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शनिवार, 2 मार्च 2019

समान



      लोकप्रिय कार्टून कॉमिक श्रंखला ‘पीनट्स’ के रचियता, चार्ल्स शुल्ज़ (1922-2000) के मृत्योपरांत, उनकी यादगार सभा में उनके मित्र और साथी कार्टूनिस्ट कैथी गुज़्वाईट ने उनकी मनुष्यता और सहानुभूति के बारे में कहा, “उन्होंने सँसार के सभी लोगों के लिए वे चरित्र दिए जो वैसा दिखाते थे जैसा हम अनुभव करते हैं, जो हमें अकेला अनुभव नहीं होने देते थे। और फिर उन्होंने अपने आप को भी हमें दिया और हमें अनुभव करवाया कि हम अकेले नहीं हैं...उन्होंने हमें प्रोत्साहित किया, हमारे साथ सहानुभूति प्रकट की और यह अनुभूति दी कि वे भी हमारे ही समान हैं।”

      हमें जब भी लगे कि कोई हमें समझता या पहचानता नहीं है, या हम असहाय हैं, तो हमें स्मरण करना चाहिए कि प्रभु यीशु ने अपने आप को हमारे लिए दे दिया, और वह जानता है कि हम कौन हैं, और आज किन बातों तथा परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों 2:9-18 में इस अद्भुत सत्य का वर्णन दिया गया है कि प्रभु यीशु इस सँसार के अपने जीवन काल में हमारी मनुष्यता के पूर्णतः भागीदार हुए (पद 14)। उन्होंने “सब के लिए मृत्यु का स्वाद चखा” (पद 9), शैतान को निकम्मा किया (पद 14), और “जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे,उन्हें छुड़ा लिया” (पद 15)। प्रभु यीशु हमारे समान बन गए “इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्‍चित्त करे” (पद 17)।

      हे प्रभु आपका धन्यवाद हो कि आप हमारी मनुष्यता में भागीदार हुए जिससे हम आज आपकी सहायता का अनुभव कर सकें और अनन्तकाल तक आपकी उपस्थिति में रह सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु के समान हमें और कोई नहीं समझता है।

इसी लिये जो उसके द्वारा परमेश्वर के पास आते हैं, वह उन का पूरा पूरा उद्धार कर सकता है, क्योंकि वह उन के लिये बिनती करने को सर्वदा जीवित है। सो ऐसा ही महायाजक हमारे योग्य था, जो पवित्र, और निष्‍कपट और निर्मल, और पापियों से अलग, और स्वर्ग से भी ऊंचा किया हुआ हो। - इब्रानियों 7:25-26

बाइबल पाठ: इब्रानियों 2:9-18
Hebrews 2:9 पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्‍वाद चखे।
Hebrews 2:10 क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।
Hebrews 2:11 क्योंकि पवित्र करने वाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता।
Hebrews 2:12 पर कहता है, कि मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊंगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा।
Hebrews 2:13 और फिर यह, कि मैं उस पर भरोसा रखूंगा; और फिर यह कि देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्वर ने मुझे दिए।
Hebrews 2:14 इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे।
Hebrews 2:15 और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले।
Hebrews 2:16 क्योंकि वह तो स्‍वर्गदूतों को नहीं वरन इब्राहीम के वंश को संभालता है।
Hebrews 2:17 इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्‍चित्त करे।
Hebrews 2:18 क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 26-27
  • मरकुस 8:1-21



शुक्रवार, 1 मार्च 2019

क्रूस



      युवा आइज़क वॉट्स को नहीं लगता था कि उनके चर्च का स्तुति संगीत जैसा होना चाहिए उतना अच्छा है। उसके पिता ने उसे चुनौती दी कि वह स्वयं कुछ बेहतर बना कर दे, और उसने यह कर दिखाया। आइज़क वॉट्स द्वारा लिखा गया स्तुति गीत “When I Survey the Wondrous Cross” (जिस क्रूस पर यीशु मुआ था) अंग्रेज़ी भाषा के श्रेष्ठतम स्तुति गीतों में से एक माना गया है और इसका अनुवाद सँसार भर की अनेकों भाषाओं में हुआ है; यह आज भी सँसार भर में पसन्द किया और गाया जाता है। वॉट्स द्वारा लिखित इस गीत के तीसरे अंतरे में हम क्रूसित मसीह यीशु के समक्ष आकर खड़े हो जाते हैं:
देख उसके सर, हाथ-पाँव के घाव,
यह कैसा दुःख, यह कैसा प्यार!
अनूठा है यह प्रेम स्वभाव,
अनूप यह जग का तारणहार।

      वॉट्स द्वारा जिस क्रूस पर चढ़ाए जाने को वर्णित किया गया है, वह मानव इतिहास का सबसे बुरा पल था। प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़े हुए देखने वालों के साथ खड़े होकर उस दृश्य पर ध्यान करना हमारे लिए लाभप्रद होगा। परमेश्वर का पुत्र, कोड़ों से लहु-लुहान कर दी गई देह में, उस काठ के क्रूस पर उसके हाथों और पैरों में होकर काठ में ठोक दी गई कीलों से लटका हुआ है, उसके लिए हर साँस खींचना अवर्णनीय पीड़ा से भरा अनुभव है। घंटों तक असहनीय पीड़ा में तड़पने के बाद एक अलौकिक अन्धकार उस स्थान पर छा जाता है, और अन्ततः परमेश्वर के वचन बाइबल में उसके विषय भविष्यवाणी की गई सभी बातों को पूरा कर के, सृष्टि का रचियता प्रभु परमेश्वर अपने आत्मा को देह से पृथक होकर जाने देता है। एक भूकंप उस स्थान को हिला देता है, शहर में स्थित मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट कर दो भाग हो जाता है, कब्रों में से मुर्दे उठकर शहर में चलते हुए दिखाई देते हैं (मत्ती 27:51-53), और यह सब देख कर प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़वाने वाला सूबेदार कहता है “सचमुच यह परमेश्वर का पुत्र था!” (पद 54)।

      वॉट्स के इस स्तुति गीत पर टिप्पणी करते हुए ‘द पोएट्री फाऊनडेशन’ ने लिखा, “[प्रभु यीशु मसीह का] क्रूस सभी मूल्यों और मान्यताओं को पुनःव्यवस्थित कर देता है, और सभी व्यर्थ बातों को रद्द कर देता है।” वॉट्स के इस गीत की अंतिम पंक्ति बिलकुल उपयुक्त है, “हे यीशु प्रिय आपको मैं, समर्पित करता हूँ देह प्राण!” – टिम गुस्ताफ्सन


जिसने अपना सर्वस्व हमारे लिए क्रूस पर न्यौछावर कर दिया, 
उसे अपना सब कुछ समर्पित कर देना हमारा सैभाग्य है।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों  12:1

बाइबल पाठ: मत्ती 27:45-54
Matthew 27:45 दोपहर से ले कर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्‍धेरा छाया रहा।
Matthew 27:46 तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?
Matthew 27:47 जो वहां खड़े थे, उन में से कितनों ने यह सुनकर कहा, वह तो एलिय्याह को पुकारता है।
Matthew 27:48 उन में से एक तुरन्त दौड़ा, और स्‍पंज ले कर सिरके में डुबोया, और सरकण्‍डे पर रखकर उसे चुसाया।
Matthew 27:49 औरों ने कहा, रह जाओ, देखें, एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं।
Matthew 27:50 तब यीशु ने फिर बड़े शब्द से चिल्लाकर प्राण छोड़ दिए।
Matthew 27:51 और देखो मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया: और धरती डोल गई और चटानें तड़क गईं।
Matthew 27:52 और कब्रें खुल गईं; और सोए हुए पवित्र लोगों की बहुत लोथें जी उठीं।
Matthew 27:53 और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए, और बहुतों को दिखाई दिए।
Matthew 27:54 तब सूबेदार और जो उसके साथ यीशु का पहरा दे रहे थे, भुईंडोल और जो कुछ हुआ था, देखकर अत्यन्‍त डर गए, और कहा, सचमुच यह परमेश्वर का पुत्र था


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 23-25
  • मरकुस 7:14-37



गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

सरल और सहज



      वाशिंगटन पोस्ट नामक समाचार पत्र में छपे एक लेख में कुछ तकनीकी विद्वानों द्वारा मानव जीवन को अमर करने के प्रयासों के विषय बताया गया; इस परियोजना पर काम करने वाले इसके लिए अरबों खर्च करने को तैयार हैं।

      परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि यह प्रभु यीशु मसीह द्वारा दो हज़ार वर्ष पहले ही संभव कर दिया गया है। प्रभु यीशु ने कहा, “यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?” (यूहन्ना 11:25-26)। प्रभु यीशु मसीह ने यह प्रतिज्ञा दी कि जो कोई उनपर विश्वास करेगा उसका कभी, किसी भी पारिस्थित में अन्त नहीं होगा। इसे थोड़ा स्पष्ट कर दें – हमारे शरीर मर सकते हैं, और मर भी जाएंगे; परन्तु हमारा वह भाग जो हमारे विचार, विवेक, बुद्धि, स्मरण और स्मृतियों, प्रेम आदि से संबंधित है, जो हमारा वास्तविक भीतरी मनुष्यत्व है, जिसे हम “मैं” कहते हैं वह कभी नहीं मरेगा – वह सदा प्रभु के साथ स्वर्ग में रहेगा।

      और सबसे अच्छी बात यह है कि ऐसे अनन्त जीवन को प्राप्त करने के लिए केवल उसे परमेश्वर के उपहार के रूप में स्वीकार भर करना है, इसके लिए अपना कोई कार्य या प्रयास नहीं करना है, अपने आप को इसके योग्य जताने या बनाने के लिए कुछ भी नहीं करना है, केवल प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग कर, अपना जीवन उसे समर्पित कर देना है, और प्रत्युत्तर में उससे यह अविनाशी, आशीषित जीवन उपहार स्वरूप स्वीकार कर लेना है।

      कुछ लोग कहते हैं कि इतनी बड़ी बात इतनी सरल और सहज कैसे हो सकती है? मेरा उत्तर है, जैसा बाइबल में लिखा है, यदि परमेश्वर ने हमसे हमारे जन्म लेने से भी पहले प्रेम किया और यह चाहा कि हम उसके साथ सदा काल के लिए स्वर्ग में रहें, तो वह ऐसा होना कठिन क्यों बनाएगा; इसे सरल और सहज क्यों नहीं रखेगा?


मसीह यीशु ने मृत्यु के अँधेरे द्वार को अनन्त जीवन के ज्योतिर्मय द्वार से बदल दिया है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:17-27
John 11:17 सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
John 11:18 बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
John 11:19 और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
John 11:20 सो मारथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही।
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13



बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

ज्योति



      यूनानी दार्शनिक प्लेटो (c.427 – c.348 ईसा पूर्व) ने मानव हृदय के अँधेरे भाग पर ज्योति चमकाने का एक अनूठा मार्ग लिया। उसने एक कहानी बनाई, कि एक भूकंप के कारण किसी पहाड़ के निकट की एक कब्र खुल गई और उसमें छिपी एक सुनहरी अंगूठी एक चरवाहे को दिखाई दी। उस चरवाहे को यह भी पता चला कि उस अंगूठी में एक करिशमाई ताकत भी है – उसे पहनने वाला अपनी इच्छानुसार अदृश्य भी हो सकता है। अदृश्यता की बात करते हुए प्लेटो ने एक प्रश्न उठाया, “यदि लोगों को पकड़े जाने और दण्ड भुगतने का भय न हो, तो क्या वे बुरा अथवा गलत करने से अपने आप को रोकेंगे?”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने ऐसे ही एक विचार को भिन्न दिशा दी। वहाँ, प्रभु यीशु मसीह ने, जिसे अच्छा चरवाहा भी कहा गया है, ऐसे हृदयों की बात की जो अपने किए को छुपाए रखने के लिए अन्धकार में छिपे रहते हैं (यूहन्ना 3:19-20)। वह बात को छिपाए रखने की हमारी इच्छा की ओर हमारा ध्यान में हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं खींच रहे हैं, परन्तु हमें उनमें होकर मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के विषय बताने के लिए ऐसा कर रहे हैं (पद 17)। हमारे हृदय का चरवाहा होने के कारण, वह हमारे मानवीय हृदय और स्वभाव की सबसे बुरी स्थिति को उजागर करते हैं, यह प्रमाणित करने के लिए कि फिर भी परमेश्वर पिता हम से कितना प्रेम करते हैं (पद 16)।

      परमेश्वर अपने अनुग्रह में हमें पाप के अन्धकार से निकलकर उसकी ज्योति में चलने का निमंत्रण देता है, जिससे हम उसके साथ अनन्तकाल तक आशीषित जीवन व्यतीत कर सकें। - मार्ट डीहान


प्रभु यीशु की ज्योति आने पर पाप का अन्धकार मिट जाता है।

और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। - 2 कुरिन्थियों 4:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3: 16-21
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

संपूर्ण पहुँच



      कुछ वर्ष पहले, मेरे एक मित्र ने मुझे निमंत्रण दिया कि मैं उसके साथ एक व्यवासायिक गोल्फ स्पर्धा में दर्शक बनकर चलूं। ऐसी स्पर्धा में जाने का यह मेरा प्रथम अवसर था, और मुझे कुछ पता नहीं था कि क्या होगा। वहाँ पहुँचने पर मुझे आश्चर्य हुआ जब हमें उपहार, उस स्थान की जानकारी और गोल्फ के मैदान के नक़्शे दिए गए। लेकिन सबसे बढ़कर बात थी कि हमें खेल के सबसे विशेष स्थान में अति विशिष्ट लोगों के लिए लगे तम्बू में प्रवेश मिला जहाँ न केवल बैठने की व्यवस्था थी, वरन मुफ्त भोजन भी था। मैं उस तम्बू में कभी अपने आप से प्रवेश प्राप्त नहीं कर सकता था। यह कर पाना मेरे उस मित्र के कारण संभव हुआ, जिसने मुझे वहाँ की सभी बातों के लिए संपूर्ण पहुँच प्रदान करवाई।

      यदि हम केवल अपने ही भरोसे और प्रयासों पर होते तो हम परमेश्वर से सदा ही दूर रहते। परन्तु प्रभु यीशु ने हमारे पाप के दण्ड को अपने ऊपर ले लिया, और उसमें होकर हमें परमेश्वर तक पहुँच और उसका अनन्त जीवन मिलता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने लिखा, “ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्‍वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए” (इफिसियों 3:10)। इस ज्ञान से अब यहूदियों और अन्यजातियों का मसीह में परस्पर मेल करवा दिया और प्रभु में होकर परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग बनाकर दे दिया; “जिस में हम को उस पर विश्वास रखने से हियाव और भरोसे से निकट आने का अधिकार है” (पद 12)।

      हम जब प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं, हमें सबसे महान पहुँच मिलती है – परमेश्वर तक संपूर्ण पहुँच, जो हमसे प्रेम करता है और हमारे साथ संबंध में रहना चाहता है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के क्रूस के कारण हम परमेश्वर के मित्र बन सकते हैं।

पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। - इफिसियों 2:13-14

बाइबल पाठ: इफिसियों 3: 6-13
Ephesians 3:6 अर्थात यह, कि मसीह यीशु में सुसमाचार के द्वारा अन्यजातीय लोग मीरास में साझी, और एक ही देह के और प्रतिज्ञा के भागी हैं।
Ephesians 3:7 और मैं परमेश्वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार, जो उसकी सामर्थ के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना।
Ephesians 3:8 मुझ पर जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से भी छोटा हूं, यह अनुग्रह हुआ, कि मैं अन्यजातियों को मसीह के अगम्य धन का सुसमाचार सुनाऊं।
Ephesians 3:9 और सब पर यह बात प्रकाशित करूं, कि उस भेद का प्रबन्‍ध क्या है, जो सब के सृजनहार परमेश्वर में आदि से गुप्‍त था।
Ephesians 3:10 ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्‍वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए।
Ephesians 3:11 उस सनातन मनसा के अनुसार, जो उसने हमारे प्रभु मसीह यीशु में की थी।
Ephesians 3:12 जिस में हम को उस पर विश्वास रखने से हियाव और भरोसे से निकट आने का अधिकार है।
Ephesians 3:13 इसलिये मैं बिनती करता हूं कि जो क्‍लेश तुम्हारे लिये मुझे हो रहे हैं, उनके कारण हियाव न छोड़ो, क्योंकि उन में तुम्हारी महिमा है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

संपूर्ण


      परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, कालिब संपूर्ण मन से परमेश्वर का काम करने वाला व्यक्ति था। मिस्र के दासत्व से इस्राएल के निकलने के पश्चात जब प्रतिज्ञा किए हुए देश के विषय जानकारी लेने के लिए बारह लोगों के दल को कनान देश में टोह लेने के लिए भेजा गया तो उनमें यहोशू और कालिब भी थे। उस दल ने आकर मूसा और इस्राएल की मण्डली को देश के विषय बताया, और लोगों को घबरा दिया। किन्तु कालिब ने कहा “पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है” (गिनती 13:30), और यहोशू ने भी उसका साथ दिया। किन्तु शेष दस सदस्यों ने कहा कि उनके सफल होने की संभावन बहुत कम है, और केवल बाधाओं को ही देखा (पद 31-33)।

      उन दस लोगों के द्वारा औरों को हताश करने के कारण इस्राएली परमेश्वर के विरुद्ध बड़बड़ाने  लगे, जिसके परिणामस्वरूप इस्राएलियों को चालीस वर्ष की जंगल की यात्रा झेलनी पड़ी। किन्तु कालेब ने कभी हार नहीं मानी, और उसके विषय परमेश्वर की गवाही थी, “मेरे दास कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने पूरी रीति से मेरा अनुकरण किया है, मैं उसको उस देश में जिस में वह हो आया है पहुंचाऊंगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा” (गिनती 14:24)। इस घटना के पैंतालीस वर्ष पश्चात, परमेश्वर ने कालिब को, 85 वर्ष की आयु में, हेब्रोन नगर दिया क्योंकि “...वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था” (यहोशू 14:14)।

      इसके सदियों बाद एक व्यवस्थापक ने प्रभु यीशु मसीह से पूछा, “हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” और प्रभु यीशु मसीह का उत्तर था, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है” (मत्ती 22:35-38)।

      हम आज भी कालिब के जीवन से प्रोत्साहन प्राप्त करते हैं, परमेश्वर के प्रति उसके भरोसे के द्वारा; उस परमेश्वर के प्रति जो हमारे संपूर्ण प्रेम, भरोसे और समर्पण के योग्य है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह यीशु के प्रति समर्पण प्रति दिन की बुलाहट है।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23

बाइबल पाठ: गिनती 13:26-32; 14:20-24
Numbers 13:26 और पारान जंगल के कादेश नाम स्थान में मूसा और हारून और इस्त्राएलियों की सारी मण्डली के पास पहुंचे; और उन को और सारी मण्डली को संदेशा दिया, और उस देश के फल उन को दिखाए।
Numbers 13:27 उन्होंने मूसा से यह कहकर वर्णन किया, कि जिस देश में तू ने हम को भेजा था उस में हम गए; उस में सचमुच दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और उसकी उपज में से यही है।
Numbers 13:28 परन्तु उस देश के निवासी बलवान हैं, और उसके नगर गढ़ वाले हैं और बहुत बड़े हैं; और फिर हम ने वहां अनाकवंशियों को भी देखा।
Numbers 13:29 दक्षिण देश में तो अमालेकी बसे हुए हैं; और पहाड़ी देश में हित्ती, यबूसी, और एमोरी रहते हैं; और समुद्र के किनारे किनारे और यरदन नदी के तट पर कनानी बसे हुए हैं।
Numbers 13:30 पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है।
Numbers 13:31 पर जो पुरूष उसके संग गए थे उन्होंने कहा, उन लोगों पर चढ़ने की शक्ति हम में नहीं है; क्योंकि वे हम से बलवान हैं।
Numbers 13:32 और उन्होंने इस्त्राएलियों के साम्हने उस देश की जिसका भेद उन्होंने लिया था यह कहकर निन्दा भी की, कि वह देश जिसका भेद लेने को हम गये थे ऐसा है, जो अपने निवासियों निगल जाता है; और जितने पुरूष हम ने उस में देखे वे सब के सब बड़े डील डौल के हैं।
Numbers 14:20 यहोवा ने कहा, तेरी बिनती के अनुसार मैं क्षमा करता हूं;
Numbers 14:21 परन्तु मेरे जीवन की शपथ सचमुच सारी पृथ्वी यहोवा की महिमा से परिपूर्ण हो जाएगी;
Numbers 14:22 उन सब लोगों ने जिन्होंने मेरी महिमा मिस्र देश में और जंगल में देखी, और मेरे किए हुए आश्चर्यकर्मों को देखने पर भी दस बार मेरी परीक्षा की, और मेरी बातें नहीं मानी,
Numbers 14:23 इसलिये जिस देश के विषय मैं ने उनके पूर्वजों से शपथ खाई, उसको वे कभी देखने न पाएंगे; अर्थात जितनों ने मेरा अपमान किया है उन में से कोई भी उसे देखने न पाएगा।
Numbers 14:24 परन्तु इस कारण से कि मेरे दास कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने पूरी रीति से मेरा अनुकरण किया है, मैं उसको उस देश में जिस में वह हो आया है पहुंचाऊंगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


रविवार, 24 फ़रवरी 2019

भरोसा



      सन 2002 में अपनी सत्रह वर्षीय पुत्री मेलिस्सा को एक कार-दुर्घटना में खो देने के इतने वर्ष बाद भी, मैं कभी-कभी अपने आप को “क्या होता यदि...” के विचारों में खोया हुआ पाता हूँ। इस दुःख में यह सोचना सरल होता है कि जून महीने के उस दुखद दिन की घटनाओं में यदि कुछ बातों को पुनःव्यवस्थित कर दिया जाता तो मेलिस्सा आज भी हमारे साथ होती।

      किन्तु वास्तविकता में, “क्या होता यदि...” में हमारे लिए रहना अच्छा नहीं है। वह स्थान पछतावे, अनुमान लगाने, और निराशा का स्थान है। यद्यपि दुःख वास्तविक है और उसका शोक बना रहता है, परन्तु यदि हम उस स्थिति में बने रहें जो वास्तविकता की स्थिति है, तो इससे जीवन हमारे लिए बेहतर होगा और यह परमेश्वर को भी आदर देगा।

      वास्तविकता की स्थिति में रहने से हम आशा, प्रोत्साहन, और शान्ति प्राप्त करते हैं। हमारे पास एक निश्चित आशा है (1 थिस्सलुनीकियों 4:13) – इस आश्वासन से – क्योंकि मेलिस्सा प्रभु यीशु मसीह से प्रेम करती थी इसलिए अब वह एक ऐसे स्थान पर है जो “बहुत ही अच्छा है” (फिलिप्पियों 1:23)। हमारे साथ समस्त शान्ति के परमेश्वर की उपस्थिति है “हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है” (2 कुरिन्थियों 1:3); जो “..हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (भजन 46:1); और अन्य मसीही विश्वासियों से मिलने वाला प्रोत्साहन है।

      हम सभी, जीवन की त्रासदियों से बच कर रहना चाहते हैं। परन्तु जब हम कठिन परिस्थितियों का सामना करें तो हमारी सबसे उत्तम सहायता परमेश्वर पर भरोसा रखने के द्वारा होती है। - डेव ब्रैनन


हमारी सबसे महान आशा परमेश्वर पर भरोसा रखने से है।

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों के समान शोक करो जिन्हें आशा नहीं। - 1 थिस्सलुनीकियों 4:13

बाइबल पाठ: भजन 46:1-7
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20