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रविवार, 23 जून 2019

एकता



      मेरी पुत्री के स्कूल बैंड की संगीत गोष्ठी में मैं उन 11 और 12 वर्षीय बच्चों द्वारा मिलकर बजाए गए बैंड के प्रदर्शन से बहुत प्रभावित हुआ। यदि वे बच्चे अकेले-अकेले उन्हीं संगीत धुनों को बजाते, तो उनके बजाने में वह उत्कृष्टता नहीं आने पाती जो उनके साथ मिलकर एकता में बजाने से आने पाई। वे लोग अलग-अलग वाद्य यंत्र बजा रहे थे, परन्तु उनकी एकता का सामूहिक प्रभाव बहुत मधुर संगीत था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखा, “वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे” (रोमियों 12:5-6)। पौलुस ने जिन वरदानों का उल्लेख किया उनमें भविष्यवाणी, सेवा, सिखाना, उपदेश देना, दान देना, अगुवाई करना, और दया सम्मिलित हैं (पद 7-8)। प्रत्येक वरदान को सभी के लाभ के लिए बहुतायत से प्रयोग करना है (1 कुरिन्थियों 12:7)।

      ‘साथ कार्यकारी’ होने की एक परिभाषा है, “बनावट अथवा योजना में सहमत होना; साथ मिलकर कार्य करना; ताल-मेल या सामंजस्य में रहना।” यही परमेश्वर की योजना है प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास के द्वारा उसके बच्चों के लिए, कि “भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो” (रोमियों 12:10)। उद्देश्य परस्पर प्रतियोगिता नहीं, सहभागिता है।

      एक रीति से हम मसीही विश्वासी, सँसार के सम्मुख, “मंच” पर हैं, और सँसार के लोग हमें देख-सुन रहे हैं, हमारा आँकलन कर रहे हैं, हमारे व्यवहार से हमारे प्रभु परमेश्वर के प्रति निष्कर्ष निकाल रहे हैं। परमेश्वर की इस ‘संगीत मण्डली’ में कोई एकल गायक या वादक नहीं है; सभी वाद्यों और गायकों का साथ होकर बजाना आवश्यक है। संगीत तब ही उत्कृष्ट होता है जब हम औरों के साथ एकता में होकर अपना-अपना योगदान करते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर के वाद्य-वृन्द में कोई एकल प्रदर्शनकर्ता नहीं है।

इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो। - 1 कुरिन्थियों 12:27

बाइबल पाठ: रोमियों 12:3-8
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10
  • प्रेरितों 7:1-21



शनिवार, 10 नवंबर 2018

उद्देश्य



      जेकब डेविस एक दर्जी थे, जो एक समस्या का सामना कर रहे थे। वह अमेरिका के पश्चिमी क्षेत्र में 1800 के वर्षों का समय था, ऐसा समय जब सोने के लिए खदानों में काम करने के लिए बहुत लोग जुटे हुए थे। खानों में काम करते-करते उन खदान कर्मियों की पैंटे बहुत शीघ्र घिस कर फट जाया करती थीं; यही डेविस की समस्या थी। डेविस को एक उपाय सूझा; वे एक स्थानीय कंपनी में, जिसके मालिक लेवे स्ट्रॉस थे, गए और उनसे तम्बू बनाने वाले कपड़े को खरीद लाए, और उससे पैंट बनाना आरंभ कर दिया। उस मज़बूत कपड़े से बनी पैंट बहुत टिकाउ रहीं और इस प्रकार नीली जींस की पैंट का आरंभ हुआ। आज डेनिम कपड़े से बनी जींस, लेवी मार्का सहित, सँसार के सबसे लोकप्रिय वस्त्रों में से हैं, क्योंकि तम्बू बनाने के कपड़े को एक नया उद्देश्य देकर प्रयोग किया गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि शमौन और उसके मित्र गलील की झील में मछली पकड़ने वाले मछुआरे थे। प्रभु यीशु उनके पास आए और उन्हें अपने साथ चलने को बुलाया जिससे वे उन्हें मनुष्यों के मछुए बनाएं: “और यीशु ने उन से कहा; मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्यों के मछुवे बनाऊंगा” (मरकुस 1:17)। प्रभु यीशु ने इन्हें इस नए उद्देश्य के साथ प्रशिक्षित करना आरंभ किया जिससे कि उनके स्वर्गारोहण के पश्चात फिर ये ही लोग परमेश्वर के प्रेम और प्रभु यीशु के बलिदान तथा पुनरुत्थान के द्वारा सँसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध करवाए गए उद्धार के सुसमाचार को सँसार के सभी लोगों तक लेकर जा सकें।

      आज हम मसीह यीशु के प्रेम और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार में उन्हीं के उदाहरण का अनुसरण करते हैं। हम मसीही विश्वासियों के जीवनों से आज इस सुसमाचार का प्रचार भी होना है और प्रदर्शन भी, जिससे लोग इस जीवन तथा उद्देश्य को अनन्त काल के लिए बदल देने वाले परमेश्वर के प्रेम को जान सकें और समझ सकें, उसकी सामर्थ्य को प्रत्यक्ष देख सकें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु में मिले नए जीवन के द्वारा हमें एक नया उद्देश्य भी प्राप्त हुआ है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: मरकुस 1:16-22
Mark 1:16 गलील की झील के किनारे किनारे जाते हुए, उसने शमौन और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछुवे थे।
Mark 1:17 और यीशु ने उन से कहा; मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्यों के मछुवे बनाऊंगा।
Mark 1:18 वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mark 1:19 और कुछ आगे बढ़कर, उसने जब्‍दी के पुत्र याकूब, और उसके भाई यहून्ना को, नाव पर जालों को सुधारते देखा।
Mark 1:20 उसने तुरन्त उन्हें बुलाया; और वे अपने पिता जब्‍दी को मजदूरों के साथ नाव पर छोड़कर, उसके पीछे चले गए।
Mark 1:21 और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्त सब्त के दिन सभा के घर में जा कर उपदेश करने लगा।
Mark 1:22 और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्योंकि वह उन्हें शास्‍त्रियों के समान नहीं, परन्तु अधिकारी के समान उपदेश देता था।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7



शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

अवसर


   मैंने आज कुछ बहुत दुःखद शब्द सुने। दो मसीही विश्वासी एक ऐसे विषय पर चर्चा कर रहे थे जिस पर वे भिन्न विचार रखते थे। उनमें जो वरिष्ठ था, वह आत्मसन्तुष्ट लग रहा था और परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं का, दूसरे के जीवन में उसे दिखाई देने वाली कमियों पर प्रहार करने और उनकी छंटाई करने के लिए, एक हथियार के समान प्रयोग कर रहा था। वह दूसरा और दिखने में कनिष्ठ व्यक्ति उसके उपदेश से ऊबा हुआ और हतोत्साहित दिखाई दे रहा था। चर्चा के अन्त की ओर आने पर वरिष्ठ व्यक्ति ने दूसरे की प्रत्यक्ष अरुचि पर टिप्पणी करते हुए कहना आरंभ किया, "तुम पहले कितने इच्छुक हुआ करते थे" और फिर अचानक ही थम गया, और बोला "समझ में नहीं आता कि तुम चाहते क्या हो।"

   इस पर उस दूसरे और कनिष्ठ व्यक्ति ने कहा, "आप ने मेरे प्रति प्रेम दिखाने के अवसर को गवाँ दिया है। जितने समय से आप मुझे जानते हैं, ऐसा लगता है कि जिस एक बात की आप को चिंता रहती है, वह है मुझ में गलतियाँ निकालना। मुझे क्या चाहिए? मैं प्रभु यीशु को देखना चाहता हूँ - आप में और आपके द्वारा।"

   मैंने सोचा, यदि यह बात मुझ से कही गई होती तो मैं टूट कर बिखर गया होता। उस पल में मैंने समझ लिया कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा मुझ से कह रहा है कि मेरे जीवन में भी ऐसे अवसर आए हैं जब मैंने प्रेम प्रदर्शित करने के अवसर गवाँ दिए हैं। और मैं यह भी जानता हूँ कि कई लोग मेरे जीवन में भी प्रभु यीशु को नहीं देख सके हैं।

   प्रेरित पौलुस कहता है कि हम जो कुछ भी करते हैं, उसका आधारभूत कारण प्रेम ही होना चाहिए (1 कुरिन्थियों 13:1-4)। हम अपने जीवनों में ध्यान रखें कि मसीही व्यवहार एवं चरित्र को दिखाने का जब भी अगला अवसर आए तो हम उसे गवाँ न दें। - रैंडी किलगोर


प्रेम प्रदर्शन करना उपदेश देने से सदैव ही अधिक प्रभावी होता है।

हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - 1 यूहन्ना 3:18

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 12-14
  • 2 तिमुथियुस 1


शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

प्रमाण


   महारानी एलिज़बेथ द्वितीय ब्रिटिश सामराज्य पर 60 वर्ष से भी अधिक समय से राज्य कर रही हैं। उनके शासन का यह समय शालीनता और उच्च कोटि के राजकीय व्यवहार का समय रहा है। उन्होंने अपने जीवन को अपने लोगों की अच्छी सेवा करते रहने के लिए समर्पित किया है, और परिणामस्वरूप उनकी प्रजा उन से बहुत प्रेम करती है, उनका बहुत आदर करती है। इसलिए आप उनके राजमहल, बकिंघम पैलेस के ऊपर फैहराने वाले झण्डे के महत्व को समझ सकते हैं। जब वह झण्डा फहरा रहा होता है तो यह संकेत है कि वे लंदन के मध्य में स्थित अपने महल में हैं; महारानी अपने लोगों के साथ मौजूद हैं।

   जब मैं इसके बारे में सोच रहा था, तो मुझे ध्यान आया कि मसीह यीशु भी हम मसीही विश्वासियों के हृदयों में निवास करता है, और उसका वायदा है कि वह हमें छोड़कर कभी नहीं जाएगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा (इब्रानियों 13:5)। यह बात हम सब के लिए व्यक्तिगत रीति से महत्वपूर्ण और अद्भुत तो है, परन्तु क्या हमारे आस-पास के लोग हमारे चाल-चलन और व्यवहार से कभी यह जानने पाते हैं कि मसीह यीशु हमारे साथ, हमारे अन्दर निवास करता है? यदि वह हमारे अन्दर है तो फिर उसकी यह उपस्थिति हमारे जीवन द्वारा बाहर भी प्रकट होनी चाहिए।

   इसके लिए जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा है, हमें परमेश्वर का अनुकरण करने वाला, और जैसे मसीह यीशु ने हम से प्रेम किया है वैसे ही हमें भी औरों के साथ प्रेम करने वाला होना चाहिए (इफिसियों 5:1-2)। जब हम ऐसा करेंगे तो हम उन आत्मा के फलों को भी प्रकट करेंगे जो परमेश्वर पवित्र आत्मा की हमारे अन्दर उपस्थिति से हम में उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23)। इसलिए आईए हम प्रभु परमेश्वर की हमारे अन्दर रहने वाली उपस्थिति के झण्डे - उसके अनुग्रह, धार्मिकता और प्रेम के प्रदर्शन, को बुलन्द करें जिससे औरों के सामने हमारे अन्दर उसकी उपस्थिति का प्रमाण स्पष्ट प्रकट हो। - जो स्टोवैल


मसीह यीशु की उपस्थिति के झण्डे को अपने जीवनों में फहराएं,
 ताकि लोग जान सकें कि महाराजा अपने सिंहासन पर विराजमान है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:1-13
Ephesians 5:1 इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। 
Ephesians 5:2 और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। 
Ephesians 5:3 और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। 
Ephesians 5:4 और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाएं। 
Ephesians 5:5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि किसी व्यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्य की, जो मूरत पूजने वाले के बराबर है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं। 
Ephesians 5:6 कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्वर का क्रोध आज्ञा ना मानने वालों पर भड़कता है। 
Ephesians 5:7 इसलिये तुम उन के सहभागी न हो। 
Ephesians 5:8 क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। 
Ephesians 5:9 (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)। 
Ephesians 5:10 और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है 
Ephesians 5:11 और अन्धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो। 
Ephesians 5:12 क्योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है। 
Ephesians 5:13 पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29
  • फिलिप्पियों 3


शनिवार, 30 जुलाई 2016

पहचान चिन्ह


   आयरलैण्ड के पश्चिमी तट के निकट एरन द्वीप-समूह है जो अपने खूबसूरत ऊनी स्वेटरों के लिए प्रसिद्ध है। उन स्वेटरों को बनाते समय भेड़ के ऊन के द्वारा ही नमूने स्वेटरों में बुन दिए जाते हैं। इन में से कई नमूने वहाँ की संस्कृति और पारंपरिक बातों पर आधारित होते हैं, लेकिन कुछ अन्य नमूने विशिष्ट एवं व्यक्तिगत होते हैं। उन द्वीपों में बसने वाले प्रत्येक परिवार के अपने ही विशिष्ट पहचान चिन्ह (ट्रेडमार्क) होते हैं, जो परस्पर इतने भिन्न होते हैं कि कहा जाता है कि वहाँ यदि कोई मछुआरा डूब कर मर भी जाए तो उसके पहने हुए स्वेटर से उसके परिवार का पता चल सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखी गई उसकी प्रथम पत्री में भी परमेश्वर के घराने के लोगों, अर्थात मसीही विश्वासियों के कुछ पहचान चिन्ह दिए गए हैं। 1 यूहन्ना 3:1 में प्रेरित यूहन्ना इस बात को सुनिश्चित करता है कि हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के घराने के लोग हैं: "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना"; फिर वह परमेश्वर की सन्तान कहलाए जाने वाले लोगों के पहचान चिन्ह बताता है, जिन में से एक है, "हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है" (1 यूहन्ना 4:7)।

   क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है, इसलिए परमेश्वर के हृदय को प्रतिबिंबित करने का मुख्य तरीका है उस प्रेम को प्रदर्शित करना जो परमेश्वर का प्रमुख गुण है। क्योंकि यह प्रेम हम मसीही विश्वासियों के स्वर्गीय परिवार का पहचान चिन्ह है, इसलिए होने दें कि आज आप इस पहचान चिन्ह को अपने जीवन से प्रदर्शित करें और दूसरों तक इसे पहुँचाने का माध्यम बनें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के अनुयायियों में प्रेम ही पहचान चिन्ह के रूप में संसार को दिखाई देना चाहिए।

मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो। - यूहन्ना 13:34-35

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-16
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53
  • रोमियों 2


मंगलवार, 29 मार्च 2016

बेहतर


   मेरे पसन्दीदा कार्टून श्रंखला Peanuts की एक पात्र है लूसी जो अपने आप को लेकर सदा ही अति आश्वस्त रहती है; एक कार्टून में लूसी को कहते दिखाया गया है, "जब मैं संसार में विद्यमान हूँ तो फिर संसार का बदतर होते जाना कैसे संभव हो सकता है? मेरे जन्म के बाद से ही संसार में होता जा रहा सुधार स्पष्ट दिखाई दे रहा है!"

   निशचय ही लूसी की बात असत्य तथा अतिश्योक्ति है, लेकिन जो उसने कहा वह काफी रुचिकर भी है। कैसा रहे यदि हम मसीही विश्वासी, जिस भी स्थान पर परमेश्वर ने हमें रखा है वहाँ अपने जीवन और व्यवहार से प्रभु यीशु के प्रेम को व्यावाहरिक रूप में दिखाएं? ऐसा करने से अवश्य ही हम अपने आस-पास के स्थान और समाज को बेहतर करने पाएंगे।

    जब प्रेरित पतरस ने अत्याचार सह रहे मसीही विश्वासियों को पत्री लिखी तो उन्हें प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के कारण परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए विशिष्ट दर्जे का स्मरण दिलाया, तथा उन से कहा कि वे अपने भले चाल-चलन के द्वारा उन्हें सताने वाले उन अविश्वासियों के सामने अपने परमेश्वर की महिमा करें (1 पतरस 2:9-12)। दूसरे शब्दों में, हम मसीही विश्वासी अपने कार्यों से संसार को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। उस प्रभाव और परिवर्तन के बारे में ज़रा विचार कीजिए जो मसीह यीशु के समान प्रेम, दया, क्षमा, न्याय और शांति को जीवन का अभिन्न अंग और व्यावाहरिक जीवन में प्रदर्शन करने से हो सकता है। मेरा सदा ही यह मानना रहा है कि यदि हम पतरस द्वारा लिखी गई बात को अपने जीवनों में लागु करेंगे तो हमारे आस-पास के लोग भी यह कहने लगेंगे कि अमुक व्यक्ति के "यहाँ कार्य करने के कारण हमारा दफ्तर बेहतर स्थान है"; या, "हमारा पड़ौस एक बेहतर पड़ौस है"; या, "हमारा विद्यालय एक बेहतर विद्यालय है।"

   हम अकेले तो संसार को नहीं बदल सकते, लेकिन जो प्रभाव और परिवर्तन परमेश्वर ने प्रभु यीशु द्वारा हमारे जीवनों में किया है, उसे अपने व्यावाहरिक जीवनों में लागू करके परमेश्वर के अनुग्रह से अपने आस-पास के स्थान को बेहतर अवश्य कर सकते हैं। - जो स्टोवैल


संसार को बेहतर करने का मार्ग सबके लिए उपलब्ध है - प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवनों से प्रदर्शित करें।

पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर की प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है। हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:9-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-19
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन। 
1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। 
1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो। 
1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। 
1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए। 
1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे। 
1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते? 
1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना? 
1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16


शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

प्रदर्शन


   दो दशकों से वैज्ञानिक माईक हैण्ड्स मध्य अमेरिका के किसानों को किसानी करने के बेहतर तरीकों और अच्छी फसल प्राप्त करने के उपायों को सिखा रहे हैं। लेकिन उन किसानों द्वारा पारंपरिक तरीकों को त्यागकर नए तरीकों को अपनाना कठिन होता है, यद्यपि वे किसान यह समझते हैं कि उनके पारंपरिक तरीके मिट्टी को कम उपजाऊ और वायु को दूषित कर देने वाले हैं। इसलिए माईक उन्हें केवल करने के लिए कहते ही नहीं हैं, परन्तु अपनी कही बात को उनके सामने एक वृतचित्र द्वारा प्रदर्षित भी करते हैं। माईक का कहना है कि सुधारने के लिए केवल प्रचार करने या उसका वर्णन कर देने के द्वारा ही काम नहीं चलता है, उस बात को लोगों के सामने प्रदर्षित भी करना होता है, लोगों को उसे अपने हाथों द्वारा देखना और अनुभव भी करना होता है।

   प्रेरित पौलुस ने भी प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा समस्त संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के सन्देश के प्रसार के लिए यही विधि अपनाई थी। पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को लिखा: "और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं; परन्तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था। इसलिये कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो" (1 कुरिन्थियों 2:4-5)। और आगे चलकर पौलुस ने फिर लिखा, "क्योंकि परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं, परन्तु सामर्थ में है" (1 कुरिन्थियों 4:20)।

   परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए कि वह प्रतिदिन आपके शब्दों को आपके जीवन में प्रदर्शित करवा कर उन्हें आपके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए सार्थक एवं प्रभावी बना दे। जब हम संसार के सामने परमेश्वर को हम में होकर कार्य करता हुआ दिखाने के लिए तैयार होते हैं, तो यह उसके अनुग्रह और सामर्थ का अभूतपूर्व प्रदर्शन तथा बहुत प्रभावी गवाही होता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


सार्थक होने के लिए हमारे शब्दों को उनके अनुरूप हमारी क्रियाओं का समर्थन अनिवार्य है।

क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे। - 1 थिस्सलुनीकियों 1:5

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 2:1-5
1 Corinthians 2:1 और हे भाइयों, जब मैं परमेश्वर का भेद सुनाता हुआ तुम्हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया। 
1 Corinthians 2:2 क्योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह, वरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूं। 
1 Corinthians 2:3 और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा। 
1 Corinthians 2:4 और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं; परन्तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था। 
1 Corinthians 2:5 इसलिये कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14
  • मत्ती 26:51-75