं निपट गया।

   ज़क्कई एक नाटे कद का महसूल लेने वाला यहूदी अधिकारी था जिसके मन में प्रभु यीशु को देखने की प्रबल लालसा थी। अपनी लालसा को पूरा करने के लिए वह उस मार्ग के एक पेड़ पर चढ़ गया जिस मार्ग से होकर प्रभु यीशु को जाना था। प्रभु यीशु ने उस पेड़ के नीचे आकर उसे बुलाया और उसके साथ उसके घर गया। प्रभु यीशु से मिलने के बाद ज़क्कई बदल गया; उसने सब के सामने घोषणा करी कि जितना उसने अन्यायपूर्वक लिया है वह उस सब का चौगुना लौटा देगा और अपनी संपत्ति का आधा भाग गरीबों की सेवा में दान कर देगा। ज़क्कई की यह सब करने की तत्परता प्रभु यीशु से मिलने के बाद उसमें आए मन-परिवर्तन का सूचक है। इससे पहले ज़क्कई लोगों से लेने और छीनने वाला हुआ करता था, लेकिन प्रभु यीशु से मिलने के बाद वह लौटाने वाला और देने वाला बन गया।

   ज़क्कई का उदाहरण हमें भी इसी प्रकार के मन-परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है, और यही मन-परिवर्तन तथा पापों के लिए किया गया सच्चा पश्चाताप ही वह बात है जो हमें प्रभु यीशु का विश्वासी तथा परमेश्वर की सन्तान बनाती है। जब परमेश्वर हमें हमारे द्वारा अनुचित रीति से ले ली गई वस्तुओं, हमारे अनचुकाए कर, या किसी अन्य रीति से दूसरों के प्रति किए गए गलत व्यवहार के बारे में स्मरण दिलाता है, तो उसे स्वीकार तथा ठीक करके हम परमेश्वर पिता का आदर करते हैं, संसार के सामने अपने मसीही विश्वास की गवाही रखते हैं। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट


एक ईमानदार व्यक्ति के लिए कोई भी कर्ज़ इतना पुराना कभी नहीं होता कि वह उसे चुका ना सके।

सिय्योन के पापी थरथरा गए हैं: भक्तिहीनों को कंपकंपी लगी है: हम में से कौन प्रचण्ड आग में रह सकता? हम में से कौन उस आग में बना रह सकता है जो कभी नहीं बुझेगी? जो धर्म से चलता और सीधी बातें बोलता; जो अन्धेर के लाभ से घृणा करता, जो घूस नहीं लेता; जो खून की बात सुनने से कान बन्द करता, और बुराई देखने से आंख मूंद लेता है। वही ऊंचे स्थानों में निवास करेगा। - यशायाह 33:14-15

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था। 
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। 
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। 
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है। 
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया। 
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है। 
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं। 
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7