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बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आत्मविशलेष्ण

प्रसिद्ध पाश्चात्य संगीत शास्त्री बीथोवेन के घर की देखरेख करने वाला, कुछ पर्यटकों को बीथोवन का घर घुमा रहा था। जब वे एक पुराने और आलीशान प्यानो के पास आए, तो बड़े आदर से उस प्यानो का ढक्कन उठाते हुए कहा, "यही वह प्यानो है जिस पर बैठ कर बीथोवन अपने संगीत की रचना करते थे।" तभी उन पर्यटकों में से एक युवती आगे बढ़ी और प्यानो के आगे बैठ गई तथा बीथोवन द्वारा रचित एक छोटी धुन उस प्यानो पर बजाने लगी। धुन समाप्त करके वह बड़े गर्व से उस ठगे से खड़े और विस्मित देखरेख करने वाले की ओर मुड़ी और बोली, "यहां आने वाले लोगों में से बहुतेरे ऐसे ही बीथोवन के प्यानों को बजाना चाहते होंगे, हैं ना?" उस देखरेख करने वाले ने बड़े सहज भाव से उत्तर दिया, "मैडम, पिछले ग्रीष्म ‌‍ॠतु में विश्व प्रसिद्ध प्यानो वादक श्रीमान पाद्रेवस्की यहां आये थे। उनके कुछ मित्रों ने उनसे इस प्यानो पर कुछ बजाने का निवेदन किया, लेकिन उन्हों ने बड़ी नम्रता से यह कहकर इन्कार कर दिया कि मैं इसके योग्य नहीं हूँ!"

जैसे जैसे हम अपने प्रभु की समानता में बढ़ते जाते हैं, हम उसके समक्ष अपनी औकात के और अपने पापों के प्रति बोझिल भी होते जाते हैं। यह विरोधाभास किसी विकृत आत्मविशलेष्ण का नतीजा नहीं है और न ही यह स्व्यं अपने प्रति किसी हीन भावना का द्योतक है। यह इस बात की सच्ची पहिचान है कि मसीह क्या है और हम क्या हैं और हमारी मसीह की समानता में ढलने की इच्छा कैसी है।

परमेश्वर की पवित्रता की झलक पाने के बाद यशायाह नबी चिल्ला उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ। क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! " (यशायाह ६:५); अपनी तकलीफों और परीक्षाओं के अन्त में परमेश्वर के दर्शन पाने के बाद अय्युब ने विनम्रता सहित स्वीकार किया कि "...मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।" (अय्युब ४२:६); और यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले ने प्रभु यीशु के विष्य में कहा "...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं..."(मत्ती ३:११)।

परमेश्वर के समक्ष अपनी अयोग्यता की स्वस्थ स्वीकृति और पहिचान, हमें प्रभु की योग्यता पर निर्भरता बनाए रखने में सहायक होती है, और यही प्रभु की समानता में ढलते और बढ़ते जाने का राज़ है। - डेनिस डी हॉन


जब लोग सच्चे परमेश्वर की सच्ची पहिचान के साथ उसकी सच्ची उपासना करने लग जाते हैं, तो वे उसकी समानता में भी बढ़ने लग जाते हैं।

...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं... - मत्ती ३:११


बाइबल पाठ: अय्युब ४२:१-६

तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
तू कौन है जो ज्ञान रहित होकर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ७-८
  • मरकुस ४:२१-४१

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

सुरक्षा का बाड़ा

अमेरिका का Yellowstone National Park बहुत सुन्दर पर्यटक स्थल है जो अद्भुत और मनमोहक प्राकृतिक विशेषताओं से भरा है। उसमें विचरण करते और उसकी प्राकृतिक विविधताओं का आनन्द लेते समय पर्यटक भूल जाते हैं कि वे संसार के सबसे बड़े और सक्रीय ज्वालामुखीयों में से एक पर चल फिर रहे हैं, और विनाशकारी खतरे के कितना समीप हैं।

जब मैं बाइबल में अय्युब की पुस्तक पढ़ता हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं Yellowstone में चल फिर रही हूँ - ऐसे दिन में जिसमें ज्वालामुखी फट कर पृथ्वी की सतह की कमज़ोर पपड़ी को फाड़ डालता है और विनाश मुँह बाए खड़ा होता है।

जैसे पर्यटक Yellowstone का आनन्द लेते हैं, अय्युब भी जीवन का आनन्द ले रहा था, इस बात से अनभिज्ञ कि विनाश और उसके बीच केवल एक बाड़ है (अय्युब १:९, १०)। जब परमेश्वर ने शैतान को अनुमति दी कि वह बाड़ तोड़ कर अय्युब की परीक्षा कर सके, तब अय्युब के जीवन में तबाही आ गयी (अय्युब १:१३, १९)।

बहुत से विश्वासी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं जहाँ लगता है कि किसी कारणवश परमेश्वर ने अपनी सुरक्षा का बाड़ा उन पर से हटा लिया है। फिर कुछ ऐसे भी हैं जो अपने क्षण्भंगुर जीवन के खतरों से कतई अनभिज्ञ होकर बिल्कुल निशचिंत जीवन बिताते हैं। अय्युब के मित्रों के समान, शायद वे भी सोचते हैं कि उनके साथ कुछ बुरा नहीं होगा जब तक वे कुछ ऐसा न करें जिसका प्रतिफल बुरा हो। लेकिन जैसे हम अय्युब के जीवन से सीखते हैं, कभी कभी परमेश्वर भले लोगों को भी परीक्षाओं से होकर निकलने देता है, जिससे उनके चरित्र में और निखार आये और उनके जीवन की व्यर्थ बातें छांटी जा सकें ताकि वे परमेश्वर के लिये और अधिक फलवन्त हो सकें। यह प्रक्रिया दुखद तो होती है, किंतु इसका दीर्घकालीन परिणाम परमेश्वर की उत्तम आशीशों से परिपूर्ण जीवन होता है।

यद्यपि विनाश किसी भी क्षण आ सकता है, किंतु जो मसीह यीशु पर विश्वास रखते हैं, उन्हें कुछ भी नाश नहीं कर सकता (२ कुरिन्थियों ४:९); परमेश्वर के प्रेम से उन्हें कोई संकट या विनाश पृथक नहीं कर सकता (रोमियों ८:३५-३९)। उसकी यह सुरक्षा उसपर विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिये सदैव उपलब्ध है।

क्या आपने अविनाशी परमेश्वर, प्रभु यीशु, को अपनी सुरक्षा का बाड़ा बना लिया है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


सब कुछ नष्ट हो जाने के बाद भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

...हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। - २ कुरिन्थियों १:९


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:८-१० ; रोमियों ८:३५-३९

हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
बरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।


कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाई गिने गए हैं।
परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं।
क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ५१, ५२
  • इब्रानियों ९