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Monday, February 29, 2016

उड़ान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा धीरज से प्रभु की प्रतीक्षा करने को कही गई बात (यशायाह 40:31) हमें भविष्य के लिए भरोसेमन्द आशा प्रदान करती है। आज हम अपनी परीक्षाओं के स्थान में अपने उस छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिसका आना अवश्यंभावी है, क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आशावासन दिया है, "धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे" (मत्ती 5:4)।

   क्योंकि हम यह जानते हैं कि हमारा भविष्य स्वर्ग जाने की निश्चित आशा है, महिमामय है, हम यहाँ इस पृथ्वी पर अपने कार्यों और ज़िम्मेदारियों के लिए अपने कदम और दृढ़ता से बढ़ा सकते हैं; चाहे हम थके ही क्यों ना हों, हम अपने पंख पसार कर ऊँचाईयों को छू सकते हैं। हम प्रभु की आज्ञाकारिता के मार्ग पर चलने के लिए थकित नहीं हों; अपनी दिनचर्या निभाते हुए श्रमित नहीं हों। हमारी आशा है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक बेहतर संसार आने वाला है जब हमारी आत्माएं हमें कार्य के लिए बुलाएंगी और प्रत्युत्तर में हमारे शरीर उनमुक्त होकर दौड़ेंगे, कूदेंगे और उड़ान भरेंगे।

   इस बीच, जब तक यह होने का समय आए, वर्तमान में भी हम अपने लिए इसे सत्य बना सकते हैं; कैसे? अपनी थकान में भी दृढ़, धीरजवन्त और आनन्दित रहने के द्वारा; अपनी कमज़ोरियों और निराशाओं पर ध्यान लगाने की बजाए शान्त और नम्र होकर अपनी नहीं वरन दूसरों के हित की चिंता करने के द्वारा; जो लोग कठिनाईयों में संघर्ष कर रहे हैं उनसे प्रेम के कुछ शब्द कहने के द्वारा। उस दिन के लिए जिस दिन हमारी आत्माएं उड़ान भरेंगी हम आज और अभी से तैयार हो सकते हैं। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों से थकने लगें तो प्रभु यीशु में विश्राम लें।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।



Sunday, February 28, 2016

स्त्रोत


   अमेरिका के मिशिगन प्रांत के ऊपरी प्रायद्वीप में एक अद्भुत प्राकृतिक अजूबा है - एक कुण्ड जो लगभग 40 फीट गहरा और 300 फीट चौड़ा है। उस इलाके के मूल निवासी उसे "किच-इटी- किपि" अर्थात "बड़ा ठण्डा पानी" कहते थे। आज यह कुण्ड "बड़ा झरना" कहलाता है। इस कुण्ड का स्त्रोत धरती के अन्दर से चट्टानों में होकर आने वाला पानी है जो 10,000 गैलन प्रति मिनिट की गति से इसमें आता रहता है। इसकी एक और विलक्षण बात है इसका निरन्तर एक समान रहने वाला तापमान - हर ऋतु में इस झरने के जल का तापमान 45 डिग्री फैरन्हाईट ही बना रहता है; इसलिए उस इलाके की भीषण ठण्ड में भी इसका पानी जमता नहीं और सैलानी सारे वर्ष इसका आनन्द ले सकते हैं।

   जब प्रभु यीशु का, सामरिया के एक गाँव में स्थित याकूब के कुएं पर, एक स्त्री से वार्तालाप हुआ तो प्रभु ने उस स्त्री को एक सदा सन्तुष्ट करने वाले जल-स्त्रोत के बारे में बताया। लेकिन यह जल-स्त्रोत कोई झरना, कुण्ड, नदी या तालाब नहीं था, और ना ही कोई सामान्य दिखने वाला जल था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री से जीवन के जल की बात करी जो अनन्त जीवन के लिए था: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   किसी भी प्राकृतिक जल के स्त्रोत से मिलने वाली तृप्ति बढ़कर वह तृप्ति है जो प्रभु यीशु मसीह से हमें मिलती है। केवल प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन के जल से ही हमारी अनन्त जीवन की प्यास बुझ सकती है, और ना केवल वह जीवन जल हमारी प्यास बुझाता है वरन हम में होकर औरों तक भी पहुँचता है उनकी भी प्यास बुझाता है। संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ही जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत है। - बिल क्राउडर


जीवन की प्यास बुझाने का एकमात्र सच्चा स्त्रोत है प्रभु यीशु मसीह।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:5-14
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13


Saturday, February 27, 2016

सृष्टि


   मुझे प्रकृति को निहारना और प्रकृति के सृष्टिकर्ता की आराधना करना अच्छा लगता है, लेकिन कभी-कभी मैं अपने आप को प्रकृति में अत्याधिक रुचि दिखाने की दोषी महसूस करती हूँ। मुझे लगता है कि प्रकृति में मेरी रुचि और उसे निहारना कहीं अनुचित तो नहीं है? फिर मुझे स्मरण हो आता है कि हमारे प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों ने प्रकृति का उपयोग शिक्षा देने के लिए किया है। उदाहरणस्वरूप, लोगों को अपनी आवश्यकताओं के लिए चिंतित होने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखाने के लिए प्रभु यीशु ने साधारण से जंगली सोसन के फूलों का उपयोग किया। प्रभु ने अपने चेलों से कहा, "जंगली सोसनों पर ध्यान करो" और उन्हें स्मरण करवाया कि ये फूल कोई भी परिश्रम नहीं करते, फिर भी उनकी सुन्दरता देखते ही बनती है। प्रभु ने निष्कर्ष दिया कि यदि परमेश्वर थोड़े ही समय रहने वाले उन जंगली फूलों का इतना ध्यान रखता है, उन्हें वैभव देता है, तो अवश्य ही वह हमारे लिए इससे कहीं बढ़कर क्यों ना करेगा? (मत्ती 6:28-34)

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अन्य भाग भी हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर अपनी सृष्टि में होकर भी अपने आप को हम मनुष्यों पर प्रकट करता है:
  •    दाऊद ने लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है" (भजन 19:1-2)।
  •    आसाप ने कहा, "और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है" (भजन 50:6)।
  •    पौलुस ने बताया, "क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों 1:20)।


   परमेश्वर हम से इतना प्रेम करता है, और इतना चाहता है कि हम उसे जानें, कि जहाँ-जहाँ हमारी दृष्टि जा सकती है, वहाँ-वहाँ सृष्टि में उसने अपने बारे में प्रमाण रख दिए हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर की सृष्टि और प्रकृति उसके बारे में अनेक पाठ हमें पढ़ाती है।

हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है। - भजन 104:24

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56


Friday, February 26, 2016

प्रेम


   नेतृत्व पर लिखी गई पुस्तकें अकसर सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों की सूची में होती हैं। ये पुस्तकें अधिकांशतः सामर्थी और प्रभावशाली अगुवा बनने के तरीके बताती हैं। किंतु हेनरी नौवेन द्वारा लिखी पुस्तक Name of Jesus: Reflections on Christian Leadership एक अलग ही दृष्टिकोण से लिखी गई है। इस पुस्तक के लेखक एक विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफैसर हैं और उन्होंने अनेक वर्षों तक मानसिक तौर पर अपूर्ण विकसित व्यसकों के समाज में सेवा करी है। अपनी पुस्तक में वे कहते हैं, "प्रश्न ये नहीं हैं कि - कितने लोग आपको गंभीरता से लेते हैं? इससे आपको कितनी उपलब्धि प्राप्त हो जाएगी? क्या आप कोई परिणाम दिखाने पाएंगे? वरन प्रश्न यह है कि क्या आप प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं?...अकेलेपन और निराशा से भरे हमारे संसार में, ऐसे लोगों की बहुत आवश्यकता है जो परमेश्वर के हृदय को जानते हैं; उस हृदय को जो क्षमा करता है, जो औरों की परवाह करता है, जो पहल करके तथा आगे बढ़कर लोगों को स्वास्थ्य देता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के अनुयायी प्रेरित यूहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा, "जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा" (1 यूहन्ना 4:9-10)।

   हेनरी नौवेन ने आगे लिखा कि "आने वाले समय के मसीही अगुवे वे ही होने पाएंगे जो परमेश्वर के हृदय को वास्तव में जानते होंगे; उस हृदय को जो प्रभु यीशु में सदेह होकर हमारे बीच में आया।" प्रभु यीशु में ही हम परमेश्वर के असीम, निस्वार्थ, बिना किसी शर्त पर आधारित प्रेम को जानने और अनुभव करने पाते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में होता है तब ही हमारे हृदय औरों के लिए खुलते हैं।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:14

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-10
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29


Thursday, February 25, 2016

विश्राम


   हमारा पालतु कुत्ता कभी-कभी इतना उत्साहित और उत्तेजित हो जाता है कि उस उत्तेजना से उसे मिर्गी का सा दौरा पड़ जाता है। ऐसा होने से बचाए रखने के लिए हमें उसे शान्त करते रहना पड़ता है। हम उसे सहलाते हैं, शान्तिदायक आवाज़ में उससे बातें करते हैं और उससे लेट जाने को कहते हैं। परन्तु जैसे ही वह हमसे "लेट जाओ" सुनता है, वह तुरंत नज़रें चुराना और दुःखी होने के हाव-भाव दिखाना आरंभ कर देता है; और अन्ततः बड़े नाटकीय ढंग से यह दिखाते हुए कि वह हमारे कहे को करने के लिए मजबूर है, फर्श पर लेट जाता है।

   कभी कभी हम मनुष्यों को भी शान्त होकर लेट जाने की आवश्यकता होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 23 में हम पाते हैं कि हमारा अच्छा चरवाहा, हमारा परमेश्वर हमें हरी-हरी चराईयों में बैठाता है और सुखदाई जल के झरनों के पास ले जाता है (भजन 23:2-3)। वह जानता है कि हमें जिस शान्ति और विश्राम की आवश्यकता है वह हमें उसकी उन चराईयों और झरनों में आने से ही मिल सकेगा, चाहे हम स्वयं अपनी इस आवश्यकता का आभास ना भी कर सकें।

   हमारे शरीर नियमित विश्राम लेने के लिए बनाए गए हैं। स्वयं परमेश्वर ने भी सृष्टि की रचना करके सातवें दिन विश्राम किया (उत्पत्ति 2:2-3; निर्गमन 20:9-11)। प्रभु यीशु भी जानते थे कि लोगों की भीड़ की सेवकाई का भी समय है और विश्राम करने का भी समय है; अपनी अपनी जगह दोनों ही की आवश्यकता है। प्रभु यीशु ने सेवकाई से लौटे अपने चेलों से कहा: "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था" (मरकुस 6:31)। जब हम विश्राम लेते हैं तो हमारे शरीर और मस्तिषक तरोताज़ा होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों पर पुनःकेन्द्रित भी हो सकते हैं। जब हम अपने सारे समय को किसी ना किसी कार्य से भरते रहते हैं, चाहे वह भला, उपयुक्त और आवश्यक कार्य ही क्यों ना हों, तो हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए परमेश्वर को हमें विश्राम में लेटा देना पड़ता है।

   हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा, जो हमारी आवश्यकताओं को भली-भांति जानता है, विश्राम हमें दी गई एक भली भेंट है। उसका धन्यवाद करें कि वह कभी-कभी हमें विश्राम के लिए अपनी संगति की हरी चराईयों में लेटा देता है। - सिंडी हैस कैस्पर


यदि हम कार्य से अलग होकर विश्राम नहीं करेंगे, तो हम कार्य करने लायक ही ना रहकर बिखर जाएंगे। - हैवनर

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। - भजन 23:2-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:8-11
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


Wednesday, February 24, 2016

रणनीति


   ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखे चीनी उपन्यास Romance of the Three Kingdoms में, लेखक ल्यू ग्वँज़ौंग ने "खाली किला" रणनीति, अर्थात शत्रु को छलावा देने के लिए विपरीत मनोविज्ञान के प्रयोग के बारे में बताया है। जब वेई साम्राज्य के 150,000 सैनिकों के साथ उनका सेनापति ज़िंग शहर पहुँचा, जहाँ 2,500 से भी कम सैनिक थे, तो उन्होंने नगर के द्वार को खुला हुआ और वहाँ के सुप्रसिद्ध युद्ध रणनीतिकार ज़ू लियांग को अपने दो बच्चों के साथ बैठे संगीत वाद्य बजाते हुए पाया। ज़ू लियांग के इस बेफिक्र अन्दाज़ को देखकर वेई साम्राज्य का सेनापति घबरा गया, और यह समझकर कि वे किसी भारी षड़यंत्र का शिकार होने वाले हैं, उसने अपने सैनिकों को तुरंत वापस लौट चलने का आदेश दे दिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी ऐसी ही एक रणनीति का उल्लेख है। न्यायियों 7 में परमेश्वर ने गिदोन के 300 आदमियों, घड़ों, तुरहीयों और मशालों का उपयोग टिड्डियों के समान बहुतेरे मिद्यानी सैनिकों और गिनती से परे उनके ऊँटों के विरुद्ध किया। क्या इस्त्राएल ऐसे भारी शत्रु को हरा सकता था, जबकि उनके पास ना तो सैनिक थे और ना ही युद्ध के लिए हथियार? चाहे इस्त्राएल के पास लड़ाई के लिए उपयुक्त समझा जाने वाला कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास वह एकमात्र था जिस के बाद फिर और किसी की कोई आवश्यकता नहीं थी - परमेश्वर की प्रतिज्ञा: "तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं" (न्यायियों 7:7)। और परिणाम - इस्त्राएल की विजय!

   क्या आपके जीवन में कोई कठिन चुनौती है जो आपको परेशान कर रही है? प्रभु परमेश्वर ने कहा है, "तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?" (यर्मियाह 32:26-27)। परमेश्वर पर रखे गए विश्वास से बेहतर कोई रणनीति नहीं है; अपने विश्वास को बनाए रखें और परमेश्वर को अपने समय तथा विधि से कार्य कर लेने दें; परिणाम अद्भुत होंगे। - पो फ़ैंग चिया


परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है।

किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। - भजन 20:7

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:1-8
Judges 7:1 तब गिदोन जो यरूब्बाल भी कहलाता है और सब लोग जो उसके संग थे सवेरे उठे, और हरोद नाम सोते के पास अपने डेरे खड़े किए; और मिद्यानियों की छावनी उनकी उत्तरी ओर मोरे नाम पहाड़ी के पास तराई में पड़ी थी।
Judges 7:2 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, जो लोग तेरे संग हैं वे इतने हैं कि मैं मिद्यानियों को उनके हाथ नहीं कर सकता, नहीं तो इस्राएल यह कहकर मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई मारने लगे, कि हम अपने ही भुजबल के द्वारा बचे हैं। 
Judges 7:3 इसलिये तू जा कर लोगों में यह प्रचार कर के सुना दे, कि जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए। तब बाईस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए। 
Judges 7:4 फिर यहोवा ने गिदोन से कहा, अब भी लोग अधिक हैं; उन्हें सोते के पास नीचे ले चल, वहां मैं उन्हें तेरे लिये परखूंगा; और जिस जिसके विषय में मैं तुझ से कहूं, कि यह तेरे संग चले, वह तो तेरे संग चले; और जिस जिसके विषय मे मैं कहूं, कि यह तेरे संग न जाए, वह न जाए। 
Judges 7:5 तब वह उन को सोते के पास नीचे ले गया; वहां यहोवा ने गिदोन से कहा, जितने कुत्ते की नाईं जीभ से पानी चपड़ चपड़ कर के पीएं उन को अलग रख; और वैसा ही उन्हें भी जो घुटने टेककर पीएं। 
Judges 7:6 जिन्होंने मुंह में हाथ लगा चपड़ चपड़ कर के पानी पिया उनकी तो गिनती तीन सौ ठहरी; और बाकी सब लोगों ने घुटने टेककर पानी पिया। 
Judges 7:7 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं। 
Judges 7:8 तब उन लोगों ने हाथ में सीधा और अपने अपने नरसिंगे लिये; और उसने इस्राएल के सब पुरूषों को अपने अपने डेरे की ओर भेज दिया, परन्तु उन तीन सौ पुरूषों को अपने पास रख छोड़ा; और मिद्यान की छावनी उसके नीचे तराई में पड़ी थी।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20


Tuesday, February 23, 2016

प्रेम


   हाल ही में मेरे एक मित्र ने मुझे एक मसीही गीत के लिखे जाने का वर्णन भेजा; हम उस गीत को अपने बचपन में अपने चर्च में अकसर सुनते थे:
यदि सारे समुद्र स्याही होते, और सारा आकाश एक चर्म पत्र;
यदि संसार की हर डाली कलम बन जाती और हर व्यक्ति लिखनेवाला;
तो भी परमेश्वर के प्रेम के बयान को लिखने में,
सारे समुद्र सूख जाते, और सारे आकाश के छोर से छोर तक लिखने पर भी
उस प्रेम का बयान पूरा नहीं लिखा जाता।

   ये शब्द एक प्राचीन यहूदी कविता का भाग हैं जो किसी समय एक पागलखाने में भरती रोगी के कमरे की दीवार पर लिखे मिले थे। अंग्रेज़ी भाषा में इस गीत के लेखक, फ्रेड्रिक एम. लेह्मैन इस कविता से इतने अभिभूत हुए कि उन्होंने इसे और बढ़ाना चाहा। वे व्यवसाय से एक मज़दूर थे और 1917 की एक दोपहर को, भोजन के अवकाश समय में, एक बक्से पर बैठे हुए उन्होंने इस गीत के पहले दो अन्तरे और कोरस लिखकर उस कविता में जोड़े और "परमेश्वर का प्रेम" शीर्षक से यह गीत तैयार हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार सांत्वना और चैन देने वाले परमेश्वर के प्रेम का अश्वासन देते हुए कहता है, "हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है" (भजन 36:5)। हमारे जीवन की तत्कालीन परिस्थिति चाहे कैसी भी क्यों ना हो - चाहे किसी कठिन परीक्षा की घड़ी से निकलते हुए, मानसिक उलझनों से भरे मन को सामान्य सन्तुलन के कुछ पल ही क्यों ना मिले हों, परमेश्वर का प्रेम सदा ही आशा की किरण, तथा सामर्थ और साहस का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत बनकर हमारा हौंसला बढ़ाता रहता है, हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता रहता है। - जो स्टोवैल


प्रभु आपसे अनन्तकाल के प्रेम से प्रेम करता है।

क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है। - भजन 100:5

बाइबल पाठ: भजन 36:1-12
Psalms 36:1 दुष्ट जन का अपराध मेरे हृदय के भीतर यह कहता है कि परमेश्वर का भय उसकी दृष्टि में नहीं है। 
Psalms 36:2 वह अपने अधर्म के प्रगट होने और घृणित ठहरने के विषय अपने मन में चिकनी चुपड़ी बातें विचारता है। 
Psalms 36:3 उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उसने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है। 
Psalms 36:4 वह अपने बिछौने पर पड़े पड़े अनर्थ की कलपना करता है; वह अपने कुमार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है; बुराई से वह हाथ नहीं उठाता।
Psalms 36:5 हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है। 
Psalms 36:6 तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।
Psalms 36:7 हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं। 
Psalms 36:8 वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा। 
Psalms 36:9 क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे।
Psalms 36:10 अपने जानने वालों पर करूणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मन वालों में करता रह! 
Psalms 36:11 अहंकारी मुझ पर लात उठाने न पाए, और न दुष्ट अपने हाथ के बल से मुझे भगाने पाए। 
Psalms 36:12 वहां अनर्थकारी गिर पड़े हैं; वे ढकेल दिए गए, और फिर उठ न सकेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41


Monday, February 22, 2016

प्रोत्साहन


   जमाइका के यूसेन बोल्ट और योहन ब्लेक ने, लंडन में आयोजित 2012 के ओलंपिक खेलों में ऐतिहासिक कीर्तीमान स्थापित किया; वे दोनों ही 100 और 200 मीटर की दोनों दौड़ों में, क्रमशः प्रथम और द्वितीय आए। दौड़ के मैदान पर उनकी परस्पर स्पर्धा के बावजूद बोल्ट ने प्रशिक्षण सहयोगी होने के लिए ब्लेक की प्रशंसा करते हुए कहा: "बीते वर्षों में योहन ने मुझे एक बेहतर खिलाड़ी बनाया है। वह लगातार मुझे और बेहतर करने के लिए उकसाता रहा, मेरे पीछे पड़ा रहा।" यह स्पष्ट था कि वे दोनों दौड़ की उस स्पर्धा द्वारा एक दूसरे को और बेहतर बनाने में लगे रहते थे।

   मसीह यीशु के विश्वासी और अनुयायी होने के नाते यह हमारी ज़िम्मेदारी और हमें प्रदान किया गया आदर है कि हम एक दूसरे को मसीही विश्वास में प्रोत्साहित करती रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री में लिखा है: "और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें" (इब्रानियों 10:24)।

   चर्च अर्थात, मसीही विश्वासियों की मण्डली, कोई सामाजिक संस्था या समय व्यतीत करने के लिए प्रति सप्ताह मिलने-जुलने का स्थान नहीं है। चर्च वह स्थान है जहाँ हम, जो प्रभु यीशु के द्वारा पापों की क्षमा प्राप्त करके परमेश्वर के निकट लाए गए हैं, मसीह यीशु के स्वरूप में ढलने और बढ़ने में एक दूसरे की सहायता करते हैं। चर्च में हमारे एक साथ एकत्रित होने का उद्देश्य ही एक दूसरे को मसीही विश्वास में उभारना और प्रोत्साहित करना है।

   कोई भी मसीही विश्वासी अकेला रहकर कार्य नहीं कर सकता है; जैसा हमारा प्रभु हमसे चाहता है, वैसा जीवन जीने के लिए हमें मसीही विश्वासियों की संगति चाहिए। जब आप अन्य मसीही विश्वासियों से मिलें, तो यह जानने का प्रयास करें कि ऐसा कौन है जिसके निकट आकर आप उसे अपने शब्दों और कार्यों के द्वारा अपने प्रभु मसीह यीशु की समानता में और अधिक आने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। - सी. पी. हिया


पाप से दुःखी संसार के लिए एक स्वस्थ्य मसीही मण्डली सर्वोत्तम साक्षी है।

और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। - प्रेरितों 2:42

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20


Sunday, February 21, 2016

बताएं


   मुझे राष्ट्रीय स्तर पर वितृत किए गए एक समाचार लेख को देख कर अचरज हुआ; उस लेख में किशोरों के एक समूह की प्रशंसा करी गई थी जो कॉलेराडो में स्थित बर्फ के ढालों पर स्कींग करने आए लोगों के साथ प्रति इतवार चर्च सभाएं करते थे। इस लेख ने, जिसमें पत्रकार ने उन किशोरों के बारे में लिखा था जो स्कींग करना और साथ ही लोगों को यह बताना कि प्रभु यीशु ने उनके जीवन कैसे बदले पसन्द करते थे, बहुत से लोगों को आकर्षित किया। इन किशोरों का साथ एक युवा मसीही विश्वासियों की संस्था दे रही थी, जो उन्हें परमेश्वर के प्रेम को दूसरों तक पहुँचाने और प्रगट करने में सहायता करती थी।

   दूसरों को कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने से अधिक सरल होता है स्वयं उस कार्य को करना, परन्तु फिर भी प्रभु यीशु ने अपने आप को अपने चेलों के जीवन में निवेश किया, क्योंकि उन चेलों ही के द्वारा उनका सन्देश संसार में जाना था। जब लोग प्रभु से चँगाई पाने के लिए उसे घेरे हुए थे, वह एक पहाड़ पर चढ़ गया और "तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें" (मरकुस 3:14)।

   कॉलेराडो के उन किशोरों में से एक किशोरी ने मसीही शिष्यता के अपने प्रशिक्षण के बारे में बताया: "मैं कभी परिवार या मित्रों के साथ कोई संबंध बना कर नहीं रख सकी; मैं सदा ही उनसे दूरी बनाए रखती थी। लेकिन इस कार्यक्रम ने ना केवल मुझे परमेश्वर के प्रेम का अनुभव करवाया, वरन मुझे उस प्रेम को दूसरों तक पहुँचाना भी सिखाया।

   प्रभु यीशु के प्रेम का व्यक्तिगत अनुभव करने और उसके अनुयायियों के साथ रहने से हम वह साहस और सामर्थ पाते हैं जिससे हम वह सब कह और कर सकते हैं जो हमारे प्रभु को आदर देता है; क्योंकि प्रभु यीशु के प्रेम और उद्देश्य के बारे में बताना ही मसीही जीवन का ध्येय है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही गवाही देना करे जाने के लिए कार्य नहीं वरन जीए जाने के लिए जीवन है।

उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं। - मरकुस 1:38

बाइबल पाठ: मरकुस 3:1-15
Mark 3:1 और वह आराधनालय में फिर गया; और वहां एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूख गया था। 
Mark 3:2 और वे उस पर दोष लगाने के लिये उस की घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। 
Mark 3:3 उसने सूखे हाथ वाले मनुष्य से कहा; बीच में खड़ा हो। 
Mark 3:4 और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे। 
Mark 3:5 और उसने उन के मन की कठोरता से उदास हो कर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया। 
Mark 3:6 तब फरीसी बाहर जा कर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें। 
Mark 3:7 और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। 
Mark 3:8 और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सूर और सैदा के आसपास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्भे के काम करता है, उसके पास आई। 
Mark 3:9 और उसने अपने चेलों से कहा, भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें। 
Mark 3:10 क्योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे। 
Mark 3:11 और अशुद्ध आत्माएं भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्लाकर कहती थीं कि तू परमेश्वर का पुत्र है। 
Mark 3:12 और उसने उन्हें बहुत चिताया, कि मुझे प्रगट न करना। 
Mark 3:13 फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्हें वह चाहता था उन्हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। 
Mark 3:14 तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें। 
Mark 3:15 और दुष्टात्माओं के निकालने का अधिकार रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3


Saturday, February 20, 2016

ढांपे गढ़हे


   मई 2010 में मध्य अमेरिका पर अगाथा नामक तूफान का प्रहार हुआ जिससे उस क्षेत्र में बहुत मूसलाधार बारिश और भारी भूस्खलन हुआ। जब वह तूफान आगे बढ़ गया तो गूवाटेमाला शहर में नीचे की ज़मीन बैठ जाने से अचानक ही एक 200 फुट गहरा गढ़हा बन गया जिसमें आसपास की ज़मीन, बिजली के खंबे और एक तीन मंज़िली इमारत समा गए।

   ऐसे गढ़हे बहुत हानिकारक होते हैं, किंतु कभी कभी ही देखने को मिलते हैं। लेकिन सबसे आम और सबसे खतरनाक गढ़हे होते हैं मानव हृदयों में। ऐसे खतरनाक गढ़हे और उसके विनाशकारी प्रभाव का उदाहरण है परमेश्वर के वचन बाइबल का एक प्रमुख पात्र दाऊद।

   परमेश्वर की स्तुति में लिखे गए अनेक भजनों के रचियेता और परमेश्वर द्वारा इस्त्राएल का राजा होने के लिए अभिषिक्त और स्थापित दाऊद के जीवन की सतह स्थिर और समतल दिखती थी, लेकिन पाप ने उसके जीवन की आन्तरिक स्थिति कमज़ोर कर दी। दाऊद के द्वारा व्यभिचार और हत्या का पाप हुआ, जिसे उसने छुपाने का प्रयास किया, और उसे लगा कि वह अपने इस प्रयास में सफल भी हो गया है (2 शमूएल 11-12)। लेकिन परमेश्वर की नज़रों से ना तो कुछ छिपता है और ना ही कोई बचता है; परमेश्वर ने अपने नबी नातान के द्वारा दाऊद के पाप को कठोर शब्दों में उसके सामने लाकर रख दिया और उसे यह एहसास करवाया कि पाप को छुपाने और नज़रन्दाज़ करने के प्रयास के कारण उसका आत्मिक जीवन कमज़ोर हो गया है। अपने जीवन में आए पाप के इस गढ़हे को और बढ़ने तथा और नुकसान करने से रोकने के लिए दाऊद ने परमेश्वर के सामने अपने पाप को पश्चाताप के साथ स्वीकार कर लिया (भजन 32:5)। परिणामस्वरूप परमेश्वर ने दाऊद को क्षमा किया और उसे पाप क्षमा के आनन्द को प्राप्त किया (भजन 32:1)।

   आज हमारे लिए भी परमेश्वर का यह अनुग्रह उपलब्ध है। जब भी हम अपने पापों का अंगीकार कर के पश्चाताप के साथ परमेश्वर के पास आते हैं, उससे अपने पापों के लिए प्रभु यीशु के नाम से क्षमा मांगते हैं, हम परमेश्वर से पापों की पूर्ण क्षमा और पापों के गढ़हों के ढाँपे जाने के आनन्द को प्राप्त करते हैं। - मार्विन विलियम्स


जब हम सच्चे पश्चातप के साथ अपने पाप उजागर कर देते हैं, परमेश्वर अपने अनुग्रह द्वारा उन्हें ढांप देता है।

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। - कुलुस्सियों 1:13-14

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। 
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई। 
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। 
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा। 
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के। 
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 26-27
  • मरकुस 2


Friday, February 19, 2016

शांति


   अनेक लोगों द्वारा प्रथम विश्व युद्ध मानव इतिहास के सबसे घातक युद्धों में से एक माना जाता है। इस आधुनिक युग में, सारे विश्व के देशों फँसा लेने वाले इस प्रथम युद्ध में लाखों लोगों ने अपनी जान गँवाई। सन 1918 के ग्यारवें महीने, नवंबर, के ग्यारवें दिन के ग्यारवें घण्टे में युद्ध विराम किया गया और उस ऐतिहासिक पल में सारे संसार के लाखों लोग कुछ पल के लिए शांत हो गए और युद्ध की भारी कीमत - जान और माल के नुकसान तथा जीवनों में आई तकलीफ पर विचार किया। यह माना जाता था कि वह "महा-युद्ध", जैसा कि उसे उस समय कहा जाता था, "सब युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध होगा"।

   लेकिन उस युद्ध के बाद भी अनेक अन्य घातक युद्ध विभिन्न स्थानों पर लड़े गए हैं और लड़े जा रहे हैं। परन्तु फिर भी स्थाई शांति की आशा बनी हुई है। परमेश्वर का वचन बाइबल एक संभव और वास्तविक शांति की आशा के बारे में बताती है जिसके बाद फिर कभी कोई युद्ध या अशांति नहीं होगी। प्रभु यीशु मसीह के पुनःआगमन के साथ बाइबल की यशायाह नबी की पुस्तक में दी गई भविष्यवाणी "वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे" (यशायाह 2:4) पूरी होगी और फिर ग्यारवाँ घण्टा गुज़र जाएगा और नए आकाश और नए पृथ्वी में अनन्त शांति का नया और प्रथम घण्टा आरंभ हो जाएगा।

   जब तक वह दिन ना आए, हम जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं, हमें शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के राजदूत बनकर इस संसार के सामने उस आने वाले शांति के राज्य का सुसमाचार सब को पहुँचाना है। - डेनिस फिशर


सच्ची और स्थाई शांति केवल मसीह यीशु में प्राप्त करी जा सकती है।

सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: मत्ती 24:3-14
Matthew 24:3 और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, हम से कह कि ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्या चिन्ह होगा? 
Matthew 24:4 यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 
Matthew 24:5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्‍त न होगा। 
Matthew 24:7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे। 
Matthew 24:8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी। 
Matthew 24:9 तब वे क्‍लेश दिलाने के लिये तुम्हें पकड़वाएंगे, और तुम्हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:10 तब बहुतेरे ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:11 और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:12 और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा। 
Matthew 24:13 परन्तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। 
Matthew 24:14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 25
  • मरकुस 1:23-45


Thursday, February 18, 2016

सहायक


   कुछ लोगों के लिए ’सहायक’ कहा जाना एक निम्न दर्जे को दिखाता है और उन्हें यह शब्द पसन्द नहीं आता। प्रशिक्षित अध्यापकों की सहायता के लिए कक्षा में सहायक होते हैं; इसी प्रकार प्रशिक्षित विद्युत कर्मियों, नलसाज़ों, वकीलों आदि की सहायाता के लिए भी उनके सहायक होते हैं। चाहे वे सहायक उन प्रशिक्षित लोगों के समान प्रशिक्षण पाए हुए नहीं होते, किंतु उन सहायकों की सहायता के बिना उन प्रशिक्षित लोगों को कार्य सुचारू रीति से करना पाना बहुत कठिन हो जाता है; उन सहायकों की आवश्यकता भी प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के जितनी ही होती है।

   प्रेरित पौलुस के साथ उसकी मसीही सेवकाई में अनेक सहायक होते थे। पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री के अन्त में अपने सहायकों का उल्लेख और धन्यवाद किया, उनके कार्यों और सहायता को सराहा और स्मरण किया (रोमियों 16)। पौलुस ने फीबे के लिए लिखा "...वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है" (रोमियों 16:2); और प्रिसका तथा अक्विला के लिए लिखा, "उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं" (रोमियों 16:4); मरियम के लिए लिखा, "...जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया" (रोमियों 16:6)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि सहायता करना एक आत्मिक वरदान है; पौलुस ने इसे पवित्र आत्मा के वरदानों की सूची में, जो मसीही मण्डली और मसीही विश्वासियों के उत्थान के लिए दिए गए हैं, ’उपकार’ कहकर सम्मिलित किया है "और परमेश्वर ने कलीसिया में अलग अलग व्यक्ति नियुक्त किए हैं; प्रथम प्रेरित, दूसरे भविष्यद्वक्ता, तीसरे शिक्षक, फिर सामर्थ के काम करने वाले, फिर चंगा करने वाले, और उपकार करने वाले, और प्रधान, और नाना प्रकार की भाषा बोलने वाले" (1 कुरिन्थियों 12:28)। जैसे अन्य वरदान मसीही मण्डली और विश्वासियों की बढ़ोतरी के लिए अनिवार्य हैं, सहायता या उपकार करना भी उतना ही आवश्यक है।

   बाइबल ने परमेश्वर पवित्र आत्मा को भी ’सहायक कहा है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को समझाया कि उनके जाने के बाद परमेश्वर के ओर से उन्हें एक सहायक अर्थात पवित्र आत्मा मिलेगा जो उनका मार्गदर्शन करेगा, उन्हें सब बातें सिखाएगा (यूहन्ना 14:26)।

   यदि सहायता करना परमेश्वर के वरदानों में से एक, और सहायक होना परमेश्वर पवित्र-आत्मा की एक संज्ञा है तो फिर इसे निम्न दर्जे का समझना तो भूल ही होगा। जिस किसी सहायाता के योग्य परमेश्वर ने आपको बनाया है, जिस भी सहायता का वरदान उसने आपको दिया है, उसे बेझिझक होकर भरपूरी के साथ परमेश्वर की महिमा के लिए प्रयोग करें। - ऐनी सेटास


आप संपूर्ण का एक महत्वपूर्ण भाग हैं; आपके बिना संपूर्ण अधूरा है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-16
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है। 
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार। 
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। 
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार। 
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:7 अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार। 
Romans 16:8 अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार। 
Romans 16:9 उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार। 
Romans 16:10 अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार। 
Romans 16:11 मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार। 
Romans 16:12 त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:13 रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार। 
Romans 16:14 असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार। 
Romans 16:15 फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार।
Romans 16:16 आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो तुम को मसीह की सारी कलीसियाओं की ओर से नमस्कार।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 23-24
  • मरकुस 1:1-22


Wednesday, February 17, 2016

सुनें


   एक पुरानी कहावत है, "परमेश्वर ने आपको केवल एक मूँह किंतु दो कान किसी उद्देश्य से ही दिए हैं"; सुन पाना जीवन के लिए आवश्यक योग्यताओं में से एक है। परस्पर संबंधों के विषय में परामर्श देने वाले कहते हैं कि हमें एक दूसरे की बात सुननी चाहिए। आत्मिक अगुवे कहते हैं कि हमें परमेश्वर की बात सुननी चाहिए। किंतु शायद ही कोई होगा जो यह कहता है कि हमें अपनी कही बात भी सुननी चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हमारे अन्तरात्मा की आवाज़ सदा ही सही होती है; और ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि हमें परमेश्वर अथवा दूसरों की सुनने की बजाए अपनी ही सुनते रहना चाहिए। लेकिन जो मैं कहना चाह रही हूँ वह यह है कि हमें अपने आप को इसलिए सुनना चाहिए जिससे हम जान सकें कि दूसरे हमें कैसा सुनते हैं।

   जब मूसा इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर ले चला, तब उन इस्त्राएलियों को किसी के द्वारा अपनी बात सुनने का परामर्श दिया जाना चाहिए था। यद्यपि परमेश्वर उन्हें अद्भुत आश्चर्यकर्मों के द्वारा मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर लाया था, परन्तु निकल आने के कुछ ही दिनों में ही वे कुड़कुड़ाने लगे (निर्गमन 16:2)। चाहे भोजन की उनकी आवश्यकता उचित थी, परन्तु उस आवश्यकता को व्यक्त करने का उनका तरीका गलत था (पद 3)।

   जब भी हम भय, क्रोध, अज्ञानता अथवा घमण्ड में होकर बोलते हैं तो लोगों को हमारे शब्दों से अधिक हमारी भावनाएं सुनाई देती हैं, चाहे हमारी कही बात सही ही क्यों ना हो; लेकिन सुनने वाले यह नहीं जान पाते कि हमारे भाव प्रेम और चिंता के कारण हैं अथवा अनादर और तिरिस्कार के कारण, इसलिए हमें और हमारी बात के गलत समझे जाने का जोखिम बना रहता है। किंतु यदि कुछ भी बोलने से पहले हम अपनी सुन लें, अर्थात अपनी बात और भाव का आँकलन कर लें, तो हम अपने असावधानी से कहे शब्दों से किसी की हानि करने या परमेश्वर का दिल दुखाने से बचे रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उतावलेपन और बिना सोचे-समझे कहे गए शब्द भलाई कम, हानि अधिक करते हैं।

बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:2

बाइबल पाठ: निर्गमन 16:1-8
Exodus 16:1 फिर एलीम से कूच कर के इस्राएलियों की सारी मण्डली, मिस्र देश से निकलने के महीने के दूसरे महीने के पंद्रहवे दिन को, सीन नाम जंगल में, जो एलीम और सीनै पर्वत के बीच में है, आ पहुंची। 
Exodus 16:2 जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरुद्ध बकझक करने लगी। 
Exodus 16:3 और इस्राएली उन से कहने लगे, कि जब हम मिस्र देश में मांस की हांडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो। 
Exodus 16:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जा कर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इस से मैं उनकी परीक्षा करूंगा, कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं। 
Exodus 16:5 और ऐसा होगा कि छठवें दिन वह भोजन और दिनों से दूना होगा, इसलिये जो कुछ वे उस दिन बटोरें उसे तैयार कर रखें। 
Exodus 16:6 तब मूसा और हारून ने सारे इस्राएलियों से कहा, सांझ को तुम जान लोगे कि जो तुम को मिस्र देश से निकाल ले आया है वह यहोवा है। 
Exodus 16:7 और भोर को तुम्हें यहोवा का तेज देख पडेगा, क्योंकि तुम जो यहोवा पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं, कि तुम हम पर बुड़बुड़ाते हो? 
Exodus 16:8 फिर मूसा ने कहा, यह तब होगा जब यहोवा सांझ को तुम्हें खाने के लिये मांस और भोर को रोटी मनमाने देगा; क्योंकि तुम जो उस पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं? तुम्हारा बुड़बुड़ाना हम पर नहीं यहोवा ही पर होता है।

एक साल में बाइबल: लैव्यवस्था 21-22; मत्ती 28

Tuesday, February 16, 2016

आदर


   चर्च के पास्टरों को आलोचना का निशाना बनाना सहज है। प्रति सप्ताह वे हमारे सामने खड़े होते हैं, हमें परमेश्वर के वचन की बातें सिखाते और समझाते हैं, हमें चुनौती देते हैं कि हम प्रभु यीशु मसीह के समान जीवन व्यतीत करें। लेकिन अनेक बार हम उनके जीवनों में आलोचना करने योग्य बातों को ढ़ूँढ़ते रहते हैं। उन सारी अच्छाईयों को नज़रन्दाज़ करके जो पास्टर में पाई जाती हैं, केवल उसकी कुछ बातों पर ध्यान केंद्रित करना, फिर उन बातों के लिए उसकी आलोचना करना और उनके बारे में अपनी व्यक्तिगत राय को लोगों में फैलाना बहुत सरल होता है।

   हमें सदा यह स्मरण रखना चाहिए कि हमारे पास्टर भी हम मनुष्यों के समान ही मनुष्य ही हैं और हमारे समान ही वे भी सिद्ध नहीं हैं। मैं यह नहीं कहता कि हमें आँखें मूँद कर उनकी कही हर बात को मान लेना चाहिए, ग्रहण कर लेना चाहिए; ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि हमें उनकी गलतियों या कमज़ोरियों को नज़रन्दाज़ करना चाहिए; परन्तु जो मैं कह रहा हूं वह यह है कि यदि हमें उनमें कुछ कमी या त्रुटि नज़र आती है तो उसे सही रीति से, विनम्रता सहित उन तक पहुँचाना चाहिए। पास्टरों के प्रति, जो परमेश्वर का वचन सिखाने और मण्डली के अगुवे होने की सेवकाई करते हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री के कुछ भाग हमें सही दृष्टिकोण रखने में सहायक हो सकते हैं: "अपने अगुवों की मानो; और उनके आधीन रहो, क्योंकि वे उन की नाईं तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी सांस ले ले कर, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं" (इब्रानियों 13:17)।

   इन वचनों के बारे में विचार कीजिए। परमेश्वर के सामने हमारे पास्टर हमें सही मार्गदर्शन देने के लिए जवाबदेह हैं; हमारा प्रयास होना चाहिए कि उनकी यह ज़िम्मेदारी आनन्दपूर्ण हो ना कि कष्टपूर्ण। इब्रानियों का यह खण्ड हमें यह भी सिखाता है कि पास्टर को तकलीफ देने से कोई लाभ नहीं होने वाला (पद 17)।

   जब हम उनका आदर करते हैं जिन्हें परमेश्वर ने हमारा अगुआ करके ठहराया है तो हम परमेश्वर का आदर करते हैं और अपने तथा मसीही मण्डली के लिए बातों को बेहतर तथा सुखदायी करते हैं। - डेव ब्रैनन


पास्टरों को, जो परमेश्वर का वचन प्रचार करते हैं, लोगों से अच्छे व्यवहार की आवश्यकता रहती है।

हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। इसलिए जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। - रोमियों 13:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:17-19
Hebrews 13:17 अपने अगुवों की मानो; और उनके आधीन रहो, क्योंकि वे उन की नाईं तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी सांस ले ले कर, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं। 
Hebrews 13:18 हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। 
Hebrews 13:19 और इस के करने के लिये मैं तुम्हें और भी समझाता हूं, कि मैं शीघ्र तुम्हारे पास फिर आ सकूं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 19-20
  • मत्ती 27:51-66


Monday, February 15, 2016

महान सृष्टिकर्ता


   कुछ वर्ष पहले स्की करते हुए मैं गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो गया, और मेरी एक टांग के अन्दर की माँसपेशियाँ फट गईं; मेरे चिकित्सक ने मुझे बताया कि टांग के अन्दर खून का काफी रिसाव भी हुआ। इन सब चोटों से ठीक होकर निकलने की प्रक्रिया पीड़ादायक, धीमी और लंबी थी; किंतु पूर्णतया ठीक हो जाने की प्रतीक्षा का मेरा यह समय अपने महान सृष्टिकर्ता परमेश्वर के महान कार्य पर अचरज करते हुए व्यतीत हुआ (कुलुस्सियों 1:16)।

   मैंने अपने जीवन में कारों को क्षति पहुँचाई है; मेरे हाथों से गिरकर कुछ बर्तन और तश्तरियाँ टूटे हैं, लेकिन ये सभी मानव-कृतियाँ एक बार बिगड़ीं या टूटीं तो बिगड़ी या टूटी ही रह गईं; इनमें से कोई भी अपने-आप से ठीक कभी नहीं हुई। लेकिन मेरी टांग के साथ ऐसा नहीं था। जैसे ही अन्दर से माँसपेशियाँ फटीं, मेरे शरीर में प्रभु यीशु ने जो आन्तरिक उपचार और सुधार प्रणाली डाली है, उसने अपना कार्य करना आरंभ कर दिया और अन्दर ही अन्दर मेरी टांग का सुधार और उपचार होने लगा। कुछ समय के बाद मैं खड़ा होने और फिर चलने-फिरने, अन्ततः फिर से भागने लगा; मेरे इस प्रकार ठीक होने से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कही गई बात, "मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं" (भजन 139:14) एक नई रीति से समझ में आई।

   कभी-कभी किसी बीमारी या चोट के द्वारा हमें ज्ञात होता और समझ में आता है कि हम कैसी अद्भुत रचना अपने शरीरों में लिए हुए हैं। इसलिए अगली बार जब भी आपको अपने जीवन में किसी अनेपक्षित और अनचाही अड़चन के कारण - चाहे उसका कारण और स्वरूप कुछ भी हो, रुकना पड़े या आराम करना पड़े, तो अपना ध्यान अपने महान सृष्टिकर्ता प्रभु यीशु पर केंद्रित करें, उसके प्रेम पर मन लगाएं, और उसे अवसर दें कि वह आपके मन को कृतज्ञतापूर्ण आराधना के लिए उभार सके, आपकी उस पीड़ा और परेशानी में भी। - जो स्टोवैल


कृतज्ञ मन से ही महान सृष्टिकर्ता की सच्ची आराधना हो सकती है।

क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। - कुलुस्सियों 1:16 

बाइबल पाठ: भजन 139:1-16
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है। 
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं। 
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50


Sunday, February 14, 2016

सच्चा प्रेम


   मेरे भाई के विवाह समारोह के पूर्वाभ्यास के समय मेरे पति ने होने वाले पति-पत्नि का एक चित्र खींचा जिसमें वे एक दुसरे की ओर मुँह किए हुए पास्टर के सामने खड़े थे। बाद में जब हम ने उस चित्र को देखा तो पाया कि कैमरे के फ्लैश से पृष्ठभूमि में टंगा धातु से बना एक क्रूस चमक उठा था और उस दंपत्ति के ऊपर खड़े एक चमकते हुए क्रूस के समान दिख रहा था।

   इस चित्र ने मुझे स्मरण कराया कि विवाह प्रभु यीशु मसीह के अपनी विश्वासियों की मण्डली के प्रति प्रेम का सूचक है, उस प्रेम का जिसे प्रभु यीशु ने क्रूस पर दर्शाया था। जब परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि पति को अपने पत्नियों से प्रेम करना है (इफिसियों 5:25), तो परमेश्वर इस प्रेम को समझाने के लिए प्रभु यीशु के द्वारा अपनी मण्डली से किए गए विश्वासयोग्य, स्वार्थविहीन प्रेम का उदाहरण देता है। क्योंकि इस प्रेम के अन्तर्गत प्रभु यीशु ने अपने प्राण बलिदान कर दिए, हमें भी एक दूसरे से प्रेम करना है (1 यूहन्ना 4:10-11)। प्रभु हमारे लिए मरा ताकि हमारे पाप हमें परमेश्वर से अनन्त दूरी में रख सकें। प्रभु ने वह कर दिखाया जो उसने अपने शिष्यों से कहा था: "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना 15:13)।

   हम में से अनेक लोग त्यागे जाने, तुच्छ समझ कर तिरिस्कृत होने और धोखा दिए जाने की पीड़ा को जानते हैं, उसे सहा है। लेकिन इस सब के बावजूद, मसीह यीशु में होकर हम एक बलिदानपूर्ण, अनुकम्पा से भरे और चिरस्थाई सच्चे प्रेम का अनुभव कर सकते हैं।

   आज यह मत भूलें कि परमेश्वर आप से प्रेम करता है; और उसने आपके लिए क्रूस पर अपने प्राण बलिदान करके इसे प्रमाणित किया है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के क्रूस से बढ़कर स्पष्टता से परमेश्वर के प्रेम को और कुछ नहीं दिखा सकता।

प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:10-11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26


Saturday, February 13, 2016

चरित्र या ख्याति?


   प्रसिद्ध बास्केटबॉल प्रशिक्षक जौन वुडन (1910-2010) का मानना था कि चरित्र ख्याति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। वे अकसर अपने खिलाड़ियों से कहा करते थे कि, "आपकी ख्याति वह है जैसा दूसरे लोग आपको देखते हैं; परन्तु आपका चरित्र वह है जो आप वास्तव में हैं। केवल आप ही हैं जो अपने चरित्र को जानते हैं। आप दूसरों को धोखा दे सकते हैं, लेकिन अपने आप को धोखा नहीं दे सकते।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रकाशितवाक्य नामक पुस्तक में हम पुनरुथित प्रभु यीशु द्वारा सात मसीही मण्डलियों को उनके बारे में कही गई बातें पाते हैं। सरदीस की मण्डली के लिए प्रभु यीशु ने कहा, "और सरदीस की कलीसिया के दूत को लिख, कि, जिस के पास परमेश्वर की सात आत्माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ" (प्रकाशितवाक्य 3:1)। प्रभु उनकी हकीकत को जानता था, और निःसन्देह उस मण्डली के लोग स्वयं भी अपनी इस हकीकत को जानते थे। प्रभु यीशु ने उन्हें सचेत किया कि वे जागरूक हों और अपने आत्मिक जीवन को सुदृढ़ करें जो समाप्त होने को था (पद 2)। इसके लिए प्रभु ने उन से अनुरोध किया कि वे उस सत्य को स्मरण करें जो उन्हें दिया गया था, उसका पालन करें और पुनः सच्चाई की ओर फिरकर नई दिशा में अग्रसर हों (पद 3)।

   जब प्रभु हमें दिखाता है कि हमारे जीवनों में क्या गलत है, तो साथ ही वह उस गलती को सुधारने का मार्ग भी बताता है। जब भी हम अपने पापों से फिरकर पश्चाताप में उसके पास आते हैं, वह हमें क्षमा करता है और हमें सामर्थ देता है कि हम एक नई शुरुआत कर सकें।

   प्रभु यीशु को जानने और मानने से होने वाला परिवर्तन, एक आडंबरी एवं झूठी आत्मिक ख्याति का एक सच्चे और खरे चरित्र में परिवर्तित होना, कितना उन्मुक्त कर देने वाला होता है, यह अनुभव से ही जाना जा सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


हमारे चरित्र का सही आँकलन वे कार्य हैं जो हम तब करते हैं जब हमें कोई नहीं देख रहा होता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 3:1-6
Revelation 3:1 और सरदीस की कलीसिया के दूत को लिख, कि, जिस के पास परमेश्वर की सात आत्माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ। 
Revelation 3:2 जागृत रह, और उन वस्‍तुओं को जो बाकी रह गई हैं, और जो मिटने को थी, उन्हें दृढ़ कर; क्योंकि मैं ने तेरे किसी काम को अपने परमेश्वर के निकट पूरा नहीं पाया। 
Revelation 3:3 सो चेत कर, कि तू ने किस रीति से शिक्षा प्राप्त की और सुनी थी, और उस में बना रह, और मन फिरा: और यदि तू जागृत न रहेगा, तो मैं चोर की नाईं आ जाऊंगा और तू कदापि न जान सकेगा, कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पडूंगा। 
Revelation 3:4 पर हां, सरदीस में तेरे यहां कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हों ने अपने अपने वस्‍त्र अशुद्ध नहीं किए, वे श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए मेरे साथ घूमेंगे क्योंकि वे इस योग्य हैं। 
Revelation 3:5 जो जय पाए, उसे इसी प्रकार श्वेत वस्‍त्र पहिनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्‍तक में से किसी रीति से न काटूंगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्‍वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा। 
Revelation 3:6 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14
  • मत्ती 26:51-75


Friday, February 12, 2016

कलाकृति


   मूर्तिकारों के लिए एक शब्द प्रयुक्त होता है "वृहतदृष्टि", जिसका तात्पर्य है कि वह कलाकार एक बेडौल से पत्थर में उस पत्थर का वह अन्तिम और पूर्ण सुन्दर तथा आकर्षक रूप देख सकता है जो उसके अपना कार्य कर लेने से निकलकर आएगा।

   गुटज़ोन बोर्गल्म (1867-1941) एक ऐसे मूर्तिकार हैं जिन्होंने अनेक जानी-पहिचानी कलाकृतियों को बनाया है। उनकी कलाकृतियों में सबसे विख्यात और जानी-पहिचानी है अमेरिका के दक्षिणी डकोटा प्रांत में स्थित रश्मोर पहाड़ पर बना माउन्ट रश्मोर राष्ट्रीय स्मारक, जहाँ उन्होंने पहाड़ को तराशकर चार प्रसिद्ध अमेरीकी राष्ट्रपतियों के विशालाकार चेहरे बनाए। जब गटज़ोन बोर्गल्म के घर की देखभाल और संचाल करने वाली कर्मचारी महिला ने पहली बार उनकी इस विशाल और अद्भुत कलाकृति को देखा तो वह भौंचकी रह गई और तेज़ चलती सांस के साथ उसने बोर्गल्म से पूछा, "मिस्टर बोर्गल्म, आपको कैसे पता चला कि इस चट्टान के अन्दर राष्ट्रपति लिंकन हैं?"

   वृहतदृष्टि रखना हमारे सर्वज्ञानी परमेश्वर के लिए भी उपयुक्त शब्द है क्योंकि हम जो कुछ हैं, और जो कुछ हो सकते हैं, हमारे बारे में परमेश्वर सब कुछ जानता है। वह जानता है कि जब वह हम में अपना कार्य पूरा कर चुकेगा तो हमारा स्वरूप कैसा होगा; जब सब कुछ हो चुकने के बाद अन्ततः हम उसके सामने खड़े होंगे तो कैसे होंगे - हमारे प्रभु यीशु की समानता और स्वरूप में, पवित्र और निषकलंक (2 कुरिन्थियों 3:18)। जिस परमेश्वर ने हम में यह कार्य करना आरंभ किया है, वह उसे प्रभु यीशु के आगमन के दिन तक पूरा भी करेगा: "और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा" (फिलिप्पियों 1:6)।

  परमेश्वर का कार्य कभी रुकता नहीं है; उसमें हमें सिद्ध बनाने की ऐसी लालसा है कि उसके द्वारा हमारे सिद्ध किए जाने में कुछ भी या कोई भी अवरोध नहीं बन सकता। जो उसने हम में आरंभ किया है वह उसे पूरा भी करेगा। इस कार्य में हमारा योगदान बस इतना ही है कि हम अपने आप को उसके हाथों में तराशे जाने और हमारी व्यर्थ बातों के छांटे जाने के लिए समर्पित कर दें और उसे अपना कार्य कर लेने दें। फिर जो कलाकृति निकलकर आएगी, हम स्वयं उसे देखकर भौंचके रह जाएंगे। - डेविड रोपर


परमेश्वर हम में कार्य करता है जिससे हमें वह बना सके जो वह हमारे लिए चाहता है।

...तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:28-30
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50


Thursday, February 11, 2016

भय और शंका


   हमारे विवाह के बारह वर्ष बीत चुके थे और हम सन्तान पाने के सुख में बनने और बिगड़ने वाली आशाओं-निराशाओं में बारंबार पड़ने से हताश हो चुके थे। मेरे एक मित्र ने मुझे इस संबंध में "परमेश्वर के विचार" समझाने का प्रयास किया; क्योंकि वह जानता था कि मेरी माँ का क्रोध अति तीव्र होता था जिसके नियंत्रण के प्रयासों में वह काफी संघर्षों से होकर निकलीं थीं, इसलिए उस मित्र ने मुझ से कहा कि हमें सन्तान का सुख शायद इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि परमेश्वर जानता है कि मैं एक अच्छा पिता नहीं हो सकूँगा।

   फिर 1988 के क्रिसमस के समय में हमें ज्ञात हुआ कि मेरी पत्नि हमारे पहले बच्चे से गर्भवती है। लेकिन अब मेरे मित्र द्वारा कही गई बात का भय मुझे सताता था। अगस्त महीने में मेरी बच्ची कैथ्रीन का जन्म हुआ; उसके जन्म के तुरंत पश्चात डॉक्टर और नर्स मेरी पत्नि की देखभाल कर रहे थे, उसे संभाल रहे थे और कैथ्रीन पास ही उसके शरीर को गर्मी प्रदान करने वाली ट्रे में लेटी रो रही थी; मैंने अपना हाथ अपनी बच्ची की ओर उसे सांत्वना देने के लिए बढ़ाया। कैथ्रीन ने अपनी छोटी छोटी ऊँगलियों से मेरी ऊँगली थाम ली, और उस एक क्षण में पवित्र आत्मा ने मेरी सारी शंका दूर कर दी और मैंने जान लिया कि इस नन्हीं सी जान से मैं बहुत प्रेम करूँगा, और वह प्रेम उस पर भली-भांति प्रगट भी करूँगा। जिन बातों को लेकर मैं अभी तक शंका में था, परमेश्वर के द्वारा एक पल में ही उन सभी शंकाओं का निवारण हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेखित सारपात की विध्वा भी शंकाओं से भरी थी। उसका पुत्र एक घातक बीमारी से जाता रहा था, और वह शोक तथा वियोग से वशीभूत होकर चिल्ला उठी: "...हे परमेश्वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहां आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?" (1 राजा 17:18); किंतु परमेश्वर की योजना कुछ और ही थी। एक आश्चर्यकर्म के द्वारा परमेश्वर ने उसकी सारी शंकाओं का निवारण कर दिया।

   हम मसीही विश्वासी एक ऐसे परमेश्वर के लोग हैं जो हमारे सभी संघर्षों से कहीं सामर्थी और महान है; जो हमें क्षमा करने, हमसे प्रेम करने और हमारे अन्दर के टूटेपन को चंगा करने के लिए सदा तत्पर और लालायित रहता है। परमेश्वर ना केवल हमारे प्रत्येक भय और शंका को जानता है, वरन वह उन सभी भय और शंकाओं का निवारण भी जानता है। उसे सदा समर्पित रहें, सदा उसके आज्ञाकारी रहें और वह हमारे लिए हमारी समझ से परे मार्ग निकालता रहेगा। - रैंडी किल्गोर


परमेश्वर का प्रेम हमें जीवन के मिथ्या भय और शंकाओं की धारा के विरुद्ध सुरक्षित लिए चलता है।

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। - 2 कुरिन्थियों 12:9 

बाइबल पाठ: 1 राजा 17:17-24
1 Kings 17:17 इन बातों के बाद उस स्त्री का बेटा जो घर की स्वामिनी थी, रोगी हुआ, और उसका रोग यहां तक बढ़ा कि उसका सांस लेना बन्द हो गया। 
1 Kings 17:18 तब वह एलिय्याह से कहने लगी, हे परमेश्वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहां आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए? 
1 Kings 17:19 उसने उस से कहा अपना बेटा मुझे दे; तब वह उसे उसकी गोद से ले कर उस अटारी पर ले गया जहां वह स्वयं रहता था, और अपनी खाट पर लिटा दिया। 
1 Kings 17:20 तब उसने यहोवा को पुकार कर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा! क्या तू इस विधवा का बेटा मार डाल कर जिसके यहां मैं टिका हूं, इस पर भी विपत्ति ले आया है? 
1 Kings 17:21 तब वह बालक पर तीन बार पसर गया और यहोवा को पुकार कर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा! इस बालक का प्राण इस में फिर डाल दे। 
1 Kings 17:22 एलिय्याह की यह बात यहोवा ने सुन ली, और बालक का प्राण उस में फिर आ गया और वह जी उठा। 
1 Kings 17:23 तब एलिय्याह बालक को अटारी पर से नीचे घर में ले गया, और एलिय्याह ने यह कहकर उसकी माता के हाथ में सौंप दिया, कि देख तेरा बेटा जीवित है। 
1 Kings 17:24 स्त्री ने एलिय्याह से कहा, अब मुझे निश्चय हो गया है कि तू परमेश्वर का जन है, और यहोवा का जो वचन तेरे मुंह से निकलता है, वह सच होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25


Wednesday, February 10, 2016

गीत


   इंगलैण्ड के वेल्स इलाके में पुरुषों के गायन-समूहों का संगीत वहां की संसकृति का अभिन्न अंग है। दूसरे विश्वयुद्ध के पहले वेल्स के एक गायन-समूह की मित्रतापूर्ण किंतु वर्चस्व की स्पर्धा एक जर्मन गायन-समूह के साथ होती रहती थी। परन्तु दुसरे विश्वयुद्ध के दौरान और पश्चात यह स्पर्धा परस्पर बैर में बदल गई। लेकिन उन दोनों समूहों के बीच का यह तनाव उन दोनों के बीच की स्पर्धा में जीती जाने वाली ट्रॉफी पर लिखे वाक्य के द्वारा दूर हो सकी; उस ट्रोफी पर लिखा था: "मेरे साथ वार्तालाप करने से आप मेरे मित्र होते हैं; मेरे साथ गाने से आप मेरे भाई हो जाते हैं।"

   संगीत द्वारा सहायता और चंगाई परमेश्वर द्वारा दिया गया एक वरदान है जिससे बहुतेरों ने कठिन समयों में राहत पाई है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए भजन संहिता खण्ड के भजन हम से इतनी गहराई से बातें करते हैं। इन भजनों में हम वे भाव पाते हैं जो हमारे दिलों से बातें करते हैं, जो हमें आत्मा की गहराईयों से होकर परमेश्वर से वार्तालाप करने में सहायता करते हैं। उदाहरणस्वरूप दाऊद द्वारा लिखे एक भजन को देखिए: "परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है" (भजन 59:16); और अचरज कि बात यह है कि दाऊद ने जब यह भजन लिखा तब उसे मारने के लिए निकले लोगों से वह अपनी जान बचाता, छुपता हुआ फिर रहा था। अपनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दाऊद ने परमेश्वर की दया और सामर्थ को स्मरण रखा और उस पर मनन किया, उसका वर्णन किया जिससे उसका विश्वास और दृढ़ हो सका, उसे परमेश्वर से सहायता तथा सुरक्षा मिलती रही।

   हमारा परमेश्वर हमें आज भी कोई ना कोई ऐसा गीत देगा जो हमें उसकी भलाई और महानता को स्मरण करवाएगी, चाहे हमारी परिस्थिति कैसी भी हो; और उस गीत के गाने से उसपर मनन करने से हम उन परिस्थितियों में भी उभारे जाएंगे, अपने मसीही विश्वास में और दृढ़ हो सकेंगे। - बिल क्राउडर


... इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का मैं भजन करूंगी। - न्यायियों 5:3

यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्चर्यकर्म किए है! उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है! - भजन 98:1

बाइबल पाठ: भजन 59:6-17
Psalms 59:6 वे लोग सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राते हैं, और नगर के चारों ओर घूमते हैं। देख वे डकारते हैं, 
Psalms 59:7 उनके मुंह के भीतर तलवारें हैं, क्योंकि वे कहते हैं, कौन सुनता है? 
Psalms 59:8 परन्तु हे यहोवा, तू उन पर हंसेगा; तू सब अन्य जातियों को ठट्ठों में उड़ाएगा। 
Psalms 59:9 हे मेरे बल, मुझे तेरी ही आस होगी; क्योंकि परमेश्वर मेरा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 59:10 परमेश्वर करूणा करता हुआ मुझ से मिलेगा; परमेश्वर मेरे द्रोहियों के विषय मेरी इच्छा पूरी कर देगा।
Psalms 59:11 उन्हें घात न कर, न हो कि मेरी प्रजा भूल जाए; हे प्रभु, हे हमारी ढाल! अपनी शक्ति से उन्हें तितर बितर कर, उन्हें दबा दे। 
Psalms 59:12 वह अपने मुंह के पाप, और ओठों के वचन, और शाप देने, और झूठ बोलने के कारण, अभिमान में फंसे हुए पकड़े जाएं। 
Psalms 59:13 जलजलाहट में आकर उनका अन्त कर, उनका अन्त कर दे ताकि वे नष्ट हो जाएं तब लोग जानेंगे कि परमेश्वर याकूब पर, वरन पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करता है।
Psalms 59:14 वे सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राएं, और नगर के चारों ओर घूमें। 
Psalms 59:15 वे टुकड़े के लिये मारे मारे फिरें, और तृप्त न होने पर रात भर वहीं ठहरे रहें।
Psalms 59:16 परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है। 
Psalms 59:17 हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46


Tuesday, February 9, 2016

एकता


   समुद्री दुर्घटना से बचकर एक टापू पर अकेले रह रहे एक व्यक्ति को आखिरकर खोज निकाला गया। जब उसे बचाकर लाने वाले उस टापू पर पहुँचे तो उन्होंने वहाँ तीन झोंपड़ियाँ बनी हुई देखीं। जब उन झोंपड़ियों के बारे में उस व्यक्ति से पूछा गया तो उसने एक की ओर संकेत कर के कहा कि "वह मेरा घर है", फिर दूसरी की ओर संकेत कर के कहा कि "वह मेरा चर्च है"; और फिर तीसरी कि ओर संकेत करके कहा, "वह मेरा भूतपूर्व चर्च है!" हम इस कहानी की मूर्खता पर हंस सकते हैं, परन्तु यह कहानी मसीही विश्वासियों में एकता की आवश्यकता को दिखाती है।

   प्रेरित पौलुस के समय में इफिसुस में स्थित मसीही विश्वासियों की मण्डली में कई प्रकार के लोग थे - अमीर और गरीब, यहूदी और गैर-यहूदी, पुरुष और स्त्री, स्वामी और दास। जहाँ भिन्नता होगी वहाँ तनाव और परस्पर टकराव भी होगा। इसलिए पौलुस ने जो पत्री उनको लिखी उसमें पौलुस की एक चिंता उनकी आपसी एकता को लेकर थी। इस संबंध में पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को यह नहीं लिखा कि वे एकता लाने या एकत को संगठित करने के प्रयास करें; वरन पौलुस ने उन्हें लिखा कि, "मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो" (इफिसियों 4:3)। अर्थात, क्योंकि सभी मसीही विश्वासी एक ही देह, एक ही आत्मा, एक ही आशा, एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मे और एक ही पिता परमेश्वर के साथ जुड़े हैं (पद 4-6) इसलिए एकता तो उन्हें दे दी गई है; उन्हें तो बस अपने परस्पर व्यवहार द्वारा उसे संसार के सामने प्रगट रखना है।

   प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के साथ हमें मिलने वाली इस एकता को हम कैसे बनाए रख सकते हैं? इसका उत्तर भी पौलुस ने इसी खण्ड में दिया है: "अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो" (पद 2)। जब भी किसी के विचारों एवं मतों के साथ हमारे विचार तथा मत मेल ना खाएं, तो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाइ में प्रेम और सहनशीलता के साथ, हमें अपने विचार और मत नम्रता से व्यक्त करने हैं, उन्हें प्रेम के साथ अपनी बात समझानी है ना कि उन पर अपनी बात जबरदस्ती थोपनी है; आखिरकर हम सभी मसीही विश्वासी एक ही प्रभु के लिए ही तो कार्य कर रहे हैं। - एलबर्ट ली


मसीह के साथ हुई हमारी एकता से ही मसिहीयों के साथ हमारी एकता होती है।

सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। - फिलिप्पियों 2:1-3

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-6
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30


Monday, February 8, 2016

निवारण


   मैं अपने पोते एलेक्स को वापस उसके माता-पिता के पास छोड़ने जा रहा था। मार्ग में इतनी अधिक गाड़ियां थीं और वे तेज़ रफतार से भी चल रहीं थीं कि मुझे मार्ग का कर देने वाली सही पंक्ति में आना कठिन हो रहा था और ना चाहते हुए भी मैं गलत पंक्ति में फंस गया जिसमें केवल उन गाड़ियों को जाना था जिनके पास पहले से कर चुकाने के लिए भरे हुए पैसों वाले कार्ड हैं। एलेक्स ने मुझसे कहा कि अब मेरी गाड़ी के नंबर की तसवीर खींच कर मुझे चालान भरने के लिए कहा जाएगा। यह जानकर मैं क्षुब्ध हुआ क्योंकि गलत पंक्ति में मैं जान-बूझ कर नहीं वरन मजबूरन आया था, परन्तु फिर भी मुझे गलत पंक्ति में आने का दोषी ठहरकर उस गलती के निवारण के लिए चालान भरना था।

   प्राचीन यहूदियों के लिए भी परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करना भारी होता था, चाहे वह अनजाने में या ना चाहते हुए ही हुआ हो। पुराने नियम में दी गई परमेश्वर की व्यवस्था इस बात को पहचानती थी कि गलतियाँ अनजाने में या ना चहते हुए भी हो सकती हैं, और इस अनचाहे उल्लंघनों के प्रायश्चित के लिए उस व्यवस्था में उचित बलिदान दिए गए थे: "...यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिन को यहोवा ने मना किया है किसी काम को भूल से कर के पापी हो जाए;" (लैव्यवस्था 4:2)।

   पुराने नियम में दिए गए ये बलिदान इस बात की यादगार थे कि पाप के दुष्परिणाम होते हैं, चाहे वे पाप अनजाने में या ना चाहते हुए ही किए गए हों। ये बलिदान यह भी स्मरण करवाते थे कि इन दुष्परिणामों के निवारण के लिए परमेश्वर ही मार्ग देगा, एक निर्दोष हमारे पापों का दोष लिए हुए बलिदान होगा - जो प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के लिए करा; उसका बलिदान सभी के पापों के निवारण के लिए था। परमेश्वर का अनुग्रह हमारे सोचने समझने से कहीं अधिक बढ़कर है, वह हमारी हर आवश्यकता का निवारण पहले से कर के रखता है। - डेनिस फिशर


अनुग्रह का अर्थ है वह आशीष प्राप्त करना हम जिसके योग्य नहीं है। 
दया का अर्थ है हमें वह दण्ड नहीं दिया जाना हम जिसके योग्य हैं।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8 

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 4:1-3; रोमियों 3:20-26
Leviticus 4:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा 
Leviticus 4:2 कि इस्त्राएलियों से यह कह, कि यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिन को यहोवा ने मना किया है किसी काम को भूल से कर के पापी हो जाए; 
Leviticus 4:3 और यदि अभिषिक्त याजक ऐसा पाप करे, जिस से प्रजा दोषी ठहरे, तो अपने पाप के कारण वह एक निर्दोष बछड़ा यहोवा को पापबलि कर के चढ़ाए।

Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51