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Monday, February 29, 2016

उड़ान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा धीरज से प्रभु की प्रतीक्षा करने को कही गई बात (यशायाह 40:31) हमें भविष्य के लिए भरोसेमन्द आशा प्रदान करती है। आज हम अपनी परीक्षाओं के स्थान में अपने उस छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिसका आना अवश्यंभावी है, क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आशावासन दिया है, "धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे" (मत्ती 5:4)।

   क्योंकि हम यह जानते हैं कि हमारा भविष्य स्वर्ग जाने की निश्चित आशा है, महिमामय है, हम यहाँ इस पृथ्वी पर अपने कार्यों और ज़िम्मेदारियों के लिए अपने कदम और दृढ़ता से बढ़ा सकते हैं; चाहे हम थके ही क्यों ना हों, हम अपने पंख पसार कर ऊँचाईयों को छू सकते हैं। हम प्रभु की आज्ञाकारिता के मार्ग पर चलने के लिए थकित नहीं हों; अपनी दिनचर्या निभाते हुए श्रमित नहीं हों। हमारी आशा है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक बेहतर संसार आने वाला है जब हमारी आत्माएं हमें कार्य के लिए बुलाएंगी और प्रत्युत्तर में हमारे शरीर उनमुक्त होकर दौड़ेंगे, कूदेंगे और उड़ान भरेंगे।

   इस बीच, जब तक यह होने का समय आए, वर्तमान में भी हम अपने लिए इसे सत्य बना सकते हैं; कैसे? अपनी थकान में भी दृढ़, धीरजवन्त और आनन्दित रहने के द्वारा; अपनी कमज़ोरियों और निराशाओं पर ध्यान लगाने की बजाए शान्त और नम्र होकर अपनी नहीं वरन दूसरों के हित की चिंता करने के द्वारा; जो लोग कठिनाईयों में संघर्ष कर रहे हैं उनसे प्रेम के कुछ शब्द कहने के द्वारा। उस दिन के लिए जिस दिन हमारी आत्माएं उड़ान भरेंगी हम आज और अभी से तैयार हो सकते हैं। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों से थकने लगें तो प्रभु यीशु में विश्राम लें।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।



Sunday, February 28, 2016

स्त्रोत


   अमेरिका के मिशिगन प्रांत के ऊपरी प्रायद्वीप में एक अद्भुत प्राकृतिक अजूबा है - एक कुण्ड जो लगभग 40 फीट गहरा और 300 फीट चौड़ा है। उस इलाके के मूल निवासी उसे "किच-इटी- किपि" अर्थात "बड़ा ठण्डा पानी" कहते थे। आज यह कुण्ड "बड़ा झरना" कहलाता है। इस कुण्ड का स्त्रोत धरती के अन्दर से चट्टानों में होकर आने वाला पानी है जो 10,000 गैलन प्रति मिनिट की गति से इसमें आता रहता है। इसकी एक और विलक्षण बात है इसका निरन्तर एक समान रहने वाला तापमान - हर ऋतु में इस झरने के जल का तापमान 45 डिग्री फैरन्हाईट ही बना रहता है; इसलिए उस इलाके की भीषण ठण्ड में भी इसका पानी जमता नहीं और सैलानी सारे वर्ष इसका आनन्द ले सकते हैं।

   जब प्रभु यीशु का, सामरिया के एक गाँव में स्थित याकूब के कुएं पर, एक स्त्री से वार्तालाप हुआ तो प्रभु ने उस स्त्री को एक सदा सन्तुष्ट करने वाले जल-स्त्रोत के बारे में बताया। लेकिन यह जल-स्त्रोत कोई झरना, कुण्ड, नदी या तालाब नहीं था, और ना ही कोई सामान्य दिखने वाला जल था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री से जीवन के जल की बात करी जो अनन्त जीवन के लिए था: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   किसी भी प्राकृतिक जल के स्त्रोत से मिलने वाली तृप्ति बढ़कर वह तृप्ति है जो प्रभु यीशु मसीह से हमें मिलती है। केवल प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन के जल से ही हमारी अनन्त जीवन की प्यास बुझ सकती है, और ना केवल वह जीवन जल हमारी प्यास बुझाता है वरन हम में होकर औरों तक भी पहुँचता है उनकी भी प्यास बुझाता है। संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ही जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत है। - बिल क्राउडर


जीवन की प्यास बुझाने का एकमात्र सच्चा स्त्रोत है प्रभु यीशु मसीह।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:5-14
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13


Saturday, February 27, 2016

सृष्टि


   मुझे प्रकृति को निहारना और प्रकृति के सृष्टिकर्ता की आराधना करना अच्छा लगता है, लेकिन कभी-कभी मैं अपने आप को प्रकृति में अत्याधिक रुचि दिखाने की दोषी महसूस करती हूँ। मुझे लगता है कि प्रकृति में मेरी रुचि और उसे निहारना कहीं अनुचित तो नहीं है? फिर मुझे स्मरण हो आता है कि हमारे प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों ने प्रकृति का उपयोग शिक्षा देने के लिए किया है। उदाहरणस्वरूप, लोगों को अपनी आवश्यकताओं के लिए चिंतित होने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखाने के लिए प्रभु यीशु ने साधारण से जंगली सोसन के फूलों का उपयोग किया। प्रभु ने अपने चेलों से कहा, "जंगली सोसनों पर ध्यान करो" और उन्हें स्मरण करवाया कि ये फूल कोई भी परिश्रम नहीं करते, फिर भी उनकी सुन्दरता देखते ही बनती है। प्रभु ने निष्कर्ष दिया कि यदि परमेश्वर थोड़े ही समय रहने वाले उन जंगली फूलों का इतना ध्यान रखता है, उन्हें वैभव देता है, तो अवश्य ही वह हमारे लिए इससे कहीं बढ़कर क्यों ना करेगा? (मत्ती 6:28-34)

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अन्य भाग भी हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर अपनी सृष्टि में होकर भी अपने आप को हम मनुष्यों पर प्रकट करता है:
  •    दाऊद ने लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है" (भजन 19:1-2)।
  •    आसाप ने कहा, "और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है" (भजन 50:6)।
  •    पौलुस ने बताया, "क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों 1:20)।


   परमेश्वर हम से इतना प्रेम करता है, और इतना चाहता है कि हम उसे जानें, कि जहाँ-जहाँ हमारी दृष्टि जा सकती है, वहाँ-वहाँ सृष्टि में उसने अपने बारे में प्रमाण रख दिए हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर की सृष्टि और प्रकृति उसके बारे में अनेक पाठ हमें पढ़ाती है।

हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परì