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सोमवार, 21 दिसंबर 2015

उजियाला


   कला के इतिहासकार सेमोर स्लाइव ने हॉलेन्ड के महान कलाकार रेमब्रान्ट को उजियाले और परछाईयों के प्रयोग से अपनी चित्रकला के द्वारा कहानी सुनाने में ऐसा दक्ष कलाकार बताया है जो आपको अपनी रचना से मोह कर उसके साथ बाँध ले। रेम्ब्रान्ट का बनाया हुआ एक चित्र जिसका शीर्षक है ’The Adoration of the Shepherds' प्रभु यीशु के जन्म की घटनाओं पर आधारित है। इस चित्र में बेतलहेम की वह गौशाला दिखाई गई है जिसमें प्रभु यीशु का जन्म हुआ। चित्र में हम चरनी के निकट, जिसमें शिशु यीशु को रखा गया था, दो चरवाहों को घुटने टेके बैठा हुआ देखते हैं जबकि अन्य लोग दूर पीछे को खड़े हैं। एक के हाथ में लालटेन है, परन्तु सबसे अधिक रौशनी उसकी लालटेन से नहीं वरन शिशु यीशु से आ रही है और जो यीशु के निकट हैं उन्हें रौशन कर रही है।

   प्रभु यीशु के जन्म से सात शताब्दी पूर्व परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह ने उजियाले और अन्धकार का उपयोग करके आने वाले मुक्तिदाता प्रभु यीशु के संबंध में भविष्यवाणी करी जो परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह की पुस्तक में लिखी मिलती है: "जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी।...क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा" (यशायाह 9:2, 6)।

   रेम्ब्रान्ट के उस चित्र को देखने वाला प्रत्येक व्यक्ति उसमें कोई भिन्न कहानी देख सकता है, लेकिन हम में से हर एक का प्रतिरूप उस चित्र में विद्यमान है - हम यीशु के निकट और उसके समक्ष घुटने टेके हुए हो सकते हैं या पीछे परछाईयों में संकोच के अन्धेरों में छिपे खड़े हो सकते हैं, या उसके सब कुछ रौशन कर देने वाले उजियाले के होते हुए भी अपना ही कोई फीका सा उजियाला लेकर उसके सामने खड़े रहने वाले हो सकते हैं; यह हमारे अपने देखने और जाँचने की बात है कि प्रभु यीशु और उसके उजियाले के सामने हम कैसे हैं!

   क्रिसमस का समय हमें अवसर देता है कि हम अपने आप को जाँचें और अपने अन्धकार से निकल कर जीवन के उजियाले में खड़े हों, प्रभु यीशु के उजियाले को अपने हृदयों में चमकने दें, अपने आप को उसे समर्पित कर दें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु में लाया गया विश्वास अन्धकार में लगाई छलाँग नहीं वरन अन्धियारे से उजियाले में कदम बढ़ाना है।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यशायाह 9:1-7
Isaiah 9:1 तौभी संकट-भरा अन्धकार जाता रहेगा। पहिले तो उसने जबूलून और नप्ताली के देशों का अपमान किया, परन्तु अन्तिम दिनों में ताल की ओर यरदन के पार की अन्यजातियों के गलील को महिमा देगा। 
Isaiah 9:2 जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी। 
Isaiah 9:3 तू ने जाति को बढ़ाया, तू ने उसको बहुत आनन्द दिया; वे तेरे साम्हने कटनी के समय का सा आनन्द करते हैं, और ऐसे मगन हैं जैसे लोग लूट बांटने के समय मगन रहते हैं। 
Isaiah 9:4 क्योंकि तू ने उसकी गर्दन पर के भारी जूए और उसके बहंगे के बांस, उस पर अंधेर करने वाले की लाठी, इन सभों को ऐसा तोड़ दिया है जेसे मिद्यानियों के दिन में किया था। 
Isaiah 9:5 क्योंकि युद्ध में लड़ने वाले सिपाहियों के जूते और लोहू में लथड़े हुए कपड़े सब आग का कौर हो जाएंगे। 
Isaiah 9:6 क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। 
Isaiah 9:7 उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वे उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 4-5
  • प्रकाशितवाक्य 12


रविवार, 20 दिसंबर 2015

शरण-स्थान


   संसार के इतिहास के मध्यकालीन समय में किसान मैदानों में अपने खेतों में कार्य करते, फसल की देखभाल करते थे। परन्तु यदि कोई दुश्मन आते दिखाई देते तो वे अपने परिवार सहित भागकर किसी निकट के गढ़ वाले नगर में शरण ले लेते थे जब तक कि खतरा टल ना जाए। सदियों से, फ्रांस में स्थित करकासोन, ऐसा ही एक नगर रहा है। ईसा पूर्व पांचवीं शताबदी में पत्थरों से बनाए गए इस गढ़ ने रोम के निवासियों, पश्चिमी यूरोप के निवासी गॉल, जर्मनी के बंजारे विज़िगौथ, जर्मनी के कबायली निवासी फ्रैंक्स और फ्रांस के लोगों को आक्रमणकारियों से शरण दी है। इसका विशाल आकार, ऊँचे बुर्ज, मोटी दीवारों और चहारदिवारियों ने अन्दर शरण लेने वालों को भरोसा और हौंसला दिया है, उन्होंने अपने आप को इसमें सुरक्षित अनुभव किया है।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए हमारा जीवता परमेश्वर ही हमारा दृढ़ गढ़ है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में आया है, "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। "यहोवा का नाम" द्वारा भजनकार का तात्पर्य है परमेश्वर के चरित्र से - उसकी विश्वसनीयता, सामर्थ और करुणा की भरपूरी से, तथा "बचता है" से तात्पर्य है खतरे के स्थान से निकालकर ऊँचे सुरक्षित स्थान पर रखने की क्षमता से।

   हमें जीवन में अनेक बार खतरों का सामना करना पड़ता है, और ऐसे में हमारी प्रतिक्रीया होती है कि हम बचकर, भागकर किसी सुरक्षित स्थान पर छिप जाएं, किसी का आश्रय ले लें। सामान्यतः लोग ऐसे में अपनी धन-संपदा या फिर रिश्तेदारों, मित्रों और जानकारों पर भरोसा करते हैं, उनकी ओर सहायता के लिए मुड़ते हैं। लेकिन मसीही विश्वासियों के लिए, अपने चरित्र और गुणों के कारण परमेश्वर ही सबसे सुरक्षित और विश्वासयोग्य शरण-स्थान रहता है।

   यदि आज आप किसी परेशानी में हैं, किसी भय का सामना कर रहे हैं तो निःसंकोच होकर परमेश्वर के पास आईए; वह आपका शरण-स्थान बनकर आपको आश्रय देगा, उसमें आप सुरक्षा और शान्ति पाएंगे। - डेनिस फिशर


समय अच्छा हो या बुरा, परमेश्वर सदा ही हमारा सुरक्षित विश्राम स्थान बना रहता है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 37:1-19
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा।
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी। 
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा। 
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे। 
Psalms 37:12 दुष्ट धर्मी के विरुद्ध बुरी युक्ति निकालता है, और उस पर दांत पीसता है; 
Psalms 37:13 परन्तु प्रभु उस पर हंसेगा, क्योंकि वह देखता है कि उसका दिन आने वाला है।
Psalms 37:14 दुष्ट लोग तलवार खींचे और धनुष बढ़ाए हुए हैं, ताकि दीन दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलने वालों को वध करें। 
Psalms 37:15 उनकी तलवारों से उन्हीं के हृदय छिदेंगे, और उनके धनुष तोड़े जाएंगे।
Psalms 37:16 धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। 
Psalms 37:17 क्योंकि दुष्टों की भुजाएं तो तोड़ी जाएंगी; परन्तु यहोवा धर्मियों को सम्भालता है।
Psalms 37:18 यहोवा खरे लोगों की आयु की सुधि रखता है, और उनका भाग सदैव बना रहेगा। 
Psalms 37:19 विपत्ति के समय, उनकी आशा न टूटेगी और न वे लज्जित होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11


शनिवार, 19 दिसंबर 2015

मसीहा


   हैण्डल की प्रसिद्ध संगीत रचना "मसीहा" में से मुझे उसके पहले भाग का खण्ड "क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ है" बहुत अच्छा लगता है; विशेषकर उसका वह भाग जब उसे गाते हुए संगीत मण्डली एक स्वर में "क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ" वाक्याँश पर उच्च स्वर में पहुँचती है। हैण्डल की यह भव्य रचना परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु की आराधना में संगीत की ऊँचाईयों को छूती है, उस मसीहा के लिए जो हमारे लिए मानव रूप में अवतरित हुआ; और उसके यह दोनों वाक्यांश परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में यशायाह 9:6 से लिए गए हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का नया नियम खण्ड हमारे लिए और भी स्पष्ट करता है कि यह बालक कौन है। लूका के प्रथम अध्याय में हम पाते हैं कि स्वर्गदूत ने उस आने वाले मसीहा की पहिचान में चार बातें कहीं: वह मरियम से जन्मेगा, अर्थात पूर्णत्या मनुष्य (लूका 1:31); वह परमप्रधान का पुत्र होगा, अर्थात पूर्णत्या ईश्वरीय (लूका 1:32); वह दाऊद के वंश से होगा, अर्थात राजवंशी (लूका 1:32), और वह परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा, अर्थात सब बातों में पिता परमेश्वर के तुल्य (लूका 1:35)। मसीहा होने की सारी आवश्यकताएं उस भविष्यवाणी कर गए बालक के परमेश्वर का देहधारी पुत्र होने के स्वरूप में पूरी होती हैं।

   जब हम इस क्रिसमस के त्योहार के समय में उस बालक के जन्म की खुशियाँ मनाते हैं, तो हमारे सारे समारोह और आनन्द उसकी वास्तविकता को समझने और उसकी भरपूरी को जानने से भर जाएं। हमारे स्वर्गीय पिता ने हमें एक सिद्ध भेंट दी है, एक ऐसा पुत्र जिसकी परिपूर्णता हमारी सभी आवश्यकताओं के लिए काफी है। आईए हम मसीहा प्रभु यीशु की उपासना और आराधना में अपनी आवाज़ को बुलन्द करें। - बिल क्राउडर


बेतलेहम में परमेश्वर का प्रेम देहधारी हुआ।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: लूका 1:26-33
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10


शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

खाली


   हमारी पोती जूलिया ने अपना ग्रीष्म अवकाश यूगान्डा के बुसिया में स्थित एक अनाथालय में काम करके प्रशिक्षण लेने में व्यतीत किया। अपने कार्य के अन्तिम दिन वह हर एक बच्चे के पास उससे विदा लेने के लिए गई। एक छोटी लड़की सौम्या उसके जाने से बहुत उदास थी। सौम्या ने जूलिया कहा, "कल आप चली जाएंगी और फिर अगले सप्ताह बाकी आंटियाँ भी चली जाएंगी।" जूलिया ने सौम्या के साथ सहमति जताई कि उसे और बाकी सभी प्रशिक्षुकों को अब जाना होगा। सौम्या ने थोड़ी देर सोच कर कहा, "तब तो हम खाली हो जाएंगे; आप में से कोई भी हमारे साथ नहीं रह जाएगा।" जूलिया ने फिर उसके साथ सहमति जताई। छोटी सौम्या फिर थोड़ी देर सोचती रही, और बोली, "लेकिन परमेश्वर तो हमारे साथ ही रहेगा; हम खाली नहीं होंगे!"

   यदि हम अपने आप से ईमानदार हों तो हम स्वीकार करेंगे कि हम सबने इस "खाली होने" को अनुभव किया है, और भिन्न बातों से उसे भरने का प्रयत्न भी किया है। हमारे अन्दर का खालीपन मित्रता, प्रेम, वासना, धन, लोकप्रीयता, सफलता आदि बातों से कभी स्थाई रीति से या पूरी तरह से नहीं भरता। हमारे अन्दर एक भावना बनी रहती है, किसी ऐसी चीज़ के लिए जिसे परिभाषित करना चाहे संभव ना हो, परन्तु वह संसार की हर बात से अधिक मूल्यवान है और संसार की किसी बात से उसकी पूर्ति नहीं हो पाती। संसार से मिल सकने वाला सब कुछ पा लेने पर भी हमारे अन्दर उसका खालीपन बना ही रहता है। संसार से मिलने वाली हर उत्तम वस्तु के बाद भी हमारे अन्दर लालसा रहती है कि कुछ इससे भी बढ़कर, इससे भी अधिक, इससे भी अच्छा मिल सके। हमारी इस लालसा की एक परछाईं, एक धुंधला सा प्रतिरूप हमें संसार की बातों में दिखाई देता है और फिर वह ओझल हो जाता है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध लेखक सी. एस. ल्यूईस ने कहा, "हमारी सर्वोत्तम उपलब्धि हमारी और पाने की चाहत ही रहती है।"

   हम मनुष्यों को परमेश्वर ने अपने स्वरूप में बनाया है (उत्पत्ति 1:27), और इसीलिए परमेश्वर से कम कुछ भी हमें स्थाई संतोष नहीं दे सकता। उस अविनाशी स्वर्गीय जीवते परमेश्वर के बिना, चाहे बाहर से हम नश्वर संसार की किसी भी बात से कितना भी भर जाएं, किंतु अन्दर से हम खाली ही रहेंगे। प्रभु यीशु ही उस सच्चे जीवते परमेश्वर का प्रतिरूप है (यूहन्ना 1:18), और जैसा कि उसने कहा है, वह हमें बहुतायत से जीवन देने आया है: "... मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं" (यूहन्ना 10:10)। परमेश्वर ही हमारी हर एक भूख-प्यास को मिटा सकता है, हमें संतुष्ट कर सकता है, और करता भी है (भजन 107:9)। - डेविड रोपर


परमेश्वर अपने से पृथक आनन्द तथा शान्ति हमें दे नहीं सकता, क्योंकि उसके बिना आनन्द तथा शान्ति है ही नहीं। - सी. एस. ल्यूईस

तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:27

बाइबल पाठ: भजन 107:1-9
Psalms 107:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 107:2 यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, 
Psalms 107:3 और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है।
Psalms 107:4 वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया; 
Psalms 107:5 भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए। 
Psalms 107:6 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया; 
Psalms 107:7 और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे। 
Psalms 107:8 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! 
Psalms 107:9 क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • औब्द्याह 1
  • प्रकाशितवाक्य 9


गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

प्रोत्साहन तथा प्रेम


   मुझे अपनी एक मित्र से, जो एक विकासशील देश में एक अनाथालय में सेवा कर रही है, पत्र मिला; उसने लिखा: "कल जब मैं अपने दपतर में बैठी काम कर रही थी, मैंने फर्श पर ढेरों चींटियों को पंक्ति में चलते देखा, उस पंक्ति के साथ साथ जब मैंने अपनी नज़र आगे बढ़ाई तो मैं यह देखकर चकित रह गई कि हमारे दपतर की दीवार पर अन्दर और बाहर हज़ारों चींटियाँ भरी हुई थीं; वे दीवर से लगी हर चीज़ पर चल रही थीं। हमारे एक कर्मचारी ने उन्हें साफ करने का काम आरंभ किया और घण्टे भर के अन्दर ही सारी चींटियाँ चली गईं।"

   चींटियों की यह घटना बयान करने के बाद मेरी मित्र ने मुझसे पूछा, "और बताओ, तुम्हारा दिन और कार्य कैसा रहा?" कभी कभी ऐसा कुछ चाहिए होता है जो हमें उन लोगों की और उनकी आवश्यकताओं की याद दिलाए जो घर के आराम और सुविधाओं को छोड़कर कहीं अन्य स्थानों पर परमेश्वर के कार्य में लगे हैं, उसकी सेवा कर रहे हैं। परमेश्वर ने हम सभी मसीही विश्वासियों को अलग अलग सेवकाई के लिए बुलाया है, और कुछ की सेवकाई कठिनाईयों से भरी होती है। अब मेरी उस मित्र को ही लीजिए, किसे पसन्द आएगा कि वह ऐसे दफ्तर में काम करे जहाँ कभी भी चींटियाँ आकर सब जगह छा जाती हैं; लेकिन वह वहाँ सुविधाओं के लिए नहीं वरन परमेश्वर की बुलाहट को पूरा करने के लिए है।

   वह और उसके समान अनेक मसीही विश्वासियों के मन प्रभु यीशु के प्रेम से भरे और प्रोत्साहित होकर उसके कार्य में लगे हैं, और उनके लिए जीवन के लिए "आवश्यक" आराम और सुविधाओं को छोड़कर प्रभु द्वारा निर्धारित कार्य को पूरा करना, प्रभु यीशु के प्रति उनके प्रेम को प्रदर्शित करना है; उस प्रभु के प्रति जिसने अपने प्रेम में होकर समस्त मानव जाति को उसके पापों से छुड़ाने के लिए अपने प्राण क्रूस पर बलिदान कर दिए।

   प्रभु यीशु के लिए सेवकाई में लगे लोगों को हमारे सहयोग और सहायता की आवश्यकता है, जैसे प्रेरित पौलुस को फिलिप्पी में अपने मित्रों से सहायता की आवश्यकता थी - सहभागिता के लिए (फिलिप्पियों 1:5), आर्थिक आवश्यकताओं के लिए (फिलिप्पियों 4:16) और देखभाल के लिए (फिलिप्पियों 4:18)। जब हम अपने मित्रों को उनकी मसीही सेवकाई में सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं तो हम अपने प्रभु के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करते हैं। इस प्रोत्साहन और प्रेम प्रदर्शन को बनाए रखिए। - डेव ब्रैनन


जीवन की महिमा प्रेम पाने की बजाए प्रेम बाँटने, लोगों से लेने की बजाए उन्हें देने, और सेवा करवाने की बजाए सेवा करने में है।

मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। - फिलिप्पियों 1:3, 5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-18
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहायता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8


बुधवार, 16 दिसंबर 2015

उल्टा जीवन


   शिकागो नदी असामान्य है क्योंकि वह उल्टी बहती है। एक शताब्दी से भी पूर्व इंजीनियर्स को उसके बहाव को पलटना पड़ा था। ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि उसके किनारे के शहरों में रहने वाले लोग नदी को कूड़े-दान के समान प्रयोग कर रहे थे; प्रतिदिन घरों की गंदगी तथा कारखानों का कचरा उस नदी में बहाए जा रहे थे, जो फिर मिशिगन झील में पहुँचते थे जिसमें शिकागो नदी समाप्त होती थी। उसी झील से शिकागो शहर के लिए पीने का पानी लिया जाता था, इसलिए उस प्रदूषित पानी को पीने से हज़ारों लोग बीमार पड़ रहे थे, मर रहे थे। इसलिए अधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि नदी को झील में समाप्त होने से रोका जाए और इसीलिए उसका प्रवाह पलट दिया गया।

   जब हम प्रभु यीशु के सांसारिक जीवन को देखते हैं तो जैसा होना चाहिए था, वह उससे उलट प्रतीत होता है। प्रभु महिमा का राजा और परमेश्वर था, लेकिन उसने एक गरीब असहाय शिशु बनकर संसार में प्रवेश किया, संसार के लोगों की निन्दा और तिरस्कार सहा। वह निष्पाप और निष्कलंक था, लेकिन फिर भी एक घृणित अपराधी के समान उसने क्रूस की मृत्यु स्वीकार करी। लेकिन इस सब में प्रभु यीशु ने परमेश्वर पिता की इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत किया, परमेश्वर की आज्ञाकारिता में रहा (यूहन्ना 6:38)।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु के समान व्यवहार और कार्य रखने हैं, चाहे यह संसार की प्रथा के विपरीत ही क्यों ना लगे। हमें अपने शत्रुओं को आशीष देनी चाहिए (रोमियों 12:14), सांसारिक धन-संपदा से अधिक भक्ति को महत्व देना चाहिए (1तिमुथियुस 6:6-9), और कठिन परिस्थितियों में भी आनन्दित रहना चाहिए (याकूब 1:2) चाहे ऐसा करना सांसारिक बुद्धि के विरुद्ध क्यों ना दिखाई दे। प्रभु यीशु ने कहा, "क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा" (मत्ती 16:25)।

   चिंता की कोई बात नहीं यदि मसीही विश्वास का जीवन जीना कई बार उल्टा जीवन जीने जैसा लगे। आप परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य बने रहिए और परमेश्वर आपको जीवन जीने तथा जीवन में आगे बढ़ते रहने का बल और बुद्धि देता रहेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के व्यवहार और कार्यों को अपने जीवनों में दिखाने से हम अपने साथ उसकी उपस्थिति होने की गवाही देते हैं।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: मत्ती16:21-28
Matthew 16:21 उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, कि मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊं, और पुरनियों और महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊं; और मार डाला जाऊं; और तीसरे दिन जी उठूं। 
Matthew 16:22 इस पर पतरस उसे अलग ले जा कर झिड़कने लगा कि हे प्रभु, परमेश्वर न करे; तुझ पर ऐसा कभी न होगा। 
Matthew 16:23 उसने फिरकर पतरस से कहा, हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो: तू मेरे लिये ठोकर का कारण है; क्योंकि तू परमेश्वर की बातें नहीं, पर मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है। 
Matthew 16:24 तब यीशु ने अपने चेलों से कहा; यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। 
Matthew 16:25 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। 
Matthew 16:26 यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? 
Matthew 16:27 मनुष्य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा। 
Matthew 16:28 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं; कि जब तक मनुष्य के पुत्र को उसके राज्य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्यु का स्‍वाद कभी न चखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7



मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

उत्सव


   हमें ऐसा लगा जैसे कि हमारा क्रिसमस रद्द कर दिया गया है। कई वर्षों से हमारी पारिवारिक परंपरा रही है कि हम क्रिसमस पर अपने परिवार जनों से मिलने जाते हैं और उन्हीं के साथ वहाँ मिसूरी में क्रिसमस मनाते हैं; लेकिन अब की बार बर्फ के कारण हमें बीच रास्ते में मिनिसोटा से ही वापस अपने घर मिशिगन लौटना पड़ा, जिससे हम बहुत निराश थे।

   किंतु यदि हम मिसूरी चले जाते तो इतवार को हमारे पादरी द्वारा क्रिसमस की आशाओं पर दिया गया प्रवचन नहीं सुन पाते। उनके प्रवचन की एक बात ने विशेष रीति से मेरा ध्यान आकर्षित किया जब उन्होंने कहा, "यदि क्रिसमस से हमारी अपेक्षाएँ केवल उपहारों और परिवार जनों के साथ समय बिताने की ही हैं, तो हमारी अपेक्षाएँ बहुत छोटी हैं। ये बातें आनन्द देती हैं और इनके लिए हमें धन्यवादी होना चाहिए, लेकिन क्रिसमस प्रभु यीशु के जन्म का ही नहीं वरन उनमें होकर मिलने वाले छुटकारे का भी उत्सव है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जन्म का उत्सव मनाने वाले लोगों में हम दो लोगों, शमौन और हन्नाह को पाते हैं जिन्होंने प्रभु यीशु के जन्म के साथ उसके द्वारा मिलने वाले उद्धार का भी आनन्द मनाया, जब यूसुफ और मरियम प्रभु यीशु को मन्दिर में लेकर आए (लूका 2:25-38)। शमौन से परमेश्वर के आत्मा ने वायदा किया था कि वह मसीहा को देखे बिना नहीं मरेगा, इसलिए उसने प्रभु यीशु को देखकर कहा, "हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है" (लूका 2:29-30)। जब हन्नाह ने, जो एक विधवा थी और मन्दिर में रहकर परमेश्वर की सेवा किया करती थी, प्रभु यीशु को देखा तो वह "...प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी" (लूका 2:38)।

   संभव है कि किसी बात या परिस्थिति के कारण हमें इस त्यौहार के समय में निराशाओं और दुखों का सामना करना पड़े, लेकिन प्रभु यीशु और उसमें सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार हमें सदा ही उत्सव मनाने का कारण देते हैं। - ऐनी सेटास


यीशु सदा ही उत्सव मनाते रहने का कारण है।

और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। - लूका 2:33

बाइबल पाठ: लूका 2:36-38
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 6