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Monday, February 29, 2016

उड़ान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा धीरज से प्रभु की प्रतीक्षा करने को कही गई बात (यशायाह 40:31) हमें भविष्य के लिए भरोसेमन्द आशा प्रदान करती है। आज हम अपनी परीक्षाओं के स्थान में अपने उस छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिसका आना अवश्यंभावी है, क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आशावासन दिया है, "धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे" (मत्ती 5:4)।

   क्योंकि हम यह जानते हैं कि हमारा भविष्य स्वर्ग जाने की निश्चित आशा है, महिमामय है, हम यहाँ इस पृथ्वी पर अपने कार्यों और ज़िम्मेदारियों के लिए अपने कदम और दृढ़ता से बढ़ा सकते हैं; चाहे हम थके ही क्यों ना हों, हम अपने पंख पसार कर ऊँचाईयों को छू सकते हैं। हम प्रभु की आज्ञाकारिता के मार्ग पर चलने के लिए थकित नहीं हों; अपनी दिनचर्या निभाते हुए श्रमित नहीं हों। हमारी आशा है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक बेहतर संसार आने वाला है जब हमारी आत्माएं हमें कार्य के लिए बुलाएंगी और प्रत्युत्तर में हमारे शरीर उनमुक्त होकर दौड़ेंगे, कूदेंगे और उड़ान भरेंगे।

   इस बीच, जब तक यह होने का समय आए, वर्तमान में भी हम अपने लिए इसे सत्य बना सकते हैं; कैसे? अपनी थकान में भी दृढ़, धीरजवन्त और आनन्दित रहने के द्वारा; अपनी कमज़ोरियों और निराशाओं पर ध्यान लगाने की बजाए शान्त और नम्र होकर अपनी नहीं वरन दूसरों के हित की चिंता करने के द्वारा; जो लोग कठिनाईयों में संघर्ष कर रहे हैं उनसे प्रेम के कुछ शब्द कहने के द्वारा। उस दिन के लिए जिस दिन हमारी आत्माएं उड़ान भरेंगी हम आज और अभी से तैयार हो सकते हैं। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों से थकने लगें तो प्रभु यीशु में विश्राम लें।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।



Sunday, February 28, 2016

स्त्रोत


   अमेरिका के मिशिगन प्रांत के ऊपरी प्रायद्वीप में एक अद्भुत प्राकृतिक अजूबा है - एक कुण्ड जो लगभग 40 फीट गहरा और 300 फीट चौड़ा है। उस इलाके के मूल निवासी उसे "किच-इटी- किपि" अर्थात "बड़ा ठण्डा पानी" कहते थे। आज यह कुण्ड "बड़ा झरना" कहलाता है। इस कुण्ड का स्त्रोत धरती के अन्दर से चट्टानों में होकर आने वाला पानी है जो 10,000 गैलन प्रति मिनिट की गति से इसमें आता रहता है। इसकी एक और विलक्षण बात है इसका निरन्तर एक समान रहने वाला तापमान - हर ऋतु में इस झरने के जल का तापमान 45 डिग्री फैरन्हाईट ही बना रहता है; इसलिए उस इलाके की भीषण ठण्ड में भी इसका पानी जमता नहीं और सैलानी सारे वर्ष इसका आनन्द ले सकते हैं।

   जब प्रभु यीशु का, सामरिया के एक गाँव में स्थित याकूब के कुएं पर, एक स्त्री से वार्तालाप हुआ तो प्रभु ने उस स्त्री को एक सदा सन्तुष्ट करने वाले जल-स्त्रोत के बारे में बताया। लेकिन यह जल-स्त्रोत कोई झरना, कुण्ड, नदी या तालाब नहीं था, और ना ही कोई सामान्य दिखने वाला जल था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री से जीवन के जल की बात करी जो अनन्त जीवन के लिए था: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   किसी भी प्राकृतिक जल के स्त्रोत से मिलने वाली तृप्ति बढ़कर वह तृप्ति है जो प्रभु यीशु मसीह से हमें मिलती है। केवल प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन के जल से ही हमारी अनन्त जीवन की प्यास बुझ सकती है, और ना केवल वह जीवन जल हमारी प्यास बुझाता है वरन हम में होकर औरों तक भी पहुँचता है उनकी भी प्यास बुझाता है। संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ही जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत है। - बिल क्राउडर


जीवन की प्यास बुझाने का एकमात्र सच्चा स्त्रोत है प्रभु यीशु मसीह।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:5-14
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13


Saturday, February 27, 2016

सृष्टि


   मुझे प्रकृति को निहारना और प्रकृति के सृष्टिकर्ता की आराधना करना अच्छा लगता है, लेकिन कभी-कभी मैं अपने आप को प्रकृति में अत्याधिक रुचि दिखाने की दोषी महसूस करती हूँ। मुझे लगता है कि प्रकृति में मेरी रुचि और उसे निहारना कहीं अनुचित तो नहीं है? फिर मुझे स्मरण हो आता है कि हमारे प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों ने प्रकृति का उपयोग शिक्षा देने के लिए किया है। उदाहरणस्वरूप, लोगों को अपनी आवश्यकताओं के लिए चिंतित होने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखाने के लिए प्रभु यीशु ने साधारण से जंगली सोसन के फूलों का उपयोग किया। प्रभु ने अपने चेलों से कहा, "जंगली सोसनों पर ध्यान करो" और उन्हें स्मरण करवाया कि ये फूल कोई भी परिश्रम नहीं करते, फिर भी उनकी सुन्दरता देखते ही बनती है। प्रभु ने निष्कर्ष दिया कि यदि परमेश्वर थोड़े ही समय रहने वाले उन जंगली फूलों का इतना ध्यान रखता है, उन्हें वैभव देता है, तो अवश्य ही वह हमारे लिए इससे कहीं बढ़कर क्यों ना करेगा? (मत्ती 6:28-34)

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अन्य भाग भी हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर अपनी सृष्टि में होकर भी अपने आप को हम मनुष्यों पर प्रकट करता है:
  •    दाऊद ने लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है" (भजन 19:1-2)।
  •    आसाप ने कहा, "और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है" (भजन 50:6)।
  •    पौलुस ने बताया, "क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों 1:20)।


   परमेश्वर हम से इतना प्रेम करता है, और इतना चाहता है कि हम उसे जानें, कि जहाँ-जहाँ हमारी दृष्टि जा सकती है, वहाँ-वहाँ सृष्टि में उसने अपने बारे में प्रमाण रख दिए हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर की सृष्टि और प्रकृति उसके बारे में अनेक पाठ हमें पढ़ाती है।

हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है। - भजन 104:24

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56


Friday, February 26, 2016

प्रेम


   नेतृत्व पर लिखी गई पुस्तकें अकसर सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों की सूची में होती हैं। ये पुस्तकें अधिकांशतः सामर्थी और प्रभावशाली अगुवा बनने के तरीके बताती हैं। किंतु हेनरी नौवेन द्वारा लिखी पुस्तक Name of Jesus: Reflections on Christian Leadership एक अलग ही दृष्टिकोण से लिखी गई है। इस पुस्तक के लेखक एक विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफैसर हैं और उन्होंने अनेक वर्षों तक मानसिक तौर पर अपूर्ण विकसित व्यसकों के समाज में सेवा करी है। अपनी पुस्तक में वे कहते हैं, "प्रश्न ये नहीं हैं कि - कितने लोग आपको गंभीरता से लेते हैं? इससे आपको कितनी उपलब्धि प्राप्त हो जाएगी? क्या आप कोई परिणाम दिखाने पाएंगे? वरन प्रश्न यह है कि क्या आप प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं?...अकेलेपन और निराशा से भरे हमारे संसार में, ऐसे लोगों की बहुत आवश्यकता है जो परमेश्वर के हृदय को जानते हैं; उस हृदय को जो क्षमा करता है, जो औरों की परवाह करता है, जो पहल करके तथा आगे बढ़कर लोगों को स्वास्थ्य देता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के अनुयायी प्रेरित यूहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा, "जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा" (1 यूहन्ना 4:9-10)।

   हेनरी नौवेन ने आगे लिखा कि "आने वाले समय के मसीही अगुवे वे ही होने पाएंगे जो परमेश्वर के हृदय को वास्तव में जानते होंगे; उस हृदय को जो प्रभु यीशु में सदेह होकर हमारे बीच में आया।" प्रभु यीशु में ही हम परमेश्वर के असीम, निस्वार्थ, बिना किसी शर्त पर आधारित प्रेम को जानने और अनुभव करने पाते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में होता है तब ही हमारे हृदय औरों के लिए खुलते हैं।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:14

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-10
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29


Thursday, February 25, 2016

विश्राम


   हमारा पालतु कुत्ता कभी-कभी इतना उत्साहित और उत्तेजित हो जाता है कि उस उत्तेजना से उसे मिर्गी का सा दौरा पड़ जाता है। ऐसा होने से बचाए रखने के लिए हमें उसे शान्त करते रहना पड़ता है। हम उसे सहलाते हैं, शान्तिदायक आवाज़ में उससे बातें करते हैं और उससे लेट जाने को कहते हैं। परन्तु जैसे ही वह हमसे "लेट जाओ" सुनता है, वह तुरंत नज़रें चुराना और दुःखी होने के हाव-भाव दिखाना आरंभ कर देता है; और अन्ततः बड़े नाटकीय ढंग से यह दिखाते हुए कि वह हमारे कहे को करने के लिए मजबूर है, फर्श पर लेट जाता है।

   कभी कभी हम मनुष्यों को भी शान्त होकर लेट जाने की आवश्यकता होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 23 में हम पाते हैं कि हमारा अच्छा चरवाहा, हमारा परमेश्वर हमें हरी-हरी चराईयों में बैठाता है और सुखदाई जल के झरनों के पास ले जाता है (भजन 23:2-3)। वह जानता है कि हमें जिस शान्ति और विश्राम की आवश्यकता है वह हमें उसकी उन चराईयों और झरनों में आने से ही मिल सकेगा, चाहे हम स्वयं अपनी इस आवश्यकता का आभास ना भी कर सकें।

   हमारे शरीर नियमित विश्राम लेने के लिए बनाए गए हैं। स्वयं परमेश्वर ने भी सृष्टि की रचना करके सातवें दिन विश्राम किया (उत्पत्ति 2:2-3; निर्गमन 20:9-11)। प्रभु यीशु भी जानते थे कि लोगों की भीड़ की सेवकाई का भी समय है और विश्राम करने का भी समय है; अपनी अपनी जगह दोनों ही की आवश्यकता है। प्रभु यीशु ने सेवकाई से लौटे अपने चेलों से कहा: "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था" (मरकुस 6:31)। जब हम विश्राम लेते हैं तो हमारे शरीर और मस्तिषक तरोताज़ा होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों पर पुनःकेन्द्रित भी हो सकते हैं। जब हम अपने सारे समय को किसी ना किसी कार्य से भरते रहते हैं, चाहे वह भला, उपयुक्त और आवश्यक कार्य ही क्यों ना हों, तो हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए परमेश्वर को हमें विश्राम में लेटा देना पड़ता है।

   हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा, जो हमारी आवश्यकताओं को भली-भांति जानता है, विश्राम हमें दी गई एक भली भेंट है। उसका धन्यवाद करें कि वह कभी-कभी हमें विश्राम के लिए अपनी संगति की हरी चराईयों में लेटा देता है। - सिंडी हैस कैस्पर


यदि हम कार्य से अलग होकर विश्राम नहीं करेंगे, तो हम कार्य करने लायक ही ना रहकर बिखर जाएंगे। - हैवनर

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। - भजन 23:2-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:8-11
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


Wednesday, February 24, 2016

रणनीति


   ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखे चीनी उपन्यास Romance of the Three Kingdoms में, लेखक ल्यू ग्वँज़ौंग ने "खाली किला" रणनीति, अर्थात शत्रु को छलावा देने के लिए विपरीत मनोविज्ञान के प्रयोग के बारे में बताया है। जब वेई साम्राज्य के 150,000 सैनिकों के साथ उनका सेनापति ज़िंग शहर पहुँचा, जहाँ 2,500 से भी कम सैनिक थे, तो उन्होंने नगर के द्वार को खुला हुआ और वहाँ के सुप्रसिद्ध युद्ध रणनीतिकार ज़ू लियांग को अपने दो बच्चों के साथ बैठे संगीत वाद्य बजाते हुए पाया। ज़ू लियांग के इस बेफिक्र अन्दाज़ को देखकर वेई साम्राज्य का सेनापति घबरा गया, और यह समझकर कि वे किसी भारी षड़यंत्र का शिकार होने वाले हैं, उसने अपने सैनिकों को तुरंत वापस लौट चलने का आदेश दे दिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी ऐसी ही एक रणनीति का उल्लेख है। न्यायियों 7 में परमेश्वर ने गिदोन के 300 आदमियों, घड़ों, तुरहीयों और मशालों का उपयोग टिड्डियों के समान बहुतेरे मिद्यानी सैनिकों और गिनती से परे उनके ऊँटों के विरुद्ध किया। क्या इस्त्राएल ऐसे भारी शत्रु को हरा सकता था, जबकि उनके पास ना तो सैनिक थे और ना ही युद्ध के लिए हथियार? चाहे इस्त्राएल के पास लड़ाई के लिए उपयुक्त समझा जाने वाला कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास वह एकमात्र था जिस के बाद फिर और किसी की कोई आवश्यकता नहीं थी - परमेश्वर की प्रतिज्ञा: "तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं" (न्यायियों 7:7)। और परिणाम - इस्त्राएल की विजय!

   क्या आपके जीवन में कोई कठिन चुनौती है जो आपको परेशान कर रही है? प्रभु परमेश्वर ने कहा है, "तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?" (यर्मियाह 32:26-27)। परमेश्वर पर रखे गए विश्वास से बेहतर कोई रणनीति नहीं है; अपने विश्वास को बनाए रखें और परमेश्वर को अपने समय तथा विधि से कार्य कर लेने दें; परिणाम अद्भुत होंगे। - पो फ़ैंग चिया


परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है।

किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। - भजन 20:7

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:1-8
Judges 7:1 तब गिदोन जो यरूब्बाल भी कहलाता है और सब लोग जो उसके संग थे सवेरे उठे, और हरोद नाम सोते के पास अपने डेरे खड़े किए; और मिद्यानियों की छावनी उनकी उत्तरी ओर मोरे नाम पहाड़ी के पास तराई में पड़ी थी।
Judges 7:2 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, जो लोग तेरे संग हैं वे इतने हैं कि मैं मिद्यानियों को उनके हाथ नहीं कर सकता, नहीं तो इस्राएल यह कहकर मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई मारने लगे, कि हम अपने ही भुजबल के द्वारा बचे हैं। 
Judges 7:3 इसलिये तू जा कर लोगों में यह प्रचार कर के सुना दे, कि जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए। तब बाईस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए। 
Judges 7:4 फिर यहोवा ने गिदोन से कहा, अब भी लोग अधिक हैं; उन्हें सोते के पास नीचे ले चल, वहां मैं उन्हें तेरे लिये परखूंगा; और जिस जिसके विषय में मैं तुझ से कहूं, कि यह तेरे संग चले, वह तो तेरे संग चले; और जिस जिसके विषय मे मैं कहूं, कि यह तेरे संग न जाए, वह न जाए। 
Judges 7:5 तब वह उन को सोते के पास नीचे ले गया; वहां यहोवा ने गिदोन से कहा, जितने कुत्ते की नाईं जीभ से पानी चपड़ चपड़ कर के पीएं उन को अलग रख; और वैसा ही उन्हें भी जो घुटने टेककर पीएं। 
Judges 7:6 जिन्होंने मुंह में हाथ लगा चपड़ चपड़ कर के पानी पिया उनकी तो गिनती तीन सौ ठहरी; और बाकी सब लोगों ने घुटने टेककर पानी पिया। 
Judges 7:7 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं। 
Judges 7:8 तब उन लोगों ने हाथ में सीधा और अपने अपने नरसिंगे लिये; और उसने इस्राएल के सब पुरूषों को अपने अपने डेरे की ओर भेज दिया, परन्तु उन तीन सौ पुरूषों को अपने पास रख छोड़ा; और मिद्यान की छावनी उसके नीचे तराई में पड़ी थी।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20


Tuesday, February 23, 2016

प्रेम


   हाल ही में मेरे एक मित्र ने मुझे एक मसीही गीत के लिखे जाने का वर्णन भेजा; हम उस गीत को अपने बचपन में अपने चर्च में अकसर सुनते थे:
यदि सारे समुद्र स्याही होते, और सारा आकाश एक चर्म पत्र;
यदि संसार की हर डाली कलम बन जाती और हर व्यक्ति लिखनेवाला;
तो भी परमेश्वर के प्रेम के बयान को लिखने में,
सारे समुद्र सूख जाते, और सारे आकाश के छोर से छोर तक लिखने पर भी
उस प्रेम का बयान पूरा नहीं लिखा जाता।

   ये शब्द एक प्राचीन यहूदी कविता का भाग हैं जो किसी समय