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शुक्रवार, 26 जुलाई 2024

Growth through God’s Word / परमेश्वर के वचन से बढ़ोतरी – 142

 

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आरम्भिक बातें – 103


परमेश्वर की क्षमा और न्याय – 9


क्षमा किए और भुलाए गए पापों का स्मरण – 1

 

इब्रानियों 6:1-2 में दी गई छठी आरम्भिक बात, “अन्तिम न्याय” के बारे में सीखने और समझने में, हमने पिछले लेख में देखा है कि प्रभु परमेश्वर के लिए क्यों यह अनिवार्य है कि प्रत्येक विश्वासी के बारे में हर बात को प्रकट कर दे, और फिर उसका खरा और सच्चा न्याय किया जाए, जिस से किसी के भी मन में कोई भी शंका न रहे, और किसी के भी पास परमेश्वर के धार्मिकता से न्याय करने पर कोई भी प्रश्न उठाने का कोई अवसर नहीं रहे। हमने पिछले लेख को इस बात के समाप्त किया था कि हमें अभी भी यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि किस तरह से हर बात, विश्वासी के, परमेश्वर द्वारा क्षमा किए और भुलाए गए पाप भी, प्रकट किए जाएँगे। परमेश्वर का वचन  बाइबल यह स्पष्ट कर देता है कि परमेश्वर ने विश्वासियों द्वारा की और कही जाने वाली हर बात का लेखा रखने का इंतज़ाम किया हुआ है। हम बाइबल से कुछ सम्बन्धित पदों को देखते हैं:

·        भजन 56:8 “तू मेरे मारे-मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?” परमेश्वर हमारे कहीं भी जाने का और हमारी भावनाओं का लेखा अपनी पुस्तक में रखता है।

·        भजन 139:2-4 “तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।” हमारे बारे में ऐसा कुछ भी नहीं है परमेश्वर जिसे नहीं जानता है। वह हमारे विचारों को जानता है, और हमारे मुँह की बात को भी जानता है, अर्थात हर वह बात जो हमने चाहे कही हो या न कही हो।

·        मलाकी 3:16 “तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धर कर उनकी सुनता था; और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके सामने एक पुस्तक लिखी जाती थी।” न केवल परमेश्वर ध्यान से उस सभी को सुनता है जो उसके लोग कहते हैं, वरन उस सब का लेखा भी रखा जाता है, ताकि उसे स्मरण के लिए प्रकट किया जाए।

·        मत्ती 12:36 “और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।” प्रभु यीशु मसीह ने सचेत किया कि हर एक बात का, विशेषकर निकम्मी बातों का प्रभु के सामने हिसाब देना ही होगा।

·        इब्रानियों 4:13 “और सृष्टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के सामने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।” परमेश्वर के सामने हर किसी की हर बात खुली और बेपरदा है; कुछ भी, किसी भी रीति से छिपा नहीं है; और कोई भी परमेश्वर को अपना हिसाब देने से बच नहीं सकता है।

·        प्रकाशितवाक्य 20:12-15 “फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया। और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उस में थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उन में थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया। और मृत्यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए; यह आग की झील तो दूसरी मृत्यु है। और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।”

परमेश्वर के वचन के ये पद हमारे सामने यह स्पष्ट कर देते हैं कि न केवल हर किसी के बारे में हर बात, परन्तु, जैसे दाऊद ने सुलैमान को सचेत किया था, परमेश्वर हमारे विचारों के पीछे की मनसा को भी जानता है “और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है...” (1 इतिहास 28:9)। और परमेश्वर ने यह इंतज़ाम किया है कि स्वर्ग में रखी गई पुस्तकों में, जहाँ पर कभी उनके साथ कोई भी छेड़-छाड़, उनमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है, हर किसी के बारे में प्रत्येक बात लिखी जाए। मलाकी इसे “स्मरण के निमित्त पुस्तक” कहता है, और यही यह स्पष्ट कर देता है कि इस पुस्तक को बातों को स्मरण दिलाने के लिए लिखा जा रहा है। यह कहीं नहीं कहा गया, या संकेत दिया गया है कि इस पुस्तक में से कोई भी बात कभी भी मिटाई गई, हटाई गई, या बदली गई। परमेश्वर ने भुला दिया, किन्तु जिन पुस्तकों को स्मरण के निमित्त उपयोग किया जाएगा, उन में से कभी कुछ नहीं हटाया या मिटाया या बदला गया।

जैसा हम प्रकाशितवाक्य 20:12-15 में देखते हैं, दो प्रकार की पुस्तकें हैं, एक है जीवन की पुस्तक, और दूसरी वे पुस्तकें हैं जिनमें हर किसी की हर बात लिखी जा रही है। जैसा हम पिछले लेखों में बारम्बार कहते आ रहे हैं, जिनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे नहीं मिले – जो यहाँ व्यक्ति के जीवन काल में पृथ्वी पर किया जाने वाला निर्णय है, उसे सीधे आग की झील में डाल दिया गया; उनके बारे में और कुछ देखने और जाँचने की कोई आवश्यकता ही नहीं है, उनके लिए तो जो सर्वाधिक संभव दण्ड है, वही तय हो रखा है। लेकिन जिनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे हैं, “उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया।”

अब हमारे सामने परमेश्वर के वचन से प्रकट है कि किस तरह से हर किसी की हर एक बात लिखी जा रही है, और अन्तिम न्याय के समय यह सब कुछ स्मरण के लिए बाहर लाया जाएगा, और हर किसी को हर एक बात – उसके घूमने-फिरने-भटकने, भावनाओं, कार्यों, कहे अथवा अनकहे शब्दों, विचारों, आदि, हर किसी बात का हिसाब देगा। क्योंकि चाहे परमेश्वर ने भुला दिया हो, लेकिन स्वर्ग में हर एक बात का लेखा लिखा गया है, जो वहीं विद्यमान है, उस लेख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए जो इस बात को लेकर सन्देह कर रहे थे कि क्षमा किए और भुलाए गए पाप किस तरह से फिर से प्रकट होंगे, अब उनके सामने उत्तर है – परमेश्वर इसके बारे में पहले से ही योजना बनाकर, आवश्यक इंतज़ाम कर चुका है। अगले लेख में हम यहीं से आगे बढ़ेंगे।

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

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English Translation


The Elementary Principles – 103


God’s Forgiveness and Justice – 9


Remembrance of Sin Forgiven and Forgotten - 1

   

While learning and understanding about “Eternal Judgment,” the sixth elementary principle given in Hebrews 6:1-2, in the last article we have seen why it is necessary for the Lord God to bring everything about every Believer out into the open, and then judge everyone fairly, leaving no doubt in anyone’s hearts, and giving no possibility to anyone of ever questioning the righteous judgment of God, on any grounds. We had closed the last article on the point that we still need to explain how everything, even the sins God has forgiven and forgotten of every Born-Again Christian Believer will be brought out. God’s Word the Bible makes it clear that God has arranged to keep a record of everything that the Believers say and do. Let us look at some relevant verses from the Bible:

·        Psalm 56:8 “You number my wanderings; Put my tears into Your bottle; Are they not in Your book?” God keeps a track and records wherever we go, and of all our feelings in His book.

·        Psalm 139:2-4 “You know my sitting down and my rising up; You understand my thought afar off. You comprehend my path and my lying down, And are acquainted with all my ways. For there is not a word on my tongue, But behold, O Lord, You know it altogether.” There is nothing about us that God does not know. He knows out thoughts, and even knows the words on our tongues, implying He knows what we will speak, even before we have spoken it.

·        Malachi 3:16 “Then those who feared the Lord spoke to one another, And the Lord listened and heard them; So a book of remembrance was written before Him For those who fear the Lord And who meditate on His name.” Not only does God carefully hears what His people are talking about, but also everything is being recorded, for being brought out for remembrance.

·        Matthew 12:36 “But I say to you that for every idle word men may speak, they will give account of it in the day of judgment.” The Lord Jesus cautioned that every word, especially the idle words, will have to be accounted for before the Lord.

·        Hebrews 4:13 “And there is no creature hidden from His sight, but all things are naked and open to the eyes of Him to whom we must give account.” Everything about everyone is open and bare before God, there is nothing hidden in any manner; and no one can escape giving an account to God.

·        Revelation 20:12-15 “And I saw the dead, small and great, standing before God, and books were opened. And another book was opened, which is the Book of Life. And the dead were judged according to their works, by the things which were written in the books. The sea gave up the dead who were in it, and Death and Hades delivered up the dead who were in them. And they were judged, each one according to his works. Then Death and Hades were cast into the lake of fire. This is the second death. And anyone not found written in the Book of Life was cast into the lake of fire.”

These verses from God’s Word the Bible make it clear to us that not only everything about everyone, and as David had cautioned Solomon, even the intents of the thoughts in our heart “As for you, my son Solomon, know the God of your father, and serve Him with a loyal heart and with a willing mind; for the Lord searches all hearts and understands all the intent of the thoughts…” (1 Chronicles 28:9), are known to God. God has arranged for each and everything about everyone be recorded in the books kept in heaven, where they can never be altered or tampered with. Malachi calls them a “book of remembrance” and that by itself implies that the book will be used for remembrance. Nowhere is it written or implied that anything is ever erased, or altered from these books. God forgot, but nothing is ever erased, aur taken away, or altered from the books, which will be used for remembrance.

As we see from Revelation 20:12-15, there are two kinds of books, one is the Book of Life, and the others are the books in which records about everyone are kept, i.e., the book of remembrance. As we have been repeatedly saying in the past articles, those whose names are not written in the Book of Life – which is a decision made here on earth while a person is alive, are straightaway cast into the lake of fire; there is no sense in evaluating anything else about them, they go for the maximal punishment. But those whose names are in the written in the Book of Life, “they were judged, each one according to his works.

Here we have it from God’s Word, how things are being recorded, how these records will be utilized to bring to remembrance at the time of the final judgment, and no one will escape giving an account of everything – wanderings, emotions, deeds, spoken or unspoken words, thoughts, etc. because though God has forgotten, the record in heaven has still been maintained, it is not being modified in any way. So, those who have been skeptical about how sins forgiven and forgotten can be brought up again, now have an answer – God has already thought of it all, and has made the necessary provision for it. We will carry on from here in the next article.

If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

 

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गुरुवार, 4 जून 2020

देख



     पहली बार जब मैं इस्तांबुल में स्थित यूनानी साम्राज्य के समय में बने अत्याधिक सुन्दर चोरा चर्च को देखने गई, तो मैं उसकी छत पर बने भीति-चित्रों और पच्चीकारी में से कुछ बाइबल की कहानियों को पहचान सकी। परन्तु फिर भी बहुत कुछ था जिसे मैं पहचान या समझ नहीं सकी। लेकिन जब मैं दूसरी बार गई तो मेरे साथ एक गाइड भी था। उस गाइड ने मुझे उन सब बातों और संकेतों को दिखाया जिन पर मैं पहली बार ध्यान नहीं देने पाई थी, और उन सब की सहायता से अब सब कुछ समझ में आ रहा था। उदाहरण के लिए, पहला गलियारा लूका रचित सुसमाचार के अनुसार व्यक्त यीशु के जीवन को दर्शाता था।

     कभी-कभी जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ते हैं, तो हम कुछ साधारण बातों को तो समझने पाते हैं, परन्तु वे परस्पर सामंजस्य की बातें, जो पवित्र शास्त्र के एक भाग को दूसरे से जोड़ती हैं, क्या उन्हें देखने, उपयोग करने और उन के अनुसार बाइबल की बातों को समझने पाते हैं? हमारी सहायता के लिए हमारे पास बाइबल की व्याख्याएँ और अन्य अध्ययन में सहायक सामग्री भी है, परन्तु हमें भी एक गाइड की आवश्यकता होती है जो हमारी सहायता और मार्गदर्शन करे, हमारे आँखों को परमेश्वर के वचन में लिखी बातों को देख पाने के लिए सक्षम करे। हमारा यह सहायक, स्वयं परमेश्वर का पवित्र आत्मा है, जो हमें सब कुछ सिखाता है (यूहन्ना 14:26)। पौलुस ने लिखा कि वह “...आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं” (1 कुरिन्थियों 2:13)।

     यह कितनी अद्भुत बात है कि पुस्तक का लेखक स्वयं ही, हमें उस पुस्तक की अद्भुत बातें दिखाता और सिखाता है। न केवल परमेश्वर ने हमें अपना लिखित वचन और प्रकाशन दिया है, परन्तु वह हमें उसे समझाता भी है। इस लिए हम भजनकार के साथ मिल कर कहें, “मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं” (भजन 119:18)। - कीला ओकोआ

पवित्र शास्त्र को समझने के लिए हमें परमेश्वर की सहायता चाहिए होती है।

मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बड़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता। - यिर्मयाह 33:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:23-31
यूहन्ना 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
यूहन्ना 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।
यूहन्ना 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
यूहन्ना 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
यूहन्ना 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
यूहन्ना 14:28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
यूहन्ना 14:29 और मैं ने अब इस के होने से पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
यूहन्ना 14:30 मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
यूहन्ना 14:31 परन्तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।   

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14



गुरुवार, 6 जून 2019

परिवर्तन



      लंबे समय तक हारवर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रहे डॉ. चार्ल्स डब्ल्यू इलियट का मानना था कि साधारण लोग यदि सँसार के साहित्य से प्रतिदिन कुछ मिनिट तक भी कुछ पढ़ लेंगे तो वे मूल्यवान ज्ञान प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने 1910  में इतिहास, विज्ञान, दर्शन-शास्त्र, और कला के क्षेत्रों की साहित्यिक पुस्तकों से भाग चुनकर संकलित किए जिन्हें ‘द हारवर्ड क्लासिक्स’ नामक 50 पुस्तकों के संग्रह में प्रकाशित किया गया। प्रत्येक पुस्तक के साथ डॉ. इलियट द्वारा लिखित, पढ़ने की मार्गदर्शिका “Fifteen Minutes a Day” (प्रतिदिन पन्द्रह मिनिट) भी दी गई है, जिसमें वर्ष के प्रतिदिन के लिए पढ़ने के लिए 8-10 पृष्ठ सुझाए गए हैं।

      कैसा रहे यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने के लिए पन्द्रह मिनिट लगाएँ? हम भजनकार के साथ कह सकते हैं, “मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला” (भजन 119:36-37)।

      पन्द्रह मिनिट प्रतिदिन का योग वर्ष के इक्यानवे घंटे बनता है। किन्तु हम जितना भी समय निर्धारित करें, उसे दृढ़ता से निभाना ही सफलता की कुंजी है। मुख्य आवश्यकता सिद्ध होने की नहीं, वरन डटे रहकर करते रहने की है। यदि हम से कभी कोई दिन या सप्ताह छुट भी जाए तो भी अध्ययन को पुनः आरंभ करने से न चूकें। जब पवित्र आत्मा हमें सिखाएगा, तो परमेश्वर का वचन हमारे मास्तिष्क से हमारे हृदय में आ जाएगा, और फिर हमारे हाथों और पैरों को  संचालित करके, हमें ज्ञानवर्धन से जीवन परिवर्तन में ले जाएगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


बाइबल ही एकमात्र पुस्तक है जिसे जब विश्वास के साथ पढ़ा जाता है तो, 
उसे सिखाने-समझाने के लिए उसका लेखक स्वयँ उपस्थित रहता है।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16



गुरुवार, 30 नवंबर 2017

सूची


   मैं परदेश से वापस घर आने के लिए हवाई-अड्डे पर पहुँचा और विमान-सेवा वालों को अपना पासपोर्ट जाँच के लिए पकड़ाया; उन्होंने अपनी सूची में देखा तो मेरा नाम उस सूची में नहीं था। कारण था कि उपलब्ध सीटों से अधिक का आरक्षण हो रखा था, और मैंने समय से अपने यात्रा करने की पुष्टि नहीं की थी; इसलिए उस विमान से यात्रा करने वालों की अन्तिम सूची में मेरा नाम नहीं था। मेरी उस दिन घर पहुँचने की आशा धाराशाई हो गई।

   इस घटना से मुझे एक और सूची का स्मरण हो आया - जीवन की पुस्तक में लिखे नामों की सूची। परमेश्वर के वचन बाइबल में, लूका 10 अध्याय में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सुसमाचार प्रचार के कार्य के लिए भेजा। जब वे लौट कर आए तो बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्होंने प्रभु को अपनी सफलताओं के बारे में बताया। परन्तु प्रभु यीशु ने उनसे कहा, "तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं" (पद 20)। अर्थात, हमारे आनन्द का विषय हमारी सफलताएं नहीं, वरन हमारा नाम का परमेश्वर की पुस्तक में लिखा हुआ होना चाहिए।

   परन्तु हम निश्चित कैसे हो सकते हैं कि हमारे नाम परमेश्वर की जीवन की पुस्तक में लिखे हुए हैं? बाइबल हमें उत्तर देती है: "कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा" (रोमियों 10:9)।

   बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य 21 में यूहन्ना ने उस पवित्र नगर का स्तब्ध कर देने वाला विवरण लिखा है, जिसे परमेश्वर ने मसीह यीशु पर विश्वास करने वालों के लिए बनाया है। विवरण देने के पश्चात यूहन्ना लिखता है: "और उस में कोई अपवित्र वस्तु था घृणित काम करने वाला, या झूठ का गढ़ने वाला, किसी रीति से प्रवेश न करेगा; पर केवल वे लोग जिन के नाम मेम्ने के जीवन की पुस्‍तक में लिखे हैं" (प्रकाशितवाक्य 21:27)।

   जीवन की पुस्तक, स्वर्ग में जाने वालों के नामों की परमेश्वर की सूची है। क्या आपका नाम परमेश्वर की इस सूची में है? यदि नहीं तो आज, समय रहते सुनिश्चित कर लीजिए, कहीं ऐन मौके पर बाहर न रह जाएं; क्योंकि फ़िर वहाँ और उसके बाद कोई अवसर नहीं होगा। - लॉरेंस दरमानी


जो प्रभु यीशु के लिए अपने हृदय खोल देते हैं, 
परमेश्वर उनके लिए स्वर्ग के द्वार खोल देता है।

जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए? तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ। - मत्ती 7:21-23

बाइबल पाठ: लूका 10:17-24
Luke 10:17 वे सत्तर आनन्द से फिर आकर कहने लगे, हे प्रभु, तेरे नाम से दुष्टात्मा भी हमारे वश में हैं। 
Luke 10:18 उसने उन से कहा; मैं शैतान को बिजली के समान स्वर्ग से गिरा हुआ देख रहा था। 
Luke 10:19 देखो, मैने तुम्हे सांपों और बिच्छुओं को रौंदने का, और शत्रु की सारी सामर्थ्य पर अधिकार दिया है; और किसी वस्तु से तुम्हें कुछ हानि न होगी। 
Luke 10:20 तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं।
Luke 10:21 उसी घड़ी वह पवित्र आत्मा में हो कर आनन्द से भर गया, और कहा; हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया: हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा। 
Luke 10:22 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंप दिया है और कोई नहीं जानता कि पुत्र कौन है केवल पिता और पिता कौन है यह भी कोई नहीं जानता, केवल पुत्र के और वह जिस पर पुत्र उसे प्रकट करना चाहे। 
Luke 10:23 और चेलों की ओर फिरकर अकेले में कहा, धन्य हैं वे आंखे, जो ये बातें जो तुम देखते हो देखती हैं। 
Luke 10:24 क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं और राजाओं ने चाहा, कि जो बातें तुम देखते हो देखें; पर न देखीं और जो बातें तुम सुनते हो सुनें, पर न सुनीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39
  • 2 पतरस 2


बुधवार, 26 अप्रैल 2017

पुस्तक


   सारे संसार भर में लाखों लोगों ने "Gone With the Wind" फिल्म को देखा है। इस फिल्म का पहला प्रदर्शन अमेरिका में 15 दिसंबर 1939 को हुआ था। इस फिल्म ने 10 एकैडमी पुरुस्कार जीते थे, और यह अब तक की हॉलीवुड की आर्थिक रीति से सबसे सफल फिल्मों में से एक है। यह फिल्म 1936 में प्रकाशित मारग्रेट मिचल के इसी नाम उपन्यास पर बनी है; इस उपन्यास की, उसके प्रकाशन के छः माह में ही 10लाख प्रतियाँ बिक गई थीं, उसे लेखन के लिए पुलिट्ज़र पुरुस्कार भी मिला और इस उपन्यास का 40 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। एक महान फिल्म अकसर एक महान और समय के प्रभाव से रहित कहानी पर ही बन सकती है।

   मसीही विश्वास का आधार भी एक सत्य, अटल और शाश्वत पुस्तक है - परमेश्वर का वचन बाइबल, जो 66 भिन्न पुस्तकों, पत्रियों, ऐतिहासिक वर्णनों, कविताओं, भविष्यवाणियों और शिक्षा के सदवचनों का संकलन है। इस संकलन की प्रथम पुस्तक, उत्पत्ति से लेकर उसकी अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य तक, बाइबल में परमेश्वर ने अपनी सृष्टि तथा अपने लोगों के लिए अपनी योजना को प्रगट किया है। इस पुस्तक में भजन संहिता का एक भजन - भजन 119, परमेश्वर के वचन की हमारे जीवनों में सामर्थ्य तथा अवश्यकता का वर्णन है। इस भजन में भजनकार परमेश्वर के वचन से मिलने वाले अनेकों लाभों को लिखता है, जैसे कि, यह वचन हमारे पथ के लिए उजियाला है (पद 105), हमारी आत्मा को तरोताज़ा करता है (पद 107), हमारे कदमों की रक्षा करता है (पद 110)। परमेश्वर की प्रेरर्णा से लिखे गए इस पवित्रशास्त्र से हम बुध्दि, मार्गदर्शन, जीवन और आनन्द पाते हैं (पद 111)।

   हमारा तथा सारे जगत का उध्दारकर्ता प्रभु यीशु हमारा आहवान करता है कि हम अपने जीवन उसके वचन पर बनाएं, और उसे जानने के आनन्द को उन लोगों के साथ बाँटें जो परमेश्वर के साथ सच्चे आनन्द का जीवन बिताने की खोज में हैं। बाइबल अनुपम तथा अद्भुत पुस्तक है, उसका नायक तथा विषय-वस्तु, प्रभु यीशु मसीह, अनुपम तथा अद्भुत उध्दारकर्ता है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


परमेश्वर के शाश्वत सत्य वचन बाइबल पर आज भी भरोसा किया जा सकता है।

इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी। परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया। - मत्ती 7:24-27

बाइबल पाठ: भजन 119:105-112
Psalms 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। 
Psalms 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा। 
Psalms 119:107 मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं; हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला। 
Psalms 119:108 हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा। 
Psalms 119:109 मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया। 
Psalms 119:110 दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका। 
Psalms 119:111 मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं। 
Psalms 119:112 मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27


शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

पाठ्यपुस्तक


   द न्यू इंगलैंड प्राइमर नामक आरंभिक पाठ्यपुस्तिका सर्वप्रथम सन 1600 के अन्त के समय में प्रकाशित हुई थी। उन सभी उपनिवेशों में, जो बाद में संगठित होकर ’संयुकत राज्य अमेरिका’ बने यह पुस्तक आरंभिक पढ़ना-लिखना सीखने के लिए बहुतायत से उपयोग होने वाला स्त्रोत बनी। यह प्राचीन अमेरिकी पाठ्यपुस्तक मुख्यतः परमेश्वर के वचन बाइबल पर आधारित थी, और इसमें बाइबल की घटनाओं को आधार बना कर चित्र और बच्चों की कविताएं थीं जिनके द्वारा बच्चे पढ़ना-लिखना सीखते थे। इसमें स्मरण करने के लिए प्रार्थनाएं भी थीं, जैसे कि वर्तमान में भी बच्चों को बहुधा सिखाई जाने वाली यह प्रार्थना: "सोने अब मैं जाता हूँ, प्रार्थना यह मैं करता हूँ; मेरी आत्मा का रखवाला हो, जो मैं जागूँ तो, मेरी आत्मा स्वीकार करना तू।"

   उपनिवेशिक अमेरिका में एक से दूसरी पीढ़ी को अपने मसीही विश्वास की बातें पहुँचाने का यह एक कारगर तरीका बन गया। यह उस बात के साथ बहुत मेल खाता है जो परमेश्वर अपनी प्रजा प्राचीन इस्त्राएलियों से चाहता था, जैसा कि व्यवस्थाविवरण 6:6-7 में लिखा है: "और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।"

   जब हम अपनी अगली पीढ़ी से परमेश्वर की हस्ती, अस्तित्व और कार्यों के बारे में बातचीत करते हैं, उन्हें हमारे प्रति उसके प्रेम, देखभाल, प्रावधान और चिंता के बारे में बताते हैं और उन्हें उस आज्ञाकारिता तथा समर्पण को समझाते हैं जो वह हम से चाहता है, तो हम अपनी अगली पीढ़ी के लिए वह आरंभिक पाठ्यपुस्तक बन जाते हैं जिसके द्वारा वह पीढ़ी परमेश्वर के साथ चलने और उसके कार्यों को करने के लिए तैयार होती है। परमेश्वर हमें औरों को सिखाने के लिए इस्तेमाल करता है। - डेनिस फिशर


हम जब औरों को मसीह यीशु के बारे में सिखाते हैं तो 
हम केवल समय व्यतीत नहीं करते हैं, हम समय का निवेश करते हैं।

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। - यहोशु 1:8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; 
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। 
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ। 
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है; 
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। 
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; 
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। 
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें। 
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • दान्नियेल 11-12
  • यहूदा


शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

ध्येय


   आज के इलैक्ट्रौनिक उपकरणों और अन्य ध्यान बंटाने वाली वस्तुओं के आने से पहले, मेरे लड़कपन के ग्रीष्मावकाश के लंबे दिन प्रति सप्ताह आने वाले चलते-फिरते पुस्तकालय के आगमन से आनन्दमय हो जाते थे। वह पुस्तकालय एक बस थी जिसमें अन्दर बैठने के स्थान की बजाए शेल्फ बनी हुईं थी और उन शेल्फों पर पुस्तकें भरी हुई थीं जो कि स्थानीय पुस्तकाअलय से लाई जाती थीं जिससे वे लोग जो पुस्त्कालय तक नहीं जा पाते, पुस्तकें पढ़ सकें। उस चलते-फिरते पुस्त्कालय के कारण मैंने बहुत से दिन ऐसी पुस्तकों को पढ़ते हुए बिताए जो मुझे अन्यथा नहीं मिल पातीं। मैं आज भी उस पुस्त्कालय का धन्यवादी हूँ जिसने मेरे अन्दर पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेरित पौलुस को भी पुस्तकों से प्रेम था, और वह अपने जीवन के अन्त तक उन्हें पढ़ता रहा था। कैदखाने से लिखी अपनी अन्तिम पत्री में, जिसके लिखे जाने के कुछ समय पश्चात उसका अन्त मृत्युदण्ड द्वारा करवा दिया गया था, पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा, "जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया हूं, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष कर के चर्मपत्रों को लेते आना" (2 तिमुथियुस 4:13)। जिन पुस्तकों और चमर्पत्रों का उल्लेख पौलुस यहाँ कर रहा है वे परमेश्वर के वचन के पुराने नियम के खण्ड तथा/या उसकी लिखी हुई रचानाएं थीं।

   पौलुस का पुस्तकों के प्रति यह प्रेम क्या महज़ ज्ञानवर्धन के शौक या मनोरंजन पाने के लिए था? पुस्तकों के अलावा पौलुस का एक प्रेम और भी था, जो पुस्तकों के प्रति उसके प्रेम का आधार था - अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को और अधिक गहराई एवं निकटता से जानते रहने का प्रेम। पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों के नाम अपनी पत्री में उन्हें इस संबंध में लिखा कि उसके जीवन का ध्येय था, "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)।

   मेरी प्रार्थना है कि जैसा पौलुस का ध्येय प्रभु यीशु को लगातार और भी अधिक निकटता तथा गहराई से जानते रहने का था, वैसे ही हमारे जीवनों का भी यही ध्येय हो और हम प्रभु यीशु की निकटता में बढ़ते चले जाएं। - बिल क्राउडर


सभी ज्ञान से उत्तम ज्ञान है प्रभु यीशु मसीह की पहचान में बढ़ते जाना।

परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:2-3

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 4-6


शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

सुरक्षा का बाड़ा

अमेरिका का Yellowstone National Park बहुत सुन्दर पर्यटक स्थल है जो अद्भुत और मनमोहक प्राकृतिक विशेषताओं से भरा है। उसमें विचरण करते और उसकी प्राकृतिक विविधताओं का आनन्द लेते समय पर्यटक भूल जाते हैं कि वे संसार के सबसे बड़े और सक्रीय ज्वालामुखीयों में से एक पर चल फिर रहे हैं, और विनाशकारी खतरे के कितना समीप हैं।

जब मैं बाइबल में अय्युब की पुस्तक पढ़ता हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं Yellowstone में चल फिर रही हूँ - ऐसे दिन में जिसमें ज्वालामुखी फट कर पृथ्वी की सतह की कमज़ोर पपड़ी को फाड़ डालता है और विनाश मुँह बाए खड़ा होता है।

जैसे पर्यटक Yellowstone का आनन्द लेते हैं, अय्युब भी जीवन का आनन्द ले रहा था, इस बात से अनभिज्ञ कि विनाश और उसके बीच केवल एक बाड़ है (अय्युब १:९, १०)। जब परमेश्वर ने शैतान को अनुमति दी कि वह बाड़ तोड़ कर अय्युब की परीक्षा कर सके, तब अय्युब के जीवन में तबाही आ गयी (अय्युब १:१३, १९)।

बहुत से विश्वासी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं जहाँ लगता है कि किसी कारणवश परमेश्वर ने अपनी सुरक्षा का बाड़ा उन पर से हटा लिया है। फिर कुछ ऐसे भी हैं जो अपने क्षण्भंगुर जीवन के खतरों से कतई अनभिज्ञ होकर बिल्कुल निशचिंत जीवन बिताते हैं। अय्युब के मित्रों के समान, शायद वे भी सोचते हैं कि उनके साथ कुछ बुरा नहीं होगा जब तक वे कुछ ऐसा न करें जिसका प्रतिफल बुरा हो। लेकिन जैसे हम अय्युब के जीवन से सीखते हैं, कभी कभी परमेश्वर भले लोगों को भी परीक्षाओं से होकर निकलने देता है, जिससे उनके चरित्र में और निखार आये और उनके जीवन की व्यर्थ बातें छांटी जा सकें ताकि वे परमेश्वर के लिये और अधिक फलवन्त हो सकें। यह प्रक्रिया दुखद तो होती है, किंतु इसका दीर्घकालीन परिणाम परमेश्वर की उत्तम आशीशों से परिपूर्ण जीवन होता है।

यद्यपि विनाश किसी भी क्षण आ सकता है, किंतु जो मसीह यीशु पर विश्वास रखते हैं, उन्हें कुछ भी नाश नहीं कर सकता (२ कुरिन्थियों ४:९); परमेश्वर के प्रेम से उन्हें कोई संकट या विनाश पृथक नहीं कर सकता (रोमियों ८:३५-३९)। उसकी यह सुरक्षा उसपर विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिये सदैव उपलब्ध है।

क्या आपने अविनाशी परमेश्वर, प्रभु यीशु, को अपनी सुरक्षा का बाड़ा बना लिया है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


सब कुछ नष्ट हो जाने के बाद भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

...हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। - २ कुरिन्थियों १:९


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:८-१० ; रोमियों ८:३५-३९

हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
बरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।


कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाई गिने गए हैं।
परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं।
क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ५१, ५२
  • इब्रानियों ९