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Wednesday, May 31, 2017

दोष


   मुझ पर कई बातों का दोष लगाया गया है, और बहुधा यह सही भी था। मेरे पाप, विफलताएं, और अयोग्यताएं, मेरे मित्रों, परिवारजनों, और संभवतः अजनबियों के लिए भी दुःख, चिंता और असुविधा का कारण रहे हैं। लेकिन मुझ पर ऐसी बातों के लिए भी दोषारोपण किया गया है जिनके लिए मैं कदापि दोषी नहीं थी, ऐसी बातें जिन्हें बदलना मेरे वश के बाहर था।

   परन्तु ऐसा भी हुआ है कि मैंने दूसरों पर दोष लगाए हैं। कितनी ही बार अपनी परिस्थितियों के लिए मैंने दूसरों को ज़िम्मेदार ठहराया है, कहा है कि यदि उन्होंने ऐसा या वैसा नहीं किया होता तो मैं आज इस परिस्थिति में नहीं होती। दोष चोट पहुँचाता है। इसलिए चाहे हम दोषी हों अथवा नहीं, हम बहुत सा समय और मानसिक सामर्थ दोष को किसी अन्य पर लादने में खर्च कर देते है।

   प्रभु यीशु मसीह हमें दोष से निपटने का एक बेहतर विकल्प देता है। यद्यपि वह स्वयं निर्दोष था, फिर भी उसने सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लिया (यूहन्ना 1:29)। हम अकसर प्रभु यीशु को बलि के मेमने के रूप में देखते हैं, परन्तु वह संसार के सभी लोगों के सभी पापों और दोषों के लिए प्रायश्चित का अन्तिम मेमना भी था (लैव्यवस्था 16:10)।

   यदि हम अपने पापों को मान लें, और उन पापों को उठा ले जाने के प्रभु यीशु के प्रस्ताव को स्वीकार कर लें, तो उन पापों का दोष हमें फिर कभी न तो उठाना पड़ेगा और न ही उनके लिए कोई दण्ड भुगतना पड़ेगा। साथ ही फिर हम अपने पापों, अपनी गलतियों के लिए किसी अन्य को दोषी ठहराने के प्रयास भी नहीं करेंगे।

   परमेश्वर पिता का धन्यवाद हो कि प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान के कारण आज संसार का प्रत्येक व्यक्ति, प्रभु यीशु पर स्वेच्छा से लाए गए साधारण विश्वास तथा अपने पापों के लिए किए गए पश्चाताप के द्वारा सभी दोषों से मुक्त हो सकता है, उनका दण्ड भोगने से बच सकता है, परमेश्वर से अनन्त जीवन का दान सेंत-मेंत प्राप्त कर सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने पाप तथा दोषों के प्रति ईमानदारी ही 
परमेश्वर से उनकी क्षमा प्राप्त करने का मार्ग है।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 16:5-22
Leviticus 16:5 फिर वह इस्त्राएलियों की मण्डली के पास से पापबलि के लिये दो बकरे और होमबलि के लिये एक मेढ़ा ले। 
Leviticus 16:6 और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा चढ़ाकर अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्चित्त करे। 
Leviticus 16:7 और उन दोनों बकरों को ले कर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने खड़ा करे; 
Leviticus 16:8 और हारून दोनों बकरों पर चिट्ठियां डाले, एक चिट्ठी यहोवा के लिये और दूसरी अजाजेल के लिये हो। 
Leviticus 16:9 और जिस बकरे पर यहोवा के नाम की चिट्ठी निकले उसको हारून पापबलि के लिये चढ़ाए; 
Leviticus 16:10 परन्तु जिस बकरे पर अजाजेल के लिये चिट्ठी निकले वह यहोवा के साम्हने जीवता खड़ा किया जाए कि उस से प्रायश्चित्त किया जाए, और वह अजाजेल के लिये जंगल में छोड़ा जाए। 
Leviticus 16:11 और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा समीप ले आए, और उसको बलिदान कर के अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्चित्त करे। 
Leviticus 16:12 और जो वेदी यहोवा के सम्मुख है उस पर के जलते हुए कोयलों से भरे हुए धूपदान को ले कर, और अपनी दोनों मुट्ठियों को फूटे हुए सुगन्धित धूप से भरकर, बीच वाले पर्दे के भीतर ले आकर 
Leviticus 16:13 उस धूप को यहोवा के सम्मुख आग में डाले, जिस से धूप का धुआं साक्षीपत्र के ऊपर के प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर छा जाए, नहीं तो वह मर जाएगा; 
Leviticus 16:14 तब वह बछड़े के लोहू में से कुछ ले कर पूरब की ओर प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर अपनी उंगली से छिड़के, और फिर उस लोहू में से कुछ उंगली के द्वारा उस ढकने के साम्हने भी सात बार छिड़क दे। 
Leviticus 16:15 फिर वह उस पापबलि के बकरे को जो साधारण जनता के लिये होगा बलिदान कर के उसके लोहू को बीच वाले पर्दे के भीतर ले आए, और जिस प्रकार बछड़े के लोहू से उसने किया था ठीक वैसा ही वह बकरे के लोहू से भी करे, अर्थात उसको प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर और उसके साम्हने छिड़के। 
Leviticus 16:16 और वह इस्त्राएलियों की भांति भांति की अशुद्धता, और अपराधों, और उनके सब पापों के कारण पवित्रस्थान के लिये प्रायश्चित्त करे; और मिलापवाला तम्बू जो उनके संग उनकी भांति भांति की अशुद्धता के बीच रहता है उसके लिये भी वह वैसा ही करे। 
Leviticus 16:17 और जब हारून प्रायश्चित्त करने के लिये पवित्रस्थान में प्रवेश करे, तब से जब तक वह अपने और अपने घराने और इस्त्राएल की सारी मण्डली के लिये प्रायश्चित्त कर के बाहर न निकले तब तक कोई मनुष्य मिलापवाले तम्बू में न रहे। 
Leviticus 16:18 फिर वह निकलकर उस वेदी के पास जो यहोवा के साम्हने है जाए और उसके लिये प्रायश्चित्त करे, अर्थात बछड़े के लोहू और बकरे के लोहू दोनों में से कुछ ले कर उस वेदी के चारों कोनों के सींगो पर लगाए। 
Leviticus 16:19 और उस लोहू में से कुछ अपनी उंगली के द्वारा सात बार उस पर छिड़ककर उसे इस्त्राएलियों की भांति भांति की अशुद्धता छुड़ाकर शुध्द और पवित्र करे। 
Leviticus 16:20 और जब वह पवित्रस्थान और मिलापवाले तम्बू और वेदी के लिये प्रायश्चित्त कर चुके, तब जीवित बकरे को आगे ले आए; 
Leviticus 16:21 और हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे पर रखकर इस्त्राएलियों के सब अधर्म के कामों, और उनके सब अपराधों, निदान उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उन को बकरे के सिर पर धरकर उसको किसी मनुष्य के हाथ जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेज के छुड़वा दे। 
Leviticus 16:22 और वह बकरा उनके सब अधर्म के कामों को अपने ऊपर लादे हुए किसी निराले देश में उठा ले जाएगा; इसलिये वह मनुष्य उस बकरे को जंगल में छोड़े दे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26


Tuesday, May 30, 2017

आँसू


   मैंने अपनी एक पुरानी सहेली को, उसकी माँ के देहान्त पर फोन किया। उसकी माँ और मेरी माँ भी बहुत अच्छी सहेलियाँ रहे थे, और अब दोनों ही इस संसार से जा चुके थे। परस्पर बातचीत करते हुए, हमारा वार्तालाप भावनाओं के चक्र में चला गया - देहान्त के कारण दुःख के आँसू और उनके प्रेम, देखभाल करने वाले स्वभाव और ज़िन्दादिली के उदाहरणों को स्मरण करके उनके साथ बिताए हुए पलों के लिए खुशी के आँसू।

   हम में से अनेकों ने इन मिश्रित भावनाओं का अनुभव किया होगा - एक पल रोना और दूसरे पल हँसना। यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की गई बड़ी अद्भुत बात है कि हम दुःख और खुशी दोनों ही में आँसुओं के द्वारा अपने मन की भावना व्यक्त कर सकते हैं, अपना मन हलका कर सकते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमें परमेश्वर ने अपने स्वरूप में सृजा है (उत्पत्ति 1:26)। क्योंकि सारे संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर के द्वारा, उस ही के स्वरूप में सृजे गए हैं, और संसार भर में, सभी संसकृतियों में विनोद व्यवहार का एक अभिन्न अंग है, इसलिए मेरा विचार है कि प्रभु यीशु का भी विनोदप्रीय व्यवहार रहा होगा। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि वह दुःख की पीड़ा से भी भली-भांति अवगत था। जब प्रभु के मित्र लाज़र का देहान्त हुआ और प्रभु ने लाज़र की बहन मरियम को रोते हुए देखा, तो "जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? यीशु के आंसू बहने लगे" (यूहन्ना 11:33, 35)।

   अपनी भावनाओं को आँसुओं द्वारा व्यक्त करना परमेश्वर का एक दान है, और बाइबल हमें आश्वस्त करती है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक आँसू का हिसाब रखता है: "तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?" (भजन 56:8)। लेकिन साथ ही बाइबल हमें यह आश्वासन भी देती है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक ऐसा समय भी आने वाला है, जब हर दुःख, हर पीड़ा का अन्त हो जाएगा, और आँसुओं का भी; परमेश्वर हमारे साथ निवास करेगा और स्वयं हमारे सभी आँसू पोंछ डालेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता, जिसने हमारे सभी पापों को धो डाला है, 
वही हमारे सभी आँसुओं को भी पोंछ देगा।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


Monday, May 29, 2017

मार्ग


   जब मेरे बेटे ने चीनी भाषा सीखनी आरंभ की, तो उसके द्वारा लाए गए दस्तावेज़ों को देखकर मैं चकित हो गई। मूल रूप से अंग्रेज़ी बोलने वाली होने के कारण, मेरे लिए यह समझना कठिन था कि उन लिखित अक्षरों का बोली गई भाषा के साथ तालमेल कैसे बैठाया जा सकता है? वह भाषा मुझे बेहद जटिल लगी, लगभग समझ से बिलकुल परे।

   कभी कभी ऐसे ही चकरा देने वाले भावों का सामना मुझे तब करना पड़ता है जब मैं परमेश्वर कि कार्यविधि पर ध्यान करती हूँ। मैं जानती हूँ कि परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा है, "...मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है" (यशायाह 55:8); लेकिन फिर भी, क्योंकि मैं उसके वचन का अध्ययन नियमित रीति से करती हूँ और मैं जानती हूँ कि परमेश्वर का पवित्राअत्मा मेरे हृदय में निवास करता है, इसलिए मेरे अन्दर का एक भाग यह चाहता है कि मैं समझ सकूँ कि परमेश्वर जो कर रहा है, वह वैसा क्यों कर रहा है?

   जब मुझे ऐसा लगता है कि परमेश्वर की कार्यविधि को जानना मेरा हक है, तो साथ ही मैं नम्र होने के लिए अपने आप को पुनःसमर्पित भी करती हूँ। मुझे स्मरण आता है कि बाइबल के एक चरित्र, अय्युब, को अपने दुःखों के लिए, ऐसे ही प्रश्नों का परमेश्वर से अपेक्षित उत्तर नहीं मिला था (अय्युब 1:5, 8)। वह अपनी परिस्थितियों को समझने का प्रयत्न करता रहा, और परमेश्वर ने उस से प्रश्न किया, "क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? जो ईश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे" (अय्युब 40:2)। परमेश्वर के प्रश्न को सुनकर अय्युब ने पश्चाताप के साथ उत्तर दिया, "देख, मैं तो तुच्छ हूँ, मैं तुझे क्या उत्तर दूं? मैं अपनी अंगुली दांत तले दबाता हूँ" (अय्युब 40:4)। परमेश्वर की महानता के सामने अय्युब निरुत्तर हो गया।

   यद्यपि परमेश्वर के मार्ग रहस्यमय और अथाह प्रतीत होते हैं, हम इस बात से निश्चिंत हो सकते हैं कि चाहे वे हमारी समझ से परे तो हैं, परन्तु उनके द्वारा परमेश्वर हमारी भलाई ही के लिए कार्य कर रहा है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


क्योंकि परमेश्वर का हाथ हर बात, हर स्थान, हर परिस्थिति में है; 
इसलिए हम निश्चिंत होकर सब कुछ उसके हाथ में छोड़ सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: अय्युब 40:1-14
Job 40:1 फिर यहोवा ने अय्यूब से यह भी कहा: 
Job 40:2 क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? जो ईश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे। 
Job 40:3 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया: 
Job 40:4 देख, मैं तो तुच्छ हूँ, मैं तुझे क्या उत्तर दूं? मैं अपनी अंगुली दांत तले दबाता हूँ। 
Job 40:5 एक बार तो मैं कह चुका, परन्तु और कुछ न कहूंगा: हां दो बार भी मैं कह चुका, परन्तु अब कुछ और आगे न बढ़ूंगा। 
Job 40:6 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यह उत्तर दिया: 
Job 40:7 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे बता। 
Job 40:8 क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निर्दोष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा? 
Job 40:9 क्या तेरा बाहुबल ईश्वर के तुल्य है? क्या तू उसके समान शब्द से गरज सकता है? 
Job 40:10 अब अपने को महिमा और प्रताप से संवार और ऐश्वर्य्य और तेज के वस्त्र पहिन ले। 
Job 40:11 अपने अति क्रोध की बाढ़ को बहा दे, और एक एक घमण्डी को देखते ही उसे नीचा कर। 
Job 40:12 हर एक घमण्डी को देख कर झुका दे, और दुष्ट लोगों को जहां खड़े हों वहां से गिरा दे। 
Job 40:13 उन को एक संग मिट्टी में मिला दे, और उस गुप्त स्थान में उनके मुंह बान्ध दे। 
Job 40:14 तब मैं भी तेरे विषय में मान लूंगा, कि तेरा ही दहिना हाथ तेरा उद्धार कर सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29


Sunday, May 28, 2017

पहेली


   उस पहेली ने मुझे चकरा दिया; किसी ने पूछा, ऐसा क्या है जो परमेश्वर से महान और शैतान से भी अधिक दुष्ट है? वह गरीबों के पास होता है, अमीरों को उसकी आवश्यकता है, और यदि आप उसका सेवन करोगे तो मर जाओगे? क्योंकि मेरा मस्तिष्क प्रगट से भटक गया था, इसलिए मैं उत्तर देने से चूक गया। उस पहेली का उत्तर था "कुछ नहीं"।

   यह पहेली मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई एक अन्य पहेली का स्मरण करवाती है, जिसे, जब वह पूछी गई थी, बूझना और भी अधिक कठिन रहा होगा। प्राचीन काल के एक बुध्दिमान व्यक्ति अगूर ने पूछा था, "कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता!" (नीतिवचन 30:4)।

   आज हम इन प्रश्नों के उत्तर जानते तो हैं; परन्तु कभी कभी जब हम जीवन के प्रश्नों, चिंताओं और आवश्यकताओं से घिरे हुए होते हैं तो प्रगट उत्तर को नज़रन्दाज़ कर देते हैं। जीवन की परेशान करने वाली बातें, जीवन के स्त्रोत, और हमारे सृजनहार, पालनहार तथा तारणहार पर से हमारी नज़रें भटका सकती हैं। इसलिए हमें एक अन्य अति महत्वपूर्ण पहेली को सदा ध्यान में रखना चाहिए: वह कौन हो जो परमेश्वर के साथ एक है, शैतान से कहीं अधिक सामर्थी है, उसकी आवश्यकता संसार के प्रत्येक व्यक्ति को है, धनी और निर्धन सभी उसे जब भी वे चाहे सेंत-मेंत प्राप्त कर सकते हैं, और यदि उसकी मेज़ से खाएंगे-पीएंगे तो कभी नाश नहीं होंगे? उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। - मार्ट डीहॉन


जब हम अपनी आँखें प्रभु परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं
 तो हमें विचलित करने वाली हमारी परिस्थितियाँ 
हमारा ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पाती हैं।

जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। - विलापगीत 3:25-26

बाइबल पाठ: नीतिवचन 30:1-9
Proverbs 30:1 याके के पुत्र आगूर के प्रभावशाली वचन। उस पुरूष ने ईतीएल और उक्काल से यह कहा, 
Proverbs 30:2 निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। 
Proverbs 30:3 न मैं ने बुध्दि प्राप्त की है, और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है। 
Proverbs 30:4 कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता! 
Proverbs 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है। 
Proverbs 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Proverbs 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़: 
Proverbs 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। 
Proverbs 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42


Saturday, May 27, 2017

छाप


   जुलाई 1860 में विश्व का सबसे पहला नर्सिंग विद्यालय लंडन के सेंट थॉमस हॉस्पिटल में खोला गया। आज वह विद्यालय किंग्स कॉलेज का एक भाग है और वहाँ नर्सिंग पढ़ने आई छात्राओं को "नाईटिंगेल्स" कहा जाता है। नर्सिंग ही के समान, उस विद्यालय को भी फ्लोरेंस नाईटिंगेल्स ने, जिसने क्रीमियाई युध्द के दौरान नर्सिंग पध्द्ति में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया था, स्थापित किया था। जब भावी नर्सें अपना प्रशिक्षण पूरा कर लेती हैं तो वे सेवा की शपथ लेती हैं जिसे "नाईटिंगेल शपथ" कहा जाता है। यह सब नर्सिंग पर फ्लोरेंस नाईटिंगेल द्वारा छोड़ी गई छाप को दिखाता है।

   फ्लोरेंस नाईटिंगेल के समान ही अनेकों लोगों ने हमारे संसार में प्रभावी छाप छोड़ी है। परन्तु जितनी प्रभावी छाप प्रभु यीशु ने छोड़ी है, उतनी किसी ने कभी भी, कहीं भी नहीं छोड़ी है। प्रभु यीशु के जन्म, जीवन, क्रूस पर दिया गया बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान की गाथा पिछले 2000 वर्षों से सारे संसार में लोगों के जीवनों को परिवर्तित करती आ रही है।

   सारे संसार में प्रभु यीशु के नाम से उनके अनुयायी जाने जाते रहे हैं, आरंभिक मसीही विश्वासियों की मण्डलियों में भी: "और जब उन से मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए" (प्रेरितों 11:26)।

   जो प्रभु यीशु मसीह के नाम को उपनाते हैं, फिर वे उसके नाम से ही पहचाने जाते हैं क्योंकि उनके जीवन उसके प्रेम और अनुग्रह के द्वारा बदल दिए जाते हैं। हम मसीही विश्वासी, यीशु मसीह के नाम को अपनाने के द्वारा संसार के समक्ष यह घोषणा करते हैं कि प्रभु यीशु ने हमारे जीवनों में अनन्तकाल का परिवर्तन किया है, हम पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है; और अब हमारी यह लालसा है कि यही छाप औरों के जीवन में भी दिखाई दे। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के अनुयायी - मसीही - उसके नाम की छाप द्वारा जाने जाते हैं।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: प्रेरितों 11:19-26
Acts 11:19 सो जो लोग उस क्‍लेश के मारे जो स्‍तिफनुस के कारण पड़ा था, तित्तर बित्तर हो गए थे, वे फिरते फिरते फीनीके और कुप्रुस और अन्‍ताकिया में पहुंचे; परन्तु यहूदियों को छोड़ किसी और को वचन न सुनाते थे। 
Acts 11:20 परन्तु उन में से कितने कुप्रुसी और कुरेनी थे, जो अन्‍ताकिया में आकर युनानियों को भी प्रभु यीशु का सुसमचार की बातें सुनाने लगे। 
Acts 11:21 और प्रभु का हाथ उन पर था, और बहुत लोग विश्वास कर के प्रभु की ओर फिरे। 
Acts 11:22 तब उन की चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के सुनने में आई, और उन्होंने बरनबास को अन्‍ताकिया भेजा। 
Acts 11:23 वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो। 
Acts 11:24 क्योंकि वह एक भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था: और और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले। 
Acts 11:25 तब वह शाऊल को ढूंढने के लिये तरसुस को चला गया। 
Acts 11:26 और जब उन से मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 10:1-23


Friday, May 26, 2017

तूफान


   जब चक्रवादी तूफान कैट्रीना मिसीसिपी प्रांत के समुद्र तट की ओर बढ़ रहा था, तो एक सेवानिवृत हुए पास्टर और उसकी पत्नि से उनकी पुत्री ने बहुत आग्रह किया कि वे अटलांटा आ जाएं जहाँ वह उनकी देखभाल कर सकती थी। परन्तु क्योंकि बैंक बन्द हो गए थे इसलिए वह दंपति अटलांटा की यात्रा के लिए पर्याप्त पैसे का इन्तज़ाम नहीं कर सका और उन्हें अपना घर छोड़ कर एक आश्रय स्थल में जाना पड़ा। तूफान के गुज़र जाने के पश्चात, वे अपने घर गए जिससे कि अपने सामान को संभाल सकें, जहाँ पानी में तैर रही केवल कुछ पारिवारिक फोटो ही उन्हें मिलीं। जब वह पास्टर फोटो फ्रेम में से सुखाने के लिए अपने पिता की फोटो निकाल रहे थे तो उस फ्रेम में से $366 बाहर निकल कर गिरे, जो उन दोनों के लिए अटलांटा जाने का हवाई टिकिट खरिदने के लिए पर्याप्त रकम थी। यह उनके लिए पाठ था कि अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वे प्रभु यीशु पर विश्वास रख सकते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 4:35-41 में दी गई घटना प्रभु यीशु के चेलों के लिए प्रभु में विश्वास बनाए रखने का पाठ था। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से गलील की झील के उस पार जाने के लिए कहा और नाव में सो गया। झील पार करते हुए अनायास ही एक तेज़ तूफान ने उन्हें घेर लिया और उफनती हुई लहरों तथा तेज़ हवा को देखकर चेले घबरा गए। उन्होंने प्रभु को सोते से उठाया और कहा, "हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?" (पद 38); तब प्रभु यीशु ने "उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थ